जेंडर विषय पर पुलिसकर्मियों का उन्मुखीकरण, हिंसा रोकने की दिशा में हुई चर्चा

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• सहयोगी एवं क्रिया संस्था ने 16 दिवसीय अभियान के तहत किया आयोजन
• लिंग आधारित हिंसा रोकने में पुलिसकर्मी निभा सकते हैं महत्वपूर्ण योगदान
• हिंसा रोकन के लिए सोच बदलने की जरूरत

पटना/ 6 दिसम्बर: जेंडर यानी लिंग आधारित हिंसा वर्तमान समय में बढ़ी है। “सहयोगी” संस्था ऐसे ही संवेदनशील मुद्दे पर कार्य कर रही है। इस दिशा में रविवार को “सहयोगी” संस्था के द्वारा “क्रिया” संस्था के सहयोग से पटना के बिहटा एवं नेउरा थाना के पुलिसकर्मियों का जेंडर आधारित हिंसा के मुद्दे पर एक उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। बिहटा थाना के थानाध्यक्ष श्री अवधेश कुमार झा, सब-इंस्पेक्टर, मुंशी के साथ 40 महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मी ने इस कार्यक्रम में प्रतिभागिता की। नेउरा थाना के थानाध्यक्ष श्री संतोष कुमार के साथ 25 अन्य महिला-पुरुष पुलिसकर्मियों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम का आयोजन 16 दिवसीय जेंडर आधारित हिंसा के विरुद्ध चलायी जा रही मुहिम के तहत हुआ।यह अभियान महिला हिंसा के प्रति स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजानिक जानकारी उपलब्ध कराकर इसे रोकने का एक सशक्त प्रयास है। जेंडर आधारित हिंसा के विरुद्ध 16 दिवसीय अभियान एक विश्वस्तरीय अभियान है, जो 25 नवम्बर – ‘महिला हिंसा को समाप्त करने के अन्तराष्ट्रीय दिवस’ से आरम्भ होता है तथा 10 दिसम्बर – ‘अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ तक मनाया जाता है। इस अभियान के द्वारा आम लोगों में जेंडर हिंसा एवं महिलाओं के प्रति हो रहे हिंसा के मुद्दे पर जागरूकता बनाया जाता है।
30 फीसदी महिलाओं को 15 साल की आयु से ही शारीरिक हिंसा की होती है शिकार:
इस अवसर पर संस्था की कार्यक्रम निदेशिका रजनी ने प्रतिभागियों को बताया कि घरेलु हिंसा अथवा जेंडर आधारित हिंसा व्यक्तिगत मामला नहीं है, ऐसी घटनाओं के कारण घर-समाज के विभिन्न सदस्यों पर बहुत गहरा मानसिक, मनोवैज्ञानिक दुष्प्रभाव पड़ता है। इस बात की बहुत आवश्यकता है कि इन घटनाओं से पीड़ित परिवार को सहानुभूतिपूर्वक एवं संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए, अन्यथा कई बार ऐसी घटनाओं के बहुत घातक परिणाम देखने को मिलते हैं। इन घटनाओं से सम्बन्धित शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि निश्चय ही हमारे पुलिसकर्मियों पर काम का बहुत दवाब होता है, परन्तु उन्हें घर-परिवार में शान्ति बनाये रखने एवं परिवार को टूटने-बिखरने से बचाने के लिए इस मुद्दे के प्रति जागरूक होकर घरेलु हिंसा एवं जेंडर हिंसा जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने की दिशा में अपना योगदान करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को ऐसी हिंसा की भयावहता के बारे में बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वस्थ्य सर्वेक्षण (NFHS 4) में यह उल्लेख किया गया है कि भारत में 15-49 आयु वर्ग की 30 फीसदी महिलाओं को 15 साल की आयु से ही शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा है, उसी आयु वर्ग की 6 फीसदी महिलाओं को उनके जीवन-काल में कम-से-कम एक बार यौन हिंसा का सामना करना पड़ा है।
पुलिस को निभानी होगी भूमिका:
बिहटा थाना के थानाध्यक्ष श्री अवधेश कुमार झा ने बताया कि लिंग आधारित हिंसा को रोकने में पुलिस की भूमिका भी काफी अहम है। इसके लिए उनकी तरह अन्य पुलिस कर्मी को भी इस जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाने की जरूरत है। लिंग आधारित किसी भी तरह हिंसा के पीछे लोगों की सोच होती है।
नेउरा थाना के थानाध्यक्ष श्री श्री संतोष कुमार ने बताया लोगों को अपनी सोच में परिवर्तन लाते हुए महिलाओं एवं लड़कियों के प्रति सम्मान का भाव लाने की जरूरत है। समाज के सभी सदस्यों के प्रति संवेदनशीलता एवं सम्मान के साथ उनसे व्यवहार की अपेक्षा होती है। कई बार ऐसी घटनाओं की पीड़िता एवं परिवारजनों को स्थानीय पुलिस की मदद लेनी पड़ती है। पुलिसकर्मियों को इन पीड़िताओं के साथ संवेदनशीलता के साथ आवश्यक मदद करने की आवश्यकता है।
महिलाओं के हक़ के लिए सहयोगी संस्था प्रयासरत
सहयोगी संस्था अपने आरम्भ से ही सक्रीय रूप से महिलाओं के प्रति हो रहे हिंसा एवं इसके व्यक्तिगत एवं सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में समुदाय एवं विभिन्न हितधारकों को जागरूक एवं संवेदनशील बनने के लिए प्रयास कर रहा है। इस मुद्दे पर अपने द्वारा किये जाने वाले हस्तक्षेपों के अंतर्गत संस्था के द्वारा महिला-पुरुष, किशोर-किशोरियों, सेवा-प्रदाताओं, अधिकारीयों, मीडियाकर्मियों, पंचायत प्रतिनिधियों, आदि के साथ मिल कर घरेलू हिंसा एवं जेंडर आधारित हिंसा को समाप्त करने के लिए अलग-अलग स्तरों एवं मंचों के द्वारा प्रयास किया जाता रहा है। सहयोगी के द्वारा बैठकों, सामुदियक सत्रों, प्रशिक्षणों, उन्मुखीकरण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा यह जानकारी दिया जाता है कि घरेलू हिंसा एवं जेंडर आधारित हिंसा व्यक्तिगत समस्या नहीं है तथा सभी के सहयोग द्वारा ही इस सामाजिक कुरीति को समाप्त किया जा सकता है। संस्था के द्वारा ऐसी घटनाओं को सामाजिक मान्यता नहीं देने के लिए पुरजोर कोशिश किया जाता है तथा इस 16 दिवसीय अभियान के अंतर्गत अधिकाधिक जानकारी दी जाती है।
कार्यक्रम के दौरान सहयोगी की कार्यकारी निदेशक रजनी, कार्यक्रम समन्वयक उन्नति रानी, एडवोकेसी कोऑर्डिनेटर धर्मेन्द्र कुमार सिंह, सेशन कोऑर्डिनेटर राजू पाल के साथ सामाजिक संगठनकर्ता उषा श्रीवास्तव, लाजवंती देवी, संजू कुमारी, मुन्नी कुमारी, रिंकी देवी, बिंदु देवी, निर्मला देवी, सुरेन्द्र सिंह, नितीश कुमार एवं कार्यक्रम प्रबंधक निर्भय कुमार उपस्थित रहे

सुमन कार्यक्रम के तहत अब गर्भवती महिलाओं को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ

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– मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए किया जा रहा प्रयास
– इस योजना के तहत प्रसव के छह महीने के बाद तक प्रसूति एवं नवजात शिशु को निःशुल्क इलाज करने का है प्रावधान
– प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु की सूचना देने पर दी जाएगी प्रोत्साहन राशि
– कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर दिए निर्देश
लखीसराय, 05 दिसंबर, 2020 संस्थागत प्रसव के दौरान
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में प्रसूति महिलाओं को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि कभी-कभी महिलाओं को जान भी गँवानी पड़ती है। किन्तु, अब प्रसूति महिलाओं को इन परेशानियों का सामना करना नहीं पड़ेगा। मालूम हो कि अब इन महिलाओं को  सुरक्षित मातृत्व आश्वसन (सुमन) कार्यक्रम के तहत बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत ना सिर्फ महिलाओं की परेशानियाँ दूर होगी, बल्कि मातृ मृत्यु दर में भी कमी आएगी और लोग संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देंगे।
प्रसूति महिलाओं को बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है
सुमन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रसूति महिलाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित हों और उन्हें प्रसव के दौरान किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। यही सुमन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। उक्त कार्यक्रम के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।
– महिलाओं को मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य सेवा, मातृ मृत्यु में आएगी कमी :-
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। किन्तु, जागरूकता के आभाव में कई बार समुदाय के लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। अब सुमन कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, प्रसव के बाद छह महीने तक प्रसूति महिलाओं एवं उनके बीमार नवजात शिशु को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले सभी पीएचसी प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
-मातृ मृत्यु की सूचना देने पर मिलेगा एक हजार रूपये :-
सुमन कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत मातृ मृत्यु दर की रिपोर्टिंग का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले मातृ मृत्यु की सूचना देने वाले व्यक्ति को एक हजार रूपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाएगी। जबकि, मृत्यु के 24 घंटे के अंदर स्थानीय पीएचसी में सूचना देने पर आशा कार्यकर्ता को भी दो सौ रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावे इस संबंध में किसी प्रकार की परेशानी होने पर 104 टोल फ्री नंबर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
प्रसव के बाद छह महीने तक बीमार प्रसूति एवम उसके नवजात शिशु को मिलेगी नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं  :-
सुमन कार्यक्रम के तहत प्रसव के बाद आवश्यकतानुसार बीमार प्रसूति और शिशु को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग लगातार ऐसी प्रसूति और शिशु का देखरेख करता हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता महिला के घर जाकर उनका स्वास्थ्य का हाल जानेगी और वर्तमान स्थिति की जानकारी स्थानीय पीएचसी को देगी। इन सेवाओं का शत-प्रतिशत लाभ लोगों मिले इस बात का पूरा ख्याल रखा जाएगा। कार्यक्रम के तहत रेफरल सुविधाओं को और भी मजबूत किया जाएगा। इसके लिए किसी भी महत्वपूर्ण मामले की आपात स्थिति के एक घंटे के भीतर स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने की गुंजाइश के साथ रेफरल सेवाओं का आश्वासन दिया जाएगा। जिसमें लाभार्थी को घर से अस्पताल तक पहुंचने के लिए एम्बुलेंस की भी सुविधा शामिल है। जटिलताओं के मामले एवं सिजेरियन प्रसव पर नि: शुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।
– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– शारीरिक दूरी का हमेशा पालन करें।
– साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– घर से निकलने वक्त अनिवार्य रूप से मास्क लगाएँ और सैनिटाइजर साथ रखें।
– मुँह, नाक, ऑख छूने से बचें।

कोविड-19 के दौर में भी तमाम चुनौतियों के बावजूद अपने दायित्व पर डटे रहें आशुतोष कुमार

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– जिला आईसीडीएस कार्यालय में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के जिला कार्यक्रम सहायक के पद पर हैं तैनात
– कार्यों के दौरान खुद की सुरक्षा का भी रखा ख्याल, दूसरों को भी करते रहें जागरूक
खगड़िया, 05 दिसंबर, 2020
कोविड-19 के दौर में जहाँ लोगों की आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हुये थे। वहीं, जिला आईसीडीएस कार्यालय में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के जिला कार्यक्रम सहायक के पद पर तैनात आशुतोष कुमार उस विषम परिस्थिति में अपने दायित्व से पीछे नहीं हटे। बल्कि, मजबूत इच्छाशक्ति के साथ अपने कार्यों पर डटे रहें। इस दौरान उन्होंने खुद का सुरक्षा का ख्याल रखते हुए ना सिर्फ विभागीय कार्यों को बखूबी अंजाम दिया। बल्कि, कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक भी करते रहें।
सुरक्षा का ख्याल रख बेहतर कार्य करने में रहे सफल :-
एनएनएम के जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ने बताया कि जिला कार्यक्रम सहायक आशुतोष कुमार कोविड-19 जैसे महामारी के दौर में तमाम विषम परिस्थितियों के बाबजूद अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। बल्कि, खुद के सुरक्षा का ख्याल रखते हुए अपने कार्यों में डटे रहें और इस दौरान उन्होंने कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक कर दोहरी जिम्मेदारी पूरी की। जिसके कारण पूरे जिले में आशुतोष का कोविड-19 योद्धा के रूप में पहचान हो रही है।
मास्क और सैनिटाइजर को बनाया सुरक्षा का हथियार :-
जिला कार्यक्रम सहायक आशुतोष कुमार ने बताया कि स्थिति वाकई बिल्कुल विषम थी। किन्तु, उनके उपर जिम्मेदारी भी बड़ी थी। इसलिए, वह मास्क और सैनिटाइजर को सुरक्षा का हथियार बनाया और कार्य के दौरान नियमित रूप से उपयोग कर अपने कार्यों पर डटे रहे। इस दौरान लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक करते रहे। इसके अलावे सुरक्षा के मद्देनजर अन्य एहतियात का भी ख्याल रखा।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान आम लोगों को भी किया जागरूक :-
जिला कार्यक्रम सहायक आशुतोष कुमार जिले के किसी भी केंद्र पर निरीक्षण या किसी कार्यक्रम में भाग लेने जाते थे, तो वहाँ सेविका-सहायिका के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र के आम लोगों को भी जागरूक करते थे। इस दौरान नियमित रूप से मास्क पहननें, दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने, सैनिटाइजर का उपयोग करने समेत कोविड-19 से बचाव के लिए अन्य आवश्यक जानकारी देते हुए पालन करने के लिए प्रेरित करते थे। साथ ही समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करने की अपील करते थे। इसके अलावे विभागीय से जुड़े कार्यों को भी अपडेट रखा।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक, ऑख को अनावश्यक छूने से बचें।
– आवश्यकतानुसार लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।

कोरोना के मामले कम हुए हैं, खत्म नहीं

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जब तक दवा नहीं आ जाती है तब तक रहें सावधान
कोरोना को लेकर सरकार की गाइडलाइन का करें पालन
 बांका, 5 दिसंबर
पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मामले कम हुये हैं. जिले में कोरोना मरीज की संख्या लगातार घटती जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की तैयारी की वजह से ऐसा हुआ है, लेकिन कोरोना खत्म नहीं हुआ. इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतें और सतर्क रहें.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता अभियान के मामले ने रंग लाया है. लोग सावधानी बरत रहे हैं. इस वजह से मामले कम हो रहे हैं, लेकिन जब तक कोरोना की दवा नहीं आ जाती, तब तक सावधान रहने की जरूरत है. किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है.
सरकार की गाइडलाइन का करें पालन: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि जब तक कोरोना की दवा नहीं निकल जाती है, तब तक सावधानीव सतर्कता जरूरी है. कोरोना को लेकर जो भी स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन है उसका पालन करना होगा भीड़-भाड़ से बचना होगा. सामाजिक दूरी का पालन करना होगा. घर से बाहर निकलते वक्त हर हाल में मास्क लगाएँ और बाहर से घर आने पर हाथ को धो ले. समय समय पर हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करते रहे.
ठंड के मौसम में विशेष तौर पर सावधानी की जरूरत: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि ठंडी के मौसम में कोरोना को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. ऐसे मौसम में फ्लू के मामले ज्यादा आते हैं. 3 दिन से अधिक बुखार लगने रहने पर कोरोना की आशंका रहती है. इसलिए सर्दी, खांसी, बुखार होने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाकर दवा ले ले. इससे तो आपका बचाव होगा ही, आपसे दूसरों में भी संक्रमण का खतरा कम होगा.
शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि शारीरिक क्रिया होने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसलिए सुबह टहलने की कोशिश करें. अगर बाहर नहीं जाना चाहते हैं तो यह भी अच्छी बात है. घर पर ही रहकर 45 मिनट योग या कसरत करने की कोशिश करें. इससे आपका शरीर किसी भी बीमारी से लड़ने में सक्षम रहेगा.
कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

जीविका दीदी घर पर पोस्टर चिपकाकर पोषण के प्रति कर रही जागरूक

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गर्भवती और धात्री महिलाओं को सही पोषण की दे रही हैं जानकारी
अब तक खरीक प्रखंड के 30 से अधिक गांवों में चल चुका है यह अभियान
भागलपुर, 5 दिसंबर
कोरोना काल में जब तमाम तरह की गतिविधियां बंद हैं तो लोगों को जागरूक करने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं. इसी क्रम में खरीक प्रखंड की जीविका दीदी गर्भवती और धात्री महिलाओं को सही पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए घर-घर पोस्टर चिपका रही हैं. पोस्टर में सही पोषण के बारे में जानकारी रहती है. किस अवस्था में कौन सा आहार गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए बेहतर रहेगा, यह लिखा रहता है. इसे पढ़कर गर्भवती और धात्री महिलाएं अपने आहार में बदलाव ला रही हैं.
भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड की जीविका दीदी आराधना देवी कहती हैं कि गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए पोषण बहुत महत्व रखता है. इन्हें अगर सही पोषण मिल जाए तो इनके साथ-साथ इनके बच्चे भी स्वस्थ रहते हैं. इसलिए उनलोगों ने नया तरीका अपनाया है. घर के दरवाजे पर पोस्टर चिपका रहने से न चाहते हुए भी गर्भवती व धात्री महिलाओं या फिर उनके परिवार के सदस्यों की नजर उस पर पड़ जाती है. और जब वह आहार की लिस्ट एक बार पढ़ लेती हैं तो फिर उसके अनुसार अपना आहार में बदलाव करती हैं.
आंगन में थाली सजाकर पोषण की दे रही जानकारी: जीविका दीदी पूजा कुमारी कहती हैं कि वह लोग गांव-गांव जाकर यह अभियान चला रहे हैं. पोस्टर चिपकाने के अलावा हमलोग गर्भवती और धात्री महिलाओं के घरों को भी चिन्हित कर रहे हैं. उनके आंगन में जाकर उन्हें पोषण से संबंधित चीजों को थाली में सजाकर रख देते हैं और फिर उन्हें बताते हैं कि कौन-सा आहार उनके लिए किस अवस्था में आवश्यक है और इनके क्या फायदे हैं. इस अभियान से बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं.
प्रोटीनयुक्त भोजन के बारे में बता रही: जीविका दीदी कुमकुम देवी कहती हैं कि आंगन में थाली सजाते वक्त हम लोग प्रोटीनयुक्त भोजन के बारे में बताते हैं. उन्हें हरी सब्जियों और दूध का अधिक से अधिक सेवन करने के लिए कहते हैं. साथ ही जो लोग मांस, मछली और अंडे का सेवन करती हैं उन्हें ऐसे भोजन अधिक से अधिक करने की सलाह दी जाती है. गर्भवती और धात्री महिलाओं के घर की बुजुर्ग महिलाओं को भी इस बारे में बताते हैं, ताकि वह आगे इसका ध्यान रख सकें.
प्रखंड क्षेत्र में रंग ला रहा है यह अभियान: जीविका के खरीक प्रखंड के प्रोजेक्ट मैनेजर बालदेव कुमार कहते हैं कि यह अभियान रंग ला रहा है. अभी तक खरीक प्रखंड के 30 से ज्यादा गांवों में यह अभियान चल चुका है. जिन गांव में यह अभियान नहीं चला है, वहां के लोग उनसे आकर पूछते हैं कि हमारे यहां ऐसा कब कर रहे हैं. इस अभियान से गांव के लोगों में इतनी जागरूकता बढ़ी है कि वे लोग गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोस्टर में लिखे हुए आहार की लिस्ट को देखकर भोजन उपलब्ध करवा रहे हैं.
 कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

कोविड-19 के दौर में भी दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं चंदन कुमार

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– खगड़िया जिला आईसीडीएस कार्यालय में एनएनएम के जिला सहायक पद पर तैनात
– क्षेत्र भ्रमण के दौरान भी लोगों को कोविड-19 से बचाव को लेकर करते जागरूक

खगड़िया, 04 दिसंबर।
कोविड-19 के दौर में भी आईसीडीएस के जिला कार्यालय में एनएनएम के जिला सहायक पद पर तैनात चंदन कुमार मजबूत इच्छाशक्ति की बदौलत अपनी दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इन्होंने विभागीय कार्यों के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के साथ-साथ लोगों को न सिर्फ कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक किया बल्कि, बचाव की जानकारी देकर गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित भी किया है। साथ ही लोगों के मन में कोविड-19 को लेकर चल रहे भय को भी दूर किया है । लोगों को इससे डरने नहीं, बल्कि सतर्क और सावधान रहने के लिए जागरूक किया।

– पूरी एहतियात के साथ अपने कार्यों पर डटे रहे चंदन :-
आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नीना सिंह ने बताया कि कोविड-19 के दौर में भी एएनएम के जिला सहायक चंदन कुमार पूरी एहतियात के साथ अपने कार्यों पर डटे रहे। इस विषम परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। विभागीय जिम्मेदारी के साथ-साथ लोगों को कोविड-19 से बचाव को लेकर जागरूक करने की दोहरी जिम्मेदारी भी पूरी की। ये क्षेत्र भ्रमण कर भी विभाग से जुड़ी सेविका-सहायिका समेत अन्य लोगों को भी जागरूक करते रहे और कर्मियों का हौसला बढ़ाते रहे।

– जिम्मेदारी से बढ़ा हौसला और अपने कार्यों पर डटे रहें :-
एनएनएम के जिला सहायक चंदन कुमार ने बताया कि स्थिति तो बहुत विषम थी। किन्तु, जिम्मेदारी ने मेरे शरीर में नई ऊर्जा प्रदान की जिससे हौसला बढ़ा और फिर हम अपने कार्यों में जुट गये। विभागीय कार्यों के साथ-साथ विभागीय कर्मियों एवं आमलोगों को भी कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक करते रहे ।

– कार्यों के दौरान एहतियात का रखा ख्याल :-
जिला सहायक चंदन कुमार ने बताया कि कार्य के दौरान खुद का भी बचाव के लिए एहतियात बरतते रहे । इसके लिए हमेशा सैनिटाइजर और मास्क को सुरक्षा के रूप में साथ रखा। शायद, यही वजह रहा कि कोविड-19 संक्रमण से दूर रहा।

– क्षेत्र भ्रमण के दौरान आम लोगों को भी किया जागरूक :-
जिला सहायक चंदन कुमार जिले के किसी भी केंद्र पर निरीक्षण या किसी कार्यक्रम में भाग लेने जाते थे तो वहाँ सेविका-सहायिका के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र के आम लोगों को भी जागरूक करते थे। इस दौरान नियमित रूप से मास्क पहननें , दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने, सैनिटाइजर का उपयोग करने समेत कोविड-19 से बचाव के लिए अन्य आवश्यक जानकारी देते हुए पालन करने के लिए प्रेरित करते थे । साथ ही समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करने की अपील करते थे।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मुँह, नाक, ऑख को अनावश्यक छूने से बचें।
– आवश्यकतानुसार लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।

ब्रेस्ट नोट्स है ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती लक्षण, तत्काल कराएं जांच

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– जांच के बाद तत्काल इलाज करवाने पर सम्भव है ब्रेस्ट कैंसर का इलाज
– डॉक्टर की सलाह से करें जीवन क्रम को व्यवस्थित तो दूर होगी परेशानी

लखीसराय, 04 दिसंबर : ब्रेस्ट नोट्स या स्तन में गांठ का होना ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। लेकिन यह कोई आवश्यक नहीं कि स्तन में बनने वाला प्रत्येक गांठ से स्तन कैंसर हो ही। कभी-कभी ब्रेस्ट में सिस्ट से भी गांठ बन जाता है। बावजूद इसके ब्रेस्ट नोट्स के प्रति लापरवाह होने की कतई आवश्यकता नहीं है। स्तन में गांठ बनने की थोड़ी भी आशंका होने पर महिलाओं को तत्काल डॉक्टर से सलाह लेने के बाद स्तन कैंसर की जांच करवाने की आवश्यकता है। जांच में स्तन कैंसर के लक्षण पाए जाने के बाद महिलाओं को तत्काल हीं विशेषज्ञ डॉक्टर से करवानी शुरू कर देनी चाहिए। इसमें थोड़ी भी लापरवाही महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

लड़कियों की अधिक उम्र में शादी और बच्चों को स्तनपान नहीं कराना है स्तन कैंसर का मुख्य कारण :
सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद राय ने बताया हमारे समाज में इन दिनों कैरियर बनाने और जॉब हासिल करने के इंतजार में लड़कियां अधिक उम्र में शादी करती है। इसके साथ ही शादी के बाद भी अपने शरीर की फिगर बिगड़ नहीं जाए, इस डर से मां भी देर से बनती है। इतना हीं नहीं मां बनने के बाद भी लड़कियां शरीर का फिगर बिगड़ने के डर से अपने बच्चों को स्तनपान कराने से परहेज करती हैं। यही कारण है कि आजकल की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी बढ़ गया है।

अपने बच्चों को सही तरीके से स्तनपान कराना है स्तन कैंसर से बचने का उपाय :
सिविल सर्जन ने बताया महिलाओं द्वारा अपने बच्चों को सही तरीके से स्तनपान कराने से काफी हद तक महिलाएं इस खतरे से बच सकती हैं। सभी उम्र की महिलाओं को इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि यह परेशानी किसी भी उम्र की महिलाओं को हो सकती है।

नियमित रूप से करें व्यायाम करने से दूर हो सकता है स्तन कैंसर का खतरा :-
सिविल सर्जन ने बताया स्तन कैंसर के खतरे को दूर करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना आवश्यक है। इसके साथ ही नमक का सेवन अधिक करने से भी परहेज करना चाहिए। दरअसल, शारीरिक आकार में बदलाव यानी मोटापा होने से भी कैंसर के दायरे में आने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए नियमित रूप से व्यायाम और रहन-सहन में बदलाव लाना बेहद जरूरी है।

ये हैं स्तन कैंसर का शुरुआती लक्षण :-
आपके स्तन के आकार में अचानक भारी बदलाव होने, स्तन या बांह के नीचे छूने पर गाँठ महसूस करने, स्तन छूने पर दर्द होने, स्तन में सूजन या आकार में अचानक भारी बदलाव होने पर सावधान हो जाने की आवश्यक ता है। इसके बाद किसी भी तरह की आशंका होने पर डॉक्टर से संपर्क कर इसकी जांच करवानी चाहिए। जांच के बाद स्तन कैंसर के लक्षण मिलने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सक के परामर्श का पालन करना चाहिए।

-कोरोना काल में इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 के संक्रमण से रहें दूर :-
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर से हाथ धोने की आदत डालें।
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– बाहरी खाना खाने से बचें।
– यात्रा के दौरान हमेशा अपने साथ सैनिटाइजर रखें।

कोरोना के बिना लक्षण वाले मरीजों से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक

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हर हाल में कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन
लक्षण दिखने पर तुरंत कराए जाएं और दवा लें

बांका, 4 दिसंबर

कोरोना के लक्षण वाले के मुकाबले बिना लक्षण वाले मरीजों से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक रहती है. इसलिए सावधान रहने की जरूरत है. दरअसल, लक्षण वाले मरीज दिख जाते हैं और लोग सतर्क हो जाते हैं. मरीज भी आमलोगों से दूरी बनाकर रहते हैं. लेकिन बिना लक्षण वाले मरीजों के साथ ऐसा नहीं होता है. उन्हें पता ही नहीं रहता है कि उन्हें कोरोना है. इस वजह से वह जांच भी नहीं करवाते और ऐसे लोगों से संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि हाल के दिनों में रिसर्च में यह बात सामने आई हैं कि बहुत सारे लोग जिन्हें कोरोना हुआ, वह अपने आप ठीक हो गए. ऐसा उनमें एंटीबॉडी विकसित होने से हुआ. ऐसे सभी लोग बिना लक्षण वाले मरीज थे. ऐसे मरीज तो ठीक हो गए, लेकिन उनसे कितने लोगों को कोरोना हुआ यह पता नहीं चला. इसलिए बिना लक्षण वाले मरीजों से थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है.

हर हाल में पहनें मास्क और सामाजिक दूरी का करें पालन: ऐसे मरीजों से बचने का एक ही उपाय है. वह है कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना. इसके लिए आपको घर से निकलते वक्त मास्क पहनना पड़ेगा और सामाजिक दूरी का पालन करना होगा. घर में रहते हुए भी सामाजिक दूरी का पालन करें और एक-दूसरे से बात करते वक्त मास्क पहने.

3 दिन तक बुखार हो तो कोरोना जांच जरूर करा लें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अगर आपको 3 दिन तक बुखार है तो उस स्थिति में कोरोना जांच जरूर करा लें. वायरल समझने की भूल न करें. बहुत सारे लोग अभी के मौसम में बुखार होने पर वायरल की शिकायत समझ लेते हैं जो कि ठीक नहीं है. लगातार तीन दिन तेज बुखार रहना कोरोना का लक्षण है, इसलिए कोरोना जांच करवा कर दवा ले लें.

पहले पहचान होने से जल्द हो जाएंगे स्वस्थ: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अगर आपको पहले पता चल जाएगा कि कोरोना है तो आप जल्द स्वस्थ हो जाएंगे और आपसे दूसरे में भी संक्रमण नहीं होगा. इसलिए लक्षण दिखाई देने पर जितनी जल्द हो कोरोना जांच कराकर डॉक्टर के परामर्श के मुताबिक दवा का सेवन करें.

शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अभी के मौसम में शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने की जरूरत है. इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसके लिए आप सुबह कम-से-कम 45 मिनट तक तेज कदमों से टहलना शुरू करें. अगर बाहर नहीं जा पाते हैं तो घर में रहकर ही व्यायाम या योग करें. इससे शरीर में बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी और आप कोरोना समेत अन्य बीमारियों से बचे रहेंगे

कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क का उचित तरीके से करें उपयोग

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– उचित तरीके से मास्क के उपयोग से रूकेगा संक्रमण
– मास्क पहनने के बाद बार-बार लगाएँ-हटाएं नहीं, तभी रहेंगे संक्रमण से सुरक्षित

खगड़िया, 03 दिसंबर।
बढ़ते ठंड में कोविड-19 को लेकर लोगों को विशेष सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार कोविड-19 से बचाव के लिए सबसे आसान और बेहतर उपाय मास्क का उपयोग और दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करना है। इसलिए, हर व्यक्ति को मास्क का उपयोग करना चाहिए। क्योंकि, मास्क संक्रमण फैलने से रोकने का सबसे बेहतर उपाय है। किन्तु, मास्क उपयोग के दौरान इस बात का भी ख्याल रखें कि मास्क उचित तरीके से पहनें।

– फटा, गीला और गंदा मास्क नहीं करें उपयोग :-
खगड़िया सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने बताया कि कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क सबसे बेहतर और आसान उपाय है। जो हर तबके के लोग कर भी सकते हैं। किन्तु, मास्क के उपयोग के पूर्व इस बात का भी ध्यान रखें कि मास्क फटा, गीला और गंदा नहीं हो। क्योंकि, ऐसा मास्क उपयोग से कोविड-19 से बचाव के लिए कारगर तो नहीं ही होगा। इसके अलावा यह आपकी सेहत के लिए भी ठीक नहीं है।

– कोविड-19 के साथ अन्य बीमारियों से भी दूर रखता है मास्क :-
मास्क का उपयोग करने से लोग सिर्फ कोविड-19 से ही सुरक्षित नहीं रहते बल्कि, साँस संबंधित बीमारी समेत अन्य संक्रमण से भी दूर रहते हैं। इसलिए, लोग नियमित रूप से मास्क का उपयोग करें और अनावश्यक परेशानी से दूर रहें।

– मास्क के उपयोग के साथ दो गज की शारीरिक दूरी का पालन भी जरूरी :-
कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करना तो जरूरी है ही। किन्तु, इसके अलावा दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करना भी जरूरी है। क्योंकि, भीड़ में कोविड-19 के अलावा अन्य संक्रामक बीमारी फैलने की प्रबल संभावना रहती है। इसलिए, मास्क के उपयोग के साथ हमेशा दो गज की शारीरिक दूरी का भी पालन करें।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से हाथ धोने की आदत डालें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– बाहरी खाना खाने से बचें।
– मास्क और सैनिटाइजर नियमित रूप से उपयोग करें
-दो गज की सामाजिक दूरी पर हमेशा अमल करें

कोरोना का संक्रमण नहीं हो, बच्चों को ड्रॉप पिलाते वक्त रखा जा रहा है इसका ख्याल

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जिले के 3.83 लाख बच्चों को पिलाया जाना है पोलियो का ड्रॉप

5 साल तक के बच्चों को पिलाया जा रहा है पोलियो ड्रॉप

बांका, 3 दिसंबर

जिले भर में 5 साल तक के बच्चों को पोलियो का ड्रॉप पिलाया जा रहा है. यह अभियान शनिवार तक चलेगा. जिले के 3.83 लाख बच्चों को ड्रॉप पिलाने का लक्ष्य है और समय 2 दिन ही बचा है. इसलिए अभियान को तेज कर दिया गया है. आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका घर-घर जाकर बच्चों को पल्स पोलियो का ड्रॉप पिला रही हैं. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि जिले भर में 5 साल तक के बच्चों को पोलियो की दवा दी जा रही है. अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने और करवाने का निर्देश दिया गया है.
डॉ. मंडल ने बताया इस बार बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाते वक्त विशेष सावधानी बरती जा रही है. कोरोना संक्रमण को लेकर जो गाइडलाइन जारी की गई है, उसका पालन किया जा रहा है. बच्चों में कोरोना का संक्रमण नहीं हो, इसे लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. एक माइक्रोप्लान के तहत पल्स पोलियो अभियान चलाया जा रहा है.

आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका जा रही घर-घर: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो का ड्रॉप पिला रही हैं. इस दौरान सभी स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लव्स पहनकर जा रही हैं. इसे लेकर इन लोगों को तैयारी के दौरान प्रशिक्षण दिया गया है. किस तरह से बच्चों को पोलियो की खुराक पिलानी है, यह भी बताया गया है.

दूर से ही बच्चों को पिलाया जा रहा है पोलियो का ड्रॉप: डॉ. मंडल ने बताया कि कोरोना को लेकर सावधानी बरती जा रही है. आशा हो या एएनएम या फिर आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका कोई भी बच्चों को छू नहीं रही हैं. दूर से ही बच्चों को ड्रॉप पिला रही हैं. पोलियो ड्रॉप पिलाते वक्त बच्चे मां की गोद में ही रहते हैं. अगर बच्चा बड़ा है और 5 साल का है तो उसे भी दूर से पोलियो का ड्रॉप पिलाया जा रहा है.

कल अभियान का अंतिम दिन: डॉक्टर योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि शनिवार तक बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाया जाएगा. आशा कार्यकर्ता, सेविका और अन्य स्वास्थ्य कर्मी घर-घर तो जा ही रहे हैं, आम लोगों से भी अपील है कि अगर किन्ही का बच्चा छूट रहा हो तो वह तत्काल जागरूक होकर अपने बच्चे को पोलियो का ड्रॉप दिलवा ले.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें