सुरक्षित प्रसव एप और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर सीएचओ को दिया जाएगा प्रशिक्षण

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– जूम एप के माध्यम से जिले सभी सीएचओ को ऑनलाइन दिया जाएगा प्रशिक्षण
– मातृ स्वास्थ्य के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने पत्र जारी कर  सिविल सर्जन को दिए आवश्यक निर्देश
लखीसराय, 27 अप्रैल-
सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए शासन-प्रशासन हर स्तर पर गंभीर और सजग है। जिसे सुनिश्चित करने को हर जरूरी फैसले भी लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जिले के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर तैनात नवनियुक्त सीएचओ (सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी) को सुरक्षित प्रसव एवं और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण जूम एप के माध्यम से ऑनलाइन दिया जाएगा। जिसमें सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित प्रसव एप संचालन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण की सफलता को लेकर मातृ स्वास्थ्य के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डाॅ सरिता ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें शत-प्रतिशत प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को कहा है।
– शत-प्रतिशत प्रतिशत प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को लेकर दिए गए हैं निर्देश :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जिले के सभी नवनियुक्त सीएचओ को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी प्रशिक्षित सीएचओ सुरक्षित प्रसव एप का बेहतर तरीके से संचालन कर सकें और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। वहीं, उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में शत-प्रतिशत प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। जिसमें सभी को अपने-अपने स्तर से जरूरी पहल करने को कहा गया है।
– 28 अप्रैल को जिले के नवनियुक्त सीएचओ को दिया जाएगा प्रशिक्षण :
डीपीएम मोहम्मद खालिद हुसैन ने बताया, उक्त प्रशिक्षण तीन बैच में दिया जाएगा। जो 27 से 29 अप्रैल तक जूम एप के माध्यम से ऑनलाइन दिया जाएगा। जिले के सीएचओ को 28 अप्रैल को प्रशिक्षण दिया जाएगा। शत-प्रतिशत प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को लेकर सभी प्रतिभागी को प्रशिक्षण में शामिल होने को कहा गया है। वहीं, उन्होंने बताया, प्रशिक्षण की सफलता को लेकर जरूरी तैयारी की गई है। ताकि प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी प्रतिभागी सुविधाजनक तरीके से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।

लू व गर्म हवाओं से बचने के विभिन्न उपायों को अपनाना जरूरी

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– राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने जारी की एडवाइजरी
मुंगेर, 27 अप्रैल। इन दिनों बढ़ती गर्मी के साथ गर्म हवाओं का चलना काफी कष्टकारक होने के साथ ही नुकसानदेह भी है। इस स्थिति में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आपदा एवं प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार के द्वारा राज्य के गर्मी प्रभावित इलाकों में लू व गर्म हवाओं से बचने के लिए आवश्यक एडवाइजरी जारी की गई है। विभाग के द्वारा जिलों से प्रत्येक दिन लू व गर्म हवाओं से प्रभावित मरीजों के आंकड़ों की मांग भी की गई है। सामान्यतः गर्मी के दिनों में तेज धूप और लू के थपेड़ों से लोग परेशान होते हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव मानव शरीर पर भी पड़ता जो कभी- कभी जानलेवा भी साबित हो सकता है। इस संबंध में सरकार द्वारा जारी की गई एडवाइजरी में बताए गए विभिन्न उपायों का पालन कर गर्म हवाओं व लू के प्रतिकूल प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
गर्म हवाएं/लू से बचने के लिए क्या करें-
प्रभारी सिविल र्सजन डा. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि मुंगेर में लू व गर्म हवाओं का चलना जारी है। ऐसे में गर्म हवाओं व लू से बचने के लिए सभी लोगों के द्वारा निम्न उपायों का किया जाना आवश्यक है :
– जहां तक संभव हो कड़ी घूप में बाहर न निकलें ।
– जितनी बार हो सके पानी पीयें, बार-बार पानी पीयें।
– सफर कर रहे हों तो अपने साथ पीने का पानी हमेशा रखें।
– घरों से बाहर खाली पेट न निकलें।
– ढीले-ढाले व सूती कपड़ों का उपयोग करें।
– सिर ढकने के लिए गीले गमछे का प्रयोग करें।
– अधिक तापमान में परिश्रमी कामों से बचें।
– आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
– मौसमी फलों यथा- तरबूज, खीरा, ककड़ी, खरबूजा, संतरा आदि के सेवन को प्राथमिकता दें।
– शरीर में तरल की मात्रा बनाये रखने के लिए घर में बने पेय पदार्थों जैसे- लस्सी, छाछ, नमक-चीनी का घोल, नींबू-पानी, आम का पन्ना, शर्बत आदि का उपयोग करें।
– गर्म पेय पदार्थों एवं प्रोटीनयुक्त भोजनों के सेवन से बचें।
– विश्वसीनय सूत्रों से मौसम पूर्वानुमान एवं तापमान परिवर्त्तन संबंधी अद्यतन जानकारियों से अवगत होते रहें।
– रात्रि विश्राम के लिए हवादार कमरों का उपयोग करें।
– तबीयत ठीक न लगे या चक्कर आये तो नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रों पर जाकर या निकटम उपलब्ध चिकित्सकों से सम्पर्क करें।
लू लगने पर क्या करें-
उन्होंने बताया कि लू से प्रभावित व्यक्ति के प्राथमिक तौर पर बचाव के निम्न उपाय करें-
– लू से प्रभावित व्यक्ति को छांव में लिटायें, हो सके तो शरीर पर तंग कपड़ों को ढीला करें या हटा दें।
– ठंडे गीले कपड़ों से शरीर को पोछें या ठंडे पानी से नहलायें।
– शरीर का तापमान कम करने के लिए कूलर, पंखे आदि का प्रयोग करें।
– गर्दन, पेट एवं सिर पर बार-बार गीला तथा ठंडा कपड़ा रखें।
– प्रभावित व्यक्ति को ओ.आर.एस./नींबू-पानी नमक चीन का घोल, छाछ या शर्बत पीने को दें, जिससे शरीर में जल की मात्रा को बढ़ा सकें।
– प्रभावित व्यक्ति यदि पानी की उल्टियां करें या बेहोश हो तो उसे कुछ भी खाने-पीने को न दें।
– हालात में आवश्यक सुधार न आये तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रों पर ले जायें।
उन्होंने बताया कि गर्म हवायें व लू न केवल आदमियों के लिए बल्कि जानवरों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में अपने पालतू जानवरों का भी ख्याल रखें। उन्हें छायेदार स्थानों पर रखें, समय-समय पर पानी पिलाते रहें।

टीबी मरीज नियमित रूप से खाएं दवाः डॉ. फिरोज

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-दवा खाने के दौरान होने वाली परेशानियों का बताया गया समाधान
-गोराडीह पीएचसी में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक आयोजित
भागलपुर, 27 अप्रैल-
गोराडीह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में बुधवार को टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक हुई। बैठक में टीबी मरीज, उनकी देखभाल करने वाले, टीबी चैंपियन और स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे। इस दौरान मरीजों को दवा खाने के दौरान क्या-क्या परेशानी होती है, उसका समाधान डॉ फिरोज ने बताया। इस दौरान सभी टीबी मरीजों को नियमित रूप से खाने की सलाह दी गई और और सही पोषण पर चर्चा की गई। बैठक का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन सोसाइटी (केएचपीटी) द्वारा किया गया। बैठक में केएचपीटी के दीपक कुमार भी शामिल हुए। आयोजन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सहयोग किया गया।
डॉ. फिरोज ने कहा कि टीबी मरीजों से समाज के लोगों को किसी तरह का भेदभाव नहीं करनी चाहिए। लोगों को टीबी मरीजों के इलाज में सहयोग करना चाहिए। अगर हमलोग इलाज में सहयोग करेंगे तो जल्द-से-जल्द समाज टीबी से मुक्त होगा। इसलिए मरीजों के इलाज के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। जागरूक लोगों को टीबी मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बात करनी चाहिए। मानसिक तौर पर मरीजों का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने टीबी मरीजों से कहा कि यह एक संचारी रोग है, जो एक से दूसरे व्यक्ति में ड्रॉपलेट के जरिये आसानी से फैलता है। इसलिए टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं। जांच में अगर पुष्टि हो जाती है तो दवा का सेवन शुरू कर दें। टीबी का इलाज सरकार की तरफ से बिल्कुल ही मुफ्त है और यह सभी तरह के सरकारी अस्पताल में होता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी इसके समुचित इलाज की व्यवस्था है। यदि किसी को दो सप्ताह तक लगातार खांसी हो या फिर खांसी में खून आने लगे, बुखार और कफ आने की शिकायत हो तो तत्काल जांच कराएं।
जिनके घर में मधुमेह के मरीज, वे रहें सावधानः बैठक के दौरान डॉ. फिरोज ने कहा कि आजकल अधिकतर घरों में मधुमेह के मरीज देखे जा रहे हैं। इस वजह से लोग संतुलित आहार लेते हैं। लोग पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं ले पाते हैं। इससे भी लोग टीबी की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसलिए अगर किसी के घर में मधुमेह के मरीज हों तो डॉक्टर से पूछकर अपना आहार तालिका बनाएं, ताकि कुपोषण का शिकार होने से बचें और टीबी जैसी बीमारी से बचाव हो सके।
बच्चों के पोषण पर दें ध्यानः डॉ. फिरोज ने बताया कि टीबी को लेकर बच्चों को काफी सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चे के पोषण में अगर कमी हो जाए तो उसे आसानी से टीबी अपनी चपेट में ले लेता है। इसलिए कम बच्चे ही अच्छे होते हैं। अगर आपके कम बच्चे होंगे तो उसका सही से ध्यान रख पाएंगे। उसके पोषण के प्रति जागरूक रहेंगे और वह टीबी समेत दूसरी बीमारियों से बचा रहेगा।
ये हैं टीबी के लक्षण
1. दो हफ़्ते या अधिक खांसी आना- पहले सूखी खांसी तथा बाद में बलगम के साथ खून का आना।
2. रात में पसीना आना-चाहे मौसम ठंढे का क्यों न हो।
3. लगातार बुखार रहना
4.थकावट होना
5.वजन घटना
6.सांस लेने में परेशानी होना
बचाव के तरीके
1. जांच के बाद टीबी रोग की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें।
2. मास्क पहनें तथा खांसने या छींकने पर मुंह को पेपर नैपकीन से कवर करें।
3.मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें।
4.मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहें। एसी से परहेज करें।
5. पौष्टिक खाना खाएं। योगाभ्यास करें।
6. बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तम्बाकू, शराब आदि से परहेज करें।
7.  भीड़भाड़ वाली गंदी जगहों पर जानें से बचें।

सरकारी सुविधाएं मिलीं तो टीबी को मात देकर हो गए स्वस्थ्य 

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-शंभूगंज प्रखंड के तेलडीहा गांव के रहने वाले अटल झा ने दी टीबी को मात
-अब दूसरे लोगों को भी टीबी बीमारी से लड़ने को लेकर कर रहे हैं जागरूक
बांका, 27 अप्रैल-
जिले के शंभूगंज प्रखंड के तेलडीहा गांव के रहने वाले अटल झा टीबी की चपेट में आ गए थे। शुरुआत में तो वह काफी घबरा गए थे। उनके मन में काफी झिझक हो रही थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बारे में पता लगाना शुरू किया। जब एक दिन उन्हें यह जानकारी मिली टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है और सरकार की तरफ से बिल्कुल ही मुफ्त में इसका इलाज होता है तो वह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जांच कराने के लिए गए, जहां उन्हें टीबी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उनका इलाज शुरू हुआ। सरकार की तरफ से मुफ्त में दवा उन्हें दी गई। बीच-बीच में जांच कराते रहे, जिसमें उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार होता रहा। आखिरकार एक दिन वह स्वस्थ्य हो गए। अब तो वह दूसरे लोगों को भी टीबी से लड़ने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
टीबी को मात देने के लिए जागरूकता बहुत जरूरीः अटल झा कहते हैं कि टीबी को मात देने के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है। लोगों में इस बात की जानकारी होना बहुत जरूरी है कि इसका इलाज संभव है। साथ ही सरकार की तरफ से इसके इलाज की सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। लोगों को जब यह जानकारी रहेगी तो वह टीबी के मरीजों से भेदभाव भी नहीं करेंगे। शुरुआत में मुझे भी इस बात की जानकारी नहीं थी, लेकिन जब मुझे पता चला तो मैंने इलाज करवाया। इसका परिणाम यह है कि आज मैं स्वस्थ्य हूं। इसलिए सरकार की तरफ से तो लोगों को जागरूक किया ही जा रहा है, आमलोगों को भी इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए। लोगों को जागरूक करना चाहिए। अगर कोई टीबी का मरीज मिलता है तो उससे घृणा करने की बजाय उसे अस्पताल भेजना चाहिए और उसका इलाज करवाना चाहिए। सरकार के साथ अगर आमलोग भी अपनी भूमिका निभाएंगे तो बांका जिला 2025 तक जरूर टीबी से मुक्त हो जाएगा।
टीबी को खत्म करने के लिए युद्धस्तर पर चल रहा अभियानः सीडीओ डॉ उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा कहते हैं कि 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त बनाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अब तो टीबी के मरीजों को पौष्टिक आहार के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। साथ में जो टीबी मरीज को इलाज करवाने के लिए लाते हैं और जांच में टीबी की पुष्टि हो जाती है तो उन्हें भी राशि दी जाती है। सरकार की तरफ से टीबी को खत्म करने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चल रहा है। अच्छी बात यह है कि इसमें अब आमलोग भी सहयोग कर रहे हैं। इसका अच्छा परिणाम भी मिल रहा है। टीबी के खात्मे में जनसहयोग का काफी सहयोग मिल रहा है। यानी कि टीबी को खत्म करने के लिए दोतरफा अभियान चल रहा है। एक तरफ सरकार की ओर से चल रहा है तो दूसरी तरफ आमलोग भी इसमें भागीदारी कर रहे हैं।

संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलेगा बढ़ावा

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– सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा के हर मानकों का रखा जाता है ख्याल
– प्रसव के दौरान नहीं करें लापरवाही, छोटी सी लापरवाही भी बन सकती है बड़ी परेशानी का सबब
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए चलाऐ जा रहे हैं विभिन्न कार्यक्रम
लखीसराय, 26 अप्रैल-
प्रसव के दौरान गर्भवती एवं उनके परिजनों को किसी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि, गर्भावस्था के अंतिम दौर यानी प्रसव के वक्त छोटी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की जरूरत है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। इसलिए, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने के लिए सुरक्षा के मद्देनजर किसी प्रकार की संकोच नहीं करें और संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता दें। इससे न सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी कमी आएगी। हर महिला को गर्भधारण के साथ ही मन में सामान्य और सुरक्षित प्रसव को लेकर तरह-तरह के सवाल उठते हैं। दरअसल, हर महिला सामान्य और सुरक्षित प्रसव चाहती है। किन्तु, यह तभी संभव है जब संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दी जाएगी। क्योंकि, वहाँ प्रशिक्षण प्राप्त योग्य एएनएम एवं चिकित्सकों को मौजूदगी में प्रसव कराया जाता है।  इस दौरान किसी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत आवश्यक व्यवस्था की जाती है।
– पुरानी ख्यालातों और अवधारणाओं से बाहर आने की जरूरत, संस्थागत प्रसव की बेहतर व्यवस्था :
 सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित प्रसव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर समुचित व्यवस्था उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्रसव के बाद महिलाओं को स्वस्थ्य एवं शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जाती है। ताकि प्रसव के पश्चात भी माता एवं शिशु को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और होने पर तुरंत आवश्यक चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जा सके। इसलिए, मैं तमाम महिलाओं एवं उनके परिवार वालों से पुराने ख्यालातों और मन में चल रहे तरह-तरह की अवधारणाओं से बाहर सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की अपील करता हूँ। साथ ही ग्रामीण चिकित्सक एवं दाई से भी इसके लिए सकारात्मक सहयोग की अपील करता हूँ।
– सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच है जरूरी :-
शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जाँच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जाँच के प्रति महिलाओं की जागरूकता न सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती  बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
– जिले सभी पीएचसी में होती प्रसव पूर्व मुफ्त जाँच :-
सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच हर माह की नौ तारीख को सभी पीएचसी एवं सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आदि कार्यक्रम के माध्यम से एनेमिक गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही है । साथ ही सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही। इसके साथ ही अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जाँच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए सभी एएनएम एवं आशाओं का क्षमतावर्धन भी किया गया है। गर्भवती महिलाओं की चारों प्रसव पूर्व जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती है। साथ ही संभावित जटिलताओं का पता चलता है। लक्षणों के मुताबिक जरूरी चिकित्सीय प्रबंधन किया जाता है ताकि माता और उसके शिशु दोनों स्वस्थ रहें।
– इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और दूसरों को जागरूक करें।
– बाहर निकलने पर सैनिटाइजर जरूर पास में रखें।
– बाहर का खाना खाने से बचें और जहाँ सुरक्षा के मानकों का ख्याल नहीं रखा जाता हो वहाँ बिलकुल नहीं खाएँ।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

विश्व मलेरिया दिवस पर  रैली निकली,लोगों को मलेरिया से बचाव को किया गया जागरूक 

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– जिले के विभिन्न विद्यालयों में  निकाली गई प्रभात फेरी
– मलेरिया के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी देकर लोगों किया जागरूक
खगड़िया, 25 अप्रैल-
सोमवार को विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जिलेभर में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को मलेरिया से बचाव के लिए जागरूक किया गया। रैली निकालकर सामुदायिक स्तर पर मलेरिया उन्मूलन का संदेश पहुँचाया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न विद्यालयों में भी प्रभात फेरी निकाली गई। जिसके माध्यम से लोगों को मलेरिया उन्मूलन के लिए जागरूक किया गया। इस दौरान मलेरिया से संबंधित विभिन्न प्रकार के स्लोगन पर बल देकर लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही उक्त कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को मलेरिया से बचाव सहित इसके कारण, लक्षण एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई और सामुदायिक स्तर पर लोगों को इससे बचाव के लिए जागरूक भी किया गया। वहीं, इस अवसर पर सदर पीएचसी खगड़िया में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन की अध्यक्षता में शपथ समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मौजूद सभी पदाधिकारी एवं कर्मियों ने मलेरिया मुक्त समाज निर्माण का संकल्प लिया। इस मौके पर केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार, प्रखंड प्रबंधक रेणुका कुमारी आदि मौजूद थी।
– जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मलेरिया मुक्त समाज निर्माण की ली गयी शपथ :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में सोमवार को शपथ समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें सभी स्वास्थ्य संस्थानों के पदाधिकारी एवं कर्मियों द्वारा मलेरिया मुक्त समाज निर्माण की शपथ ली गई और इस बीमारी से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने, जरूरी जानकारी देने समेत अन्य जरूरी निर्णय भी लिये गये।
– किसी आयु वर्ग के लोग मलेरिया से हो सकते हैं पीड़ित :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, मलेरिया प्लाजमोडियम नामक परजीवी से संक्रमित मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया एक प्रकार का बुखार है जो किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। इसमें कपकपी के साथ 103 से लेकर 105 डिग्री तक बुखार होता है। कुछ घंटों के बाद पसीने के साथ बुखार उतर जाता है, लेकिन बुखार आते-जाते रहता है। फेलसीपेरम मलेरिया (दिमारी मलेरिया) की अवस्था में तेज बुखार होता है। खून की कमी हो जाती है। बुखार दिमाग पर चढ़ जाता है। फेफड़े में सूजन हो जाती है। पीलिया एवं गुर्दे की खराबी फेलसीपेरम मलेरिया की मुख्य पहचान है।
– मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरदानी का करें प्रयोग : मलेरिया से बचाव के लिए पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े का अधिक उपयोग करें। सोने के दौरान निश्चित रूप से मच्छरदानी लगाएं। इस बात का सोने के दौरान ख्याल रखें। इसके अलावा घर के आसपास जलजमाव वाली जगहों को मिट्टी से भर दें एवं किसी भी कीमत पर जलजमाव नहीं होने दें। जलजमाव वाले स्थान पर केरोसिन तेल या डीजल डालें। घर के आसपास बहने वाली नाले की साफ-सफाई करते रहें।

विश्व मलेरिया दिवस • जिले में प्रभात फेरी निकालकर लोगों को मलेरिया से बचाव के लिए किया गया जागरूक 

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– जिले के विभिन्न विद्यालयों बच्चों को किया गया जागरूक
– मलेरिया के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी देकर लोगों किया जाएगा जागरूक
लखीसराय, 25 अप्रैल।
विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर सोमवार को जिलेभर में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को मलेरिया से बचाव के लिए जागरूक किया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न विद्यालयों में प्रभात फेरी निकाली गई। जिसके माध्यम से लोगों को मलेरिया उन्मूलन के लिए जागरूक किया गया। इस दौरान जन-जन का यही नारा है, मलेरिया मुक्त जिला हो हमारा, दूर होगी मलेरिया की बीमारी, जब हम सबकी होगी भागीदारी, मलेरिया से अपने परिवार को बचाओ, मच्छरदानी अपनाओ आदि स्लोगन और नारे के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही उक्त कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को मलेरिया से बचाव सहित इसके कारण, लक्षण एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई और सामुदायिक स्तर पर लोगों को इससे बचाव के लिए जागरूक भी किया जाएगा। वहीं, इस अवसर पर सदर अस्पताल परिसर में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राकेश कुमार की अध्यक्षता में शपथ समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मौजूद सभी पदाधिकारी एवं कर्मियों ने मलेरिया मुक्त समाज निर्माण का संकल्प लिया। इस मौके पर एसीएमओ सह डीआईओ डाॅ अशोक कुमार भारती, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी भगवान दास, गौतम प्रसाद आदि मौजूद थे।
– जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों में मलेरिया मुक्त समाज निर्माण का लिया गया शपथ :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में सोमवार को शपथ समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें सभी स्वास्थ्य संस्थानों के पदाधिकारी एवं कर्मियों द्वारा मलेरिया मुक्त समाज निर्माण का शपथ ली गई और इस बीमारी से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने, जरूरी जानकारी देने समेत अन्य जरूरी निर्णय भी लिये गये।
– किसी आयु वर्ग के लोग मलेरिया से हो सकते हैं पीड़ित :
एसीएमओ सह डीआईओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, मलेरिया प्लाजमोडियम नामक परजीवी से संक्रमित मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया एक प्रकार का बुखार है जो किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। इसमें कपकपी के साथ 103 से लेकर 105 डिग्री तक बुखार होता है। कुछ घंटों के बाद पसीने के साथ बुखार उतर जाता है, लेकिन बुखार आते-जाते रहता है। फेलसीपेरम मलेरिया (दिमारी मलेरिया) की अवस्था में तेज बुखार होता है। खून की कमी हो जाती है। बुखार दिमाग पर चढ़ जाता है। फेफड़े में सूजन हो जाती है। पीलिया एवं गुर्दे की खराबी फेलसीपेरम मलेरिया की मुख्य पहचान है।
– मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरदानी का करें प्रयोग : मलेरिया से बचाव के लिए पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े का अधिक उपयोग करें। सोने के दौरान निश्चित रूप से मच्छरदानी लगाएं। इस बात का सोने के दौरान ख्याल रखें। इसके अलावा घर के आसपास जलजमाव वाली जगहों को मिट्टी से भर दें एवं किसी भी कीमत पर जलजमाव नहीं होने दें। जलजमाव वाले स्थान पर केरोसिन तेल या डीजल डालें। घर के आसपस बहने वाली नाले की साफ-सफाई करते रहें।

टीबी मरीजों को चिह्नित करने के काम में तेजी लाने का निर्देश

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-जिलाधिकारी के नेतृत्व में टीबी फोरम की हुई बैठक
-फोरम में शामिल सदस्यों ने बैठक में की शिरकत
बांका, 26 अप्रैल-
जिलाधिकारी डॉ. सुहर्ष भगत के नेतृत्व में मंगलवार को जिला टीबी फोरम की बैठक हुई। बैठक में डीडीसी, एसीएमओ और सीडीओ समेत सदस्य और अधिकारी शामिल हुए। बैठक में 2025 तक जिला को टीबी से मुक्त करने को लेकर चर्चा की गई। इसे लेकर टीबी मरीजों के चिह्नित और उसके इलाज की दिशा में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। बैठक में मौजूद एसीएमओ और प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि टीबी को लेकर जिले में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उसे और तेज करने के लिए कहा गया। लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने के बारे में चर्चा हुई। लोगों में टीबी के प्रति जितनी जागरूकता बढ़ेगी, उतनी ही तेजी से समाज टीबी मुक्त होगा। इसलिए टीबी मरीजों को चिह्नित करने और जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया गया।
 सीडीओ डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा ने बताया कि जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने के लिए हमलोग प्रयासरत हैं। इसे लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को टीबी से बचने के लिए सलाह दी जा रही है। लोग उस पर अमल करें। उन्होंने कहा कि टीबी से बचाव के लिए सही पोषण भी जरूरी है। अगर सही पोषण नहीं मिलेगा तो लोग कुपोषण के शिकार हो जाएंगे और उस पर टीबी की चपेट में आने का खतरा रहता है। इसलिए लोगों को संतुलित आहार लेना चाहिए। आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और मिनरल्स की मात्रा जरूर होनी चाहिए। डॉ. सिन्हा ने कहा कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता है और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे  और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः सीडीओ कहते हैं कि टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
बीच में नहीं छोड़ें दवाः सीडीओ कहते हैं कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते  और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।

छूटे हुए बच्चों को खिलाई गई अल्बेंडाजोल की गोली

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-अल्बेंडाजोल की दवा खिलाने के लिए चलाया गया मॉपअप राउंड
-जिले के 12,10,586 बच्चों को दवा खिलाने का रखा गया है लक्ष्य
बांका, 26 अप्रैल-
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के मौके पर 22 अप्रैल को बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई थी। उस दिन जो बच्चे छूट गए थे, उसके लिए मंगलवार को मॉपअप राउंड चलाया गया। मॉपअप राउंड के दौरान एक से 19 साल तक के बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलाई गई। मालूम हो कि कृमि मुक्ति अभियान के तहत जिले के 12,10,586 बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी के तहत शुक्रवार और मंगलवार को बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में यह अभियान चलाया गया । आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम ने इस अभियान को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि एक से 19 साल तक के बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलाई गई। दो साल तक के बच्चों को अल्बेंडाजोल की आधी गोली खिलाई गई और उससे अधिक उम्र के लोगों को पूरी गोली खिलाई गई। यह अभियान आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में चला। अल्बेंडाजोल की दवा बच्चों को चबाकर खाने की सलाह दी गई। इस दवा का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। शुक्रवार को जो बच्चे छूट गए थे, उनके लिए मंगलवार को मॉपअप राउंड चलाया गया।
पेट की बीमारियों से होगा बचावः एसीएमओ ने बताया कि बच्चों को दवा खिलाने का मुख्य उद्देश्य पेट से संबंधित बीमारियों से उसका बचाव करना है। बच्चों को उम्र के अनुसार खुराक दी गई। इसे लेकर व्यापक तैयारी की गई थी। कृमि के कारण बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होती है। कृमि से मुक्ति के लिए जिले के 01 से 19 साल तक के सभी बच्चों के लिये कृमिनाशक दवा का सेवन जरूरी है। इसके सेवन से बच्चे पेट के कई रोग, कुपोषण सहित अन्य बीमारियों से सुरक्षित होते हैं। निर्धारित समय पर कृमिनाशक दवा का सेवन जरूरी है। इससे शरीर के अंदर पल रहे कृमि नष्ट हो जाते हैं। कृमि की दवा खाने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि यह शरीर को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। बीमार बच्चों को दवा का सेवन नहीं कराया जाना है।
गोली खिलाते वक्त बरती गई सावधानीः एसीएमओ ने बताया कि छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाते समय कुछ सावधानी भी बरती गई। अगर किसी बच्चों की कोई गम्भीर बीमारी का इलाज चल रहा  और वह नियमित रूप से दवा खा रहा था तो उसे गोली नहीं खिलाई गई। कोई भी बच्चा सर्दी, खांसी, बुखार या फिर उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी तो उसे भी दवा नहीं खिलाई गई। दवा खिलाते समय इस बात का ध्यान रखा जा रहा था कि बच्चे दवा को चबाकर खाएं।

सुरक्षित प्रसव एप और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को ले हेल्थ एंड  वेलनेस सेंटर के सीएचओ की होगी ऑनलाइन ट्रेनिंग

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– 28 अप्रैल को दोपहर 3 से 6 बजे के बीच ज़ूम एप  की मदद से होगी ट्रेनिंग
– राज्य स्वास्थ्य समिति मातृ स्वास्थ्य संकाय की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने सिविल सर्जन को जारी की चिट्ठी
मुंगेर, 25 अप्रैल। मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आगामी 28 अप्रैल को दोपहर 3 से 6 बजे के दौरान ज़ूम एप की मदद से सेफ डिलीवरी एप और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को लेकर जिला के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) की एकदिवसीय ट्रेनिंग होगी। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार (मातृ ) की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सरिता ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को चिट्ठी जारी की है।
मुंगेर के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति से प्राप्त निर्देश के अनुसार जिला के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी को मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सेफ डिलीवरी एप एवं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) पर राज्य स्वास्थ्य समिति और जपाइगो की मदद से ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी।  स्टेट हेल्थ सोसाइटी में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम की स्टेट प्रोगमिंग ऑफिसर डॉ. सरिता और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के स्टेट प्रोग्रामिंग ऑफिसर डॉ. अजय शशि, जपाइगो के प्रतिनिधि के अलावा मैटरनल हेल्थ के एक्सपर्ट सभी सीएचओ को ट्रेनिंग देंगे। इस दौरान ट्रेनिंग में उपस्थित सभी सीएचओ को नार्मल लेबर और बर्थ, न्यू नेटल रेस्युसीएशन, इनिशियल मैनेजमेंट ऑफ कॉम्प्लिकेशन, आइडेंटिफिकेशन ऑफ डेंजर साइन ऑफ न्यू बोर्न और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी एंड पीएमएसएमए सहित कई तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि 28 अप्रैल  को मुंगेर जिला के अलावा  मुंगेर प्रमंडल के लखीसराय, जमुई और खगड़िया सहित कुल 13 जिला के कुल 868 सीएचओ को सेफ डिलीवरी एप और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी विषय पर ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं मुंगेर प्रमंडल के बेगूसराय जिला के सीएचओ को 27 अप्रैल और शेखपुरा जिला के सीएचओ को 29 अप्रैल को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी।