कोविड-19 को मात दे चुके लोगों को भी सतर्क और सावधान रहना जरूरी

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– बीमारी को मिली मात, कोविड-19 को नहीं, इसलिए जारी रखें ऐहतियात
– सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का करें खुद भी पालन और दूसरों को भी करें जागरूक

लखीसराय, 26 नवंबर, 2020
सर्दी का आगमन होते ही मौसम में भी काफी तेजी से बदलाव हो रहा है। जिसके कारण लोग ठंडजनित बीमारी से पीड़ित भी होने लगे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति किसी प्रकार की लापरवाही ठीक नहीं है। बदलते मौसम और कोविड-19 के दूसरे दौर में आमलोगों के साथ-साथ कोविड-19 को मात देकर स्वस्थ हो चुके लोगों को सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि, आप बीमारी को मात दिए हैं ना कि कोविड-19 के दौर को। जिसके कारण लापरवाही बरतने पर आप पुनः संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए, बचाव के लिए आवश्यक ऐहतियात जारी रखें।

कोविड-19 संक्रमण से दोबारा संक्रमित होने पर बढ़ेगी परेशानी :-
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि लगातार बदल रहें मौसम में जहाँ सर्दी-खाँसी, जुकाम समेत अन्य ठंडजनित बीमारी आम हो गई है। वहीं, कोविड-19 का दुसरा दौर भी शुरू हो चुका है। ऐसे जो लोग पूर्व में भी कोविड-19 को मात देने में सफल हो चुके हैं। उनलोगों को भी विशेष सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, थोड़ी सी लापरवाही से पुनः संक्रमित हो सकते हैं और दोबारा संक्रमित होने पर पूर्व के सापेक्ष ज्यादा परेशानी होगी।

रोग-प्रतिरोधक क्षमता बनाएँ मजबूत :-
कोविड-19 से बचाव के लिए रोग-प्रतिरोध क्षमता मजबूत बनाने की जरूरत है। इसके लिए आप पर्याप्त समय सोएं, शरीर को आराम दें और खाने-पीने के प्रति सतर्क रहें। मौसमी फल, दूध और हरी सब्जी का सेवन करें। साथ ही पानी को उबालकर और गुनगुना पानी पीने की कोशिश करें।

नियमित रूप से करे व्यायाम :-
रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाने के लिए व्यायाम भी काफी कारगर साबित होता है। इसलिए, नियमित रूप से व्यायाम करें। सुबह में खुली हवा के साथ टहलें। इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत होगा।

साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल :-
कोविड-19 से बचाव के लिए साफ-सफाई भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, साफ-सफाई हमें ना सिर्फ कोविड-19 से बचाव के लिए जरूरी है। बल्कि, इससे हम कई तरह के संक्रमित बीमारियाँ से दूर रहते हैं। इसलिए, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। शौचालय समेत घर के अन्य परिसर की नियमित रूप सफाई करें।

– कोरोना से ठीक हो चुके मरीज एंटीबॉडी टेस्ट कराएं :-
अगर आप नियमित तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं तो ठीक है, नहीं तो आपको नियमित अंतराल पर अपनी एंटीबॉडी टेस्ट करा लेनी चाहिए। इससे आपको पता चल जाएगा कि आपका शरीर कोविड-19 से लड़ने में कितना सक्षम है। जिस तरह की रिपोर्ट आती है उसके हिसाब से आप सावधानी बरतना शुरू कर दें। कोविड-19 से ठीक होने के बाद कुछ दिनों तक एंटीबॉडी रहती है। इसके बाद कमजोर पड़ने लगती है। इसलिए, नियमित तौर पर एंटीबॉडी टेस्ट करा लें, जबतक वैक्सीन नहीं आ जाती है।

– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– नियमित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– शारीरिक दूरी का पालन का ख्याल रखें।
– बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहाल युक्त पदार्थों से हाथ धोने की आदत डालें।

कोरोना काल में दोहरी चुनौतियों को मात दे रही सेविका सबली देवी

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चांदन प्रखंड के कजोरिया आंगनबाड़ी केंद्र में 200 बच्चों की कर रही देखभाल

साथ में कोरोना से बचाव को लेकर गांव के लोगों को जागरूक कर रही सबली देवी

बांका, 26 नवंबर

आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका का काम वैसे ही चुनौतीपूर्ण है. छोटे-छोटे बच्चे की देखभाल करना और पढ़ाई के प्रति उसे प्रेरित करना आसान काम नहीं है. ऊपर से कोरोना को लेकर गांव के लोगों को जागरूक करना, लेकिन इस दोहरी चुनौती को मात दे रही हैं चांदन प्रखंड के कजोरिया आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका सबली देवी.

200 बच्चों की कर रही देखभाल: सबली देवी बताती है कि उनके आंगनबाड़ी केंद्र में कुल 200 बच्चे हैं और उनका पढ़ाने से लेकर देखभाल की जिम्मेदारी को वह संभाल रही है. साथ ही उनके घरवालों को बच्चों के पोषण के प्रति भी जागरूक कर रही हूं. सबली देवी को इस काम में एक सहायिका का भी सहयोग मिल जाता है. इस वजह से वह अपने काम को काफी जिम्मेदारी से कर रही हैं.

घर-घर जाकर बच्चों की ले रही खोज खबर: कोरोना काल में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहने से अभी बच्चे घर पर ही रह रहे हैं. ऐसे में आंगनबाड़ी सेविका की जिम्मेदारी और बढ़ गई है. इस जिम्मेदारी का निर्वाहन किस तरीके से हो रहा है, इस बारे में सबली देवी कहती हैं जब से कोरोना काल शुरू हुआ है, वह और उनकी सहायिका घर-घर जा रहे हैं. वहीं पर बच्चों के बारे में जानकारी ली जा रही है. साथ ही उनके परिजनों को पोषण के साथ बच्चे को किस तरीके से पढ़ाई के प्रति जागरूक करना है, यह बता रही हूं.

कोरोना को लेकर भी कर रही जागरूक: कोरोना काल में आंगनबाड़ी सेविका की जिम्मेदारी बढ़ गई हैं. बच्चों की तो देखभाल कर ही रही हैं, साथ ही गांव के लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक भी कर रही हैं. उन्हें सफाई के बारे में बता रही हैं. मास्क पहनने और शारीरिक दूरी का पालन करने को भी कह रही हैं. एक साथ इतनी चुनौतियों को कैसे निभा रही हैं, इस बारे में सबली देवी कहती हैं कि शुरुआत में थोड़ा मुश्किल लग रहा था, लेकिन जैसे ही काम में राम गई तो अब महसूस नहीं होता. एक तरह से अब दिनचर्या बन गई है. सुबह बच्चों से संबंधित काम कर रही हैं तो शाम को कोरोना से संबंधित काम.

परिवार का भी मिल रहा सहयोग: सबली देवी के घर में ससुर हैं. पति मजदूरी करते हैं और बच्चे पढ़ाई. ऐसे में उनकी चुनौती और भी ज्यादा है, लेकिन घर के सदस्य उनके बूढ़े ससुर की देखभाल करते हैं. साथ ही घरेलू काम में भी हाथ बटा देते हैं. इससे उनका काम आसान हो जाता है और वह बेफिक्र होकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन करती हैं. सबली देवी कहती हैं कि कोरोना काल में काम बढ़ा तो बच्चे स्कूल भी नहीं जा रहे. वह घर में ही अपनी पढ़ाई कर रहे हैं. इस वजह से घर के काम में भी वह लोग सहयोग कर देते हैं, जिससे मेरा काम आसान हो जाता है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

महिला हिंसा के विरुद्ध चलने वाले पखवारे का हुआ आगाज

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महिला हिंसा व लैंगिक भेदभाव को रोकने सामाजिक सहभागिता पर दिया गया बल
अतंरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस को लेकर किया गया कार्यक्रम का आयोजन
महिला बैंड की मौजूदगी ने महिला एकजुटता व सशिक्तकरण का कराया एहसास

पटना, 25 नवंबर: महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा व भेदभाव को समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. इसके लिए प्रत्येक वर्ष 25 नवंबर को महिला हिंसा को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है. इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस का थीम महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा ‘ऑरेंज द वर्ल्ड: फंड, प्रिवेंट, कलेक्ट’ है. यह दिवस 16 दिनों तक चलेगा और 10 दिसंबर को अतंरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर यह समाप्त होगा.
जेंडर आधारित हिंसा व भेदभाव के प्रति जागरूकता अभियान को लेकर “सहयोगी” द्वारा जिला के दानापुर के हतियाकांध पंचायत भवन में आयोजित एक कार्यक्रम द्वारा “महिला हिंसा के विरुद्ध चलने वाले पखवारे” का शुभारंभ किया गया. इस मौके पर लगभग 50 महिलाओं व किशोरियों ने भाग लिया. स्थानीय महिला बैंड ने अपने कार्यक्रमों द्वारा महिला एकजुटता व सशक्तिकरण का प्रदर्शन किया.
पंचायत के मुखिया रवींद्र कुमार ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जेंडर आधारित हिंसा सहित घरेलू हिंसा की रोकने की दिशा में सहयोगी संस्था द्वारा सराहनीय प्रयास किया जा रहा है. इसे रोकने में सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करनी जरूरी है. तभी समाज का सही व संतुलित विकास हो सकेगा. इस मौके पर महिला बैंड की सदस्य संगीता देवी ने बताया कि उन्हें भी घर समाज का विरोध का सामना करना पड़ा था. लोगों का ऐसा मानना था कि बैंड बाजे का काम सिर्फ पुरुषों का है. लेकिन कुछ महिलाओं व महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करने वाली संस्थाओं के सहयोग से महिला बैंड स्थापित किया गया.
सहयोगी संस्था की प्रमुख रजनी ने कहा कि संस्था के द्वारा घरेलू हिंसा व जेंडर आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए विभिन्न गतिविधियां की जाती हैं. उन्होंने कहा जेंडर आधारित हिंसा के विरुद्ध इस 16 दिवसीय अभियान के दौरान आम जनमानस में महिलाओं के प्रति हिंसा के मुद्दे पर जागरूक किया जायेगा. उन्होंने इस अभियान में लोगों से सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान भी किया.

मी टू व टाइम्स अप हैशटैग ने खींचा लोगों का ध्यान:
विश्व में महिलाओं के शोषण व उत्पीड़न व हिंसा की घटनाओं को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने गंभीरता से लिया है. हाल ही में मी टू व टाइम्स अप हैशटैग ट्रेंड किया गया जिसका उद्देश्य लोगों का ध्यान जेंडर आधारित हिंसा की रोकथाम के लिए होने वाले प्रयासों की तरफ खींचना है. दुनिया भर के देशों में प्रचलित महिलाओं के प्रति हिंसा व जेंडर आधारित भेदभाव की घटनाओं को सामान्य मान लिया जाता है. लेकिन ऐसे अपराध करने वालों को बिना समुचित दंड दिये छोड़ दिया जाना एक वैश्विक संस्कृति के रूप में देखा जा रहा है. इस दिशा में 16 दिवसीय इस अभियान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसका एक मुख्य कारण कोविड 19 संकटकाल के दौरान महिलाओं के साथ हुई हिंसा भी है.

घरेलू हिंसा के मामले नहीं होते हैं दर्ज:
राष्ट्रीय क्रीम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2019 के रिपोर्ट के अनुसार बिहार में महिलाओं के विरुद्ध हुए अपराध वाले अधिनियम के अंतर्गत 15518 मामले दर्ज हुए हैं. अकेले सिर्फ दहेज़ उत्पीड़न के 3289 मामले दर्ज हुए. हलाकि सबसे चौकाने वाली बात इस रिपोर्ट में यह थी की बिहार घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाने के लिए बने अधिनियम के अंतर्गत कोई मामला दर्ज नहीं हुआ. ये सर्वविदित है कि हमारे समाज में हर रोज ये घटनाएँ होती है परन्तु दर्ज नहीं होती है.

15 साल की उम्र से ही होती हैं हिंसा की शिकार:
राष्ट्रीय परिवार स्वस्थ्य सर्वेक्षण (NFHS 4) के मुताबिक भारत में 15-49 वर्ष आयु वर्ग की 30 फीसदी महिलाओं को 15 साल की आयु से ही शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा है. उसी आयु वर्ग की 6 फीसदी महिलाएं अपने जीवन-काल में कम-से-कम एक बार यौन हिंसा का सामना करती हैं. बिहार में 20-24 आयु वर्ग की ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिला जिनका विवाह 18 वर्ष से पूर्व किया गया, का प्रतिशत 44.5 है. वहीं यह प्रतिशत शहरी क्षेत्र में 29.1 है. 15-19 वर्ष आयु वर्ग में शहरों में 8.3 प्रतिशत एवं गाँवों में 12.8 प्रतिशत या तो माँ बन चुकी थीं या गर्भवती थीं.

पोषण के मामले में भी महिलाओं की स्थिति पीछे:
भेदभाव के मामलों में महिलाओं के स्वास्थ्य की अनदेखी भी है.बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में 31.8 प्रतिशत एवं शहरों में 22.2 प्रतिशत महिलाएँ शारीरिक रूप से दुर्बल एवं कुपोषित हैं. घरेलु मामलों में महत्वपूर्ण निर्णयों में विवाहित महिलाओं की भागीदारी शहर में 77.6 प्रतिशत जबकि गाँव में 74.8 प्रतिशत है, विवाहित महिलाओं में, अपने पति के द्वारा की गयी हिंसा की शिकार महिलाओं का शहरी क्षेत्र में प्रतिशत 40.2 और ग्रामीण क्षेत्र में 43.7 है. 15-24 आयु वर्ग की महिलाओं में, जो अपने मासिक चक्र के दौरान पर्याप्त स्वच्छता-सफाई के उपायों को अपना सकती हैं उनका प्रतिशत शहर में 55.3 प्रतिशत और गाँव में मात्र 27.3 प्रतिशत है, जो परिवार में उनके स्वास्थ्य के प्रति घोर उदासीनता को दर्शाता है. इसी प्रकार दहेज़ को लेकर हत्या, मानव व्यापार, आदि के आंकड़े भी समाज में लडकियों-महिलाओं की दयनीय स्थिति को दर्शाती है, तथा इन आंकड़े के द्वारा यह स्पष्ट है कि समाज में उन्हें दोयम दर्जे माना जाता है

कोविड-19 की तरह टीबी भी है संक्रामक बीमारी,इसलिए रहें सावधान

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– लगातार खाँसी रहने पर तुरंत कराऐ जाँच, अस्पताल में मुफ्त जाँच की है सुविधा उपलब्ध
– मरीजों को सरकार द्वारा दी जाती है सहायता राशि

खगड़िया, 25 नवंबर।
टीबी भी कोविड-19 की तरह एक संक्रामक बीमारी है। दोनों बीमारियों के लक्षण भी करीब-करीब एक जैसे या मिलते-जुलते हैं। जिसके कारण बीमारी का सही पता लगाने में भी परेशानी होती है। ऐसे में पूर्व से टीबी जैसी बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह दौर विशेष सतर्कता बरतने का है। क्योंकि, इन मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है। जिसके कारण उनमें कोरोना संक्रमण की संभावना अन्य मरीजों से कई गुना अधिक है। सबसे जरूरी है कि मरीज की दवा का क्रम न टूटे। कोरोना में लगातार तेज बुखार और खांसी आती है। टीबी का लक्षण थकावट, आम बुखार, वजन गिरना, भूख न लगना, रात में पसीना आना आदि है।

लक्षण महसूस होते ही कराऐ जाँच : –
सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि लक्षण महसूस होते ही ऐसे मरीजों को बिना देर किए अपनी जाँच करवानी चाहिए। जिला सदर अस्पताल, सभी पीएचसी तथा जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जाँच एवं दवाई की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही ऐसे मरीजों को उचित पोषण आहार के लिए सहायता राशि भी दी जाती है।

– बचाव के उपाय : –
1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें ।
– मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
– मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
– मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहें ।
– पौष्टिक खाना खाएं, व्यायाम व योग करें ।
– बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
– भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।

ये हैं टीबी के लक्षण:—-
– भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
– हलका बुखार रहना।
– खांसी , खांसी में बलगम तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
– गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
– महिलाओं को बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
– टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

– इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर : –
– 6 फीट की शारीरिक – दूरी हमेशा पालन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– लगातार साबुन से हाथ धोएँ। पानी और साबुन उपलब्ध नहीं होने पर सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– घर से निकलते समय मास्क लगाएँ।
– ऑख, नाक, मुँह को अनावश्यक नहीं छुएं। छूने से पूर्व हाथ को धोएँ या सैनिटाइज करें।
– बातचीत के दौरान सतर्कता का विशेष ख्याल रखें।

गर्भवती महिलाएं पहली तिमाही में रखें विशेष ध्यान

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कोरोना के संक्रमण के दौर में सतर्क रहने की जरूरत

गर्भस्थ शिशु की वृद्धि व विकास को देखभाल जरूरी

बांका, 25 नवंबर

कोरोना के संक्रमण को लेकर वैसे तो सभी लोग सतर्कता बरत रहे हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं को खासतौर पर सतर्क रहने की जरूरत है. गर्भावस्था की पहली तिमाही एक महत्वपूर्ण चरण है और इस समय भ्रूण तेजी से विकसित होता है और वह बहुत नाजुक भी होता है. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया, गर्भधारण के साथ ही एक नई जिंदगी शुरू हो जाती है, इसलिए गर्भावस्था में बहुत जरूरी है कि महिलाओं का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाए. मां और उनके गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की देखभाल, उन्हें जरूरी परामर्श देना और साधन उपलब्ध कराना, प्रसव पूर्व देखभाल जरुरी है. साथ ही बताया, आमतौर पर प्रसव बिना किसी समस्या की हो जाती है, लेकिन कई बार अचानक और अप्रत्याशित समस्याएं सामने आ सकती हैं. इसलिए विशेष ख्याल रखना जरूरी है.

पौष्टिक आहार लें: डॉ. चौधरी कहते हैं कि गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं का पता लगाना और उनका हल निकालना महत्वपूर्ण है. गर्भावस्था के दौरान गर्भस्थ शिशु को प्रसव के पहले पोषण और विटामिन की जरूरत होती है. मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में जन्म दोष को रोकने के लिए प्रसव पूर्व के विटामिन्स की रोजाना खुराक लेनी होती है.फोलिक एसिड ऐसा ही एक विटामिन है.

प्रसव पूर्व देखभाल नहीं होने पर बढ़ सकती है जटिलताएँ: प्रसव पूर्व जांच होने से संभावित जटिलताओं को पहचाना जा सकता है. इससे माता के साथ जन्म लेने वाले शिशु को भी खतरा बढ़ सकता है. गर्भवती माताओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. जिसमें अत्यधिक रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिक एवं अन्य गंभीर रोगों से ग्रसित गर्भवती को प्रसव पूर्व जांच कराने की बेहद जरूरत है. साथ ही इस दौरान बेहतर पोषण से भी सुरक्षित प्रसव की संभावना बढ़ जाती है.

समय पर कराएं जांच: साथ ही गर्भवती महिला को महसूस होने वाली असुविधा पर नजर रखने और उसे दूर करने के लिए जांच जरूरी है. इसमें खुद गर्भवती को शिक्षित किया जाता है कि किस तरह स्वच्छता बनाए रखें, ताकि बच्चे के विकास में बाधा न आए. गर्भावस्था के दौरान शरीर के महत्वपूर्ण संकेतों पर ध्यान देने की जरूरत है. शरीर का तापमान क्या है, ब्लड प्रेशर सामान्य है या नहीं इसकी जांच कराते रहना चाहिए. सरकारी अस्पतालों में गर्भवती माताओं के लिए निःशुल्क प्रसव पूर्व जांच की सुविधा उपलब्ध है. प्रसव के पहले कम से कम 4 प्रसव पूर्व जांच जरूरी है. कोरोना काल में भी यह सुविधा बहाल की गयी है. साथ ही ग्रीन जोन एवं बफर जोन के अलावा ग्रामीण स्तर पर भी आरोग्य दिवस का आयोजन कर प्रसव पूर्व जांच की सुविधा गर्भवती माताओं को मुहैया करायी जा रही है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की  दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

शरीर में आयरन की कमी होना एनीमिया का है मुख्य कारण, बचाव के लिए उचित आहार जरूरी 

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– किशोरावस्था और गर्भावस्था में सबसे अधिक रहती है एनीमिया होने की संभावना
– लौह तत्वयुक्त चीजों का करें सेवन और विटामिन ए व सी खाद्य पदार्थ भरपूर खाएँ
लखीसराय, 25 नवंबर, 2020
एनीमिया होने सबसे मुख्य और बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी होना। इसलिए, इससे बचाव के लिए उचित पोषण का बेहद जरूरी है। आहार में बदलाव ही इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे सरल उपाय है। यह बीमारी खून (रक्त) में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाऐ या होमोग्लोबीन कम होने से होता है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराऐं और चिकित्सा परामर्श का पालन करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत खड़ा कर सकती है। इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। ऐसे में समय पर जाँच के लिए अस्पताल जाने एवं चिकित्सकों के सलाह का पालन करना चाहिए। जो आगे की मुसीबत उत्पन्न नहीं होने देगी एवं आपके लिए ना सिर्फ  फायदेमंद साबित होगा। बल्कि आपको बीमारी से छुटकारा भी मिल सकता है।
– आयरनयुक्त खाना का करें सेवन :-
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि आयरन की कमी के कारण एनीमिया होता है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आहार बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने से बचाव होगा। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही जान पर भारी सकती है।
– ये हैं एनीमिया के लक्षण :-
एनीमिया के बीमारी का शुरूआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द, त्वचा सफेद दिखना आदि कमी होना है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराऐ।
– प्रोटीनयुक्त खाने का करें सेवन :-
एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें। जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूँगफली की मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। जो कि आपके शरीर की कमी को पुरा करता है एवं होमोग्लोबीन जैसी कमी भी दुर होता है तथा इससे आपको एनीमिया बीमारी से बचाव मिल सकता है।
– लौह तत्वयुक्त चीजों का करें सेवन :-
एनीमिया से बचाव के लौह तत्वयुक्त चीजों का सेवन करें। यहाँ तक कि सब्जी भी लोहे की ही कढ़ाई में बनाएँ। लोहे के कढ़ाई में सब्जी बनाने से आयरन की मात्रा काफी बढ़ जाती है।
– चिकित्सकों के सलाह का करें पालन :-
एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जाँच कराऐ। जिसके बाद चिकित्सकों द्वारा दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन करें। जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।
– गर्भवती महिलाएँ रखें विशेष ख्याल :-
यह बीमारी महिलाओं में अधिक पाई जाती है। खासकर गर्भवती महिलाएँ को गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। जिसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाएँ को गर्भ दौरान लगातार होमोग्लोबीन समेत अन्य आवश्यक जाँच कराना चाहिए एवं चिकित्सकों का चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का नियमित रूप से उपयोग करें।
– साबुन या अन्य अल्कोहल युक्त पदार्थों से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– यात्रा के दौरान सेनेटाइजर साथ रखें।
– ऑख, नाक और मुँह छूने से बचें।

शरीर में आयरन की कमी होना एनीमिया का है मुख्य कारण, बचाव के लिए उचित आहार जरूरी 

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– किशोरावस्था और गर्भावस्था में सबसे अधिक रहती है एनीमिया होने की संभावना
– लौह तत्वयुक्त चीजों का करें सेवन और विटामिन ए व सी खाद्य पदार्थ भरपूर खाएँ
लखीसराय, 25 नवंबर, 2020
एनीमिया होने सबसे मुख्य और बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी होना। इसलिए, इससे बचाव के लिए उचित पोषण का बेहद जरूरी है। आहार में बदलाव ही इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे सरल उपाय है। यह बीमारी खून (रक्त) में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाऐ या होमोग्लोबीन कम होने से होता है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराऐं और चिकित्सा परामर्श का पालन करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत खड़ा कर सकती है। इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। ऐसे में समय पर जाँच के लिए अस्पताल जाने एवं चिकित्सकों के सलाह का पालन करना चाहिए। जो आगे की मुसीबत उत्पन्न नहीं होने देगी एवं आपके लिए ना सिर्फ  फायदेमंद साबित होगा। बल्कि आपको बीमारी से छुटकारा भी मिल सकता है।
– आयरनयुक्त खाना का करें सेवन :-
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि आयरन की कमी के कारण एनीमिया होता है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आहार बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने से बचाव होगा। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही जान पर भारी सकती है।
– ये हैं एनीमिया के लक्षण :-
एनीमिया के बीमारी का शुरूआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द, त्वचा सफेद दिखना आदि कमी होना है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराऐ।
– प्रोटीनयुक्त खाने का करें सेवन :-
एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें। जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूँगफली की मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। जो कि आपके शरीर की कमी को पुरा करता है एवं होमोग्लोबीन जैसी कमी भी दुर होता है तथा इससे आपको एनीमिया बीमारी से बचाव मिल सकता है।
– लौह तत्वयुक्त चीजों का करें सेवन :-
एनीमिया से बचाव के लौह तत्वयुक्त चीजों का सेवन करें। यहाँ तक कि सब्जी भी लोहे की ही कढ़ाई में बनाएँ। लोहे के कढ़ाई में सब्जी बनाने से आयरन की मात्रा काफी बढ़ जाती है।
– चिकित्सकों के सलाह का करें पालन :-
एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जाँच कराऐ। जिसके बाद चिकित्सकों द्वारा दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन करें। जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।
– गर्भवती महिलाएँ रखें विशेष ख्याल :-
यह बीमारी महिलाओं में अधिक पाई जाती है। खासकर गर्भवती महिलाएँ को गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। जिसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाएँ को गर्भ दौरान लगातार होमोग्लोबीन समेत अन्य आवश्यक जाँच कराना चाहिए एवं चिकित्सकों का चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का नियमित रूप से उपयोग करें।
– साबुन या अन्य अल्कोहल युक्त पदार्थों से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– यात्रा के दौरान सेनेटाइजर साथ रखें।
– ऑख, नाक और मुँह छूने से बचें।

सामाजिक जागरूकता से कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण पर लगेगी रोक

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– सरकार के गाइलाइन का करें पालन,भीड़-भाड़ वाले जगह से बचें
– आसपास के लोगों को भी करें जागरूक, शारीरिक दूरी का करें पालन

खगड़िया, 24 नवंबर।
कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग आवश्यक कवायद में जुट गई है। विभाग हर हाल में संक्रमण की गति पर विराम लगाने के प्रयास में लगी है। किन्तु, इसके बढ़ते संक्रमण पर रोकथाम के लिए सामाजिक जागरूकता भी बेहद जरूरी है। इसलिए, सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए हर तबके के लोगों जागरूक करना होगा एवं उन्हें कोविड-19 से बचाव को लेकर सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइन की जानकारी से अवगत कराकर उसका पालन करने के लिए प्रेरित करना होगा। इसके लिए लोगों को सरकार का सहयोग कर सामाजिक जागरूकता पर बल देना चाहिए और हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। दरअसल, सरकार की पहल को सुदृढ़ करने के लिए गाइडलाइन का पालन करने से ही कोविड-19 संक्रमण पर रोकथाम हो सकता है।

– लोगों के सहयोग से कोविड-19 पर लगेगी रोक :-
जिला सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि कोविड-19 की रोकथाम लोगों के सहयोग से हो सकती है। इसके लिए हर तबके के लोगों को सरकार का सहयोग करना चाहिए एवं सरकार के गाइडलाइन का पालन करते हुए अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।

– शारीरिक दूरी को बनाएँ जीवन का हिस्सा :-
कोविड-19 की रोकथाम के लिए दो गज की शारीरिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए लोगों को आदतन दो गज की शारीरिक दूरी को जीवन का हिस्सा के रूप में समझना चाहिए एवं खुद के साथ-साथ समाज के अन्य लोगों को इसके लिए जागरूक करने की जरूरत है।

– खुद भी मास्क का करें उपयोग और अन्य लोगों को भी करें जागरूक :-
सिविल सर्जन ने कहा कि कोविड-19 की रोकथाम के लिए सरकार एवं स्वास्थ विभाग की गाइडलाइन में शामिल नियमित रूप से मास्क का उपयोग करने की अपील को हर व्यक्ति को स्वीकार करने की जरूरत है। खुद के साथ-साथ अन्य लोगों की भी सुरक्षा के लिए इसका पालन करना जरूरी है। ताकि बढ़ रहे संक्रमण पर रोक लग सके।

– भीड़-भाड़ वाले जगह से करें परहेज :-
इससे बचाव के लिए भीड़-भाड़ जगह से पूरी तरह परहेज करें एवं कोशिश करें कि एक जगह लोगों की भीड़ एकत्रित नहीं हो। इसके लिए लोगों को भी जागरूक करें। क्योंकि, भीड़ के कारण संक्रमण फैलने की प्रबल संभावना बनी रहती है।

– बाहर से आने पर जाँच कराने के बाद घर में करें प्रवेश :-
देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे लोग पुनः लॉकडाउन की संभावना को देखते हुए बड़ी तादाद में अपने घर आ रहे हैं। इसलिए, बाहर से आने पर नजदीकी सरकारी स्वासथ्य संस्थानों में जाँच और जाँच के पश्चात ही गाँव व घर जाएँ। ताकि खुद के साथ-साथ आपका पूरा परिवार और समाज भी सुरक्षित रहे और संक्रमण की संभावना उत्पन्न नहीं हो।

– गाइडलाइन की जानकारी लोगों को दें :-
कोविड-19 से बचाव को लेकर सरकार द्वारा जारी गाइलाइन का लोगों को जानकारी दें एवं गाइलाइन का पालन करने के लिए उन्हें जागरूक करते हुए प्रेरित करें। ताकि लोगों को सही गाइडलाइन एवं बचाव के लिए उपाय की जानकारी मिल सके एवं सरकार की सुविधा का लाभ ले सकें।

– साफ-सफाई एवं रहन-सहन को लेकर लोगों को करें जागरूक :-
कोविड-19 से बचाव को लेकर लोगों को साफ-सफाई एवं रहन-सहन को लेकर भी जागरूक करने की जरूरत है। जैसे कि लगातार साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने, घर एवं आसपास के परिसर की साफ-सफाई करने, पानी-साबुन की व्यवस्था नहीं रहने पर खासकर सफर में सैनिटाइजर का उपयोग करने, कपड़े एवं बिछावन की लगातार साफ-सफाई करने आदि की जानकारी देकर लोगों को पालन करने के लिए प्रेरित करें।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से लगातार हाथ धोने की आदत डालें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– अनावश्यक मुँह, नाक और ऑख नहीं छएं।
– मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बाहरी खाना खाने से बचें।

बिना मास्क का नहीं दे रहे सामान, शारीरिक दूरी का करा रहे पालन

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कोरोना के बढ़ने की आशंका के बीच दुकानदारों ने लिए अहम फैसला

दुकान के आगे बांस-बल्ली लगाकर करा रहे हैं शारीरिक दूरी का पालन

भागलपुर, 24 नवंबर

कोरोना के दोबारा संक्रमण बढ़ने की आशंका के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है. जांच की गति तेज कर दी गई है. जगह-जगह अभियान चलाकर मास्क पहनने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है. इसके अलावा अब स्थानीय स्तर पर भी लोग सतर्क हो रहे हैं. किराना दुकानदार से लेकर सैलून चलाने वाले तक कोरोना से बचाव को लेकर सतर्क हो गए हैं.

बिना मास्क वाले लौटा दे रहे दुकानदार: तिलकामांझी में किराना दुकान चलाने वाले रूपेश ने अपनी दुकान के आगे बांस-बल्ली लगा दिया है. 2 मीटर की दूरी से लोगों को सामान दे रहे हैं. साथ ही बिना मास्क वाले लोगों को वापस लौटा दे रहे हैं. रूपेश का कहना है कि दुकान पर कई तरह के लोग आते हैं. किसे कौन सी बीमारी है कहा नहीं जा सकता. ऐसे में सतर्क रहना बहुत जरूरी है. इससे हमारा भी बचाव होगा और ग्राहक भी सुरक्षित रहेंगे.

सैलून आने वाले को कराते हैं सैनिटाइज: इसी तरह सैलून चलाने वाले विजय अपने यहां आने वाले ग्राहकों का पहले हैंड सैनिटाइज करवाते हैं. उसके बाद ही सैलून के अंदर आने देते हैं. कटिंग और शेविंग के बाद वह अपने औजार को सैनिटाइज कर देते हैं. साथ ही सैलून में भीड़ नहीं होने देते हैं. लोगों से फोन पर बात कर आने की बात कहते हैं.

आने वाला 15 दिन अहम: जनरल स्टोर चलाने वाले मुकेश का कहना है कि अभी त्यौहार की समाप्ति हुई है. उसके पहले चुनाव चल रहा था. लोग काफी भीड़ भाड़ में इकट्ठे हुए हैं. अगला 15 दिन अहम है. अगर इस दौरान सतर्क रह गए तो काफी राहत मिलेगी. इसलिए हम अपने अपनी दुकान आने वाले सभी ग्राहकों से मास्क पहनने की अपील करते हैं. साथ ही शारीरिक दूरी का पालन करवाते हैं.

सावधानी ही एकमात्र बचाव है: तिलकामांझी चौक पर पोल्ट्री फार्म चलाने वाले नसीम ने अपनी दुकान के आगे एक छोटा सा बैरियर लगा दिया है और वहां पर एक स्टाफ को तैनात कर दिया है. जो भी ग्राहक आते हैं उससे स्टाफ आर्डर लेता है और दुकान से आर्डर का सामान वापस ग्राहक को देता है और उससे पैसे ले लेता है. नसीम कहते हैं सावधानी बरतने में ही भलाई है. इसलिए हमने यह व्यवस्था की है. कोरोना की कोई दवा नहीं है, इस वजह से सावधानी ही इसका एकमात्र उपाय है.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

डायरिया को लेकर रहें सतर्क

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घर के आस-पास पानी जमा नहीं होने दें और हाथ को रखें साफ
गर्म भोजन करें और पानी को उबालकर पीने की कोशिश करें

बांका, 24 नवंबर

मौसम में बदलाव हो रहा है. सर्दी तेजी से बढ़ती जा रही है. ऐसे मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार की समस्या तो रहती ही है, लेकिन डायरिया की भी चपेट में लोग आ रहे हैं. हाल के दिनों में ऐसे काफी मरीज देखे गए. इसलिए स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि सिर्फ वायरल ही नहीं, ऐसे मौसम में डायरिया से भी आशंका रहती है. इसे लेकर सावधान रहने की जरूरत है. खाने-पीने पर ध्यान दें और गर्म कपड़े पहने रहें.

हाथ को साफ रखें: डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि खाना खाने से पहले हाथ को पूरी तरह से साफ कर लें. शौच से आने के बाद भी हाथ को 20 सेकंड तक साबुन से धोने की कोशिश करें. इसके अलावा घर के आस-पास गंदा पानी नहीं जमने दे. सफाई का ध्यान रखेंगे तो डायरिया से आपका बचाव होगा.

बासी खाना से करें परहेज: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि ऐसे मौसम में भोजन को लेकर बहुत सावधान रहने की जरूरत है. फ्रिज में रखा हुआ खाना मत खाएं. बासी खाना खाने से भी परहेज करें. हमेशा गर्म खाना खाने की कोशिश करें. साथ ही पानी को भी उबालकर पीना चाहिए.

शरीर को रखे गर्म: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि ठंड लगने से भी लोग डायरिया की चपेट में आते हैं. इसलिए गर्म कपड़े पहन कर रखें. खुला बदन नहीं रहें और दिन में धूप सेकने की कोशिश करें. इससे शरीर रहेगा घर और ठंड नहीं लगेगी. आप स्वस्थ रहेंगे.

कोहरे में टहलने नहीं निकले: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि अभी के मौसम में सुबह कोहरा रहता है. इसलिए उस समय टहलने नहीं जाएं. थोड़ा देरी से जा सकते हैं और टहलने के दौरान गर्म कपड़े पहन ले. जब तक ठंड का मौसम रहेगा. तब तक थोड़ा देरी से ही टहलने जाए. इससे शरीर गर्म रहेगा जिससे फायदा होगा.

कोविड 19 के दौर में रखें इसका भी ख्याल:
• व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें.
• बार-बार हाथ धोने की आदत डालें.
• साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
• छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके.
• उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके.
• घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
• बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
• आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें.
• मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें
• किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों
• कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें
• बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें