Home Lifestyle Health सेंट्रल जेल के कैदियों को खिलाई गई डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा

सेंट्रल जेल के कैदियों को खिलाई गई डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा

0
सेंट्रल जेल के कैदियों को खिलाई गई डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा
–फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जिले में चल रहा है एमडीए अभियान
–10 फरवरी को शुरू हुआ अभियान अगले 14 दिनों तक चलेगा
भागलपुर, 17 फरवरी-
जिले में 10 फरवरी को शुरू हुआ एमडीए अभियान जारी है। 14 दिनों तक चलने वाले अभियान के तहत शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम सेंट्रल जेल पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ केयर इंडिया और पीसीआई के सदस्य भी मौजूद थे। इस दौरान सेंट्रल जेल के बंदियों और वहां पर तैनात पुलिसवालों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अभियान के दौरान छूट नहीं जाए, इसका ख्याल रखा जा रहा है। इसके तहत जेल, सरकारी दफ्तर, मस्जिद इत्यादि जगहों पर भी स्वास्थ्यकर्मी जाकर दवा खिला रहे हैं। शुक्रवार को सेंट्रल जेल जाकर वहां पर बंदियों और कैदियों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। इसके अलावा कुछ दिन पहले डीएम आवास पर जाकर डीएम समेत वहां पर तैनात कर्मियों को भी दवा खिलाई गई। चंपानकर में यतीमखाना और अखाड़ा मस्जिद में जाकर लोगों को दवा खिलाई गई।
डॉ. दीनानाथ ने बताया कि जिले में अभी फाइलेरिया को लेकर एमडीए अभियान चल रहा है। इसके तहत दो वर्ष अधिक उम्र के लोगों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की गोली खिलाई जा रही है। जिले में 31 लाख 40 हजार लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान दो से पांच साल तक के लोगों को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की एक गोली खिलाई जा रही है। छह से 14 साल तक के लोगों को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की दो गोली खिलाई जा रही है। 15 साल या इससे ऊपर के लोगों को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की तीन गोली खिलाई जा रही है। इसके अलावा दो साल से कम उम्र के बच्चे, गंभीर रूप से बीमार और गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलाई जा रही है। साथ ही दवा भूखे पेट नहीं खिलाई जायेगी। इसके अलावा सामने ही दवा खिलाने का निर्देश स्वास्थकर्मियों को दिया गया है। अभियान के दौरान इन बातों का ध्यान रखा जाना है।
क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है फाइलेरिया: डॉ. दीनानाथ ने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसका प्रकोप बढ़ जाने के बाद कोई पर्याप्त इलाज संभव नहीं है। लेकिन, इसे शुरुआती दौर में ही पहचान करते हुए रोका जा सकता है। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति को फाइलेरिया ग्रसित अंगों को पूरी तरह साफ सफाई करनी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Verified by MonsterInsights