मेड़तवाल समाज  कोटा के चुनाव में अध्यक्ष राधेश्याम बोबस एवं महामंत्री राजेश एवं टीम  विजयी

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 मेड़तवाल वैश्य समाज कोटा की नव कार्यकारिणी निर्वाचित
समाज को साथ लेकर पूरे वर्ष भर कार्य करेंगे – राजेश गुप्ता महामंत्री
हाल ही में मेड़तवाल वैश्य समाज सेवा समिति कोटा के फलौदी मांगलिक भवन में  द्विवार्षिक चुनाव सम्पन्न हुए ,इसमें कोटा के मेड़तवाल समाज ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। पूरे राष्ट्रीय स्तर पर कोटा मेड़तवाल समाज के इस चुनाव पर निगाहे टिकी रही । मीडिया वार्ता में डॉ एनपी  गाँधी ने बताया कि में मेड़तवाल वैश्य सेवा समिति के अध्यक्ष पद पर कर्मठ  ,सेवाभावी पूर्व कोषाध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता बोबस ,मिलनसार ,सबको समन्वय के साथ एक सूत्र में पिरोने वाले महामंत्री राजेश गुप्ता , युवा सम्राट सहमंत्री गुंजन गुप्ता ,मृदुभाषी कोषाध्यक्ष जगदीश प्रसादगुप्ता , कार्यालय मंत्री  प्रमोद कुमार गुप्ता आदि सभी की  जीत दर्ज हुई एवं सर्वसम्मति से  मोहनलाल मोडीवाल उपाध्यक्ष बने। आगे डॉ. एन पी गाँधी ने अवगत कराया कि भावी अध्यक्ष राधेश्याम बोबस के अटूट निर्देशन में यह चुनाव लड़ा गया जिसमें नवनिर्वाचित अध्यक्ष राधेश्याम बोबस ने बताया कि आगामी दो वर्षों तक पूरी टीम कार्यकारिणी एवं समाज जनों के सक्रिय सहयोग से मिलबेठकर अध्यक्ष आपके द्वार योजना से युवा, महिला ,बुजुर्ग सभी के सानिध्य में मिलकर समाज हित की कार्य योजना तैयार की जावेगी एवं साथ ही महामंत्री राजेश ने बताया कि हमारा उद्देश्य समाज के हर तबके के व्यक्ति को साथ लेकर उनके हितार्थ कार्य कर माँ फलौदी के आशीर्वाद से वर्ष भर समाज के विभिन्न जनउपयोगी प्रकल्पों पर नए उत्साह के साथ कार्य किया जावेगा । राजेश गुप्ता एवं  गुंजन गुप्ता ने सभी युवा कपल्स ग्रुप,वरिष्ठ जनों  का धन्यवाद ज्ञापित किया एवं आशीर्वाद हेतु ह्दय के गहनतम तल से आभार व्यक्त किया । आगे मीडिया वार्ता में गाँधी ने बताया कि मुख्य चुनाव अधिकारी राजेन्द्र पनवाड़,दिनेश गुप्ता पीएनबी एवं पूरी टीम के बेहतर प्रबंधन में निष्पक्ष पारदर्शिता के साथ चुनाव सम्पन्न हुए।

इंद्रधनुष अभियान : जिले में 02 मई से शुरू होगा साप्ताहिक नियमित टीकाकरण का तीसरा राउंड 

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– टीकाकरण अभियान की सफलता को लेकर जिले में बनाएं गए 300 सेशन साइट
– शिविर आयोजित कर 2380 बच्चों और 468 गर्भवती को किया जाएगा टीकाकृत
लखीसराय, 30 अप्रैल।
जिले में 02 मई से साप्ताहिक इंद्रधनुष अभियान का तीसरा राउंड शुरू होगा। जिसका समापन 08 मई को होगा। इस दौरान जिले में चयनित एवं चिह्नित सेशन साइटों पर शिविर आयोजित कर गर्भवती एवं बच्चों का नियमित टीकाकरण किया जाएगा। अभियान की सफलता को लेकर करीब-करीब सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई है। ताकि अभियान की शुरुआत होने के बाद किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण करा सके। अभियान के सफल संचालन के लिए जिले में भर में 300 सेशन साइट बनाएं गए हैं । सभी साइटों पर व्यापक तैयारियाँ और पर्याप्त कर्मियों की तैनाती की गई है।
– जिले के 2380 बच्चों और 468 गर्भवती को किया जाएगा टीकाकृत :
डीआईओ सह एसीएमओ डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, साप्ताहिक नियमित टीकाकरण  अभियान की सफलता को लेकर सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई है। जिले भर में चयनित 300 सेशन साइटों पर 2380 बच्चों और 468 गर्भवती को टीकाकृत किया जाएगा। वहीं, उन्होंने बताया, गर्भवती और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे ना केवल गंभीर बीमारी से बचाव होगा, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलेगा तथा बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होगा। इसलिए, मैं जिले के तमाम ऐसे लाभार्थियों से अपील करता हूँ कि जो नियमित टीकाकरण नहीं करा पाएं हैं, वह अपने नजदीकी शिविर स्थलों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं।
– टीका से छूटे गर्भवती और बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा नियमित टीकाकरण :
02 मई से जिले में शुरू होने वाले साप्ताहिक नियमित टीकाकरण के तीसरे राउंड के दौरान टीका से छूटे गर्भवती और बच्चों को जागरूक कर प्राथमिकता के आधार पर टीकाकृत किया जाएगा। इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश निर्देश दिए गए हैं। ताकि छूटे सभी लाभार्थी टीकाकृत हो सके और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
– गंभीर बीमारियों से बचाव करता है नियमित टीकाकरण : नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों पर होता है। जिसके माध्यम से शून्य से पाँच वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेएई (जापानी बुखार) का टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा अभियान में गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।

