विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर महिलाओं के साथ  प्रजनन स्वास्थ्य एवं एनीमिया पर कार्यशाला

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• सहयोगी संस्था द्वारा महिलाओं से स्वास्थ्य पर संवाद
• लगभग 55 लोगों ने जूम एप के माध्यम से जुड़ कर अपनी राय रखी
• लिंग आधारित भेदभाव महिलाओं के स्वास्थ्य पर किस तरह प्रभाव डालता है खुल कर हुई बात
• प्रजनन स्वाथ्य तथा एनीमिया पर हुई चर्चा
पटना 07 अप्रैल:
वृहस्पतिवार को जूम एप पर एक कार्यशाला रखा गया जिसका उदेश्य महिलाओं के स्वास्थ्य पर चर्चा करना था.  क्योंकि सहयोगी महिला हिंसा तथा लिंग आधारित भेदभाव पर काम करती है और महिलाओं के साथ उनके स्वास्थ्य पर बात करना जरुरी है। महिलाऐं अक्सर अपने घर तथा बच्चों के ख्याल रखने के कारण खुद स्वास्थ्य की चिंता नहीं करती है और एनीमिया से ग्रसित रहती हैं। महिलाऐं अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देती हैं।
आज के कार्यशाला में पूर्वी तथा मोना द्वारा बताया गया कि घर में काम और खाने में बराबरी होनी चाहिए, क्योंकि हमारी महिलाऐं सुबह से उठ कर काम में तो लग जाती है लेकिन जब उनके खाने की बात होती है तो सबसे आखिरी में खाती है। और खाना भी इस तरह कि अगर कुछ पौष्टिक आहार है खाने में तो सबसे पहले घर के पुरुष तथा लड़कों को मिलेगी उसके बाद किशोरी तब जा कर महिलाओं को।
क्या कहते हैं आंकड़े:
समुदाय में सामान स्वास्थ्य सुविधाओं को फ़ैलाने के लिए लोगों को जागरूक करना तथा स्वास्थ्य संबंधी मामलों से जुड़ें मिथकों को दूर करना और उन विचारों पर काम करना विश्व स्वास्थ्य दिवस का उदेश्य है। NFHS-5 के अनुसार बिहार में 63.5 प्रतिशत महिलाऐं एनीमिया की शिकार हैं – शहरी क्षेत्र में 15-49 वर्ष में 65.6, ग्रामीण क्षेत्र में 63.1 प्रतिशत महिलाऐं एनीमिया की शिकार हैं। अगर हम किशोरी की बात करें तो शहरी क्षेत्र में 15-19 वर्ष की 67.2 प्रतिशत, ग्रामीण क्षेत्र में 65.4 प्रतिशत किशोरी एनीमिया की शिकार हैं।
महिलाऐं ऐसे तो अपने दिन-चर्या में इतनी व्यस्त रहती है कि उनका शरीर स्वस्थ है या नहीं इसपर ध्यान नहीं देती हैं. लेकिन जब उनको ऐसा माहौल मिलता है जहाँ उनको लगता है वो अपनी बात बिना किसी संकोच के रख सकती हैं तो विभिन्न तरह के सवाल पूछती हैं, जैसे :- माहवारी के दौरान बहुत दर्द होता है, खून का जम-जम कर गिरना, कम पानी से योनि में जलन होना, उच्च रक्तचाप होना, ऑपरेशन के बाद पेट क्यों फैलता है आदि।
कार्यशाला में महिलाओं से कुछ-कुछ सवाल किए गए,
1.  जैसे – अपने घर में आप क्या-क्या काम करती हैं।
2. पुरे दिन में खाने में क्या खाते हैं।
कार्यशाला में बताया गया कि एनीमिया से बचने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है।
• डॉक्टर से दिखाएं
• आयरन वाली सब्जी खाएँ
• पिली दाल खाएँ
• अंकुरित चना खाएँ
• माहवारी के दौरान कपड़े की साफ़-सफाई रखें
• 7-8 घंटे की नींद पूरी करेंमाहवारी के दौरान दावा न खाएँ

बच्चों के शरीर में नहीं होने दें डिहाइड्रेशन

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-ओआरएस घोल से 90 प्रतिशत तक डायरिया से बचाव है संभव
-कुपोषित बच्चों में डायरिया से बढ़ सकती हैं कई तरह की समस्याएं
बांका, 7 अप्रैल-
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और बढ़ रही गर्मी के बीच बच्चों में डायरिया का होना सबसे सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। डायरिया से बच्चे तो बच्चे बड़े लोग भी पीड़ित हो सकते हैं। डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं। यहां तक कि इस दौरान कुशल प्रबंधन नहीं होने से यह जानलेवा भी हो जाता है। स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े भी इसे शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं। सही समय पर डायरिया के लक्षणों को जानकर एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर बच्चों को इस गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि डायरिया के शुरुआती लक्षणों का ध्यान रख माताएं इसकी आसानी से पहचान कर सकती हैं। इससे केवल नवजातों को ही नहीं, बल्कि बड़े बच्चों को भी डायरिया से बचाया जा सकता है। लगातार पतले दस्त आना, बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना, प्यास बढ़ जाना, भूख का कम जाना या खाना नहीं खाना, दस्त के साथ हल्के बुखार का आना और कभी- कभी स्थिति गंभीर हो जाने पर दस्त में खून भी आने लगता है ।
आंगनबाड़ी केंद्र या सेविका दीदी से लें जानकारीः डॉ. चौधरी ने बताया कि बार- बार डायरिया /दस्त लगने से हुये डिहाइड्रेशन को दूर करने के लिए बड़े बच्चों को ओरल रीहाइड्रेशन सोल्यूशन (ओआरएस) का घोल पिलाएं। इससे दस्त के कारण पानी के साथ शरीर से निकले  जरूरी एल्क्ट्रोलाइट्स ( सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड एवं बाईकार्बोनेट) की कमी को दूर किया जा सकता है। माताएं अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र या सेविका दीदी से संपर्क कर इस बात की जानकारी ले सकती हैं कि ओआरएस का घोल कैसे बनाना और किस उम्र के बच्चे को इसकी कितनी मात्रा कितने बार दिया जाना है ।
छह महीने तक के शिशु के लिए स्तनपान ही एकमात्र विकल्प: डॉ. चौधरी ने बताया कि छह माह तक के शिशुओं को डायरिया से बचाने के लिए नियमित स्तनपान पर अधिक जोर देने की जरूरत है। छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराने से शिशु का डायरिया एवं निमोनिया जैसे गंभीर रोगों से बचाव होता है। डायरिया के लक्षण यदि ओआरएस के सेवन के बाद भी रहे तो अविलम्ब मरीज को डॉक्टर के पास ले जाकर उचित उपचार कराना आवश्यक है। लोगों को नीम- हकीम द्वारा बताये गए उपायों से बचना चाहिए तथा ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। बच्चों में डायरिया से होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण उपचार में की गयी देरी होती है। बारिश के मौसम में जल जनित संक्रमण का खतरा बढ़ जाता और भोजन बनाने और खाने समय साफ़- सफाई रखने के अलावा शुद्ध जल का सेवन अनिवार्य है।

जीविका दीदी करे पुकार, टीबी मुक्त हो बिहार

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-विश्व स्वास्थ्य दिवस पर कहलगांव में निकाली गई रैली
-केएचपीटी ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से रैली निकाली
भागलपुर, 7 अप्रैल-
विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर गुरुवार को कहलगांव में जीविका दीदियों ने रैली निकाली। रैली के जरिये लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया गया। रैली में शामिल जीविका दीदी लोगों से बिहार को टीबी से मुक्त करने की अपील कर रही थीं। जीबीका दीदी करे पुकार, टीबी मुक्त हो बिहार का नारा लगा रही थीं। रैली का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने किया था। इसमें स्वास्थ्य विभाग ने भी सहयोग किया था। रैली के दौरान लोगों को टीबी के लक्षण और बचाव की जानकारी दी गई। रैली में टीबी विभाग के एसटीएलएस देव कुणाल और स्वास्थ्य विभाग के कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर बंटी सिंह ने भी भाग लिया। रैली जीविका के उपकार सीएलएफ कार्यालय में आकर गोष्ठी में तब्दील हो गई, जिसमें टीबी के बारे में चर्चा कर लोगों को जागरूक किया गया। लोगों को बताया गया कि टीबी के इलाज के साथ-साथ पौष्टिक आहार लेना भी जरूरी है। सरकार की निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को उपचार के लिए प्रतिमाह 500 रुपये भी दिया जाता है।
उधर, दूसरी तरफ प्रखंड की भोलसर पंचायत में टीबी को लेकर जीविका दीदियों के दो दिवसीय प्रशिक्षण का भी समापन हो गया। प्रशिक्षण का आयोजन भी केएचपीटी ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से किया। 2025 तक भारत को टीबी से मुक्त बनाना है। इसी सिलसिले में इस प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें 32 जीविक दीदियों ने भाग लिया। सभी को टीबी उन्मूलन में सहयोग के लिए संवेदनशील बनाने के लिए कहानी, खेल आदि गतिविधियों के माध्यम से जागरूक किया गया और टीबी से संबंधित जानकारी दी गई। टीबी के लक्षण के साथ उपचार के बारे में बताया गया। साथ ही उपचार कहां-कहां संभव है, इसकी भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान केएचपीटी की जिला प्रमुख आरती झा, प्रशिक्षक के तौर पर धीरज कुमार मिश्रा और संदीप कुमार ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान केएचपीटी की मॉनिटरिंग एंड एवल्यूशन एसोसिएट कृष्णा कुमारी भी मौजूद रही।
ज्यादातर मामले घनी आबादी वाले इलाके में- प्रशिक्षण के दौरान जीविका दीदियों को बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चल रहा है। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो लोगों को तत्काल इलाज कराने के लिए कहें। टीबी का अगर कोई इलाज नहीं कराता है तो यह बीमारी कई लोगों में जा सकता है। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा।

नवजात शिशु की स्वास्थ्य जाँच को लेकर चिकित्सकों को दिया जाएगा  प्रशिक्षण

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– विश्व स्वास्थ्य दिवस पर खास ; -आरबीएसके अंतर्गत 25 और 26 अप्रैल को पटना में दिया जाएगा प्रशिक्षण
– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर सभी सिविल सर्जन को दिए आवश्यक निर्देश
लखीसराय, 06 अप्रैल।
गुरुवार, 07 अप्रैल को पूरी दुनिया के साथ-साथ जिले में भी विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर जहाँ लोगों को स्वस्थ समाज निर्माण के लिए जागरूक किया जाएगा। वहीं, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं और सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसी कड़ी में लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने को लेकर जिले के चिकित्सकों को नवजात की समुचित स्वास्थ्य जाँच से संबंधित राज्यस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के अंतर्गत प्रसव केंद्रों पर जन्म लेने वाले नवजात की स्क्रीनिंग के संबंधित विषय पर पटना स्थित एक निजी होटल में 25 और 26 अप्रैल को दिया जाएगा। प्रशिक्षण के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें आरबीएसके अंतर्गत प्रसव केंद्रों पर नवजात शिशु की समुचित स्वास्थ्य जाँच से संबंधित आयोजित होने वाले दो दिवसीय प्रशिक्षण में अपने-अपने जिले के सभी प्रतिभागियों को भेजना सुनिश्चित कराने को कहा है।
– नवजात के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए बेहतर पहल :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, नवजात शिशु के जन्म के समय ही समुचित और आवश्यक जाँच सुनिश्चित कराने को लेकर उक्त प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। जिसमें सभी प्रतिभागियों को नवजात के समुचित स्वास्थ्य जाँच से संबंधित विस्तृत जानकारी दी जाएगी। ताकि सभी प्रशिक्षण प्राप्त प्रशिक्षणार्थी नवजात का सुविधाजनक तरीके से समुचित और आवश्यक स्वास्थ्य जाँच कर जरूरी चिकित्सा परामर्श दे सकें। इससे ना सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होगी बल्कि, नवजात की परेशानी की भी शुरुआती दौर में पहचान होगी। दरअसल, बच्चा ही देश का भविष्य होता है। इसलिए, नवजात को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
– जिले के दो चिकित्सकों और केयर इंडिया के एक कर्मी को दिया जाएगा प्रशिक्षण :
आरबीएसके कंसल्टेंट डाॅ शिवशंकर कुमार ने बताया, उक्त प्रशिक्षण में जिले के दो चिकित्सक और एक केयर इंडिया के कर्मी शामिल होंगे। जिसमें चिकित्सक के रूप में एक शिशु रोग विशेषज्ञ,  एक प्रसूती एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं एक केयर इंडिया के कर्मी का जिला स्तर पर चयन कर प्रशिक्षण में भेजा जाएगा। वहीं, उन्होंने बताया, प्रशिक्षण प्राप्त करने बाद तीनों प्रतिभागी जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में लेबर वार्ड में तैनात एएनएम / जीएनएम को प्रशिक्षित करेंगे। ताकि नवजात को बेहतर तरीके से समुचित स्वास्थ्य जाँच सुनिश्चित हो सके और किसी अनावश्यक परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़े।

एईएस को लेकर जिलाभर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और  स्वास्थ्य कर्मियों की 8 को होगी कार्यशाला 

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– जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने पत्र जारी कर सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए निर्देश
– सदर अस्पताल में आयोजित होगी कार्यशाला
मुंगेर-
एईएस/जेई (मस्तिष्क ज्वर/चमकी बुखार) से निपटने एवं मरीजों को बेहतर से बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग आवश्यक तैयारी में जुट गया है । इसे सार्थक रूप देने के लिए शुक्रवार को सदर अस्पताल मुंगेर स्थित एएनएम स्कूल स्थित सभागार में जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य पदाधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसको लेकर जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डाॅ. अरविंद कुमार सिंह ने जिला के सभी पीएचसी और सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पत्र जारी कर कार्यशाला में उपस्थित होने का निर्देश जारी किया है।
– एईएस/जेई से निपटने के लिए की जा रही है व्यापक तैयारी :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डाॅ. सिंह ने बताया कि शुक्रवार को आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला में जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों से 5 – 5 प्रतिभागी जिसमें प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (एमओआईसी), मेडिकल ऑफिसर के अलावा एसएचएस के चाइल्ड हेल्थ कार्यक्रम के अंतर्गत एम्स पटना में 6 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लोगों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल होना है। इसके अलावा एईएस की जानकारी हासिल करने वाले एचएम, बीएचएम, बीसीएम, बीसीएम इंचार्ज सहित वेक्टर बोर्न डिजीज की जानकारी रखने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से कार्यशाला में शामिल होना है।
उन्होंने बताया कि मुंगेर में एईएस/जेई की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारी की जा रही है। ताकि मरीजों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। वहीं, उन्होंने जिले के तमाम पदाधिकारियों, कर्मियों से एकजुट होकर एईएस/जेई के खिलाफ कार्य करने और लोगों से चिकित्सा परामर्श का पालन करने की अपील की है।
– कोविड नियंत्रण कक्ष की तर्ज पर  एईएस नियंत्रण कक्ष की होगी स्थापना :
जिला वेक्टर बोर्न डिजीज सलाहकार पंकज कुमार प्रणव ने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कोविड नियंत्रण कक्ष की तर्ज पर एईएस/जेई नियंत्रण कक्ष की भी स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही नियंत्रण कक्ष के मुख्य द्वार पर दूरभाष संख्या भी लिखा जाएगा। ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित मरीज टेलीफोन से भी आवश्यक चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सके और चिकित्सा परामर्श के अनुसार अगला कदम उठा  सके। इसके अलावा जिला भर में जन जागरूकता अभियान भी चलाकर एईएस से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रखण्ड स्तर पर सभी स्कूलों में “चमकी को धमकी “के शपथ पत्र का दीवार लेखन किया जा रहा है।
– ये है चमकी बुखार के प्रारंभिक लक्षण :
– लगातार तेज बुखार रहना।
– बदन में लगातार ऐंठन होना।
– दांत पर दांत दबाए रहना।
– सुस्ती चढ़ना।
– कमजोरी की वजह से बेहोशी आना।
– चिउटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि।
– चमकी बुखार से बचाव के लिए ये सावधानियाँ हैं जरूरी :
– बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें।
–  गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें।
– ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
– रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
– बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
–  पारासिटामोल की गोली या सिरप दें।

सदर अस्पताल में संचालित एसएनसीयू में 24 घंटे मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सेवा 

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– विश्व स्वास्थ्य दिवस आज • एडमिट नवजातों को सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराई जा रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
– इलाज के दौरान हर जरूरी बातों का रखा जा रहा ख्याल, मिल रही समुचित स्वास्थ्य सेवा का लाभ
खगड़िया, 06 अप्रैल-
गुरुवार को पूरे विश्व में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाएगा। हर साल 07 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस दिवस का मुख्य उद्देश्य है कि सामाजिक स्तर पर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध जानकारी से लोगों को अवगत कराना। ताकि सभी जरूरतमंद लोग सुविधाजनक तरीके से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ लेकर स्वस्थ्य रह सकें और अनावश्यक परेशानियों का सामना  नहीं करना पड़े। इस उद्देश्य को सार्थक रूप देने के लिए सदर अस्पताल खगड़िया परिसर में संचालित एसएनसीयू  प्रयासरत है। यहाँ आने वाले सभी जरूरतमंद नवजातों को 24 घंटे बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है। जिसका परिणाम यह है कि ऐसे नवजात के परिजनों का सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रति विश्वास बढ़ा है। शायद यही बजह होगा कि जिले के विभिन्न प्रखंडों के जरूरतमंद नवजात के परिजन अपने बच्चे का समुचित इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल परिसर में संचालित एसएनसीयू पहुँच रहे हैं। जहाँ नवजात को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही  और एसएनसीयू आने वाले चिंतित परिजन खुश होकर अपने स्वस्थ्य नवजात के साथ घर भी लौट रहे हैं। एसएनसीयू में चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रशिक्षित एएनएम द्वारा 24 घंटे बेहतर स्वास्थ्य सेवा दी जा रही है। साथ ही इस दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल भी रखा जा रहा है। जिसके कारण अब ऐसे नवजातों के परिजन अपने नवजात को लेकर बेचिहक सरकारी स्वास्थ्य संस्थान पहुँच रहे  और ऐसे  जरूरतमंद नवजातों के परिजनों की परेशानियाँ दूर होते दिख रही हैं।  आसानी के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल रहा है।
– एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हर जरूरी बातों का रखा जाता है ख्याल :
एसएनसीयू प्रभारी डॉ आमोद कुमार ने बताया, यहाँ आने वाले सभी नवजातों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जा सके, इसके लिए हर जरूरी बातों का ख्याल रखा जाता है। साथ ही भर्ती  नवजातों के स्वास्थ्य का नियमित तौर पर फॉलोअप किया जाता  और इलाज के दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। ताकि नवजात को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके और किसी अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इसके अलावा नवजात के स्वस्थ्य शरीर निर्माण को लेकर इलाज के पश्चात की जाने वाली आवश्यक देखरेख की भी जानकारी नवजात के परिजनों को दी जाती और उचित देखरेख के लिए प्रेरित भी किया जाता है।
– साँस से पीड़ित नवजात को दी जाती है एसएनसीयू सेवा :
एसएनसीयू के चिकित्सक डॉ नरेंद्र कुमार ने बताया कि साँस से पीड़ित नवजात को एसएनसीयू की सुविधा आसानी के साथ उपलब्ध कराई जा रही है। इस दौरान बच्चे की सुरक्षा के मद्देनजर स्वास्थ कर्मी पूरी सतर्कता के साथ नवजात को यह सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। ताकि नवजात को अन्य परेशानियाँ से नहीं जूझना पड़े।
– नवजात को स्वस्थ्य रखने के लिए परिजनों को दी जाती है जानकारी :
एसएनसीयू के डीईओ सुबोध कुमार ने बताया, इलाज के पश्चात डिस्चार्ज करने के वक्त अस्पताल कर्मियों एवं चिकित्सकों द्वारा नवजात को स्वस्थ्य रखने के लिए परिजनों को आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिए जाते हैं। ताकि नवजात का स्वस्थ्य शरीर निर्माण हो। इस दौरान बच्चे को जन्म के बाद छः माह तक नियमित रूप से समय-समय पर स्तनपान कराने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी जाती है।
– एसएनसीयू सुविधा उपलब्ध कराने के दौरान साफ-सफाई का रखा जा रहा है ख्याल :
नवजात को एसएनसीयू की सेवा उपलब्ध कराने के दौरान साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता है। इसके लिए चिकित्सक, कर्मी समेत अन्य लोग एसएनसीयू प्रवेश करने के पूर्व ही चप्पल-जूता तक प्रवेश द्वार पर ही खोल लेते हैं। ताकि अंदर परिसर में किसी प्रकार की गंदगी से संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो और शत-प्रतिशत साफ सफाई सुनिश्चित हो। इसके अलावे नवजात के परिजनों को भी साफ-सफाई से संबंधित आवश्यक जानकारी देते हुए पालन करने के लिए जागरूक किया जाता है। साथ ही साथ सरकार के गाइलाइन का भी पालन किया जाता है।
– इलाज के दौरान मिल रही अच्छी सुविधा :
एसएनसीयू में भर्ती एक नवजात की माँ चौथम निवासी दीप माला कुमारी ने बताया, मुझे सदर अस्पताल में ही प्रसव हुआ था। जन्म के बाद ही मुझे अपने बेटे को जोंडिस होने की जानकारी मिली। जिसके बाद मैं चिकित्सकों के सलाहानुसार अपने नवजात को एसएनसीयू में एडमिट कराये । दोनों जगह मुझे अच्छी सुविधा मिली। जिसके कारण मेरा बच्चा बहुत जल्द स्वस्थ्य हो गया। जिसके बाद मुझे यहाँ से डिस्चार्ज किया गया और मैं अपने स्वस्थ्य बच्चे के साथ घर जा रही हूँ।

खेल विधि के जरिये लोगों को परिवार नियोजन के प्रति किया गया जागरूक

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-जगदीशपुर प्रखंड के फुलवरिया आंगनबाड़ी केंद्र पर सास-बहू सम्मेलन आय़ोजित
-सम्मेलन में क्षेत्र की 10 जोड़ी सास-बहू को परिवार नियोजन के बताए गए फायदे
भागलपुर, 6 अप्रैल-
जगदीशपुर प्रखंड के फुलवरिया आंगनबाड़ी केंद्र पर बुधवार को सास-बहू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान क्षेत्र की 10 जोड़ी सास-बहू पहुंचीं थी। इन्हें तमाम उदाहरण के जरिये परिवार नियोजन के फायदे के बारे में बताया गया। खेल विधि के जरिये रोचक तरीके से लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जानकारी दी गई। इसके जरिये पांच-पांच सास बहू का दो ग्रुप बना दिया गया। एक ग्रुप को पांच और दूसरे ग्रुप को दो गुब्बारा दिया गया। दोनों ही ग्रुप को गुब्बारा को उछालने के लिए कहा गया। गुब्बारा उछालने के बाद दो गुब्बारे वाले ग्रुप का गुब्बारा ज्यादा देर तक हवा में रहा, जबकि पांच गुब्बारे वाले ग्रुप का जल्दी नीचे गिर गया। इसके बाद मौके पर मौजूद एएनएम ने बताया कि देखा आपने। ज्यादा गुब्बारा रहने से वह जल्द जमीन पर गिर गया, जबकि कम गुब्बारा रहने पर ज्यादा देर तक हवा में रहा। इससे हमें यह सीख मिलती है कि छोटा परिवार रहने से ज्यादा खुशहाली रहती है, जबकि परिवार बड़ा करने पर गिरावट आती है।
अस्थाई साधनों के इस्तेमाल के बारे में बतायाः मौके पर मौजूद एएनएम बबिता कुमारी और चंद्रलेखा कुमारी ने बताया कि परिवार नियोजन को लेकर हमलोग क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं। इसी सिलसिले में फुलवरिया आंगनबाड़ी केंद्र में सास-बहू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में आई महिलाओं को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में बताया गया। साथ ही परिवार नियोजन के लिए अस्थाई साधनों के इस्तेमाल के बारे में बताया गया। कंडोम, कॉपर टी, अंतरा छाया का इस्तेमाल करने के लिए हमलोगों ने बताया। इसके साथ-साथ पहला बच्चा 20 साल के बाद, दूसरा तीन साल के बाद और तीसरा बच्चा पैदा नहीं करने के लिए प्रेरित किया। दो बच्चे के बाद सभी लोगों को ऑपरेशन करा लेने के लिए कहा गया। जबकि तक ऑपरेशन नहीं करवाते हैं तब तक अस्थायी सामग्री का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया।
जागरूकता कार्यक्रम पर फोकसः जगदीशपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि परिवार नियोजन कार्य़क्रम क्षेत्र में काफी तेजी से चल रहा है। जागरूकता कार्यक्रम पर फोकस किया जा रहा है। लोग जितना जागरूक होंगे, उतना परिवार नियोजन के महत्व को समझेंगे। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को लगातार इस बारे में बताया जा रहा है। साथ ही अस्थायी सामग्री के वितरण के साथ परिवार नियोजन कार्यक्रम भी चल रहा है। हमलोग इसमें लगातार बेहतर कर भी रहे हैं। उम्मीद है कि और बेहतर करेंगे।

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष; स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज का होगा निर्माण

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-लोगों को शारीरिक के साथ मानसिक तौर पर भी स्वस्थ्य होना जरूरी
-व्यस्तताओं के बावजूद खुद के स्वस्थ रहने के लिए समय जरूर निकालें
बांका, 6 अप्रैल-
आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है। इस वर्ष का थीम है ऑवर प्लानेट, ऑवर हेल्थ। यानी कि हमारा ग्रह, हमारा स्वास्थ्य। दरअसल हर साल स्वास्थ्य दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को इसके प्रति जागरूक करना और इस पर चर्चा करना है। 1950 से विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस दिन तमाम तरह के कार्यक्रम कर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति से ही स्वस्थ समाज का निर्माण होता है। इसलिए लोगों को स्वस्थ रहना चाहिए। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए। तमाम प्रतिबद्धताओं के बावजूद लोगों को अपने शरीर और स्वास्थ्य के प्रति समय निकालना चाहिए। प्रतिदिन लगभग एक घंटा अगर आप खुद को स्वस्थ रखने पर खर्च करते हैं तो इसका बहुत फायदा आपको मिलता है। शरीर अगर स्वस्थ रहेगा तो सभी कुछ बेहतर रहता है।
मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरीः डॉ. चौधरी कहते हैं कि आज के भागमभाग वाली जिंदगी में शरीर को स्वस्थ तो रखना ही पड़ता है। साथ में मानसिक तौर पर भी लोगों को स्वस्थ रहना उतना ही जरूरी है। अगर आप मानसिक तौर पर स्वस्थ रहेंगे तो आप अपना हर काम बेहतर तरीके से कर पाएंगे। मानसिक तौर पर स्वस्थ रहने के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लें। प्रतिदिन योग और मेडिटेशन करें। इससे मानसिक तौर पर राहत मिलेगी। मन अगर स्वस्थ रहेगा तो फिर अन्य काम में भी आपका मन लगा रहेगा।
कोरोना काल के बाद चुनौतियां बढ़ीः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना काल के बाद स्वास्थ्य के प्रति चुनौतियां बढ़ गई हैं। अब लोगों को काफी सावधानी बरतते हुए रहना पड़ रहा है। लोग बरत भी रहे हैं। हालांकि कोरोना की तीनों लहर समाप्त हो गई है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करें। यानी कि कोरोना की गाइलाइन का पालन करें। यदि आपने कोरोना का टीका नहीं लगवाया है तो जल्द से जल्द लगवा लें।
अभी के मौसम में गर्मी से बचेः स्वस्थ रहने के लिए हर किसी को मौसम के अनुकूल अपना व्यवहार करना चाहिए। जिस तरह सर्दी के मौसम में बचने के लिए गर्म कपड़े लोग पहनते हैं, उसी तरह अभी के मौसम में घर से निकलते वक्त छाता लेना नहीं भूलें। कोशिश करें कि चिलचिलाती धूप में निकलना ही नहीं पड़े। सुबह और शाम के वक्त निकला करें। यदि घर से निकलें तो छाता और ओआरएस का घोल अवश्य ले लें। साथ ही मौसमी फल का सेवन करें। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती , जिससे आप बीमारियों से बचे रहते हैं। अभी के मौसम में डायरिया की शिकायत ज्यादा आती है, लेकिन जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती , वह उससे बचे रहते हैं।

विशेष ओलंपिक्स  को लेकर राष्ट्रीय दिव्यांग मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजित,दिव्यांगों की हुई स्वास्थ्य जांच 

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–  किला क्षेत्र के इंडोर स्टेडियम में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने की दिव्यांगों की स्वास्थ्य जांच
– कला संस्कृति एवं युवा विभाग और राज्य स्वास्थ्य समिति ने आयोजित किया दिव्यांग मेगा स्वास्थ्य शिविर
मुंगेर, 5 अप्रैल-
आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष ओलंपिक्स बिहार कार्यक्रम के तहत मंगलवार को मुंगेर किला क्षेत्र स्थित इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय दिव्यांग मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में  दिव्यांगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इससे पूर्व कार्यक्रम का  उद्घाटन जिलाधिकारी नवीन कुमार, डीडीसी संजय कुमार सिंह, सदर एसडीओ खुशबू गुप्ता, प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह, डीपीएम नसीम रजि ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी दिनेश कुमार, केयर इंडिया की डीटीओ ऑफ डॉ. नीलू, एफपीसी तस्नीम रजि, डीसीएम निखिल राज सिहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए जिलाधिकारी नवीन कुमार ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में बिहार के मुंगेर सहित सात जिलों में राष्ट्रीय दिव्यांग मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जा रहा है। मंगलवार को मुंगेर के अलावा नालंदा और मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय दिव्यांग मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जा रहा है। शेष 4 जिलों पटना, पूर्णिया, आरा और बक्सर में आगामी 7 अप्रैल को स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दिव्यांग स्वास्थ्य जांच शिविर के माध्यम से दिव्यांगजन जो मुंगेर जिले के विशेष नागरिक हैं , का  यूडीआईडी कार्ड तत्काल  बनाया जा रहा है। इसके साथ ही उनके स्वास्थ्य की सम्पूर्ण जांच कर उनके अंदर छुपी हुई विशेषता (स्पेशियलिटी) का पता लगा रहे हैं कि उनमें क्या विशेषता है। इसके साथ ही यहां आए दिव्यांगों को खेलने का अवसर दे रहे कि उनकी कौन से खेल में अभिरुचि है, वो कौन सा खेल बेहतर ढंग से खेल सकते हैं । इसके बाद हमलोग वैसे दिव्यांग एथलीट को चयनित कर आगे भेजेंगे वो पारा ओलंपिक सहित अन्य बड़े खेल आयोजन में हिस्सा लेकर देश, राज्य और मुंगेर का नाम रौशन कर सकें। इसके अलावा दिव्यांग बच्चे को अन्य सभी सुविधाएं जो उन्हें मिलनी चाहिए वो सभी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए भी शिविर में सभी दिव्यांगजनों का रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। इसके साथ ही शिविर में सभी दिव्यांगजनों के लिए चिकित्सक के साथ-साथ भोजन, पानी, बैठने की व्यवस्था के साथ-साथ शौचालय की भी व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुंगेर के प्रभारी सिविल डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय दिव्यांग मेगा स्वास्थ्य जांच शिविर में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा 25 अलग-अलग स्टॉल लगाकर 40 से अधिक अलग-अलग विधाओं के विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी टीम के साथ दिव्यांगजनों  के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं। जिनमें एनसीडी,   टीबी, जेनरल, ईएनटी, फैमिली प्लानिंग, दिव्यांग केयर सहित अन्य विभाग के डॉक्टर अपनी टीम के साथ तैनात हैं। शिविर में हिस्सा लेने वाले प्रमुख डॉक्टरों में डॉ. राम प्रवेश सिंह, डॉ. ध्रुव कुमार साह, डॉ. निरंजन कुमार सिंह, डॉ. सुभाष विजेता, डॉ. पुतुल कुमारी, डॉ. अलका सिंह सहित कई अन्य डॉक्टर उपस्थित थे। इस दौरान दिव्यांग जनों, उनके परिजनों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के बैठने, खाने-पीने सहित अन्य सुविधाओं की व्यवस्था केयर इंडिया और जीविका के द्वारा की गई।

मिशन इंद्रधनुष :जिले में चल रहा है सेकेंड राउंड का साप्ताहिक नियमित टीकाकरण अभियान 

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– प्रखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिविर आयोजित कर गर्भवती और बच्चों का किया जा रहा है टीकाकरण
– सात दिनों तक चलेगा अभियान, शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित करने पर  है जोर
खगड़िया, 05 अप्रैल-
जिले में मिशन इंद्रधनुष के तहत सेकेंड राउंड का साप्ताहिक नियमित टीकाकरण अभियान चल रहा है। इस अभियान की सोमवार से ही जिलेभर में शुरुआत हो चुकी है। जिसके माध्यम से जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण शिविर आयोजित कर गर्भवती और बच्चों का जोर-शोर के साथ नियमित टीकाकरण (आर आई) किया जा रहा है। ताकि एक भी लाभार्थी टीकाकरण से वंचित नहीं हो और शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके। वहीं, अभियान की सफलता को लेकर संबंधित क्षेत्र की एएनएम, आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका द्वारा क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों नियमित टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि सभी योग्य लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण करा सकें और अभियान का सफलतापूर्वक समापन सुनिश्चित हो सके।
– विभिन्न प्रकार के गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, विभिन्न प्रकार के गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी है। इसलिए, जिले की तमाम गर्भवती महिलाओं से खुद और 0 से 05 आयु वर्ग के बच्चों के अभिभावकों से अपील है कि अपने बच्चों का निश्चित रूप से  टीकाकरण कराएं। इससे ना केवल गंभीर बीमारी से बचाव होगा, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलेगा। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होगा। वहीं, उन्होंने बताया, शून्य से पाँच वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेएई (जापानी बुखार) के टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा अभियान में गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
– अभियान की सफलता को लेकर जिले के सभी सेविकाओं को दिए गए हैं जरूरी निर्देश :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, मिशन इंद्रधनुष अभियान की सफलता को लेकर जिले की सभी सेविकाओं को आवश्यक निर्देश दिए गये हैं। साथ ही शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर मेडिकल टीम को हरसंभव जरूरी सहयोग करने, अपने पोषक क्षेत्र के लाभार्थियों को टीकाकरण शिविर की जानकारी उपलब्ध कराने समेत अन्य आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।