मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान के तीसरे चरण का आज आखिरी दिन

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-बच्चे और गर्भवती महिलाएं कराएं टीकाकरण, बीमारियों से होगा बचाव
-आशा कार्यकर्ता लगा रहीं जोर, लोगों को ला रहीं टीकाकरण केंद्रों तक
भागलपुर, 9 मई
12 तरह की बीमारियों से बचाव को लेकर चल रहे मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान के तीसरे चरण का  मंगलवार को आखिरी दिन है। अधिक से अधिक महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण हो सके, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जोर लगा दिया है। क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता महिलाओं और बच्चों को टीकाकरण केंद्रों तक लाने के लिए जोर लगा रही हैं। खुद जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (डीआईओ) डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने सोमवार को कई टीकाकरण केंद्रों का जायजा लिया और अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण कराने के लिए कहा। उन्होंने सच्चिदानंदनगर, खंजरपुर, किलाघाट समेत कई केंद्रों का जायजा लिया। उनके साथ यूएनडीपी के संदीप कुमार भी मौजूद थे। जायाजा लेने के दौरान डीआईओ ने कई तरह के निर्देश दिए।
डीआईओ डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि अभियान को दो दिन और बढ़ा दिया गया है। पहले यह अभियान आठ मई तक चलना था, लेकिन बीच में ईद की छुट्टी के कारण इसे दो दिन और बढ़ा दिया गया है। इस दौरान नियमित टीकाकरण से वंचित बच्चों को सूची के अनुसार टीका दिया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता क्षेत्र के छूटे हुए बच्चों को टीकाकरण केंद्रों तक ला रही हैं। लोगों से भी मेरी अपील है कि मंगलवार को अभियान का आखिरी दिन है, इसलिए जिनके बच्चों को अब तक टीका नहीं लगाया जा सका है, वे अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर बच्चों को टीका लगवाएं। मुझे उम्मीद है कि जिस तरह से पहले दो चरण में हमलोगों ने लक्ष्य से अधिक लोगों का टीकाकरण किया, उसी तरह इस बार भी लक्ष्य से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण हो सकेगा।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण जरूरीः जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता है, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलता है। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसलिए जिले के सभी लाभार्थियों से कहना चाहता हूं कि जो नियमित टीकाकरण नहीं करा पाएं हैं, वह अपने नजदीकी शिविर स्थलों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि इंद्रधनुष अभियान के माध्यम से टीका से छूटी हुई गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जागरूक कर प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जाएगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरणः नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर सप्ताह बुधवार और शुक्रवार को होता है। जरूरत पड़ने पर अन्य दिन भी टीकाकरण किया जाता है। इसके माध्यम से 2 वर्ष तक के बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होने से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलता है।

सीपीजे कॉलेज में संपन्न हुआ एलुमनी मीट कार्यक्रम “रीकनेक्ट-2022”

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सीपीजे कॉलेज, नरेला (गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली से संबद्ध) ने 7 मई 2022 को कॉलेज में एलुमनी मीट “रीकनेक्ट-2022″ का आयोजन किया जिसमें कॉलेज के कुल 500 पूर्व छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। एक कहावत है कि ‘आपके संस्थान/ विश्वविद्यालय के लिए आपके पूर्व छात्रों से बेहतर कोई एंबेसडर नहीं है। पूर्व छात्र किसी भी संस्थान के लिए गौरव के साथ-साथ संसाधन भी होते हैं। एक सहायक और लगनशील पूर्व छात्रों के होने से एक विशाल समर्थन प्रणाली बनती है। पूर्व छात्रों और संस्थान के बीच एक सतत संचार प्रणाली होनी चाहिए। शहर के एक प्रतिष्ठित संस्थान में शनिवार दोपहर एक नया माहौल देखने को मिला। हंसमुख चेहरों के साथ, प्रसिद्ध अधिवक्ताओं, आईटी विश्लेषकों, प्रोफेसरों और उद्यमियों ने अपने पुराने दोस्तों से मिलने के लिए अपने दिल और दिमाग को नियंत्रित करने वाली भावनाओं के साथ अपने कॉलेज की ओर जाने का रास्ता खोज लिया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अभिषेक जैन, महासचिव, श्री युगांक चतुर्वेदी, महानिदेशक, प्रो. जे.पी. मोहला, निदेशक (ऐकडेमिक) और कॉलेज के अन्य निदेशकों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। पूर्व छात्रों के साथ बातचीत करते हुए, महासचिव डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य पूर्व छात्रों के साथ बातचीत करना, उनकी प्रगतिशील सफलता को जानना, भविष्य के कार्यक्रमों की योजना बनाना, फीडबैक लेना और साथ के सुखद क्षणों को संजोना था। उन्होंने कहा, ” एलुमनी मीट उन पूर्व छात्रों के लिए एक अवसर है जो स्मृतियों को फिर से जोड़ना और ताज़ा करना चाहते हैं”। श्री युगांक चतुर्वेदी, महानिदेशक, जो सभी छात्रों के ‘गुरु या लाइफ कोच के रूप में लोकप्रिय हैं, ने एक हार्दिक स्वागत भाषण दिया, जिसके बाद रैंडम क्रू, अग्नि, ब्लेजिंग-क्रू, माज़िल जैसे विभिन्न छात्र समूहों द्वारा मनोरंजक खेल और मंच प्रदर्शन किया गया। । दर्शकों के मुस्कुराते चेहरों ने सभी प्रस्तुतियों का आनंद लिया। एलुमनी मीट का समापन मिस्टर एंड मिस रीकनेक्ट खिताबों की घोषणा के साथ हुआ, जिसके बाद सुप्रसिद्ध संचिता हाजरा और अभिनव नागपाल के बैंड द्वारा शानदार संगीत प्रदर्शन किया गया, जिसने दर्शकों को आश्चर्य और खुशी से भर दिया। पूरे कार्यक्रम की भव्यता, जीवंतता और माधुर्य ने सुंदरता की अनूठी भावना, ज्ञान और बुद्धिमत्ता के प्रवाह का आभास करा दिया। इस दिन को निश्चित रूप से ‘मेमोरी लेन पर चलने, दोस्ती को नवीनीकृत करने, यादों को ताज़ा करने, पुरानी यादों को जीवंत करने और अनुभवों को साझा करने के लिए एक विशेष दिन’ के रूप में उल्लेखित किया जाएगा।

स्वास्थ्य संस्थानों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की एएनसी जाँच कल 

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– अधिकाधिक गर्भवती की जाँच सुनिश्चित कराने को लेकर राज्यस्तर से गठित टीम द्वारा किया जाएगा अनुश्रवण
– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यक्रम निदेशक ने पत्र जारी कर राज्य के सभी सिविल सर्जन को दिए आवश्यक निर्देश
लखीसराय-
सोमवार को जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी, रेफरल एवं अनुमंडलीय व जिला अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर आयोजित कर प्रसव पूर्व (एएनसी) जाँच की जाएगी। जहाँ गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जाँच की जाएगी और आवश्यक चिकित्सा परामर्श भी दिया जाएगा। जिसमें रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ समेत अन्य आवश्यक चिकित्सा परामर्श विस्तार पूर्वक दिया जाएगा। ताकि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सके और मातृ-शिशु मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित हो सके। वहीं, आयोजित होने वाले शिविर के दौरान अधिकाधिक गर्भवती की एएनसी जाँच सुनिश्चित कराने को लेकर राज्य स्तर से दो सदस्यीय मेडिकल टीम का गठन किया गया है। गठित टीम में शामिल यूनिसेफ के सरोज कुमार एवं स्टेट क्यूए कंसल्टेंट डाॅ सूरचना द्वारा शिविर का अनुश्रवण किया जाएगा। वहीं, उक्त अभियान के सफल संचालन को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन समेत अन्य चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
– अधिकाधिक गर्भवती महिलाओं की जाँच सुनिश्चित कराने को लेकर दिए गए हैं आवश्यक निर्देश :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया गर्भवती महिलाओं की शुरुआती दौर से ही संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता को स्वास्थ्य अवलोकन करना है। प्रसव के 45 वें दिन गृह भ्रमण कर आशा कार्यकर्ता को स्वास्थ्य अवलोकन कर एएनएम के माध्यम से स्थानीय प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को रिपोर्ट उपलब्ध करानी है। इस कार्य के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि के रूप 250 रुपये दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया, सोमवार को आयोजित होने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत एएनसी जाँच शिविर की सफलता को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से सभी लाभार्थियों तक शिविर की जानकारी उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराने को कहा गया है। ताकि अधिकाधिक योग्य लाभार्थियों की जाँच और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
– गर्भवती महिलाओं की होगी समुचित जाँच :
आयोजित शिविर में सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं की समुचित स्वास्थ्य जाँच की जाएगी। जिसमें मेडिकल टीम द्वारा गर्भवती महिलाओं की ब्लड, यूरिन, एचआईवी, ब्लड ग्रुप, बीपी, हार्ट-बीट आदि की भी जाँच की जाएगी। साथ ही प्रसव अवधि के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने के लिए जागरूक किया जाएगा।
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी :
प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत जाँच करानी चाहिए। दरअसल, समय पर जाँच कराने से किसी भी प्रकार की परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता चल जाता और पता लगने पर ही उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक माह की नौ तारीख को पीएचसी स्तर पर मुफ्त एएनसी जाँच की व्यवस्था की गई है। ताकि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार की अनावश्यक शारीरिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिल सके । साथ ही सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है।

कोरोना की चौथी लहर की संभावनाओं के बीच रहें सतर्क

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– मास्क पहनें और कोरोना गाइड लाइन का करें पालन
– डरने के बजाय सतर्क रहने पर नहीं आएंगे कोरोना की चपेट में
मुंगेर-
कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना बनी हुई है । ऐसे में कुछ लोगों में इसको लेकर डर भी पैदा हो गया है, लेकिन लोगों को इससे डरने के बजाय कोरोना से सतर्क रहने की जरूरत ज्यादा है। यदि लोग सतर्क रहेंगे तो कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे। इसलिए कोरोना का डर मन से निकाल दीजिए और घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाइए और सामाजिक दूरी के नियम का पालन कीजिए। पिछली तीन लहरों के दौरान देखा गया है कि जो लोग सतर्क रहे, वे लोग कोरोना की चपेट में आने से बचे रहे। इसलिए सतर्कता पर ध्यान देने की जरूरत है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि कोरोना ही नहीं, बल्कि किसी भी बीमारी से बचाव में सतर्कता सबसे बड़ा हथियार होता है। कोरोना में भी यही बात लागू होती है। कोरोना को लेकर तो पिछले दो सालों का लोगों के पास अनुभव भी है और आदत भी । अभी भी सतर्क रहने की आदत को बरकरार रखने की जरूरत है। बहुत सारे लोग अभी भी मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो इसका पालन नहीं करते। ऐसे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। कोरोना से बचाव एक तरह से सामूहिक जिम्मेदारी है। जिसमें सभी लोगों को अपनी भूमिका निभाने की जरूरत है।
लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं :
उन्होंने बताया कि कोरोना के लक्षण से लगभग सभी लोग परिचित हैं। सूखी खांसी, बुखार इत्यादि लक्षण मिले तो तत्काल जांच करा लेनी चाहिए। कोरोना की लहर भले ही अभी नहीं आई हो, लेकिन सतर्कता को लेकर अस्पतालों में जांच लगातार चल रही है। चौथी लहर की आशंका को लेकर अब इस पर विशेष ध्यान भी दिया जा रहा है। इसलिए अगर किसी को भी कोई लक्षण दिखाई पड़े तो अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल जाकर जांच करा लें। इसके साथ ही रिपोर्ट आने तक घर-परिवार के सदस्यों से दूरी बनाकर रहें। ऐसा करते रहने से आप भी बचे रहेंगे और आपके साथ रहने वाले लोग भी कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे।
टीका नहीं लिए हैं तो नहीं करें देरी :
उन्होंने बताया कि जिस तरह से कोरोना की तीसरी लहर का असर टीकाकरण के चलते अधिक नहीं हुआ। ठीक उसी तरह अगर लोग टीका लिए रहेंगे तो चौथी लहर का भी उतना असर नहीं होगा। जिन लोगों का जो भी डोज बाकी है, तत्काल ले लें। जिनलोगों ने अभी तक एक भी डोज नहीं ली है या फिर दूसरी या तीसरी डोज बाकी है तुरंत ले लें। जिस तरह से कोरोना की गाइडलाइन बचाव का सबसे बड़ा हथियार है, उसी तरह कोरोना का टीका भी इससे बचाव में कारगर हथियार है। इसलिए देरी नहीं करें और जल्द से जल्द टीका ले लें। अब तो काफी संख्या में लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है, इसलिए किसी भी तरह का भ्रम मन में हो तो उसे निकाल दें। टीका से किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।

ऑगनबाड़ी केंद्रों पर मनाया गया गोदभराई उत्सव, उचित पोषण की दी गई जानकारी 

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– नियमित और कोविड टीकाकरण को लेकर लाभार्थियों को किया गया जागरूक
– जिले के सभी प्रखंडों में उत्सवी माहौल में मनाया गया गोदभराई उत्सव, स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर किया गया जागरूक
खगड़िया, 07 मई। शनिवार को पूर्व से निर्धारित तिथि के अनुसार जिले के सभी प्रखंडों में संचालित ऑगनबाड़ी केंद्रों पर उत्सवी माहौल में गोदभराई उत्सव मनाया गया। जिसके दौरान लाभार्थियों को पोषण से संबंधित विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई एवं स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर जागरूक किया गया। मंगल गीतों से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया और गर्भवती महिला को उपहार स्वरूप पोषण की पोटली दी गई है। जिसमें गुड़, चना, हरी पत्तेदार सब्जियां, आयरन की गोली, पोषाहार व फल आदि शामिल थे। गर्भवती महिलाओं को चुनरी ओढ़ाकर और टीका लगाकर गोदभराई रस्म पूरी की गई। वहीं, सभी महिलाओं को अच्छी सेहत के लिए पोषण की आवश्यकता व महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी :
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने बताया, गोदभराई रस्म में सेविकाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं के सम्मान में उसे चुनरी ओढ़ाकर और तिलक लगा कर उनके गर्भस्थ शिशु की बेहतर स्वास्थ्य की कामना की गई। साथ ही गर्भवतियों की गोद में पोषण संबंधी पौष्टिक आहार फल सेव, संतरा, बेदाना, दूध, अंडा, दाल सेवन करने का तरीका बताया गया। साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन की गोली खाने की सलाह दी गई। जिसमें बताया गया कि गर्भवती महिला कुछ सावधानी और समय से पौष्टिक आहार का सेवन करें तो बिना किसी अड़चन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। वहीं, उन्होंने बताया, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है।
– नियमित और कोविड टीकाकरण को लेकर लाभार्थियों को किया गया जागरूक :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, गोदभराई उत्सव कार्यक्रम के दौरान मौजूद लाभार्थियों को जिले में चल रहे मिशन इंद्रधनुष अभियान के तहत नियमित टीकाकरण कराने को लेकर भी जागरूक किया गया और नियमित टीकाकरण के महत्व एवं होने वाले फायदे की जानकारी भी दी गई। साथ ही कोविड की संभावित चौथे लहर से सुरक्षा के मद्देनजर वैक्सीनेशन कराने को लेकर जागरूक किया गया। इसके अलावा मौजूद लाभार्थियों को बताया गया कि शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल माँ का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है। सामान्य प्रसव के लिए गर्भधारण होने के साथ ही महिलाओं को चिकित्सकों से जाँच कराना चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।
– लाभार्थियों को एनीमिया प्रबंधन की दी गई जानकारी :
सदर सीडीपीओ विनीता कुमारी ने बताया कार्यक्रम के दौरान गर्भवती माता, किशोरियां व बच्चों में एनीमिया की रोकथाम जरूरी है। गर्भवती महिला को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली जरूर खानी चाहिए। 10 वर्ष से 19 साल की किशोरियों को भी प्रति सप्ताह आयरन की एक नीली गोली का सेवन करना चाहिए। छह माह से पांच साल तक के बच्चों को सप्ताह में दो बार एक-एक मिलीलीटर आयरन सिरप देनी चाहिए।
– स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर भी लोगों को किया गया जागरूक :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, गोदभराई उत्सव के दौरान मौजूद लोगों को स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर भी जागरूक किया गया। जिसके दौरान व्यक्तिगत साफ-सफाई समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी गई। साथ ही घर समेत आसपास के जगह भी साफ-सफाई का ख्याल रखने की सलाह दी गई। घर के आसपास जलजमाव नहीं होने, कूड़ेदान का उपयोग करने आदि जानकारियाँ दी गई।

टीबी के इलाज के दौरान तंबाकू और शराब का सेवन नहीं करें

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-कहलगांव एनटीपीसी अस्पताल में टीबी केयर और सपोर्ट ग्रुप की बैठक
-टीबी के मरीजों और देखभाल करने वालों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
भागलपुर-
कहलगांव स्थित एनटीपी अस्पताल में शनिवार को टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप बैठक हुई। बैठक का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने अस्पताल प्रबंधन के सहयोग से किया। जिसमें 13 मरीज और 8 देखभाल करने वाले सम्मिलित हुए। इस दौरान टीबी मरीज को सही समय और नियमित दवाई का सेवन करने की सलाह दी गई। दवाई सेवन के दौरान होने वाली परेशानी, निक्षय पोषण के तहत मिलने वाली राशि और पौष्टिक भोजन करने के लिए भी मरीजों को बताया गया। इलाज के दौरान शराब और  तम्बाकू का सेवन नहीं करने की सलाह भी गई। बैठक में सीएमओ डॉक्टर सुष्मिता सिंह, एमओ डॉक्टर सुरेश कुमार, एलटी राकेश कुमार मिश्रा, एसटीएलएस देव कुणाल और केएचपीटी से धीरज कुमार मिश्रा सम्मलित हुए।
डॉक्टर सुष्मिता सिंह ने बैठक के दौरान बताया कि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। लोगों को जागरूक कर ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः वहीं डॉक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसीलिए टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

थैलेसीमिया से पीड़ित लोग भी जी रहे हैं लंबी जिंदगी

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-थैलेसीमिया दिवस आज
-गंभीरता के अनुसार किया जाता है इस बीमारी का इलाज
-हीमोग्लोबिन के स्तर को नियंत्रित रखें और नियमित दवा लें
बांका-
आज विश्व थैलेसीमिया दिवस है। इस बीमारी से जूझ रहे लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए हर वर्ष 8 मई को थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। इस बार का थीम सतर्क रहो, देखभाल साझा करो और थैलेसीमिया के ज्ञान को बेहतर बनाने के लिए काम करते रहो है। यह दिन थैलेसीमिया रोग से पीड़ित रोगियों को समर्पित रहता और उन्हें एक सामान्य व्यक्ति की तरह जीने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही इस दिन इस बीमारी को रोकने के लिए भी कदम उठाए जाते हैं। इसे लेकर सार्वजनिक स्थानों पर कार्यक्रम कर इसके लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में लोगों को बताया जाता है। इससे पीड़ित लोगों को इस तरह के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि थैलेसीमिया का इलाज बीमारी के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। थैलेसीमिया के लक्षण वाले रोगियों को यह जानना जरूरी होता है कि यदि वे थैलेसीमिया के लक्षण वाले किसी व्यक्ति से शादी करते हैं तो उनसे होने वाले बच्चे को इस बीमारी के होने की आशंका रहती है। पिछले कुछ समय में थैलेसीमिया के इलाज में काफी सुधार हुआ है। मध्यम और गंभीर थैलेसीमिया से पीड़ित लोग भी अब लंबी जिंदगी जी रहे हैं। क्रोनिक ब्लड ट्रांसफ्यूजन थैरेपी, आयरन कीलेशन थैरेपी की मदद से थैलेसीमिया का इलाज हो रहा है। थकान, कमजोरी, पीली त्वचा, पेट की सूजन, चेहरे की हड्डी की विकृति धीमी, गहरे रंग का पेशाब आदि थैलेसीमिया के लक्षण हैं। ये लक्षण जन्म लेने के दो वर्षों के दौरान विकसित होते हैं।
यह रोग माता-पिता से बच्चों में होता हैः डॉ. चौधरी कहते हैं कि यह एक प्रकार का आनुवांशिक रोग है, जो माता-पिता से बच्चों में जाता है। थैलेसीमिया रक्त संबंधी रोग है, जो बच्चों में होता है। इसलिए उन्हें बार-बार ब्लड बैंक ले जाना होता है। इस बीमारी में बहुत ज्यादा खून की कमी होने लगती है, इसलिए बाहरी खून चढ़ाना होता है। इसलिए यह बीमारी कई प्रकार के होते हैं और इसका इलाज बीमारी की गंभीरता के अनुसार किया जाता है। इस बीमारी से शरीर में हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण की क्षमता प्रभावित होती है।
थैलेसीमिया दिवस मनाने का यह है उद्देश्यः थैलेसीमिया दिवस मनाने का उद्देश्य है कि इस बीमारी के लक्षण और इसके साथ जीने के तरीकों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए। यदि व्यक्ति थैलेसीमिया से पीड़ित है तो शादी से पहले डॉक्टर्स से जरूर परामर्श लें। बच्चों के स्वास्थ्य, समाज और पूरे विश्व के लिए टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी यह दिवस मनाया जाता है। यदि आप थैलेसीमिया से खुद का बचाव करना चाहते हैं तो गर्भावस्था के दौरान इसकी जांच करवाएं। हीमोग्लोबिन के स्तर को नियंत्रित रखें। थैलेसीमिया होने पर दवा का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। थैलेसीमिया के गंभीर मरीजों को खून चढ़ाना आवश्यक हो जाता है। कम गंभीर अवस्था में पौष्टिक भोजन और व्यायाम बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है। बार-बार खून चढ़ाने से रोगी के शरीर में आयरन की मात्रा अधिक हो जाती है।

फाइलेरिया उन्मूलन • जिले में लोगों को जागरूक करने के लिए चल रहे दो दिवसीय नुक्कड़ नाटक का हुआ समापन

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– स्वास्थ्य विभाग एवं सीफार के संयुक्त तत्वावधान में नुक्कड़ नाटक के तहत फाइलेरिया से बचाव के लिए लोगों को किया गया जागरूक
– 11 से 18 मई तक जिले के सभी प्रखंडों में चलेगा नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम, सामुदायिक स्तर पर लोगों का लिया जाएगा सैंपल
लखीसराय, 06 मई।
फाइलेरिया मुक्त प्रदेश निर्माण को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर और सजग है। जिसके सार्थक रूप देने के लिए सरकार एवं प्रशासनिक स्तर से हर जरूरी निर्णय भी लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग एवं सीफार (सेंटर फाॅर एडवोकेसी एण्ड रिसर्च) स्वास्थ्य संगठन के संयुक्त तत्वावधान में गुरूवार से जिले में शुरू हुए दो दिवसीय नुक्कड़ नाटक प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हो गया। इस दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों में पूर्व से चयनित और चिह्नित जगहों पर पटना से आई कला जागरण टीम के सदस्यों द्वारा स्वास्थ्य विभाग एवं सीफार के स्थानीय पदाधिकारियों एवं कर्मियों के सहयोग से नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। जिसके माध्यम से मुख्य कलाकर अरविंद कुमार के नेतृत्व में कलाकारों की टीम के द्वारा फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही जिले में शुरू होने वाले नाइट ब्लड सर्वे (रात्रि रक्तपट्ट संग्रह) कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं, सभी जगहों पर आयोजित नुक्कड़ नाटक में लोगों की अच्छी उपस्थिति देखी गई एवं सभी सामुदायिक लोगों ने उक्त कार्यक्रम के उद्देश्य एवं महत्व को उत्साह से जाना।
– 11 से 18 मई तक जिले में चलेगा नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम, सामुदायिक स्तर पर लोगों का लिया जाएगा सैंपल :
पूरे कार्यक्रम का लीड कर सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है।  इसे सुनिश्चित करने को लेकर तमाम गतिविधियों का आयोजन कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिसके दौरान लोगों को फाइलेरिया के कारण, लक्षण एवं इससे बचाव और उपचार की जानकारी दी जा रही है। इसी कड़ी में जिले में 11 से 18 मई तक आयोजित होने वाले नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम की सफलता को लेकर दो दिवसीय नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। जिसके माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूक किया गया एवं जाँच कराने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं, उन्होंने बताया, रात के 08 बजे से 12 बजे के बीच इस बीमारी जाँच करने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। दरअसल, इस दौरान कीटाणु सक्रिय होता है। जिसके कारण आसानी के साथ शुरुआती दौर में बीमारी की सही जाँच संभव है। इसी उद्देश्य से नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम का निर्णय लिया गया। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम की सफलता को लेकर गुरुवार को एसीएमओ कार्यालय में सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी की अध्यक्षता में फाइलेरिया प्रभावित एरिया के सभी एलटी को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम के दौरान संबंधित मरीजों का ब्लड लेने समेत सैंपलिंग के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता व सावधानी सहित अन्य आवश्यक जानकारी दी गई। इस मौके पर भीडीओ भगवान दास, गौतम प्रसाद, कंस्टलटेट नरेंद्र कुमार, भीबीडीएस दिलीप कुमार मालाकार, केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती आदि मौजूद थे।
– जिले में आठ जगहों पर नुक्कड़ नाटक का प्रस्तुतिकरण कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को किया गया जागरूक :
जिले में आठ जगहों पर नुक्कड़ नाटक का प्रस्तुतिकरण कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए जागरूक किया गया। जिसमें गुरुवार को बरियारपुर पुस्तकालय सूर्यगढ़ा, उत्क्रमित मध्य विद्यालय सैदपुरा पिपरिया, अशोक धाम रजौनी चौकी (लखीसराय) एवं मध्य विद्यालय पतनेर में नाटक का प्रस्तुतिकरण कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया गया। जबकि, शुक्रवार को हलसी बाजार, औरे कचहरी रामगढ़ चौक, गढ टोला बड़हिया एवं इंदुपुर में नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया। बता दें कि यह सभी एरिया फाइलेरिया प्रभावित है।  उक्त सभी क्षेत्रों में नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम का आयोजन होना है।

फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम: फाइलेरिया रोधी दवाओं के सही डोज़ के संबंध में जारी किया गया दिशा-निर्देश 

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– भारत सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन पर्याप्त
– फाइलेरिया के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी सह अपर निदेशक ने मुंगेर सहित सभी ज़िलों के वेक्टर बोर्न कंट्रोलिंग ऑफिसर को जारी किया पत्र
मुंगेर, 6 मई –
फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत फाइलेरिया रोधी दवाओं के सही डोज़ के संबंध में एक सार्वभौम दिशा -निर्देश जारी किया गया है। भारत सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार फाइलेरिया से बचाव और रोकथाम के लिए साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवाओं अल्बेंडाजोल, डीईसी और आइवर माइसिन या अल्बेंडाजोल और डीईसी का सेवन पर्याप्त है।  इसको ले फाइलेरिया के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी सह अपर निदेशक डॉ. विपिन सिन्हा ने मुंगेर सहित सभी ज़िलों के वेक्टर बोर्न कंट्रोलिंग ऑफिसर को पत्र जारी किया है।
मुंगेर के डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोलिंग ऑफिसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा जारी पत्र में जानकारी मिली है कि कहीं-कहीं पर फाइलेरिया रोधी दवाओं के संबंध में भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का अनुपालन नहीं हो रहा है। इसको ले एक सार्वभौम दिशा-निर्देश जारी किया गया है। जिसके अनुसार भविष्य में कभी भी किसी सरकारी पदाधिकारी के द्वारा अपने स्तर पर फाइलेरिया रोधी दवाओं के संबंध में किसी प्रकार के भ्रामक या गलत जानकारी का प्रचार-प्रसार नहीं हो यह सुनिश्चित करना है। इसके के लिए सभी सरकारी पदाधिकारी के द्वारा निम्नलिखित जानकारी और सूचनाओं को ही प्रदान करना है –
-: माइक्रो फाइलेरिया पॉजिटिव व्यक्तियों को भारत सरकार के गाइड लाइन के अनुसार 12 दिनों के लिए 6 मिली ग्राम/किलोग्राम शरीर के वजन के आधार पर डीईसी दवा का सेवन एवं एक गोली अल्बेंडाजोल एक बार प्रदान करने का दिशा-निर्देश प्रदान किया गया है । केवल ऐसे पॉजिटव पाए गए व्यक्तियों को ही 12 दिनों तक दवा का सेवन करना है।
-: हाथी पांव एवं हाइड्रोसिल फाइलेरिया के संक्रमण होने वाले दुष्प्रभाव हैं। अतः इस तरह के व्यक्तियों को भी साल में एक बार ही भारत सरकार के गाइडलाइन के आधार पर फाइलेरिया रोधी दवाओं अल्बेंडाजोल, डीईसी और आइवर माइसिन या अल्बेंडाजोल और डीईसी का सेवन करना पर्याप्त है।  यदि ऐसे व्यक्ति फाइलेरिया पॉजिटिव पाए जाते हैं  तभी उन्हें कुल 12 दिनों तक फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराने का दिशा-निर्देश जारी किया गया है ।

मिशन इंद्रधनुष अभियान: जिले में संचालित नियमित टीकाकरण में आयी तेजी

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– अभियान के निर्धारित समयावधि के अंदर शत-प्रतिशत लाभार्थियों के टीकाकरण सुनिश्चित कराने पर दिया जा रहा है बल
– स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने शिविर स्थलों का निरीक्षण कर कर्मियों को दिए जरूरी दिशा-निर्देश

खगड़िया, 06 मई

मिशन इंद्रधनुष अभियान के तहत जिले में 02 मई से शुरू हुए साप्ताहिक नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की गति तेज कर दी गई है। ताकि हर हाल में उक्त अभियान की निर्धारित समयावधि के अंदर शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और अभियान का सफलतापूर्वक समापन हो सके। इसको लेकर जहाँ 02 मई से लगातार जिले के सभी प्रखंडों में चयनित एवं चिह्नित जगहों पर टीकाकरण शिविर का आयोजन कर टीका से छूटी गर्भवती और बच्चों का नियमित टीकाकरण (आर आई) किया जा रहा है। वहीं, स्वास्थ्य टीम द्वारा लोगों को टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। इधर, शुक्रवार को जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने अपने-अपने क्षेत्र में संचालित टीकाकरण स्थलों का निरीक्षण किया और शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर ड्यूटी पर तैनात मेडिकल टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

– शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए हैं जरूरी निर्देश :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, जिले में 02 मई से संचालित साप्ताहिक नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि इसे सुनिश्चित करने को लेकर सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी खुद सेशन साइट का लगातार भ्रमण करें और भ्रमण के दौरान पाई जाने वाली कमियों को यथाशीघ्र दूर करें। ताकि हर हाल में निर्धारित समयावधि के अंदर शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित और उक्त अभियान का सफलतापूर्वक समापन हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, नियमित टीकाकरण एक नहीं, बल्कि कई प्रकार की गंभीर बीमारियों से बचाव करता है। इसलिए, मैं जिले के तमाम लाभार्थियों से अपील करता हूँ कि निश्चित रूप से बेहिचक टीकाकरण कराएं। इससे ना केवल गंभीर बीमारी से बचाव होगा, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलेगा तथा बच्चों को शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होगा।
– टीका से छूटे लाभार्थियों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है टीकाकरण :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, टीका से छूटी एक-एक गर्भवती और बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जा रहा है। एक भी लाभार्थी टीकाकरण से वंचित नहीं रहे, इसको लेकर तमाम स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सामुदायिक स्तर पर लोगों को टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।