मास्क पहनकर करें सहयोग, टूटेगी कोरोना की चेन

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आपके स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है मास्क पहनना

चौक-चौराहों पर अभियान के दौरान प्रशासन का करें सहयोग

बांका, 1 दिसंबर

कोरोना की दूसरी खेप की आशंका के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है. जिले में जगह-जगह पर अभियान चलाकर लोगों से मास्क पहनने की अपील की जा रही है. जो मास्क नहीं पहने रहते हैं उन्हें जुर्माना भी किया जा रहा है. वहीं कई जगहों पर कोरोना की जांच भी चल रही है. इस दौरान देखा जा रहा है कि कई लोग स्वास्थ्य विभाग के कर्मी या फिर प्रशासन के सदस्यों से उलझ जाते हैं. ऐसे लोगों को यह समझने की जरूरत है कि यह अभियान आपके लिए ही चल रहा है. मास्क पहनेंगे तो आप ही सुरक्षित रहेंगे. इसलिए कोरोना जांच में प्रशासन को सहयोग करने की जरूरत है. इससे कोरोना की चेन टूटेगी.

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि लोगों को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए. हाल ही में चुनाव और त्यौहारों का मौसम समाप्त हुआ है. लोग भीड़भाड़ में इकट्ठे हुए हैं. ऐसे में कोरोना की दूसरी खेप की आशंका है. यही वजह है कि जगह-जगह पर अभियान चलाकर लोगों से मास्क पहनने की अपील की जा रही है. साथ ही कोरोना की जांच भी बढ़ा दी गई है. इसमें लोगों को सहयोग करना चाहिए. उन्हें समझना होगा ऐसा करने से उनका ही भला होगा.

मास्क नहीं पहनना चाहते हैं तो घर से कम निकले: डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि अगर आप मास्क नहीं पहनना चाहते हैं तो घर से कम निकले. बहुत जरूरी पड़ने पर ही घर से निकला करें. साथ ही भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचे. हर हाल में 2 गज शारीरिक दूरी का पालन करें. ऐसा करने से आप भी संक्रमित होने से बच जाएंगे और आप के जरिए दूसरे में भी संक्रमण नहीं हो सकेगा.

लक्षण दिखे तो कराए जांच: डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि अगर आप 3 दिन से अधिक समय से बुखार से पीड़ित हों, सांस लेने में तकलीफ हो रही हो या फिर अन्य कोई समस्या जिससे आभास हो कोरोना होने का तो तुरंत जांच करा लें. सही समय पर इलाज शुरू हो जाने से जल्द स्वस्थ हो जाएंगे और दूसरा में भी संक्रमण नहीं होगा.

बाहर से घर आने पर हाथ सैनिटाइज जरूर करें: डॉक्टर सुधीर कुमार चौधरी कहते हैं अभी के समय में बाहर से घर आने पर हाथों को अच्छी तरह से साबुन-पानी से धोएँ अथवा सैनिटाइज जरूर करें. साथ में हर 2 घंटे पर हाथ की 30 सेकंड तक सफाई करें. इसके अलावा हाथ से मुंह, नाक और आंख को टच नहीं करें. ऐसा करने से आप दूसरे के जरिए संक्रमित होने से बचे रहेंगे. कोरोना से बचाव का यही सबसे बड़ा कारगर उपाय है, इसलिए इन चीजों का पालन करें.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

मायागंज अस्पताल के आईसीयू में आज से सामान्य तौर पर गंभीर मरीजों का भी हो सकेगा इलाज

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अभी तक सिर्फ कोरोना मरीजों का ही आईसीयू में हो रहा था इलाज

कोरोना काल में आईसीयू में सामान्य मरीजों का इलाज हो गया था बंद

भागलपुर, 30 नवंबर

मायागंज अस्पताल के आईसीयू में आज से सामान्य बीमारी के गंभीर मरीजों का भी इलाज हो सकेगा. अभी तक सिर्फ कोरोना के गंभीर मरीजों का ही आईसीयू में इलाज हो रहा था. हाल के दिनों में सामान्य तौर पर गंभीर मरीजों के इलाज में परेशानी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है.
मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया कि कोरोना अस्पताल में तब्दील हो जाने के बाद मायागंज अस्पताल में सामान्य मरीजों के गंभीर रोगों का इलाज बंद कर दिया गया था. करोना का संक्रमण नहीं फैले, इसलिए यह कदम उठाया गया था. इस वजह से सिर्फ कोरोना के गंभीर मरीजों का ही इलाज हो रहा था. अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं और गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने में परेशानी हो रही थी. इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है.
अधीक्षक ने आईसीयू का किया निरीक्षण: सामान्य मरीजों के लिए आईसीयू चालू करने से 1 दिन पहले रविवार को अस्पताल अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने निरीक्षण किया. वहां पर व्यवस्था का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को इलाज के दौरान कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने को कहा. साथ ही सभी स्वास्थ्यकर्मियों को मास्क, ग्लव्स पहनने और समय-समय पर हैंड सैनिटाइज करने का निर्देश दिया. इसके अलावा आईसीयू में आने वाले मरीज और उसके परिजनों को भी कोरोना की गाइडलाइन का पालन कराने को कहा.

अभी गंभीर मरीजों को जाना पड़ता था सिलीगुड़ी या पटना: अभी मायागंज अस्पताल में आने वाले सामान्य गंभीर मरीजों को इलाज के लिए पटना या फिर सिलीगुड़ी जाना पड़ता था. आवागमन की सुविधा पूरी तरह से बहाल नहीं होने से मरीजों एवं उनके परिजनों को आने-जाने में परेशानी हो रही थी. अब जब मायागंज अस्पताल की आईसीयू सामान्य मरीजों के लिए चालू हो गया तो उन्हें इन परेशानियों से छुटकारा मिलेगा.

बिहार झारखंड के 15 जिलों से आते हैं मरीज: मायागंज अस्पताल में इलाज कराने के लिए बिहार और झारखंड के 15 जिलों के मरीज आते हैं. पूर्वी बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल होने के कारण भागलपुर के अलावा कोसी- सीमांचल के सभी जिलों से मरीज इलाज कराने के लिए यहां पर आते हैं. इसके अलावा झारखंड के गोड्डा, साहिबगंज और दुमका से भी बड़ी संख्या में इलाज कराने के लिए लोग यहां आते हैं.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

साथ उठने-बैठने से नहीं होता है एड्स

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एड्स दिवस आज

एड्स को लेकर भ्रम को करें दूर, पीड़ित से नहीं करें भेदभाव
लक्षण दिखे तो इलाज शुरू करवाएं, नहीं करें किसी तरह का संकोच

बांका, 30 नवंबर।
विश्व एड्स दिवस 1 दिसम्बर को मनाया जाएगा। इस वर्ष का थीम एचआईवी/एड्स महामारी समाप्त करना: लचीलापन और प्रभाव रखा गया है। एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक दिसंबर को एड्स दिवस मनाया जाता है। हर साल इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग और तमाम संगठन एचआईवी महामारी की ओर हम सभी को ध्यान दिलाता है। एचआईवी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रयास किया जाता है। इसे रोकने के लिए कदम उठाया जाता है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या भ्रम को लेकर है।
रोगी के साथ उठने-बैठने से एड्स नहीं फैलता–
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कई लोग सोचते हैं कि एड्स रोगी के साथ उठने-बैठने से यह रोग फैलता है जो कि पूरी तरह से गलत है। यह बीमारी छुआछूत की नहीं है। इसलिए घर या ऑफिस में साथ-साथ रहने से, हाथ मिलाने से, कमोड, फोन या किसी के कपड़े से या फिर मच्छर के काटने से नहीं होता है। इसलिए एड्स के मरीजों से किसी तरह का भेदभाव नहीं करें और अगर किसी में एड्स के लक्षण दिखाई पड़े तो तत्काल इलाज शुरू करवाएं। किसी तरह का संकोच नहीं करें।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को करता है कमजोर:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि ह्यूमन इम्यूनो डीफिसिएंसी वायरस यानी एचआईवी इंफेक्शन से होने वाली गंभीर बीमारी है। इसे आम बोलचाल में एड्स यानी एक्वायर्ड इम्यून डीफिसिएंसी सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है। इसमें वायरस व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है, जिसकी वजह से शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में सक्षम नहीं रह पाता है।

असुरक्षित यौन संबंध से फैलता है एड्स:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि आमतौर पर असुरक्षित यौन संबंध बनाने से लोग एड्स की चपेट में आते हैं। समलैंगिकता की वजह से भी लोग एड्स से पीड़ित हो जाते हैं। इसके अलावा इंफेक्शन से भी एड्स फैलता है। इसलिए एड्स के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। लोगों को कंडोम का इस्तेमाल करने या फिर असुरक्षित यौन संबंध नहीं बनाने के प्रति समझाकर ही इस पर काबू किया जा सकता है।

इससे बचें–
-ब्लड-ट्रांसफ्यूजन के दौरान शरीर में एचआईवी संक्रमित रक्त के चढ़ाए जाने से.
-एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति पर इस्तेमाल की गई इंजेक्शन की सुई का इस्तेमाल करने से.
-एचआईवी पॉजिटिव महिला की गर्भावस्था या प्रसव के दौरान या फिर स्तनपान कराने से भी नवजात शिशु को यह मर्ज हो सकता है
-इसके अलावा रक्त या शरीर के अन्य द्रव्यों जैसे वीर्य के एक दूसरे में मिल जाने से, दूसरे लोगों के ब्लेड, उस्तरा और टूथब्रश का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए .

ये हैं लक्षण-,
-एड्स होने पर मरीज का वजन अचानक कम होने लगता और लंबे समय तक बुखार हो सकता है.
-काफी समय तक डायरिया बना रह सकता है।
-शरीर में गिल्टियों का बढ़ जाना व जीभ पर भी काफी जख्म आदि हो सकते हैं.
जब इस तरह के लक्षण दिखे तो तुरंत अपनी जांच करवा लें।

एड्स से संबंधित जांच
-एलिजा टेस्ट
-वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट
-एचआईवी पी-24 ऐंटीजेन
(पी.सी.आर.)
-सीडी-4 काउंट

डॉक्टर के निर्देश पर अमल करें:
जांच की सुविधा बांका सदर अस्पताल में उपलब्ध है। अगर लक्षण दिखे तो भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल में जाकर अपना इलाज तत्काल शुरू करवाएं। वहां पर एचएएआरटी (हाइली एक्टिव ऐंटी रेट्रो वायरस थेरैपी) एड्स सेंटर पर नि:शुल्क इलाज उपलब्ध है। डॉ. चौधरी कहते हैं कि यह एक नया साधारण व सुरक्षित उपचार है। एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए आशावान होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे भी लोग हैं जो एचआईवी/एड्स से पीड़ित होने के बावजूद पिछले 10 सालों से जी रहे हैं। अपने डॉक्टरों के निर्देशों पर पूरा अमल करें। दवाओं को सही तरीके से लेते रहना और एक स्वस्थ जीवनचर्या बनाये रखने से आप इस रोग को नियंत्रित कर सकते हैं।
कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन,-
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

ईसीसीई के लिए आईसीडीएस बिहार को मिला प्रतिष्ठित स्कोच सिल्वर अवार्ड

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आइसीडीएस द्वारा ईसीसीई के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान

पटना, 30 नवंबर: समाज कल्याण विभाग अंतर्गत समेकित बाल विकास सेवा आइसीडीएस को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ई.सी.सी.ई.) के क्षेत्र में किये गए सराहनीय कार्य हेतु प्रतिष्ठित स्कॉच सिल्वर अवार्ड से सम्मानित किया गया है. कोरोना संक्रमण काल में आंगनबाड़ी द्वारा लाभुकों तक पहुंचायी गयी विभिन्न सेवाओं को सराहते हुए डिजिटल केटेगरी में यह अवार्ड बच्चों के ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा” के लिए दिया गया है. आइसीडीएस की ओर से निदेशक आलोक कुमार यादव ने सर्वश्रेष्ठ गर्वेनेंस के लिए इस स्कॉच सिल्वर अवार्ड को प्राप्त किया है.

थॉउट लीडरशिप थ्रू इंक्लूज़न की थीम के साथ शासन व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए यह अवार्ड योजनाओं के धरातल पर बेहतर तरीके से उतारने, योजनाओं का अधिकाधिक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और बेहतर गर्वेनेंस को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड दिया जा रहा है.

आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका हुई महत्वपूर्ण:
आइसीडीएस के अंतर्गत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी के माध्यम से मिलने वाली सेवाओं को प्रदान करने में आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वहीं लाभुक तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए राज्य व जिला स्तर पर पदाधिकारियों द्वारा प्रभावी तरीके से अनुश्रवण की भी तारीफ की गयी है.

कोविड के दौरान ईसीसीई द्वारा व्यवहार परिवर्तन:
कोविड 19 के दौरान बच्चों के व्यवहार को लेकर सर्तक रहने तथा अभिभावकों द्वारा बच्चों को सुरक्षात्मक वातावरण मुहैया कराते हुए अत्यंत संयमित और उत्सावर्धक व्यवहार करने पर जागरूकता लाने को काम किया गया. घर में नीरस माहौल एवं बच्चों में अवसाद नहीं हो, इसके लिए अभिभावकों को सुझाव दिये गये जिनमें बच्चों को विकासात्मक व रचनात्मक गतिविधियों में शामिल कर उनके दिनचर्या को व्यवस्थित करने की विभिन्न तौर तरीके बताये गये. इस आशय हेतु ICDS बिहार के द्वारा पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) से जुड़ी हर जानकारी घर बैठे प्राप्त करने के लिए निशुल्क: नंबर 18001215725 एवं “मिस्ड कॉल दो कहानी सुनो” के लिए निशुल्क: नंबर 08068264449 जारी किया गया है साथ ही बच्चों के साथ गतिविधि करने हेतु ECCE कलेंडर एवं डिजिटल सामग्रियों की उपलब्धता ICDS वेबसाइट पर जनमानस के प्रयोग हेतु करायी गयी है I इनमें व्यायाम, चित्रकारी, कहानी सुनना, गीत गाना व रोल प्ले जैसी प्रक्रियाओं को शामिल किया. वहीं बच्चों के साथ सकारात्मक संवाद पर बल दिया गया.

जानिये क्या है स्कॉच अवार्ड:
स्कॉच अवार्ड यह अवार्ड स्वतंत्र संगठन स्कॉच डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन और निगरानी के लिए प्रदान किया जाता है. अवार्ड देने की शुरूआत 2003 से की गयी. देश में एक सुदृढ़ शासन प्रणाली बनाये रखने और इस कार्य में लगे व्यक्तियों, परियोजनाओं व संस्थानों के प्रयासों की सराहना के लिए शुरू की गयी है. स्कॉच डेवलपमेंट फांउडेशन की ओर से यह पुरस्कार वित्तीय, सामाजिक व डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के लिए दिया जाता है. अवार्ड का उद्देश्य व्यवस्था में सकारात्मक व उल्लेखनीय बदलाव लाने के लिए पारदर्शिता व सहभागितापुर्ण लोकतंत्र सुनिश्चित करना है. इस फाउंडेशन के सदस्यों ने देश भर में घूम घूम कर सामाजिक, आर्थिक व डिजिटल समावेशन को लेकर गहन अध्यन किया और बेस्ट प्रैक्टीसेज का दस्तावेजीकरण किया है.

चुनौतियों का सामना करने में मिलेगा बल:
कोरोना संकट काल में चुनौती के बावजूद सरकार द्वारा लाभुकों तक विभिन्न योजनाओं व सेवाओं का लाभ पहुंचाने तक नये रास्ते निकाले गये और इस काम का सुचारू क्रियान्वयन कर एक कृतिमान स्थापित किया गया है. जिला, प्रखंड व सामुदायिक स्तर पर किये गये इन प्रयासों के बाद अवार्ड से सम्मानित किये जाने को लेकर विभाग के लोग भी काफी उत्साहित हैं. इस अवार्ड से विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को भी भविष्य में योजना व सेवाओं के क्रियान्वयन में आने वाले चुनौतियों का सामना करने में बल मिलेगा. स्कॉच अवार्ड बेटर गर्वेनेंस को लेकर परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा. इस कार्य को समुदाय स्तर पर क्रियान्वित करने में ICDS कार्यकर्त्ता एवं सहयोगी संस्थाओं की अहम् भूमिका रही है I

आइसीडीएस को प्रतिष्ठित स्कॉच सिल्वर अवार्ड से नवाजा गया

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ईसीसीई के लिए आईसीडीएस बिहार को मिला प्रतिष्ठित स्कोच सिल्वर अवार्ड

आइसीडीएस द्वारा ईसीसीई के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान

पटना, 29 नवंबर: समाज कल्याण विभाग अंतर्गत समेकित बाल विकास सेवा आइसीडीएस को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ई.सी.सी.ई.) के क्षेत्र में किये गए सराहनीय कार्य हेतु प्रतिष्ठित स्कॉच सिल्वर अवार्ड से सम्मानित किया गया है. कोरोना संक्रमण काल में आंगनबाड़ी द्वारा लाभुकों तक पहुंचायी गयी विभिन्न सेवाओं को सराहते हुए डिजिटल केटेगरी में यह अवार्ड बच्चों के ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा” के लिए दिया गया है. आइसीडीएस की ओर से निदेशक आलोक कुमार यादव ने सर्वश्रेष्ठ गर्वेनेंस के लिए इस स्कॉच सिल्वर अवार्ड को प्राप्त किया है.

थॉउट लीडरशिप थ्रू इंक्लूज़न की थीम के साथ शासन व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए यह अवार्ड योजनाओं के धरातल पर बेहतर तरीके से उतारने, योजनाओं का अधिकाधिक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और बेहतर गर्वेनेंस को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड दिया जा रहा है.

आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका हुई महत्वपूर्ण:
आइसीडीएस के अंतर्गत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी के माध्यम से मिलने वाली सेवाओं को प्रदान करने में आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वहीं लाभुक तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए राज्य व जिला स्तर पर पदाधिकारियों द्वारा प्रभावी तरीके से अनुश्रवण की भी तारीफ की गयी है.

कोविड के दौरान ईसीसीई द्वारा व्यवहार परिवर्तन:
कोविड 19 के दौरान बच्चों के व्यवहार को लेकर सर्तक रहने तथा अभिभावकों द्वारा बच्चों को सुरक्षात्मक वातावरण मुहैया कराते हुए अत्यंत संयमित और उत्सावर्धक व्यवहार करने पर जागरूकता लाने को काम किया गया. घर में नीरस माहौल एवं बच्चों में अवसाद नहीं हो, इसके लिए अभिभावकों को सुझाव दिये गये जिनमें बच्चों को विकासात्मक व रचनात्मक गतिविधियों में शामिल कर उनके दिनचर्या को व्यवस्थित करने की विभिन्न तौर तरीके बताये गये. इस आशय हेतु ICDS बिहार के द्वारा पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) से जुड़ी हर जानकारी घर बैठे प्राप्त करने के लिए निशुल्क: नंबर 18001215725 एवं “मिस्ड कॉल दो कहानी सुनो” के लिए निशुल्क: नंबर 08068264449 जारी किया गया है साथ ही बच्चों के साथ गतिविधि करने हेतु ECCE कलेंडर एवं डिजिटल सामग्रियों की उपलब्धता ICDS वेबसाइट पर जनमानस के प्रयोग हेतु करायी गयी है I इनमें व्यायाम, चित्रकारी, कहानी सुनना, गीत गाना व रोल प्ले जैसी प्रक्रियाओं को शामिल किया. वहीं बच्चों के साथ सकारात्मक संवाद पर बल दिया गया.

जानिये क्या है स्कॉच अवार्ड:
स्कॉच अवार्ड यह अवार्ड स्वतंत्र संगठन स्कॉच डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन और निगरानी के लिए प्रदान किया जाता है. अवार्ड देने की शुरूआत 2003 से की गयी. देश में एक सुदृढ़ शासन प्रणाली बनाये रखने और इस कार्य में लगे व्यक्तियों, परियोजनाओं व संस्थानों के प्रयासों की सराहना के लिए शुरू की गयी है. स्कॉच डेवलपमेंट फांउडेशन की ओर से यह पुरस्कार वित्तीय, सामाजिक व डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के लिए दिया जाता है. अवार्ड का उद्देश्य व्यवस्था में सकारात्मक व उल्लेखनीय बदलाव लाने के लिए पारदर्शिता व सहभागितापुर्ण लोकतंत्र सुनिश्चित करना है. इस फाउंडेशन के सदस्यों ने देश भर में घूम घूम कर सामाजिक, आर्थिक व डिजिटल समावेशन को लेकर गहन अध्यन किया और बेस्ट प्रैक्टीसेज का दस्तावेजीकरण किया है.

चुनौतियों का सामना करने में मिलेगा बल:
कोरोना संकट काल में चुनौती के बावजूद सरकार द्वारा लाभुकों तक विभिन्न योजनाओं व सेवाओं का लाभ पहुंचाने तक नये रास्ते निकाले गये और इस काम का सुचारू क्रियान्वयन कर एक कृतिमान स्थापित किया गया है. जिला, प्रखंड व सामुदायिक स्तर पर किये गये इन प्रयासों के बाद अवार्ड से सम्मानित किये जाने को लेकर विभाग के लोग भी काफी उत्साहित हैं. इस अवार्ड से विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को भी भविष्य में योजना व सेवाओं के क्रियान्वयन में आने वाले चुनौतियों का सामना करने में बल मिलेगा. स्कॉच अवार्ड बेटर गर्वेनेंस को लेकर परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा. इस कार्य को समुदाय स्तर पर क्रियान्वित करने में ICDS कार्यकर्त्ता एवं सहयोगी संस्थाओं की अहम् भूमिका रही है I

किसान का दर्द देश की आत्मा का दर्द- चिरंजीत कुमार शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय किसान संगठन

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नईदिल्ली-

भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री चिरंजीत कुमार शर्मा से हमारे विशेष संवाददाता ने किसान आंदोलन के ऊपर चर्चा की जिसमें उन्होंने बताया कि देश के किसान जिन्हें अन्नदाताओं कहना भी अपने आप में न्यायोचित होगा की बात सरकार को प्राथमिकता से सुननी चाहिए।
केन्द्र सरकार को अहंकार से बाहर आकर ये सोचना चाहिए की ये सत्य है उन्होंने इस बिल को बनाने में बहुत जल्दी की और आनन-फानन में बिल बनाया जिसमें भारत के किसानों से कोई सलाह मशवरा नहीं किया गया, जिससे बिल बनाने में जो मंशा होनी चाहिए थी वो दिखाईं नहीं देती। जिससे किसान आहत हैं, जिसका परिणाम सामने दिखाई दे रहा है।
आपको जानकारी होनी चाहिए जिस किसान को हर सरकार ने हासिये पर रखा है, कोरोना काल में जब देश की हर व्यवस्था नकारात्मक जा रही थी और रेल से लगाकर सड़क, हवाई और इंडस्ट्री सभी बंद हो गये थे, तब भी किसानों ने खेतों में अपना पसीना बहाया और देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 4 प्रतिशत बढ़ाया यानी किसान जिसे सरकार हासिये पर रखती हैं वो देश की चार प्रतिशत अर्थव्यवस्था का योगदान देता है लेकिन इसके बदले में उन्हें क्या मिलता है भूख, गरीबी, पिछडापन और यदि वो अपनी आवाज उठाते हैं तो लाठी, ड़डें और सर्दी में ठंडे पानी की बौछार, आंसू गैस के गोले उसके बाद सरकार किसानों से हर वैधिक जिम्मेदारी निभाने की आशा करतीं हैं, लेकिन क्या सरकार और उसके वरिष्ठ राजनेता तक वह निभाते हैं इसका जवाब है नहीं निभाते।
अपने जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार समर्थन मूल्य की बात करतीं हैं लेकिन क्या सरकार ने ये सुनिश्चित किया की इससे नीचे खरीदने पर कोई कानूनी नियम तोड़ा माना जायेगा और उस पर जो उससे कम में खरीदेगा उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, यदि नहीं तो समर्थन मूल्य सिवाय चुनावी वादों के कुछ नहीं है और यदि हां तो बिहार में मक्का की फ़सल समर्थन मूल्य से कम में क्यों बिकी और यदि ऐसा हुआ तो सरकार ने क्या किया।

उन्होंने कहा कि किसान का दर्द देश की आत्मा का दर्द है। उसे सुनिए और बैठकर उनकी पीड़ा का समाधान कीजिये।
हो सकता है सरकार अपनी सोच में किसान का हित ही कर रही हो लेकिन अगर किसान सशंकित है तो यह सरकार की उस मंशा की हार है, सरकार के बिल की हार है और खुद सरकार की हार है कि उसने जिनके लिए यह बिल बनाया वो बिल उनकी किसी समस्या का समाधान करने में असफल है।

उन्होंने बताया कि किसान संगठन कोई राजनीतिक दल नहीं है और ना ही उनके प्रतिनिधि राजनेता है वो इस देश के वो नागरिक हैं जिन्हें अपनी बात रखने का उतना ही हक है जितना राजनीतिक दलों के राजनेताओं को है। मेरे दोस्तों मैं भारतीय किसान संगठन का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने पर भी अपने आपको असहाय महसूस कर रहा हूं और इस ठिठुरन भरी सर्दी में अपने किसान भाइयों को सड़कों पर देखकर बहुत व्यथित हूँ। मेरा केन्द्र सरकार से आग्रह है कि सरकार तुरंत हमारी पीड़ा समझे और हमारी व्यथा सुनने की पहल करते हुए हमारी समझे और अपनी मंशा हमे समझाए और एक दूसरे की मंशा, विपदा, संकोच समझकर एक ऐसा समाधान करे जिससे लगें हम उसी भारत सरकार से बात कर रहे हैं जिसको अगर किसान अपने वोटों से, अपने श्रम से, अपनी उगाये हुए अन्न से समर्थन नहीं करती तो ना सरकार बन पाती, ना कोरोना काल में भी देश पेट भर भोजन का पाता।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि रात से न्यूज चैनल पर सुन रहा था कि ये किसान नहीं है इनके पीछे कोई देश विरोधी लोग इस सहज आंदोलन का लाभ उठाकर देश को हानि ना पहुँचा सकता है, मेरी सभी किसान भाइयों से ये आग्रह है कि हमें सतर्क रहना है और अपने चारों तरफ देखना है कि कोई भी ऐसा व्यक्ति अगर हमारे बीच हैं तो उसने पकड़कर सुरक्षाबलों को सौंपा जाये ध्यान रखना कोई भी आंदोलन दंगा फसाद करने से अपनी जीत सुनिश्चित नहीं करता है अगर जीतना है और अपने मांगे मनवानी है तो हाथ जोड़कर अहिंसा के साथ डडे खाने है, तभी हमारी जीत सुनिश्चित होगी इसके साथ हमारा सरकार से भी आग्रह है कि ये जिम्मेदारी सभी की है सरकार की भी है कि वो अगर कोई असामाजिक तत्व आपको आंदोलन में शामिल लगता है तो आप शांति के साथ हमारे वरिष्ठ नेताओं से सम्पर्क करें अगर वो किसान नहीं है और असामाजिक गतिविधि कर रहा है तो हमारे सभी वरिष्ठ नेताओं आपका सहयोग करेंगे।

बढ़ी ठंड, रहें सतर्क और कोविड-19 से रहें दूर

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– गर्म कपड़े का करें उपयोग, लगाएँ धूप – सर्द हवाओं से बचें, गर्म व ताजा खाना खाएँ
लखीसराय, 27 नवंबर।ठण्ड लगातार बढ़ रही है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। ऐसे में हमें ठंड से सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, ठंड के साथ कोविड-19 के  संक्रमण की शिकायत भी बढ़ने लगी है। इससे बचाव का सबसे आसान और बेहतर उपाय सतर्कता ही है। इसलिए, सतर्क और सावधान रहकर कोविड-19 के दायरे से दूर रहें।
– संक्रमण की बढ़ रही है शिकायत, रहें सावधान :- जिला के सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि ठंड के साथ संक्रमण की शिकायत में भी वृद्धि होने लगी है। इसलिए, लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। इसके लिए लोगों को कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करना एवं ठंड से बचाव के लिए उपयुक्त गर्म कपड़े का उपयोग करना जरूरी है। – ठंड में संक्रमित को परेशानी का करना पड़ रहा सामना :- सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि ठंड के मौसम संक्रमित होने वाले व्यक्ति को स्वस्थ होने में काफी समय लग रहा है। जिसके परेशानी बढ़ रही है। दरअसल, सर्द मौसम में आम सर्दी-खाँसी भी जल्दी ठीक नहीं होती है। इसलिए, सतर्कता बरतें और इन परेशानियों से दूर रहें।
– अभी मास्क और दो गज की दूरी है जरूरी :- कोविड-19 के संक्रमण से दूर रहने के लिए सबसे आसान और बेहतर उपाय मास्क का उपयोग और दो गज की शारीरिक दूरी का पालन है। इसलिए, अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करें। दरअसल, मास्क के नियमित उपयोग से संक्रमण की संभावना ना के बराबर रहती है।
– साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल :- सिविल सर्जन के मुताबिक कोविड-19 से दूर रहने के लिए साफ-सफाई भी बेहद जरूरी है। इसलिए, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और मास्क का उपयोग के दौरान यह ध्यान रखें कि मास्क गंदा और फटा नहीं हो। इसके लिए मास्क को नियमित साफ करें और धूप में सुखाएं । साथ ही मास्क लगाने के बाद मास्क को छूने से बचें।
– गर्म व ताजा खाना का करें सेवन :- उनके अनुसार ठंड के मौसम में गर्म और ताजा खाना का ही सेवन करें। बासी खाना से बिलकुल दूर रहें। साथ ही हमेशा गर्म पानी पीने की कोशिश करें। इससे आप कोविड-19 के साथ-साथ ठंडजनित बीमारी से भी दूर रहेंगे।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :- – व्यक्तिगत साफ-सफाई और दो गज की  शारीरिक दूरी का रखें ख्याल।- बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से हाथ धोने की आदत डालें।- भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।- बाहरी खाना खाने से बचें।- मुँह, नाक और ऑख अनावश्यक नहीं छुएं और छूने के पहले हाथों को अच्छी तरह साफ करें।- यात्रा के दौरान आवश्यक गाइडलाइन का पालन करें।

ठंड में कोरोना से रहें सतर्क

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कोरोना के लक्षण में लगातार हो रही है बढ़ोतरीकोरोना मरीज को ठीक होने में लग रहा है ज्यादा वक्त
बांका, 27 नवंबर।मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। न्यूनतम पारा 10 डिग्री के नीचे चला गया है। ऐसे मौसम में लोग वैसे ही सर्दी, खांसी और बुखार की चपेट में आते हैं। इस वजह से कोरोना मरीजों की पहचान में थोड़ा सा समय लग जा रहा है। साथ ही कोरोना के लक्षण वाले मरीज भी ज्यादा मिलने लगे हैं।
कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए-शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना के लक्षण में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ठंड का मौसम शुरू हो जाने की वजह से लक्षण वाले मरीज ज्यादा मिल रहे हैं। इस मौसम में फ्लू के मामले ज्यादा आते हैं। इस वजह से कोरोना मरीजों की पहचान में भी देरी हो रही है,जो कि चिंताजनक है। इसलिए लोगों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए।
कोरोना मरीजों को ठीक होने में लग रहा है ज्यादा समय: डॉ चौधरी ने बताया कि पहले 10 दिन में कोरोना के मरीज स्वस्थ हो जा रहे थे, लेकिन अब ठीक होने में 15 से 20 दिन लग जा रहा है। इस वजह से मरीजों को दवा का ज्यादा डोज देना पड़ जा रहा है। इस वजह से भी मरीजों को परेशानी हो रही है। इसलिए सावधानी में ही बेहतरी है.
हर हाल में मास्क पहने और सामाजिक दूरी का पालन करें: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अगर आप दो लोग एक साथ हों और किसी ने भी मास्क नहीं पहना है तो कोरोना के संक्रमण की संभावना अधिक रहती है। अगर दोनों ने मास्क पहना हो तो भी थोड़ा संक्रमण की संभावना रहती है, लेकिन अगर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मास्क पहने हों तो संक्रमण की संभावना बिल्कुल शून्य हो जाती है। इसलिए मास्क पहनते हुए दो गज की सामाजिक दूरी का पालन अवश्य करें।
मुंह, नाक और आंख को हाथ से स्पर्श करने से बचें: डॉ. चौधरी कहते हैं कि कहीं से आने के बाद निश्चित तौर पर 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धो लें । हाथ धोने से पहले मुंह को नाक और आंख को हाथ से छूने से बचें। ऐसा करने से बाहर से हाथ के जरिए वायरस का शरीर के अंदर प्रवेश नहीं होगा। इससे आप संक्रमण से भी बचे रहेंगे।
कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल: • व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढकें .• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें.• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें • किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें • बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

सर्दी में हाइपरटेंशन के मरीज रहें सतर्क

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– समय पर खाएँ खाना, नियमित रूप से करें व्यायाम
– तेल-मसाले का अधिक सेवन से बचें

लखीसराय, 26 नवंबर।
ठंड के इस मौसम में लोग तरह-तरह की ठंडजनित बीमारियों के दायरे में आने लगे हैं। इस दौरान हाइपरटेंशन के भी नए मरीज मिलने लगे हैं। ऐसे मौसम में हाइपरटेंशन से बचने के लिए सावधानी की जरूरत है। ऐसे मौसम में खान-पान का ध्यान रखने और नियमित रूप से व्यायाम करने की जरूरत है।

– समय पर खाएँ उचित आहार :-
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि ऐसे मौसम में रक्त की धमनियों में थक्का जमा हो जाता है। इससे रक्त का प्रभाव अवरुद्ध हो जाता है। इस वजह से ब्रेन हेमरेज तथा लकवा मारने की भी संभावना बढ़ जाती है। दरअसल, आजकल लोग शारीरिक श्रम कम करने लगे हैं। इस वजह से लोगों में मोटापे की परेशानी होने लगी है। इसके अलावा खानपान में भी परहेज नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि हाइपरटेंशन के मामले ऐसे मौसम में बढ़ रहे हैं।

– सुबह में तेज गति के साथ खुली हवा में टहलें :-
शारीरिक क्रिया में कम होने के कारण हाइपरटेंशन संभावना बढ़ जाती है। अगर शारीरिक क्रिया सामान्य रहे तो इस बीमारी से निजात मिल सकती है। इसके लिए सुबह में तेज गति के साथ खुली हवा में टहलना चाहिए। यह ऐसे मरीजों के लिए सबसे आसान और उपयोगी उपाय है।

– तेल-मसाले समेत अन्य तरल पदार्थों के सेवन से बचें :-
हाइपरटेंशन से बचाव के लिए तेल-मसाले समेत अन्य तरल पदार्थों के अधिक सेवन से बचने की जरूरत है। इसलिए, खाने में तेल-मसाले का उपयोग कम करें और इसके जगह मौसमी फल, सलाद समेत अन्य प्रोटीनयुक्त चीजों का सेवन करें। रात में कम खाना खाएं। ऐसा करने से भी हाइपरटेंशन को नियंत्रित किया जा सकता है।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से हाथ धोएँ।
– दो गज की शारीरिक दूरी का पालन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बाहरी खाना खाने से बचें।
– ऑख, मुँह और नाक छूने से बचें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

सदर अस्पताल में लोगों की मधुमेह जांच के बाद दिया गया परामर्श

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2 दिसंबर तक सभी सरकारी अस्पतालों में लगेगा शिविर

सुबह तेज गति से कम से कम 45 मिनट तक टहलने की कोशिश करें

बांका, 26 नवंबर

अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह सप्ताह को लेकर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है. इस दौरान लोगों की मधुमेह की जांच की जा रही है और उन्हें दवा व उचित परामर्श दिया जा रहा है. यह शिविर 25 तारीख से शुरू हुआ है जो कि 2 दिसंबर तक चलेगा.

गुरुवार को सदर अस्पताल में दर्जनों लोगों के मधुमेह की जांच की गई और इस दौरान उन्हें उचित परामर्श दिया गया. सदर अस्पताल के डॉक्टर विजय कुमार ने सभी लोगों की जांच की. अस्पताल मैनेजर अमरेश कुमार ने बताया कि एक सप्ताह तक नियमित तौर पर सभी लोगों के मधुमेह जांच की जा रही है. जिन लोगों में शुरुआती लक्षण पाए जा रहे हैं उन्हें टहलने की सलाह दी जा रही है. ऐसे लोगों को अभी दवा का सेवन नहीं करने के लिए कहा जा रहा है.

खानपान के प्रति रहें सतर्क: शिविर मे जांच कराने आए लोगों को खान-पान के प्रति सतर्क रहने को कहा जा रहा है. साथ ही जिन्हें मधुमेह है उन्हें सतर्क रहने के लिए कहा गया. जिन्हें मधुमेह नहीं था वैसे लोगों को भी ऐसे मौसम में खान-पान के प्रति सतर्क रहने के लिए कहा गया. तेल मसाले युक्त भोजन से परहेज करने के लिए कहा गया. साथ ही भोजन में हरी सब्जियां और सलाद का सेवन नियमित तौर पर करने के लिए कहा गया. रात में सोते हुए कम से कम भोजन करने की सलाह दी गई.

तेज कदमों से 45 मिनट तक टहलने के लिए कहा गया: जांच कराने आए लोगों से सुबह-सुबह तेज कदमों से कम से कम 45 मिनट तक टहलने की सलाह दी गई. डॉक्टर ने उन्हें बताया कि आप इससे ज्यादा भी टहल सकते हैं. सर्दी के मौसम में लोग तेल मसाले से युक्त ज्यादा भोजन करते हैं और शारीरिक गतिविधियां रुक जाती है. इस वजह से लोग मधुमेह के शिकार हो जाते हैं. इसलिए सुबह सुबह अगर आप तेज कदमों से कम से कम 45 मिनट तक चलेंगे तो मधुमेह से बचे रहेंगे. मधुमेह की वजह से ही लोग हाइपरटेंशन के भी शिकार हो रहे हैं.

टहलते वक्त गर्म कपड़े जरूर पहने: शिविर में जांच कराने आए लोगों से कहा गया कि सुबह जब आप टहलने जाए तो गर्म कपड़े जरूर पहने. बहुत लोग अभी ठंड की शुरुआत होने की वजह से गर्म कपड़े नहीं पहनते हैं. इस वजह से वह ठंड के भी शिकार हो जाते हैं और वायरल की चपेट में आ जाते हैं. इन चीजों से बचने के लिए लोग गर्म कपड़े जरूर पहने. सर्दी के मौसम में लोग सांस फूलने की बीमारी के भी शिकार हो जाते हैं. इसलिए सुबह तेज गति से जरूर टहला करें.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें