नहीं रहे मशहूर गीतकार गोपालदास नीरज

 

नईदिल्ली-

राजकपूर के सुप्रसिद्ध फिल्म मेरा नाम जोकर में गीत लिखने वाले हिंदी के प्रख्यात कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज का निधन हो गया है। गोपालदास नीरज वैसे गीतकार थे जो समान रूप से बॉलीवुड फिल्मों में, हिंदी साहित्य में और मंचीय कवि के रूप में प्रसिद्ध रहे। आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं। नीरज का जन्म 4 जनवरी, 1924 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरावली गांव में हुए था। उन्हें 1970, 1971, 1972 में फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले। ‘मेरा नाम जोकर’ के ‘ए भाई! ज़रा देख के चलो’ ने नीरज को कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचाया। राजकपूर ने जब मेरा नाम जोकर के लिए लिखा तो उनकी रचना को राजकपूर ने छोटा कर दिया।

उनके लिखे प्रसिद्ध फिल्मी गीतों में शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब, लिखे जो खत तुझे, ऐ भाई.. जरा देखकर चलो, दिल आज शायर है, खिलते हैं गुल यहां, फूलों के रंग से, रंगीला रे! तेरे रंग में और आदमी हूं- आदमी से प्यार करता हूं शामिल हैं। गोपालदास नीरज लंबे समय से बीमार चल रहे थे. मंगलवार को उन्‍हें सांस लेने में दिक्‍कत हो रही थी. इसके चलते उन्हें आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तबीयत बिगड़ने के बाद गोपाल दास नीरज को दिल्ली के एम्स अस्पताल में लाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

साल 1991 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. इसके बाद उन्हें साल 2007 में पद्मभूषण दिया गया। यूपी सरकार ने यशभारती सम्मान से भी नवाजा. ‘कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे’ जैसे मशहूर गीत लिखने वाले नीरज को उनके बेजोड़ गीतों के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला है।

‘पहचान’ फिल्म के गीत ‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं’ और. उनके एक दर्जन से भी अधिक कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी गीतों के पाठ सुनने के लिए लोग दूर दूर से आते रहे हैं। मंचीय पाठ में उनका जवाब नहीं था। तालकटोरा स्टेडियम में उनके गीतों को सुनने के बाद पूरा स्टेडियम खड़े होकर अभिवादन किया था।

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