मुंगेर जिला के सभी प्रखंडों में 18 से 22 अप्रैल के बीच आयोजित होगा “स्वास्थ्य मेला”

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– धरहरा और हवेली खड़गपुर प्रखण्ड में 19 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा स्वास्थ्य मेला
– जिला में स्वास्थ्य मेला के सफल आयोजन को ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी किया दिशा- निर्देश
मुंगेर, 14 अप्रैल –
आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में जिला के प्रखंडों में 18 से 22 अप्रैल के बीच “स्वास्थ्य मेला” आयोजित किया जाएगा। स्वास्थ्य मेला के सफल आयोजन को ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने मुंगेर जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा- निर्देश दिए हैं।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) नसीम रजि ने बताया कि जिला के विभिन्न प्रखंडों में 18 से 22 अप्रैल के बीच किसी दिन “स्वास्थ्य मेला” आयोजित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसी के मद्देनजर 19 अप्रैल को मुंगेर के धरहरा और हवेली खड़गपुर प्रखण्ड में स्वास्थ्य मेला आयोजित करने का  निर्णय लिया गया है। इस मेला में प्रखण्डवासी अपने स्वास्थ्य संबंधी जांच करवाने के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य सेवाओं का  लाभ लेते हुए कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के चौथे वर्षगांठ पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत गुरुवार और शुक्रवार को ई. संजीवनी टेलीमेडिसीन सेवाओं के ड्राई रन के आयोजन के बाद 16 अप्रैल को जिलाभर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर ई.संजीवनी टेलीमेडिसीन सेवा  उपलब्ध करायी जाएगी। इसके अगले दिन 17 अप्रैल को सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर योगाभ्यास के साथ-साथ वेलनेस सत्र का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 18 से 22 अप्रैल के बीच किसी एक दिन प्रत्येक प्रखण्ड में “स्वास्थ्य मेला ” का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति से प्राप्त दिशा-निर्देश के अनुसार स्वास्थ्य मेला का आयोजन स्वास्थ्य विभाग के अलावा विभिन्न विभाग जैसे खेल एवं युवा मामले, आयुष, स्कूली शिक्षा, महिला एवम बाल विकास विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क, कला संस्कृति, पंचायती राज, शहरी विकास, खाद्य सुरक्षा के आपसी समन्वय, सहयोग और भागीदारी से किया जाना है।

हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर  के साथ प्रखंड स्तरीय तीन दिवसीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का होगा आयोजन

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– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर सभी सिविल सर्जन को दिए निर्देश
– सामुदायिक स्तर पर लोगों को स्वास्थ्य से संबंधित दी जाएगी आवश्यक जानकारी
लखीसराय, 14 अप्रैल-
जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत संचालित सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य से संबंधित तीन दिवसीय कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसके दौरान विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को स्वस्थ शरीर और समाज निर्माण के लिए स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जाएगी। यह कार्यक्रम जिलेभर में 16 से 22 अप्रैल तक होगा। इस दौरान 16 अप्रैल को ई-संजीवनी प्रणाली के माध्यम से टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। 17 अप्रैल को योग और वेलनेस सत्र का आयोजन होगा एवं 18 से 22 अप्रैल के बीच किसी एक दिन सभी प्रखंडों में प्रखंडस्तरीय स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया जाएगा। उक्त सभी कार्यक्रमों के दौरान सामुदायिक स्तर पर लोगों सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। स्वस्थ शरीर व समाज निर्माण के लिए जागरूक करते हुए आवश्यक जानकारी दी जाएगी। वहीं, उक्त कार्यक्रम का सफल संचालन सुनिश्चित कराने को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
– कार्यक्रम की सफलता को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए हैं निर्देश :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, 16 से 22 अप्रैल तक जिले में स्वास्थ्य संबंधित विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कराने का निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसकी सफलता को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ताकि अधिकाधिक लोगों का कार्यक्रम के दौरान भागीदारी सुनिश्चित हो सके और कार्यक्रम का सफल संचालन हो सके। वहीं, उन्होंने बताया कि मेले में लोगोँ का आभा नंबर बनाया जाएगा। यह डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनने के लिए सबसे पहला कदम है। जो आपके स्वास्थ्य रिकार्ड को कागज रहित बनाता है। आभा हेल्थ आईडी कार्ड एक 14 अंकों का यूनिक नंबर है। जिसके साथ आप अपने सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से लिंक कर सकते हैं। 30 सेकेंड से कम समय में आधार नंबर या मोबाइल नंबर का उपयोग करके अपना आभा हेल्थ आईडी कार्ड बना सकते हैं। मेले में आने वाले सभी लोगों का आभा नंबर बनाया जाएगा।
– जानें आभा हेल्थ आईडी कार्ड के लाभ :
पूरे देश में सत्यापित डॉक्टरों, अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को आभा हेल्थ आईडी कार्ड देकर उनसे सभी मेडिकल रिकॉर्ड जैसे लैब रिपोर्ट, प्रीस्क्रिप्शन, अस्पताल के भर्ती एवं डिस्चार्ज के विवरण, एमआरआई रिपोर्ट आदि साझा करें। अब आपको डॉक्टर से मिलने के लिए रिपोर्ट साथ ले जाने की या अस्पताल का भर्ती फॉर्म भरने के लिए लंबी लाइनों मे खड़े होने की कोई जरूरत नहीं है। बस अपना आभा हेल्थ आईडी कार्ड नंबर बताएं और सुविधाएं प्राप्त करें।
– जानें क्या है आभा या नेशनल हेल्थ आईडी कार्ड : आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) या हेल्थ आईडी, भारतीय नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत भारत सरकार की एक पहल है, जो उनकी सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को एक ही जगह पर एकत्रित करती है। आभा एड्रेस के साथ, हेल्थ आईडी कार्ड या आभा नंबर बनाने से, सभी को डॉक्टरों और अन्य हेल्थ सर्विस प्रोवाइडरों से डिजिटल रूप से सभी प्रकार के मेडिकल रिपोर्ट और प्रीस्क्रिप्शन प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

सुरक्षित प्रसव के लिए उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी, संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता

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– सुरक्षित प्रसव के लिए पीएचसी व अस्पताल में समुचित व्यवस्था है उपलब्ध
– गर्भावस्था के दौरान योग्य चिकित्सकों से लें परामर्श, करें पालन,   -प्रसव पूर्व चार जांच सुरक्षित प्रसव के लिए है जरूरी
– प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की मिलेगी जानकारी
खगड़िया, 14 अप्रैल-
सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देना जरूरी है। दरअसल, सुरक्षित प्रसव के लिए उचित स्वास्थ्य प्रबंधन बेहद जरूरी है। पीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के लिए पूरी सुविधा उपलब्ध है।  लोगों को संस्थागत प्रसव के दौरान बेहतर से बेहतर सुविधा देने के लिए शासन-प्रशासन भी पूरी तरह सजग है। संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने से ना सिर्फ सुरक्षित प्रसव होगा, बल्कि शिशु-मृत्यु दर में भी कमी आएगी। इसके लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। ताकि सुरक्षित प्रसव के ऑकड़े में वृद्धि हो सके और मातृ शिशु-मृत्यु दर पर विराम लग सके।
– सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में उपलब्ध हैं पर्याप्त सुविधा :
सिविल सर्जन डॉ अमरनाथ झा ने बताया,  सुरक्षित प्रसव के लिए पीएचसी एवं जिले के अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हैं ।  प्रसव के लिए आने वाली प्रसूता को बेहतर से बेहतर सुविधा मिले, इस बात का विशेष ख्याल भी रखा जाता है। इसके अलावा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ विभाग से जुड़ी एएनएम और आशा अपने-अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहीं हैं।
– सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच है जरूरी :
शिशु-मृत्यु दर में कमी के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाली रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जाँच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जाँच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि, सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु-मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
– हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत की जाती है मुफ्त जाँच :
सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए हर माह की नौ तारीख को सभी पीएचसी एवं सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मुफ्त जाँच की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आदि कार्यक्रम के माध्यम से एनेमिक गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही है। साथ ही सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जाँच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की चारों प्रसव पूर्व जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती व संभावित जटिलताओं का पता चलता है। लक्षणों के मुताबिक जरूरी चिकित्सीय प्रबंधन किया जाता है ताकि माता और उसके शिशु दोनों स्वस्थ रहें।

टीबी मरीजों की कई स्तरों पर हो रही खोज

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-सभी प्रखंडों में सीएचओ, एसटीएस व एएनएम जा रहीं घर-घर
-2025 तक जिला को टीबी मुक्त बनाने के लिए अभियान तेज
बांका, 14 अप्रैल –
जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने के अभियान को तेज कर दिया गया है। अभी कई स्तरों पर टीबी मरीजों की खोज हो रही है। कोरोना से पीड़ित परिवार, पांच साल पहले जिसके घर में टीबी का मरीज हो और इसके साथ-साथ शुगर या अन्य बीमारी से पीड़ित परिवारों के घर पर सीएचओ, एसटीएस और एएनएन लोगों की जांच कर रही हैं। यह अभियान जिले के सभी प्रखंडों में चल रहा है। जांच के दौरान यदि कोई संदिग्ध मिलता है तो उसकी तत्काल जांच की जाती है। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो उसे दवा के साथ पौष्टिक आहार के लिए राशि भी दी जा रही है। सीडीओ डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा ने बताया कि 24 मार्च से 15 अप्रैल तक टीबी मरीजों की खोज के लिए हर स्तर पर सघन अभियान चलाया जा रहा है। जिसके घर पर पहले से ही टीबी के मरीज हैं, उस घर के सभी लोगों की जांच की जा रही है। साथ में घर के वैसे सदस्य जिन्हें टीबी नहीं भी है, उसे दवा दी जा रही है, ताकि उस व्यक्ति में टीबी नहीं फैल सके। इसके अलावा जिसके घर में कोरोना से संक्रमित कोई व्यक्ति रहा हो या फिर शुगर या अन्य बीमारी से पीड़ित कोई है तो उसके घर पर भी जांच की जा रही है।
घर के सभी सदस्यों की हो रही जांचः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि जिसके घर में पिछले दिनों कोरोना के मरीज निकला और अभी वह ठीक है, इसके बावजूद उस घर के सभी लोगों की जांच की जा रही है। इसी तरह शुगर और पांच साल पहले तक जिसके घर में टीबी के मरीज थे, उनके घर के भी एक-एक सदस्यों की जांच की जा रही है। नए टीबी मरीजों को विभाग की तरफ से दवा के साथ पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए दिया जाएगा, इस बात की जानकारी भी लोगों को दी जा रही है। इसके साथ-साथ कोई भी व्यक्ति अगर टीबी मरीज की सूचना देते हैं तो उसे भी पांच सौ रुपये विभाग की ओऱ से दिया जा रहा है। टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए विभाग हर कदम उठा रहा है। सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जागरूकता से ही टीबी जैसी बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
सरकारी अस्पतालों में जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्तः राजदेव राय ने बताया कि 15 अप्रैल तक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के जरिये टीबी मरीजों की लगातार खोज हो रही है। इसके अलावा जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की मुफ्त व्यवस्था है। हमलोग इस बात को सामुदायिक स्तर पर फैला रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर टीबी मरीजों की खोज के दौरान टीबी के लक्षण और बचाव की भी जानकारी दी जा रही है। लोगों के टीबी से बचने के उपाय बताए जा रहे हैं। साथ ही टीबी से बचने के लिए सही पोषण लेने के बारे में बताया जा रहा है। समाज को टीबी से मुक्त करने के लिए लोगों को शपथ भी दिलाई जा रही है। लोगों से कहा जा रहा है कि यदि कोई व्यक्ति टीबी का संदिग्ध मिलता है तो उसे तत्काल सरकारी अस्पताल लेकर जांच करवाएं।

25 को मलेरिया दिवस पर जिलेभर में आयोजित होंगे कार्य़क्रम 

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-वेक्टर जनित रोग कार्यक्रम, बिहार के अपर निदेशक ने पत्र जारी कर दिए निर्देश
-मलेरिया एक प्रकार का बुखार है, किसी भी उम्र के लोगों का ले सकता  है चपेट में
बांका, 14 अप्रैल-
आगामी 25 अप्रैल को जिलेभर में विश्व मलेरिया दिवस दिया मनाया जाएगा। इसे लेकर अभी तैयारी चल रही है। इस दौरान जिला मुख्यालय से लेकर प्रखण्ड स्तर पर मलेरिया से बचाव को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दिन आयोजित होने वाले जागरूकता कार्यक्रम के सफल संचालन को लेकर वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम बिहार के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम निदेशक ने बांका सहित अन्य जिलों के सिविल सर्जन, एसीएमओ और जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी को पत्र जारी कर निर्देश जारी किया है।
जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि मलेरिया प्लाजमोडियम नामक परजीवी से संक्रमित मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया एक प्रकार का बुखार है जो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। इसमें कंपकंपी के साथ 103 से लेकर 105 डिग्री तक बुखार होता है। कुछ घंटों के बाद पसीने के साथ बुखार उतर जाता है, लेकिन बुखार आते-जाते रहता है। उन्होंने कहा कि फेलसीपेरम मलेरिया (दिमारी मलेरिया) की अवस्था में तेज बुखार होता है। खून की कमी हो जाती है। बुखार दिमाग पर चढ़ जाता है। फेफड़े में सूजन हो जाती है। पीलिया एवं गुर्दे की खराबी फेलसीपेरम मलेरिया की मुख्य पहचान है।
सोते समय मच्छरदानी का करें प्रयोगः डॉ. यादव ने मलेरिया से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े पहनें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। घर के आसपास जलजमाव वाली जगहों को मिट्टी से भर दें। जलजमाव वाले स्थान पर केरोसिन तेल या डीजल डालें। घर के आसापस बहने वाली नाले की साफ-सफाई करते रहें। उन्होंने कहा कि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की तरफ से डीडीटी का छिड़काव कराया जाता है। छिड़काव कर्मियों के आने पर उनका सहयोग करें और छिड़काव की तिथि की जानकारी ग्रामीणों को दें।
सरकारी अस्पतालों में जांच और इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने कहा कि मलेरिया बुखार होने पर पीड़ित व्यक्ति को नजदीकी सरकारी अस्पताल जाना चाहिए। खून की जांच में मलेरिया निकलने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इसकी निःशुल्क जांच और इलाज की व्यवस्था है। मलेरिया फैलाने वाला मच्छर किसी स्थान पर ठहरे हुए साफ पानी और धीमी गति से बहने वाली नालियों में अंडे देती है और वहां पर पनपती है।
आशा के लिए प्रोत्साहन राशि की भी व्यवस्थाः आरिफ इकबाल ने बताया कि आशा कार्यकर्ता क्षेत्र में जाकर मलेरिया के संदिग्ध मरीजों की आरडीटी किट से जांच कर रही हैं। प्रति जांच उन्हें 15 रुपये की राशि देने की भी व्यवस्था है। साथ ही मरीज मिलने पर उसका इलाज कराने पर 75 रुपये प्रति मरीज अलग से दिए जाने की व्यवस्था है। साफ है कि जिले को मलेरिया से मुक्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 2030 तक मलेरिया को खत्म करने का लक्ष्य है, इसे लेकर प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

25 अप्रैल को जिलाभर में मनाया जाएगा विश्व मलेरिया दिवस 

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–  जिला से प्रखण्ड स्तर तक आयोजित होंगे जागरूकता कार्यक्रम
– सफल संचालन को ले वेक्टर जनित रोग कार्यक्रम बिहार के अपर निदेशक  ने पत्र जारी कर दिए निर्देश
मुंगेर, 13 अप्रैल
आगामी 25 अप्रैल को जिला भर में विश्व मलेरिया दिवस दिया मनाया जाएगा। इस दिन जिला  मुख्यालय से प्रखण्ड स्तर पर मलेरिया से बचाव को लेकर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दिन आयोजित होने वाले जागरूकता कार्यक्रम के सफल संचालन को लेकर वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम बिहार के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम निदेशक ने मुंगेर सहित अन्य जिलों के सिविल सर्जन, एसीएमओ और जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोलिंग ऑफिसर को पत्र जारी कर निर्देश जारी किया है।
जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोलिंग ऑफिसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि वैश्विक स्तर पर मलेरिया बीमारी पर नियंत्रण स्थापित करने के किए जाने वाले वैश्विक प्रयास को बढाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस के रूप में मनाने का निर्णय  लिया गया है। उन्होंने बताया कि सन 2000 में विश्व ने इस दिशा में ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी ,जब पूरे विश्व में मलेरिया से पीड़ित करोड़ो लोगों की जान को बचाया जा सका था। उन्होंने बताया कि भारत में पूरी दुनिया के मलेरिया रोगियों का 3 प्रतिशत है। भारत में भी पिछले कुछ दशक से मलेरिया रोगियों की संख्या में काफी कमी देखी गई है। सन 2030 तक भारत से मलेरिया उन्मूलन के लिए किए जाने वाले प्रयास की गति काफी बढ़ा दी गई है। विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। ताकि विभिन्न स्तर पर मलेरिया से पीड़ित लोगों की सही समय पर सही जांच, सही इलाज से मलेरिया जैसी बीमारी से मुक्त किया जा सके।
उन्होंने बताया कि मलेरिया बीमारी गंदगी और मादा एनोफिलिस मच्छर के काटने से होती है । इसलिए इससे बचने के लिए आवश्यक है सभी लोग साफ-सफाई का अच्छी तरह से ख्याल रखें और मादा एनोफिलीज मच्छर के डंक से बचने के लिए सभी लोग मच्छरदानी सहित अन्य संसाधनों का इस्तेमाल करें ।

आरोग्य दिवस: जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा का किया गया ड्राईरन

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– नियमित और कोविड टीकाकरण का भी हुआ आयोजन, योग्य लाभार्थियों को किया गया टीकाकृत
– गर्भवती महिलाओं और शिशुओं का किया गया नियमित टीकाकरण और योग्य लाभार्थियों को दी गयी कोविड वैक्सीन
लखीसराय, 13 अप्रैल-
आरोग्य दिवस के अवसर पर बुधवार को जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा का ड्राई रन किया गया। जिसके माध्यम से लोगों को उक्त सेवा का लाभ लेने की तरीके समेत अन्य विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही कोविड वैक्सीनेशन के साथ-साथ नियमित टीकाकरण का भी आयोजन किया गया। जिसके माध्यम से जहाँ गर्भवती एवं शिशु का नियमित टीकाकरण किया गया। वहीं, योग्य लाभार्थियों का कोविड वैक्सीनेशन किया गया। जिसमें प्रीकाॅशनरी डोज और किशोर-किशोरी (12 से 14 आयु वर्ग) लाभार्थियों का प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन किया गया। इस दौरान नियमित टीकाकरण के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को जरूरी सलाह के साथ-साथ गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां के अलावा खान-पान, रहन-सहन समेत सुरक्षित और सामान्य प्रसव को लेकर अन्य आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
– गर्भवती और शिशु के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी :
एसीएमओ सह डीआईओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने एवं शिशु के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए समय पर नियमित टीकाकरण जरूरी है। इसलिए, कोविड के साथ नियमित टीकाकरण टीकाकरण कार्यक्रम का भी आयोजन कर योग्य लाभार्थी का नियमित टीकाकरण भी किया जा रहा है। ताकि ससमय पर नियमित टीकाकरण भी सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, नियमित टीकाकरण के दौरान शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के टीके लगाए जाते और गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
– संस्थागत प्रसव को लेकर भी किया जाता है जागरूक :
इस दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार वालों को संस्थागत प्रसव को लेकर भी जागरूक किया जाता है। जिसके दौरान यह बताया गया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। योग्य एवं प्रशिक्षित एएनएम द्वारा चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रसव कराया जाता है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को अपनाने के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की जरूरत है। साथ ही यह भी बताया गया कि सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है। सरकार द्वारा जाँच के लिए पीएचसी स्तर पर मुफ्त व्यवस्था की गई। ताकि हर गर्भवती महिला आसानी से जाँच करा सकें। हर माह 09 तारीख को पीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती की जाँच की जाती और चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की सफलता को लेकर शिक्षकों के साथ हुई बैठक 

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– जिले के गोगरी रेफरल अस्पताल में  शिक्षकों के साथ हुई बैठक
– छात्राओं के बीच वितरण होने वाली  आयरन फॉलिक टैबलेट पर हुई  चर्चा
खगड़िया, 13 अप्रैल-
खगड़िया सहित राज्य के 33 विभिन्न जिलों में आगामी 22 अप्रैल को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस व  26 अप्रैल को माॅप-अप दिवस मनाया जाएगा। उक्त कार्यक्रम की सफलता को लेकर बुधवार को जिले के गोगरी रेफरल अस्पताल परिसर स्थित सभागार हाॅल में शिक्षकों के साथ एक बैठक आहुत की गई। जिसकी अध्यक्षता रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ चंद्रकात ने की। संचालन केयर इंडिया की प्रखंड प्रबंधक नीलम सयानी व बीसीएम प्रभाकर कुमार ने किया। बैठक में उक्त कार्यक्रम के सफल संचालन सुनिश्चित करने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई एवं जरूरी एक्शन प्लान भी तैयार किया गया। ताकि जिले में शत-प्रतिशत लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल टैबलेट का सेवन कराया जा सके और कार्यक्रम का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके। बैठक में प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों के एच एम समेत शिक्षक और शिक्षिकाओं ने भाग लिया।
– कार्यक्रम की सफलता को लेकर अभियान चलाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक :
गोगरी रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ चंद्रकात ने बताया, 22 अप्रैल को जिले भर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाना है। जिसकी सफलता को लेकर अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा और अपने-अपने 01 से 19 आयु वर्ग के के सभी बच्चों को कृमि से समस्या से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल टैबलेट सेवन कराने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। साथ ही बचाव से संबंधित अन्य जानकारियाँ भी दी जाएगी। वहीं, उन्होंने बताया, उक्त कार्यक्रम की सफलता को लेकर अभी से आवश्यक तैयारी शुरू कर दी गई है। ताकि हर हाल में निर्धारित समय पर कार्यक्रम का शुभारंभ हो सके और सभी लाभार्थियों को दवाई का सेवन कराया जा सके।
– विद्यालय की छात्राओं के बीच वितरित होने वाली साप्ताहिक आयरन फॉलिक टैबलेट पर भी की गई चर्चा :
केयर इंडिया की प्रखंड प्रबंधक नीलम सयानी एवं बीसीएम प्रभाकर कुमार ने बताया, बैठक के दौरान विद्यालय की छात्राओं के बीच वितरित होने वाली साप्ताहिक आयरन फॉलिक टेबलेट पर भी विस्तृत चर्चा की गई। जिसमें बताया गया कि सप्ताह में एक बार विद्यालय में पढ़ने वाली सभी किशोरियों को आयरन फॉलिक टैबलेट का सेवन कराना है। साथ ही बच्चों को एनीमिया प्रबंधन की भी जानकारी देनी है। जिसमें एनीमिया के कारण, लक्षण, उपचार एवं बचाव की विस्तृत जानकारी दी जानी है। ताकि संबंधित किशोरी अपनी परेशानी को शुरुआती दौर में ही समझ सके और ससमय आवश्यक उपचार भी सुनिश्चित हो सके।
– उम्र के अनुसार खिलाई जाएगी अल्बेंडाजोल की दवा :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, उक्त कार्यक्रम के दौरान उम्र के हिसाब से निर्धारित डोज के अनुसार दवाई खिलाई जाएगी। जिसमें 1 से 2 वर्ष के बच्चों के अल्बेंडाजोल 400 एमजी टैबलेट का आधा चूरकर पानी के साथ खिलाना है। 2 से 3 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 एमजी का एक टैबलेट चूर कर पानी के साथ खिलाना है। इसके साथ ही 3 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरो को एक पूरा टैबलेट चबाकर खिलाना है। इसके बाद ही पानी का सेवन करना है। इस अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए ऑगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी समेत अन्य सहयोगी संगठन के कर्मियों से सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आवश्यक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।

सबौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्यकर्मियों को व्हाट्सएप बोट की दी गई जानकारी

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-व्हाट्सएप पर एक मैसेज भेजकर परिवार नियोजन से जुड़ी सारी जानकारी मिल रही
-9031691691 पर व्हाट्सएप मैसेज भेजकर वीडियो के जरिये भी ले सकते हैं जानकारी
भागलपुर, 13 अप्रैल-
परिवार नियोजन से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी आप मोबाइल के जरिये व्हाट्सएप पर एक मैसेज भेजकर ले सकते हैं। इसे लेकर सबौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्वास्थ्यकर्मियों को व्हाट्सएप बोट की जानकारी दी गई। इसके तहत आप वीडियो के जरिये भी जानकारी पा सकते हैं। तकनीक के जमाने में लोग इसका भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। जिनलोगों के पास ज्यादा समय नहीं रहता है, वे लोग एक मैसेज भेजकर परिवार नियोजन से संबंधित हर तरह की जानकारी ले रहे हैं।
सीएचसी प्रभारी डॉ. सुभ्रा वर्मा ने बताया कि परिवार नियोजन से संबंधित कार्यक्रम सालोंभर होते रहते हैं। हां, यह बात सही है कि व्हाट्सएप नंबर पर सेवा मिलने से लोगों को काफी सहूलियत हो गई है। जिस काम में घंटों लग जाते थे, वह अब मिनटों में हो रहा है। घर बैठे एक मैसेज भेजकर लोग परिवार नियोजन से संबंधित सारी जानकारी जुटा ले रहे हैं। इसी बात की जानकारी स्वास्थ्यकर्मियों को दी गई। साथ में यह भी बताया गया कि अगर लोग व्हाट्सएप के जरिये नहीं समझ पाते हैं तो उसे मौखिक तौर पर भी समझाना है। व्हाट्सएप सेवा शुरू होने के बावजूद हमलोग पूरी तन्मयता से अपने काम में लगे रहेंगे। यह सुविधा सिर्फ लाभुकों के लिए है।
व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज भेज ऐसे लें जानकारीः  इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए सबसे पहले 9031691691 पर हाय लिखकर व्हाट्सएप करें। इसके बाद उधर से आपका नाम और पता पूछा जाएगा। फिर एक-एक कर परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी आपको मिलती रहेगी। आप अपनी समस्या व्हाट्सएप करें फिर उधर से उसका समाधान आएगा। यह सेवा केयर इंडिया उपलब्ध करवा रही है । यह सेवा उनलोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी, जो किसी के सामने अपनी परेशानी साझा करने से झिझक रखते हैं। चाहे वह डॉक्टर या कोई अन्य स्वास्थ्यकर्मी ही क्यों न हों।
परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर करने वालों को मिला पुरस्कारः व्हाट्सएप की जानकारी के बाद पिछले साल परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित भी किया गया। अंतरा सुई लगाने के लिए रंजूलता, सुरुचि कुमारी और इंदु कुमारी, कॉपर टी लगाने के लिए चंदा कुमारी, रंजूलता और सुरुचि कुमारी को सम्मानित किया गया। ये सभी एएनएम हैं। इनके साथ आशा रेखा कुमारी, कुमारी निरुपा, रूबि कुमारी को भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा अंजनी किरण, कुमारी करुणा किरण को सम्मानित किया गया। बेस्ट प्रैक्टिस के लिए प्रभारी डॉ. शुभ्रा वर्मा, मैनेजमेंट के लिए विनय कुमार, हरिश और मुकेश को भी सम्मानित किया गया। मौके पर केयर इंडिया के डीटीओ फैसिलिटी डॉ राजेश कुमार मिश्रा और परिवार नियोजन के जिला समन्वयक आलोक कुमार भी मौजूद थे।

गर्भावस्था के दौरान जमकर लें पौष्टिक आहार

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-जच्चा और बच्चा की सेहत का रहेगा पूरा ख्याल
-पौष्टिक आहार से जच्चा-बच्चा दोनों रहेगा स्वस्थ
बांका, 13 अप्रैल-
गर्भावस्था के दौरान बहुत सी बातों का ख्याल रखना जरूरी होता है। इसमें से एक है पौष्टिक आहार का सेवन। इससे न सिर्फ मां स्वस्थ रहती है, बल्कि उसके पेट में पलने वाले बच्चे का भी स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए। दरअसल, इस दौरान महिलाओं को खुद के साथ बच्चे की भी आवश्यकता की पूर्ति करनी होती है। इसे लेकर खान-पान पर बेहतर ध्यान चाहिए। इसलिए गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ घर के अन्य सदस्यों को भी इन बातों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि गर्भवती महिला नियमित तौर पर पौष्टिक आहार का सेवन कर सके। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि बच्चे की देखभाल की शुरुआत गर्भावस्था के दौरान से ही हो जाती है। उसी समय से गर्भवती महिला को अपना व्यवहार उस तरह से करना चाहिए, जिससे बच्चे पर कोई असर नहीं पड़े। साथ ही इस बात का ध्यान रखना चाहिए क्या करने से बच्चे का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। इसके लिए खान-पान का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। गर्भवती महिलाएं जमकर पौष्टिक आहार का सेवन करें। इससे दोनों की जरूरतें पूरी होंगी।
आयरनयुक्त भोजन करें- गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को भरपूर आयरन की जरूरत होती है। इसे लेकर महिलाओं को आयरन की गोली भी दी जाती है। इसके साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और मांस का सेवन करना चाहिए। जो लोग मांसाहार का सेवन नहीं करती हैं, उन्हें हरी पत्तेदार सब्जियां अधिक से अधिक खानी चाहिए। इससे आयरन की पूर्ति होगी।
कैल्सियम से भरपूर भोजन करें- आयरन के साथ कैल्सियम की भी जरूरत गर्भवती महिलाओं को पड़ती है। इसके लिए दूध, दही, पनीर, बादाम और अंडा का अधिक से अधिक सेवन करें। खासकर दूध औऱ अंडा का सेवन प्रतिदिन करें। इसमें भी जो महिलाएं शाकाहारी हैं और अंडा का सेवन नहीं करती हैं, वे दूध और अन्य सामग्री का जमकर भोजन में इस्तेमाल करें।
भरपूर विटामिन लें- गर्भवती महिलाओं को ही नहीं, हर किसी को भरपूर विटामिन लेने की आवश्यकता होती है, लेकिन गर्भवती महिलाओं को तो लेना ही चाहिए। इसके लिए मौसमी  फल, आंवला, मांस, मछली और अंडे का सेवन भोजन के तौर पर करें। गर्भवती महिलाओं को मौसमी खट्टे फल पर जोर देना चाहिए। जो लोग मांसाहार नहीं करते हैं, उन्हें अन्य दूसरी चीजों पर ध्यान देना चाहिए।
प्रोटीन और वसा का करें भरपूर इस्तेमालः प्रोटीन का इस्तेमाल भी हर किसी को करना चाहिए, लेकिन गर्भवती महिलाएं इसका भरपूर इस्तेमाल करें। दूध और अन्य दूध के उत्पाद के अलावा नट का भी इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं वसा के लिए गर्भवती महिलाओं को मक्खन, घी तेल और मेवा का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ उसके बच्चे की भी जरूरतें पूरी होती हैं। इससे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर होता है और प्रसव भी सामान्य तरीके से होने में मदद मिलती है।