जानिए विपक्ष के प्रधानमंत्री उम्मीदवार को लेकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने क्या कहा

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नई दिल्ली –

इस बात की चर्चा तो चारों और है की 2019 का चुनाव बीजपी वर्सेस ऑल होने वाला है जिसकी झलक कुछ महीनों पहले कर्नाटक में कर्नीटक के मुख्यमंत्री एच. डी  कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में मिली जहां सभी विपक्षी पार्ट के मुखिया या उनके सद्स्य ने एक होने का संदेश दिया. लेकिन राजनीति के गिलियारो में इस बात की भी चर्चा है और इस बात को राजनीति के जानकार से लेकर देश की सत्ता पर काबिज भाजपा भी इस बात को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधती हुई नजर आती है की आखिर इन पार्टियो में प्रधानमंत्री का उम्मीदवार किस पार्टी से और कौन होगा.

 

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साथ ही इस सवाल का जवाब देश की जनता भी जानना चाहती है क्योकि इस बात की जानकारी सभी को है 2019 में भाजपा के विजयी रथ को रोकने के लिए ये सभी पार्टिया साथ आ रही है लेकिन महागठबंधन के नेतागण इस इस बात को मानने से भी हिचकते रहे है और इस बात का हवाला देते रहे है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए हम साथ आ रहे है. लेकिन इसी बीच एनसीपी प्रमुख ( राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ) के प्रमुख शरद पवार ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में विपक्ष के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार को लेकर इसका उपाय बताया है जिसकी चर्चा मीडिया से लेकर राजनीति के गलियारों में हो रही है. शरद पवार ने 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के प्रधानमंत्री को लेकर इस बात को कहा की 2019 के लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक सीट जीतने वाली पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बन सकता है.

 

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एनसीपी शरद पवार ने इसके अलावा पार्टी के कार्यकरताओँ की बैठक में इस बात को भी कहा की इन लोग ( बीजेपी) को सत्ता से बाहर होने दिजिए. इसके बाद हम लोग एकसाथ बैठेगे. इसके अलावा शरद पवार ने इस बात को कहा की सबसे ज्याद सींट जीतने वाली पार्टी प्रधानमंत्री के पद का दावा कर सकती है. साथ ही राकपा प्रमुख ने इस बात को भी कहा की साल 2004 में भी यूपीए ने एनडीए को सत्ता से बेदखल किया था. इसके अलावा उन्होनं इस बात को भी बताया की वें देश के हर राज्य में जाकर उन दलों को उनके साथ जोड़ने की कोशिस करेंगे जो अभी भाजपा के साथ नहीं है. इसके अलावा शरद पवार ने विपक्ष को मजबूत करने की बात पर भी जोर दिया.

 

 

उन्होने इसके अलावा विभिन्न राज्यों में स्थिति अलग होने की बात कही और हर राज्य से मजबूत लोगों को सात लेन की बात को कार्यक्रम में रखा. इसके साथ ही उनसे जब सवाल किया गया की क्या आप अपने आपको भारत के अगले प्रघानमंत्री के तौर पर देखते है ? तो उन्होंने इस सवाल का जवाब देते हुए इस कहा की वें इसका सपना नहीं देखते है और फिलहाल वे इस बारे में नहीं सोच रहे है. साथ शरद पवार ने खुद को वैचारिक लड़ाई लड़ने वाला बताया . साथ ही उन्होंन अपने आप में इस बदलाव आने की बात को लेकर कहा की उनमें यह बदलाव 2014 के बाद से  आया है.

 

 

साथ ही उन्होने बताया की देश मे जिस तरह की घटनाएं हो रही है उससे भारतीयता को खतरा है. उन्होंने इसके साथ इस बात को भी कहा की उन्हें इससे देश की हिफाजत करनी है. खैर जो भी हो राकपा के प्रमुख ने विपक्ष का प्रधानमंत्री उम्मीदवार को लेकर अपना उपया तो बताया है लेकिन इस उपाय से क्या अन्य विपक्षी पार्टियां सहमत हो पाएंगी और क्या इससे कांग्रेस पार्टी को फायदा हो सकता है. इन सवालों का उत्तर अभी समय के गर्भ में है. वहीं महागठबंधन में प्रधानमंत्री के उम्मीदवार को चुनना अभी भी टेढ़ी खीर के जैसा ही है.

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