मौसम में हो रहा उतार-चढ़ाव, रहें सतर्क

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-लापरवाही करने पर आ सकते हैं बीमारी की चपेट में
-अभी खान-पान पर रखें ध्यान, बचे रहेंगे बीमारियों से
बांका, 6 मई-
अभी मौसम में उतार-चढ़ाव हो रहा है। कभी तापमान 44 डिग्री पर चला जाता है तो कभी बारिश होने लगती है। ऐसे मौसम में शरीर को ढलने में समय लग जाता है। अगर थोड़ी सी लापरवाही बरती गई तो आदमी बीमार भी पड़ सकता है। इसलिए बाहर जाने से लेकर खाने तक का ध्यान रखने की जरूरत है। एक तरफ लू से बचे रहने की जरूरत है तो दूसरी तरफ तापमान कम होने पर बुखार, सर्दी, जुकाम इत्यादि बीमारियों से सावधान रहना चाहिए। डायरिया और टायफाइड होने की भी आशंका ऐसे मौसम में रहती है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि लोगों को मौसम के अनुकूल व्यवहार करना चाहिए। जब गर्मी बढ़ जाती है तो लोगों को गर्मी से बचने का प्रयास करना चाहिए और जब बारिश होने लगती है तो लोगों को भीगने से बचना चाहिए, ताकि सर्दी-खांसी से बचा जा सके। ऐसे मौसम में लोग घर से निकलते वक्त छाता जरूर ले लें। छाता आपको कड़ी धूप से भी बचाएगा और भीगने से भी। अगर कड़ी धूप हो तो साथ में ओआरएस का घोल भी रखें। यह आपको डायरिया से बचाएगा। साथ में शरीर को पूरी तरह कपड़े से ढककर निकलें। बारिश में भीगने पर तत्काल कपड़े बदल लें। ऐसा करते रहने से बीमारियों की चपेट में आने से बचे रहेंगे।
बासी भोजन करने से बचें- स्वस्थ्य रहने के लिए अच्छा और ताजा भोजन बहुत मायने रखता है। डॉ. चौधरी कहते हैं कि बासी खाने से बीमार पड़ सकते हैं। इसलिए कोशिश करें कि ताजा भोजन ही करें। अत्यधिक मात्रा में भोजन करने से बचें और साथ में पानी भी अधिक पीएं। एक बार में अधिक खाने की बजाय चार से पांच बार खाने की कोशिश करें। भूखे पेट नहीं रहें। स्वच्छ और साफ पानी पीएं। इसके बाद भी अगर कोई शिकायत होती है तो डॉक्टर से संपर्क करें और उनके बताए अनुसार रहें। अगर दवा लिखते हैं तो दवा का सेवन करें। खुद डॉक्टर नहीं बनें। ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है।
तरल पदार्थ पर दें जोरः डॉ. चौधरी कहते हैं कि ऐसे मौसम में तरल पदार्थ लेने पर जोर देना चाहिए। खासकर जब कड़ी धूप हो और लू का खतरा हो। गन्ना, संतरा, मौसमी इत्यादि का जूस पीएं। साथ ही तरबूज, खीरा, बतिया जैसे मौसमी फलों का सेवन करें। इसके अलावा भोजन में हरी सब्जियों का इस्तेमाल करें। मसालेदार भोजन करने से परहेज करें। इससे डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे कै-दस्त हो सकता है। सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक करें। मॉर्निंग वॉक करने वक्त इस बात का ध्यान दें कि धूप तेज नहीं हो। संभव हो तो धूप निकलने से पहले ही टहल लें। दही और छाछ का सेवन भी लाभदायक हो सकता है।

गाँधी ने आत्मनिर्भर भारत सशक्त भारत पर  एक्सपर्ट टॉक में मुख्य वक्ता के रूप में युवा को प्रशिक्षित किया 

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हाल ही में इंस्टीट्यूशन्स इन्नोवेशन काउंसिल एवं  श्री रामकृष्ण इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सयुक्त तत्वाधान में आत्मनिर्भर भारत -सशक्त भारत मेक इन इंडिया अवधारणा को बेहतर क्रियान्वयन के लिए एंटरप्रेन्योरशिप स्किल्स सेट फ़ॉर इंडिया पर्सपेक्टिव वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के समन्वयक अभिनन्दन सरकार ने बताया कि एक्सपर्ट पैनल टॉक सीरीज का उद्देश्य वर्तमान में शैक्षिणिक संस्थानों से भारी संख्या में पास आउट हो रहे  प्रोफेशनल क्वालिफाइड युवाओ में कोर्स स्टडी के दौरान प्रारम्भिक अवस्था में ही उद्यमिता के क्षेत्र में आधारभूत आवश्यक स्किल्स सेट का प्रशिक्षण देना ,इसके अंतर्गत युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई वर्षों से कार्य कर रहे एक धरातल स्तर पर मैनेजमेंट ,डेवलपमेंट सॉशेल नवोन्मेष के अनुभवी एन.पी. गांधी को काउंसिल की इस एक्सपर्ट टॉक में आमंत्रित किया गया था ।उन्होंने सभी प्रतिभागियों जिसमे इंजीनियरिंग ,साइंस मैनेजमेंट,कम्प्यूटर साइंस  एवं कई विभिन्न क्षेत्रों से आये थे उन्हें आधारभूत स्तर पर एक एंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट हेतु आवश्यक स्किल सेट्स के लिए तैयार किया गया ।प्रतिभागियों में स्टूडेंट्स के अलावा विभिन्न फैकल्टीज डिपार्टमेंट से शिक्षक गण एवं अन्य प्रोफेशनल्स भी मौजूद रहे। सेशन पूर्णतः स्ट्रेस मैनेजमेंट,डिसीजन मेकिंग ,बिजनेस प्लान स्ट्रक्चर डिजाइन ,थिंकिंग,बिजेनस आइडिया क्रिएशन ,सॉशेल प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स बेस्ड इंनिवेटिव बिजनेस कंपेटिटिवनेस आदि विभिन्न आवश्यक स्किल सेट को इंडिया एवं वर्ल्ड के टॉप एंटरप्रेन्योरशिप के बिजेनस एट्रीब्यूट ,एथिक्स वैल्यूज,फक्शनल सिस्टम आदि के लाइव सेशन स्टोरीटेलिंग अप्रोच के माध्यम से सिखाया गया। अभिनन्दन सरकार ने उनके बेहतर व्यक्तव्य एवं युवा उत्साह  एवं युवा सशक्तिकरण के लिए  गाँधी को उनके इंस्टिट्यूशनल काउंसिल में की एडवाइजरी बोर्ड मेंबर कमिटी में लेने का भी प्रस्ताव रखा। गांधी ने अभिनन्दन सरकार में समक्ष सेंटर फॉर एक्सीलेंस,स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर हेतु नवोन्मेष आदि हेतु भी टाक के दौरान अवगत कराया ताकि अधिकाधिक युवा इंस्टीट्यूशन का नाम देश भर में विख्यात कर सके ,साथ ही गाँधी ने स्टार्टअप हेतु स्किलिंग प्रशिक्षण हेतु युवाओ हेतु निःशुल्क रूप से डिजिटल प्रशिक्षण देने की बात कही ताकि फीस के अभाव में कोई युवा अछूता न रहे उद्यमिता के क्षेत्र में अपने आइडियाज को बिजेनस प्लान में बदलने के लिए।अंत मे कार्यक्रम समन्वयक ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया ।

महिलाओं और बच्चों के लिए काम करते अपने सपने को सच किया अंजुम खान ने

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नई दिल्ली-

 

अपने लिए तो सब जीते हैं, जरूरतमंदों के लिए समय पर काम आना सबसे बड़ी बात होती है। एक -दो नहीं, अब तक 99 थैलेसिमिया बच्चों के लिए काम आने वाली जब अपने सपने को पूरा करती है, तो पूरे समाज को खुशी होती है। महाराष्ट्र की अंजुम खान ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि नारी हर भूमिका में खुद को साबित करने में सक्षम है। मां, बेटी, बहन और पत्नी के तौर पर उसके त्याग और समर्पण से हर कोई वाकिफ है। लेकिन जब यह नारी अपनी तमाम जिम्मेदारियों को निभाने के साथ रैंप पर उतरती है तो वह रूप भी हर किसी को उसकी क्षमता का कायल कर देता है।
महाराष्ट्र की अंजुम खान भले ही एनआआई हो गई हों, लेकिन अभी भी वो पूरी तरह से भारतीयता को जीती है। उनका सपना है कि हर बच्ची को उचित और पूरी शिक्षा मिले। नासिक में अपने ब्लड बैंक के जरिए वो हर जरूरमंद की मदद करती है। जो भी अपनी इस प्रकार की समस्या लेकर उनके पास आता है, खाली वापस नहीं जाता है।
बता दें कि दिल्ली की कंपनी परीसा कम्यूनिकेशन द्वारा आयोजित इस सौंदर्य प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों के 28 प्रतियोगियों ने हिस्सा लिया। जिसमे प्लेटिनम श्रेणी में महाराष्ट्र की अंजुम खान डेजल मिसेज इंडिया वर्ल्ड प्लेटिनम की विजेता चुनी गई। इसी के साथ वह मिसेज यूनिवर्स सौन्दर्य प्रतियोगिता की फाइनलिस्ट भी चुन ली गई हैं। वह जून में साउथ कोरिया में होने वाली इस प्रतोयोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
दिल्ली में आयोजित प्रतियोगिता में ग्रेटर नोएडा की विदुषी तोमर डेजल मिस इंडिया वर्ल्ड चुनी गई। सामान्य श्रेणी में पंजाब की कनिष्का गोयल डेजल मिसेज इंडिया वर्ल्ड चुनी गई, जबकि सिक्किम की सुधा राय फर्स्ट और तमिलनाडु की पूजा रवि सेकेंड रनर-अप चुनी गई। एलीट कैटेगरी में सिक्किम की रीटा गुरुंग विजेता रही तो सिक्किम की ही भूमिका बिस्वकर्मा फर्स्ट रनर-अप और असम की डॉ पुस्पिता सिंह सेकेंड रनर-अप चुनी गई।
प्रतियोगिता के दौरान महाराष्ट्र की डॉ स्मिता काले को मिसेज एशिया पेसेफिक यूनिवर्स का खि़ताब मिला तो रेनू अग्रवाल को मिसेज एशिया इण्डिया यूनिवर्स का।  जबकि असम की सुहाना घोष को मिसेज ग्लोबल इंडिया यूनिवर्स का और आंध्र प्रदेश की वेनम श्रावणी को मिसेज पेसेफिक इंडिया यूनिवर्स का ताज मिला।
प्रतियोगिता के जजों में सेलिब्रिटी ग्रूमर शाइने सोनी, डाइट और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ वरुण कत्याल और वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ कनिका शर्मा सूद शामिल थे। सभी प्रतियोगियों को आश्मीन मुंजाल एकेडमी की प्रबंधक नीना सिंह की टीम ने तैयार किया। बोआ विलेज, एम्ब्रोसिया और मिलोड्रामा के सहयोग से आयोजित इस प्रतियोगिता से पहले प्रतियोगियों को ब्यूटी, स्टाइल, रैंप वॉक, मोटिवेशन, मेकओवर और कॉरपोरेट एथिक्स का प्रशिक्षण दिया गया था।
आयोजक कंपनी की निदेशक तबस्सुम हक ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस के लिए समर्पित इस प्रतियोगिता की विजेता को अगले वर्ष होने वाली अंतर्राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में भेजा जाएगा। इस साल यहां ऐसी तीन महिलाओं की भी क्राऊनिंग की गई जो जून में साउथ कोरिया में आयोजित मिसेज यूनिवर्स सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी।

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम: 10 से 16 आयु वर्ग के सभी किशोरों को अब दी जाएगी टीडी की वैक्सीन

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– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को दिए निर्देश
– टेटनस और डिप्थेरिया से बचाव के लिए टीडी बैक्सीन बेहद जरूरी

मुंगेर, 5 मई। अब नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत जिले के 10 से 16 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी किशोर-किशोरियों को टीडी की वैक्सीन दी जाएगी। जिसे सुनिश्चित कराने को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को जरूरी और आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें कहा है कि उक्त कार्य आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) टीम के सहयोग से किया जाना है। दरअसल, आरबीएसके टीम द्वारा पूर्व से वार्षिक कार्य योजना के तहत स्कूली बच्चों को नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य जाँच की जाती है। जिसके कारण इस टीम के माध्यम से कार्य कराना सुविधाजनक होगा और शत-प्रतिशत बच्चों की टीडी वैक्सीनेशन सुनिश्चित होगा। इसके अलावा पीएचसी स्तर पर हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया है।

– आरबीएसके टीम को जरूरी सहयोग करने के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए हैं निर्देश : जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 10 से 16 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी किशोरों को टीडी की वैक्सीन देने का निर्देश प्राप्त हुआ। जिसके आलोक में जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। जिसमें टीडी का वैक्सीनेशन करने वाली आरबीएसके टीम को अपने स्तर से हर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने को कहा गया है। ताकि वैक्सीनेशन टीम को कार्य करने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और शत-प्रतिशत लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो।

– टेटनस और डिप्थेरिया से बचाव के लिए टीडी वैक्सीन बेहद जरूरी :
टीडी वैक्सीन टेटनस और डिप्थेरिया जैसे गंभीर रोगों से बचाव के लिए बेहद जरूरी है। दरअसल, कम उम्र के किशोरों को दोनों रोगों से प्रभावित होने का खतरा अधिक रहता है। जिसके कारण किशोरों को दोनों रोगों से बचाव के लिए सरकार द्वारा यह पहल की गई। इसलिए, उक्त दोनों रोगों से बचाव के लिए सभी लाभार्थियों को टीडी का वैक्सीनेशन निश्चित रूप से कराना चाहिए। ताकि दोनों बीमारियों के खतरे से सभी किशोर सुरक्षित रह सकें।

– सभी किशोरों को दी जाएगी टीडी वैक्सीन की दो खुराक :
किशोरों को टेटनस और डिप्थेरिया जैसे गंभीर रोगों से बचाव के लिए सभी लाभार्थियों को टीडी वैक्सीन की दो खुराक दी जाएगी। दोनों ही संक्रामक रोग है। कम उम्र के किशोरों को इसका ज्यादा खतरा होता है। उच्च रक्तचाप, तंत्रिका तंत्र का प्रभावित होना, मांसपेशियों में ऐंठन, गर्दन व जबड़े में अकड़न व पीठ का आकार धनुषाकार होना आदि टेटनस का प्रारंभिक और प्रमुख लक्षण हैं। जबकि, डिप्थेरिया की रोगियों को सांस लेने में तकलीफ, गर्दन में सूजन, बुखार व खाँसी आदि इसके प्रारंभिक लक्षण हैं। रोगी के छींकने व खांसने की वजह से दूसरे लोग भी इससे संक्रमित हो सकते हैं।

जिलाधिकारी ने की जिला अभिसरण कार्य योजना की बैठक, दिए जरूरी निर्देश

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– समाहरणालय परिसर स्थित सभाकक्ष में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक
– स्वास्थ्य, शिक्षा, आईसीडीएस, जीविका समेत अन्य विभागों के पदाधिकारी और कर्मी बैठक में हुए शामिल

खगड़िया, 05 मई

गुरुवार को समाहरणालय परिसर स्थित जिलाधिकारी के सभा कक्ष में जिला अभिसरण कार्य योजना की एक बैठक आहुत की गई। जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने की। बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, आईसीडीएस, जीविका समेत अन्य विभागों के जिलास्तरीय पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने मौजूद सभी पदाधिकारी एवं कर्मियों से बारी-बारी से बारीकी के साथ सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के कार्य योजना की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, आईसीडीएस की डीपीओ सुनीता कुमारी, जिला समन्वयक (डीसी) अंबुज कुमार, सीडीओ रवीन्द्र नारायण चौधरी, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, डीटीओ-ऑन चंदन कुमार आदि मौजूद थे।

– सभी विभागों के पदाधिकारियों से ली गई विभागीय कार्यों की विस्तृत जानकारी और दिए गए जरूरी निर्देश :
जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने बताया, बैठक के दौरान मौजूद सभी विभागों के पदाधिकारियों से संबंधित विभागीय कार्य योजना की विस्तृत जानकारी ली गई। जिसमें स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों से कोविड वैक्सीनेशन और जाँच, नियमित टीकाकरण, प्रसव से संबंधित सुविधा समेत अन्य जानकारियाँ ली गई। वहीं, आईसीडीएस के पदाधिकारियों से पोषण, पोषाहार, टीएचआर समेत आंगनबाड़ी स्तर पर संचालित सभी योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली गई। इसके अलावा शिक्षा, जीविका समेत अन्य विभागों के पदाधिकारियों से विभाग से संबंधित सभी योजनाओं के कार्य योजना की जानकारी ली गई। जिसके पश्चात आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए गए। इस दौरान जो भी त्रुटि मिली, उसे शीघ्र सुधार करने को कहा गया।

– कोविड वैक्सीनेशन और जाँच की गति तेज करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का दिया गया निर्देश :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, बैठक के दौरान जिलाधिकारी द्वारा कोविड वैक्सीनेशन और जाँच, नियमित टीकाकरण समेत सरकारी द्वारा जनहित में चलाई जा रही अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली गई। जिसके पश्चात कोविड वैक्सीनेशन और जाँच की गति तेज करने, मिशन इंद्रधनुष अभियान के तहत शत-प्रतिशत लाभार्थियों को टीकाकृत करने समेत अन्य आवश्यक निर्देश दिए गए। साथ ही मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उपलब्ध कराने को कहा गया। वहीं, आईसीडीएस के डीसी अंबुज कुमार ने बताया, पोषण समिति का गठन, दैनिक पोषाहार, टीएचआर समेत आईसीडीएस के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली गई और जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।

जीविका सदस्यों का दो दिवसीय टीबी बीमारी पर प्रशिक्षण शुरू

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– कहलगांव प्रखंड के ओरियप पंचायत स्थित मध्य विद्यालय में जीविका ग्राम संगठन के सदस्यों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण
– कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से दिया जा रहा है प्रशिक्षण

भागलपुर, 05 मई-

कहलगांव प्रखंड के ओरियप पंचायत स्थित मध्य विद्यालय ओरियप में गुरुवार से जीविका सदस्यों को कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से दो दिवसीय परिप्रेक्ष्य (टीबी) प्रशिक्षण का शुभारंभ हो गया। जिसका समापन शुक्रवार को होगा। प्रशिक्षण में जीविका के ग्राम संगठन के कुल 32सदस्यों और एक सामुदायिक समन्वयक ने भाग लिया। मौजूद सभी सदस्यों को प्रशिक्षक धीरज कुमार मिश्रा और संदीप कुमार द्वारा टीबी उन्मूलन से संबंधित आवश्यक जानकारी विस्तार पूर्वक दी गई। साथ ही कहानी, खेल और गतिविधि आदि विधियों का प्रयोग करते हुए टीबी उन्मूलन में सहयोग करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार किया गया। इसके अलावा टीबी कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की विस्तृत जानकारी देते हुए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए जरूरी टिप्स दिये गये।

केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान दीदियों को बताया गया कि अगर आपके स्वयं सहायता समूह या पड़ोस में किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक जागरूकता से ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। जीविका दीदियां अपने स्वयं सहायता समूह के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी जागरूक करेंगी तो हम समाज से टीबी बीमारी को खत्म कर सकते हैं। मौके पर कृष्णा कुमारी, संदीप कुमार, श्वेता कुमारी और मिथिलेश झा मौजूद थे।

– ज्यादातर मामले घनी आबादी वाले इलाके में- जीविका दीदियों को बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता है और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चल रहा है। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो लोगों को तत्काल इलाज कराने के लिए कहें। टीबी का अगर कोई इलाज नहीं कराता है तो यह बीमारी कई लोगों में जा सकता है। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा।

पौष्टिक भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

कोरोना की चौथी लहर के शोर के बीच रहें सतर्क

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-मास्क पहनें और कोरोना गाइडलाइन का करें पालन
-डरने के बजाय सतर्क रहने पर नहीं आएंगे चपेट में

बांका, 5 मई-

कोरोना की चौथी लहर आने की बात चल रही है। ऐसे में कुछ लोगों में डर भी पैदा हो गया है, लेकिन लोगों को डरने के बजाय कोरोना से सतर्क रहने की जरूरत ज्यादा है। अगर लोग सतर्क रहेंगे तो कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे। इसलिए कोरोना का डर मन से निकाल दीजिए और घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाइए और सामाजिक दूरी का पालन कीजिए। पिछली तीन लहरों के दौरान देखा गया है कि जो लोग सतर्क रहे, वे लोग कोरोना की चपेट में आने से बचे रहे। इसलिए सतर्कता पर ध्यान देने की जरूरत है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि कोरोना ही नहीं, बल्कि किसी भी बीमारी से बचाव में सतर्कता सबसे बड़ा हथियार होता है। कोरोना में भी यही बात लागू होती है। कोरोना को लेकर तो पिछले दो सालों का लोगों के पास अनुभव भी है और आदत भी है। सतर्क रहने की आदत को बरकरार रखने की जरूरत है। बहुत सारे लोग अभी भी मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो इसका पालन नहीं करते हैं। ऐसे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। कोरोना से बचाव एक तरह से सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें सभी लोगों को अपनी भूमिका निभाने की जरूरत है।
लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं- डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना के लक्षण से लगभग सभी लोग परिचित हैं। सूखी खांसी, बुखार इत्यादि लक्षण मिले तो तत्काल जांच करा लेनी चाहिए। कोरोना की लहर भले ही अभी नहीं आई हो, लेकिन सतर्कता को लेकर अस्पतालों में जांच लगातार चल रही है। चौथी लहर की आशंका को लेकर अब इस पर विशेष ध्यान भी दिया जा रहा है। इसलिए अगर किसी को भी कोई लक्षण दिखाई पड़े तो अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल जाकर जांच करा लें। साथ ही रिपोर्ट आने तक घर-परिवार के सदस्यों से दूरी बनाकर रहें। ऐसा करते रहने से आप भी बचे रहेंगे और आपके साथ रहने वाले लोग भी कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे।
टीका नहीं लिए हैं तो देरी नहीं करें- डॉ. चौधरी कहते हैं कि जिस तरह से कोरोना की तीसरी लहर का असर टीकाकरण के चलते अधिक नहीं हुआ, ठीक उसी तरह अगर लोग टीका लिए रहेंगे तो चौथी लहर का भी उतना असर नहीं होगा। जिनलोगों का जो भी डोज बाकी है, तत्काल ले लें। जिनलोगों ने अभी तक एक भी डोज नहीं ली है या फिर दूसरी या तीसरी डोज बाकी है तुरंत ले लें। जिस तरह से कोरोना की गाइडलाइन बचाव का सबसे बड़ा हथियार है, उसी तरह कोरोना का टीका भी इससे बचाव में कारगर हथियार है। इसलिए देरी नहीं करें और जल्द से जल्द टीका ले लें। अब तो काफी संख्या में लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है, इसलिए किसी भी तरह का भ्रम मन में हो तो उसे निकाल दें। टीका से किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।

आईएएस डॉ.ओम प्रकाश बैरवा के जन्मदिवस को रक्तदान दिवस के रूप में मनाया

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गाँधी जैसे ओ नेगेटिव दुर्लभ रक्तदाता युवाओ को आमजन हितार्थ आगे आना आवश्यक-डॉ .बैरवा

आईएएस डॉ. ओम प्रकाश बैरवा के जन्मदिवस पर आज बड़ी संख्या में दिनभर आने जाने वालों की शुभकामनाओं एवं स्वागत हेतु लाइन लगी रही ।वही आर्थिक सांख्यिकी निदेशालय योजना भवन में कार्यरत प्रोग्राम ऑफिसर डॉ नयन प्रकाश गाँधी ने आज जन्मदिबस के शुभ अवसर पर जयपुरिया हास्पिटल में ब्लड बैक केंद्र पर अपना ओ नेगेटिव रक्त दान किया । रक्तदाता नयन प्रकाश गाँधी ने मीडिया वार्ता में बताया कि किसी के जन्मदिवस या विशेष दिनों में भरी धूप में अनजान मरीजों की सहायता हेतु रक्तदान से बढ़कर कोई अमूल्य उपहार नही है ,रक्तदान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब अति दुर्लभ ओ नेगेटिव मेरा ब्लड जरूरतमंद के काम आए ।गाँधी ने बताया कि उनके एवं असंख्य युवाओ के प्रेरणास्रोत आईएएस डॉ ओम प्रकाश बैरवा ,निदेशक एवं सयुक्त शासन सचिव आयोजना विभाग ने अपने जीवनकाल में तीन दशक से अधिक सतत रूप से आर्थिक सांख्यिकी योजना भवन में निष्ठा,ईमानदारी,कर्मठता से सेवाएं प्रदान की है एवं आम जन हितार्थ अपने ऑफिस समय को देखे बिना दिन रात अथक मेहनत के साथ पूरी टीम को साथ लेकर बेहतरीन लीडरशिप के साथ कार्य किया ।वही दूसरी और एलन ग्रुप निदेशक नवीन माहेश्वरी जी जिनके नेतृत्व में सेवाकार्यो से कोरोना काल में कई जिंदगियां बची वो भी मेरे प्रेरणास्रोत रहे है। आज जन्मदिवस के अवसर पर यह मेरा सौभाग्य है कि रक्तदान कर उनके सेवाकार्यो की पहल को जन हितार्थ आगे बढ़ाने का एक तरीके से मुझे अवसर मिला। गाँधी ने आगे रक्तदान के महत्व को बताते हुए कहा कि में वह दिन ही भूल सकता जब मेरी बड़ी भाभीजी हेतु ब्लड ग्रुप मैच नही कर रहा था तो सबसे कम उम्र में बड़ी सिस्टर डॉ. हेमलता गाँधी ने अपने जीवन की परवाह न करते हुए खुद अति कमजोर होते हुए आपातकालीन अवस्था मे रक्तदान कर भाभीजी जो ऑपरेशन में थी उन्हें तुरंत जीवन प्रदान किया ,वही से जब परिवार में बात चली तो मैने ठान लिया रक्तदान जब भी मन करे सुअवसरों पर तो कम से कम करना है और जब मुझे पता चला कि मेरा ब्लड ग्रुप अति दुर्लभ है तब तो में नियमित जरूरत पड़ने पर रक्तदान करने कहा भी जाने के लिए तैयार रहता हूँ ,और ओ नेगेटिव रक्तदान हेल्पलाइन की भी शुरुवात की थी व्हाट्सअप के माध्यम से अब वह कांटेक्ट भी रक्तकोष के माध्यम से मर्ज करवा दिए और रक्तकोष ,वर्ल्ड यूथ ऑर्गेनाइजेशन में कई बार केम्प भी करते है और संरक्षक आईएएस डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी की प्रेरणा से भी कई बार रक्तदान मुहिम में लेखन क्षेत्र में भी सहभागिता की। वाकई में एक बार मे रक्तदान से तीन जिंदगियां बचती है आपातकालीन आपका रक्त जरूरतमंद के तुरंत काम आता है ।आज रक्तदान के संदर्भ में भ्रांतियां दूर करने की आवश्यकता है।

मिशन इंद्रधनुष: जिले में चल रहा है तीसरे राउंड का साप्ताहिक नियमित टीकाकरण अभियान

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–  प्रखंडों के आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिविर आयोजित कर गर्भवती और बच्चों का किया जा रहा टीकाकरण
– 08 मई तक चलेगा अभियान, शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित करने पर जोर
खगड़िया, 04 मई-
जिले में मिशन इंद्रधनुष अभियान के तहत तीसरे राउंड का साप्ताहिक नियमित टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा है। इस अभियान की शुरुआत सोमवार से ही जिलेभर में हो चुकी है। जिसका समापन 08 मई को होगा। अभियान माध्यम से जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण शिविर आयोजित कर गर्भवती और बच्चों का नियमित टीकाकरण (आर आई) किया जा रहा है। ताकि एक भी लाभार्थी टीकाकरण से वंचित नहीं रहे और शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके। वहीं, अभियान की सफलता को संबंधित क्षेत्र की एएनएम, आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर सामुदायिक स्तर पर लोगों को नियमित टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि सभी योग्य लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण करा सकें और अभियान का सफलतापूर्वक समापन सुनिश्चित हो सके।
– विभिन्न प्रकार के गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, विभिन्न प्रकार के गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी है। इसलिए, मैं जिले की तमाम गर्भवती महिलाओं और 0 से 02 आयु वर्ग के बच्चों के अभिभावकों से अपील करता हूँ कि अपने बच्चों का निश्चित रूप से बेहिचक टीकाकरण कराएं। इससे ना केवल गंभीर बीमारी से बचाव होगा, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलेगा। वहीँ बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होगा।  उन्होंने बताया, शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेएई (जापानी बुखार) के टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा अभियान में गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
– टीका से छूटे गर्भवती और बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है टीकाकरण :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, टीका से छूटी गर्भवती और बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जा रहा है। एक भी लाभार्थी टीकाकरण से वंचित नहीं रहे, इसको लेकर तमाम स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सामुदायिक स्तर पर लोगों को टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
– अभियान की सफलता को लेकर जिले के सभी सेविकाओं को दिए गए हैं जरूरी निर्देश :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, मिशन इंद्रधनुष अभियान की सफलता को लेकर जिले के सभी सेविकाओं को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर मेडिकल टीम को हरसंभव जरूरी सहयोग करने, अपने पोषक क्षेत्र के लाभार्थियों को टीकाकरण शिविर की जानकारी उपलब्ध कराने समेत अन्य आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

दूषित पानी पीने और संक्रमित भोजन करने से होता है टायफाइड 

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– गंदे परिवेश में अधिक होती है टायफायड रोग के फैलने की संभावना
– अधिक दिनों तक लगातार बुखार रहने पर करायें रक्त की जांच
– कई बार टायफाइड का होना लिवर के लिए है खतरनाक
– भोजन से पहले व शौच के बाद अनिवार्य रूप से हाथों को साबून से करें साफ
– गर्मी व बरसात के मौसम में रखें विशेष ध्यान
मुंगेर, 04 मई। साफ ,स्वच्छ पेयजल और भोजन मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसके विपरीत प्रदूषित पानी व भोजन के सेवन से कई प्रकार की पेट संबंधी बीमारियां होती हैं। इनमें एक बीमारी टायफाइड भी है जो दूषित पानी व संक्रमित भोजन के सेवन से होता है। गर्मी तथा बरसात के मौसम में पानी तथा भोजन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। ऐसे मौसम में टायफाइड यानि मियादी बुखार के मरीज अधिक मिलते हैं। टायफाइड सालमोनेला टाइपी नामक बैक्टीरिया से फैलने वाला एक गंभीर रोग है। यह बैक्टीरिया दूषित पानी एवं संक्रमित भोज्य पदार्थ में पनपते हैं। गंदे ​परिवेश वाली जगहों पर टायफाइड फैलने की संभावना अधिक होती है ।
पाचन तंत्र को प्रभावित करता है टायफाइड :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया दूषित पानी व संक्रमित भोजन के सेवन से व्यक्ति मियादी बुखार से ग्रसित हो जाता है। टायफाइड के कारण लीवर में सूजन हो जाती है। ऐसे में साफ पानी और भोजन का ध्यान रखना जरूरी है। सब्जियों का सही से नहीं धोना, शौचालय का इस्तेमाल नहीं होना और खुले में मलमूत्र त्याग करना, खाने से पहले हाथों को नहीं धोना, आदि कई कारणों से टायफाइड हो सकता है।
उन्होंने बताया कि टायफाइड होने पर तेज बुखार के साथ दस्त व उल्टी होना, बदन दर्द रहना, कमजोरी और भूख नहीं लगना प्रमुख लक्षण है। इसके साथ ही पेट, सिर और मांसपेशियों में भी दर्द रहता है। टायफाइड पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है। खून की जांच कर इसका पता लगाया जाता है। बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं में बुखार के लंबे समय तक रहने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श प्राप्त करना चाहिए। टायफाइड होने पर मरीज को पूरी तरह आराम करना चाहिए। उन्हें ऐसे भोजन दिये जाने चाहिए जो आसानी से पचाया जा सके । पीने के लिए उबाले हुए पानी को ठंडा कर दें। रोगी को मांस मछली का सेवन नहीं करने दें। अधिक से अधिक तरल पदार्थ लेना बेहतर है। भोजन में हरी सब्जियां, दूध और पाचन तंत्र को बेहतर बनाये रखने वाले भोजन लें। ताजे मौसमी फल का सेवन करे।
टायफाइड रोगी इन चीजों से रहें दूर :
उन्होंने बताया कि चाय कॉफी तथा अन्य कैफिन युक्त पदा​र्थ, रिफाइंड तथा प्रोसेस्ड फूड और अधिक तेल मसाले वाले भोजन से दूरी बनायें। इसके अलावा घी, तेल, गरम मसाला व अचार तथा गर्म तासीर वाले भोजन से परहेज करें। सही तरीके से इलाज नहीं होने और अधिक समय तक टायफाइड रहने से व्यक्ति काफी कमजोर हो जाता है। बार – बार टायफाइड का होना गंभीर है।
इन बातों का ध्यान रखना  जरूरी :
– दूषित पानी, संक्रमित और बासी भोजन का सेवन नहीं करें ।
– ठेले पर बिकने वाले खाद्य तथा पेय पदार्थ का सेवन नहीं करें ।
– फल व सब्जी को साफ पानी से धोयें ।
– बाजार में बिकने वाले बर्फ का इस्तेमाल नहीं करें ।
– खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथों को अच्छी तरह धोयें ।
– दो दिन से अधिक बुखार रहने पर डॉक्टरी परामर्श लें ।