युवाओं ने संभाली कमान, गांव को कराया कोरोना मुक्त

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– खरीक प्रखंड के तेलघी गांव के लोगों ने जागरूकता अभियान चलाकर कोरोना से पाई मुक्ति
– कोरोना मरीजों के निकलने का सिलसिला शुरू हुआ तो 17 तक पहुंच गया, आज गांव हो गया मुक्त

भागलपुर, 9 दिसंबर
खरीक प्रखंड के तेलघी गांव की गिनती इलाके के संपन्न गांवों में होती है. गांव के लोग काफी शिक्षित और खुशहाल हैं. लेकिन कोरोना काल में ना जाने किसकी नजर लग गई. गांव से एक-एक कर 17 मरीज निकल गए. पूरे गांव को कंटेनमेंट जोन में तब्दील कर दिया गया. लोगों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया. इस विपरीत परिस्थिति में गांव के लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर क्या करें. संक्रमण का डर अलग से, ऊपर से एक-एक कर मरीजों की बढ़ती संख्या. आखिरकार गांव के युवाओं ने कमान संभाली और उन्हें बुजुर्गों का साथ मिला. इसका परिणाम है कि पिछले 3 महीने से गांव में कोरोना के एक भी मरीज नहीं निकले हैं और आज गाँव कोरोना मुक्त है.

पहले खौफ में जीते थे अब है खुशी का माहौल: गांव की मुखिया शांति देवी कहती हैं कि अप्रैल और मई के महीने में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या से गाँव के लोग काफी परेशान हो गए थे. डरने लगे थे, खौफ में थे. लेकिन उनके गांव के युवाओं ने कमर कसी और इसका सुखद परिणाम निकला. आज ना सिर्फ गांव कोरोना मुक्त हो गया है, बल्कि लोग इसे लेकर जागरूक भी हो गए हैं. अब गांव से कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के बाहर नहीं निकलते हैं और सामाजिक दूरी का भी पालन करते हैं. लोगों में अब खुशी का माहौल है.

गांव के लोग कर रहे हैं सामाजिक दूरी का पालन: जागरूकता अभियान में बढ़-चढ़कर अपनी हिस्सेदारी निभाने वाले धीरज राय कहते हैं कि जब उनके गांव में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती गई तो उन लोगों ने सोचा कि जब इस बीमारी की कोई दवा नहीं है और जागरूकता से ही बचाव हो सकता है तो क्यों नहीं लोगों को जागरूक किया जाए. कुछ युवाओं से मिलकर एक टोली बनाकर गांव के अलग-अलग हिस्से में घूमकर लोगों से हर 2 घंटे के अंतराल पर 20 सेकंड तक हाथ धोने की अपील की. बिना मास्क के बाहर निकले लोगों को मास्क देना शुरू किया और सामाजिक दूरी का पालन करने की सख्त हिदायत दी. इसका असर हुआ. अब लोग गांव में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए आपको दिखेंगे.

ग्रामीणों ने दिखाई समझदारी: वहीं गाँव के निवासी दिलीप कुमार का कहना है कि गांव के लोग शिक्षित हैं. इस वजह से हमलोगों को अपना काम करने में आसानी हुई. लोग समझदार थे इसलिए जल्दी मान गए. बहुत जगह ऐसा देखा जाता है कि लोग अपनी जिद पर अड़ जाते हैं कि हम कुछ भी करें आपको उससे क्या मतलब, लेकिन उनके गांव में ऐसा नहीं हुआ. जिन लोगों को जो भी समझाया उन्होंने उसका पालन किया और परिणाम आज सबके सामने है.

युवाओं ने अपनी चिंता किए बगैर जिम्मेदारी निभाई: पूर्व मुखिया अंजनी सिंह कहते हैं कि किसी भी समस्या से सामूहिक तौर पर निपटने की तेलघी गांव की पुरानी परंपरा है. आज के समय में भी उनके गांव के युवाओं ने इसे कायम रखा. वह बताते हैं,उन्हें खुशी है कि गाँव के बच्चों ने वह काम कर दिखाया, जिसे बड़े-बड़े लोग नहीं कर पाए. हगांव के युवाओं ने अपनी चिंता किए बगैर लोगों को इस मुश्किल से निकाला है. जिस तरीके से गांव में युवावर्ग के लोग सक्रिय हैं. उन्हें लगता है कि यहां पर कोरोना का अब कोई असर नहीं होने वाला है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और यूएनडीपी के सहयोग से बिहार-झारखण्ड सरकार  जीतेंगे कोरोना से जंग

