महाराष्ट्र में फूड प्वाइजनिंग के चलते 3 बच्चों की मौत, 250 से ज्यादा बीमार, कई गंभीर

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महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में एक कार्यक्रम के दौरान रात का खाना खाने के बाद कम से कम तीन बच्चों की मौत हो गई है जबकि करीब 250 लोग बीमार हो गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से कई लोगों की हालत काफी गंभीर बनी हुई है।

यह घटना महाड इलाके के खालापुर की है जहां पर सुभाष माणे अपने बने नए घर में वास्तु शांति कार्यक्रम के दौरान लोगों को खाने पर आमंत्रित किया था। मृत लोगों की पहचान 12 वर्षीय प्रगति शिंदे, 12 वर्षीय ऋषिकेश शिंदे और 7 साल की कल्याणी शिंगोत्रे के तौर पर की गई है।

बीमार पड़े एक शख्स के रिश्तेदार ने बताया- “करीब 500 लोगों का डिनर बनाया गया था। डिनर के कुछ देर बाद ही पहले छोटे बच्चों ने पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की। उसके बाद बड़ों ने भी इसी तरह की शिकायत की जिसके बाद ऐसा समझा गया कि यह फूड प्वाइजनिंग है।”

जिन लोगों ने पेट दर्द की शिकायत की उन्हें सबसे पहले खोपोली के पार्वती अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, जैसे ही ऐसा लोगों की संख्या बढ़ने लगी मरीजों को नवी मुंबई अस्पताल और पनवेल में शिफ्ट किया गया। कई अस्पतालों के कई डॉक्टरों और पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस फूड प्वाइजनिंग की बड़ी वजह कीटनाशक पावडर हो सकता है। राजधानी मुंबई से करीब 170 किलोमीटर दूर महाड एक तीर्थ केन्द्र है। यह मराठा किंग शिवाजी की राजधानी भी था।

हिन्दुओं के संगठित रहने से ही हिन्दू राष्ट्र का निर्माण – श्रीस्वामी संवित् सोमगिरिजी

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माउण्ट आबू। श्रीसोमनाथ महादेव मन्दिर, सन्त सरोवर में ‘हिन्दुस्तान में हिन्दू विभाजित क्यों? विषय पर विभिन्न हिन्दू संगठनों के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए धर्मगुरु श्रीस्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज ने कहा कि हमारी संस्कृति वेद मूलक है, सबके कल्याण के लिए है लेकिन हमारी हिन्दू सनातन संस्कृति संकुचित होती जा रही है। काल का एक दुर्घर्ष प्रभाव पड़ता है। हमने कहां गलती कर दी, इस पर विचार ही नहीं किया। हमारे बोध में विकार आ गया। हमारी संस्कृति को नष्ट करने के लिए बारम्बार हमले हुए लेकिन हमारे अन्दर एक आग धधकती रहती है जिसने इसको बचाये रखा है। युवाओं को अपनी ताकत को पहचानना होगा, अपने पौरुष को परिष्कृति करना होगा इसके लिए उन्हें शास्त्र और शस्त्र दोनों को अपनाना होगा। वर्तमान समय आपस में लड़ने का नहीं है, विखण्डन का नहीं है, एक-दूसरे के प्रति ईर्ष्या, राग-द्वेष रखने का भाव नहीं है। समय है बिखरे हुए हिन्दू संगठनों को जो अलग-अलग रह कर सीमित दायरे में कार्य कर रहें हैं उन सभी को अहम भाव भूल कर एक झण्डे के तले संगठित होकर राष्ट्र की एकता, अखण्डता तथा सनातन संस्कृति को बचाने के लिए नियोजित तरीके से फैलाव और विस्तार करना होगा क्योंकि वर्तमान में हिन्दुत्व को बांटने का साजिश चल रही है। धर्म को राष्ट्र और अध्यात्म से अलग कर दिया है, संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ की गई है, अल्पसंख्यक का जहर बोया जा रहा है, गुरुकुल परम्परा को नष्ट कर शिक्षा का पतन होने के कारण युवा पीढ़ी को सनातन संस्कृति से दूर किया जा रहा है। हमारा जीवन यंत्रवत हो गया है। इस मनोवृति को सभी हिन्दूवादी संगठनों को एकजूट होकर बदलना है। संविधान में हो रहे छेड़छाड़ के विरूद्ध आवाज उठानी है। अपनी ताकत को पहचानने तथा लक्ष्य को पहचानने के लिए अपने दर्शन को ठीक करो, तभी हम अपने आप को सुरक्षित रख पायेंगे, संस्कृति को बचा पायेंगे। संस्कृति बचेगी तो हिन्दू बचेगा, हिन्दू बचेगा तो विश्व बचेगा क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति वसुदेव कुटुम्बकम की है इसलिए हिन्दू राष्ट्र की स्थापना द्वारा विश्व कल्याण का एकमात्र उपाय है।

40 साल में पहली बार मैच हारा ब्राजील

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खिताब के प्रबल दावेदारों में शुमार पांच बार की चैपियन ब्राजील को विश्व कप के उसके पहले मुकाबले में स्विट्जरलैंड ने 1-1 से ड्रॉ पर रोक दिया. फीफा वर्ल्ड कप में 1978 के बाद यह पहली बार हुआ है, जब ब्राजील की टीम शुरुआती मुकाबला जीतने में नाकाम रही.

ब्राजील के वर्ल्ड कप सफर की बात करें, तो 40 साल पहले 1978 के वर्ल्ड कप के ग्रुप-3 के अपने शुरुआती मैच में ब्राजील को स्वीडन ने 1-1 से बराबरी पर रोका था.

आंकड़ों पर गौर करें, तो तीसरी बार ब्राजील की टीम वर्ल्ड कप का पहला मैच जीतने में असफल रही और तीनों ही मुकाबले ड्रॉ रहे.

1974: ब्राजील 0-0 युगोस्लाविया

1978: ब्राजील 1-1 स्वीडन

2018: ब्राजील 1-1 स्विट्जरलैंड

वर्ल्ड कप के सभी 21 संस्करणों की बात करें, तो ब्राजील ने 16 बार अपना पहला मैच जीता है, दो बार (1930 और 1934) गंवाया है और तीन बार ड्रॉ रहा है.

2018 वर्ल्ड कप- ब्राजील vs स्विट्जरलैंड : 1-1

ब्राजील ने पहले हाफ में फिलीपे काउटिन्हो के 17वें मिनट में किए गए गोल की मदद से हाफटाइम तक 1-0 से बढ़त बना ली थी, लेकिन ब्लादीमिर पेटकोविच की स्विट्जरलैंड टीम ने संयम नहीं खोया और मौके का इंतजार किया, उसके लिए बराबरी का गोल स्टीवन जुबेर ने 50वें मिनट में दागा.

पिछले विश्व कप में जर्मनी के हाथों सेमीफाइनल में 7-1 से शर्मनाक हार झेलने वाली ब्राजीली टीम ने लगातार आक्रामक खेल दिखाया और 17वें मिनट में काउटिन्हो के गोल के दम पर बढ़त बनाने में कामयाब रही. बॉक्स के बाईं ओर मिली गेंद पर बार्सिलोना के इस स्ट्राइकर ने तूफानी शॉट लगाया और विरोधी गोलकीपर उसे रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहे.

जूतों के अलावा और भी कारण थे भारत के विश्व कप में नहीं खेल पाने के

ब्रेक से पहले आखिरी मिनट में नेमार के पास गोल करने का सुनहरा मौका था, लेकिन थियागो सिल्वा से मिले पास पर वह गोल करने में नाकाम रहे. दुनिया के इस सबसे महंगे खिलाड़ी को पहले हाफ में स्विस खिलाड़ियों ने बांधे रखा.

दूसरे हाफ के पांचवें ही मिनट में जुबेर ने शेरदान शाकिरी के कॉर्नर पर स्विट्जरलैंड के लिए बराबरी का गोल दाग दिया. ब्राजीली खिलाड़ियों ने शिकायत भी की कि जुबेर ने डिफेंडर मिरांडा को धक्का दिया था, लेकिन मैक्सिको के रेफरी सेजार रामोस ने इसे खारिज कर दिया.

क्या आप बीमार हैं? अब गूगल बताएगा आपके ठीक होने की सम्भावना

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फेसबुक पर कई ऐसे ऐप आ गए हैं जो आपको बताते हैं की आप कितने साल तक जियेंगे पर आपको किसी ने ये नहीं बताया होगा की अगर आप आप बीमार हैं तो आपके ठीक होने की कितनी सम्भावना है। अब गूगल ने इसी तकनीक पर काम करते हुए एक ऐसी ऐप लांच करने को तैयार है जो आपको ये बताएगा की आप अगर बीमार है तो आपके ठीक होने की है गूगल ने इस पर बाकायदा शोध भी किया है

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क्या है ऐसी तकनीक जानिए

इसके लिए एक ऐसी महिला का चयन किया गया जिसे स्तन कैंसर था। महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों की टीम ने महिला का रेडियोलॉजी स्कैन किया। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि महिला के जीवित रहने की संभावना केवल 9.3 फीसदी ही है। इसके बाद गूगल से मदद ली गई, इसमें बताया गया कि महिला के बचने की संभावना 19.9 फीसदी है। इसके कुछ दिनों बाद महिला की मृत्यु हो गई।’

इस महिला के सभी रिसर्च को गूगल ने अपने पास रखा। इसके बाद बताया गया कि गूगल ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिससे किसी भी शख्स की मौत के बारे में जानकारी मिल सके। इसके जरिए यह पता चलेगा कि किसी व्यक्ति के पास कितने फीसदी जिंदा रहने का मौका है। इस बात का भी पता लगाया जा सकेगा कि कोई बीमार व्यक्ति कब तक अस्पताल में रहने वाला है।

गूगल के रिसर्च

गूगल के रिसर्च पेपर के सह-लेखक स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर निगम शाह ने बताया कि यह एक अनुमानित मॉडल है। इसके सटीक होने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। ब्लूमबर्ग न्यूज को जेफ डीन ने बताया कि गूगल का अगला कदम भविष्यवाणी प्रणाली को क्लिनिक की ओर ले जा रहा है। यह ऐसी एआई तकनीक पर काम कर रहा है जो किसी बीमारी या किसी लक्षण के बारे में सटीक जानकारी दे सकता है।

इसके अलावा अस्पताल, डॉक्टर आदि कई सालों से इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड और अन्य रोगी के रिकार्ड को भी जमा करके उसपर रिसर्च कर रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यदि सही समय पर अधिक जानकारी सामने आ जाए तो मरीज को जिंदा बचाया जा सकता है। लेकिन मौजूदा समय में जिन तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है, वे काफी महंगी हैं।

इस तकनीक के बार में गूगल के एक कर्मचारी ने बताया कि कंपनी के भीतर इसे लेकर काफी उत्साह है। उन्हें एआई के लिए एक नई एप्लीकेशन मिल गई है।

धरने पर बैठे मनीष सिसोदिया की हालत ख़राब, हॉस्पिटल में किया गया भर्ती

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नई दिल्ली

दिल्ली में एलजी के ऑफिस में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ धरने पर बैठे डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया की तबीयत बिगड़ गई है। जिसके चलते उन्हें LNJP हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया है। इससे पहले सतेंद्र जैन की तबियत ख़राब होने का मामला सामने आया था पर किसी ने सुध नहीं ली। अरविंद केजरीवाल ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी। इससे पहले बताया गया था कि धरने के छठे दिन सिसोदिया की हालत बिगड़ गई है। उनके खून के सैंपल में कीटोन लेवल 7.4 तक पहुंच गया था। सामान्य स्तर पर यह जीरो होना चाहिए। +2 को भी खतरे का निशान माना जाता है। डॉक्टरों ने एलजी हाउस जाकर सिसोदिया का चेकअप किया था, जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल शिफ्ट करने का फैसला लिया।

फुटबॉल के लिए हर तरफ से आग लगनी चाहिए

बता दें कि धरने पर बैठने को लेकर सोमवार को हाई कोर्ट ने केजरीवाल से कई तल्ख सवाल किए हैं। बीजेपी के विधायक विजेंदर गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को पूछा कि धरने से पहले एलजी से अनुमति क्यों नहीं ली गई। गुप्ता ने दिल्ली के सीएम और मंत्रियों के धरना खत्म कराने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले का समाधान होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई अब 22 जून को होगी।
इसपर सफाई देते हुए आप नेता संजय सिंह ने कहा था कि धरने का कदम बाकी सभी लोकतांत्रिक रास्ते अपनाने के बाद लिया गया है। संजय सिंह ने कहा, ‘जो कुछ कोर्ट ने पूछा है उसका जवाब दिया जाएगा। हम बताना चाहते हैं कि धरना देने की नौबत एक दिन में नहीं आई, सभी लोकतांत्रिक रास्ते अपनाए गए, जब कुछ काम नहीं आया तो ये अंतिम रास्ता अपनाया गया।’

क्या है मामला

अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सत्येन्द्र जैन और गोपाल राय के साथ मिलकर पिछले आठ दिन से उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय में धरने पर बैठे हैं। वे उपराज्यपाल से आईएएस अधिकारियों को निर्देश देने की मांग कर रहे हैं कि अधिकारी अपनी ‘हड़ताल’ वापस ले लें और घर-घर राशन पहुंचाने की योजना स्वीकार कर लें।

जूतों के अलावा और भी कारण थे भारत के विश्व कप में नहीं खेल पाने के

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अशोक किंकर

हर चार वर्ष बाद वर्ल्ड कप फुटबॉल के आयोजन से कुछ सप्ताह पूर्व यह चर्चा शुरू हो जाती है कि काश! भारतीय टीम 1950 में ब्राजील की मेजबानी में ‘साम्बा पार्टी’ का हिस्सा बन गई होती तो शायद दुनिया में भारतीय फुटबॉल की तस्वीर अलग ही होती। वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के खेलने का सपना देखने वाले फुटबॉल प्रेमियों को यह बड़ा अजीब सा लगता है कि 1950 में भारतीय टीम वर्ल्ड कप के फाइनल राउंड के लिए क्वालिफाई कर गई थी लेकिन फिर भी उसने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में शिरकत नहीं की। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं। सबसे बड़ा कारण यह बताया जाता है कि भारतीय खिलाड़ी नंगे पैर फुटबॉल खेला करते थे और फीफा का नियम था कि बिना जूते पहने कोई टीम खेल नहीं सकती। वैसे यह भी कहा जाता है कि भारत को एक वर्ष पूर्व यह सूचना दे दी गई थी कि उसे वर्ल्ड कप में खेलना है। इसे देखते हुए कुछ भारतीय खिलाड़ियों ने जूते पहन कर खेलना भी शुरू कर दिया था। शेष खिलाड़ी भी जूते पहनकर खेलने के अभ्यस्त कुछ माह में हो सकते थे, यह कोई बड़ी बात नहीं थी

फुटबॉल के लिए हर तरफ से आग लगनी चाहिए

ओलंपिक में खेलने पर रोक न लगा दी जाए

एक संदेह यह भी जताया जाता है कि यह डर था कि वर्ल्ड कप में खेलने की वजह से भारतीय खिलाड़ियों को कहीं प्रोफेशनल न मान लिया जाए और उन पर ओलंपिक में खेलने पर रोक न लगा दी जाए। इसके साथ यह तर्क भी दिया जाता है कि आॅल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन का यह डर था कि वर्ल्ड कप के मैचों में कहीं भारतीय टीम की दुर्गति न हो जाए क्योंकि उन दिनों भारत में घरेलू मैच 70 मिनट के खेले जाते थे और वर्ल्ड कप में मैच 90 मिनट के होते थे। हमारे फुटबॉल अधिकारियों को यह डर था कि कमजोर स्टेमिना वाले भारतीय खिलाड़ी 90 मिनट के मुकाबले में थकने लगेंगे और अंतिम मिनटों में उन पर मजबूत टीमें काफी गोल कर सकती थीं।
वैसे आॅल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन ने टीम न भेजने के पीछे जो कारण बताया था उसे आसानी से पचाया नहीं जा सकता है। यह कारण था ‘टीम के चयन में असहमति और अभ्यास के लिए पर्याप्त समय न होना।’ उस वर्ल्ड कप के क्वालीफाइंग दौर में 33 टीमों ने शिरकत की थी। भारतीय टीम को बर्मा और फिलीपींस के साथ गु्रप-10 मे ं रखा गया था लेकिन ये दोनों ही टीमे प्रतियोगिता से हट गर्इं और भारत फाइनल दौर के लिए स्वत: ही क्वालीफाई कर गया। उसे ड्रॉ में पूल -3 में स्वीडन, इटली और पराग्वे के साथा रखा गया।

भारत उससे संघर्ष न कर सके

भारत को अपना पहला मैच 25 जून को पराग्वे के खिलाफ खेलना था। उन दिनों पराग्वे ऐसी टीम नहीं थी भारत उससे संघर्ष न कर सके। इटली की टीम भी बहुत मजबूत नहीं थी। ब्राजील को भारतीय टीम पसंद थी।1948 के लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम फ्रांस के खिलाफ बहुत संघर्ष करते हुए1-2 से हारी थी। वो भी तब जब शैलेन मन्ना और महाबीर प्रसाद गोल नहीं कर सके थे। ब्राजीली फुटबॉल प्रेमी हर उस टीम को पसंद करते रहे हैं जो छोटे-छोटे पासों, गेंद नियंत्रण, ड्रिबलिंग और शारीरिक झोल झपटों से विपक्षियों को गच्चा देन की कला में महाराथ प्राप्त हो। इसलिए ब्राजील के फुटबॉल अधिकारियों को लगता था कि भारतीय टीम उनके देश में खेलते हुए बहुत लोकप्रिय होती।
अंतिम क्षणों में वर्ल्ड कप से हटने के कारण फीफा आॅल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन से खासा नाराज हो गया था और 1954 में हुए अगले वर्ल्ड कप में भारत की एंट्री को नकार दिया गया था। भारत के साथ फीफा की नाराजगी दशकों तक चली। अंतत: 1986 में भारत को वर्ल्ड कप क्वालीफाइंग राउंड में खेलने का मौका मिला और यह सिलसिला अब भी जारी है लेकिन अभी तक भारत फाइनल राउंड में खेल नहीं सका है।

फुटबॉल के लिए हर तरफ से आग लगनी चाहिए

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फुटबॉल का वर्ल्ड कप चार वर्ष में एक बार आता है। इसमें दुनिया भर के स्टार खिलाड़ियों को एक साथ देखने का मौका होता है। मैं सारे स्टारों को सारी टीमों को एक दूसरे के खिलाफ खेलते हुए देखना चाहता हूं। अर्जेंटीना का लियोनेल मेसी वो स्टार खिलाड़ी है जिसे मैं खेलते हुए देखना सबसे ज्यादा पसंद करता हूं। मैं चाहता हूं कि स्पेन की टीम इस बार चैंपियन बने। भारतीय फुटबॉल बढ़ रहा है। खिलाड़ी, कोच, दर्शक, मीडिया, सरकार हर तरफ से आग लगनी चाहिए। फुटबॉल के लिए हम सभी को मिलकर आगे आना चाहिए। वर्ल्ड कप आता है हर खेल प्रेमी सोचता है कि हमारी
टीम इसमें क्यों नहीं खेल रही है? वर्ल्ड कप तो दूर हम अभी एशिया में टॉप-10 में भी नहीं हैं। हमें पहले एशिया में टॉप-10 में आना होगा। इसके बाद टॉप-5 का लक्ष्य होना चाहिए। इसमें भी वक्त लगेगा। इसके लिए हमें जापान, साउथ कोरिया और ईरान जैसी टीमों से लगातार हर दो माह में मैच खेलने होंगे। हमारे बच्चों को अपने माता-पिता और खेल प्रेमियों का समर्थन चाहिए। मैं तीस साल की उम्र पार कर चुका हूं। थोड़ा बूढ़ा भी हो रहा हूं।

उस दिन टाइम से ब्रेकफास्ट नहीं किया था इसलिए वो भावुकतापूर्ण वीडियो बनाकर लोगों से अपील कर डाली कि इंटरकॉंटिनेंटल कप टूर्नामेंट में टीम का हौसला बढ़ाने के लिए स्टेडियम आओ, भले ही हमारी आलोचना करो पर मैच देखने आओ। वैसे मैं अभी खेलना जारी रखूंगा।

टूर्नामेंट में बहुत शानदार प्रदर्शन

हमारी टीम ने इस टूर्नामेंट में बहुत शानदार प्रदर्शन किया। हारे भी और जीते भी। मेरा सपना है कि हमारे देश में जो भी बच्चा खेलना चाहे उसे कोचिंग पाने का मौका मिलना चाहिए। ओलंपिक आता है तो हम कहते हैं कि इतने कम पदक क्यों मिले हैं? लेकिन क्या हमारे देश में बच्चों को मौका मिल रहा है। इस बार फीफा की तरफ से दुनिया भर से चुने हुए 64 बच्चों को मैच बॉल कैरियर के रूप में हर मैच में मैदान में उतरने का मौका मिल रहा है। ये नजदीक से वर्ल्ड कप के मैच देखेंगे। भारत से भी दो बच्चे इस भूमिका के लिए चुने गए हैं। इनमें एक लड़का और एक लड़की है। इनक लिए यह ऐतिहासिक मौका है, ये वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। मुझे इनसे ईर्ष्या हो रही है। ये मौका बीस साल पहले तब क्यों नहीं आया था जब मै दस वर्ष का था। इसके लिए मैं कुछ भी कर जाता। इनकी उम्र में मैं इतना ज्ञानी नहीं था। जब ये बच्चे वापस आएंगे तो बहुत ज्ञानी होंगे। मेरे माता-पिता फुटबॉल खेलते रहे हैं मैं उन्हें बताता हूं कि उनका साथ मेरे लिए कितना महत्वपूर्ण है। क्या आपको कभी आपके बच्चे ने बताया है कि वो क्या करना चाहता है। आपको उसका समर्थन करना चाहिए। मेरे माता-पिता ने मेरा बहुत साथ दिया है इसीलिए मैं यहां तक पहुंच सका हूं। वो मेरे दोस्त, समर्थक और आलोचक हैं।

बाबा राम रहीम जैसे साधुओं से समाज को सावधान करेंगे- एन.सी. बंसल, निर्माता

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नईदिल्ली-

प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली में आर के एफएमए प्रोडकशन्स के बनैर तले फिल्म बनाने का ऐलान किया जिसका थीम बाबा का कारगुजारियों पर आधारित होगा।

तथा कथित धर्म गुरु बाबा राम रहीम की जीवनी पर आधारित एक फीचर फिल्म बनाने की घोषणा हुई। इस अवसर पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोलते हुए फिल्म के निर्माता श्री एन. सी बंसल ने कहा कि बड़े बजट की यह फिल्म ‘कलयुग का रावण’, जनता के सामने डेरा सच्चा सौदा और बाबा राम रहीम के जीवन से प्रभावित होकर बनाई जा रही है। एन. सी बंसल ने फिल्म के थीम के बारे में बताते हुए कहा कि आज ऐसी फिल्म की सख्त आवश्यकता है जिससे की समाज को आगाह किया जाए। जिन्होंने कई ऐसे कार्य किए जिससे हमारा समाज दूषित हुआ। निर्देशक वरुण खन्ना ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि फिल्म तमाम नाटकीय घटनाक्रमों को पूरी तीव्रता के साथ दिखाएगी और मूल कहानी से निश्चित तौर पर इंसाफ करेगी।

इस फिल्म के सह-निर्माता श्री नलिन सिंह है। इसके संभावित कलाकारों में बाबा राम रहीम के रोल के लिए जाने माने टीवी कलाकार फूल सिंह और स्टार कलाकार के रूप में बॉलीवुड के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता राजपाल यादव का नाम संभावित है।

गौरतलब है कि ऑडिशन और स्क्रीन टेस्ट फेम फाइंर्डस करेगा और 2018 के अंत तक यह रिलीज हो जाएगी।