अमरपुर रेफरल अस्पताल में लगा स्वास्थ्य मेला

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-500 लोगों ने मेला में करवाई अपनी स्वास्थ्य जांच व इलाज
-बिहार सरकार के मंत्री जयंत राज ने किया मेले का उद्घाटन
बांका, 21 अप्रैल-
अमरपुर रेफरल अस्पताल में गुरुवार को स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया गया। उद्घाटन बिहार सरकार के मंत्री जयंतराज कुशवाहा ने किया। इस दौरान उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से स्वास्थ्य मेला का लाभ उठाने की अपील की। मंत्री ने मेला में लगे सभी स्टॉल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि इस तरह का आयोजन लोगों में जागरूकता लाने के लिए किया जाता है, ताकि लोग यह जान सकें कि स्वास्थ्य विभाग लोगों के लिए कितनी सुविधाएं दे रहा है। इसका लोग लाभ उठाएं। मेला में लगभग सभी तरह की बीमारियों से संबंधित जांच और इलाज के लिए काउंटर बनाए गए थे। जहां पर की लोगों ने अपनी स्वास्थ्य जांच और इलाज करवाया। कुल 500 लोगों ने मेले में स्वास्थ्य लाभ उठाया। मेला में आने वाले लोगों का पहले रजिस्ट्रेशन किया गया। इसके बाद जांच और जरूरत पड़ने पर इलाज और दवा भी दी गई।
रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि मेला को लेकर तैयारी काफी पहले से चल रही थी। लोगों के जरिये इसका प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा था। स्वास्थ्य मेला का लाभ अधिक से अघिक लोग ले सकें, इसे लेकर काफी प्रयास किए गए थे। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को इसकी जानकारी दे रही थीं। इसी का परिणाम रहा कि इतनी संख्या में लोग अपना इलाज करवाने के लिए आए। लगभग हर तरह की बीमारियों के इलाज के लिए स्टॉल लगाए हुए थे। लोगों की जांच के बाद जरूरत पड़ने पर इलाज किया जा रहा था और दवा भी दी जा रही थी। मेला के दौरान लोगों की बीपी से लेकर ब्लड जांच तक की गई। आयुष्मान कार्ड बनाया गया तो टेलीकंसल्टेशन के जरिये भी लोगों को स्वास्थ्य को लेकर सलाह दी गई। टीबी की स्क्रीनिंग को लेकर लोगों के सैंपल लिए गए। जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद उनलोगों को भी जरूरत के हिसाब से सलाह दी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर इलाज भी किया जाएगा।
परिवार नियोजन के स्टॉल पर उमड़े लोगः स्वास्थ्य मेला के दौरान परिवार नियोजन का काउंटर आकर्षण का केंद्र रहा। इस स्टॉल पर लोगों को अस्थाई सामग्री के वितरण के साथ-साथ परिवार नियोजन को लेकर काउंसिलिंग भी की जा रही थी। लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया जा रहा था। इसके लिए अस्थायी संसाधनों के इस्तेमाल पर लोगों को प्रोत्साहित भी किया गया। इसके अलावा मेला में पोषण स्टॉल पर भी अच्छी खासी भीड़ देखी गई। लोग महिलाओं और बच्चों से संबंधित पोषण के बारे में जानकारी ले रहे थे। पोषण स्टॉल पर लोगों को बच्चों के सही पोषण के बारे में बताया जा रहा था। खासकर नवजात को छह माह तक मां के दूध का ही सेवन करने की सलाह दी जा रही थी। इसके अलावा गर्भवती और धातृ महिलाओं को अधिक से अधिक प्रोटीन लेने की सलाह दी जा रही थी।

फाइलेरिया उन्मूलन मुहिम को मिलेगी गति, राज्य के 6 जिलों में होगा नाईट ब्लड सर्वे

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• रात्रि रक्त सर्वेक्षण को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन
• जिलों के लैब तकनीशियन एवं भीबीडी पदाधिकारी प्रशिक्षण में हुए शामिल
पटना/20, अप्रैल:
फाइलेरिया उन्मूलन को गति देने की मुहिम तेज कर दी गयी है. इसको लेकर बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन के पटना स्थित कार्यालय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान फाइलेरिया संक्रमण की स्तिथि की पहचान के लिए नाईट ब्लड सर्वे यानी रात्रि रक्त सर्वेक्षण पर प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी दी गयी. राज्य के 6 जिलों में नाईट ब्लड सर्वे का आयोजन किया जाना है. जिसमें नवादा, नालंदा, लखीसराय, दरभंगा, समस्तीपुर और रोहतास जिले शामिल हैं. इन जिलों में मई के प्रथम दो सप्ताह में नाईट ब्लड सर्वे संबंधित गतिविधि पूरा किया जाएगा. इस दौरान लैब तकनीशियन एवं वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल के अधिकारी भी मौजूद थे. प्रशिक्षण का संचालन अपर निदेशक सह फाइलेरिया के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. विपिन कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में हुआ.
लैब तकनीशियन की संपूर्ण जानकारी जरुरी:
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के  राज्य समन्वयक डॉ. राजेश पांडेय  द्वारा प्रशिक्षण दिया गया. उन्होंने नाईट ब्लड सर्वे की सफलता के लिए लैब तकनीशियन की निपुणता को अहम बताया. उन्होंने नाईट ब्लड सर्वे करने की सही विधि एवं इसकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी भी दी. उन्होंने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए नाईट ब्लड सर्वे के द्वारा फाइलेरिया परजीवी की मौजूदगी  जानना सबसे महत्वपूर्ण सूचकांक है. इसके लिए चिन्हित गाँव एवं शहरी क्षेत्रों में रात्रि यानी 8.30 से 12 के बीच में नाईट ब्लड सर्वे करना जरुरी है एवं इस सर्वे में अधिकतम लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित करना भी जरुरी है.
सर्वे की पूरी तैयारी करने पर जोर:
प्रशिक्षण का संचालन फाइलेरिया के राज्य सलाहकार डॉ. अनुज रावत ने किया. साथ ही डॉ. रावत ने नाईट ब्लड सर्वे के लिए चिन्हित जिलों को नाईट ब्लड सर्वे से संबंधित जानकारी एवं अन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान की जरुरत पर बल दिया. इससे  संबंधित सभी 6 जिलों को एक आधिकारिक पत्र जारी करने का भी निर्देश दिया गया.
इस दौरान सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च  सहित केयर इण्डिया एवं लेप्रा के अधिकारी भी मौजूद रहें एवं कार्यक्रम को सफ़ल बनाने में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने की बात कही.

बढ़ते तापमान व गर्म तेज हवाओं से शरीर को सुरक्षित रखना जरूरी

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– गर्म हवाओं के कारण लू लगने की बढ़ जाती है संभावना,

चिकित्सीय परामर्श जरूरी – ओआरएस का घोल पिलाने से होता है डिहाइड्रेशन से बचाव

मुंगेर, 20 अप्रैल-

जिला में पिछले कुछ दिनों से लगातार तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है। वहीं, गर्म हवाओं के थपेड़ों के कारण दोपहर में सड़क पर लोगों का चलना मुश्किल हो गया है। ऐसे मौसम में गर्म हवाओं के कारण लू लगने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती है। बढ़ते तापमान के साथ चलने वाली गर्म तेज हवाओं से शरीर को सुरक्षित रखना आवश्यक है । इसके साथ ही मौसम के अनुकूल शरीर को ढालने के लिए सही और संतुलित खान-पान के साथ दैनिक दिनचर्या में भी बदलाव करना जरूरी है। नवजात शिशुओं एवं गर्भवती महिलाओं के पोषण में सुधार कर गर्मी के दुष्परिणामों से सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। दैनिक दिनचर्या एवं आहार परिवर्तन जरुरी : अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि गर्मी के बढ़ने से पसीना चलना शुरू होता है । जिससे शरीर में पानी की मात्रा में तेजी से कमी आती है। इसलिए इस मौसम में प्रचुर मात्रा में पानी का सेवन करना फायदेमंद है। इसके साथ ही रसदार मौसमी फलों का सेवन भी शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित करने में सहायक होता है। नमक-चीनी का घोल, छाछ, नींबू पानी, आम का शर्बत, लस्सी, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, कच्चे प्याज सत्तु, पुदीना, सौंफ आदि के सेवन के साथ मौसमी फल भी खाना चाहिए। इसके साथ ही हमें अपने शरीर की रक्षा के लिए दैनिक दिनचर्या में भी बदलाव करना जरूरी है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है : – खाली पेट घर से बाहर नहीं निकलें । – सुपाच्य व हल्के भोजन का करें सेवन एवं खूब पानी पीयें । – अत्यधिक शीतल पेय पदार्थों के सेवन करने से बचें । – रात्रि में देर रात तक नहीं जागें एवं कम से कम 8 घन्टे की नींद जरूर लें । – अत्यधिक वजन वाले लोग गर्मी के दिनों में वसा युक्त भोजन सेवन करने से बचें । – हल्के रंग के ढीले ढाले सूती कपड़े पहनें । – धूप के चश्मा के साथ तौलिया/गमछा या छतरी का उपयोग करें। – खाली पैर न घूमें, जूते या चप्पल जरूर पहनें । लू लगे व्यक्ति को ठंडे स्थान पर रखा जाना चाहिए : उन्होंने बताया कि लू लगने के कारण मरीज को मांसपेशियों और मस्तिष्क से जुड़ी समस्या होती है। मस्तिष्क तापमान कंट्रोल नहीं कर पाता है। पसीना चलना बंद हो जाता और शरीर की गर्मी शरीर में ही रहती है। लू लगने पर शरीर को नमक व पानी की जरूरत होती है। लू लगने पर मांसपेशियों में तनाव महसूस होता है। लू लगे व्यक्ति को सबसे पहले ठंंडे स्थान पर रखा जाना चाहिए। मरीज यदि बेहोश नहीं है तो उसे ओरआरएस पिलाना चाहिए। वहीं, मरीज बेहोश हो गया है, तो नॉर्मल स्लाइन देना है। उन्होंने बताया, लू लगने की स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श जरुरी है। ऐसे प्राथमिक उपचार के तौर पर लू लगने पर ओआरएस का घोल पीना चाहिए। ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। इसके इलाज के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में पर्याप्त सुविधा भी उपलब्ध करायी गयी है।

एएनएम, सेविका और आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया एईएस का प्रशिक्षण

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– जिले के शेखपुरा पीएचसी के सभागार हाॅल में एईएस से निपटने को दिया गया प्रशिक्षण
– चमकी से बचाव के लिए तीन धमकियां ; खिलाओ, जगाओ और अस्पताल ले जाओ का पालन जरूरी
शेखपुरा, 20 अप्रैल-
जिले के शेखपुरा पीएचसी परिसर स्थित सभागार हाॅल में मंगलवार की शाम एईएस/जेई (चमकी बुखार/मस्तिष्क ज्वर) के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया । जिसमें पीएचसी की एएनएम और आशा कार्यकर्ता के अलावा प्रखंड की सेविकाओं ने भी भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद सभी कर्मियों को डीभीबीडीसीओ डाॅ अशोक कुमार सिंह द्वारा एईएस से निपटने की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही इस बीमारी से बचाव के अलावा इसके कारण, लक्षण एवं समुचित इलाज की भी जानकारियाँ दी गई।  वहीं, उन्होंने कहा, एईएस/जेई से निपटने और जिले को इससे मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को एकजुट होकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने की जरूरत है। तभी हम इस बीमारी से सुरक्षित रह सकते और हमारा जिला एईएस/जेई मुक्त बन सकता है। इसलिए, मैं प्रशिक्षण में मौजूद सभी प्रतिभागियों से अनुरोध करता हूँ कि सभी लोग एकजुट होकर अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करें। वहीं, उन्होंने कहा, इसके लिए सामुदायिक स्तर पर जन जागरूकता भी जरूरी है। इसलिए, अभियान चलाकर लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूक भी करें और आवश्यक जानकारियाँ भी उपलब्ध कराएं। वहीं, उन्होंने कहा, इसके अलावा जन सहयोग की भी जरूरत है। इसलिए, मैं तमाम प्रखंड वासियों से अपील करता हूँ कि सभी लोग एकजुट होकर इस बीमारी के खिलाफ आगे आएं और इस बीमारी से बचाव के लिए चिकित्सा परामर्श का पालन करें।
– एईएस से बचाव के बच्चों को भी करें जागरूक :
प्रशिक्षण के दौरान मौजूद प्रतिभागियों को एईएस/जेई पर रोकथाम के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार ने कहा, इस बीमारी से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर बच्चों को जागरूक करने की भी जरूरत है। इसलिए, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्रों समेत अन्य संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को चेतना सत्र के तहत एईएस/जेई से बचाव के क्या कराना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए समेत बचाव से संबंधित अन्य जानकारियाँ दें और इस बीमारी के कारण, लक्षण एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दें। ताकि लक्षण महसूस होते ही बच्चे अपने अभिभावकों को अपनी परेशानी से अवगत करा सकें और समय पर संबंधित बच्चों का इलाज शुरू हो सके। क्योंकि, इस बीमारी को मात देने के समय पर इलाज शुरू कराना बेहद जरूरी है।
– चमकी से बचाव के लिए तीन धमकियां का पालन करने के लोगों को करें जागरूक :
प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक धर्मवीर चौधरी ने कहा, चमकी से बचाव के लिए तीन धमकियां का पालन करने के लिए लोगों को जागरूक करें। पहला खिलाओ, दूसरा जगाओ और तीसरा अस्पताल ले जाओ। इसी के तहत बच्चों को रात में बिना खिलाए नहीं सुलाने, सुबह में जगाने और लक्षण महसूस होने पर तुरंत स्थानीय और नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान ले जाने के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करें। वहीं, उन्होंने कहा, मैं तमाम प्रखंड वासियों से भी अपील करता हूँ कि बच्चों को एईएस से बचाने के लिए माता-पिता को शिशु के स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट रहना चाहिए। समय-समय पर देखभाल करते रहना चाहिए। स्वस्थ बच्चों को मौसमी फलों, सूखे मेवों का सेवन करवाना चाहिए। साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चों को माँ का दूध पिलाना बेहद आवश्यक है। अप्रैल से जुलाई तक बच्चों में मस्तिष्क ज्वर की संभावना बनी रहती है। बच्चे के माता-पिता को चमकी (मस्तिष्क) बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच और जाँच के बाद आवश्यक इलाज कराना चाहिए।
– ये है चमकी बुखार के प्रारंभिक लक्षण :
– लगातार तेज बुखार चढ़े रहना।
– बदन में लगातार ऐंठन होना।
– दांत पर दांत दबाए रहना।
– सुस्ती चढ़ना।
– कमजोरी की वजह से बेहोशी आना।
– चिउटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि।
– चमकी बुखार से बचाव के लिए ये सावधानियाँ हैं जरूरी :
– बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें।
–  गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें।
– ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
– रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
– बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
–  पैरासिटामोल की गोली या सिरप दें।

ऑंगनबाड़ी सेविकाओं को दिया गया एनीमिया प्रबंधन पर प्रशिक्षण 

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– जिले के परबत्ता बाल विकास परियोजना कार्यालय में दिया गया प्रशिक्षण
– एनीमिया से बचाव से संबंधित दी गई आवश्यक जानकारी, लोगों को करेंगी जागरूक
खगड़िया, 20 अप्रैल-
जिले के परबत्ता बाल विकास परियोजना कार्यालय परिसर स्थित सभागार हाॅल में बुधवार को प्रखंड की सेविकाओं को एनीमिया प्रबंधन से संबंधित  एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण स्थानीय सीडीपीओ कामिनी कुमारी एवं केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक गोपाल शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद सेविकाओं को एनीमिया से बचाव के लिए विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही एनीमिया के कारण, लक्षण, उपचार एवं इससे बचाव के लिए बरती जाने वाली सावधानियाँ व सतर्कता की भी जानकारी दी गई। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने बाद सभी सेविकाएं अपने-अपने पोषक क्षेत्र के लोगों को बेहतर तरीके से जागरूक कर सकें और एनीमिया मुक्त समाज निर्माण को बढ़ावा मिल सके।
– महिलाओं के बीच सेविका आयरन की गोली करेंगी वितरित :
परबत्ता सीडीपीओ कामिनी कुमारी ने बताया, प्रशिक्षण के दौरान मौजूद सेविकाओं को एनीमिया प्रबंधन से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियाँ विस्तारपूर्वक दी गई। इस दौरान मौजूद सभी प्रतिभागियों को बताया गया कि एनीमिया से बचाव के लिए सभी महिलाओं को जागरूक करना है। भीएचएसएनडी सत्र के दौरान 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की सभी महिलाओं (जो गर्भवती अथवा धात्री न हों) को साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड लाल गोली अनुपूरण के संबंध में जागरूक किया जाएगा एवं सप्ताह में एक दिन के सेवन के लिए वितरित भी की जाएगी।
– एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीन युक्त आहार जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, प्रशिक्षण के दौरान मौजूद सभी प्रतिभागियों को एनीमिया के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। जिसमें बताया गया कि एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीन युक्त आहार का सेवन बेहद जरूरी है। यह बीमारी खून की कमी से होती है। इसलिए, इससे बचाव के लिए आयरनयुक्त खाना का भी सेवन करना जरूरी है। दरअसल, शरीर में पर्याप्त आयरन रहने से इस बीमारी की संभावना ना के बराबर रहती है। इसलिए, खान-पान एवं रहन-सहन का विशेष ख्याल रखें और सकारात्मक बदलाव ही बीमारी से बचाव का बड़ा उपचार है। यह बीमारी खून  में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन कम होने से होती है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराना चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए। वहीं, उन्होंने बताया, प्रशिक्षण प्राप्त सभी प्रतिभागी अपने-अपने पोषक क्षेत्र की महिलाओं को उक्त जानकारी देते हुए एनीमिया से बचाव के लिए जागरूक करेंगी।
– आयरनयुक्त खाना का करें सेवन :
केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक गोपाल शर्मा ने बताया, आयरन की कमी के कारण एनीमिया होता है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आहार बदलने एवं आयरनयुक्त आहार का सेवन करने से बचाव होगा, अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत और परेशानी बन सकती है। इससे बचाव के लिए प्रोटीनयुक्त खाना का सेवन भी जरूरी है। जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूँगफली की मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करें। जो कि आपके शरीर की कमी को पूरा करता एवं हीमोग्लोबिन जैसी कमी भी दूर होता तथा इससे आपको एनीमिया बीमारी से बचाव मिल सकता है।
– ये हैं एनीमिया के प्रारंभिक लक्षण :
एनीमिया के शुरुआती लक्षण- थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द आदि कमी होना है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराएं।

रंगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने उमड़ी भीड़

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-स्वास्थ्य मेला में 586 से भी अधिक लोगों की जांच व इलाज हुआ
-स्वास्थ्य मेला में टीबी से लेकर ब्लड जांच तक के लगे थे स्टॉल
भागलपुर, 20 अप्रैल-
रंगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को स्वास्थ्य मेला लगाया गया। मेला में बढ़ी संख्या में लोग जांच और इलाज कराने के लिए आए। मेला में टीबी, मलेरिया, ब्लड, बीपी और शुगत समेत लगभग सभी बीमारियों की जांच औऱ इलाज को लेकर स्टॉल लगाए गए थे। क्षेत्र के लोग आने के साथ काउंटर पर रजिस्ट्रेशन करवा कर  जांच और इलाज के लिए जा रहे थे। व्यवस्था काफी आसान होने की वजह से भी क्षेत्र से काफी संख्या में लोग इलाज कराने के लिए पहुंचे। विभिन्न काउंटरों पर 586 से अधिक लोगों की जांच और इलाज किया गया।
अस्पताल के प्रभारी डॉ. रंजन कुमार ने बताया कि मेला के दौरान अधिक से अधिक लोग इलाज के लिए आ सकें, इसे लेकर हमलोगों ने पहले से काफी तैयारी कर रखी थी। प्रसार-प्रसार के जरिये भी 20 अप्रैल को रंगरा में मेला लगने की लोगों की जानकारी दी जा रही थी। साथ में लोगों को यह भी बताया जा रहा था कि मेला के दौरान लगभग सभी तरह की बीमारियों का इलाज किया जाएगा। इस कारण काफी संख्या में लोग इलाज कराने के लिए पहुंचे। मेला में आने वाले लोगों को रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित काउंटर पर जांच के लिए भेज दिया जाता था। जहां पर जांच के बाद रिपोर्ट आने पर इलाज भी किया जा रहा था। साथ में दवा का भी वितरण किया गया। कुछ बीमारियों के सभावित मरीजों के सैंपल ले लिए गए। इसकी जांच रिपोर्ट बाद में आएगी, जिसके बाद उसका इलाज किया जाएगा। खासकर टीबी के संभावित मरीजों का सैंपल स्क्रीनिंग के लिए लिया गया है। रिपोर्ट आते ही ऐसे लोगों को परामर्श दी जाएगी। इलाज की जरूरत हुई तो इलाज भी किया जाएगा।
परिवार नियोजन का स्टॉल रहा आकर्षण का केंद्रः स्वास्थ्य मेला के दौरान परिवार नियोजन का काउंटर आकर्षण का केंद्र रहा। इस स्टॉल पर लोगों को अस्थाई सामग्री के वितरण के साथ-साथ परिवार नियोजन को लेकर काउंसिलिंग भी की जा रही थी। लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया जा रहा था। इसके लिए अस्थायी संसाधनों के इस्तेमाल पर लोगों को प्रोत्साहित भी किया गया। इसके अलावा मेला में पोषण स्टॉल पर भी अच्छी खासी भीड़ देखी गई। लोग महिलाओं और बच्चों से संबंधित पोषण के बारे में जानकारी ले रहे थे। पोषण स्टॉल पर लोगों को बच्चों के सही पोषण के बारे में बताया जा रहा था। खासकर नवजात को छह माह तक मां के दूध का ही सेवन करने की सलाह दी जा रही थी। इसके अलावा गर्भवती और धातृ महिलाओं को अधिक से अधिक प्रोटीन लेने की सलाह दी जा रही थी।

फाइलेरिया उन्मूलन मुहिम को मिलेगी गति, राज्य के 6 जिलों में होगा नाईट ब्लड सर्वे

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• रात्रि रक्त सर्वेक्षण को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन
• जिलों के लैब तकनीशियन एवं भीबीडी पदाधिकारी प्रशिक्षण में हुए शामिल
पटना/20, अप्रैल:
फाइलेरिया उन्मूलन को गति देने की मुहिम तेज कर दी गयी है. इसको लेकर बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन के पटना स्थित कार्यालय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान फाइलेरिया संक्रमण की स्तिथि की पहचान के लिए नाईट ब्लड सर्वे यानी रात्रि रक्त सर्वेक्षण पर प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी दी गयी. राज्य के 6 जिलों में नाईट ब्लड सर्वे का आयोजन किया जाना है. जिसमें नवादा, नालंदा, लखीसराय, दरभंगा, समस्तीपुर और रोहतास जिले शामिल हैं. इन जिलों में मई के प्रथम दो सप्ताह में नाईट ब्लड सर्वे संबंधित गतिविधि पूरा किया जाएगा. इस दौरान लैब तकनीशियन एवं वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल के अधिकारी भी मौजूद थे. प्रशिक्षण का संचालन अपर निदेशक सह फाइलेरिया के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. विपिन कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में हुआ.
लैब तकनीशियन की संपूर्ण जानकारी जरुरी:
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के  राज्य समन्वयक डॉ. राजेश पांडेय  द्वारा प्रशिक्षण दिया गया. उन्होंने नाईट ब्लड सर्वे की सफलता के लिए लैब तकनीशियन की निपुणता को अहम बताया. उन्होंने नाईट ब्लड सर्वे करने की सही विधि एवं इसकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी भी दी. उन्होंने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए नाईट ब्लड सर्वे के द्वारा फाइलेरिया परजीवी की मौजूदगी सबसे महत्वपूर्ण सूचकांक है. इसके लिए चिन्हित गाँव एवं शहरी क्षेत्रों में रात्रि यानी 8.30 से 12 के बीच में नाईट ब्लड सर्वे करना जरुरी है एवं इस सर्वे में अधिकतम लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित करना भी जरुरी है.
सर्वे की पूरी तैयारी करने पर जोर:
प्रशिक्षण का संचालन फाइलेरिया के राज्य सलाहकार डॉ. अनुज रावत ने किया. साथ ही डॉ. रावत ने नाईट ब्लड सर्वे के लिए चिन्हित जिलों को नाईट ब्लड सर्वे से संबंधित जानकारी एवं अन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान की जरुरत पर बल दिया. इससे  संबंधित सभी 6 जिलों को एक आधिकारिक पत्र जारी करने का भी निर्देश दिया गया.
इस दौरान सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च  सहित केयर इण्डिया एवं लेप्रा के अधिकारी भी मौजूद रहें एवं कार्यक्रम को सफ़ल बनाने में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने की बात कही.

स्वास्थ्य विभाग के सलाहकार ने मायागंज अस्पताल का लिया जायजा

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-मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में अधीक्षक से ली जानकारी
-अस्पताल की व्यवस्था से संतुष्ट दिखे स्वास्थ्य विभाग के सलाहकार
भागलपुर, 20 अप्रैल-
स्वास्थ्य विभाग के सलाहकार रिटायर्ड आईएएस केपी साहा ने बुधवार को मायागंज अस्पताल का जायजा लिया। उनके साथ वरीय फिजिशियन डॉ. हेमशंकर शर्मा और अस्पताल मैनेजर सुनील कुमार गुप्ता, डीपीएम फैजान आलम अशर्फी और केयर इंडिया के डीटीएल निनकुश अग्रवाल थे। सुबह साढ़े नौ बजे वह मायागंज अस्पताल पहुंचे और अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने मेडिसीन, रेडियोलॉजी और ब्लड बैंक का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभाग में भर्ती होने वाले मरीजों के बारे में भी जानकारी ली। ब्लड बैंक की चिकित्सा पदाधिकारी ने उन्हें वहां पर मौजूद सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। बताया गया ब्लड बैंक में 213 यूनिट खून उपलब्ध है।
अस्पताल की व्यवस्था से संतुष्ट दिखेः केपी साहा मायागंज अस्पताल की व्यवस्था से संतुष्ट दिखे। खासकर अस्पताल में मरीजों की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधओं को उन्होंने संतोषप्रद बताया। केपी साहा ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था बेहतर है। मरीजों का बेहतर तरीके से इलाज किया जा रहा है। यहां पर सभी कुछ व्यवस्थित है। डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के साथ सहयोग करते दिखे। यह बहुत ही अच्छी बात है। इस दौरान अधीक्षक ने उन्हें कोरोना की तीसरी लहर के बाद अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही और उनका बेहतर तरीके से इलाज किया जा रहा है।
जच्चा -बच्चा और वार्ड पर फोकसः अस्पताल अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था से वह संतुष्ट दिखे। उनका फोकस जच्चा और बच्चा के बेहतर इलाज पर था, जो उन्हें यहां पर दिखाई भी दिया। मायागंज अस्पताल में हमेशा से मां और बच्चे की देखभाल बेहतर तरीके से की जाती है। आगे भी इस बात पर ध्यान दिया जाता रहेगा। वैसे तो यहां पर हर तरह के मरीजों की बेहतर तरीके से देखभाल की जाती है, लेकिन मां और बच्चे की देखभाल को लेकर किसी तरह की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। इस बात का हमलोगों ने उन्हें आश्वासन दिया।
सदर अस्पताल का भी किया निरीक्षणः स्वास्थ्य विभाग के सलाहकार केपी साहा ने सदर अस्पताल का भी निरीक्षण गया। ओपीडी से लेकर ऑपरेशन थियेटर, जांच घर, पीकू, नीकू समेत पूरा अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा भी मौजूद रहे। यहां की भी व्यवस्था से वह संतुष्ट दिखे। सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि सदर अस्पताल में सभी चीजें अच्छी थीं। यहां की व्यवस्था से वह संतुष्ट दिखे। कोरोना जांच, टीकाकरण समेत सभी सिस्टम यहां पर ठीक तरीके से काम कर रहा था।
जगदीशपुर सीएचसी भी गएः स्वास्थ्य विभाग के सलाहकार केपी साहा मायागंज अस्पताल का जायजा लेने के बाद जगदीशपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केद्र का निरीक्षण करने गए। वहां भी उनके साथ सिविल सर्जन, डीपीएम और केयर इंडिया के डीटीएल मौजूद रहे। जगदीशपुर सीएचसी का उन्होंने बारीकी से निरीक्षण किया। ओपीडी से लेकर ओटी तक गए। प्रसव कक्ष, दवा काउंटर इत्यादि सभी कुछ वहां पर व्यवस्थित मिला। प्रभारी डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि यहां पर सभी कुछ व्यवस्थित था। निरीक्षण के दौरान मरीजों का बेहतर तरीके से इलाज करते पाया गया। दवा से लेकर साफ सफाई तक का यहां पर बेहतर इंतजाम देखा गया। जगदीशपुर जाने के दौरान रास्ते में वह गोनूधाम हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी गए, जहां पर सीएचओ, एएनएम और आशा से उन्होंने बात की।

“लक्ष्य” कार्यक्रम ने गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित प्रसव में किया इजाफा- डॉ. सरिता  

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• मातृ, नवजात एवं शिशु पोषण में राज्य के सहयोगी संस्थाओं की हुई बैठक
• सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए नीति बनाने की है आवश्यकता- डॉ.बी.पी.राय
• अलाइव एंड थ्राईव के तत्वावधान में इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान बैठक का हुआ आयोजन
पटना/ 20 अप्रैल-
मातृ, नवजात एवं शिशु पोषण के मानकों में सुधार लाने के लिए सरकार प्रयासरत है. इसके लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग तथा समेकित बाल विकास विभाग द्वारा कई कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं. राज्य में कार्यरत सभी सहयोगी संस्थाएं भी इस प्रयास में अपनी भूमिका निभा रही हैं. मातृ, नवजात एवं शिशु पोषण की वर्तमान स्थिति एवं इनमे सुधार लाने के लिए नीति निर्धारण में सहयोग के लिए अलाइव एंड थ्राईव के तत्वावधान में इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान में सहयोगी संस्थओं के प्रतिनिधियों की बैठक संपन्न हुई. इसमें स्वास्थ्य विभाग एवं समेकित बाल विकास विभाग के पदाधिकारियों ने भी शिरकत की और अपने विचार रखे.
“लक्ष्य” कार्यक्रम ने गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित प्रसव में किया इजाफा- डॉ. सरिता
बैठक को संबोधित करते हुए राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, मातृ स्वास्थ्य डॉ. सरिता ने बताया कि एनीमिया मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती है तथा यह समुदाय के सभी आयुवर्ग के लोगों में व्याप्त है. इसे तत्काल प्रभाव से देखने की जरुरत है और इसके प्रबंधन के लिए सटीक एवं सुनियोजित प्रयास की जरुरत है. डॉ. सरिता ने बताया कि लक्ष्य कार्यक्रम से अस्पतालों के लेबर रूम की स्थिति काफी बेहतर हुई है और अब गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवा उपलब्ध हो पा रही है. इससे मातृ मृत्यु दर में भी कमी देखी जा रही है.
एनीमिया एवं कुपोषण से मुक्ति के लिए साझा नीति पर काम करने की है जरुरत- प्रवीण शर्मा
अलाइव एंड थ्रायीव के बिहार एवं उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम निदेशक प्रवीण शर्मा ने बताया कि एनीमिया एवं कुपोषण को दूर करने के लिए साझा नीति बनाकर उसपर काम करने की जरुरत है. बैठक के माध्यम से एक संयुक्त कार्य नीति पर पहुँचने का प्रयास किया जा रहा है जिससे एनीमिया एवं कुपोषण पर काबू करके मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के मानकों में सुधार लाया जा सके.
सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए नीति बनाने की है आवश्यकता- डॉ.बी.पी.राय
बैठक को संबोधित करते हुए राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य डॉ. बी.पी.राय ने बताया कि स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए संचालित कार्यक्रमों को पूरी दृढ़ता से क्रियांवित करने की जरुरत है. इस बैठक के माध्यम से ऐसे उपाय तलाशने की आवश्यकता है जिससे नवजात, शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य के मानकों को और बेहतर किया जा सके.
पोषण के मानकों में सुधार के लिए सामूहिक प्रयास की जरुरत:
बैठक में अपनी बात रखते हुए पोषण अभियान की नोडल पदाधिकारी रिफत अंसारी ने कहा कि कुपोषण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सबसे बड़ा बाधक है और इसे दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरुरत है. बैठक के माध्यम से हमें ऐसी समझ पर पहुँचने की जरुरत है जिससे समुदाय से कुपोषण दूर करने के कार्यक्रमों को और बल मिल सके.
बैठक में अलाइव एंड थ्राईव की नोवीना स्वप्नभ, विश्व बैंक के मंत्रेश्वर झा, नीपी, यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. संदीप घोष,, सीफार के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक, रणविजय कुमार, पिरमल स्वास्थ्य, वर्ल्ड विज़न के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे. बैठक में इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सक भी शामिल हुए. बैठक का संचालन अलाइव एंड थ्राईव की वरीय कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने किया.

कोविड की संभावित चौथी लहर से सुरक्षा को ले तेज हुई जाँच और वैक्सीनेशन अभियान

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– शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने में जुटा स्वास्थ्य विभाग
– वैक्सीन से वंचित लोगों को अभियान चलाकर किया जाएगा वैक्सीनेट, बचाव को वैक्सीनेशन जरूरी
लखीसराय, 19 अप्रैल-
कोविड  की तीसरी लहर के बाद चौथी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। जिसके कारण हमें अभी से ही इस महामारी के खिलाफ सावधान होने की जरूरत है। ताकि हम चौथी लहर से भी खुद को सुरक्षित रख सकें और इस महामारी के प्रभाव से दूर रह सकें। इसके लिए बच्चों की उचित देखभाल के साथ खानपान का विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसलिए, बच्चों की स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह सजग रहें। किसी भी प्रकार की शारीरिक पीड़ा होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराएं और समुचित इलाज कराएं। ताकि बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ और मजबूत रह सकें। जब बच्चा स्वस्थ और मजबूत रहेगा तो वह निश्चित ही संक्रामक बीमारी से दूर रहेगा। वहीं, दूसरी ओर जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो, इस उद्देश्य से जिले में  वैक्सीनेशन और जाँच अभियान एकबार फिर तेज कर दिया गया है। ताकि सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस  महामारी से सुरक्षित किया जा सके।
– वैक्सीन से वंचित लोग जल्द से जल्द कराएं वैक्सीनेशन और चौथे लहर की खतरे से रहे दूर :
एसीएमओ सह डीआईओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, संभावित चौथे लहर से बचाव के लिए कोविड जाँच और वैक्सीनेशन अभियान तेज करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसका पालन करते हुए जिले में जाँच और वैक्सीनेशन अभियान तेज कर दिया गया है। ताकि वैक्सीन से वंचित लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके। इसके लिए जिले के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड समेत अन्य सार्वजनिक जगहों पर भी कैम्प लगाकर कोविड जाँच की जाएगी। इसके अलावा 18 से 59 आयु वर्ग के सभी ऐसे लाभार्थी, जो प्रीकाॅशनरी डोज लेने की समयावधि पूरी कर चुके हैं, उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क प्रीकाॅशनरी डोज दी जाएगी। बताया कि राज्य सरकार ने 18 से 59 आयुवर्ग के लोगों को भी निःशुल्क बूस्टर डोज लगाने का फैसला लिया है। यह सुविधा जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है।
– बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को लेकर रहें सजग और बीमारियों से रखें दूर :
चौथे लहर से सुरक्षा के मद्देनजर खासकर बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की जरूरत है। इसके लिए बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को लेकर सजग रहें। क्योंकि, मजबूत रोग-प्रतिरोधक सभी प्रकार के संक्रामक बीमारी से दूर रखता है। बच्चे की खानपान समेत साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। ऐसे में खुद के साथ-साथ बच्चों की  सेहत का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है। छोटे-छोटे बच्चों के  स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए कौन सा आहार हो, इसको लेकर सावधान रहने की जरूरत  है। संतुलित आहार से बच्चों की  रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। बच्चों को अगर विटामिन और मिनरल्स नहीं मिलते हैं तो उसके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है।
– वैक्सीन से वंचित लोगों को प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा वैक्सीनेट :
वैक्सीन से वंचित लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले भर में अभियान चलाकर प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेट किया जाएगा। ताकि चौथे लहर से सुरक्षा के मद्देनजर सामुदायिक स्तर पर लोग सुरक्षित हो सके और अन्य लहरों की इस लहर को भी आसानी के साथ मात दी जा सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक तैयारी शुरू कर दी गई।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।