गर्भवती महिलाएं धूप में घर से बाहर निकलने में करें परहेज

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– 6 माह तक के नवजात के लिए सिर्फ स्तनपान ही काफी, नहीं दें अन्य तरल पदार्थ
– भोजन में विविधिता से बेहतर पोषण संभव
लखीसराय, 12 अप्रैल-
गर्मी आगमन के साथ ही यानी शुरुआती दौर में ही तापमान अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। गर्म हवाओं का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। गर्म हवाएं यानी लू लगने की गंभीर अवस्था में इलाज नहीं मिलने पर मौत भी हो जाती है।  लू से बचने के लिए सही खानपान जरूरी है। ऐसे में विशेषकर नवजात शिशुओं व गर्भवती महिलाओं के पोषण का ख्याल रखा जाना जरूरी है। बेहतर प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की जरूरत भी है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को भोजन में हरी साग सब्जी की मात्रा बढ़ाने के साथ भरपुर मात्रा में पानी लेना चाहिए।  इसके अलावा मौसमी फल व दही व छाछ जैसी खाद्य पदार्थ का सेवन भी काफी उपयोगी है।
– धूप में नहीं निकलें गर्भवती महिलाएं :
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, लू के मद्देनजर गर्भवती महिलाएं गर्मी के मौसम में घर से निकलने में परहेज करें। अर्थात अति आवश्यकता पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि खाली पेट घर से बाहर न जाएं। लू से बचने के लिए बहुत अधिक देर तक खाली पेट बिल्कुल नहीं रहें। लू लगने की स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श जरुरी है। प्राथमिक उपचार के तौर पर ओआरएस का घोल दिया जाना चाहिए ताकि उल्टी व दस्त की समस्या को दूर किया जा सके। उन्होंने बताया, तेज धूप व गर्म हवा के बीच गर्भवती महिलाओं का निकलना घातक होता है। गर्भवती महिला को लू लगना उनके गर्भस्थ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। घर से बाहर निकलने से पहले पूरी सावधानी बरतें। छाता व तौलिये आदि का इस्तेमाल जरूर करें। बहुत ही आवश्यक होने पर ही पूरी सुरक्षा के साथ घर से बाहर निकलें। बाहर निकलने से पहले प्रचूर मात्रा में नीबू पानी या सत्तु आदि पी कर निकलना लू के असर को रोकता है। इसके साथ ही घर में इलेक्ट्रॉल व ओआरएस आदि भी रखें ताकि समय पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके। इनके नहीं रहने पर नींबू पानी चीनी और थोड़ा नमक का शरबत बना कर दिया जा सकता है।
– 6 माह तक के शिशुओं के लिए सिर्फ स्तनपान :
6 माह तक के शिशुओं के लिए सिर्फ स्तनपान ही पर्याप्त है। उन्हें कोई भी तरल पदार्थ अलग से नहीं दिया जाना चाहिए। यहां तक की पानी भी नहीं दिया जाये। शिशु को पूरी तरह अधिक से अधिक स्तनपान कराने से डायरिया एवं निमोनिया जैसे रोगों से बचाव संभव है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी भरपुर पोष्टिक आहार जैसे दाल व हरी सब्जी सहित तरल पदार्थ के सेवन को बढ़ाना चाहिए।  इससे स्तनपान के माध्यम से बच्चे को आवश्यक पोषण मिल पाता है। वहीं शिशु को गर्म हवा से बचाने के लिए उसे ठंडे व हवादार कमरे में रखें। कमरा उमस भरा नहीं होना चाहिए। शिशु को सूती कपड़ा ही पहनायें ताकि पसीना आसानी से सोख जाये। नायलॉन या टेरीकॉट कपड़े बच्चे को बिल्कूल नहीं पहनाया जाना चाहिए.
– ऐसे पहचाने लू के लक्षण :
 – तेज सिर दर्द का होना
– उल्टी या जी मचलाना
– बुखार का होना
– त्वचा का लाल, गर्म एवं सूखा होना( पसीना नहीं चलना)
– बेहोशी या चक्कर आना
– घबराहट या संशय का बढ़ जाना
– अत्यधिक आलस्य या सुस्ती का होना
– इन बातों का रखें पूरा ध्यान :
– खाली पेट घर से बाहर नहीं निकलें
– सुपाच्य एवं हल्के भोजन का करें सेवन
– अत्यधिक शीतल पेय पदार्थों के सेवन करने से बचें
– रात में कम से कम 8 घन्टे की नींद जरूर लें।

सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर 14 को टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा से मरीजों की होगी स्वास्थ्य जाँच 

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– सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर 14 अप्रैल को स्वास्थ्य जाँच शिविर का होगा आयोजन
– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी डीएम और सीएस को दिए जरूरी निर्देश
मुंगेर, 12 अप्रैल। 14 अप्रैल को पूरे प्रदेश के साथ-साथ जिला भर में आयुष्मान भारत योजना के तहत संचालित हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर चौथा स्थापना दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिला भर में संचालित सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर विशेष स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन किया जाएगा । जिसमें टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा के तहत मरीजों की स्वास्थ्य जाँच की जाएगी। जाँच के पश्चात मौजूद चिकित्सकों के द्वारा आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया जाएगा। स्वास्थ्य जांच शिविर के सफल संचालन को ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार जिला के सभी वीएचएसएनडी सत्र पर प्रातः 09 बजे से शाम 04 बजे तक शिविर का संचालन कराने, शिविर के सफल संचालन के आवश्यक संसाधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने, निर्बाध इंटरनेट सुविधा की व्यवस्था सहित कई अन्य जरूरी संसाधन की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।
– शिविर के सफल संचालन को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए हैं निर्देश :
प्रभारी सिविल सर्जन डाॅ. आनन्द शंकर शरण सिंह ने बताया कि हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के चौथे वर्षगाँठ के अवसर पर 14 अप्रैल को जिला के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा के तहत विशेष स्वास्थ्य जाँच शिविर आयोजित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसके सफल संचालन के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही शिविर के सफल संचालन के लिए चल रही है तैयारियाँ को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
– आशा और फैसिलिटेटर द्वारा लोगों को दी जा रही शिविर की जानकारी :
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज ने बताया कि 14 अप्रैल को जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटरों पर चौथे वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित होने वाले विशेष स्वास्थ्य जाँच शिविर की सफलता को लेकर स्वास्थ्य से जुड़ी आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर द्वारा अभियान चला अपने-अपने क्षेत्र के लोगों को जानकारी दी जा रही है। इस दौरान उक्त कर्मी घर- घर जाकर एक-एक इच्छुक और जरूरमंत व्यक्ति को शिविर में शामिल होकर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने के लिए प्रेरित भी कर रहै हैं।  ताकि अधिकाधिक लोग स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकें और शिविर का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके ।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस: ऑनलाइन समीक्षात्मक बैठक में शामिल हुए जिले के पदाधिकारी

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– 22 अप्रैल को जिले भर में मनाया जाएगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, 01 से 19 आयु वर्ग के सभी लाभार्थियों को खिलाया जाएगा अल्बेंडाजोल
– जिला के सभी सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों समेत आंगनबाड़ी केंद्रों पर खिलायी जाएगी दवा
खगड़िया, 12 अप्रैल।
आगामी 22 अप्रैल को खगड़िया सहित प्रदेश के 31 जिलों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। जबकि, 26 अप्रैल को माॅप-अप दिवस मनाया जाएगा। जिसकी सफलता को लेकर मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के तहत ऑनलाइन समीक्षात्मक बैठक की गई। जिसमें जिले के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, आईसीडीएस डीपीओ, जिला शिक्षा पदाधिकारी, डीसीएम समेत अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान राष्ट्रीय कृमि दिवस की सफलता को लेकर पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चल रही तैयारियों की समीक्षा की गयी। ताकि हर हाल में शत-प्रतिशत लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल का सेवन कराया जा सके और कार्यक्रम का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
– 01 से 19 आयु वर्ग के सभी लाभार्थियों को खिलाया जाएगा अल्बेंडाजोल :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, 22 अप्रैल को पूरे जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। जिसके तहत सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, मदरसा, संस्कृत विद्यालय, मदरसा, आंगनबाड़ी केंद्रों समेत अन्य संस्थानों के माध्यम से 01 से 19 आयु वर्ग के सभी लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल खिलाया जाएगा। जबकि, 26 अप्रैल को माॅप-अप दिवस के तहत छूटे लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल  खिलाया जाएगा। वहीं, उन्होंने बताया, उक्त कार्यक्रम की सफलता को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
– निर्धारित डोज के अनुसार खिलाई जाएगी दवा :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, उक्त कार्यक्रम के दौरान निर्धारित डोज के अनुसार दवाई खिलाई जाएगी। जिसमें 1 से 2 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 एमजी टेबलेट का आधा चूरकर पानी के साथ खिलाना है। 2 से 3 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 एमजी का एक टैबलेट चूरकर पानी के साथ खिलाना है। इसके साथ ही 3 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों को एक पूरा टैबलेट चबाकर खिलाना है। इसके बाद ही पानी का सेवन करना है। इस अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी समेत अन्य सहयोगी संगठन के कर्मियों से सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आवश्यक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।
– शारीरिक एवं मानसिक विकास बाधित करती है कृमि :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, बच्चों में कृमि संक्रमण, व्यक्तिगत अस्वच्छता तथा संक्रमित दूषित मिट्टी एवं सम्पर्क से होता है। कृमि के संक्रमण से बच्चों के पोषण स्तर एवं हीमोग्लोबिन स्तर पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है।  जिससे बच्चों का शारीरिक और बौद्धिक विकास प्रभावित होता है। वहीं, उन्होंने बताया, कृमि ऐसे परजीवी हैं, जो मनुष्य के आंत में रहते हैं। आंतों में रहकर ये परजीवी जीवित रहने के लिए मानव शरीर के आवश्यक पोषक तत्वों पर ही निर्भर रहते हैं। जिससे मानव शरीर आवश्यक पोषक तत्वों की कमी का शिकार हो जाता और वे कई अन्य प्रकार की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। खासकर बच्चों और किशोर एवं किशोरियों पर कृमि के कई दुष्प्रभाव पड़ते हैं। जैसे- मानसिक और शारीरिक विकास का बाधित होना, कुपोषण का शिकार होने से शरीर के अंगों का विकास अवरूद्ध होना, खून की कमी होना आदि जो आगे चलकर उनकी उत्पादक क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। कृमि का संचरण चक्र संक्रमित बच्चे के खुले में शौच से आरंभ होता है। खुले में शौच करने से कृमि के अंडे मिट्टी में मिल जाते और विकसित होते हैं। अन्य बच्चे जो नंगे पैर चलते हैं या गंदे हाथों से खाना खाते हैं या बिना ढके हुए भोजन का सेवन करते हैं ,आदि लार्वा के संपर्क में आकर संक्रमित हो जाते हैं। इसके लक्षणों में दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, उल्टी और भूख का न लगना आदि हैं। संक्रमित बच्चों में कृमि की मात्रा जितनी अधिक होगी उनमें उतने ही अधिक लक्षण परिलक्षित होते हैं। हल्के संक्रमण वाले बच्चों व किशोरों में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखाई पड़ते हैं।

घर-घर जाकर टीबी मरीजों की हो रही खोज

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-ज्यादा खतरा वाले संदिग्ध मरीजों को दी जा रही दवा
-2025 तक जिले को टीबी मुक्त बनाने का अभियान
बांका, 12 अप्रैल –
जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाना है। इसे लेकर घर-घर जाकर टीबी मरीजों की खोज हो रही है। खोज के दौरान यदि कोई संदिग्ध मिलता है तो उसकी तत्काल जांच की जाती है। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो उसे दवा के साथ पौष्टिक आहार के लिए राशि भी दी जा रही है। सीडीओ डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा ने बताया कि 24 मार्च से 15 अप्रैल तक टीबी मरीजों की खोज के लिए ग्रामीण स्तर पर सघन अभियान चल रहा है। इसमें नए मरीजों की तो खोज की ही जा रही है। साथ ही सघन आबादी वाले क्षेत्रों में जाकर टीबी को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा जिसके घर पर पहले से ही टीबी के मरीज हैं, उस घर के सभी लोगों की जांच की जा रही है। साथ में घर के वैसे सदस्य जिन्हें टीबी नहीं भी है, उसे दवा दी जा रही है, ताकि उस व्यक्ति में टीबी नहीं फैल सके।
जिले में टीबी उन्मूलन को लेकर अभियान तेजः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि टीबी को लेकर अभियान तेज हो गया है। 24 मार्च को हमलोगों ने टीबी दिवस मनाया। उसके बाद भी विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। टीबी मरीजों को हमलोग दवा के साथ पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए भी दे रहे हैं। इसके साथ-साथ कोई भी व्यक्ति अगर टीबी मरीज की सूचना देते हैं तो उसे भी पांच सौ रुपये विभाग की ओऱ से दिया जा रहा है। टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए विभाग हर कदम उठा रहा है। सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जागरूकता से ही टीबी जैसी बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
सरकारी अस्पतालों में जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्तः जिला पीएमडीटी कॉर्डिनेटर गणेश झा ने बताया कि 15 अप्रैल हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के जरिये टीबी मरीजों की लगातार खोज हो रही है। इसके अलावा जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की मुफ्त व्यवस्था है। हमलोग इस बात को सामुदायिक स्तर पर फैला रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर टीबी मरीजों की खोज के दौरान टीबी के लक्षण और बचाव की भी जानकारी दी जा रही है। लोगों के टीबी से बचने के उपाय बताए जा रहे हैं। साथ ही टीबी से बचने के लिए सही पोषण लेने के बारे में बताया जा रहा है। समाज को टीबी से मुक्त करने के लिए लोगों को शपथ भी दिलाई जा रही है। लोगों से कहा जा रहा है कि यदि कोई व्यक्ति टीबी का संदिग्ध मिलता है तो उसे तत्काल सरकारी अस्पताल लेकर जांच करवाएं।

मिशन इंद्रधनुष-4 के दूसरे चरण में लक्ष्य से भी ज्यादा बच्चों का किया गया टीकाकरण

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-11 अप्रैल तक चले अभियान में 10545 बच्चों के टीकाकरण का था लक्ष्य
-अभियान के दौरान जिले के 10565 बच्चों का कराया गया टीकाकरण
भागलपुर, 12 अप्रैल-
12 तरह की बीमारियों से बचाव को लेकर मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान के दूसरे चरण में 10,565 बच्चों का टीकाकरण किया गया, जबकि लक्ष्य 10,546 का ही था। सफलता का दर 100 प्रतिशत से अधिक रही। इसी तरह दूसरे चरण के अभियान के दौरान 2066 महिलाओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा था, जबकि 2069 महिलाओं का टीकाकरण किया गया। यहां भी सफलता 100 प्रतिशत से अधिक रही। जिले में चार से 11 अप्रैल तक मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान का दूसरा चरण चलाया गया। इससे पहले सात से 13 मार्च तक मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान के तहत पहला चरण चलाया गया था।, जिसमें 6834 बच्चों को टीका देने का लक्ष्य रखा गया था और 7044 बच्चों का टीकाकरण किया गया । यानी कि लगभग 103 प्रतिशत टीकाकरण हुआ था। इसी तरह 1200 महिलाओं का टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया था और 1261 महिलाओं का टीकाकरण किया गया था। यानी कि लक्ष्य के मुकाबले 105 प्रतिशत से भी अधिक लोगों का टीकाकरण किया गया था।
सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलता है बढ़ावाः जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता  बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलता है। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसलिए जिले के सभी लाभार्थियों की सूची बनाकर टीकाकरण किया गया। इसे लेकर एक और चरण चलेगा। उम्मीद है कि उसमें भी हमलोग बेहतर करेंगे। लोगों से मेरी अपील है कि जो लोग नियमित टीकाकरण नहीं करा पाएं हैं, वह दो मई से शुरू हो रहे तीसरे चरण के दौरान अपने नजदीकी शिविर स्थलों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि इंद्रधनुष अभियान के माध्यम से टीका से छूटी हुई गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जागरूक कर प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जाएगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरणः नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है। इसके माध्यम से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेएई (जापानी बुखार) के टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा अभियान में गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहता है।
दो मई से शुरू होगा तीसरा राउंडः इंद्रधनुष अभियान के तहत दो मई से तीसरा राउंड शुरू होगा। पहला राउंड 07 से 13 मार्च तक हो चुका है और दूसरा 4 अप्रैल से शुरू होकर 11 अप्रैल तक चला। जबकि तीसरा राउंड का 02 से 08 मई तक चलेगा। प्रत्येक राउंड में पूरे सप्ताह नियमित टीकाकरण का आयोजन किया जाएगा। सामुदायिक स्तर पर अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके, इसे लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गई है।

हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के चौथे वर्षगाँठ पर टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा से मरीजों की होगी स्वास्थ्य जाँच

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– जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटरों पर स्वास्थ्य जाँच शिविर का होगा आयोजन
– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी डीएम और सीएस को दिए जरूरी निर्देश

लखीसराय, 11 अप्रैल।
14 अप्रैल को पूरे प्रदेश के साथ-साथ जिले में भी आयुष्मान भारत योजना के तहत संचालित हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर का चौथा वर्षगाँठ मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिले में संचालित सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटरों पर विशेष स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन जाएगा। जिसमें टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा के तहत मरीजों की स्वास्थ्य जाँच की जाएगी। जाँच के पश्चात आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाएगा। वहीं शिविर के सफल संचालन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें सभी भीएचएसएनडी सत्र पर प्रातः 09 बजे से शाम 04 बजे तक शिविर का संचालन कराने, शिविर के सफल संचालन के आवश्यक संसाधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने, निर्बाध इंटरनेट सुविधा की व्यवस्था समेत अन्य जरूरी संसाधन की व्यवस्था सुनिश्चित कराने को कहा।

– शिविर के सफल संचालन को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए हैं निर्देश :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के चौथे वर्षगाँठ के अवसर पर 14 अप्रैल को जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा के तहत विशेष स्वास्थ्य जाँच शिविर आयोजित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसके सफल संचालन के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शिविर के सफल संचालन के लिए चल रही है तैयारियाँ को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

– आशा और फैसिलिटेटर द्वारा लोगों को दी जाएगी शिविर की जानकारी :
14 अप्रैल को जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटरों पर चौथे वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित होने वाले विशेष स्वास्थ्य जाँच शिविर की सफलता को लेकर स्वास्थ्य से जुड़ी आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर द्वारा अभियान चला अपने-अपने क्षेत्र के लोगों को जानकारी दी जाएगी। जिसके दौरान उक्त कर्मी घर-घर जाकर एक-एक इच्छुक और जरूरमंत व्यक्ति को शिविर में शामिल होकर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। ताकि अधिकाधिक लोग स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकें और शिविर का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।

राष्ट्रीय मातृत्व दिवस:  सुरक्षित मातृत्व को लेकर महिलाओं को किया गया जागरूक 

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– हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर इटहरी पर सीएचओ के नेतृत्व में आयोजित किया गया जागरूकता कार्यक्रम
– 13 मार्च से 21 जून तक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर सम्पूर्ण स्वास्थ्य और योग पर आयोजित किए जा रहे हैं विभिन्न कार्यक्रम
– इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी किए हैं दिशा- निर्देश
– 14 अप्रैल को मनाया जाता है हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का स्थापना दिवस
मुंगेर, 11 अप्रैल। सभी के लिए सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लक्ष्य को साकार करने में स्वास्थ्य विभाग हर स्तर पर प्रयासरत है। इसी क्रम में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर 21 जून को होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लेकर जिला में 13 मार्च से 21 जून तक योग के महत्व के प्रचार- प्रसार को लेकर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही इस दौरान सम्पूर्ण स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इस दौरान अन्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के  कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर आवश्यक दिशा- निर्देश भी दिया है। जारी पत्र में बताया गया है कि इस अवधि के दौरान प्रत्येक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ( स्वास्थ्य उपकेंद्र अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ) पर कम से कम 25 योग सत्र का आयोजन किया जाए। इस अवधि में प्रत्येक विकसित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर 14 अप्रैल  को हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर दिवस के अवसर पर योग सत्र संचालित करने का भी निर्देश दिया गया है । 18 अप्रैल से संचालित होने वाले प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य मेला के दौरान भी योग सत्र का संचालन कराने का निर्देश दिया गया है। वहीं इन गतिविधियों से संबंधित उत्कृष्ट चित्र भी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के डीपीसी विकास कुमार ने बताया कि गतिविधियों का आयोजन सर्वभौमिक स्वास्थ्य के उद्देश्य को पूरा करने की ओर उठाया गया एक प्रभावी कदम साबित होगा और समुदाय को इससे लाभ प्राप्त होगा।
क्या है हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर:
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण स्तर पर ब्लड शुगर बीपी,एचआईवी, टीबी, कोलेस्ट्रॉल इत्यादि 30 से ज्यादा प्रकार की जांच सुविधाएं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर होती है। इसके अलावा संबंधित बीमारियों के लिए सभी प्रकार की दवाइयां भी दी जाती हैं। उन दवाओं का किस प्रकार उपयोग किया जाए इसका भी परामर्श अस्पताल में आने वाले सभी लोगों को दिया जाता है। पहले प्राइमरी हेल्थ सेंटर में मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाता था। अब उसी केंद्र को ‘हेल्‍थ एंड वेलनेस सेंटर’ के तौर पर विकसित किया गया है। इस सेंटर पर कम्‍युनिकेबल और नॉन कम्‍युनिकेबल दोनों तरह की बीमारियों का इलाज होता है।
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोलने का उद्देश्य:
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोलने का मुख्य उद्देश जनमानस को सौहार्दपूर्ण वातावरण में विश्वसनीय गुणवत्तापूर्ण एवं विस्तारित प्राथमिक स्वास्थ सुविधा उपलब्ध कराना है। केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत गरीब कमजोर एवं मध्यम वर्ग के लोगों को सभी तरह की स्वास्थ्य उपलब्ध कराई जाती है।  ग्रामीणों को समय रहते हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व कैंसर, मैटरनल हेल्थ और डिलीवरी की सुविधा, नवजात और बच्चों के स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य सुविधा, कॉन्ट्रासेप्टिव सुविधा और संक्रामक, गैर संक्रामक रोगों के प्रबंधन की सुविधा, आंख, नाक, कान व गले से संबंधित बीमारियों का इलाज किया जाता है। गंभीर बीमारियों का लक्षण पता चलने के बाद मरीज को जिला अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है।
प्रत्येक वर्ष 11 अप्रैल को मनाया जाता है राष्ट्रीय मातृत्व दिवस :
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर इटहरी मुंगेर की सीएचओ अर्चना कुमारी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 11 अप्रैल को राष्ट्रीय मातृत्व दिवस मनाया जाता है। इसको लेकर सोमवार को यहां भी राष्ट्रीय मातृत्व दिवस पर सुरक्षित मातृत्व के लिए महिलाओं को जागरूक करने के के उद्देश्य से पोस्टर बैनर तैयार कर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें आशा कार्यकर्ता के साथ-साथ कई महिलाओं ने हिस्सा लिया।

सूरजनगर गाँव में कालाजार उन्मूलन को लेकर चल रहे सघन खोज अभियान का हुआ समापन 

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– अभियान के सफल संचालन के लिए जिलाधिकारी ने पूरी टीम को प्रशस्ति-पत्र देकर किया सम्मानित
– डीएमओ, डीभीबीडीसी, केयर डीटीएल, डीपीओ समेत पूरी टीम को किया गया सम्मानित
खगड़िया, 11 अप्रैल-
जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत सूरजनगर गाँव में कालाजार उन्मूलन को लेकर बीमारी फैलने के कारणों का पता लगाने के लिए चल रहे सघन खोज अभियान का सफलतापूर्वक समापन हो गया। अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। जिसमें जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार, डीभीबीडीसी बबलू सहनी, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, डीपीओ कृष्ण कुमार भारती, स्थानीय आशा कार्यकर्ता सहित टीम में शामिल सभी सदस्यों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर  जिलाधिकारी ने पूरी टीम के कार्यों की सराहना करते हुए  सभी सदस्यों के उज्जवल भविष्य की कामना की। वहीं, जिलाधिकारी ने कहा, अभियान का सफल क्रियान्वयन पूरी टीम की कड़ी मेहनत और अपनी जिम्मेदारी के सकारात्मक निर्वहन का नतीजा है। मैं इस कार्य के लिए टीम का नेतृत्व करने वाले जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार, डीभीबीडीसी बबलू सहनी, केयर डीपीओ कृष्ण कुमार भारती को बेहतर और मजबूत नेतृत्व के लिए धन्यवाद देता हूँ। साथ ही भविष्य में भी इसी तरह की पूरी मजबूती के साथ नेतृत्व की उम्मीद करता हूँ।
– 03 वर्ष एवं इससे अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों की हुई खून जाँच :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया, अभियान के दौरान मेडिकल टीम द्वारा 03 वर्ष एवं इससे अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों के ब्लड सैंपल लेकर जाँच की गयी। ताकि एक भी संक्रमित मरीज छूटे नहीं और सभी मरीजों को ससमय संक्रमण की जानकारी मिल सके। ताकि मरीजों का समय पर इलाज शुरू हो सके और अन्य लोग भी सुरक्षित रह सकें। साथ ही कालाजार से बचाव को लेकर व्यापक पैमाने पर अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया गया और आवश्यक जानकारी दी गई। इस सफल अभियान में टीम के एक-एक कर्मियों का सराहनीय योगदान रहा। इसके लिए मैं पूरी टीम को बधाई देता हूँ।
– लक्षण दिखते ही जाँच कराने को लेकर किया गया प्रेरित :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, अभियान के दौरान जहाँ एक-एक व्यक्ति  की जाँच की गयी। वहीं, लक्षण दिखते ही जाँच कराने के लिए प्रेरित भी किया गया। ताकि संबंधित लोगों को समय पर बीमारी की जानकारी मिल सके और आवश्यकतानुसार आगे का निर्णय लिया जा सके। साथ ही आगे भी पूरा गाँव सुरक्षित रह सके। वहीं, उन्होंने बताया, सरकारी अस्पतालों में जाँच एवं इलाज की मुफ्त समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। साथ ही इन बीमारियों से बचने के लिए जमीन पर नहीं सोएं । मच्छरदानी का नियमित रूप से उपयोग करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुककर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।
– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं । छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन समाग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक  छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

जागरूकता रथ के जरिये टीबी के प्रति किया जा रहा जागरूक

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-सन्हौला प्रखंड में लोगों को टीबी के लक्षण और इलाज की दी जा रही जानकारी
-2025 से पहले जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए चलाया जा रहा अभियान
भागलपुर, 11 अप्रैल-
जिले को 2025 से पहले टीबी से मुक्त बनाना है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार अभियान चला रहा है। इसी सिलसिले में कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) सन्हौला प्रखंड में जागरूकता रथ के जरिये लोगों को टीबी के प्रति जागरूक कर रहा है। ऑटो पर लाउडस्पीकर लगाकर गांव-गांव और घर-घर जाकर टीबी के लक्षण और उसके बचाव की जानकारी दी जा रही है। लोगों को दो हफ्ते तक लगातार खांसी होने, वजन कम होना, रात में पसीना आना समेत कई कारणों की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ-साथ इससे बचाव की भी जानकारी दी जा रही है।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की व्यवस्थाः टीबी का सरकारी अस्पतालों में जांच से लेकर इलाज तक की व्यवस्था मुफ्त है। साथ में दवा भी मुफ्त में दी जाती है। इसलिए अगर टीबी के लक्षण दिखाई दे तो संकोच नहीं करना चाहिए। पैसे की चिंता किए बगैर नजदीकि स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करवानी चाहिए। जांच भी मुफ्त में होती है। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो उसका तत्काल इलाज शुरू कर देना चाहिए। इन बातों की जानकारी जागरूकता रथ के जरिये दी जा रही है।
पौष्टिक आहार के लिए दी जाती है राशिः केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि सरकार न सिर्फ मुफ्त में लोगों का इलाज कर रही है, बल्कि टीबी से पीड़ित व्यक्ति को दवा के साथ-साथ पांच सौ रुपये प्रति महीने पौष्टिक भोजन के लिए भी देती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को टीबी की बीमारी है तो वह निःसंकोच इलाज करवाएं। अगर इलाज नहीं करवाएंगे तो यह एक संक्रामक बीमारी है। एक व्यक्ति से यह बीमारी कई लोगों में फैल सकती है। उसके बाद उससे फिर कई लोगों में फैल सकती है।
बीच में नहीं छोड़ें दवाः सीडीओ डॉ. दीनानाथ ने बताया कि टीबी के मरीजों को बीच में दवा नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करने से एमडीआर टीबी होने का खतरा रहता है। एमडीआर टीबी हो जाने के बाद उससे उबरने में समय लग जाता है। वैसे आमतौर पर टीबी की बीमारी छह महीने तक दवा खाने के बाद ठीक हो जाती है। कुछ लोग पहले भी ठीक हो जाते हैं और कुछ को अधिक समय भी लगता है। लेकिन एमडीआर टीबी ठीक होने में काफी समय लग जाता है, इसलिए टीबी के मरीज बीच में दवा नहीं छोड़ें।

भागलपुर जिले के 15 नए आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण के प्रति किया गया जागरूक

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गर्भवती और धातृ महिलाओं के साथ बच्चों के सही पोषण की जानकारी दी गई
15 आंगनबाड़ी केंद्रों का आईसीडीएस और मनरेगा ने मिलकर किया है निर्माण
भागलपुर, 11 अप्रैल
आईसीडीएस ने मनरेगा के साथ मिलकर बिल्डिंग एस लर्निंग एड (बाला) के तहत जिले में 15 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण किया है। इन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सोमवार को पोषण को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर काफी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे। इस दौरान लोगों को सही पोषण के बारे में जागरूक किया गया। गर्भवती व धातृ महिलाओं के साथ-साथ नवजात शिशुओं के पोषण के बारे में लोगों को बताया गया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगे स्टॉल पर स्वस्थ बच्चा, देश अच्छा और हमें चाहिए अच्छा पोषण, दूर रहेगा तभी कुपोषण जैसे नारे तख्तियों पर लिखे हुए थे।
सुल्तानगंज की करहरिया पंचायत में आईसीडीएस की डीपीओ सीलिमा कुमारी की मौजूदगी में एक सफल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि पोषण को लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों को घर की गर्भवती और धातृ महिलाओं के पोषण के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही नवजात की देखभाल के बारे में बताया गया। नवजात को किस अवस्था में क्या पोषण देना चाहिए, इसके बारे में लोगों को बताया गया। इसके अलावा जगदीशपुर की जमनी पंचायत, शाहकुंड की दीनदयालपुर-1 और 2 पंचायत, सन्हौला की बड़ीनाकी, ताड़र और धुआवै में दो जगह, गोपालपुर की अभिया पछगछिया, कहलगांव की ओरियप में दो जगह और सिया, रंगरा की भवानीपुर, सबौर की सरधो और सुल्तानगंज की कटहारा पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया गया। वहां पर भी लोगों को गर्भवती और धातृ महिलाओं के साथ नवजात के सही पोषण के बारे में जागरूक किया गया।
छह महीने तक स्तनपान जरूरीः डीपीओ ने बताया कि नवजात को छह महीने तक स्तनपान कराने की सलाह दी गई। इससे बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे वह भविष्य में बीमारियों की चपेट में आने से बचा रहता है। साथ ही अगर बीमार हो भी जाता है तो उससे आसानी से उबर जाता है। छह महीने के बाद बच्चों को पूरक आहार देना चाहिए। बच्चा जब छह माह का हो जाता है तो सिर्फ मां के दूध से उसका काम नहीं चलता है, इसलिए उसे खीर, खिचड़ी, दलिया इत्यादि पूरक आहार देना चाहिए। इससे उसे सही पोषण मिल पाता है। इस बात की जानकारी पोषण अभियान के दौरान मौजूद रहे ग्रामीणों को दी गई।