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कोरोना टीकाकरण को लेकर  बिहार झारखण्ड के संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं के 200 से अधिक कार्यकर्ताओं  का ऑनलाइन प्रशिक्षण
पटना, 8 दिसम्बर: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखण्ड के निदेशक रविशंकर शुक्ला ने कोरोना टीका पर विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ और यूएनडीपी द्वारा  आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहा कि कोरोना के विरुद्ध भारत की लड़ाई में टीकाकरण, सुरक्षित व्यवहार, निगरानी से लेकर मीडिया की भागीदारी और संचार का अहम योगदान है. पूर्व में भी, देश भर में पोलियो व खसरा -रूबेला के सफलतापूर्वक टीके देने में संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं का अहम योगदान रहा है.
केंद्र सरकार द्वारा की गई की घोषणा के बाद कोरोना टीकाकरन शुरू करने की तैयारियां शुरू हो चुकी है. डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और यूएनडीपी ने आने वाले समय में टीकों को लोगों तक आसानी से पहुँचाने के लिए सरकार को मदद करने का पूर्ण विश्वास दिलाया है.
इसकी तैयारियों के लिए डब्ल्यूएचओ विभिन्न स्तर पर कोरोना टीके पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन कर रहा है. इसी क्रम में मंगलवार को बिहार और झारखण्ड में एक ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया. राज्य टीकाकरण पदाधिकारी डॉ एन. के. सिन्हा ने कहा कि बिहार में कोरोना टीके पाने वाले लोगों की सूची बननी शुरू हो चुकी है और अलग-अलग श्रेणी के लोगों को टीके दिए जाएंगे.
यूनिसेफ बिहार के प्रमुख असद्दुर रहमान ने कहा कि टीके तीन चरणों में दिए जाएंगे. पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों, दूसरे चरण में होम गार्ड तथा पुलिसकर्मी और पंचायत कर्मी और आगे के चरण में बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीके दिए जाएंगे.
डब्ल्यूएचओ के बिहार क्षेत्र के रीजनल टीम लीडर डॉ बी. पी. सुब्रमन्या ने राज्य में कोरोना की स्थिति और दुनिया भर के अलग-अलग देशों में चल रहे कोरोना के टीके की ट्रायल के बारे में बताया. उन्होंने भारत सरकार द्वारा स्वीकृत ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रा ज़ेनेका के कोविशिल्ड, भारत बायो टेक के कोवैक्सीन और रूस के स्पुतनिक पांच के बारे में विस्तार से बताया.
यूनिसेफ बिहार के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ सैयद हुबे अली ने कहा कि बिहार में ठीक होने की दर 97 फीसदी और मृत्यु दर 0.5 फीसदी से कम है. बिहार सरकार टीके की संग्रहण क्षमता को बढ़ा रही है. कोरोना के टीके राज्य भर के 764 कोल्ड चेन पॉइंट्स में संग्रहित किए जाएंगे.
यूनिसेफ झारखण्ड के प्रमुख प्रशांता दास ने अपने वक्तव्य में झारखण्ड सरकार को सभी लाभार्थियों को कोरोना टीका देने हेतु यूनिसेफ द्वारा हर संभव सहायता प्रदान करने का विश्वास दिलाया.
कोविन सॉफ्टवेर के बारे में बताते हुए यूएनडीपी, नई दिल्ली की इआना लाम्बा ने कहा कि इससे राज्यवार कोविड टीकाकरण सत्र, विभागवार लाभार्थियों की सूची, राज्यवार टीकाकरण की स्थिति पर नज़र बनाए रखने में मदद मिलेगी. कोविन एप से टीकाकरण के दौरान टीके देने वाले एईएफआई के बारे में भी सूचित कर सकते हैं.
संचार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए यूनिसेफ झारखण्ड के सीफॉरडी विशेषज्ञ दानिश खान और सोनिया मेनन ने शहरी और ग्रामीण इलाकों में लोगों की सहभागिता के लिए विभिन्न संचार माध्यमों जैसे सोशल मीडिया, वॉल्यून्टीयर्स, सीएससो पार्टनर्स और मीडिया की भूमिका के बारे में बताया.
यूनिसेफ बिहार की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान यूनिसेफ समर्थित बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन द्वारा आम लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. लोगों को कोरोना का टीकाकरण के बारे में जागरूक करने में धार्मिक गुरुओं और सोशल मीडिया इन्फ़्लुएनर्स के साथ स्थानीय मीडिया का भी अहम योगदान है. सकारात्मक और जागरूकता फैलाने वाली ख़बरें मीडिया के साथ साझा करनी चाहिए जिससे कोरोना के टीके से जुड़े भ्रम को ख़त्म करने में मदद मिलेगी.
डब्ल्यूएचओ बिहार के रीजनल टीम लीडर डॉ उज्ज्वल सिन्हा ने कार्यक्रम प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया. डब्ल्यूएचओ झारखण्ड के रीजनल टीम लीडर डॉ अमरेन्द्र कुमार ने टीके की महत्ता और टीकाकरण के बाद जनित अपशिष्ट पदार्थों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में चर्चा की.
यूनिसेफ बिहार की रेखा राज ने अपने प्रस्तुतिकरण में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों के बीच जरूरी समन्वय स्थापित करने पर प्रकाश डाला.
पूरे देश में यूनिसेफ, विश्व स्वस्थ संगठन और यूएनडीपी के द्वारा राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर के लगभग 2,000 कैडरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है

कोरोना संक्रमण की आशंका के बीच जिले भर में नियमित टीकाकरण जारी

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– कोविड टीकाकरण को ले टास्क फोर्स का गठन, तैयारियाँ शुरू
– जिलाधिकारी की अध्यक्षता में किया गया है टास्क फोर्स का गठन
लखीसराय, 08 दिसंम्बर : जिले में कोरोना संक्रमण के बढ़ते आशंका के बीच बच्चों सहित अन्य सभी का नियमित टीकाकरण का कार्य जारी है। इसके साथ हीं कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए आने वाले संभावित वैक्सीन को लेकर भी आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई है।
लखीसराय के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक भगत ने बताया कि जिले भर में नियमित टीकाकरण का कार्य सुचारू रूप से किया जा रहा है। बच्चों को दिए जाने वाले सभी वैक्सीन जिला से लेकर प्रखंडों तक सदर हॉस्पिटल, अनुमंडल अस्पताल, प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित अभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित तौर पर दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों पोलियो टीकाकरण सप्ताह के दौरान भी अभियान चलाकर अधिक से अधिक बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई गई।

कोविड वैक्सीनेशन को ले किया गया है टास्क फोर्स का गठन :
जिले भर में कोविड वैक्सीनेशन को ले जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है। जिसमे सिविल सर्जन, डीपीएम, डीआईओ, अनुमंडल, रेफरल, पीएचसी एवं सीएचसी के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सहित कई अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।

सबसे पहले सरकारी एवं निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया जायेगा कोविड 19 का वैक्सीन :
कोरोना का वैक्सीन आने के बाद सबसे पहले सरकारी और निजी क्षेत्र के डॉक्टर, नर्स, पारा मेडिकल स्टाफ सहित सभी स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड 19 का वैक्सीन लगाया जाएगा।

नियमित टीकाकरण के तहत बच्चों को लगाया जाता 12 बीमारियों से बचाव के लिए टीके :
डॉ अशोक भगत ने बताया नियमित टीकाकरण के तहत बच्चों को 12 तरह के बीमारी से बचाव के लिए ठीके लगाए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं पोलियो, ट्यूबर क्लोसिस, जैपनीज़ इंफ्लाइटिस, डिप्थीरिया, टेटनस, कुकर खांसी, हेपेटाइटिस, एच बी इन्फ्लूएंजा, मिजिल्स, रुबेला, निमोनिया हैं।

कोरोना का वैक्सीन आने तक बरतें ये सावधानी :
– अनिवार्य तौर पर करें मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल ।
– शारीरिक दूरी के नियम का निश्चित तौर पर करें अनुपालन।
– एक- दूसरे से बातचीत करने के दौरान हमेशा दो गज या छह फीट की दूरी रखें।
– अपने आंख, नाक, मुँह को आवश्यक छूने से बचें
– किसी तरह का समान छूने के बाद साबून या सैनिटाइजर से अपने हाथों को साफ करें।

कोरोना से बचाव के लिए हर स्तर पर सावधानी बरतने की जरूरत

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मास्क और ग्लव्स पहनने के साथ कुछ और बातों का भी रखें ध्यान

जब तक कोरोना की दवा नहीं आती तब तक बचाव एकमात्र हथियार

बांका, 8 दिसंबर

कोरोना से बचाव के लिए मास्क और ग्लव्स तो पहनना ही है, इसके साथ-साथ कुछ और तरीकों पर भी ध्यान देने की जरूरत है. दरअसल, जब तक कोरोना की दवा नहीं आती तब तक बचाव एकमात्र हथियार है। ऐसा करने से ना सिर्फ हम कोरोना से बचे रहेंगे, बल्कि अन्य बीमारियों से भी हमारा बचाव होगा.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि मास्क और ग्लव्स पहनकर हम कोरोना के संक्रमण से बच सकते हैं. इसके अलावा हमें कुछ ऐसे उपायों पर भी ध्यान देना चाहिए, जिससे हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और वह कोरोना से मुकाबला करने में सक्षम हो.

विटामिन से भरपूर आहार लें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि इसके लिए सबसे जरूरी है आप विटामिन से भरपूर आहार लें. खासकर विटामिन सी का अधिक से अधिक सेवन करें. इसके लिए आप मौसमी फल और हरी सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करें. अभी के मौसम में आप संतरे को भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं. इसके अलावा मांस, मछली और अंडे का भी नियमित तौर पर सेवन करें.

शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि जितना जरूरी विटामिन से पूर्ण आहार है, उतना ही जरूरी शारीरिक गतिविधियां हैं. अगर आप विटामिन और प्रोटीन से भरपूर भोजन कर शारीरिक गतिविधियां नहीं करेंगे तो यह भी ठीक नहीं. इसलिए सुबह 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक टहला करें. अगर ऐसा नहीं कर सकते हैं तो घर पर कसरत या फिर योग करें.

शराब से बनाएं दूरी: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि शुरुआत में इस तरह का भ्रम फैलाया गया था कि शराब पीने से कोरोना ना खत्म हो जाता है. ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, बल्कि अधिक शराब का सेवन करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है. ऐसा होने से कोरोना होने का खतरा तो रहता ही है साथ ही कोरोना ठीक होने में भी समय लग जाता है. इसलिए जितना जल्द हो सके शराब छोड़ें.

तंबाकू से करें तौबा: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि शराब के अलावा तंबाकू से संबंधित पदार्थ का भी सेवन ना करें. सिगरेट या फिर गुटखा को आज ही छोड़ें. एक सामान्य व्यक्ति के मुकाबले तंबाकू खाने वाले या फिर सिगरेट पीने वाले व्यक्ति को कोरोना ना होने का ज्यादा खतरा रहता है. इसलिए आज ही इन चीजों को छोड़ें.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर नवजात को बीमारियों से रखें दूर

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बचपन से ही इसका ध्यान रखने पर आगे भी मिलता है फायदा
शुरुआती स्तनपान से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का होता है विकास
भागलपुर, 8 दिसंबर
किसी भी मां के लिए नवजात की देखभाल बहुत महत्वपूर्ण होता है. थोड़ी सी चूक होने पर बच्चे के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और वह बार-बार बीमार पड़ने लगता है. इससे बच्चे कमजोर हो जाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना. बच्चे स्वस्थ रहें, इसलिए मां को उसकी देखभाल सावधानी से करनी चाहिए. इसके लिए उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करना बेहत जरूरी है.
नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी कहते हैं किसी भी व्यक्ति के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होना बहुत जरूरी है. अगर इसका ध्यान बचपन से ही रखा जाए तो आगे भी इसका फायदा मिलता है. जल्दी वह बीमार नहीं पड़ता है. डॉ. विद्यार्थी कहते हैं बच्चे इन्फेक्शन की चपेट में जल्द आ जाते हैं. ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने पर बीमारियों का असर जल्दी होता है. इस वजह से शरीर कमजोर हो जाता है. साथ ही बच्चों को बहुत सी बीमारियां बदलते मौसम के कारण भी होती है, लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने पर बदलते मौसम और संक्रामण वाली बीमारियों से बचा जा सकता है.
जन्म से एक घंटे के भीतर स्तनपान  जरूरी: डॉ. विद्यार्थी ने बताया जन्म के 1 घंटे के भीतर बच्चे को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध अवश्य पिलाए. इसके सेवन करने से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. कुछ लोग इसे गंदा या बेकार दूध समझकर शिशु को पिलाने से मना करते हैं. जबकि ऐसा करना बिल्कुल गलत है.
बाहरी नहीं, 6 माह तक मां का ही दूध पिलाएं: डॉ. विद्यार्थी ने बताया  6 माह तक के बच्चे को केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए. इसमे सभी पोषक तत्व मिलते हैं. मां के दूध का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. साथ ही 6 माह के पूरे होने के बाद बच्चे को 2 साल तक  ऊपरी आहार के साथ मां का ही दूध पिलाएं. मां के दूध से बच्चों में अलग-अलग रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है.
हाथ धोकर बच्चे को लें गोद: डॉ. विद्यार्थी ने बताया बच्चे को बीमारियों से बचाने और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए सबसे जरूरी है कि उसे किसी भी तरह के संक्रमण की चपेट में नहीं आने दें. इसलिए साफ सफाई का ध्यान रखें , जरूरी है कि बच्चे को हाथ धोकर लें गोद. बच्चे के होठों या गालों को न चूमें. किसी का जूठा ना खिलाएं. कपड़े और खिलौने को साफ जगह पर रखें.
नींद की कमी नहीं होने दें: डॉ. विद्यार्थी ने बताया स्वस्थ रहने के लिए नींद किसी भी व्यक्ति के लिए जरूरी है. यदि बच्चे की नींद पूरी न हो तो वह जल्द ही बीमारियों की चपेट में आने लगता है. इसलिए जरूरी है कि बच्चे की नींद पूरी हो. उन्होंने बताया नवजात को एक दिन में 18 घंटे तो छोटे बच्चों को 12 से 13 घंटे नींद की आवश्यकता होती है.
घर में किसी को नहीं करने दें धूम्रपान: डॉ.विद्यार्थी ने बताया घर में बच्चे के आसपास किसी को धूम्रपान नहीं करने दें. अगर कोई धूम्रपान का सेवन घर में करता है तो इसका असर बच्चों पर भी पड़ता है. धूम्रपान जितना खतरनाक उस व्यक्ति के लिए है जो इसे कर रहा है, उतना ही खतरनाक उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी. सिगरेट का धुआं शरीर में कोशिकाओं को कमज़ोर कर देता है. इसके अलावा सिगरेट-बीड़ी में कई ऐसे जहरीले पदार्थ होते हैं जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करते हैं.
सम्पूर्ण टीकाकरण कराएं: डॉ. विद्यार्थी ने बताया सम्पूर्ण  टीकाकरण उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाता है. टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है, ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके. इसलिए बच्चे के स्वस्थ्य जीवन के लिए टीकाकरण जरूर कराएं.
कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

खुद कोरोना संक्रमित होने के बावजूद लोगों की सेवा में डटे रहे डाटा ऑपरेटर कृष्ण नंदन कुमार

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खुद कोरोना संक्रमित होने के बावजूद लोगों की सेवा में डटे रहे डाटा ऑपरेटर कृष्ण नंदन कुमार
– मजबूत इच्छा शक्ति, आत्मबल और मनोबल के कारण कोरोना को दी मात
– कोरोना से जंग जीतने के बाद स्वस्थ्य होकर दोगुना उत्साह के साथ अपने काम पर लौटे
– सूर्यगढ़ा पीएचसी में डाटा ऑपरेटर के तौर पर कार्यरत हैं कृष्णनंदन
लखीसराय, 08, दिसंबर, 2020
कोरोना संक्रमण के मुश्किल भरे दौर में एक ओर जहां लोग एक-दूसरे से मिलने तक को तैयार नहीं थे। वहीं, सूर्यगढ़ा पीएचसी में डाटा ऑपरेटर के पद कार्यरत कृष्ण नंदन कुमार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए लेकर दृढ़ संकल्पित थे। वह इस संकल्प के साथ ना सिर्फ लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने में सफल रहें, बल्कि लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइड लाइन की जानकारी देकर भी जागरूक करते रहें। साथ ही लोगों को कोरोना  गाइड लाइन का पालन करने के लिए भी प्रेरित करते रहें। हालाँकि, इसी दौरान वह भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गये। बावजूद इसके इन विषम परिस्थिति में भी वह घबराएँ नहीं, बल्कि, आवश्यक उपचार के साथ- साथ मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मबल, मनोबल के बदौलत कोरोना के संक्रमण को मात देने भी सफल रहें।
 मुश्किल भरे दौर में भी लोगों को अपनी सेवा देने में जुटे रहे डेटा ऑपरेटर :-
सूर्यगढ़ा पीएचसी प्रभारी डॉ. जवाहर साहू ने बताया कि कोरोना जैसे वैश्विक महामारी के मुश्किल भरे दौर में भी डाटा ऑपरेटर कृष्ण नंदन कुमार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देने में जुटे रहे। इसके साथ ही इलाज के लिए पीएचसी आने वाले लोगों को भी कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी भी देने में सफल रहें। इतना ही नहीं, उन्होंने इसके अलावे पीएचसी से संबंधित अन्य कार्यों को भी बखूबी अंजाम दिया।
 शारीरिक पीड़ा होने के बाद कराई कोरोना जांच तो पाॅजिटिव आया रिपोर्ट :
डाटा ऑपरेटर कृष्ण नंदन कुमार लोगों को पीएचसी से संबंधित बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देने में पूरी निष्ठा के साथ जुटे रहे। इसी दौरान उन्हें जब शारीरिक पीड़ा हुई तो उन्होंने अपना कोविड-19 की जाँच कराई जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बाद उन्हें संक्रमित होने की जानकारी मिली। इसके बाद वह होम आइसोलेट हो गये। आइसोलेशन में आवश्यक चिकित्सा के साथ मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मबल के बदौलत ही वह  कोविड-19 को मात देने में सफल रहें।
– पीएचसी स्तर से मिला काफी सहयोग :
 डाटा ऑपरेटर कृष्ण नंदन कुमार ने बताया कि होम आईसोलेट होने के दौरान स्थानीय पीएचसी के चिकित्सकों एवं सहकर्मी सहित अन्य सहकर्मियों का काफी सहयोग मिला। चिकित्सकों के सहयोग से ही कोविड-19 को मात देने में वह सफल रहें। इतना ही नहीं इस दौरान विभाग के अन्य पदाधिकारियों का भी उन्हें काफी सहयोग मिलता रहा। प्रत्येक दिन चिकित्सक उनके घर आकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के साथ हीं आवश्यक चिकित्सा परामर्श भी देते थे।
– स्वस्थ होने के साथ ही एक बार फिर से  लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के संकल्प के साथ काम पर लौटे :
डाटा ऑपरेटर कृष्ण नंदन कुमार स्वस्थ्य होने के साथ – साथ लोगों को और बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के संकल्प के साथ पुनः अपने काम पर लौट आये। उन्होंने बताया कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिले इसके लिए वह दृढ़ संकल्पित है। इस दौरान वह लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए भी आवश्यक जानकारी देकर जागरूक भी कर रहें हैं।
– कोविड-19 को मात देने के लिए चिकित्सा परामर्श का पालन जरूरी :
कृष्ण नंदन कुमार ने बताया कि कोविड-19 को मात देने के लिए चिकित्सा परामर्श का पालन महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ मजबूत इच्छा शक्ति का होना भी जरूरी है। कोविड-19 से डरें नहीं, बल्कि चिकित्सकीय परामर्श का पालन करते हुए मजबूत इच्छाशक्ति के साथ लड़े।
– जाँच कराने में नहीं बरतें लापरवाही :
कृष्ण नंदन कुमार ने कहा कि लोगों को कोविड-19 जाँच कराने में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। बल्कि, लक्षण दिखते ही जाँच कराना चाहिए। जाँच के बाद चिकित्सकीय परामर्श का पालन करते हुए आवश्यक इलाज कराना चाहिए।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 के  संक्रमण से रहें दूर :
– शारीरिक दूरी का हमेशा करें पालन ।
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से करें उपयोग ।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों पर जाने से करें  परहेज।
– मुँह, नाक, कान छूने से बचें।
– सफर के दौरान हमेशा सैनिटाइजर की छोटी बोतल हमेशा अपने पास रखें।
– बाहर में लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।

कोविड-19 के मुश्किल दौर में भी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटी मीनाक्षी श्री 

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• मजबूत इच्छाशक्ति और साकारात्मक सोच के बल पर पूरी की दोहरी जिम्मेदारी
• खगड़िया के गोगरी बाल बिकास परियोजना कार्यालय में महिला पर्यवेक्षिका के पद पर हैं तैनात
खगड़िया/ 07 दिसंबर, 2020:
कोविड-19 जैसे वैश्विक महामारी पर रोकथाम एवं बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने तथा सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का संदेश समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने में आईसीडीएस कर्मियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे कर्मियों में ही जिले गोगरी बाल बिकास परियोजना कार्यालय में महिला पर्यवेक्षिका के पद पर तैनात मीनाक्षी श्री का नाम भी शुमार है। जो कोविड-19 के दौरान मुश्किल भरे दौर में भी महिला होने के बावजूद पीछे नहीं हटी, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर कोविड-19 और विभाग के कार्यों की दोहरी जिम्मेदारी बखूबी पूरी करने में सफल रही। इतना ही नहीं कोविड-19 से बचाव के लिए विभाग में तैनात कर्मियों के अलावे आम लोगों को भी जागरूक करती रही। ताकि बढ़ते संक्रमण पर विराम लगे और लोग संक्रमण के दायरे से दूर रहें।
कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों तक पहुँचाई सरकार के गाइडलाइन की जानकारी :
एनएनएम के जिला समन्वयक अम्बुज कुमार ने बताया कि कोविड-19 के दौर जब लोग एक-दूसरे से भयभीत होने लगे थे। उस मुश्किल भरे दौर में भी महिला पर्यवेक्षिका मीनाक्षी श्री महिला होने के बावजूद कोविड-19 से बचाव के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन को ना सिर्फ लोगों तक पहुँचाने में सफल रही, बल्कि गाइडलाइन का पालन करने के लिए लोगों को प्रेरित करने में भी सफल रही। जिसके कारण मीनाक्षी का आज जिले में कोविड-19 योद्धा के रूप में पहचान हो रही है। इतना ही इनके द्वारा समाजहित में पूरी निष्ठा के साथ की गई इस कार्य के लिए विभाग समेत अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने भी सराहना किया है।
दौर जरूर थी मुश्किल, पर जिम्मेदारी भी थी बड़ी :
महिला पर्यवेक्षिका मीनाक्षी श्री ने बताया कि कोविड-19 का शुरूआती दौर निश्चित ही मुश्किल भरे थी। किन्तु, मेरे उपर उससे बड़ी जिम्मेदारी थी। जिसके कारण मैं हारेगा कोविड-19, जीतेगा भारत की तर्ज पर कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने में जुट गई। शुरूआती दौर में परेशानी हुई। किन्तु, बाद में लोगों का भी सहयोग मिलने लगा। इस दौरान मैं लोगों को बचाव के लिए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन की जानकारी दी और गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित भी की। जिसका साकारात्मक प्रभाव भी रहा और लोगों के सहयोग एवं खुद का साकारात्मक आत्मबल और दृड़ निष्ठा के बल पर मैं दोहरी जिम्मेदारी पूरी करने में सफल रही।
मास्क का उपयोग एवं शारीरिक दूरी पालन सुनिश्चित करने पर दिया बल :
लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक करने के दौरान महिला पर्यवेक्षिका मीनाक्षी श्री ने इस बात पर बल दिया कि कम से कम समाज के प्रत्येक व्यक्ति निश्चित रूप से मास्क का उपयोग एवं शारीरिक दूरी पालन करें। क्योंकि, कोविड-19 से बचाव के लिए सबसे बेहतर और आसान उपाय यही है। जो समाज के हर तबके लोग करने में भी सक्षम हैं। इसके अलाव उन्होंने लोगों को साफ-सफाई, खान-पान, लक्षण दिखते ही कोविड-19 जाँच कराने, स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करने समेत सरकार द्वारा जारी अन्य गाइडलाइन को भी पालन करने के लिए जागरूक की।

बच्चों के साथ होने वाले मानसिक व शारीरिक आघात के प्रति हों सचेत

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• शारीरिक या मानसिक आघात की चाइल्ड लाइन को 1098 पर दें सूचना
• बच्चों को दें ‘गुड टच व बैड टच’ की जानकारी,  बचाएं उन्हें शोषण से
• कोरोना संकटकाल में उनके संपूर्ण स्वास्थ्य की सुरक्षा पर जोर
 भागलपुर, 7 दिसंबर: कोरोना संक्रमण के संकटकाल का व्यापक असर बच्चों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा है. लॉकडाउन के कारण  लगातार घर में रहने व स्कूलों व कोचिंग संस्थानों के नियमित नहीं खुलने के कारण उनकी दिनचर्या पर असर पड़ा है. उनके जीवनशैली में अचानक हुए इस बदलाव के कारण उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है. ऐसे में बच्चों में कई नकारात्मक सोच उभरने की आशंका भी बढ़ी है. इस परिस्थिति में उन्हें भावनात्मक मदद मिलनी जरूरी है अन्यथा वह किसी बड़े शारीरिक व मानसिक आघात का शिकार हो सकते हैं. बच्चों को इस संकट से उबारने के लिए ‘दी ब्लू ब्रिगेड’, ‘राष्ट्रीय सेवा योजना’ एवं ‘यूनिसेफ’ ने मिलकर लोगों को इसके प्रति जागरूक करने व उन्हें बच्चों के प्रति उनकी नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से एक मार्गदर्शिका जारी की है.
मार्गदर्शिका के अनुसार बच्चों के साथ किसी प्रकार की भी ऐसी घटना जिसमें शारीरिक शोषण, बच्चें की पिटाई, किसी वस्तु से चोट पहुंचाना, घर से निकालना, काटना, जलाना या ज्यादा ही सख्ती से पेश आना, उपयुक्त भोजन एवं सुरक्षा प्रदान नहीं करना, अपमानित करना, अनुचित भाषा का प्रयोग करना, यौन शोषण करना व उपेक्षा करना आदि शामिल हों, इसकी सूचना चाइल्ड लाइन को 1098 पर कॉल कर देनी है.
आवश्यक टीकाकरण को भी दी गयी है तरजीह:
कोविड 19 संक्रमण के असर के मद्देनजर बच्चों के आवश्यक टीकाकरण को भी तरजीह दी गयी है. बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र, जिला अस्पताल सहित सामुदायिक व प्राथमिक व उप स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर टीकाकरण जरूर दिलाया जाना चाहिए. बच्चों को दिये जाने वाले टीकाकरण में विशेषतौर पर हेपेटाइटिस बी, काली खांसी, टीबी, हिब इंफेक्शन, दिमागी बुखार, पोलियो, खसरा व रूबेला, डिप्थेरिया व टिटनेस शामिल हैं. ये टीकाकरण बच्चों को जानलेवा बीमारियों से रक्षा करने के साथ उनके रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने का काम करती हैं.
गर्भस्थ शिशु का भी रखा गया है पूरी तरह ध्यान:
मार्गदर्शिका में कोविड 19 संकटकाल में गर्भस्थ शिशु के भी स्वास्थ्य का संपूर्ण ध्यान रखते हुए गर्भवती महिलाओं से प्रसव के लिए सरकारी या निजी स्वास्थ्य केंद्रों का चयन करने के लिए कहा गया है. इस बात पर बल दिया गया है कि स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के क्या फायदे हैं और इसकी तैयारी किस प्रकार होनी चाहिए. साथ ही जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना तथा भगिनी प्रसूति सहायता योजना आदि की भी जानकारी दी गयी है. गर्भवती महिलाओं में कोविड 19 के भय को दूर करने, तथा गर्भवती को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा या नर्स से मिलवाना व सरपंच या पंचायत प्रतिनिधियों से सहयोग दिलावाने के लिए लोगों से अपील की गयी है.
‘गुड टच, बैड टच’ व्यवहार के प्रति भी जागरूकता:
जारी मार्गदर्शिका में बच्चों को शारीरिक स्पर्श के बारे में भी सजग व जागरूक बनाने के लिए कहा गया है. बच्चों को यह बताने की अपील की गयी है कि यदि कोई उन्हें अनुचित ढंग से छुए तो उसे रोकें और मदद के लिए जोर से चिल्लाए. ऐसे व्यवहार जिनमें वे स्वयं को सहज महसूस नहीं करते उन्हें बैड टच के रूप में देखा जाता है. पैर के बीच, नितंब व जांघों के बीच, छाती व चेहरा को छूना या ऐसे कोई भी स्पर्श जिससे बच्चा असहज होता है बैड टच की श्रेणी में आता है. ऐसी बातों को मां, पिता, दादा दादी व शिक्षक आदि से बताने के लिए कहा गया है.
कोविड के दौरान घर पर ही सीखने की प्रक्रिया पर बल:
कोविड के दौरान इस बात पर जोर दिया गया है कि बच्चों के घर पर सीखना जारी रहे. कोविड-19 के कारण बच्चों के सामने शिक्षा को लेकर कई चुनौतियां हैं. ऐसी चुनौतियों के बीच बच्चे घर पर रहते हुए सीखना जारी रखें. स्वयं को सीखने की प्रक्रिया में व्यस्त रख इस महामारी में तनाव से निपटन में मदद मिलेगी. सीखने की प्रक्रिया में उनके भाई बहन, माता पिता, या चाचा चाची अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं. उनके साथ पंसदीदा कहानियां पढ़ने या खेलने सहित अन्य रचनात्मक कार्य में मदद कर सकते हैं

गर्भवती महिलाएं ठंड से रहें सावधान

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सर्दी-खांसी नहीं हो, इसके लिए खानपान का रखें ध्यान

खुद के साथ बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सतर्कता बरतना जरूरी

बांका, 7 दिसंबर

सर्दी के मौसम में स्वास्थ्य को लेकर हर किसी को सतर्क रहने की जरूरत है. गर्भवती महिलाओं को तो इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए. अगर गर्भवती महिलाएं इस मौसम में स्वास्थ्य को लेकर चौकस नहीं रहेंगी तो उनके साथ उनके गर्भस्थ बच्चे को भी परेशानी हो सकती है. इसलिए सावधानी बरतने की जरूरत है. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि ठंड के मौसम में गर्भवती महिलाओं को सर्दी-खांसी होने की संभावना अधिक रहती है. इससे बचने के लिए खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए. साथ में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ठंड नहीं लगे. शरीर को हमेशा ढककर रखना चाहिए.

ठंडी चीज खाने से बचें: डॉ चौधरी ने बताया गर्भवती महिलाओं को ऐसे मौसम में ठंडी चीज खाने से बचना चाहिए. वह अपने आहार में ड्राईफ्रूट्स, चवनप्राश और हॉर्लिक्स का सेवन कर सकती हैं. इसके अलावा जो मांसाहारी हैं वे मांस-मछली और अंडे का सेवन कर सकती हैं. जो लोग मांसाहारी नहीं हैं वे दूध और हरी सब्जियों पर अधिक से अधिक जोर दें. इससे शरीर को सही पोषण मिलेगा. गर्भस्थ शिशु का भी ठीक तरीके से विकास होगा.

धूप का करें सेवन: गर्भवती महिलाओं को अभी के मौसम में धूप का सेवन भी करना चाहिए. इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिलती है. इसके अलावा सर्दी-खांसी से भी बचाव होता है. सर्दी के मौसम में स्किन ड्राई हो जाता है. इसलिए हफ्ते में तीन बार तिल के तेल से मालिश करना चाहिए. इससे शरीर स्वस्थ रहेगा और सर्दी खांसी से बचाव होगा.

खुद से दवा नहीं लें: डॉ चौधरी कहते हैं कि अक्सर देखा जाता है कि सर्दी- खांसी बुखार होनपर लोग खुद ही दवा खरीद कर खा लेते हैं. ऐसा नहीं करें. ऐसा करना किसी भी व्यक्ति के लिए हानिकारक है. गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह और भी खतरनाक है. अगर आप सर्दी, खांसी या वायरल से पीड़ित होते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें और उनके द्वारा लिखी गई दवा का ही सेवन करें. अपनी समझ से दवा खरीद कर खाना नुकसानदायक हो सकता है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

सरकार की कायाकल्प योजना से सुदृढ़ होगी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं

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– अब मरीजों को मिलेंगी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, साफ-सफाई पर भी होगी नजर

– स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के सहयोग से सफल होगा कायाकल्प योजना

लखीसराय, 07, दिसंबर, 2020
जिले के सभी तरह के मरीजों को उचित प्रबंधन के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कायाकल्प योजना लाई है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा सुदृढ़ करने के साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन में भी पहले की भाँति साकारात्मक बदलाव होगा। इस योजना से न सिर्फ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेगी बल्कि समुचित व्यवस्था भी दी जाएगी। मालूम हो कि स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतर बदलाव एवं मूलभूत सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए ही सरकार ने यह योजना लागू की है। इस योजना से जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों सहित पीएचसी स्तर पर भी मरीजों को सुविधाएं मिलेगी।

मरीजों को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य स्वास्थ्य सुविधाएँ :-
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि इस योजना के तहत मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेगी इसके साथ ही अस्पताल में भी स्वच्छता सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं में भी साकारात्मक बदलाव होगा। इसे सुनिश्चित करने को ले जिले के सभी पीएचसी प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

– केयर इंडिया भी कर रही है सहयोग :-
इस योजना को सफल बनाने के लिए केयर इंडिया भी सहयोग कर रही है। दरअसल, इस योजना का सफल संचालन स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के संयुक्त पहल से ही संभव है। इसको ले सभी पदाधिकारी एवं कर्मियों ने आवश्यक तैयारी शुरू कर दी है।

साफ- सफाई सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी रखा जाएगा ख्याल :-
इस योजना के तहत साफ- सफाई सहित अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली अन्य मूलभूत सुविधाओं का ख्याल रखा जाएगा ताकि मरीजों को बेहतर प्रबंधन के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके और मरीजों को किसी प्रकार का परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। इसके साथ ही मरीजों को मिलने वाली अन्य सभी सुविधाओं का भी ख्याल रखा जाएगा।

कोरोना काल में इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से करें प्रयोग ।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों पर जाने से करें परहेज करें।
– साफ- सफाई का रखें विशेष ख्याल।
– बाहरी खाना खाने से भी करें परहेज ।
– साबुन या अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर से हाथ धोएं अपना हाथ।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें।