“किशोरों की विशाल क्षमता को अनलॉक किया जाना चाहिए; वे बिहार की आबादी का 22.5 प्रतिशत हैं” -जल्पा रत्न, चीफ ऑफ  फील्ड सर्विसेज, यूनिसेफ इंडिया 

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“किशोर विकास और सशक्तिकरण के लिए मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय की है आवशयता ” – हरजोत कौर बुमराह, मिशन निदेशक, महिला एवं बाल विकास निगम
बच्चों और किशोरों के समग्र विकास के लिए क्षेत्रीय हस्तक्षेपों को देखने के लिए यूनिसेफ की राष्ट्रीय टीम बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर
“पूर्णिया में बिहार का पहला सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन प्रकोष्ठ सभी विभागों के समन्वय से संचालित होग””- डीएम पूर्णिया
सिविल सर्जन अररिया को यूनिसेफ द्वारा सौंपा गया 600 लीटर ऑक्सीजन प्लांट
पटना, 8 अप्रैल 2022
तीन  दिन  के  बिहार  दौरे  पर  दिल्ली  से  आएं यूनिसेफ इंडिया की चीफ ऑफ फील्ड सर्विसेज, सुश्री जल्पा  रत्ना ने आज  सुश्री हरजोत कौर बुमराह, मिशन निदेशक, महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार सरकार के साथ मुलाकात क। उनके साथ सुश्री नफीसा बिंते शफीक, फील्ड ऑफिस की प्रमुख, यूनिसेफ बिहार और अन्य वरिष्ठ अधिकारि भी थे।
लैंगिक -समानता पर एक मजबूत फोकस के साथ बिहार में किशोर सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए एमडी, डब्ल्यूसीडीसी द्वारा दिखाए गए नेतृत्व की सराहना करते हुए, सुश्री जल्पा रत्ना ने कहा, “मैं लैंगिक सशक्तिकरण के प्रति बिहार में सर्वोच्च नेतृत्व की प्रतिबद्धता देखकर बहुत उत्साहित हूं। बिहार उन् चुनिंदे राज्यों में से एक  है जो बच्चों और महिलाओं से संबंधित अपनी नीतियों और कार्यक्रमों में लिंग-परिवर्तनकारी दृष्टिकोण को शामिल करने की दिशा में ठोस प्रयास कर रहा है।
सुश्री जल्पा ने कहा कि यूनिसेफ जन्म से लेकर वयस्कता तक सभी जीवन-चक्र चरणों में बच्चों और किशोरों के अधिकारों और समावेशी विकास को सुनिश्चित करने में सरकार का समर् करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह देखकर खुशी होती है कि 22 जिलों में यूनिसेफ के  सहयोग  से  चल  रहा  उड़ान कार्यक्रम किशोर लड़कियों और लड़कों को बाल विवाह, बाल श्रम, दुर्व्यवहार और हिंसा के मुद्दों को हल करने में  सशक्त बना रहा है।।
एमडी, डब्ल्यूसीडीसी, सुश्री हरजोत कौर बुमराह ने यूनिसेफ के तकनीकी  सहयोग  की सराहना की और कहा, “हम 38 जिलों में उड़ान पहल को बढ़ाने की परिकल्पना कर रहे हैं और यूनिसेफ को अधिक प्रभावी परिणामों के लिए कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने में हमारी सहयोग करना  होगा। हम बिहार के विकास आयुक्त के नेतृत्व में किशोर कार्यक्रमों के लिए एक मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय तंत्र स्थापित करेंगे। सबसे हाशिए के किशोरों तक पहुंचने के लिए हम महादलित विकास निगम के साथ भी काम कर रहे हैं।
यूनिसेफ की राष्ट्रीय टीम से फील्ड सर्विसेज की प्रमुख, सुश्री जल्पा रत्ना और सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन (एसबीसी) अनुभाग के प्रमुख, श्री सिद्धार्थ श्रेष्ठ बिहार राज्य में तीन दिवसीय दौरे पर है।  उनके साथ यूनिसेफ बिहार की प्रमुख, सुश्री  नफीसा बिंते शफीक, कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पांडेय और यूनिसेफ बिहार के वरिष्ठ अधिकारी भी थे ।
पिछले दो दिनों में उन्होंने यूनिसेफ द्वारा समर्थित बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा के लिए विभिन्न हस्तक्षेपों को देखने के लिए पूर्णिया का दौरा किया और सरकारी अधिकारियों, फील्ड कार्यकर्ता, पीआरआई, पार्टनर-एनजीओ और बच्चों और किशोरों सहित समुदायों के साथ बातचीत की।
सुश्री जल्पा रत्ना न, सीएफएस, यूनिसेफ इंडिया, ने अररिया के सिविल सर्जन डॉ विधान चंद्र सिंह को यूनिसेफ  की  और  से 600 लीटर ऑक्सीजन प्लांट सौंपा।
टीम को कस्बा मिडिल स्कूल के बच्चों से मिलकर और उन्हें यूनिसेफ द्वारा प्रदान किए गए टैबलेट का उपयोग करते हुए देखकर बहुत खुशी हुई। यूनिसेफ ने पूर्णिया के कस्बा ब्लॉक में 100 टैबलेट (उनके पाठ्यक्रम के अनुसार पाठों के साथ प्री-लोडेड) के साथ 10 स्कूलों का समर्थन किया है, जो कक्षा IV से VII के 500 स्कूल जाने वाले बच्चों को और १६० स्कूल से छूटे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा  में लाने की  मदद कर रही  हैं।
“महामारी के दौरान स्कूल बंद होने के कारण बच्चों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। जिन बच्चों के पास डिजिटल डिवाइस, फोन और इंटरनेट तक पहुंच नहीं है, वे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं”।
जल्पा रत्ना ने कहा, “हमें उम्मीद है कि इस पायलट के परिणाम बिहार सरकार डिजिटल डिवाइड को पाटने पर ध्यान देगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी बच्चा/बच्ची शिक्षा से वंचित न रहे”।
यूनिसेफ की टीम ने पूर्णिया के जिला मजिस्ट्रेट श्री राहुल कुमार से मुलाकात की और उन्हें आकांक्षी जिलों के सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में जिलों के प्रदर्शन को सुधारने में  और बिहार में पहले  बाल अनुकूल पुलिस स्टेशन स्थापित करने में उनके अनुकरणीय नेतृत्व के लिए बधाई दी ।
जिला मजिस्ट्रेट राहुल कुमार कुमार ने यूनिसेफ को उनके तकनीकी समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और यूनिसेफ टीम द्वारा की गई सभी टिप्पणियों और सिफारिशों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने पूर्णिया में बिहार के पहले सामाजिक व्यवहार संचार प्रकोष्ठ की स्थापना के लिए यूनिसेफ को बधाई दी और सभी विभागों के समन्वय के साथ ही  सेल के  संचालन को  सुद्रढ़ करने  का  आश्वासन दिया ।
यूनिसेफ की टीम ने अपने भ्रमण के दौरान मातृ एवं नवजात इकाई में पहला लक्ष्य प्रमाणित मॉडल लेबर रूम देखा ,विशेष और नवजात देखभाल इकाइयां; कंगारू मदर केयर (केएमसी) और पूर्णिया के जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र का भी दौरा किया।
टीम ने जिला बाल संरक्षण इकाई, स्वाभिमान परियोजना, चाइल्ड  केयर संस्थान, पानी और स्वच्छता (WASH, आपदा से बचाव, और शिक्षा के क्षेत्र में ुनीसेफ के तकनीकी सहयोग से किये जा रहे हस्तक्षेपों  को देखा और उन्हें और प्रभावी बनाने पर जिले के विभिन्न अधिकारीयों के साथ विचार विमर्श किया।
सुश्री जालपा ने महामारी के दौरान अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं, जीविका दीदी, साथ ही सुरक्षा प्रहरी (सामुदायिक स्वयंसेवकों) और एनजीओ भागीदारों को उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए बधाई दी।
यूनिसेफ के अधिकारी श्री शिवेंद्र पांडेय, कार्यक्रम प्रबंधक, डॉ पुष्पा जोशी, शिक्षा विशेषज्ञ, श्री रबी नारायण परी, पोषण विशेषज्ञ, डॉ साला सिद्धार्थ रेड्डी, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, सुश्री मोना सिन्हा, एसबीसी विशेषज्ञ, सुश्री गार्गी साहा, बाल सुरक्षा विशेषज्ञ श्री प्रभाकर सिन्हा, वॉश विशेषज्ञ और श्री बांकू बिहारी सरकार, आपातकालीन अधिकारी यात्रा के दौरान उपस्थित प्रमुख अधिकारी थे।

एईएस/जेई से बचाव: उचित प्रबंधन और तैयारी को ले प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी व स्वास्थ्यकर्मियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण : प्रभारी सिविल सर्जन 

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– एईएस का एक भी केस होने के बाद तत्काल की जाएगी जिला नियंत्रण कक्ष की स्थापना : डीभीबीडी कंट्रोल ऑफिसर
– सदर अस्पताल में एईएस/जेई पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर
मुंगेर, 8 अप्रैल-
एईएस/जेई से बचाव के लिए सही प्रबंधन और तैयारी को ले प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उक्त बात शुक्रवार को प्रशिक्षण शिविर में स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और  स्वास्थ्य कर्मियों को सम्बोधित करते हुए  प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने कही। उन्होंने बताया कि एईएस/जेई मुजफ्फरपुर सहित अन्य कई जिलों में मुख्य रूप से एक्टिव है। लेकिन यह अन्य जिलों में भी एक्टिव हो सकता है। हालांकि मुंगेर में अभी तक एईएस/जेई का कोई भी केस डिटेक्ट नहीं हुआ है । कहा कि एईएस से बचाव के लिए किए जाने वाले प्रबंधन और तैयारी के प्रति जागरुकता अभियान के तहत आप लोगों को बुलाया गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि एईएस पर सरकार काफी जोर दे रही है। अभी एईएस का मौसम है। इस मौसम में एईएस के काफी मामले देखने को मिलते हैं। हालांकि मुंगेर  में आज तक एईएस का एक भी केस डिटेक्ट नहीं हुआ है। हम सालों से यहां कार्यरत हैं, यहां आज तक इस बीमारी का कोई मरीज नहीं मिला है। बावजूद इसके यदि मुंगेर में एईएस/जेई का एक भी केस डिटेक्ट होता है तो उससे निपटने के लिए हमलोग पूरी तरह से तैयार हैं। इसके लिए प्रभारी सिविल सर्जन से बात कर बेड सहित तमाम आवश्यक तैयारियां कर ली गई हैं। इसके बाद जिला एईएस कंट्रोल रूम की भी स्थापना कर ली जाएगी और इसके माध्यम से मॉनिटरिंग की जाएगी।
मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ को एईएस की ट्रेनिंग दे रहे जिला फाइलेरिया पदाधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि मैंने राजधानी पटना स्थित पीएमसीएच में एईएस/जेई पर आयोजित राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि एईएस/जेई को लेकर बिहार सरकार के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) को लेकर मेडिकल ऑफिसर को सेंसिटाइजड किया जा रहा है। हालांकि अभी तक मुंगेर में एईएस/जेई का कोई केस डिटेक्ट नहीं हुआ बावजूद इसके यदि कोई केस डिटेक्ट होता है तो सदर हॉस्पिटल से लेकर पीएचसी लेवल पर इस बीमारी से बचने के लिये क्या तैयारी करनी है, बेहतर इलाज के लिए किस प्रकार का प्रबंधन करना है, इस दौरान क्या सावधानी बरतनी है, इसको लेकर  डॉक्टर्स की क्या रिवाइज्ड एसओपी होगी इसको लेकर विस्तार पूर्वक जानकारी दी जा रही है।
इस अवसर ओर डब्ल्यूएचओ के रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ. एजिला हसन, डिस्ट्रिक्ट वेक्टर डिजीज कंट्रोल ऑफिसर संजय विश्वकर्मा, डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंस्लटेंट पंकज कुमार प्रणव, डीसीएम निखिल राज सहित स्वास्थ्य विभाग के कई पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

सही पोषण लेकर टीबी से करें अपना बचाव: सीडीओ

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-2025 तक टीबी को खत्म करने को लेकर चल रहा अभियान
-सरकारी अस्पतालों में जांच से लेकर दवा की है मुफ्त व्यवस्था
बांका, 8 अप्रैल।
टीबी मुक्त बिहार बनाने के लिए स्वास्थय विभाग लगातार प्रयासरत है। 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त करने के लिए बिहार के अलग-अलग जिलों में जनआंदोलन कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसे लेकर जागरूकता कार्य़क्रम, निःशुल्क जांच शिविर और एक्टिव केस फाइंडिंग के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। सरकार के टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सभी टीबी मरीजों को बेहतर और नियमित उपचार प्रदान किया जा रहा है।
सीडीओ डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा ने बताया कि जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने के लिए हमलोग प्रयासरत हैं। इसे लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को टीबी से बचने के लिए सलाह दी जा रही है। लोग उस पर अमल करें। उन्होंने कहा कि टीबी से बचाव के लिए सही पोषण भी जरूरी है। अगर सही पोषण नहीं मिलेगा तो लोग कुपोषण के शिकार हो जाएंगे और उस पर टीबी की चपेट में आने का खतरा रहता है। इसलिए लोगों को संतुलित आहार लेना चाहिए। आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और मिनरल्स की मात्रा जरूर होनी चाहिए।
घनी आबादी वाले इलाके में ज्यादातर मामलेः डॉ. सिन्हा ने कहा कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
बीच में नहीं छोड़ें दवाः डॉ. सिन्हा कहते हैं कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं ,तब तक दवा खाते रहें।
टीबी के ये हैं लक्षण
1. दो हफ़्ते या अधिक खांसी आना- पहले सूखी खांसी तथा बाद में बलगम के साथ खून का आना।
2. रात में पसीना आना-चाहे मौसम ठंडे का क्यों न हो।
3. लगातार बुखार रहना
4.थकावट होना
5.वजन घटना
6.सांस लेने में परेशानी होना

बचाव के ये हैं तरीके
1. जांच के बाद टी.बी.रोग की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें।
2.मास्क पहनें तथा खांसने या छींकने पर मुंह को पेपर नैपकीन से कवर करें।
3.मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें।
4.मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहें। एसी से परहेज करें।
5.पौष्टिक खाना खाएं। योगाभ्यास करें।
6.बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तम्बाकू, शराब आदि से परहेज करें।
7. भीड़भाड़ वाली गंदी जगहों पर जानें से बचें।

लखीसराय जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की एएनसी जाँच आज 

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– एएनसी जाँच के पश्चात गर्भवती को दी जाएगी आवश्यक चिकित्सा परामर्श
– राज्य स्वास्थ्य समिति के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने पत्र जारी कर राज्य के सभी सिविल सर्जन को दिए आवश्यक निर्देश
लखीसराय, 08 अप्रैल-
शनिवार को जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी, रेफरल एवं अनुमंडलीय व जिला अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर आयोजित कर प्रसव पूर्व (एएनसी) जाँच की जाएगी। जहाँ गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जाँच की जाएगी और जाँच के पश्चात आवश्यक चिकित्सा परामर्श भी दी जाएगी। जिसमें रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ समेत अन्य आवश्यक चिकित्सा परामर्श विस्तार पूर्वक दिया जाएगा। ताकि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सके और मातृ-शिशु मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित हो सके। इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (मातृ स्वास्थ्य) डाॅ सरिता ने पत्र जारी कर राज्य के सभी सिविल सर्जन समेत अन्य चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
– सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए हैं आवश्यक निर्देश :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) महिलाओं की शुरुआती दौर से ही संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता को स्वास्थ्य अवलोकन करना है। प्रसव के 45 वें दिन गृह भ्रमण कर आशा कार्यकर्ता को स्वास्थ्य अवलोकन कर एएनएम के माध्यम से स्थानीय प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को रिपोर्ट उपलब्ध करानी है। इस कार्य के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि के रूप 500 रुपये दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया, शनिवार को आयोजित होने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत एएनसी जाँच शिविर की सफलता को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से सभी लाभार्थियों तक शिविर की जानकारी उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराने को कहा गया है। ताकि अधिकाधिक योग्य लाभार्थियों की जाँच और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
– गर्भवती महिलाओं की  होगी समुचित जाँच :
डीपीसी सुनील कुमार ने बताया, आयोजित शिविर में सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं की समुचित स्वास्थ्य जाँच की जाएगी। जिसमें मेडिकल टीम द्वारा गर्भवती महिलाओं की ब्लड, यूरिन, एचआईवी, ब्लड ग्रुप, बीपी, हार्ट-बीट आदि की भी जाँच की जाएगी। साथ ही प्रसव अवधि के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने के लिए जागरूक किया जाएगा।
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी :
प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत जाँच करानी चाहिए। दरअसल, समय पर जाँच कराने से किसी भी प्रकार की परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता चल जाता और पता लगने पर ही उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक माह की नौ तारीख को पीएचसी स्तर पर मुफ्त एएनसी जाँच की व्यवस्था की गई है। ताकि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार की अनावश्यक शारीरिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिल सके । साथ ही सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है।

आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया एनीमिया प्रबंधन का प्रशिक्षण 

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– जिले के गोगरी रेफरल अस्पताल की आशा कार्यकर्ताओं को मिला प्रशिक्षण
– एनीमिया से बचाव से संबंधित दी गई जानकारी, लोगों को करेंगी जागरूक
खगड़िया, 08 अप्रैल-
जिले के गोगरी रेफरल अस्पताल में तैनात आशा कार्यकर्ताओं को एनीमिया प्रबंधन से संबंधित विषय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण रेफरल अस्पताल के बीसीएम प्रभाकर कुमार एवं केयर इंडिया की प्रखंड प्रबंधक नीलम सयानी द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद आशा कार्यकर्ताओं को एनीमिया से बचाव के लिए विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ एनीमिया के कारण, लक्षण, उपचार एवं इससे बचाव के लिए बरती जाने वाली सावधानियाँ व सर्तकता की भी जानकारी दी गई। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने बाद सभी आशा कार्यकर्ता अपने-अपने पोषक क्षेत्र के लोगों को बेहतर तरीके से जागरूक कर सके और एनीमिया मुक्त समाज निर्माण को बढ़ावा मिल सके।
– महिलाओं के बीच आशा कार्यकर्ता आयरन की गोली करेंगी वितरित :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, प्रशिक्षण के दौरान मौजूद आशा कार्यकर्ताओं को एनीमिया प्रबंधन से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियाँ विस्तारपूर्वक दी गई। जिसके दौरान मौजूद सभी प्रतिभागियों को बताया गया कि एनीमिया से बचाव के लिए सभी महिलाओं को जागरूक करना है। भीएचएसएनडी सत्र के दौरान 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की सभी महिलाओं (जो गर्भवती अथवा धात्री न हों) को साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड लाल गोली अनुपूरण के संबंध में जागरूक किया जाएगा एवं सप्ताह में एक दिन के सेवन के लिए वितरित भी की जाएगी।
– एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीन युक्त आहार जरूरी :
बीसीएम प्रभाकर कुमार ने बताया, प्रशिक्षण के दौरान मौजूद सभी प्रतिभागियों को एनीमिया के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। जिसमें बताया गया कि एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीन युक्त आहार का सेवन बेहद जरूरी है। यह बीमारी खून की कमी से होती है। इसलिए, इससे बचाव के लिए आयरन युक्त खाना का भी सेवन करना जरूरी है। दरअसल, शरीर में पर्याप्त आयरन रहने से इस बीमारी की संभावना ना के बराबर रहती है। इसलिए, खान-पान एवं रहन-सहन का विशेष ख्याल रखें । सकारात्मक बदलाव ही बीमारी से बचाव का बड़ा उपचार है। यह बीमारी खून (रक्त) में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन कम होने से होता है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराना चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए। वहीं, उन्होंने बताया, प्रशिक्षण प्राप्त सभी प्रतिभागी अपने-अपने पोषक क्षेत्र की महिलाओं को उक्त जानकारी देते हुए एनीमिया से बचाव के लिए जागरूक करेंगी।
– आयरनयुक्त खाना का करें सेवन :
केयर इंडिया की प्रखंड प्रबंधक नीलम सयानी ने बताया, आयरन की कमी के कारण एनीमिया होती है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आहार बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने से बचाव होगा, अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत और परेशानी बन सकती है। इससे बचाव के लिए प्रोटीन युक्त खाना का सेवन भी जरूरी है। जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूँगफली , मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। जो कि आपके शरीर की कमी को पूरी करता  एवं हीमोग्लोबिन जैसी कमी भी दूर होती है। इससे  एनीमिया बीमारी से बचाव होता है।
– ये हैं एनीमिया के प्रारंभिक लक्षण :
एनीमिया के बीमारी के शुरुआती लक्षण -थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द आदि  होना है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराएं।

स्वच्छता से ही बीमारियों से होगा बचावः डॉ. आशुतोष

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-जगदीशपुर सीएचसी में चलाया गया स्वच्छता अभियान
-स्वच्छता पखवाड़ा के तहत जिले में चल रहा अभियान
भागलपुर, 8 अप्रैल-
जिले में एक से 15 अप्रैल तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसके तहत जिलेभर में कार्यक्रम हो रहे हैं। इसी के तहत जगदीशपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान में डॉक्टर से लेकर स्वास्थ्यकर्मी तक जुड़े और लोगों से स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई। सभी लोगों को घर के आसपास सफाई रखने के लिए कहा गया। स्वच्छता अभियान में सीएचसी प्रभारी डॉ. आशुतोष कुमार, बीएचएम अनिरुमा, बीसीएम संजय कुमार और केयर इंडिया के बीएम आशुतोष कुमार भी मौजूद थे।
प्रभारी डॉ. आशुतोष ने कहा कि कई बीमारियों का जड़ गंदगी है। गंदगी रहने के कारण लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में आते हैं। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए लोगों को साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। घर के आसपास गंदगी नहीं होने देना चाहिए। नियमित तौर पर लोगों को सफाई पर ध्यान देना चाहिए। घर के आसपास जलजमाव भी नहीं होने देना चाहिए। नाले की नियमित तौर पर सफाई होती रहनी चाहिए। ऐसा करने से मच्छर नहीं पनप सकेगा, जिससे लोगों का कई तरह की बीमारियों से बचाव होगा। मच्छर से कई तरह की बीमारी होने का खतरा रहता है। घर के आसपास गड्ढे सबको भरकर रखना चाहिए, ताकि जलजमाव नहीं हो सके।
कोरोना के बाद लोग हुए जागरूकः डॉ. आशुतोष ने बताया कि कोरोना काल के बाद लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता आई है, लेकिन अभी औऱ सजग रहने की जरूरत है। जब कोरोना था तो लोग मास्क पहनते थे, सामाजिक दूरी का पालन करते थे। साथ ही नियमित रूप से सफाई करते थे, लेकिन जब से कोरोना के केस मिलने कम हुए हैं, लोग थोड़े लापरवाह हो गए हैं। अब कम लोग ही मास्क पहनते  और सामाजिक दूरी का पालन करते हैं। लेकिन साफ-सफाई के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इसे नियमित तौर पर करना चाहिए। सफाई के लिए कोरोना का इंतजार करने की कोई जरूरत नहीं है।
जहां दिखे गंदगी करें सफाईः डॉ. आशुतोष ने कहा कि सफाई का कोई मौका नहीं होता है। जहां भी गंदगी दिखे उसे साफ कर दें। अभी भले ही स्वच्छता पखवाड़ा चल रहा है, लेकिन सफाई कार्यक्रम हमेशा चलते रहना चाहिए। ऐसा नहीं कि अभी स्वच्छता पखवाड़ा चल रहा है तो सफाई कर रहे हैं, लेकिन जैसे ही पखवाड़ा खत्म होगा सफाई पर से ध्यान हट जाएगा। इस तरह की लापरवाही नहीं करें और नियमित तौर पर सफाई करते रहें। अभी गर्मी का मौसम है। ऐसे मौसम में गंदगी से कई तरह के रोग होने का खतरा रहता है, इसलिए सफाई करना नहीं भूलें।

पटना शहर को स्वच्छता में नंबर 1 बनाने के लिए दें अपना फीडबैक: अनिमेष कुमार पराशर

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• 1 मार्च से 15 अप्रैल तक जारी है स्वच्छता मतदान
• पटना शहर के निवासी आगे आकार बने स्वच्छता मतदान का हिस्सा
पटना, 08 अप्रैल 2022
स्वच्छता बेहतर स्वास्थ्य की आधारशिला होती है। कोरोना जैसे महामारी ने भी स्वच्छता की जरूरत को उजागर किया है। स्वच्छता व्यक्तिगत विकास के साथ आपके शहर की भी स्वच्छ सोच को दिखाता है। इस दिशा में देशभर में 1 मार्च से 15 अप्रैल तक स्वच्छता मतदान चलाया जा रहा है। पटना शहर में भी नगर निगम द्वारा शहर को साफ़ सुथरा रखने की मुहीम जारी है और सभी जगहों पर घर से कचरे के उठाव का प्रबंध किया गया है। इसके अलावा भी नगर निगम शहर को हर तरीके से स्वच्छ रखने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए जरूरी है कि पटना के लोग  भी स्वच्छता सर्वेक्षण में मतदान करें . इस मतदान का हिस्सा बनकर शहर के निवासी शहर को और स्वच्छ बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं.
पटना शहर के निवासी आगे आकार बने स्वच्छता मतदान का हिस्सा
नगर आयुक्त, पटना नगर निगम अनिमेष कुमार पराशर ने कहा कि पटनावासी अधिक से अधिक संख्या में इस स्वच्छता मतदान का हिस्सा बनें।अपने बहुमूल्य मतदान के जरिये अपनी राय रखकर नगर निगम को और बेहतर तरीके से अपने कार्यों को संपादित करने में सहयोग करें. अनिमेष पराशर ने कहा कि पटना नगरपालिका पटना को स्वच्छ बनाने में जुटा है। साथ ही लोगों से अपील कर रही है कि  शहर को स्वच्छ रखने में पटना नगर निगम का सहयोग करें।
ओटीपी से घबराएं नहीं:
स्वच्छता सर्वेक्षण में  15 अप्रैल तक ही मतदान किया जा सकता है। इसलिए अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
कोई भी पटना निवासी https://ss-cf.sbmurban.org/#/feedback साईट पर जाकर मतदान कर सकते हैं। मतदान में मात्र 5 प्रश्नों का उत्तर देना है और इससे नगर निगम को अपने काम को बेहतर तरीके से करने में मदद मिलेगी।  स्वच्छता मतदान को निष्पक्ष बनाने के लिए इस दौरान आपको वन टाइम पासवर्ड(ओटीपी) डालना होगा। यह आपके मोबाइल नंबर पर आएगा। इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
5 प्रश्नों का जवाब देकर आप बन सकते हैं मतदान का हिस्सा:
क्या हमारा पटना शहर स्वच्छता में पूरे भारत में नंबर 1 की पोजीशन पर आ सकता है?  क्या आपके द्वारा पटना शहर को स्वच्छता में नंबर 1 शहर बनाने के सिर्फ आपके द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में https://ss-cf.sbmurban.org/#/feedback  के माध्यम से अपना फीडबैक दर्ज किया है?
क्या आप अपने घर में गीले एवं सूखे कचरे को अलग अलग करते हैं?  क्या आपके घर पर प्रतिदिन कचरा उठाने वाली गाड़ी आती है? जैसे सवालों का जबाब हाँ या नहीं में देना का विकल्प आपको मिलेगा।  प्रश्नों के उत्तर के उपरांत पटना वासी अपना नाम, मोबाइल नंबर  तथा हस्ताक्षर कर अपना मत जमा कर सकते हैं और ऑनलाइन मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह से सरल रखी गयी है।

यूनिसेफ और SPW द्वारा कोविड -19 की रोकथाम  पर युवा  वालंटियर्स  का  उन्मुखीकरण

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पटना, 7 अप्रैल
“जब तक सभी सुरक्षित नहीं हैं तब तक कोई सुरक्षित नहीं है। युवा अपने परिवरो और समुदाय मे COVID उपयुक्त व्यवहार (CAB) सम्बंधित जागरूकता फैला सकते है। बिहार सरकार 12-17 का  बच्चों और किशोरों के बीच टीकाकरण बढ़ाने पर कार्य कर रही है । युवा स्वयंसेवक इसमें तेजी लाने में मदद कर सकते हैं और एलिजिबल व्यक्तियों  और बुजुर्गों को दूसरी खुराक और प्रिकॉशन डोज लेने में मदद कर सकते है।  वे उन्हें डोज़ के बारे में याद दिलाकर और उन्हें पास के टीकाकरण स्थलों पर ले जा कर उनकी टीकाकरण सुनिश्चित कर सकते ह।” डॉ. एन.के. सिन्हा, अपर निदेशक सह राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार ने  युवा  चंगेमकेर्स  की  ऑनलाइन  उनमुखीकरण  में  कहा. ‘युवा चेंज मेकर्स फाइट कोविड’ पहल यूनिसेफ और  स्टूडेंट पार्टनरशिप वर्ल्डवाइड इंडिया ट्रस्ट की नेतृत्व में चार जिलों में किया जा रहा है.
यूनिसेफ के कार्यक्रम अधिकारी (स्वास्थ्य) श्री निर्भय नाथ मिश्रा ने विस्तृत प्रस्तुति देते हुए बिहार सरकार की विभिन्न रणनीतियों और अभियानों पर प्रकाश डाला, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 12 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। उन्होंने कहा कि 12-14 वर्ष और 15-17 वर्ष के आयु वर्ग में टीकाकरण कवरेज केवल  28% और 64.2% है। श्री मिश्रा ने युवा स्वयंसेवकों को टीके और कोविड से संबंधित मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने के लिए विश्वसनीय तथ्यों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रिकॉशन डोज के महत्व पर जोर दिया और कहा, “युवा स्वयंसेवक, लोगों को प्रिकॉशन डोज प्राप्त करने के लिए उनकी नियत तारीख की गणना करने में मदद कर सकते हैं, जो कि COVID 19 टीकाकरण की दूसरी खुराक मिलने के 9 महीने बाद होती है। आप लोगों को उनके टीकाकरण प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भी मदद कर सकते हैं क्योंकि आज के समय में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, संचार विशेषज्ञ, सुश्री निपुण गुप्ता ने इस बात पर प्रकाश डाला कि युवाओं  में काफी क्षमता हैं और वे अपने समुदायों में बदलाव लाने के लिए बहुत उत्साहित हैं। यह उन्मुखीकरण  सत्र पटना, गया, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर के चार जिलों के युवा चेंज मेकर्स के चुनिंदा समूह के साथ आयोजित किया जा रहा है, जो आगे चलकर अपने साथियों, परिवारों और समुदायों के माध्यम से राज्य की कोविड के खिलाफ लड़ाई में समर्थन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा की यह  पहल कई  मायने में अनोखी है क्योंकि यह ‘किशोर विकास और भागीदारी’ दृष्टिकोण को अपनाती है, जिसका उद्देश्य स्थानीय किशोरों और युवाओं को COVID 19 वैक्सीन और COVID उपयुक्त व्यवहार के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने और समुदाय का नेतृत्व करने के साथ-साथ लैंगिक समानता, बाल अधिकार और सामाजिक समावेश पर भी ध्यान केंद्रित करने में सक्षम करता है।
श्री सुधाकर सिन्हा, सलाहकार, सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन, यूनिसेफ बिहार,  ने युवाओं को पारस्परिक संचार, सामुदायिक जुड़ाव से सम्बंधित रणनीतियों पर उन्मुख किया। उन्होंने सकारात्मक उदाहरणों और कहानियों को साझा करने और लोगों को समझाने के लिए विधायकों और पंचायत सदस्यों, धार्मिक  नेताओं, डॉक्टरों, कलाकारों, स्थानीय दुकानदारों जैसे स्थानीय प्रभावशाली लोगों के समर्थन का लाभ उठाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, “YCM  को केवल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, बिहार सरकार, डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और अन्य अधिकृत स्रोतों के माध्यम से उपलब्ध सही सत्यापित जानकारी का उपयोग और प्रसार करना चाहिए ताकि टीकों और कोविड से संबंधित मिथकों को दूर किया जा सके।”
एसपीडब्ल्यू इंडिया प्रोजेक्ट के वरिष्ठ प्रबंधक, श्री फ्रैंकलिन पॉल ने कहा कि यंग चेंज मेकर्स को संचार और  निगरानी  में भी कौशल बढ़ाया जायेगा जिसके बाद वे  समुदाय में अंतर लाने में और कई प्रकार के स्थानीय अभियान चलाने में सक्षम होंग।   प्रश्न उत्तर सत्र में सुधा कुमारी, यंग चेंज मेकर, डिस्ट्रिक्ट यूथ फोरम, पटना ने पूछा कि बिना निर्धारित फोटो पहचान पत्र के लोगों का टीकाकरण कैसे हो सकता है. श्री निर्भय मिश्रा ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के दिशा-निर्देशों के बारे में साझा किया, जिसमें कहा गया है कि जिला स्तर के अधिकारी ऐसे लोगों की पहचान करेंगे, जिनके पास वैध फोटो आईडी कार्ड नहीं ह।  इन् व्यक्तियों में मुख्य रूप से प्रवासी, निराश्रित, भिखारी, जेल में बंद  इत्यादि  लोग आते है और सरकार इन् तक पहुंचने के लिए टीकाकरण की सुविधा प्रदान करेगा ।
CORBEVAX वैक्सीन पर एक अन्य प्रतिभागी के प्रश्न का उत्तर देते हुए, श्री मिश्रा ने कहा कि इसे 12-14 आयु वर्ग के बच्चों को उनके पहचान प्रमाण के अनुसार और दो खुराक के बीच 28 दिनों के अंतराल में टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
वाईसीएम की धारणा को समझने और प्रशिक्षण के बाद उनकी सीख को मापने के लिए एक जनमत सर्वेक्षण और प्रतिक्रिया सत्र का आयोजन यूनिसेफ की यूएनवी सुश्री ऐश्वर्या अलेक्जेंडर और एसपीडब्ल्यू इंडिया प्रोजेक्ट ट्रस्ट के श्री दुर्गा शंकर पात्रा द्वारा किया गया था। प्रतिभागियों में गैर सरकारी संगठनों के सदस्य भी शामिल थे- श्री सत्यनारायण महापात्र, बिहार ग्राम विकास परिषद, सीतामढ़ी, सीएसईआई, पटना से श्री अशोक; श्री रंजीत कुमार, अमर त्रिशाला सेवा आश्रम, मुजफ्फरपुर और श्री वीरेंद्र, समग्र सेवा केंद्र, गया ने उनमुखीकरण में हिस्सा लिया ।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर मनाया गया गोदभराई उत्सव, उचित पोषण की दी गई जानकारी 

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– जिले के सभी प्रखंडों में मनायी गयी गोदभराई, स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर किया गया जागरूक
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती एवं स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए धातृ महिला को दी गई उचित पोषण की जानकारी
खगड़िया, 07 अप्रैल-
जिले में पूर्व से निर्धारित तिथि के अनुसार सभी प्रखंडों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर जहाँ गुरुवार को गोदभराई उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहीं, जिले के विभिन्न प्रखंडों में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर स्वस्थ समाज निर्माण के लिए लोगों को जागरूक किया गया। गोदभराई उत्सव के दौरान लाभार्थियों को पोषण से संबंधित विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। मंगल गीतों से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया और गर्भवती महिला को उपहार स्वरूप पोषण की पोटली दी गई है। जिसमें गुड़, चना, हरी पत्तेदार सब्जियां, आयरन की गोली व फल आदि शामिल थे। पोटली में  सतरंगी व अनेक प्रकार के पौष्टिक भोज्य पदार्थ शामिल थे। गर्भवती महिलाओं को चुनरी ओढ़ा और टीका लगाकर गोदभराई रस्म पूरी की गई। वहीं, सभी महिलाओं को अच्छी सेहत के लिए पोषण की आवश्यकता व महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी :
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने बताया, गोदभराई रस्म में सेविकाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं के सम्मान में उसे चुनरी ओढ़ा और तिलक लगा कर उनके गर्भस्थ शिशु की बेहतर स्वास्थ्य की कामना की गई। साथ ही गर्भवतियों को पोषण संबंधी पौष्टिक आहार फल सेव, संतरा, बेदाना, दूध, अंडा, दाल सेवन करने का तरीका बताया गया। साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन की गोली खाने की सलाह दी गई। जिसमें बताया गया कि गर्भवती महिला कुछ सावधानी और समय से पौष्टिक आहार का सेवन करें तो बिना किसी अड़चन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। उन्होंने बताया, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए उचित पोषण  बेहद जरूरी है।
– जिले के सभी प्रखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर मनाया गया गोदभराई उत्सव :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, जिले के सभी प्रखंडों में गोदभराई उत्सव मनाया गया। जिसके दौरान मौजूद लाभार्थियों को बताया गया कि शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल माँ का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है। सामान्य प्रसव के लिए गर्भधारण होने के साथ ही महिलाओं को चिकित्सकों से जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए ,आदि जानकारी दी गई।
– एनीमिया प्रबंधन की दी गई जानकारी :
सदर सीडीपीओ विनीता कुमारी ने बताया गर्भवती माता, किशोरियां व बच्चों में एनीमिया की रोकथाम जरूरी है। गर्भवती महिला को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली जरूर खानी चाहिए। 10 वर्ष से 19 साल की किशोरियों को भी प्रति सप्ताह आयरन की एक नीली गोली का सेवन करनी चाहिए। छह माह से पांच साल तक के बच्चों को सप्ताह में दो बार एक-एक मिलीलीटर आयरन सिरप देनी चाहिए।
– स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर भी लोगों को किया गया जागरूक :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, गोदभराई उत्सव के दौरान विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मौजूद लोगों को स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर भी जागरूक किया गया। इसके अलावा अन्य जगहों पर भी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को स्वस्थ रहने के लिए जागरूक किया गया और स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई। जिसके दौरान खुद के साथ-साथ परिवार और समाज को स्वस्थ बनाने के लिए जरूरी सलाह दी गई एवं स्वच्छता से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई।

लखीसराय जिले में हृदय रोग से पीड़ित 14 बच्चों का होगा निःशुल्क इलाज 

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– आरबीएसके टीम द्वारा जिले में हृदय रोग से पीड़ित 24 बच्चे का किया गया था चयन, 10 का पूर्व में ही हो चुका है समुचित इलाज
– पीड़ित बच्चे को सुविधाजनक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को आरबीएसके टीम ने जारी किया मोबाइल नंबर
लखीसराय, 07 अप्रैल-
लोगों को बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने को लेकर जहाँ सरकार पूरी तरह गंभीर है वहीं, स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए आरबीएसके टीम की पहल पर जिले के हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का पूरी तरह निःशुल्क इलाज कराया जा रहा है। जिसका सार्थक परिणाम यह है कि समुचित इलाज और स्वस्थ्य होने की उम्मीद छोड़ चुके पीड़ित बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो रहे  और बच्चों को नई स्वस्थ जिंदगी जीने का अवसर मिल रहा है। ऐसे पीड़ित बच्चों का जिले के आरबीएसके टीम द्वारा स्क्रीनिंग कर चिह्नित किया जा रहा और आवश्यकता के अनुसार समुचित इलाज के लिए पटना या अहमदाबाद भेजा जा रहा है। जहाँ बच्चों का सरकारी स्तर से निःशुल्क समुचित इलाज हो रहा है।
– 10 बच्चे का हो चुका है निःशुल्क समुचित इलाज, 14 को शीघ्र मिलेगा समुचित स्वास्थ्य सेवा का लाभ :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, समय पर इलाज शुरू होने से जिले के कई बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। जिले के आरबीएसके टीम द्वारा कुल हृदय रोग से पीड़ित 24 बच्चे का चयन किया गया था। जिसमें 10 बच्चे का पूर्व में ही समुचित इलाज हो चुका और आज सभी बच्चे पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। जबकि, शेष बचे 14 बच्चों का भी शीघ्र समुचित इलाज होगा। इसके लिए चल रही प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
– हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के अभिभावक नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में आरबीएसके टीम से संपर्क कर ले सकते हैं लाभ :
जिला समन्वयक डाॅ शिवशंकर कुमार ने बताया, हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों को नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में आरबीएसके टीम से संपर्क कर निःशुल्क समुचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिला सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया, ऐसे पीड़ित बच्चों के अभिभावक मेरे मोबाइल नंबर 9835620562 पर काॅल या व्हाट्स एप के माध्यम से भी जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। जानकारी उपलब्ध कराने के पश्चात आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, उन्होंने बताया, नंबर जारी करने का मुख्य उद्देश्य है, पीड़ित बच्चे को सुनिश्चित रूप से सुविधाजनक तरीके से समुचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना।  उन्होंने बताया, इस समस्या से पीड़ित बच्चों के स्थाई निजात के लिए समय पर इलाज शुरू कराना जरूरी है। अन्यथा, परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिन बच्चों के होठ कटे हैं, उसका 03 सप्ताह से 03 माह के अंदर, जिसके तालु में छेद (सुराग) है, उसका 06 से 18 माह एवं जिसके पैर टेढ़े-मेढ़े है, उसका 02 सप्ताह से 02 माह के अंदर शत-प्रतिशत सफल इलाज संभव है। इसलिए, जो उक्त बीमारी से पीड़ित बच्चे हैं, उसके अभिभावक अपने बच्चों का आरबीएसके टीम के सहयोग से समय पर मुफ्त इलाज शुरू करा सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया, जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित बच्चे को साँस लेने में परेशानी होती है। हमेशा सर्दी-खांसी रहती है। चेहरे, हाथ, होंठ नीला पड़ने लगता है। जिसके कारण गंभीर होने पर बच्चों के दिल में छेद हो जाता है।
– स्क्रीनिंग से लेकर आने-जाने का खर्च सरकार करती है वहन :
बच्चों में होने वाले जन्मजात रोगों में हृदय में छेद होना एक गंभीर समस्या है। उक्त बीमारी से पीड़ित बच्चे का बाल हृदय योजना के तहत सरकार द्वारा पूरी निःशुल्क इलाज कराया जाता है। यही नहीं, इलाज के साथ-साथ इलाज के लिए आने-जाने का पीड़ित बच्चा सहित उनके आभार का खर्च सरकार ही वहन करती है।