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‘हमारे साथ अन्याय मत कीजिए सर…’ JSSC CGL परीक्षा रद होने के बाद एग्जाम पास कर चुके अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा

‘हमारे साथ अन्याय मत कीजिए सर…’ JSSC CGL परीक्षा रद होने के बाद एग्जाम पास कर चुके अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा
  1. JSSC-CGL परीक्षा रद होने से सफल उम्मीदवार नाराज।
  2. रांची के प्रोजेक्ट भवन में न्याय की मांग को लेकर धरना।
  3. अभ्यर्थी जांच के लिए तैयार, लेकिन अन्याय का विरोध।
रांची। राज्य सरकार के JSSC-CGL परीक्षा रद करने के फैसले के बाद, जिन उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई थी और जिन्होंने अपने पदों पर काम भी किया था, वे अपनी नियुक्तियों को लेकर स्पष्टता और न्याय की मांग करते हुए प्रोजेक्ट भवन में धरना दे रहे हैं। JSSC CGL परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार प्रोजेक्ट भवन में इकट्ठा हुए हैं और सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया के सामने कहा कि हम लोग हर तरह के जांच के लिए तैयार हैं। आप जांच कीजिए, जो गलत है, उस पर कार्रवाई कीजिए लेकिन कुछ लोगों के लिए हमारे साथ ऐसा अन्याय मत कीजिए। उसने आगे कहा कि मैं जांच करवाने के लिए तैयार हूं। आप जो बोलिएगा। मैं अपने सारे दस्तावेज लेकर आया हूं… आप CBI जांच कीजिए। आपको जो करना है, वो कीजिए मगर हमारे साथ ऐसा अन्याय मत कीजिए। हम लोग मर जाएंगे। ‘मैं सड़कों पर आ गया’ रांची में प्रोजेक्ट भवन के पास बड़ी संख्या लोग जमा हुए हैं। एक शख्स ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार के फैसले के बाद मैं सड़कों पर आ गया हूं। मैं अपने मम्मी-पापा से कहना चाहता हूं। प्लीज, सब्र रखें। हम फिर जीतेंगे। हम सरकार से भी अपील करेंगे कि प्लीज आपने जो फैसला लिया है, उसे वापस ले लें। सरकार का यह फैसला माननीय कोर्ट के आदेश की भी बेइज्जती है। एक तरह से कह सकते हैं कि आज इंसाफ हार गया है। माननीय कोर्ट की आज हार हुई है। मैं अपने हक के लिए लड़ूंगा। ‘हजारों निर्दोषों को मिली सजा’ प्रदर्शनकारी चंदा कुमारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारी न्यायपालिका और लोकतंत्र इस सिद्धांत पर काम करते हैं कि भले ही 100 दोषी लोग छूट जाएं, लेकिन एक भी निर्दोष व्यक्ति को सजा नहीं मिलनी चाहिए। लेकिन सरकार के इस फैसले से हजारों निर्दोष लोगों को तुरंत सजा मिल गई है। क्या परीक्षा रद करना सिस्टम को बेहतर बनाने का सही तरीका है? क्या इससे असल में दोषी लोगों को न्याय मिल पाएगा? पिछले 24 दिनों से सरकार ने सिर्फ एक पक्ष की बात सुनी है और दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया है। सिर्फ एक पक्ष की बात सुनकर फैसला लेना कहां तक सही है? हमें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया, इसलिए अब हम मीडिया के जरिए अपनी बात रख रहे हैं।  

JSSC CGL के माध्यम से हुई नियुक्ति रद्द करने के फैसले के विरोध में ASO का प्रोजेक्ट भवन के सामने प्रदर्शन

राज्य सरकार के JSSC CGL नियुक्ति रद्द करने के फैसले के बाद नवनियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों (एएसओ) में भारी आक्रोश है. उन्होंने फैसले के खिलाफ प्रोजेक्ट भवन के सामने प्रदर्शन किया और कहा कि वे न्यायालय का दरवाजा खटखटायेंगे. पहले से कार्यरत एएसओ को भी अंदर जाने से रोका प्रोजेक्ट भवन में पहले से कार्यरत एएसओ को भी सुरक्षाकर्मियों ने अंदर जाने से रोक दिया. इसके बाद नेपाल हाउस, एफएफपी बिल्डिंग सहित अन्य स्थानों पर कार्यरत एएसओ भी प्रोजेक्ट भवन के पास जुट गये और फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे. भारी बारिश के बावजूद कर्मचारी शाम तक सचिवालय के मुख्य गेट के सामने डटे रहे. कई कर्मी सड़क पर बैठ गये. उन्होंने कहा कि वे सरकार का फैसला नहीं मानेंगे. इसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटायेंगे. जिनका दोष नहीं उन्हें क्यों सजा आंदोलनकारी कर्मियों का कहना था कि जिन लोगों ने गड़बड़ी की है. उन्हें सजा देने के बजाय मेधावी और कर्मठ विद्यार्थियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है. उनकी नौकरी क्यों ली जा रही है. उन्होंने सवाल किया कि सबकी कुर्बानी क्यों ली जा रही है. नौकरी रद्द नहीं हुई है बनायेंगे अटेंडेंस मौके पर जमे सहायक प्रशाखा पदाधिकारी लगातार कहते रहे हमारी बहाली अभी रद्द नहीं हुई है. इसकी कोई आधिकारिक जानकारी हमलोगों को नहीं मिली है और न ही आदेश जारी हुआ है. ऐसे में हमलोग अभी नौकरी पर हैं, इसलिए हम अटेंडेंस बनायेंगे. वे हाजिरी बनाने के लिए भी प्रोजेक्ट भवन के अंदर जाने का प्रयास करते रहे, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली. दूसरे विभागों में कोई रोक-टोक नहीं वहीं नेपाल हाउस सचिवालय एफएफपी बिल्डिंग और अभियंत्रण भवन में नियुक्त एएसओ को कार्यालय में प्रवेश पर कोई रोक नहीं थी. वे अपने कार्यालय गए और बाद में प्रोजेक्ट भवन पहुंचकर आंदोलन में शामिल हुए. सुरक्षाकर्मियों से हुई नोक-झोंक इस दौरान सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों के साथ सुरक्षाकर्मियों की नोक-झोंक भी हुई. कर्मी अंदर प्रवेश करना चाह रहे थे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोका. इस पर कर्मियों ने कहा कि हमलोग सचिवालय के ही अंग है. हमलोगों के साथ गलत व्यवहार न करें. इसे लेकर कुछ देर के लिए माहौल खराब हो गया. बाद में सुरक्षाकर्मियों ने एनाउंस किया कि आपलोग शांतिपूर्ण काम करें, अन्यथा कार्रवाई की जायेगी. मुख्य गेट को जाम न करें. करे पुलिस-प्रशासन सहायक प्रशाखा पदाधिकारी जन्मजय सिंह ने कहा कि अभी तक हमें कोई नोटिस नहीं मिला है. हमारी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट व हाइकोर्ट के आदेश पर हुई है. अभी हम सचिवालय के अधिकारी हैं. हमें कार्मिक विभाग ने नियुक्त किया था. हम शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं. पुलिस-प्रशासन संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न करे. सचिवालय के सामने लगातार चलेगा धरना इधर, प्रोजेक्ट भवन सचिवालय के सामने आंदोलन कर रहे नव नियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों की ओर से टेंट लगाया जा रहा है. वे यहां लगातार धरना पर बैठेंगे. कर्मियों का कहना है कि धरना लगातार जारी रहेगा. सरकार का फैसला आने के बाद आगे की रणनीति तैयार की जायेगी. धरना की जानकारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गयी है. भीग कर भूखे-प्यासे सड़क पर खड़े रहे सारे कर्मी बारिश में भीग कर सड़क पर खड़े रहे. रेन कोट व छाता लेने के बावजूद कर्मी पूरी तरह भीग गये थे. वे सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे अपनी नौकरी बचाने को लेकर यहां डटे रहे. सरकार से मामले में पुनर्विचार का आग्रह करते रहे.    

आदेश जारी : JSSC CGL और JPSC 11वीं-13वीं सहित 22 परीक्षाएं रद्द, 23 परीक्षाओं की जांच करेगी सीआईडी

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राज्य सरकार ने टीडीपीएल द्वारा आयोजित 22 JSSC -JPSC परीक्षाएं रद्द कर दी हैं. वहीं, 23 परीक्षाओं की जांच अब CID करेगी. इस बड़े फैसले के साथ परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कमेटी भी गठित होगी.   Jharkhand JSSC JPSC Exams Cancelled: राज्य सरकार ने JSSC CGL (10/2023) समेत कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. इनमें JPSC की 21 परीक्षाएं शामिल हैं, जिनमें TDPL की पूर्ण या आंशिक संलिप्तता की बात सामने आई है. रद्द की गई परीक्षाओं में JPSC की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल है. इस परीक्षा में सफल हुए 342 अधिकारी वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं. इसके साथ ही कार्यरत 64 सीडीपीओ और 56 फूड सेफ्टी अफसरों की नौकरी भी अब संकट में है, क्योंकि जेपीएससी की जिन परीक्षाओं से इनकी नियुक्तियां हुई हैं, उन्हें रद्द कर दिया गया है. जेएसएससी सीजीएल से नियुक्त 1975 कर्मियों की नौकरी भी दांव पर है. 23 परीक्षाओं की CID जांच इसके साथ ही 23 परीक्षाओं की जांच सीआइडी से कराने का आदेश भी जारी कर दिया है. एक दिन पहले हुई कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद 18 अगस्त को कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से इस संबंध में देर रात अधिसूचना जारी कर दी गयी. सरकार के समक्ष सीआइडी/एसआइटी की जांच में सामने आये तथ्यों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है.सरकार ने जेपीएससी/ जेएसएससी में अनियमितता एवं कदाचार को लेकर दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आग्रह झारखंड उच्च न्यायालय से करने का निर्णय लिया है. इसके अलावा दोनों आयोगों में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ का भी गठन किया जायेगा. जेपीएससी की ये परीक्षाएं हुईं रद्द
  • विवि में गैर-शैक्षणिक अधिकारियों के पद (09/2025)
  • सहायक निदेशक/वरीय साइंटिफिक अफसर बैकलॉग (10/2025)
  • सहायक निदेशक/वरीय साइंटिफिक अफसर रेगुलर (11/2025)
  • ड्रग इंस्पेक्टर (12/2025)
  • राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बैकलॉग (02/2026)
  • राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में व्याख्याता बैकलॉग (03/2026)
  • राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में व्याख्याता रेगुलर (04/2026)
  • मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर (सुपर स्पेशलिस्ट) (07/2026)
  • सिविल जज जूनियर डिविजन (22/2023)
  • सहायक वन संरक्षक (03/2024)
  • फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (04/2024)
  • एपीपी बैकलॉग (05/2025)
  • एपीपी रेगुलर (06/2025)
  • सिविल सेवा परीक्षा-2025 (रेगुलर) (01/2026)
  • सिविल सेवा परीक्षा बैकलॉग-2025 (05/2026)
  • सिविल सेवा बैकलॉग-2023 (06/2026)
  • फूड सेफ्टी ऑफिसर (18/2023)
  • सीडीपीओ (21/2023)
  • सिविल सेवा परीक्षा-2023 (01/2024)
  • छठी लिमिटेड उपसमाहर्ता परीक्षा (11/2018)
  • झारखंड पात्रता परीक्षा-2024 (08/2015)
  • इन परीक्षाओं की होगी सीआइडी जांच
    • फूड एनालिस्ट (05/2025)
    • उपनिदेशक प्रोसिक्यूशन (03/2025)
    • प्रोजेक्ट मैनेजर (04/2025)
    • फैक्ट्री इंस्पेक्टर (01/2025)
    • बॉयलर इंस्पेक्टर (02/2025)
    • निदेशक (07/2025)
    • पांचवीं सिविल सेवा परीक्षा (06/2013)
    • सिविल जज जूनियर (10/2015)
    • सिविल जज जूनियर विशेष (11/2015)
    • स्वॉयल कंजर्वेटर (12/2015)
    • सहायक निदेशक कृषि (03/2015)
    • सहायक निदेशक कृषि बैकलॉग (04/2015)
    • फूड सेफ्टी ऑफिसर (01/2016)
    • डेंटिस्ट (बेसिक कैडर) (02/2016)
    • सिविल सेवा परीक्षा बैकलॉग (27/2017)
    • कमर्शियल टैक्स (लिमिटेड) परीक्षा (10/2010)
    • सिविल सेवा परीक्षा-2016 (23/2016)
    • जियोलॉजिस्ट व केमिस्ट रेगुलर (01/2017 व 02/2017)
    • एपीपी (03/2018)
    • सिविल जज जूनियर रेगुलर (12/2018)
    • संयुक्त असिस्टेंट इंजीनियर (05/2019)
    • सिविल सर्विस परीक्षा-2021 (01/2021)
    • डेंटल डॉक्टर रेगुलर (01/2022)

माननीय राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री ने महाप्रभु जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर समस्त राज्यवासियों की सुख, शांति, समृद्धि, खुशहाली एवं उन्नति की कामना की

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रांचीः रांची में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की 335वीं ऐतिहासिक रथयात्रा श्रद्धा, परंपरा और सामाजिक समरसता के वातावरण में निकाली गई। जगन्नाथपुर मंदिर से निकली इस यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। जय जगन्नाथ के उद्घोष, शंखनाद और भक्ति गीतों के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विग्रहों को भव्य रथ पर विराजमान कर मौसीबाड़ी के लिए रवाना किया गया। पारंपरिक पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों के बाद भगवान के विग्रहों को रथ पर स्थापित किया गया।

देश के विभाजन के समय संघ की शक्ति उतनी नहीं थी अन्यथा देश का विभाजन भी नहीं होता – श्री सुनील आंबेकर

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर ने कहा कि 1942 से 1947 के बीच दिल्ली एवं सम्पूर्ण पंजाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का तेजी से तथा बहुत गहराई से विस्तार हुआ। बड़ी संख्या में लोग संघ के साथ जुड़कर कार्य करने लगे तथापि देश के विभाजन के समय संघ की शक्ति उतनी नहीं थी अन्यथा देश का विभाजन भी नहीं होता। वह दिल्ली में शुक्रवार 22 मई 2026 को इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रस्तुत डाक्यूमेंट्री “दिल्ली में संघ यात्रा” के प्रदर्शन के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसा डॉक्यूमेंट्री में भी प्रस्तुत किया गया उस समय श्री गुरुजी का निर्देश था कि विभाजन के बाद जो नया पाकिस्तान बन गया, उस क्षेत्र में जो हिंदू हैं उनकी पूरी तरह रक्षा होनी चाहिए और अंतिम व्यक्ति सुरक्षित रूप से आने तक स्वयंसेवक डटे रहें। इस कार्य में कितने अनगिनत स्वयंसेवकों का बलिदान हुआ, कितने लोगों को कष्ट हुआ, उसकी कोई गिनती नहीं है। विस्थापितों के लिए बहुत सारे कैंप्स लगाए गए उसमें कई लाखों लोग रहे। अगस्त 1947 के पहले पखवाड़े में जहाँ यहाँ सारी उथल-पुथल में सब लोग व्यस्त थे, तब श्री गुरुजी कराची में थे और उधर सारे स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन कर रहे थे कि किस तरीके से हिन्दू समाज की सुरक्षा का यह सारा कार्य किया जाए। श्री आंबेकर ने कहा कि अगर संघ, डॉक्टर हेडगेवार जी को राजनीति करनी होती तो वह एक नया राजनैतिक दल शुरू कर देते। लेकिन उन्हें तो समाज को खड़ा करना था, पूरे समाज के में एक सांस्कृतिक जागरण करना था। और इसीलिए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बनाया। और समाज की सेवा, समाज का उत्थान, समाज को एक मजबूती के साथ खड़े करना, एक पूरे राष्ट्र को अपनी स्वयं के बल पर एक आत्मविश्वास के साथ खड़े करना, यही उसका उद्देश्य था। श्री सुनील आंबेकर ने कहा कि दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य का शुभारंभ संघ का प्रारंभिक काल में ही हो गया था। स्वयं आद्य सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार, जिन्होंने संघ की स्थापना की, उनके समय काल में ही दिल्ली में संघ कार्य प्रारंभ हुआ था। इसलिए संघ के 100 साल के इतिहास से दिल्ली का संघ कार्य बिल्कुल गहराई से जुड़ा हुआ है। इतने वर्षों में देश के पटल पर जितनी भी घटनाएं हुईं, उन सब घटनाओं में दिल्ली का अपना एक महत्त्व रहा और स्वाभाविक रूप से दिल्ली में जो संघ कार्य रहा उसका भी अपना एक महत्त्वपूर्ण स्थान, महत्त्वपूर्ण योगदान उस सारी प्रक्रिया में रहा। जहाँ सत्ता का केंद्र होने के नाते दलों की राजनीति का भी केंद्र दिल्ली सतत बना रहा, स्वाधीनता के पश्चात भी। और उस परिस्थिति में, उस दौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शाखाओं के माध्यम से एक सामाजिक, सांस्कृतिक संगठन जो केवल अपने कुछ कार्यक्रमों तक सीमित न रहते हुए समस्त समाज को संगठित करने के ध्येय को लेकर चल पड़ा तथा यह कार्य लगातार अभी तक चलता आया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ अनिल अग्रवाल ने कहा कि Continuity (निरन्तरता) Adaptivity (अनुकूलनशीलता) संघ कार्य विशेषता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत प्रचार प्रमुख श्री रीतेश अग्रवाल ने कहा कि इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रस्तुत यह डॉक्यूमेंट्री दिल्ली में संघ के बीजारोपण से लेकर उसके विस्तार तक की कहानी को साक्ष्यों, स्मृतियों और ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इसमें दिल्ली में संघ की शुरुआत, विभाजन का दर्द और उसकी विभीषिका के बीच किए गए संघ कार्य का चित्रण है। दिल्ली की पहली शाखा से आरम्भ होकर यह फिल्म आज की दिल्ली में संघ के व्यापक विस्तार तक की यात्रा को दर्शाती है। उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष पर अपनी दिल्ली अपनी बात द्वारा प्रकाशित विशेषांक “राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष” की भी चर्चा की। श्री रीतेश अग्रवाल ने बताया कि पत्रिका के विशेषांक एवं डाक्यूमेंट्री के लिए दिल्ली के 60 से अधिक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के औपचारिक एवं अनौपचारिक साक्षात्कार लिए गए, 85 से अधिक पुस्तकों का अध्ययन किया गया, समाचार पत्रों और लेखों को खंगाला गया तथा विभिन्न अभिलेखागार से सामग्री एकत्र की गई। इस प्रक्रिया में 100 घंटे से अधिक की वीडियो फुटेज देखी गई। इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अभिलेखागार से पुराने वीडियो और साक्षात्कार देखे गए। पूर्व संघ अधिकारियों और सरसंघचालकों के भाषणों, साक्षात्कारों और उपलब्ध फुटेज का भी अध्ययन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केन्द्रीय कार्यालय सचिव श्री अशोक पोरवाल जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत प्रचारक श्री विशाल जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत सह कार्यवाह श्री राजेश जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केन्द्रीय कार्यालय व्यवस्था टोली सदस्य श्री दिलीप जी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र कार्यालय सचिव श्री राजवीर जी, इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्री अशोक सचदेवा जी इत्यादि की गरिमामय उपस्थिति रही।  

“करियर कम्पास” कार्यशाला में छात्रों और शिक्षकों को मिला वैश्विक करियर मार्गदर्शन

राजीव जैन। अतिरिक्त राज्य मुख्य आयुक्त ,भारत स्काउट्स एंड गाइड्स & भारतीय जैन संगठन (BJS)। भोपाल। विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के मार्गदर्शन हेतु सागर पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर गाइडेंस प्रदान करने वाला एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस विशेष करियर काउंसलिंग सत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त शिक्षाविद् एवं करियर विशेषज्ञ सीए धवल गांधी (मुंबई) ने विद्यार्थियों को करियर के विभिन्न आयामों से अवगत कराया। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय जैन संगठन (BJS) एवं भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। सीए धवल गांधी ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को वर्तमान समय में उपलब्ध विविध करियर विकल्पों, उभरते क्षेत्रों तथा वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कोर्सेस की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने अपने संस्थानों — “स्कूल ऑफ लक्ज़री रिटेल” एवं “इंटरनेशनल स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड इकोनॉमिक्स” — के माध्यम से प्रदान किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रमों की भी जानकारी साझा की। इस अवसर पर सागर पब्लिक स्कूल की प्राचार्य, समस्त शिक्षकगण के साथ-साथ भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के पदाधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम की सराहना की। इसी क्रम में दोपहर पश्चात भारत जैन संगठन द्वारा होटल हयात पैलेस में “करियर कम्पास” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्राचार्यगण शामिल हुए। इस सत्र को भी सीए धवल गांधी ने संबोधित किया। उन्होंने भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में उपलब्ध नवीनतम जॉब-ओरिएंटेड कोर्सेस, श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों एवं करियर की बदलती प्रवृत्तियों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में भारत जैन संगठन के अध्यक्ष राजीव जैन, रीजनल जनरल सेक्रेटरी हेमंत जैन, विनोद कुमार जी पूर्व आईएएस,जिला अध्यक्ष संजीव जैन सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के सभी ट्रेनर एवं पदाधिकारी ने इस वर्कशॉप में भाग लिया । उपस्थित सभी सरकारी और निजी विद्यालयों के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया।

कश्मीर दशार कुंभ 2026: ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर पौराणिक विरासत के पुनरुद्धार की घोषणा

“स्वामी कालिकानंद सरस्वती और पं. ओंकारनाथ शास्त्री ने किया आध्यात्मिक शंखनाद”

आज प्रेस क्लब नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में ‘कश्मीर दशार कुंभ 2026’ की भव्य घोषणा की गई। यह आयोजन स्वामी कालिकानंद सरस्वती जी महाराज (अध्यक्ष, आयोजन समिति एवं आनंद अखाड़ा) के पावन सानिध्य में और प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित ओंकारनाथ शास्त्री के विशेष मार्गदर्शन में संपन्न होने जा रहा है। इस गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए सेवा समर्पण सनातनी फाउंडेशन, स्वदेशी सनातथ संघ – भारत, प्रेमनाथ शास्त्री सांस्कृतिक शोध संस्थान और शादीपोरा समिति ने सामूहिक रूप से हाथ मिलाया है। स्वामी कालिकानंद सरस्वती जी का विजन आयोजन समिति के अध्यक्ष स्वामी कालिकानंद सरस्वती जी महाराज ने समापन सत्र में अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य कश्मीर की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत को पुनर्स्थापित करना और मानवता को यह संदेश देना है कि “ईश्वर एक है”। उन्होंने इसे 2030 के प्रस्तावित महाकुंभ की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया, जो कश्मीर को पुनः एक प्रमुख सभ्यतागत और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। उन्होंने बताया कि यह 10-दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव 15 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक आयोजित होगा। पंडित ओंकारनाथ शास्त्री के मार्गदर्शन में इस महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, शास्त्रार्थ और आध्यात्मिक प्रवचन आयोजित किए जाएंगे, जो श्रद्धालुओं को कश्मीर की प्राचीन सभ्यता से जोड़ेंगे। दुर्लभ ज्योतिषीय योग: पं. ओंकारनाथ शास्त्री मुख्य वक्ता पंडित ओंकारनाथ शास्त्री ने दशार कुंभ के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ‘दशार’ का अर्थ दस विशिष्ट खगोलीय योगों का मिलन है। उन्होंने कहा: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में जब विशिष्ट ग्रहों का संरेखण होता है, तब झेलम (वितस्ता) और सिंधु का यह संगम साक्षात प्रयागके समान फलदायी हो जाता है। 75 वर्षों के अंतराल के बाद यह अवसर कश्मीर की धरती पर आध्यात्मिक ऊर्जा का नया संचार करेगा।” शास्त्री जी ने इस बात पर जोर दिया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह कश्मीर की उस लुप्त होती खगोलीय गणना और आध्यात्मिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जो सदियों से भारत की पहचान रही है। पंडित ओंकारनाथ शास्त्री जी ने स्पष्ट किया कि सम्पूर्ण आयोजन के दो हिस्से होंगे प्रथम धार्मिक  तथा द्वितीय सांस्कृतिक हिस्सा होगा। धार्मिक आयोजनों में सनातन धार्मिक अनुष्ठान को पुनर्जीवित किया जाएगा जबकि सांस्कृतिक आयोजन में कश्मीरियत की संस्कृति को प्रोत्साहित किया जाएगा। आयोजन की मुख्य रूपरेखा
  • तिथि: 15 जुलाई से 24 जुलाई 2026 (10 दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव)।
  • स्थान: शादीपोरा-वास्कूरा संगम, जिला गांदरबल, कश्मीर।
  • सहयोगी संस्थाएं: सेवा समर्पण सनातनी फाउंडेशन, स्वदेशी सनातन संघ, पं. प्रेमनाथ शास्त्री संस्थान और शादीपोरा समिति के कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर तैयारियों में जुटे हैं।
  • प्रमुख गतिविधियां: पवित्र संगम स्नान, कश्मीरी लोक एवं शास्त्रीय संगीत, धार्मिक प्रवचन और सामुदायिक मेल-मिलाप।
 

प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन का मूल पाठ

आज मैं एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर विशेष कर देश की माता बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं! आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया है। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया! और मैं इसके लिए सभी माताओं-बहनों, उनसे मैं क्षमा प्रार्थी हूं। हमारे लिए देश हित सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सब कुछ हो जाता है, दल हित, देश हित से बड़ा हो जाता है, तो नारी शक्ति को, देश हित को, इसका खामियाजा उठना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश के नारी शक्ति को उठाना पड़ा है। कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी, देश की नारी शक्ति देख रही थी, मुझे भी यह देखकर बहुत दुख हुआ, कि जब ये नारी हित का प्रस्ताव गिरा, तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा, जैसी परिवारवादी पार्टियां, खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छिनकर ये लोग मेजें थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान पर उसके आत्मसम्मान पर चोट थी और नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती, इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोग के उन सबके व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी, तो वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने, संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था, खुशियां मनाई थीं। कल संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन का जिन दलों ने विरोध किया है, उनसे मैं दो टूक कहूंगा, ये लोग नारी शक्ति को फॉर ग्रांटेड ले रहे हैं, वो ये भूल रहे हैं, कि 21वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है, वो उनकी की मंशा  भाप रही है और सच्चाई भी भली भांति जान चुकी है। इसलिए महिला आरक्षण विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है और जनता द्वारा इसकी सजा से भी वो बच नहीं पाएंगे। सदन में नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से भी कुछ छिनने का नहीं था। नारी शक्ति वंदन संशोधन हर किसी को कुछ ना कुछ देने का था, देने के लिए संशोधन का था। ये 40 साल से लटके हुए नारी के हक को, 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से उसका हक देने का संशोधन था। नारी शक्ति वंदन संशोधन 21वीं सदी के भारत की नारी को नए अवसर देने, नई उड़ान देने, उसके सामने से बाधाएं हटाने का महायज्ञन था। देश की 50% यानी आधी आबादी को उसका अधिकार देने का साफ नियत के साथ, ईमानदारी के साथ किया गया एक पवित्र प्रयास था। नारी को भारत की विकास यात्रा में सहयात्री बनाने और सबको जोड़ने का प्रयास था। नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, सभी राज्यों की हर राज्य की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। राज्य छोटा हो, राज्य बड़ा हो, राज्य की आबादी कम हो या राज्य की आबादी ज्यादा हो। सब की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस ईमानदार प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है, भ्रूण हत्या कर दी है। ये कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, टीएमके जैसे दल, इस भ्रूण हत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं, ये देश की नारी शक्ति के अपराधी हैं। कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है, उसने हमेशा से ही महिला आरक्षण को रोकने के लिए षड्यंत्र किए हैं। इस दिशा में पहले जितनी बार भी प्रयास हुए, हर बार कांग्रेस ने इसमें रो़ड़े अटकाए हैं। इस बार भी कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नए झूठ का सहारा लिया। कभी संख्या को लेकर, कभी किसी और तरीके से, कांग्रेस और उसके साथियों ने देश को गुमराह करने की कोशिश की। ऐसा करके इन दलों ने भारत के नारी शक्ति के सामने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है। अपना मुखौटा उतर दिया है। मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेंगी। कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी, लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का, अवसर खो दिया। कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है। कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों के पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए है। लेकिन कांग्रेस, ये भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े, इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवारकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलना का राजनीतिक षड्यंत्र किया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और दूसरी पार्टियां, इतने वर्षों से हर बार वही बहाने, वही कुतर्क गढ़ते आए हैं, बनाते आए हैं, कोई ना कोई टेक्निकल पेंच फंसाकर, ये महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं। देश राजनीति का यह भद्दा पैटर्न बराबर समझ चुका है, और उसके पीछे की वजह भी जान चुका है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध की एक बड़ी वजह है, इन परिवारवादी पार्टियों का डर। इन्हें डर है, अगर महिलाएं सशक्त हो गईं, तो इन परिवारवादी पार्टियों का नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा। ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें। आज पंचायतों में, लोकल बॉडीज में, जिन हजारों लाखों महिलाओं ने अपनी क्षमता को साबित किया है, जब आगे बढ़कर लोकसभा और विधानसभाओं में आना चाहती हैं, देश की सेवा करना चाहती हैं, परिवारवादियों के भीतर उनसे असुरक्षा की भावना बैठी हुई है। परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा सीटें होंगी, महिलाओं का कद बढ़ेगा, इसीलिए, इन लोगों ने नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध किया है। देश की नारीशक्ति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेगी। कांग्रेस और उसके साथी दल, डिलिमिटेशन पर लगातार, लगातार झूठ बोल रहे हैं। ये इस बहाने विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं। क्योंकि, बांटो और राज करो, काँग्रेस ये पॉलिटिक्स अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है। और, कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है। कांग्रेस ने हमेशा देश में दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है। इसलिए, ये झूठ फैलाया गया कि डिलिमिटेशन यानी परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा! जबकि, सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है, कि न किसी राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा, न किसी का representation कम होगा। बल्कि,सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी। फिर भी काँग्रेस, DMK,TMC और समाजवादी पार्टी जैसे दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए। ये संशोधन बिल सभी दलों, और सभी राज्यों के लिए एक मौका था, एक अवसर था। ये बिल पास होता तो तमिलनाडु,  बंगाल, यूपी, केरलम, हर राज्य की सीटें बढ़तीं। लेकिन अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से इन दलों ने, अपने राज्य के लोगों को भी धोखा दे दिया। जैसे कि, DMK के पास मौका था कि वो और ज्यादा तमिल लोगों को सांसद, विधायक बना सकती थी, तमिलनाडु की आवाज़ और मजबूत कर सकती थी! लेकिन, उसने वो मौका खो दिया। TMC के पास भी बंगाल के लोगों को आगे बढ़ाने का मौका था। लेकिन TMC ने भी ये मौका गवां दिया। समाजवादी पार्टी के पास भी मौका था कि वो महिला विरोधी छवि होने के दाग को  कुछ कम कर सके। लेकिन सपा भी इसमें चूक गई। समाजवादी पार्टी लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है। सपा ने नारीशक्ति वंदन संशोधन का विरोध करके, लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया है। सपा महिला आरक्षण विरोधी है, ये यूपी की और देश की महिलाएं कभी नहीं भूलेंगी। महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके, कांग्रेस ने फिर एक बात सिद्ध कर दी है। कांग्रेस, एक एंटी रिफॉर्म पार्टी है। 21वीं सदी के विकसित भारत के लिए, जो भी निर्णय, जो भी रिफॉर्म्स ज़रूरी हैं, जो भी निर्णय देश ले रहा है, कांग्रेस उन सबका विरोध करती है, उसे खारिज कर देती है, उस काम के अंदर खलल डालती है। यही कांग्रेस का इतिहास है और यही कांग्रेस की नेगेटिव पॉलिटिक्स है। ये वही कांग्रेस है, जिसने जनधन-आधार-मोबाइल की त्रिशक्ति का विरोध किया। कांग्रेस ने, डिजिटल पेमेंट्स का विरोध किया, कांग्रेस ने, GST का विरोध किया, कांग्रेस ने, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का विरोध किया, कांग्रेस ने, ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून का विरोध किया। कांग्रेस ने, आर्टिकल 370 हटाने का विरोध किया। हमारा संविधान, हमारे कोर्ट, जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक आचार संहिता को, यूसीसी को ज़रूरी बताते हैं, कांग्रेस उसका भी विरोध करती है। Reform का नाम सुनते ही कांग्रेस, विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है। ऐसा कोई भी काम जिससे देश मजबूत होता है, कांग्रेस उसमें बाधाएं खड़ी करने के लिए पूरी शक्ति लगा देती है। कांग्रेस, वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध करती है, कांग्रेस, देश से घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है, कांग्रेस, मतदाता सूची के शुद्धिकरण, SIR का विरोध करती है,  कांग्रेस, वक्फ बोर्ड में Reform का विरोध करती है। कांग्रेस ने, शरणार्थियों को सुरक्षा देने वाले CAA कानून तक का विरोध किया। इस पर झूठ बोलकर-अफवाहें फैलाकर देश में बवंडर खड़ा कर दिया। कांग्रेस, माओवादी-नक्सली हिंसा को समाप्त करने के देश के प्रयासों में भी रुकावटें डालती है। कांग्रेस का एक ही पैटर्न रहा है, कोई भी Reform आए तो झूठ बोलो, भ्रम फैलाओ। इतिहास साक्षी है, कांग्रेस ने हमेशा यही नेगेटिव रास्ता चुना है। जो भी कार्य देश के लिए जरूरी फैसला होता है, कांग्रेस इसको कार्पेट के नीचे डाल देती है। कांग्रेस के  इसी रवैये की वजह से भारत विकास की उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया, जिसका भारत हकदार है। आजादी के समय, उस दौर में हमारे साथ और भी कई देश आजाद हुए थे। ज्यादातर देश हमसे बहुत आगे निकल गए, और इसकी वजह थी, कि कांग्रेस हर Reform को रोककर बैठी रही। लटकाना-भटकाना- अटकाना यही कांग्रेस का सिद्धांत रहा है, यही कांग्रेस का वर्क कल्चर रहा है। कांग्रेस ने पड़ोसी देशों के साथ सीमा-विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ पानी के बंटवारे से जुड़े विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण के निर्णय को 40 साल तक लटकाए रखा। कांग्रेस ने सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को 40 साल तक रोके रखा। कांग्रेस के इस रवैये ने हमेशा देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। कांग्रेस के हर विरोध, हर अनिर्णय, हर छल-प्रपंच का खामियाजा देश ने भुगता है, देश की पीढ़ियों ने भुगता है। आज देश के सामने जितनी भी बड़ी चुनौतियां हैं, वो कांग्रेस के इसी रवैये से उपजी हुई हैं। इसलिए, ये लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं है, ये लड़ाई, कांग्रेस की उस एंटी-रिफॉर्म मानसिकता के साथ है, जिसमें सिर्फ नेगेटिविटी है, नकारात्मकता है। और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है, कि देश की सभी बहनें-बेटियां, कांग्रेस की इस मानसकिता को करारा जवाब देकर रहेगी। कुछ लोग देश की महिलाओं के सपने टूटने को सरकार की नाकामी बता रहे हैं। लेकिन, ये विषय कामयाबी या नाकामयाबी क्रेडिट का था ही नहीं। मैंने संसद में भी कहा था, आधी आबादी को उनका हक मिल जाने दीजिये, मैं इसका क्रेडिट, विज्ञापन छपवाकर विपक्ष के सभी लोगों को दे दूँगा। लेकिन, महिलाओं को दक़ियानूसी सोच से देखने वाले फिर भी अपने झूठ पर  अड़े रहे, कायम रहे! नारीशक्ति को भागीदारी दिलाने की लड़ाई दशकों से चल रही है। वर्षों से मैं भी इसके लिए प्रयास करने वालों में से एक हूं। कितनी ही महिलाएं ये विषय मेरे सामने उठाती रही हैं। कितनी ही बहनों  ने पत्र के द्वारा मुझे सारी बातें बताई हैं। मेरे देश की माताएं-बहनें-बेटियां, मैं जानता हूं, आज आप सब दुखी हैं। मैं भी आपके इस दुःख में दुःखी हूँ। आज भले ही, बिल पास कराने के लिए जरूरी 66 परसेंट वोट हमें नहीं मिला हो, लेकिन मैं जानता हूं, देश की 100 परसेंट नारीशक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है। मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं, हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाले हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे, हटाकर के रहेंगे। हमारा हौसला भी बुलंद है, हमारी हिम्मत भी अटूट है और हमारा इरादा भी अडिग है। महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां, ये देश की नारी शक्ति को संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने से कभी भी रोक नहीं पाएंगे, सिर्फ वक्त का इंतजार है। नारी शक्ति के सशक्तीकरण का बीजेपी-एनडीए का संकल्प अक्षुण्ण है। कल हमारे पास संख्याबल नहीं था, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम हार गए। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं। हमारे पास आगे अभी और मौके आएंगे, हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए, इस संकल्प को पूरा करना ही है। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

पंजाब एण्ड सिंध बैंक, अंचल लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह का आयोजन

पंजाब एण्ड सिंध बैंक, अंचल लखनऊ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कार्यालय व शाखाओं मे कार्यरत महिला स्टाफ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया | कार्यक्रम के दौरान अंचल प्रमुख श्री ए. एन. सिंह द्वारा उपस्थित महिलाओं को सम्मानित किया गया तथा उनके कार्यस्थल एवं समाज में दिए जा रहे महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की गई। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महिलाएं आज प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और बैंकिंग क्षेत्र में भी उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को रोचक एवं आकर्षक बनाने के लिए सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता तथा महिलाओं से संबंधित सांस्कृतिक गीत गायन कार्यक्रम के साथ-साथ अन्य रोचक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें महिला कर्मचारियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। समारोह के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों ने महिला सशक्तिकरण, कार्यस्थल पर समान अवसर तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर अपने विचार भी साझा किए। कार्यक्रम में सौहार्दपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर अंचल कार्यालय के सहायक महाप्रबंधक श्री तरुण कांती रॉय जी और श्री हनुमान राम टाक जी की कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण उपस्थिति रही |

“दिल्ली दंगे विश्व भर में शासन परिवर्तन के एक उपकरण के रूप में उपयोग किए जाने वाले दंगों की श्रृंखला का एक प्रकरण : एस.एन. श्रीवास्तव

21 फरवरी 2026 को इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट में ‘ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स एंड एकेडेमिशियन्स (GIA)’ द्वारा एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के छह वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उन्हें शासन परिवर्तन के प्रयास तथा सूचना युद्ध के परिप्रेक्ष्य में समझना था। इस आयोजन में सेवानिवृत्त राजदूतों, पूर्व नौकरशाहों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और दिल्ली दंगों के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। पूर्व पुलिस आयुक्त श्री एस.एन. श्रीवास्तव ने कहा कि दिल्ली दंगे एक व्यापक वैश्विक पैटर्न का हिस्सा थे, जहाँ दंगों का उपयोग शासन परिवर्तन के साधन के रूप में किया जाता है। उन्होंने ऐसे दंगों के दौरान पुलिस के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिल्ली में दंगाइयों को पुलिस की संभावित कठोर कार्रवाई की अपेक्षा थी, जिससे विरोध प्रदर्शन को और भड़काया जा सके—जैसा कि बांग्लादेश और नेपाल में देखने को मिला। Sanjeev Tripathi - Alchetron, The Free Social Encyclopedia पूर्व रॉ प्रमुख श्री संजीव त्रिपाठी ने ‘पाँचवीं पीढ़ी के सूचना युद्ध’ की अवधारणा पर प्रकाश डाला और बताया कि आधुनिक हाइब्रिड संघर्षों में दंगे किस प्रकार नैरेटिव निर्माण, मनोवैज्ञानिक अभियानों और रणनीतिक दुष्प्रचार के माध्यम के रूप में प्रयुक्त होते हैं। राजदूत वीना सिकरी ने बांग्लादेश मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे घटनाक्रमों में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह होता है कि नैरेटिव पर नियंत्रण किसके पास है। उन्होंने रेखांकित किया कि धारणा निर्माण और अंतरराष्ट्रीय संदेश-प्रबंधन राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Monika Arora (@AdvMonikaArora) • Facebook GIA की संयोजक मोनिका अरोड़ा ने कहा कि दिल्ली दंगे एक ‘प्रयोग’ थे, जिनका उद्देश्य शासन को अस्थिर करना था। उन्होंने इस विषय पर निरंतर शैक्षणिक अध्ययन और जन-जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। प्रमुख नागरिक श्री चंदर वाधवान ने तथाकथित ‘डीप स्टेट’ की भूमिका का विश्लेषण प्रस्तुत किया और उसके संभावित प्रभावों पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स एंड एकेडेमिशियन्स (GIA) दिल्ली दंगों से जुड़े विषयों पर जन-जागरूकता, शोध और तथ्यात्मक विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा।