Home India ‘हमारे साथ अन्याय मत कीजिए सर…’ JSSC CGL परीक्षा रद होने के बाद एग्जाम पास कर चुके अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा

‘हमारे साथ अन्याय मत कीजिए सर…’ JSSC CGL परीक्षा रद होने के बाद एग्जाम पास कर चुके अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा

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‘हमारे साथ अन्याय मत कीजिए सर…’ JSSC CGL परीक्षा रद होने के बाद एग्जाम पास कर चुके अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा

  1. JSSC-CGL परीक्षा रद होने से सफल उम्मीदवार नाराज।
  2. रांची के प्रोजेक्ट भवन में न्याय की मांग को लेकर धरना।
  3. अभ्यर्थी जांच के लिए तैयार, लेकिन अन्याय का विरोध।

रांची। राज्य सरकार के JSSC-CGL परीक्षा रद करने के फैसले के बाद, जिन उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई थी और जिन्होंने अपने पदों पर काम भी किया था, वे अपनी नियुक्तियों को लेकर स्पष्टता और न्याय की मांग करते हुए प्रोजेक्ट भवन में धरना दे रहे हैं।

JSSC CGL परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार प्रोजेक्ट भवन में इकट्ठा हुए हैं और सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया के सामने कहा कि हम लोग हर तरह के जांच के लिए तैयार हैं। आप जांच कीजिए, जो गलत है, उस पर कार्रवाई कीजिए लेकिन कुछ लोगों के लिए हमारे साथ ऐसा अन्याय मत कीजिए।

उसने आगे कहा कि मैं जांच करवाने के लिए तैयार हूं। आप जो बोलिएगा। मैं अपने सारे दस्तावेज लेकर आया हूं… आप CBI जांच कीजिए। आपको जो करना है, वो कीजिए मगर हमारे साथ ऐसा अन्याय मत कीजिए। हम लोग मर जाएंगे।

‘मैं सड़कों पर आ गया’

रांची में प्रोजेक्ट भवन के पास बड़ी संख्या लोग जमा हुए हैं। एक शख्स ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार के फैसले के बाद मैं सड़कों पर आ गया हूं। मैं अपने मम्मी-पापा से कहना चाहता हूं। प्लीज, सब्र रखें। हम फिर जीतेंगे। हम सरकार से भी अपील करेंगे कि प्लीज आपने जो फैसला लिया है, उसे वापस ले लें।

सरकार का यह फैसला माननीय कोर्ट के आदेश की भी बेइज्जती है। एक तरह से कह सकते हैं कि आज इंसाफ हार गया है। माननीय कोर्ट की आज हार हुई है। मैं अपने हक के लिए लड़ूंगा।

‘हजारों निर्दोषों को मिली सजा’

प्रदर्शनकारी चंदा कुमारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारी न्यायपालिका और लोकतंत्र इस सिद्धांत पर काम करते हैं कि भले ही 100 दोषी लोग छूट जाएं, लेकिन एक भी निर्दोष व्यक्ति को सजा नहीं मिलनी चाहिए।

लेकिन सरकार के इस फैसले से हजारों निर्दोष लोगों को तुरंत सजा मिल गई है। क्या परीक्षा रद करना सिस्टम को बेहतर बनाने का सही तरीका है? क्या इससे असल में दोषी लोगों को न्याय मिल पाएगा? पिछले 24 दिनों से सरकार ने सिर्फ एक पक्ष की बात सुनी है और दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया है।

सिर्फ एक पक्ष की बात सुनकर फैसला लेना कहां तक सही है? हमें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया, इसलिए अब हम मीडिया के जरिए अपनी बात रख रहे हैं।

 

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