आज से अनमोल एप से रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ पोर्टल पर प्रविष्टियां अपलोड व अपडेट करेंगी एएनएम 

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– एक मई 2022 से राज्यभर में लागू हो रहा है आरसीएच पोर्टल और अनमोल एप
– राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिलों के जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को जारी की चिट्ठी
मुंगेर, 30 अप्रैल।  एक मई  से जिला भर में सेवा प्रदाता एएनएम के द्वारा दी जा रही रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ आरसीएच सर्विसेस से संबंधित आंकड़ों का संधारण केवल आरसीएच रजिस्टर से ही किया जाएगा। इसके साथ ही एएनएम के द्वारा उन्हें उपलब्ध कराए गए टैबलेट के उपयोग से अनमोल एप के माध्यम से उक्त आंकड़ों को आरसीएच पोर्टल पर अपलोड करने के साथ ही आंकड़ों को अपडेट भी किया जाएगा । आरसीएच पोर्टल के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनिटरिंग भी की जाएगी । ताकि लाभार्थियों को ससमय बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम से कमतर किया जा सके।
मुंगेर के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति से प्राप्त निर्देश के अनुसार आज से जिलाभर में आरसीएच पोर्टल और अनमोल एप के एएनएम द्वारा उपयोग को पूर्णतः लागू करना है। इसके लिए पहले ही सभी एएनएम को टैबलेट उपलब्ध करा दिया गया है। ताकि एएनएम के द्वारा स्वास्थ्य उपकेंद्र, क्षेत्र भ्रमण और वीएचएसएनडी सेशन के दौरान लाभार्थियों को दी जा रही आरसीएच सर्विसेस को अनमोल एप के माध्यम से आरसीएच पोर्टल पर शत प्रतिशत रजिस्ट्रेशन/ सर्विस डिलीवरी/ अपडेटेंशन कराया जा सके। इससे दी जा रही आरसीएच सर्विसेज की ट्रैकिंग प्रत्येक स्तर पर ससमय की जा सके और मातृ-शिशु मृत्यु को कम किया जा सके।
उन्होंने बताया कि जिलों की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में नए जिला रैंकिंग से संबंधित इंडीकेटर्स एवं प्रक्रिया पर चर्चा की गई। उक्त नई रैंकिंग में आरएमएनसीएच के इंडीकेटर्स का डाटा सोर्स आरसीएच पोर्टल पर ही उपलब्ध है। इससे आरसीएच पोर्टल में पूर्ण सही आंकड़ों की अनमोल एप से रियल टाइम मॉनिटरिंग, रजिस्ट्रेशन और अपडेटेशन एएनएम के द्वारा उनके पास टैबलेट का उपयोग करने से ससमय आसानी से हो सकता है। इसके साथ ही उक्त कार्यों की मॉनिटरिंग उपस्थित पदाधिकारी के द्वारा की जाएगी।

