साल का पहला सूर्य ग्रहण

साल 2019 के शुरूआत के बाद पहले हफ्ते में ही साल का पहला ग्रहण है। 5 जनवरी की आधी रात से ही ये ग्रहण शुरू होगा जो 6 जनवरी दिन तक रहेगा। ये ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा लिहाजा इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। खासतौर से गर्भवती महिलाओं को किसी तरह की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। ये ग्रहण यूरोप, मध्य एशिया, अफ्रीका, अमेरिका में दिखाई देगा। लिहाजा इसका असर भी वहीं तक सीमित रहेगा।

साल का पहला सूर्य ग्रहण भले ही भारत में नजर नहीं आएगा। मगर देश के प्रमुख ज्योतिषियों का कहना है कि इससे 4 राशियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। यह 4 राशियां हैं सिंह, धनु, तुला और कुंभ। सूर्यग्रहण के बाद इन राशि वालों पर जमकर खुशियों की बरसात होगी। इन राशि वाले लोगों के लिए ये समय बेहद खास होगा। शिक्षा नौकरी और व्यापार के क्षेत्र में किए गए प्रयास सफल होंगे। जीवन में आने वाली सभी प्रकार की विनाशकारी शक्तियों का नाश होगा। इस दिन शनैश्चरी अमावस्या होने की वजह से यह दिन बेहद खास होगा। शनैश्चरी अमावस्या के दिन ग्रहण होने के कारण इस दिन दान, जप, पाठ, मंत्र एवं स्तोत्र पाठ, मंत्र सिद्धि, तीर्थस्नान, ध्यान, हवन आदि का महात्मय और भी बढ़ जाता है।

ग्रहण काल के समय अगर शिव जी का पूजन किया जाए तो जिन पर शनि की साढ़े साती अथवा ढैया चल रही हो उसकी सभी विपत्ति दूर हो जाएंगी। ऐसे जातक जिनकी कुंडली में सूर्य और राहु या सूर्य शनि का संबंध हो तो उन्हें शिव जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इस दिन गन्ने के रस, शहद और केसर मिश्रित दूध से शिव जी का पूजन करें। इस दिन शमी वृक्ष का पूजन भी अवश्य करना चाहिए जिससे सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

आपको बता दें कि इस साल 2019 में तीन सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण पड़ेंगे। सबसे पहला सूर्यग्रहण 5 जनवरी 2019 को होगा। इसके बाद 21 जनवरी को चंद्रग्रहण होगा जो दिन के समय में लगेगा। मगर भारत में यह दोनों ही नजर नहीं आएंगे। अपने देश में सिर्फ यह दो ग्रहण ही दिखाई देंगे। 16 जुलाई को खंडग्रास चंद्रग्रहण होगा। यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र एवं धनु, मकर राशि पर होगा। ग्रहण का स्पर्श रात 01.32 से होगा और मोक्ष रात 04.30 पर होगा। ग्रहण का पर्वकाल 2 घंटा 58 मिनट का रहेगा। 2019 का अंतिम सूर्यग्रहण 26 दिसंबर को होगा। यह खंडग्रास सूर्यग्रहण होगा जो मूल नक्षत्र एवं धनु राशि पर मान्य होगा। यह खंडग्रास सूर्यग्रहण केवल दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में ही दिखाई देगा। जिन क्षेत्रों में ये ग्रहण दिखाई देगा सिर्फ वहीं इससे जुड़े नियम मान्य और प्रभावी होंगे।

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