यूएएस इंटरनेशनल के एमडी ईशान तनेजा और इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पुणे के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर व कॉरपोरेट रिलेसंस माधुरी सखराम साठे एमओयू पर हस्ताक्षर किये

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– एमओयू का उद्देश्य सहयोग द्वारा व्यापक रूप से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना है- माधुरी सखराम साठे

एमओयू का उद्देश्य अंतररष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी शैक्षिक मानक का कार्यान्वयन करना है- ईशान तनेजा

– यूएएस इंटरनेशनल के साथ एमओयू साइन से छात्रों को ग्लोबल एक्सपोजर में फायदा मिलेगा- माधुरी सखराम साठे

नईदिल्ली-

यूएएस इंटरनेशनल और इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पुणे ने एमओयू पर साइन किए। यूएएस इंटरनेशनल के एमडी ईशान तनेजा और इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पुणे के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर व कॉरपोरेट रिलेसंस माधुरी सखराम साठे ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। यह एमओयू ऑनलाइन साइन किए गए। इस एमओयू के साथ ही यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी का ओफिसियल पार्टनर के रूप में इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पुणे कार्य करेगा। दोनों कंपनियां प्लेसमेंट इंटर्नशिप और ग्लोबल एक्सपोजर पर कार्य करेंगे। जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल जाना जाता है। इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पुणे एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर कॉरपोरेट रिलेसंस माधुरी सखराम साठे ने हस्ताक्षर पर प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले नौ वर्षों से जिस प्रकार से एजुकेशन के क्षेत्र में यूएएस इंटरनेशनल कार्य कर रहा है यह अद्भूत है। निश्चितरूप से इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पुणे को भी इससे फायदा मिलेगा।

माधुरी सखराम साठे ने कहा कि एमओयू का उद्देश्य सहयोग द्वारा व्यापक रूप से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना है। दोनों संस्थानों के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई साझेदारी को विकसित करने और पोषित करने की आवश्यकता है।

माधुरी सखराम साठे ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों में व्यावसायिक कुशलता की उन्नति करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। जिसकी पूर्ति यूएएस इंटरनेशनल लगातार कार्य कर रहा है। यूएएस इंटरनेशनल का ध्यान लगातार छात्रों में व्यावसायिक क्षमता की उन्नति करना है जिससे उनकी कार्यकुशलता को बढ़ावा मिले। इसके लिए कई तरह की बाउंडिंग भी करता है। छात्रों को यहीं इंटरनेशनल एक्सपोजर भी एमओयू साइन करने से मिलेगा।

इस मौके पर यूएएस इंटरनेशनल के एमडी व सीईओ  ईशान  तनेजा  ने  एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पुणे बेहतर बिजनेस स्कूल है। जहां के छात्र देश व विदेश में काफी बेहतरीन परफोर्मेंशन के साथ नाम रोशन कर रहे हैं। निश्चिततौर पर यूएएस इंटरनेशनल इनके कार्यों में चार चांद लगा देगा।

ईशान तनेजा ने कहा कि आज नई शिक्षा नीति में कई ऐसे प्रावधान है जिसके लिए संस्थान में एक्सपोजर लाने की जरूरत है जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल लगातार कार्य कर रहा है। इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पुणे जैसी संस्थान के साथ एमओयू साइन होने पर युवाओं को काफी लाभ मिलेगा।

ईशान तनेजा ने कहा कि एमओयू का उद्देश्य अंतररष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी शैक्षिक मानक का कार्यान्वयन करना है। यह एमओयू फैकल्टी के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक और अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग के आदान-प्रदान और बढ़ावा देने में मददगार होगा।

गौरतलब है कि यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी पिछले नौ वर्षों में चार कंपनियों सफलतापूर्वक चल रहा है। जिसमें यूएएस इंटरनेशनल वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी, यूएएस इंटरनेशनल हॉस्टल चेन, यूएएस इंटरनेशनल हॉलिडेज प्रा. लि. है और अभी एलोफ्ट करियर नाम से ऑन लाइन एजुकेशन का नया प्लेटफोर्म तैयार किया गया है जिसको लेकर युवाओं में उत्साह है।

 

 

मच्छरों से बचाव ही मलेरिया बीमारी से करेगा दूर

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– मच्छरों के प्रकोप से बचाव के लिए जरूरी है साफ – सफाई

– सोते समय हमेशा करें मच्छरदानी का प्रयोग

मुंगेर-

जिला में बदलते मौसम और उमस के कारण इन दिनों हर इलाके में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। रात हो या दिन लोग मच्छरों के काटने से परेशान होने के साथ ही चिंतित रहने लगे हैं। लोगों को अब उनके आतंक के साथ मच्छर जनित रोग की भी चिंता सताने लगी है। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए जागरूक कर रहा है। मच्छरों से होने वाली बीमारियों में मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, जापानी इन्सेफेलाइटिस, जीका वायरस, चिकनगुनिया, हेपेटाइटिस ए आदि प्रमुख बीमारियां हैं। इसके अलावा बहुत सारी बीमारियां हैं जो मच्छरों के काटने से होती हैं। हालांकि, ये सभी बीमारियां अलग- अलग मच्छरों के काटने से होते हैं। जिला सहित राज्य भर में मच्छरों के काटने से मलेरिया और फाइलेरिया के मामले अधिक आते हैं। जिनकी जानकारी लोगों को होनी बहुत ही जरूरी है।

घरेलू उपाय कर मलेरिया से बचना चाहिए :
जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी संजय विश्वकर्मा ने बताया कि मलेरिया से बचने के लिए हमें अपने आसपास गंदगी को दूर करते हुए कुछ घरेलू उपाय कर मलेरिया जैसी बीमारी से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि मलेरिया प्लाजमोडियम नामक परजीवी से संक्रमित मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया एक प्रकार का बुखार है जो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता। इसमें कपकपी के साथ 103 से लेकर 105 डिग्री तक बुखार होता और कुछ घंटों के बाद पसीने के साथ बुखार उतर जाता है, लेकिन बुखार निश्चित अंतराल पर आते-जाते रहता है। उन्होंने बताया कि फेलसीपेरम मलेरिया (दिमागी मलेरिया) की अवस्था में तेज बुखार होता है। बुखार दिमाग पर चढ़ जाता है। फेफड़े में सूजन हो जाती है। पीलिया एवं गुर्दे की खराबी फेलसीपेरम मलेरिया की मुख्य पहचान है जिसमें खून की कमी हो जाती है।

जलजमाव वाली जगहों को मिट्टी से भर दें :
संजय विश्वकर्मा ने मलेरिया से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े पहनें तथा सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें। इसके साथ ही घर के आसपास जलजमाव वाली जगहों को मिट्टी से भर दें। जलजमाव वाले स्थान पर केरोसिन तेल या डीजल या जले हुए मोबिल डालें। घर के आसापस बहने वाली नाले की साफ-सफाई करते रहें।
उन्होंने बताया कि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की तरफ से डीडीटी का छिड़काव कराया जाता है। छिड़काव कर्मियों के आने पर उनका सहयोग करें और छिड़काव की तिथि की जानकारी ग्रामीणों को दें।

सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क जांच व इलाज की सुविधा :
उन्होंने बताया कि मलेरिया बुखार होने पर पीड़ित व्यक्ति को अपने गांव की आशा दीदी या नजदीकी सरकारी अस्पताल जाना चाहिए। खून की जांच में मलेरिया निकलने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इसकी निःशुल्क जांच और इलाज की सुविधा है। वहीं, आशा कार्यकर्ता क्षेत्र में जाकर मलेरिया के संभावित मरीजों की आरडीटी किट से जांच कर रही हैं। प्रति जांच उन्हें 15 रुपये की राशि देने की भी व्यवस्था है। साथ ही मरीज मिलने पर उसका इलाज कराने पर 75 रुपये प्रति मरीज अलग से दिए जाने की व्यवस्था है।

कोविड संक्रमण की संभावित चौथी लहर से सुरक्षा के मद्देनजर  रहें सतर्क और सावधान

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– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन समेत बचाव से संबंधित अन्य गाइडलाइन का रखें ख्याल
– संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन के साथ सतर्कता और सावधानी ही सबसे बेहतर और कारगर उपाय
खगड़िया-
कोविड संक्रमण की चौथी लहर आने संभावना जताई जा रही है। संभावित चौथी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी आवश्यक और जरूरी तैयारियाँ शुरू कर दी है। ताकि अगर चौथी लहर आ भी जाए तो लोगों को स्वास्थ्य सुविधा से संबंधित किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित रह सकें। इसके मद्देनजर जहाँ एकबार फिर जिले में कोविड जाँच और वैक्सीनेशन अभियान तेज कर दिया गया है। वहीं, सुरक्षा के लिहाज से सतर्कता भी बढ़ा दी गई है। किन्तु, लोगों को इस घातक महामारी से डरने नहीं, बल्कि सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, सुरक्षा के मद्देनजर अभी से ही स्वास्थ्य विभाग व्यापक तैयारी में जुट गया है।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन समेत बचाव से संबंधित अन्य गाइडलाइन का रखें ख्याल :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया एकबार फिर से कोविड संक्रमण की चौथी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। किन्तु, इससे लोगों को घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, इस निपटने के लिए अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी गई है। किन्तु, लोगों को सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। इसलिए, मैं तमाम जिलेवासियों से अपील करता हूँ कि इस घातक महामारी से सुरक्षा के मद्देनजर सतर्क व सावधान रहें । मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन समेत बचाव से संबंधित अन्य गाइडलाइन का पालन भी जारी रखें। तभी हम अन्य लहरों की तरह इस लहर को भी आसानी के साथ मात दे सकते हैं। वहीं, उन्होंने कहा, इस घातक महामारी से बचाव के लिए लक्षण दिखते ही संबंधित व्यक्ति को तुरंत जाँच करानी चाहिए। जो लोग किसी भी कारणवश वैक्सीन नहीं ले पाएं है, वह तुरंत वैक्सीनेशन कराएं और चौथी लहर से खुद को सुरक्षित रखें।
– संभावित चौथी लहर को रोकने के लिए वैक्सीनेशन के साथ सावधानी और सतर्कता भी जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, एकबार फिर कोविड संक्रमण की चौथी लहर आने की आशंका जताई जा रही है। जिससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन के साथ-साथ सावधानी और सतर्कता भी जरूरी है। क्योंकि, इसी के बदौलत अबतक इस घातक महामारी के प्रभाव को रोकने में काफी हद तक सफलता मिली है। इसलिए, मैं तमाम जिलेवासियों से अपील करता हूँ कि जो भी व्यक्ति अबतक किसी कारण वश वैक्सीन नहीं ले पाएं है, वह निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। साथ ही इस घातक महामारी को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए सावधानी और सतर्कता भी जारी रखें। इसके लिए मास्क और शारीरिक दूरी का पालन का ख्याल रखें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

मिशन इंद्रधनुष अभियान के तीसरे राउंड का सफलतापूर्वक हुआ समापन

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– उपलब्धि • निर्धारित लक्ष्य से अधिक लाभार्थियों का हुआ नियमित टीकाकरण
– स्वास्थ्य विभाग की कड़ी मेहनत और सामुदायिक स्तर पर लोगों के सकारात्मक सहयोग से मिली उपलब्धि
लखीसराय, 10 मई
जिले में सोमवार से चल रहे मिशन इंद्रधनुष अभियान के तहत तीसरे राउंड के साप्ताहिक नियमित टीकाकरण का रविवार को  समापन हो गया। इस दौरान पूरे सप्ताह नियमित रूप से चयनित और चिह्नित सेशन साइटों पर टीकाकरण शिविर का आयोजन कर टीका से छूटी गर्भवती और बच्चों को टीकाकृत किया गया। जिसमें स्वास्थ्य विभाग की कड़ी मेहनत और सामुदायिक स्तर पर लोगों के सकारात्मक सहयोग से निर्धारित लक्ष्य से अधिक लाभार्थियों को टीकाकृत करने की जिला ने उपलब्धि हासिल की। वहीं, शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में 300 सेशन साइट बनाए गए थे। सभी सेशन साइटों पर नियमित रूप से टीकाकरण शिविर का आयोजन कर योग्य लाभार्थियों का टीकाकरण किया गया।
– टीकाकरण टीम और आमजनों के सकारात्मक सहयोग से मिली सफलता :
डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, मिशन इंद्रधनुष अभियान के तहत तीसरे राउंड के साप्ताहिक नियमित टीकाकरण में निर्धारित लक्ष्य से अधिक लाभार्थियों को टीकाकृत किया गया। यह उपलब्धि टीकाकरण टीम के सभी कर्मियों और मॉनिटरिंग करने वाले तमाम पदाधिकारियों की कड़ी मेहनत और सामुदायिक स्तर पर आमजनों के सकारात्मक सहयोग से संभव हुआ। वहीं, उन्होंने कहा कि मैं इस उपलब्धि के लिए सभी पदाधिकारी और कर्मियों के साथ-साथ पूरे जिले वासियों को सकारात्मक सहयोग करने के लिए धन्यवाद देता हूँ। वहीं, उन्होंने कहा, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे ना केवल गंभीर बीमारी से बचाव होगा, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलेगा तथा बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होगा।
– 300 सेशन साइटों पर 2380 बच्चों के खिलाफ 2474  और 468 गर्भवती के खिलाफ 532 को किया गया  टीकाकृत :
वहीं, डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, 300 सेशन साइटों पर 2380 बच्चों और 468 गर्भवती को टीकाकृत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसके खिलाफ 2474 बच्चों और 532 गर्भवती महिलाओं को  टीकाकृत किया गया। जिसमें शून्य से पाँच वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेएई (जापानी बुखार) के टीके से टीकाकृत किया गया। जबकि, गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका से टीकाकृत किया गया।

कोरोना की चौथी लहर आए या नहीं आए, टीका जरूर लगवाएं

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-बचाव के लिए सभी लोगों का टीकाकरण जरूरी
-बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक समझें अपनी जिम्मेदारी
बांका, 10 मई –
कोरोना की तीसरी लहर खत्म हुए काफी दिन हो गए हैं। हाल-फिलहाल में जिले में संक्रमित मरीज भी नहीं मिले हैं। इसके बावजूद लोगों में चौथी लहर को लेकर सुगबुगाहट चल रही है। दूसरे राज्यों में कोरोना के नए केस मिलने के कारण लोगों के मन में आशंकाएं घर कर रही हैं। हालांकि कुछ ऐसे भी लोग हैं जो पूरी तरह से बेपरवाह बने हुए हैं। उन्हें ऐसा लग रहा है कि कोरोना हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। ऐसी सोच से बचने की जरूरत है। कोरोना की चौथी लहर आए अथवा नहीं आए, लेकिन सतर्कता बहुत जरूरी है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि हर वक्त कोरोना के बारे में ही सोचना भी ठीक नहीं है। हां, लेकिन सतर्कता बरतना जरूरी है। कोरोना हो या कोई और बीमारी सतर्कता बहुत जरूरी है। साथ ही कोरोना का टीका अवश्य लगवाएं। लोगों को टीके की सभी डोज ले लेनी चाहिए। अगर लोग टीके की सभी डोज ले लेंगे और सावधान भी रहेंगे तो ऐसे लोग कोरोना की चौथी लहर से बचे रहेंगे। अगर चपेट में आ भी गए तो आसानी से उबर जाएंगे। इसलिए टीका लेना नहीं भूलें। टीकाकरण लगातार जारी है। खुद तो टीका ले हीं, साथ में जिनलोगों ने अभी तक टीका नहीं लिया है, उन्हें भी टीका लेने के लिए प्रेरित करें।
कोरोना गाइडलाइन का करें पालनः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना की गाइडलाइन का पालन लगातार करते रहना चाहिए। यह अच्छी बात है कि बहुत सारे लोगों को कोरोना के बाद से मास्क पहनने की आदत सी लग गई है। साथ में सामाजिक दूरी का भी पालन करें। साफ-सफाई का ध्यान दें। हाथ धोने का अभ्यास जारी रखें। ये तरीके आपको न सिर्फ कोरोना से बचाएंगे, बल्कि अन्य बीमारियों से भी आपका बचाव करेगा। इसके अलावा योग या व्यायाम भी करें। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी, जिससे आप किसी भी तरह की बीमारियों से लड़ने में सक्षम होंगे। ऐसा करते रहने से आप तो बचेंगे ही, साथ में आपके घर के सदस्य या फिर साथ रहने वाले मित्र या अन्य लोग भी बचे रहेंगे।
बीमार औऱ बुजुर्ग नहीं करें लापरवाहीः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना को लेकर बीमार और बुजुर्ग लोग नहीं करें लापरवाही। ऐसे लोगों के लिए कोरोना टीके की तीसरी डोज भी काफी दिनों से लग रही है। जो लोग गए हैं, वे जल्द से जल्द लगवा लें। बीमार और बुजुर्ग लोगों को कोरोना होने पर उससे उबरने में ज्यादा परेशानी होती है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि जो स्वस्थ्य लोग हैं, वह लापरवाही करें। सतर्कता सभी को अपनानी है, लेकिन बीमार और बुजुर्ग लोगों को थोड़ा विशेष ध्यान देने की जरूरत है। चूंकि कोरोना एक संक्रामक रोग है, इसलिए इसे आने ही नहीं देना है। अगर किसी एक को हो गया तो उससे कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। यही कारण है कि हमेशा बचाव पर ध्यान देना चाहिए।

सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच बेहद जरूरी : सिविल सर्जन 

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– प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में शिविर आयोजित कर गर्भवती महिलाओं की हुई प्रसव पूर्व जाँच
– अभियान की सफलता और अधिकाधिक गर्भवती की जाँच सुनिश्चित कराने को लेकर राज्य स्तरीय टीम ने शिविर स्थलों का किया  निरीक्षण
लखीसराय, 09 मई-
सोमवार को जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी, रेफरल एवं अनुमंडलीय व जिला अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की  प्रसव पूर्व (एएनसी) जाँच की गई। यह जाँच स्वास्थ्य संस्थानों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर आयोजित कर की गई। जिसमें बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं ने अपने क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता के सहयोग से अपने-अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए एएनसी जाँच करवाई। इस दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती की जाँच की गई और जाँच के पश्चात चिकित्सकों द्वारा आवश्यकतानुसार चिकित्सा परामर्श दिया गया। जिसमें रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ,  समेत अन्य चिकित्सा परामर्श विस्तारपूर्वक दिया गया। इधर, पटना से आई राज्यस्तरीय टीम में शामिल यूनिसेफ के सरोज कुमार एवं स्टेट क्यूए कंसल्टेंट डाॅ सूरचना ने सदर और रामगढ़ पीएचसी का भ्रमण किया। इस दौरान मौजूद कर्मियों को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाले लाभार्थियों का विशेष ख्याल रखने समेत अन्य आवश्यक निर्देश दिए। जबकि, स्थानीय सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी समेत अन्य पदाधिकारी ने विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित शिविर का निरीक्षण कर मौजूद कर्मियों को आवश्यक और जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
– गर्भवती महिलाओं की हुई समुचित जाँच :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं शामिल हुईं और सुरक्षित व सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जाँच करवाई। शिविर में जाँच कर रही मेडिकल टीम द्वारा गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन, यूरिन, एचआईवी, ब्लड ग्रुप, बीपी, हार्ट-बीट आदि की भी जाँच की गई। एएनसी जांच के लिए शिविर में मौजूद महिलाओं को प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने की सलाह दी गई। वहीं, उन्होंने बताया, एएनसी जाँच के दौरान महिलाओं को संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूक किया गया। जिसके दौरान सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई। ताकि महिलाओं में सुरक्षा के दृष्टिकोण से संस्थागत प्रसव को लेकर किसी प्रकार की हिचकिचाहट नहीं रहे और सभी महिलाएं संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दें।
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी :
प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत जाँच करानी चाहिए। दरअसल, समय पर जाँच कराने से किसी भी प्रकार की परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता चल जाता है और शुरूआती दौर में पता लगने पर ही उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक माह की नौ तारीख को पीएचसी स्तर पर एएनसी जाँच की व्यवस्था की गई है। ताकि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार की अनावश्यक शारीरिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिल सके। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है।
– शिशु-मृत्यु दर में कमी लाने की है बेहतर व्यवस्था :
सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जाँच के लिए की गई यह व्यवस्था शिशु-मृत्यु दर में कमी लाने की बेहतर व्यवस्था है। सरकार की यह व्यवस्था मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में अच्छी पहल है। इससे ना सिर्फ सुरक्षित प्रसव होगा, बल्कि शिशु-मृत्यु दर पर भी विराम लगेगा। इसके साथ ही जच्चा-बच्चा दोनों को अनावश्यक परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़ेगा। सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए हर माह की नौ तारीख को सभी पीएचसी एवं सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मुफ्त जाँच की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आदि कार्यक्रम के माध्यम से एनेमिक गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही  एवं  सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। साथ ही अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जाँच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की चारों प्रसव पूर्व जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती और संभावित जटिलताओं का पता चलता है। लक्षणों के मुताबिक जरूरी चिकित्सीय प्रबंधन किया जाता है ताकि माता और उसके शिशु दोनों स्वस्थ्य रहें।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान • स्वास्थ्य संस्थानों में शिविर आयोजित कर गर्भवतियों की हुई प्रसव पूर्व जाँच 

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– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए हर गर्भवती को प्रसव पूर्व जाँच कराना बेहद जरूरी
– अधिकाधिक गर्भवती की जाँच सुनिश्चित कराने को लेकर राज्यस्तर से गठित टीम ने विभिन्न शिविर स्थलों का भ्रमण कर की मॉनिटरिंग
खगड़िया, 09 मई-
सोमवार को जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी, रेफरल एवं अनुमंडलीय व जिला अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व (एएनसी) जाँच के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जाँच शिविर आयोजित किया गया। जिसमें गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जाँच की गई और जाँच के पश्चात आवश्यक चिकित्सा परामर्श भी दिया गया। जाँच के दौरान रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ समेत अन्य आवश्यक चिकित्सा परामर्श विस्तार पूर्वक दिया गया। ताकि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सके और मातृ-शिशु मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित हो सके। वहीं, आयोजित शिविर के सफल संचालन और अधिकाधिक गर्भवती की एएनसी जाँच सुनिश्चित कराने को लेकर राज्य स्तर से गठित मेडिकल टीम द्वारा विभिन्न शिविर स्थलों का भ्रमण कर मॉनिटरिंग की गई। गठित टीम में शामिल केयर इंडिया के एसआरयू डाॅ शकील जावेद ,शिविर स्थलों के भ्रमण के दौरान मेडिकल टीम से आवश्यक जानकारी लेते और जरूरी निर्देश देते दिखे। इसके साथ केयर इंडिया के स्थानीय डीटीएल अभिनंदन आनंद, डीटीओ-ऑन चंदन कुमार, एफपीसी राजेश पांडेय समेत अन्य कर्मी भी मौजूद थे। इसके अलावा सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा समेत अन्य चिकित्सा पदाधिकारी विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित शिविर का भ्रमण कर मेडिकल टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश देते दिखे।
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए हर गर्भवती को प्रसव पूर्व जाँच कराना बेहद जरूरी :
शिविर की मॉनिटरिंग करने पटना से आई राज्यस्तरीय टीम के डाॅ शकील जावेद ने बताया, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए हर गर्भवती महिला को प्रसव जाँच कराना बेहद जरूरी है। इससे ना सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, मातृ-शिशु मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित होगा। जाँच करने में संबंधित लाभार्थियों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इसके मद्देनजर सरकार द्वारा मुफ्त जाँच की व्यवस्था की गई। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर हर माह 09 तारीख को प्रदेश के सभी स्वास्थ्य स्थानों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर आयोजित कर गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जाँच की जाती है।
– गर्भवती महिलाओं की हुई समुचित जाँच :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, आयोजित शिविर में सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं की समुचित स्वास्थ्य जाँच की गई। जिसमें मेडिकल टीम द्वारा गर्भवती महिलाओं की ब्लड, यूरिन, एचआईवी, ब्लड ग्रुप, बीपी, हार्ट-बीट आदि की भी जाँच की गई। साथ ही प्रसव अवधि के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने के लिए जागरूक किया गया।
– अधिकाधिक गर्भवती की जाँच सुनिश्चित कराने पर दिया गया बल :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया शिविर के दौरान अधिकाधिक गर्भवती महिलाओं की समुचित स्वास्थ्य जाँच सुनिश्चित हो, इस पर विशेष बल दिया गया। इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में  आयोजित शिविर में व्यापक व्यवस्था की गई थी। ताकि लाभार्थियों को जाँच कराने में किसी भी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और शिविर का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।

सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की हुई एएनसी जांच

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एएनसी जांच से सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा
जांच के बाद महिलाओं को दिया गया आवश्यक निर्देश
भागलपुर, 9 मई
जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में सोमवार को गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच हुई। जांच के बाद सभी गर्भवती महिलाओं को आवश्यक निर्देश दिए गए। जिनमें प्रसव को लेकर जटिलता देखी गई, उनका नाम सूची में दर्ज कर लिया गया, ताकि उसकी निगरानी की जा सके। खासकर जिन गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन सात प्रतिशत से कम था या फिर जिन्हें उच्च रक्तचाप की शिकायत थी। जांच के दौरान रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों समेत अन्य आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श भी गई, ताकि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सके।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि एएनसी जांच का मकसद मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। हर महीने की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। इसे लेकर मॉनिटरिंग भी की जाती है। अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच हो सके, इसे लेकर पहले से तैयारी की जाती है। दरअसल, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व चार जांच होती है। पहली जांच गर्भधारण से लेकर 12वें सप्ताह तक, दूसरी जांच गर्भधारण के 14वें से लेकर 26वें सप्ताह तक, तीसरी जांच गर्भधारण के 28वें से 34वें सप्ताह तक और आखिरी जांच गर्भधारण के 36वें सप्ताह से लेकर प्रसव होने के पहले तक कराई जाती है।
किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत जांच कराएं- सिविल सर्जन ने बताया कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए हर गर्भवती महिला को प्रसव जांच कराना बेहद जरूरी है। इससे ना सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, मातृ-शिशु मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित होगा। प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर जांच कराने से किसी भी प्रकार की परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता चल जाने से उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक माह की नौ तारीख को पीएचसी स्तर पर मुफ्त एएनसी जांच की व्यवस्था की गई है। ताकि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार की अनावश्यक शारीरिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
कई तरह की हुई जांचः एएनसी जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं का वजन, बीपी, एचआईवी, ब्लड शुगर, एफएचएस व अन्य तरह की जांच की गई। जांच के बाद महिलाओं को उचित खानपान का परामर्श दिया गया। साथ ही गर्भवती महिलाओं को हरी पत्तेदार साग- सब्जी, फल, दूध,अंडा मांस-मछली, चुकंदर, केला, मौसमी फल खाने की सलाह दी गई। जांच के दौरान महिलाओं को परिवार नियोजन के प्रति भी जागरूक किया गया। सभी लोगों को दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने के लिए कहा गया। साथ ही दो बच्चे के बाद बंध्याकरण की भी सलाह दी गई।

यूएएस इंटरनेशनल के एमडी ईशान तनेजा और आईबीएस हैदराबाद डीन डॉ. सीएस श्यालाजन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये

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– प्लेसमेंट इंटर्नशिप और ग्लोबल एक्सपोजर से छात्रों को फायदा मिलेगा- सीएस श्यालाजन

नईदिल्ली-
यूएएस इंटरनेशनल और आईबीएस हैदराबाद ने एमओयू पर साइन किए। आईबीएस हैदराबाद के प्रो एंड डीन एकेडमी डॉ. सीएस श्यालाजन और यूएएस इंटरनेशनल के सीईओ व एमडी ईशान तनेजा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। यह एमओयू ऑनलाइन साइन किए गए। इस एमओयू के साथ ही यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी का ओफिसियल पार्टनर के रूप में आईबीएस हैदराबाद कार्य करेगा। दोनों कंपनियां प्लेसमेंट इंटर्नशिप और ग्लोबल एक्सपोजर पर कार्य करेंगे। जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल जाना जाता है। आईबीएस हैदराबाद के प्रो एंड डीन एकेडमी डॉ. सीएस श्यालाजन ने हस्ताक्षर पर प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले नौ वर्षों से जिस प्रकार से एजुकेशन के क्षेत्र में यूएएस इंटरनेशनल कार्य कर रहा है यह अद्भूत है। निश्चितरूप से आईबीएस हैदराबाद को भी इससे फायदा मिलेगा।
सीएस श्यालाजन ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों में व्यावसायिक कुशलता की उन्नति करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। जिसकी पूर्ति यूएएस इंटरनेशनल लगातार कर रहा है। यूएएस इंटरनेशनल का ध्यान लगातार छात्रों में व्यावसायिक क्षमता की उन्नति करना है जिससे उनकी कार्यकुशलता को बढ़ावा मिले। इसके लिए कई तरह की बाउंडिंग भी करता है। छात्रों को यहीं इंटरनेशनल एक्सपोजर भी एमओयूसाइन करने से मिलेगा।
इस मौके पर यूएएस इंटरनेशनल के एमडी व सीईओ ईशान तनेजा ने एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आईबीएस हैदराबाद बेहतर बिजनेस स्कूल है। जहां के छात्र देश व विदेश में काफी बेहतरीन परफोर्मेंशन के साथ नाम रोशन कर रहे हैं। निश्चिततौर पर यूएएस इंटरनेशनल इनके कार्यों में चार चांद लगा देगा।
ईशान तनेजा ने कहा कि आज नई शिक्षा नीति में कई ऐसे प्रावधान है जिसके लिए संस्थान में एक्सपोजर लाने की जरूरत है जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल लगातार कार्य कर रहा है। आईबीएस हैदराबाद जैसी संस्थान के साथ एमओयू साइन होने पर युवाओं को काफी लाभ मिलेगा।
गौरतलब है कि यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी पिछले नौ वर्षों में चार कंपनियों सफलतापूर्वक चल रहा है। जिसमें यूएएस इंटरनेशनल वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी, यूएएस इंटरनेशनल हॉस्टल चेन, यूएएस इंटरनेशनल हॉलिडेज प्रा. लि. है और अभी एलोफ्ट करियर नाम से ऑन लाइन एजुकेशन का नया प्लेटफोर्म तैयार किया गया है जिसको लेकर युवाओं में उत्साह है।

 

सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए एएनसी जांच जरूरीः एसीएमओ

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-हर महीने की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की होती है एएनसी जांच
-प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान  के तहत सभी अस्पतालों में हुई जांच
बांका, 9 मई-
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सोमवार को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच हुई। जांच के बाद सभी गर्भवती महिलाओं को आवश्यक निर्देश दिए गए। जिनमें प्रसव को लेकर जटिलता देखी गई, उनका नाम सूची में दर्ज कर लिया गया, ताकि उसकी निगरानी की जा सके। खासकर जिन गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन कम था या फिर जिन्हें बीपी की शिकायत थी। जांच के दौरान रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों समेत अन्य आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श भी दिया गया, ताकि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सके। साथ ही सभी लोगों को सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने की सलाह दी गई।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच जरूरी है। एएनसी जांच का मकसद मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। हर महीने की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। इसे लेकर मॉनिटरिंग भी की जाती है। अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच हो सके, इसे लेकर पहले से तैयारी की जाती है। दरअसल, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व चार जांच होती है। पहली जांच गर्भधारण से लेकर 12वें सप्ताह तक, दूसरी जांच गर्भधारण के 14वें से लेकर 26वें सप्ताह तक, तीसरी जांच गर्भधारण के 28वें से 34वें सप्ताह तक और आखिरी जांच गर्भधारण के 36वें सप्ताह से लेकर प्रसव होने के पहले तक कराई जाती है।
अस्पतालों में एएनसी जांच की मुफ्त व्यवस्थाः एसीएमओ ने बताया कि एएनसी जांच से न सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मातृ-शिशु मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित होगा। प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर जांच कराने से किसी भी प्रकार की परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता चल जाने से उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक माह की नौ तारीख को पीएचसी स्तर पर मुफ्त एएनसी जांच की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार की अनावश्यक शारीरिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
कई तरह की हुई जांचः एएनसी जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं का वजन, बीपी, एचआईवी, ब्लड शुगर, एफएचएस व अन्य तरह की जांच की गई। जांच के बाद महिलाओं को उचित खानपान का परामर्श दिया गया। साथ ही गर्भवती महिलाओं को हरी पत्तेदार साग- सब्जी, फल, दूध,अंडा मांस-मछली, चुकंदर, केला, मौसमी फल खाने की सलाह दी गई। जांच के दौरान महिलाओं को परिवार नियोजन के प्रति भी जागरूक किया गया। सभी लोगों को दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने के लिए कहा गया। साथ ही दो बच्चे के बाद बंध्याकरण की भी सलाह दी गई।