16 को डेंगू दिवस पर जिलेभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे

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सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारियों को भेजी गई चिट्ठी
जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज नियंत्रण कार्यालय बांका में डेंगू की रोकथाम को लेकर होगा विमर्श
बांका, 13 मई
16 मई सोमवार को डेंगू दिवस है। इसे लेकर जिला स्वास्थ्य समिति तैयारी में जुट गया है। उस दिन सदर अस्पताल में इसे लेकर बैठक आयोजित की जाएगी। साथ ही जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसे लेकर सभी अस्पताल के प्रभारियों को चिट्ठी भेज दी गई है।जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज नियंत्रण कार्यालय बांका  में भी बैठक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसकी अध्यक्षता जिला वेक्टर्न बॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव करेंगे।
डॉ. बीरेंद्र कुमार यादन ने बताया कि 16 मई को डेंगू दिवस पर जिलेभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसे लेकर सभी अस्पतालों के प्रभारियों को चिट्ठी लिख दी गई है। सभी को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा गया है। लोगों डेंगू से बचाव को लेकर जागरूक किया जाएगा। उस दिन बुद्ध पूर्णिमा को लेकर सरकारी छुट्टी है, इसके बावजूद विभाग के सभी कर्मियों को दफ्तर आने के लिए कहा गया है। उस दिन बैठकर हमलोग इस पर चर्चा करेंगे। डेंगू के इलाज को लेकर दवा व अन्य जरूरी चीजों की उपलब्धता पर बात की जाएगी।
एडिस मच्छर के काटने से होता है डेंगूः डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि एडिस मच्छर के काटने से डेंगू होता है। यह मच्छर दिन में काटता है और स्थिर एवं साफ पानी में पनपता है। तेज बुखार, बदन, सिर एवं जोड़ों में दर्द और आंखों के पीछे दर्द हो तो सतर्क हो जाएं। त्वचा पर लाल धब्बे या चकते का निशान, नाक- मसूढ़ों से या उल्टी के साथ रक्तस्राव होना और काला पखाना होना डेंगू के लक्षण हैं।  यदि किसी व्यक्ति को पहले डेंगू हो चुका है तो उसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे व्यक्ति दोबारा डेंगू बुखार की आशंका होने पर सरकारी अस्पताल या फिर डॉक्टर से संपर्क करें।
समय पर इलाज कराने पर मरीज हो जाता है स्वस्थः डॉक्टर बीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि सभी तरह के बुखार डेंगू नहीं होता है। बुखार होने पर बिना समय गंवाए डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जांच के बाद जैसा कहेंगे, उसके अनुसार अपना इलाज करवाएं। डेंगू होने की स्थिति में सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही भर्ती होना पड़ता है। समय पर इलाज कराने पर मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है।
दिन में सोते समय भी लगाएं मच्छरदानीः वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने कहा कि दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। इसके साथ-साथ मच्छर भगाने वाली क्रीम या दवा का प्रयोग दिन में भी करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर के सभी कमरों को साफ-सुथरा रखें। टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, एसी, फ्रिज में पानी जमा नहीं होने दें। पानी टंकी और घर के आसपास अन्य जगहों पर भी पानी नहीं जमने दें और समय समय पर सफाई करें। घर के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें और कीटनाशक दवा का इस्तेमाल करें। गमला, फूलदान का पानी हर दूसरे दिन बदल दें। घर के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों पर सतर्कता जरूरी है। मॉल व दुकान चलाने वाले लोग भी खाली जगहों पर रखे डिब्बे और कार्टनों में पानी जमा नहीं होने दें। जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल या जला हुआ मोबिल डालें।

बारिश के बाद तेज धूप स्वास्थ्य के लिए है हानिकारक

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– इस दौरान वेक्टर जनित बीमारियों से बचने के अपनाएं उपाय

मुंगेर, 12 मई-

बारिश के बाद निकलने वाली तेज धूप स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। खासकर वैसे स्थानों पर जहां बारिश की वजह से जल जमाव हो जाता है। ऐसे में लोगों के घरों के नजदीक का जलजमाव एवं तेज घूप कई प्रकार की बीमारियों को फैलने में मददगार साबित हो सकता है। इससे बचने की आवश्यकता है। बच्चों को जलजमाव वाले स्थानों पर जाने से रोकें, खासकर तेज धूप के दौरान अपने घरों के आसपास जलजमाव से बचने के लिए जल निकासी का समुचित प्रबंधन करें। कुछ जगहों पर बारिश से हुए जलजमाव कुछ अधिक दिनों तक रह जाता है। इन जगहों के आसपास जाने से बचें। बीमारी फैलने की संभावनाओं से बचने के लिए एहतियात बरतने की आवश्यकता है। थोड़ी सी लापरवाही लोगों को बीमार कर सकती है।

वेक्टर जनित बीमारियों से बचने के लिए अपनायें उपाय :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि वर्षा के बाद हुए जलजमाव से लोग ऐसी बीमारियों का शिकार हो सकते हैं जिनका कारण मच्छरों का काटना होता है। जलजमाव मच्छरों के पनपने का मुख्य कारण है। जिससे रोग फैलाने वाले कई मच्छरों को पनपने का मौका मिलता है। यही नहीं बरसात के बाद निकली तेज धूप अन्य सामान्य बीमारियों का कारण बन सकती है। जैसे- सर्दी, जुकाम आदि। ऐसे में जरूरी एहतियात अवश्य बरतें। भीगने से बचें, तेज धूप में घरों से बाहर न निकलें। यदि आवश्यक हो तो तेज धूप से बचने के उपायों को अपनायें। खासकर बच्चे इसका शिकार आसानी से हो जाते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम रहने के कारण वे आसानी से सामान्य बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। बरसात के बाद निकली तेज धूप से उमस पैदा होती है। उमस भी कई रोगों का कारण हो सकता है। इससे बचने के लिए घरों को हवादार रखें।

नष्ट करें मच्छरों के पनपने वाले स्थान: –
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया कि वेक्टर जनित रोगों से बचने के लिए आवश्यक उपाय अवश्य अपनायें। मच्छरों का प्रकोप प्रायः सुबह एवं शाम में होता है। ऐसे में इस समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपडे़ पहनें। सोने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें। मच्छर पनपने वाले स्थानों को नष्ट करें। घरों के कोनों में जहां मच्छर छिपे रह सकते हैं उन स्थानों पर मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव करें। घरों के आसपास गंदगी न फैलायें। पालतु जानवरों के रहने वाले स्थानों की नियमित रूप से साफ-सफाई करें। ऐसा करके न केवल आप बल्कि आपके पालतु जानवर भी बीमारियों से बचे रह सकते हैं।

फाइलेरिया उन्मूलन • जिले में नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम शुरू, सामुदायिक स्तर पर लोगों का लिया जा रहा है सैंपल

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– चयनित जगहों पर शिविर आयोजित कर की जा रही है सैम्पलिंग
– 18 मई तक चलेगा कार्यक्रम, सफलता को लेकर बैठक कर तैयार किया गया एक्शन प्लान

लखीसराय, 12 मई-

फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जिले में तय तिथि के अनुसार बुधवार की देर रात से नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम (रात्रि रक्तपट्ट संग्रह) का शुभारंभ हो गया। जिसका समापन 18 मई को होगा। इस दौरान चयनित जगहों पर शिविर आयोजित कर गठित मेडिकल टीम द्वारा सैंपल ली जाएगी। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता द्वारा घर-घर जाकर लोगों को सैम्पलिंग कराने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। ताकि संबंधित मरीजों की समुचित जाँच सुनिश्चित हो सके और शुरुआती दौर में ही बीमारी की सही जानकारी मिल सके। इससे ना सिर्फ मरीजों का समसय इलाज शुरू होगा बल्कि, फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को भी गति मिलेगी। इसी उद्देश्य के साथ जिले में नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। वहीं, कार्यक्रम की सफलता को लेकर गठित मेडिकल टीम ने पूरी ताकत झोंक दी है। हर हाल में शत-प्रतिशत लोगों का सैम्पलिंग सुनिश्चित कराने को लेकर व्यापक तैयारी की गई है। वहीं, इस दौरान सर्वे कर रही मेडिकल टीम द्वारा सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस कार्यक्रम के उद्देश्य समेत फाइलेरिया से बचाव, इसके कारण, लक्षण और उपचार की भी जानकारी दी जा रही है।

– कार्यक्रम की सफलता को लेकर बैठक कर बनाया गया एक्शन प्लान :
कार्यक्रम की सफलता को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सजग और संकल्पित है। जिसको लेकर गुरुवार को फाइलेरिया प्रभावित एरिया में आने वाले सदर पीएचसी लखीसराय, पिपरिया और रामगढ़ पीएचसी में समन्वय समिति की एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अलावा आईसीडीएस, जीविका, केयर इंडिया समेत अन्य सहयोगी संगठन के पदाधिकारी और कर्मी शामिल हुए। बैठक में हर हाल में कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने को जरूरी बिचार-विमर्श किया गया। जिसके बाद कार्यक्रम को गति को तेज रफ्तार देने के लिए एक्शन प्लान तैयार किया गया। बैठक में केयर इंडिया के डीटीएल नावेदउर रहमान, डीपीओ कृष्ण कुमार भारती, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी गौतम प्रसाद आदि मौजूद थे।

– फाइलेरिया से बचाव के लिए शुरुआती दौर में ही बीमारी की जानकारी जरूरी, इसलिए जरूर कराएं जाँच :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी गौतम प्रसाद ने बताया, फाइलेरिया से बचाव के लिए शुरुआती दौर में ही बीमारी की सही जानकारी होना जरूरी है। किन्तु, यह तभी संभव है, जब शुरुआती यानी लक्षण दिखते जाँच कराया जाएगा। इसलिए, मैं तमाम आमजनों से अपील करता हूँ कि निश्चित रूप से जाँच कराएं और फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के प्रभाव से दूर रहें। वहीं, उन्होंने बताया, रात के 08 बजे से 12 बजे के बीच इस बीमारी जाँच करने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। दरअसल, इस दौरान कीटाणु सक्रिय होता है। जिसके कारण आसानी के साथ शुरुआती दौर में बीमारी की सही जाँच संभव है। इसी उद्देश्य से नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम का निर्णय लिया गया।

– कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों का मिल रहा सकारात्मक सहयोग :
नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम का लीड कर रहे केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती ने बताया, कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों का भी सकारात्मक सहयोग मिल रहा है। कार्यक्रम के पहले दिन सभी सहयोग से ब्लड सैम्पलिंग का कार्य अच्छा रहा और निर्धारित समय के अनुसार 08 बजे से ही कार्यक्रम शुरू हुआ और आधी रात 12 बजे तक चला। वहीं, उन्होंने बताया, इस दौरान आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अपने-अपने स्तर से भी लोगों को सैम्पलिंग के लिए जागरूक किया जा रहा है।

बच्चों को टीकाकरण को लेकर किया गया जागरूक

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-अमरपुर प्रखंड के स्कूलों में चलाया गया टीकाकरण अभियान
-पिरामल के सहयोग से आयोजित किया गया टीकाकरण शिविर
बांका, 12 मई।
कोरोना टीकाकरण को गति देने के लिए अमरपुर प्रखंड के स्कूलों में शिविर लगाकर बच्चों को जागरूक कर टीका लगाया गया। स्कूलों में 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को टीका के फायदे के बारे में बताया गया। उन्हें यह जानकारी दी गई कि कोरोना से बचाव में टीका लेना कितना जरूरी है। स्कूलों में शिविर लगाने का काम पिरामल की ओर से किया गया, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों ने भी सहयोग किया। इस दौरान लोगों को कोरोना से बचाव के बारे में भी जानकारी दी गई।
पिरामल के डीपीएल मासूम रेजा ने बताया कि कोरोना टीकाकरण को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी सिलसिले में अमरपुर प्रखंड की सुल्तानपुर पंचायत के स्कूलों में शिविर लगाकर बच्चों को कोरोना का टीका लगाया गया। जिन बच्चों की उम्र 12 साल से अधिक थी, उन्हें टीका दिया गया। साथ ही उन्हें कोरोना से बचाव की जानकारी दी गई। मास्क लगाते रहने और कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते रहने के लिए कहा गया। कोरोना की तीसरी लहर समाप्त हो जाने के बाद सभी कुछ सामान्य हो गया है। बाजारों से लेकर स्कूल-कॉलेज तक खुल गए हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर बच्चों को, इसलिए इस तरह का आयोजन किया जा रहा है।
प्रीकॉशन डोज के लिए भी किया गया जागरूकः मासूम रेजा ने बताया कि पंचायत की मुखिया नवसबा खातून और शिक्षिका बी इमराना के सहयोग से बच्चों के अलावा अन्य लोगों को भी प्रीकॉशन डोज लेने के लिए जागरूक किया गया। कई सारे ऐसे लोग हैं जिन्होंने कोरोना टीका की एक या दो डोज ले ली है और अन्य डोज नहीं ली है। वैसे लोगों को समझाया कि जल्द ही कोरोना टीका की प्रीकॉशन डोज ले लें। टीके की सभी तरह की डोज लेने के बाद ही कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। इसलिए देरी नहीं करें, जिनका भी समय पूरा हो गया है वह जल्द से जल्द प्रीकॉशनरी डोज ले लें।
अस्पताल से लेकर स्कूलों तक में हो रहा टीकाकरणः अमरपुर रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि अस्पताल की तरफ से लोगों का लगातार टीकाकरण किया जा रहा है। इसके अलावा सहयोगी संस्था भी टीकाकरण शिविर आयोजित करा रही है तो यह अच्छी बात है। उन्हें भी पूरा सहयोग किया जा रहा है। हमलोगों का प्रयास है कि जल्द से जल्द सभी लोगों का टीकाकरण हो जाए। उस दिशा में यह प्रयास सराहनीय है। इससे लोगों को भी सुविधा मिल रही है। अस्पताल से लेकर स्कूलों तक में कोरोना का टीका लगाया जा रहा है। इसलिए बचे हुए लोगों को कोरोना का टीका लेने में देरी नहीं करनी चाहिए

कमिश्नर ने सदर अस्पताल का किया निरीक्षण

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-निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए कमिश्नर
-अस्पताल में मरीजों के लिए सुविधा बढ़ाने के सिविल सर्जन को दिया निर्देश
 भागलपुर, 12 मई-
भागलपुर प्रमंडल के कमिश्नर दयानिधान पांडेय ने गुरुवार को सदर अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ओपीडी और इमरजेंसी का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उनके साथ सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा, डॉ. कुंदन शर्मा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक मो. फैजान आलम अशरफी आदि की मौजूदगी रही। कमिश्नर ने ओपीडी और इमरजेंसी में तैनात कर्मियों से जानकारी ली। नर्सों से दवा और अन्य चीजों के बारे में पूछा। कुल मिलाकर सदर अस्पताल की व्यवस्था पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया। साथ ही सिविल सर्जन समेत अन्य अधिकारियों को अस्पताल की व्यवस्था मरीजों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए कहा। अस्पताल में मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो और यहां पर उन्हें हर तरह की सुविधा मिले। जांच और इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। समय से डॉक्टर ओपीडी आएं, इन बातों का निर्देश दिया।
मरीजों-प्रसूताओं से की बातः कमिश्नर ने निरीक्षण के दौरान गायनी वार्ड को भी देखा। प्रसव कक्ष, इंडोर और आपरेशन कक्ष को देखा और सुविधा-इलाज को लेकर मरीजों-प्रसूताओं से बात की। मरीजों और प्रसूताओं ने कमिश्नर से अस्पताल में बेहतर इलाज की व्यवस्था की बात कही। खाना से लेकर दवा तक का इंतजाम समय पर होने की जानकारी दी। साथ ही डॉक्टर भी समय-समय पर राउंड लगाते हैं, इस बारे में भी कमिश्नर को बताया। निरीक्षण के दौरान गायनी वार्ड की व्यवस्था से भी कमिश्नर संतुष्ट दिखे।
पैथोलॉजी और शौचालय की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए कहाः निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने सदर अस्पताल के जांच घर को बेहतर बनाने के लिए कहा। साथ ही सदर अस्पताल इलाज और जांच के लिए आने मरीजों को शौचालय को लेकर परेशानी नहीं हो, इसे लेकर भी निर्देश दिया। अल्ट्रासाउंड सेंटर पर डॉक्टर नहीं मिले तो उनके खिलाफ कार्रवाई का करने का निर्देश कमिश्नर ने दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जो भी लोग ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरते, उनके खिलाफ कार्रवाई करें।
सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल का भी किया निरीक्षणः सदर अस्पताल के निरीक्षण के बाद कमिश्नर दयानिधान पांडेय सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल पहुंचे। वहां भी एक-एक चीज को देखा। ओपीडी से लेकर ओटी और टीकाकरण की व्यवस्था को देखा। अस्पताल प्रभारी डॉ. कुंदन भाई पटेल और अन्य डॉक्टरों से वहां की व्यवस्था की जानकारी ली। साथ ही इलाज कराने के लिए आए मरीजों से भी उन्होंने बात की। यहां की भी व्यवस्था संतोषप्रद रही और यहां भी उन्होंने मरीजों के लिए फ्रेंडली सुविधा विकसित करने के लिए कहा।

आहार में बदलाव ही है एनीमिया बीमारी से बचाव के लिए सबसे सरल उपाय

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– एनीमिया के लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराएं और चिकित्सक से संपर्क करें
– आयरनयुक्त आहार का सेवन करने से ही संभव है एनीमिया से बचाव
 मुंगेर, 11 मई-
एनीमिया एक ऐसी बीमारी है, जो किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। आज के परिवेश में अनियमित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक आहार के कारण लोग एनीमिया से ग्रसित हो रहे हैं। यहां तक कि अब बच्चों, गर्भवती महिलाओं के साथ किशोर- किशोरियों में भी एनीमिया के लक्षण दिखने को मिल रहे हैं। एनीमिया होने का सबसे मुख्य और बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी होना है। इससे बचाव के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। आहार में बदलाव ही इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे सरल उपाय है। यह बीमारी खून में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन कम होने से होता है। लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं और चिकित्सा परामर्श का पालन करें। साथ ही, समय पर जांच के लिए अस्पताल जाने एवं चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए। जिससे भविष्य में एनीमिया की समस्या उत्पन्न न हो।
एनीमिया की अनदेखी जान पर भारी सकती है :
मुंगेर के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि आयरन की कमी के कारण एनीमिया होता है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आहार बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने से बचाव होगा। एनीमिया की अनदेखी जान पर भारी सकती है। उन्होंने बताया कि एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें। जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूंगफली, मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि। जो कि आपके शरीर की कमी को पूरा करता  एवं हीमोग्लोबिन जैसी कमी भी दूर होती है। एनीमिया से बचाव के लिए लौहतत्व युक्त चीजों का सेवन करें। सब्जी भी लोहे की ही कढ़ाई में बनाएं। लोहे की कढ़ाई में सब्जी बनाने से आयरन की मात्रा काफी बढ़ जाती है।
एनीमिया के लक्षण दिखने पर ससमय इलाज कराएं :
उन्होंने बताया कि एनीमिया बीमारी के शुरुआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द, त्वचा सफेद दिखना आदि है। ऐसा लक्षण दिखने पर ससमय इलाज कराएं। एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जांच कराएं। वहीं, गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान लगातार हीमोग्लोबिन समेत अन्य आवश्यक जांच के साथ  चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए ।

बच्चों को रोगों से बचाने के लिए उनका टीकाकरण जरूरी : सिविल सर्जन 

– बीसीजी, डीटीपी, रोटावायरस व दूसरी बीमारियों से होता है बचाव
– बच्चों को बीमारी से दूर रखने के लिए जरूर कराएं टीकाकरण और अनावश्यक परेशानियाँ से रहें दूर
लखीसराय, 11 मई
बच्चों के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है। यह शरीर में बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है। साथ ही एंटीबॉडी बनाकर शरीर को सुरक्षित रखता है। टीकाकरण से बच्चों में जानलेवा बीमारियों का खतरा बहुत अधिक कम हो जाता है। शिशुओं की मौत की एक बड़ी वजह उनका सही तरीके से टीकाकरण नहीं होना है। सिविल सर्जन डॉ देवेंन्द्र कुमार चौधरी ने टीकाकरण की जरूरत पर बल देते हुए बताया, टीकाकरण संक्रमण के बाद या बीमारी के खिलाफ व्यक्ति की रक्षा करता और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है। शिशुओं को स्तनपान कराने से भी उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली तेज होती है। टीकाकरण से बच्चों को चेचक, हेपेटाइटिस जैसी अन्य बीमारियों से बचाया जा सकता है।
केयर इंडिया के डीटीएल नावेदउर रहमान ने बताया,  टीकाकरण शिशु के लिए बहुत जरूरी है। बच्चों में होने वाली बीमारियों व संक्रमण का असर तेजी से उनके शरीर पर होता और उनके अंगों को प्रभावित करता है। बीसीजी, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, डीटीपी, रोटावायरस वैक्सीन, इन्फ्लूएंजा व न्यूमोनिया के लिए टीकाकरण किये जाते हैं। वहीं, उन्होंने बताया, मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम इसी उद्देश्य के साथ चलाया गया कि बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया जा सके।
– ये वैक्सीन हैं जरूरी :
बी.सी.जी वैक्सीन : टीबी से  फेफड़ों, दिमाग और शरीर के अंग प्रभावित होते हैं। यह रोग पीड़ित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलती है। बीसीजी टीका के जरिये बच्चे को टीबी की बीमारी से बचाया जा सकता है। बच्चों के जन्म लेने के तुरंत बाद उन्हें बैसिले कैल्मेट गुरिन (बीसीजी) के टीके लगाये जाते हैं। यह बच्चों के भविष्य में क्षयरोग, टीबी मेनिनजाइटिस आदि रोगों के संक्रमण की संभावना को कम करता है।
– हेपेटाइटिस ए : हेपेटाइटिस ए विषाणुजनित रोग है, जो लिवर को प्रभावित करता है। दूषित भोजन, पानी या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने की वजह से यह रोग फैलता है। बच्चों में यह रोग ज्यादा होता है। बुखार, उल्टी और जांडिस जैसे रोगों से बच्चा प्रभावित होता है। हेपीटाइटिस ए वैक्सीन का पहला टीका बच्चों को जन्म के 1 साल बाद लगाया जाता और दूसरा टीका पहली डोज के 6 महीने बाद लगाया जाता है।
– हेपेटाइटिस बी : हेपेटाइटिस बी रोग से बच्चों के लिवर में जलन और सूजन हो जाती है। नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहली डोज, 4 हफ्ते बाद दूसरी डोज और  8 हफ्ते  के  बाद  हेपेटाइटिस बी की तीसरी डोज दी जाती है।
– डीटीपी : बच्चों को डिप्थीरिया, टेटनस, काली खांसी जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए डीटीपी का टीकाकरण किया जाता है। बच्चों को जन्म के 6 हफ्ते बाद डीटीपी का पहला टीका लगाया जाता है। 4 हफ्ते बाद दूसरा, बाद में 4 हफ्ते के अंतराल पर तीसरा और चौथा टीका 18 महीने और पांचवा टीका 4 साल के बाद लगवाया जाता है।
– रोटावायरस वैक्सीन : रोटावायरस तीन माह से लेकर दो साल की उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। इस वायरस से संक्रमित बच्चों को बुखार, पेट में दर्द के साथ उल्टी और पतले दस्त होते हैं।
– टायफॉइड वैक्सीन : टायफाइड दूषित भोजन, पानी और पेय पदार्थ के सेवन से होता है। बच्चों में होने वाली डायरिया बीमारी दूषित भोजन व पानी के कारण ही होता है। नवजात के लिए मां द्वारा नियमित स्तनपान बच्चों को डायरिया से बचाता है। बच्चों को टाइफॉइड वैक्सीन का पहला टीका जन्म के  9 महीने बाद और दूसरा टीका इसके 15 महीने बाद लगता है।

एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीन युक्त खाना का करें सेवन 

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– लक्षण दिखते ही समय पर कराएं इलाज, चिकित्सा परामर्श का करें पालन
– थोड़ी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी का सबब, इसलिए सर्तकता और सावधानी जरूरी
खगड़िया, 11 मई।
एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीन युक्त खाना का सेवन करें। यह बीमारी खून की कमी से होती है। इसलिए, इससे बचाव के लिए आयरन युक्त खाना का सेवन करना जरूरी है। दरअसल, शरीर में पर्याप्त आयरन रहने से इस बीमारी की संभावना ना के बराबर रहती है। इसलिए, खान-पान एवं रहन-सहन का विशेष ख्याल रखें और सकारात्मक बदलाव ही बीमारी से बचाव का बड़ा उपचार है। यह बीमारी खून में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन कम होने से होती है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं और चिकित्सा परामर्श का पालन करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत और परेशानी का सबब बन सकती है। इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। ऐसे में समय पर जाँच के लिए अस्पताल जाने एवं चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए। जो आगे की मुसीबत उत्पन्न नहीं होने देगी एवं आपके लिए फायदेमंद साबित होगा तथा आसानी के साथ आपको बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।
– आयरनयुक्त खाना का करें सेवन :
खगड़िया सदर पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव रंजन ने बताया, आयरन की कमी के कारण एनीमिया होती है। इसलिए  आहार बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने से इस बीमारी से बचाव होगा। साथ ही लक्षण दिखते ही मरीजों को तुरंत जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करते हुए आवश्यक इलाज भी कराना चाहिए।
– ये हैं एनीमिया के प्रारंभिक लक्षण :
एनीमिया बीमारी के शुरुआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द आदि  है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराएं।
– प्रोटीनयुक्त खाने का करें सेवन :
एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें, जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि । जो कि आपके शरीर की कमी को पूरा करता एवं हीमोग्लोबिन जैसी कमी भी दूर होती है । इससे आपको एनीमिया बीमारी से बचाव मिल सकता है।
– चिकित्सकों की सलाह का करें पालन :
एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जाँच कराएं। जिसके बाद चिकित्सकों द्वारा दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन करें, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।
– गर्भवती महिलाएँ रखें विशेष ख्याल :
गर्भवती महिलाएँ को गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। जिसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाएँ को गर्भ दौरान लगातार हीमोग्लोबिन समेत अन्य आवश्यक जाँच करानी चाहिए एवं चिकित्सकों के चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।
– समय पर खाएं खाना :
एनीमिया से बचाव के लिए समय पर खाना ,खाना भी जरूरी है। इसलिए, इस बात विशेष ख्याल रखें कि समय पर खाना खाएं और परिवार के अन्य सदस्यों का भी खान-पान का ख्याल रखें। खासकर घर के बच्चे और बुजुर्गों के खान-पान को लेकर विशेष ख्याल रखें।

अस्पताल आने वाले को घर का सदस्य समझ सेवा कर रहीं रेणु रमन सिन्हा

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-नर्स दिवस आज
-बांका शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हैं तैनात
-24 साल से बिना रुके लोगों की सेवा में मुस्तैद
बांका, 11 मई।
आज नर्स दिवस है। इसलिए आज हम आपको एक ऐसी एएनएम (नर्स) रेणु रमन सिन्हा के बारे में बता रहे हैं जो पिछले 24 सालों से लगातार लोगों की सेवा में मुस्तैद हैं। नह अस्पताल में आने वाले हर मरीजों को घर का सदस्य समझती हैं, यही कारण है कि उनकी सेवा से सभी लोग संतुष्ट रहते हैं। रजौन से शुरू हुए अबतक के सफर में रेणु ने कई अस्पतालों में योगदान किया। सदर अस्पताल में भी तैनाती के दौरान अपनी भूमिका निभाई। अब दोबारा वह शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी भूमिका निभा रही हैं। घर में तीन सदस्य हैं। पति-पत्नी के अलावा एक पुत्र है। वह भी नौकरी में है। इसके बावजूद वह अपनी ड्यूटी पूरी मुस्तैदी से करती हैं। मरीजों के साथ अपनत्व का रिश्ता उन्हें प्रतिदिन समय पर अस्पताल खींच लाता है।
रेणु कहती हैं कि जब मैंने नौकरी शुरू की थी तो उम्मीद नहीं थी कि लोगों का इतना प्यार मिलेगा। काम को जब लोगों का समर्थन मिलता है और सीनियर की तारीफ मिलती है तो लगता है कि मैंने भी कुछ किया है। बांका शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दूसरी बार मेरी तैनाती है। इस वजह से क्षेत्र के लोगों से काफी पुरानी पहचान है। अगर कोई अस्पताल आने में सक्षम नहीं भी होता है तो फोन से भी पूछ लेती हूं। कभी-कभी तो लगता है कि अस्पताल में ड्यूटी खत्म हो गई तो अब घर में फोन पर क्या सलाह दूं, लेकिन फिर मैं सोचती हूं कि अपना समझता है तभी लोग मुझे कॉल करते हैं। इसी प्यार के सामने मैं विवश हो जाती हूं।
अभी परिवार नियोजन पर फोकसः रेणु कहती हैं कि चूंकि शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में टीकाकरण का काम होता है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीका देने का काम अभी करती हूं, इसलिए यहां वाली महिलाओं और उसके परिजनों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक भी करती हूं। लोगों को बताती हूं कि पहला बच्चा 20 साल के बाद और दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूर रखें। साथ में दो बच्चे के बाद बंध्याकरण जरूर करवा लें। परिवार छोटा रहेगा तो न सिर्फ घर के सदस्य स्वस्थ रहेंगे, बल्कि आर्थिक आजादी भी मिलेगी। परिवार नियोजन को लेकर अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल को लेकर भी लोगों को जागरूक करती हूं।
कोरोना काल में मजबूत बनकर उभरीं – रेणु कहती हैं कि एक नर्स के तौर पर तो हमेशा चुनौती मिलती रहती है, लेकिन कोरोना काल में चुनौतियों से लड़ने में काफी आनंद आया। सभी कुछ पहली बार था। जांच से लेकर टीकाकरण का काम पहली बार कर रही थी। ऊपर से कोरोना का खौफ, लेकिन अस्पताल के कर्मियों के सहयोग और खुद की हिम्मत के भरोसे इस चुनौती का सामना करते हुए और मजबूत हुई। आज खुशी इस बात की मिलती है कि इतनी विषम परिस्थिति में भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और मजबूती से अपना काम किया। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि रेणु का काम हर तरह से बेहतर रहा है। कोरोना में तो बेहतर रहा ही है, साथ में नियमित टीकाकरण में भी अपनी भूमिका बढ़-चढ़कर निभाती है। क्षेत्र के लोगों में भी रेणु की एक अलग पहचान है।

भागलपुर ने मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान के तीसरे चरण में भी मारी बाजी

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-इस बार भी लक्ष्य से अधिक किया गया टीकाकरण
-पहले दो चरण में भी जिले का बेहतर रहा है प्रदर्शन
भागलपुर, 11 मई।
12 तरह की बीमारियों से बचाव को लेकर मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान के तीसरे चरण में भी भागलपुर ने बाजी मारी है। दो से 10 मई तक चले अभियान के दौरान भी लक्ष्य से अधिक बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया है। मंगलवार को खत्म हुए अभियान के दौरान 9638 बच्चों का टीकाकरण किया गया, जबकि लक्ष्य 9623 का था। इसी तरह 1973 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया, जबकि लक्ष्य 1967 का था। इसे लेकर जिलेभर में 855 केंद्र बनाए गए थे। सफलता की दर 100 प्रतिशत भी अधिक रही।
इससे पहले दूसरे चरण में 10,565 बच्चों का टीकाकरण किया गया था, जबकि लक्ष्य 10,546 का था। दूसरे चरण के दौरान 2066 महिलाओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा था, जबकि 2069 महिलाओं का टीकाकरण किया गया। जिले में चार से 11 अप्रैल तक मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान का दूसरा चरण चलाया गया था। इससे पहले सात से 13 मार्च तक मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान के तहत पहला चरण चलाया गया था, जिसमें 6834 बच्चों को टीका देने का लक्ष्य रखा गया था और 7044 बच्चों का टीकाकरण किया गया था। यानी कि लगभग 103 प्रतिशत टीकाकरण हुआ था। इसी तरह 1200 महिलाओं का टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया था और 1261 महिलाओं का टीकाकरण किया गया था। यानी कि लक्ष्य के मुकाबले 105 प्रतिशत से भी अधिक लोगों का टीकाकरण किया गया था। अभियान के तीनों चरण में सफलता की दर 100 प्रतिशत से अधिक रही। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान के तीनों ही चरण में सफलता की दर 100 प्रतिशत से अधिक रही। इस उपलब्धि के पीछे सभी स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत है।
सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलता है बढ़ावाः जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता है, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलता है। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसलिए जिले के सभी लाभार्थियों की सूची बनाकर टीकाकरण किया गया। अभी अभियान भले ही खत्म हो गया है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों और अस्पतालों में टीकाकरण जारी रहेगा। इसलिए अभी भी जिनके घरों में बच्चे और गर्भवती महिलाएं छूट गई हों, वह जरूर टीकाकरण करवा लें।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरणः नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर सप्ताह बुधवार और शुक्रवार को होता है। जरूरत पड़ने पर अन्य दिन भी टीकाकरण किया जाता है। इसके माध्यम से 2 वर्ष तक के बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होने से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलता है।