कोविड संक्रमण की संभावित चौथी लहर से सुरक्षित रहने को रहें सतर्क और सावधान

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– जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में लगातार चल रहा है वैक्सीनेशन अभियान
– प्रीकाॅशनरी और सेकेंड डोज के लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर दी जा रही है वैक्सीन
खगड़िया, 30 अप्रैल।
कोविड संक्रमण की संभावित चौथी लहर से सुरक्षा के मद्देनजर जहाँ जिले में वैक्सीनेशन एवं जाँच अभियान तेज कर दिया गया है वहीं, इस महामारी से निपटने के लिए अभी से ही स्वास्थ्य विभाग व्यापक तैयारी में जुट गया है। ताकि चौथी लहर से भी सामुदायिक स्तर पर लोग सुरक्षित रहें और लोगों को आवश्यकतानुसार बेहतर तरीके  स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। किन्तु, आमलोगों को भी संभावित चौथी लहर से सुरक्षित रहने के लिए इस महामारी के खिलाफ सतर्क और सावधान होने की जरूरत है। तभी हम चौथी लहर से भी खुद को सुरक्षित रख सकते  और इस महामारी को एकबार फिर मात दे सकते हैं। इसके लिए बच्चों की भी उचित देखभाल के साथ-साथ खानपान का विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसलिए, बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह सजग रहें। किसी भी प्रकार की शारीरिक पीड़ा होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराएं और समुचित इलाज कराएं। ताकि बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ और मजबूत रह सकें। जब बच्चा स्वस्थ्य और मजबूत रहेगा तो वह निश्चित ही संक्रामक बीमारी से दूर रहेगा।
– वैक्सीन से वंचित लोग जल्द से जल्द कराएं वैक्सीनेशन और चौथी लहर के खतरे से रहें दूर :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया संभावित चौथी लहर से बचाव के लिए कोविड जाँच और वैक्सीनेशन अभियान तेज करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसका पालन करते हुए जिले में जाँच और वैक्सीनेशन अभियान तेज कर दिया गया है। ताकि वैक्सीन से वंचित लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा 18 से 59 आयु वर्ग के सभी ऐसे लाभार्थी, जो प्रीकाॅशनरी डोज लेने की समयावधि पूरी कर चुके हैं, उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क प्रीकाॅशनरी डोज दी  जा रही है। यह सुविधा जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है। वहीं, उन्होंने कहा, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जो भी लोग किसी भी कारणवश अबतक वैक्सीनेशन करा सके और प्रीकाॅशनरी डोज लेने की समयावधि पूरी कर चुके हैं, वह निश्चित रूप से अपने नजदीकी वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर वैक्सीनेशन कराएं और चौथी लहर के खतरे से खुद को सुरक्षित करें।
– संभावित चौथी लहर को रोकने के लिए वैक्सीनेशन के साथ सावधानी और सतर्कता भी जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, एकबार फिर कोविड संक्रमण की चौथी लहर आने की आशंका जताई जा रही है। जिससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन के साथ-साथ सावधानी और सतर्कता भी जरूरी है। क्योंकि, इसी के बदौलत अबतक इस घातक महामारी के प्रभाव को रोकने में काफी हद तक सफलता मिली है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जो भी व्यक्ति अबतक किसी कारण वश वैक्सीन नहीं ले पाएं है, वह निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। साथ ही इस घातक महामारी को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए सावधानी और सतर्कता भी जारी रखें। इसके लिए मास्क और शारीरिक दूरी के पालन का ख्याल रखें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

एपीएचसी के डॉक्टर एपीएचसी में ही ड्यूटी करें- सिविल सर्जन

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-एपीएचसी के डॉक्टर को पीएचसी में ड्यूटी के लिए तैनात नहीं करें
-सिविल सर्जन ने सभी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवा की समीक्षा की
भागलपुर, 30 अप्रैल।
सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं की सिविल सर्जन ने शनिवार को समीक्षा की। सदर अस्पताल में हुई समीक्षात्मक बैठक में सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा, डीपीएम फैजान आलम आशर्फी के अलावा सभी अस्पतालों के प्रभारी और केयर इंडिया, यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस दौरान सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पतालों को मरीजों के लिए सुविधायुक्त बनाएं। बेहतर व्यवस्था रहने पर ही मरीजों को बेहतर सेवा मिल सकेगी। जिसकी ड्यूटी जहां पर लगी हो, उसे वहीं पर लगाएं। एपीएचसी में जिस डॉक्टर की ड्यूटी लगी हो, उसे पीएचसी में नहीं लगाएं। इससे एपीएचसी की सेवा प्रभावित होगी। पीएचसी या अन्य अस्पतालों में डॉक्टर का रहना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी एपीएचसी में डॉक्टर का रहना है। वहां पर भी मरीजों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
फील्ड में काम करने वालों पर रखें निगरानीः बैठक के दौरान सिविल सर्जन ने सभी अस्पतालों के प्रभारियों से कहा कि फील्ड में काम करने वालों पर निगरानी रखें। समय-समय पर इस बात की जांच करें कि काम सही तरीके से हो रहा है या नहीं। अगर नहीं हो रहा हो तो उसे ठीक करें। सिविल सर्जन ने सभी प्रभारियों से कहा कि फील्ड में लगातार एएनएम को भेजें और जांच के काम में तेजी लाएं। इसे लेकर अगर कोई परेशानी हो तो बताएं। उसका समाधान किया जाएगा, लेकिन काम पर असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। हर व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंचे, इसे लेकर लगातार प्रयास करते रहें।
कोरोना जांच और टीकाकरण तेज करने का निर्देशः बैठक के दौरान सिविल सर्जन ने कोरोना जांच को लेकर दिए गए लक्ष्य को हासिल करते रहने का निर्देश सभी प्रभारियों को दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना की चौथी लहर की संभावनाओं को देखते हुए अभी से एहतियात बरतें। किसी व्यक्ति पर जरा सा भी संदेह हो तो कोरोना जांच करें। साथ ही टीकाकरण के काम में तेजी लाएं। जिनलोगों ने टीका की पहली डोज लेकर दूसरी नहीं ली है, उसे चिह्नित कर दूसरी डोज दिलवाएं। साथ ही जिनका तीसरी डोज लेने का समय पूरा हो गया है, उनका भी टीकाकरण कराएं। दूसरी डोज को लेकर जिन प्रखंडों की स्थिति ठीक नहीं है, वे इस काम में लग जाएं। कोरोना टीकाकरण की वजह से ही तीसरी लहर प्रभावी नहीं रहा था। इसलिए एक-एक व्यक्ति का टीकाकरण सुनिश्चित कराएं, ताकि चौथी लहर भी अगर आए तो उसका कम-से-कम प्रभाव लोगों पर पड़े।

टीबी मरीजों और उसकी देखभाल करने वालों की समस्याओं का हुआ समाधान

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-नाथनगर रेफरल अस्पताल में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक
बैठक में टीबी मरीजों को इससे उबरने के बताए गए तौर-तरीके
भागलपुर, 30 अप्रैल –
नाथनगर रेफरल अस्पताल में शनिवार को कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक की। बैठक में स्वास्थ्य विभाग ने भी सहयोग किया। इस दौरान 10 टीबी मरीज, आठ उनके केयर गिवर और एक टीबी चैंपियन मौजूद थे। इस दौरान टीबी मरीजों की समस्याओं का समाधान डॉ. शाकिर नदीम, डॉ. चिश्तिया मनसूर और एसटीएस कृति भारती ने किया। कार्यक्रम में के एचपीटी के कम्युनिटी को-ऑर्डिनेटर सुमित कुमार और फैयाज खान ने महत्पवूर्ण भूमिका निभाई। बैठक के दौरान सही खान-पान, पोषण, साफ सफाई के बारे में बताया गया। साथ ही टीबी के प्रति लोगों में जो भ्रांतियां हैं, उसे कैसे दूर किया जाए और राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
डॉ. शाकिर नदीम ने बताया कि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। लोगों को जागरूक कर ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। डॉ. नदीम ने बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः वहीं डॉ. चिश्तिया मनसूर ने बताया कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसीलिए  टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

आलोचना और चुनौतियों को दरकिनार कर समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुँचाई स्वास्थ्य सुविधाएं

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– सराहनीय कार्य की बदौलत आशा कार्यकर्ता प्रियंका कुमारी ने इलाके में बनाई अपनी अलग पहचान
– बेहतर कार्य के लिए राज्यस्तरीय  समेत प्रखंड से लेकर जिलास्तर पर आठ बार हो चुकी सम्मानित
लखीसराय, 29 अप्रैल।
सामुदायिक स्तर पर बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुँच सके, इसको लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। ताकि एक भी जरूरतमंद स्वास्थ्य सेवा से वंचित नहीं रहे और समाज के आखिरी व्यक्ति को सुविधाजनक तरीके से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ मिल सके। जिसे सार्थक रूप देने के लिए स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता भी पीछे नहीं है। बल्कि, समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा को पहुँचाने एवं सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से लोगों को जोड़ने के लिए अपने कर्तव्य पथ पर तमाम आलोचना, चुनौतियों और परेशानियाँ का सामना करने के बाद भी अग्रसर है। ऐसे ही आशा कार्यकर्ताओं में जिले के हलसी सीएचसी में कार्यरत हलसी प्रखंड के गेरूआ गाँव स्थित ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 32 क्षेत्र की आशा प्रियंका कुमारी का पूरे इलाके में नाम शुमार है। प्रियंका, ना सिर्फ लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुँचाने में सफल रही  बल्कि, लोगों को सरकारी स्वास्थ्य से जोड़ने में भी सफल रही।
– बेहतर कार्य के लिए प्रखंड से लेकर जिलास्तर पर आठ बार हो चुकी सम्मानित :
आशा कार्यकर्ता प्रियंका कुमारी परिवार नियोजन, टीकाकरण, कोविड, प्रसव, गृह भ्रमण समेत स्वास्थ्य से संबंधित अन्य क्षेत्रों में बेहतर कार्य के लिए प्रखंड से लेकर जिला स्तर पर आठ बार सम्मानित हो चुकी है। प्रियंका, को वर्ष 2007 में आशा की नौकरी मिली। इसके बाद अपने क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया। किन्तु, तब लोगों को समझाना और समाज में चल रही भ्रांतियाँ को दूर कर स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करना आसान नहीं था। इस दौरान प्रियंका को अपने क्षेत्र के लोगों की काफी आलोचना, विरोध समेत तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ा, पर इन परेशानियाँ से कभी ये घबराई नहीं। बल्कि, सकारात्मक उम्मीद के साथ अपनी कार्य पर डटी रही । जिसका नतीजा यह हुआ कि जैसे-जैसे समय बीतते गया, वैसे-वैसे लोगों में सकारात्मक बदलाव होने लगा और प्रियंका की राह धीरे-धीरे आसान भी होने लगी। यही नहीं, जिसने शुरुआती दौर में जितना विरोध किया, वो उतना ही बदलने के साथ समर्थक भी बनने लगे। जिसका परिणाम यह हुआ कि बेहतर कार्य के लिए प्रियंका को आठ बार पुरस्कृत किया गया। पहला पुरस्कार वर्ष 12-13 में प्रखंड स्तर पर द्वियीय पुरस्कार मिला। दूसरा वर्ष 13-14 में जिला स्तर पर सीएस के हाथों मिला। तीसरा वर्ष 18-19 में प्रखंड स्तर पर पहला पुरस्कार मिला। चौथा वर्ष 19-20 में प्रखंड स्तर पर तृतीय पुरस्कार मिला। पाँचवा वर्ष 20-21 में प्रखंड स्तर पर पहला पुरस्कार मिला। छठा वर्ष 21-22 में जिला स्तर पर डीएम एवं सीएस के हाथों पुरस्कार मिला। सातवां 08 मार्च 2022 को विश्व महिला दिवस के अवसर पर पटना में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के हाथों पुरस्कार मिला और आठवाँ 21 मार्च, 2022 को प्रखंड स्तर पर मिला।
– कोविड के मुश्किल भरे दौर में भी लोगों तक पहुँचाती रही स्वास्थ्य सेवा :
कोविड के मुश्किल भरे दौर में जब लोग घरों से बाहर निकलना खुद को महफूज नहीं समझ रहे थे। अपनों से भी दूरी बनाने लगे थे। तब ऐसे मुश्किल भरे दौर में भी आशा कार्यकर्ता प्रियंका कुमारी अपने कर्तव्य पथ से पीछे नहीं हटी, बल्कि अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रही और लोगों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाती रही। परिवार नियोजन के प्रति भी सामुदायिक स्तर पर लोगों को पुरानी ख्यालातों और भ्रांतियों से दूर कर बेहतर कार्य करने में सफल रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य से संबंधित अन्य कार्यों में भी बेहतर कार्य करने में सफल रही।
– चुनौतियों और परेशानियाँ की कभी नहीं की परवाह, अपने कर्तव्य पथ पर सकारात्मक उम्मीद के साथ चलती रही :
आशा प्रियंका कुमारी ने बताया, समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा का लाभ पहुँचाना और लोगों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने के साथ-साथ खुद व परिवार का भी ख्याल रखना, निश्चित रूप से चुनौतियों और परेशानियाँ से भरा हुआ था। किन्तु, कभी इसकी परवाह नहीं की। बल्कि, तमाम चुनौतियों और परेशानियाँ को नजरअंदाज कर अपने कर्तव्य पथ पर डटी रही। वहीं, उन्होंने बताया, चुनौती यह कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रति लोगों को नजरिये को बदलना और परेशानी यह कि खुद व परिवार का भी ख्याल रखते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुँचाना। मेरी  मेहनत का सकारात्मक परिणाम यह है कि अब लोग खुद सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही तमाम स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी लेने मेरे पास आने लगे हैं। वहीं, उन्होंने बताया, पुरस्कार मिलने से कार्य करने का जज्बा और ऊर्जा दुगुनी होती और अन्य कर्मियों में भी अपने कार्य के प्रति जिज्ञासा बढ़ती है।

शिविर आयोजित कर स्कूली बच्चों को दिया गया एईएस/जेई  का टीका 

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– महेशखूट स्थित एक निजी स्कूल में  शिविर आयोजित, 1 से 15 आयु वर्ग के बच्चों को एईएस से बचाव के लिए टीका जरूरी, इसलिए जरूर कराएं टीकाकरण
खगड़िया, 29 अप्रैल-
एईएस/जेई (चमकी बुखार/मस्तिष्क ज्वर) से सामुदायिक स्तर पर लोगों को सुरक्षित रखने के लिए शासन-प्रशासन पूरी तरह सजग और संकल्पित है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए जिले में लगातार एईएस/जेई से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को गोगरी रेफरल अस्पताल प्रबंधन द्वारा जिले के महेशखुंट स्थित एक निजी स्कूल में एईएस/जेई और कोविड  टीकाकरण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 1 से 15 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी किशोर-किशोरियों को एईएस/जेई का टीका दिया गया। जबकि, प्रीकाॅशनरी डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरी करने वाले शिक्षकों को कोविड की प्रीकाॅशनरी डोज दी गयी। इसके अलावा शिविर के दौरान बच्चों को एईएस/जेई और कोविड से बचाव के लिए आवश्यक और जरूरी जानकारी भी दी गई। शिविर में मौजूद मेडिकल टीम में गोगरी रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ चंद्रकात, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक रिपुंजय कुमार, केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक नीलम सयानी समेत 10 सदस्यीय मेडिकल टीम के अलावा स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद थी।
– एईएस/जेई से बचाव के लिए टीका साथ-साथ जागरूकता भी जरूरी :
गोगरी रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ चंद्रकांत ने बताया, एईएस/जेई से बचाव के लिए टीका के साथ-साथ जागरूकता भी बेहद जरूरी है। इसलिए, इस बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण जरूर कराएं। वहीं, उन्होंने कहा कि टीका के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर बच्चों को जागरूक करने की भी जरूरत है। इसलिए, तमाम स्वास्थ्य कर्मी अपने-अपने क्षेत्र में विद्यालय, ऑगनबाड़ी केंद्रों समेत अन्य संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को चेतना सत्र के तहत एईएस/जेई से बचाव के क्या कराना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए समेत बचाव से संबंधित अन्य जानकारियाँ दें और इस बीमारी के कारण, लक्षण एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दें। ताकि लक्षण महसूस होते ही बच्चे अपने अभिभावकों को अपनी परेशानी से अवगत करा सकें और समय पर संबंधित बच्चों का इलाज शुरू हो सके। क्योंकि, इस बीमारी को मात देने के समय पर इलाज शुरू कराना बेहद जरूरी है।
– 550 स्कूली बच्चों को दिया गया गया एईएस/जेई का टीका :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, स्कूल में शिविर के दौरान कुल 550 स्कूली बच्चों (छात्र-छात्राएँ) को एईएस/जेई टीका दिया गया। साथ ही 08 शिक्षकों को कोविड वैक्सीन की प्रीकाॅशनरी डोज दी गयी। इस दौरान स्कूली बच्चों को एईएस/जेई एवं कोविड से बचाव के लिए आवश्यक और जरूरी जानकारी भी दी गई। जिसके दौरान बच्चों कोकारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई।
– चमकी से बचाव के लिए तीन धमकियां का पालन करने के लोगों को करें जागरूक :
प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक रिपुंजय कुमार ने बताया, एईएस/जेई से बचाव के लिए तीन धमकियां का पालन करने के लिए लोगों को जागरूक करें। पहला खिलाओ, दूसरा जगाओ और तीसरा अस्पताल ले जाओ। इसी के तहत बच्चों को रात में बिना खिलाए नहीं सुलाने, सुबह में जगाने और लक्षण महसूस होने पर तुरंत स्थानीय और नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान ले जाने के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करें। वहीं, उन्होंने कहा, मैं तमाम प्रखंड वासियों से भी अपील करता हूँ कि बच्चों को एईएस से बचाने के लिए माता-पिता को शिशु के स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट रहना चाहिए। समय-समय पर देखभाल करते रहना चाहिए। स्वस्थ बच्चों को मौसमी फलों, सूखे मेवों का सेवन करवाना चाहिए। साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। छोटेफ बच्चों को माँ का दूध पिलाना बेहद आवश्यक है। अप्रैल से जुलाई तक बच्चों में मस्तिष्क ज्वर की संभावना बनी रहती है। बच्चे के माता-पिता को लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच और जाँच के बाद आवश्यक इलाज कराना चाहिए।
– ये है चमकी बुखार के प्रारंभिक लक्षण :
– लगातार तेज बुखार चढ़े रहना।
– बदन में लगातार ऐंठन होना।
– दांत पर दांत दबाए रहना।
– सुस्ती चढ़ना।
– कमजोरी की वजह से बेहोशी आना।
– चिउटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि।
– चमकी बुखार से बचाव के लिए ये सावधानियाँ हैं जरूरी :
– बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें।
–  गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें।
– ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
– रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
– बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
–  पारासिटामोल की गोली या सिरप दें।

गर्मी के मौसम में होने वाले चेचक बीमारी के लक्षणों की पहचान जरूरी

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– चेचक से ग्रसित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखना है आवश्यक
– सरकारी अस्पतालों में है चेचक के इलाज की समुचित व्यवस्था
मुंगेर, 29 अप्रैल। गर्मियों के मौसम में होने वाली कुछ ऐसी बीमारियां भी हैं जिनके होने से लोग घबरा जाते हैं। चेचक एक ऐसी ही बीमारी है जिसका ज्यादातर संक्रमण बच्चों के शरीर पर देखने को मिलता है । यह बीमारी वारिसेला- जोस्टर नामक वायरस के संक्रमण से होता है। यह बीमारी होने के बाद समय पर चिकित्सीय प्रबंधन नहीं होने की स्थिति में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है ।
चेचक के लक्षणों की पहचान जरूरी :
मुंगेर के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि चेचक की बीमारी को चिकनपॉक्स के नाम से भी जानते हैं। यह बीमारी दो तरह की होती हैं। पहली छोटी माता यानी छोटी चेचक और दूसरी बड़ी माता यानी बड़ी चेचक। इस बीमारी में शरीर के ऊपर लाल रंग के दाने निकल आते हैं, जिनमें खुजली और दर्द दोनों होता। इसके अलावा इस बीमारी में व्यक्ति को बुखार भी आता है। इसके साथ ही कमजोरी , शरीर में दर्द होना और कुछ भी अच्छा ना लगना जैसी कई अन्य चीजें भी होती हैं। इन दोनों ही स्थिति में शरीर के ऊपर दाने निकलते हैं। लेकिन दोनों में अंतर ये है कि जहां बड़ी चेचक में बड़े दाने, तो वहीं छोटी चेचक में छोटे दाने निकलते हैं। इसी से इसे पहचाना जा सकता है। इसके अलावा छोटी चेचक के समय उसके होने वाले दाने छोटे होते हैं जो कि बीच में से फटते नहीं हैं, बल्कि सीधे सूख जाते हैं। अमूमन छोटी चेचक बच्चों को होती है। वहीं, बड़ी चेचक के समय शरीर पर बड़े दाने होते हैं। ये बीच में से फट जाते और फिर सूखकर इनकी पपड़ी उतर जाती है।
चेचक के उपचार :
उन्होंने बताया कि चेचक की बीमारी में अस्पताल में दवाएं व इलाज उपलब्ध है। डॉक्टर से सलाह जरूर लें। साफ सफाई के साथ कई घरेलू उपचार करके भी इससे बचा जा सकता है। इसमें नीम को बड़ा असरदार माना गया है। नीम को नहाने वाले पानी में डालकर उबाल लें, और फिर इस पानी से रोगी को नहलाएं। ऐसा करना चेचक की बीमारी में काफी लाभदायक होता है ।
नियमित रूप से साफ सफ़ाई का रखें खयाल :
इस दौरान साफ- सफाई का पूरा ध्यान रखते हुए उन्होंने घर के आसपास कूड़े करकट के ढ़ेर न लगने देने की सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को गन्दे व बीमार पशुओं से दूर रखने और उन्हें सन्तुलित आहार देने की बात कही। उन्होंने बताया कि इन वस्तुओं के संपर्क में आने से भी चेचक फैल सकता है जो वायरस से दूषित हो गए हैं। अतः संक्रमित बच्चों के खिलौने, बिस्तर या कपड़े जो आपके घर में है उस वस्तु  को कीटाणुनाशक से साफ करके चेचक को फैलने से रोक सकते हैं।
निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
– नाखूनों को छोटा और साफ रखें
– इसे खरोंचने के बजाय त्वचा को सहलायें या थपथपाएं
– रात में सूती दस्ताने पहनें
– ठन्डे या गुनगुने पानी में स्नान करें ।
– ढीले, चिकने सूती कपड़े पहनें।

अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी हैं पूरे टीकाकरण कार्यक्रम के नायक- डॉ. एन.के.सिन्हा

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• “आस्क द डॉक्टर” वेबिनार श्रृंखला में विश्व टीकाकरण सप्ताह में टीकाकरण के महत्त्व पर हुई चर्चा
• राज्य स्वास्थ्य समिति एवं यूनिसेफ के तत्वावधान में वेबिनार का हुआ आयोजन
• नियमित टीकाकरण, मिशन इन्द्रधनुष-4.0 एवं कोविड टीकाकरण के महत्त्व पर हुई चर्चा
• किशोर/किशोरी करें मिशन इन्द्रधनुष-4.0 में सभी को टीकाकरण के लिए प्रेरित- निपुण गुप्ता
पटना/ 29 अप्रैल- विश्व टीकाकरण सप्ताह 24 से 30 अप्रैल तक मनाया जा रहा है. टीकाकरण की महता को उजागर करने और अधिकाधिक जागरूकता पर बल देने के उद्देश्य से राज्य स्वास्थ्य समिति एवं यूनिसेफ के तत्वावधान में “आस्क द डॉक्टर” वेबिनार श्रृंखला में वेबिनार का आयोजन किया गया. वेबिनार में राज्य स्वास्थ्य समिति की तरफ से राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एन.के.सिन्हा ने एक्सपर्ट की भूमिका निभाई और शामिल प्रतिभागियों के सवाल के जवाब दिए.
 वेबिनार में यूनिसेफ की तरफ से संचार विशेषग्य निपुण गुप्ता, डॉ. सिद्धार्थ रेड्डी, डॉ, निर्भय नाथ मिश्रा, ऐश्वर्या एलेग्जेंडर, राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशक पियूष परांजपेके साथ सदस्य एवं वालंटियर्स, नेहरु युवा केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक अंशुमन दस के साथ सदस्य एवं वालंटियर्स, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि सहित विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों के साथ करीब 200 लोगों ने शिरकत की.
अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी हैं पूरे टीकाकरण कार्यक्रम के नायक- डॉ. एन.के.सिन्हा
वेबिनार के अपने संबोधन में डॉ. एन.के.सिन्हा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग सभी लोगों को टीकाकरण के सुरक्षा चक्र के अंदर लाने के लिए प्रयासरत है और इसमें प्रगति हुई है. पूरे टीकाकरण कार्यक्रम को समुदाय के अंतिम छोर तक पहुंचाने में अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका सबसे अहम् है. विकट परिस्थितियों में अपने कार्यं को संपादित कर इन कर्मियों ने मिसाल पेश की है. विभाग द्वारा 865 एएनएम की नियुक्ति की है जिससे शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान को बल मिला है.
बूस्टर डोज प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जरुरी:
डॉ. एन.के.सिन्हा ने बताया कि जो व्यक्ति दोनों डोज ले चुके हैं और दुसरे डोज के बाद 9 महीने की अवधि पूरी हो चुकी है वे जरुर जाकर बूस्टर डोज लगवाएं. बूस्टर डोज व्यक्ति के प्रतिरोधक क्षमता को बरक़रार रखता है और शरीर को कोविड के किसी भी संक्रमण से लड़ने में मजबूती प्रदान करता है. उन्होंने प्रश्न के जवाब में बताया कि चमकी बुखार से बचने के लिए बताये गए सावधानियों को पूरी तरह अपनाकर ही हम “चमकी को धमकी” दे सकते हैं.
कोविड टीकाकरण को लेकर जागरूकता जरुरी:
वेबिनार को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशक पियूष परांजपे ने कहा कि अभी भी समुदाय में कोविड के टीका को लेकर कुछ भ्रांतियां व्याप्त हैं. राष्ट्रीय सेवा योजना के वालंटियर्स लोगों को जागरूक कर बता रहे हैं की कोविड का टीका उनके सुरक्षा के लिए है और इससे वे कोविड संक्रम से सुरक्षित रहेंगे. नेहरु युवा केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक अंशुमन दास ने बताया कि नेहरु युवा केंद्र के वालंटियर्स लोगों को सभी टीकाकरण कार्यक्रम एवं अभियान के लिए जागरूक कर रहे हैं और उन्हें आगे आकार टीकाकरण कार्यक्रम में अपनी भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
टीकाकरण देता है 12 जानलेवा बिमारियों से सुरक्षा:
वेबिनार को संबोधित करते हुए यूनिसेफ की तरफ से डॉ. सिद्धार्थ रेड्डी ने बताया कि नियमित टीकाकरण किसी भी शिशु को 12 जानलेवा बिमारियों से सुरक्षित रखता है. उन्होंने नियमित टीकाकरण के अंतर्गत दिए जाने वाले टीकों के चार्ट को भी प्रतिभागियों के साथ साझा किया. यूनिसेफ के डॉ. निर्भय नाथ मिश्रा ने बताया की सभी भ्रामक बातों को दरकिनार कर टीकाकरण करवाने के लिए जागरूकता पर बल देना चाहिए.
वेबिनार का संचालन निपुण गुप्ता, संचार विशेषग्य, यूनिसेफ ने किया और कहा कि किशोर/किशोरी एवं युवा वर्ग के लोग आने वाले सघन मिशन इन्द्रधनुष 4.0 में गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को टीकाकरण करवाने में जागरूकता को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं