टीबी मरीज नियमित रूप से खाएं दवाः डॉ. दीनानाथ

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-दवा खाने के दौरान होने वाली परेशानियों का बताया गया समाधान
-सदर अस्पताल में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक हुई आयोजित
भागलपुर, 5 अप्रैल।
सदर अस्पताल स्थित जिला यक्ष्मा केंद्र में मंगलवार को टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक हुई। बैठक में 14 टीबी मरीज, 10 उनकी देखभाल करने वाले, 2 टीबी चैंपियन और 8 स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे। बैठक में मरीजों को दवा खाने के दौरान क्या-क्या परेशानी होती है, उसका समाधान सीडीओ डॉ. दीनानाथ द्वारा किया गया। इस दौरान सभी टीबी मरीजों को नियमित रूप से खाने की सलाह दी गई और और सही पोषण पर चर्चा की गई। बैठक का आयोजन केएचपीटी द्वारा किया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा सहयोग किया गया। मौके पर केएचपीटी के फैयाज खान, सुमित कुमार और अभिषेक कुमार भी मौजूद थे।
डॉ. दीनानाथ ने कहा कि टीबी मरीजों से समाज के लोगों को किसी तरह का भेदभाव नहीं करनी चाहिए। लोगों को टीबी मरीजों के इलाज में सहयोग करना चाहिए। अगर हमलोग इलाज में सहयोग करेंगे तो जल्द से जल्द समाज टीबी से मुक्त होगा। इसलिए मरीजों के इलाज के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। जागरूक लोगों को टीबी मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बात करनी चाहिए। मानसिक तौर पर मरीजों का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने टीबी मरीजों से कहा कि यह एक संचारी रोग है, जो एक से दूसरे व्यक्ति में ड्रॉपलेट के जरिये आसानी से फैलता है। इसलिए टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं। जांच में अगर पुष्टि हो जाती है तो दवा का सेवन शुरू कर दें। टीबी का इलाज सरकार की तरफ से बिल्कुल ही मुफ्त है और यह सभी तरह के सरकारी अस्पताल में होता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी इसके समुचित इलाज की व्यवस्था है। यदि किसी को तीन सप्ताह तक लगातार खांसी हो या फिर खांसी में खून आने लगे, बुखार और कफ आने की शिकायत हो तो तत्काल जांच कराएं।
जिनके घर में मधुमेह के मरीज, वे रहें सावधानः बैठक के दौरान डॉ. दीनानाथ ने कहा कि आजकल अधिकतर घरों में मधुमेह के मरीज देखे जा रहे हैं। इस वजह से लोग संतुलित आहार लेते हैं। लोग पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं ले पाते हैं। इससे भी लोग टीबी की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसलिए अगर किसी के घर में मधुमेह के मरीज हों तो डॉक्टर से पूछकर अपना आहार तालिका बनाएं, ताकि कुपोषण का शिकार होने से बचें और टीबी जैसी बीमारी से बचाव हो सके।
बच्चों के पोषण पर दें ध्यानः डॉ. दीनानाथ ने बताया कि टीबी को लेकर बच्चों को काफी सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चे के पोषण में अगर कमी हो जाए तो उसे आसानी से टीबी अपनी चपेट में ले लेता है। इसलिए कम बच्चे ही अच्छे होते हैं। अगर आपके कम बच्चे होंगे तो उसका सही से ध्यान रख पाएंगे। उसके पोषण के प्रति जागरूक रहेंगे और वह टीबी समेत दूसरी बीमारियों से बचा रहेगा।
टीबी के लक्षण
1. दो हफ़्ते या अधिक खांसी आना- पहले सूखी खांसी तथा बाद में बलगम के साथ खून का आना।
2. रात में पसीना आना-चाहे मौसम ठंडे का क्यों न हो।
3. लगातार बुखार रहना
4.थकावट होना
5.वजन घटना
6.सांस लेने में परेशानी होना
बचाव के तरीके
1. जांच के बाद टीबी रोग की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें।
2. मास्क पहनें तथा खांसने या छींकने पर मुंह को पेपर नैपकीन से कवर करें।
3.मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें।
4.मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहें। एसी से परहेज करें।
5. पौष्टिक खाना खाएं। योगाभ्यास करें।
6. बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तम्बाकू, शराब आदि से परहेज करें।
7.  भीड़भाड़ वाली गंदी जगहों पर जानें से बचें।

बदलते मौसम में रहें सतर्क, डायरिया और लू से करें बचाव

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-तेज धूप में घर से निकलने से करें परहेज, अपने पास रखें ओआरएस का घोल
-शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें, भूख से कम भोजन और बार-बार पानी पीएं
बांका, 5 अप्रैल-
मौसम में बदलाव हो रहा है। पारा 40 डिग्री के पास पहुंच गया है। इस वजह से गर्मी भी बढ़ गई है। कुछ जगहों पर लू चलने की भी सूचना है। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना बहुत आवश्यक हो जाता है। ऐसे मौसम में लू की चपेट में तो आते ही हैं, साथ में डायरिया होने का खतरा भी रहता है। दरअसल, गर्मी अधिक रहने से पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन होने से समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं। इसलिए लोगों को सचेत रहने की आवश्यकता है। तेज धूप निकलने से पहले ही घर का काम निपटा लें या फिर शाम में धूप कम होने के बाद ही घर से बाहर निकलें।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि लोगों को मौसम के अनुसार ही अपना व्यवहार करना चाहिए। खानपान से लेकर घर से निकलने तक के समय में बदलाव करना चाहिए। दोपहर में घर से कम निकलना चाहिए। सुबह और शाम में ही घरों से लोगों को बाहर निकलना चाहिए। इसी तरह अभी के मौसम में खाना भूख से थोड़ा कम ही खाना चाहिए। साथ ही पानी का सेवन अत्यधिक करना चाहिए। शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए। साथ ही ओआरएस का घोल न सिर्फ घर में रखना चाहिए, बल्कि संभव हो तो पास में भी रखना चाहिए।
तेल-मसाले से युक्त भोजन से करें परहेजः डॉ. चौधरी कहते हैं कि अभी के मौसम में गर्म खाना खाने से परहेज करना चाहिए। तेल-मसाले से युक्त भोजन करने से परहेज करना चाहिए। यदि गर्म खाने खा भी लिए हों तो उसकी भरपाई अवश्य करें। तरल पदार्थ का सेवन करें। ओरआरएस का घोल या फिर जूस का सेवन कर लें। ऐसा करने से शरीर में गर्म खाने का असर कम-से-कम होगा। पेट गर्म नहीं होगा। साथ ही मौसमी फल का भी सेवन करें। अभी के मौसम में ककड़ी, तरबूज, गन्ने का जूस इत्यादि को अपनी डाइट में शामिल करें। हरी और पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें। इससे कब्जियत भी नहीं होगा। कब्जियत नहीं होने से पेट से संबंधित बीमारी से बचाव होगा।
बीमार पड़ने पर तत्काल ओआरएस घोल का करें सेवनः डॉ. चौधरी कहते हैं कि अभी के मौसम में अगर आप बीमार पड़ते हैं। आपको डायरिया होता है तो तत्काल आप ओआरएस के घोल का सेवन करें और डॉक्टर से संपर्क करें। लगातार उल्टी होना और दस्त होना डायरिया के लक्षण हैं। अगर आपको ऐसा महसूस हो तो आप ओआरएस का घोल लें। अगर ओआरएस घर में उपलब्ध नहीं हो तो नींबू पानी का सेवन करें। इससे फौरी तौर पर राहत मिलती है। डॉक्टर को दिखाने के बाद उनके अनुसार अपना इलाज करवाएं। घर पर खुद से ही इलाज कर निश्चिंत नहीं हो जाएं। ऐसा करना सही नहीं रहेगा। इससे स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है।

इंद्रधनुष अभियान : जिले में दूसरे राउंड के साप्ताहिक नियमित टीकाकरण की हुई शुरुआत

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– हसनपुर,लखीसराय के आंगनबाड़ी केंद्र पर सीएस एवं डीआईओ ने अभियान की शुरुआत की
– टीका से छूटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं का प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा नियमित टीकाकरण
लखीसराय, 04 अप्रैल-
जिले में सोमवार को साप्ताहिक इंद्रधनुष अभियान के दूसरा राउंड का आगाज हो गया। इस अभियान की शुरुआत सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी एवं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने की। उन्होंने लखीसराय प्रखंड अंतर्गत हसनपुर गाँव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर आयोजित शिविर का संयुक्त रूप से उदघाटन किया। इसके बाद जिले के सभी प्रखंडों में अभियान की शुरुआत हुई और टीका से छूटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं का प्राथमिकता के आधार पर नियमित टीकाकरण (आर आई) किया गया। इस मौके पर सिविल सर्जन ने अपने संबोधन में कहा कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे ना केवल गंभीर बीमारी से बचाव होगा, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलेगा। जिससे बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होगा। इसलिए, मैं जिले के तमाम ऐसे लाभार्थियों से अपील करता हूँ कि जो नियमित टीकाकरण नहीं करा पाएं हैं, वह अपने नजदीकी शिविर स्थलों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं। इस मौके पर लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज,  यूनिसेफ एसएमसी नैय्यर उल आजम, बीएमसी कमरान अलवी आदि मौजूद थे।
– टीका से छूटे गर्भवती और बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा नियमित टीकाकरण :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, सोमवार से जिले में इंद्रधनुष अभियान के तहत दूसरे राउंड के साप्ताहिक नियमित टीकाकरण का शुभारंभ हो गया। जिसके माध्यम से टीका से छूटे गर्भवती और बच्चों को जागरूक कर प्राथमिकता के आधार पर टीकाकृत किया जाएगा।  उन्होंने बताया, अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ताकि छूटे सभी लाभार्थी टीकाकृत हो सकें और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
– गंभीर बीमारियों से बचाव करता है नियमित टीकाकरण :
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है। जिसके माध्यम से शून्य से पाँच वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेएई (जापानी बुखार) के टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा अभियान में गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। उक्त टीकाकरण अभियान का जिले भर में सोमवार से शुभारंभ हो गया। जहाँ जिले के सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जा रहा है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
– 02 मई से तीसरे राउंड के साप्ताहिक नियमित टीकाकरण शिविर का होगा शुभारंभ :
इंद्रधनुष अभियान के तहत तीन राउंड में साप्ताहिक नियमित टीकाकरण का जिले भर में आयोजन होगा। पहला राउंड 07 मार्च से 13 मार्च तक हो चुका है और दूसरा आज यानी 04 अप्रैल से शुरू हो चुका है, जो 10 अप्रैल तक चलेगा। जबकि, तीसरे राउंड का 02 से 08 मई तक आयोजन होगा। प्रत्येक राउंड में पूरे सप्ताह नियमित टीकाकरण का आयोजन किया जाएगा। इसको लेकर सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। ताकि सामुदायिक स्तर पर अधिकाधिक लोग लाभांवित हो सकें और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।

बांका में मिशन इंद्रधनुष अभियान का शुभारंभ

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-10 अप्रैल तक चलेगा अभियान, बच्चों को लगाया जाएगा टीका
-टीका लगने से 12 तरह की बीमारियों से बच्चों का होगा बचाव
बांका, 4 अप्रैल-
जिले में मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान के दूसरे चरण का सोमवार को आगाज किया गया। इसके तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को नियमित टीका लगाया जाएगा। टीका लगने से टाइफायड, निमोनिया समेत 12 तरह की बीमारियों से बच्चों का बचाव होगा। एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि यह अभियान 10 अप्रैल तक चलेगा। नियमित टीकाकरण से वंचित बच्चों की सूची बना ली गई है। इन बच्चों को अभियान के तहत टीका लगाया जाएगा। इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वह अपने क्षेत्र के छूटे हुए बच्चों की सूची बनाकर टीकाकरण करवाएं। घर-घर जाकर बच्चों को नजदीकी टीकाकरण केंद्र तक ले जाएं और उनका टीकाकरण कराएं।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता है, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलता है। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसलिए जिले के सभी लाभार्थियों से कहना चाहता हूं कि जो नियमित टीकाकरण नहीं करा पाएं हैं, वह अपने नजदीकी शिविर स्थलों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि इंद्रधनुष अभियान के माध्यम से टीका से छूटी हुई गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जागरूक कर प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जाएगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरणः नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है। इसके माध्यम से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेई (जापानी बुखार) के टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा अभियान में गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
दो मई से शुरू होगा तीसरा राउंडः इंद्रधनुष अभियान के तहत दो मई से तीसरा राउंड शुरू होगा। पहला राउंड 07 से 13 मार्च तक हो चुका है और दूसरा सोमवार से शुरू हो चुका है, जो 10 अप्रैल तक चलेगा। जबकि तीसरा राउंड  02 से 08 मई तक चलेगा। प्रत्येक राउंड में पूरे सप्ताह नियमित टीकाकरण का आयोजन किया जाएगा। सामुदायिक स्तर पर अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सके और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके, इसे लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गई हैं।

मिशन इंद्रधनुष अभियान का आगाज, सीएस ने दवा पिलाकर की शुरुआत

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-10 अप्रैल तक चलेगा अभियान, -जिले के 10545 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य
-टाइफाइड और निमोनिया समेत 12 तरह की बीमारियों से बच्चों का करता है बचाव
भागलपुर, 4 अप्रैल-
टाइफाइड, निमोनिया समेत 12 तरह की बीमारियों से बचाव को लेकर सोमवार को मिशन इंद्रधनुष-4 अभियान का आगाज हो गया। यह अभियान का दूसरा चरण है। इससे पहले भी एक चरण हो चुका है। मोहद्दीनगर अरबन पीएचसी के तहत हरिजन टोला में सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बच्चों को दवा पिलाकर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी, डीपीएम फैजान आलम अशर्फी समेत कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि यह अभियान 10 अप्रैल तक चलेगा। नियमित टीकाकरण से वंचित 10545 बच्चों की सूची बना ली गई है। इन बच्चों को अभियान के तहत टीका लगाया जाएगा। इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वह अपने क्षेत्र के छूटे हुए बच्चों की सूची बनाकर टीकाकरण करवाएं। घर-घर जाकर बच्चों को नजदीकी टीकाकरण केंद्र तक ले जाएं और उनका टीकाकरण कराएं। साथ ही लोगों से भी मेरी अपील है कि जिनके बच्चों को अब तक टीका नहीं लगाया जा सका है, वे अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर बच्चों को टीका लगवाएं।
सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलता है बढ़ावाः जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता है, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलता है। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसलिए जिले के सभी लाभार्थियों से कहना चाहता हूं कि जो नियमित टीकाकरण नहीं करा पाएं हैं, वह अपने नजदीकी शिविर स्थलों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि इंद्रधनुष अभियान के माध्यम से टीका से छूटी हुई गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जागरूक कर प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जाएगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरणः नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है। इसके माध्यम से 2 वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेएई (जापानी बुखार) के टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा अभियान में गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहता है।
दो से शुरू होगा तीसरा राउंडः इंद्रधनुष अभियान के तहत दो मई से तीसरा राउंड शुरू होगा। पहला राउंड 07 से 13 मार्च तक हो चुका है और दूसरा सोमवार से शुरू हो चुका है, जो 10 अप्रैल तक चलेगा। जबकि तीसरा राउंड का 02 से 08 मई तक चलेगा। प्रत्येक राउंड में पूरे सप्ताह नियमित टीकाकरण का आयोजन किया जाएगा। सामुदायिक स्तर पर अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सके और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके, इसे लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गई है।

पंजाब और दिल्ली के ऐतिहासिक जीत के बाद अब बिहार में चलेगा केजरीवाल का झाड़ू : सुशील कुमार सिंह

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*सारण जिले में किसानों के बीच आप का बड़ता प्रभाव*

बिहार के सारण जिले में आम आदमी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह के द्वारा किसानों की समस्याओं को लेकर 28 मार्च से 3 अप्रैल तक प्रखंड में चिलचिलाती गर्मी में दौरे पर हैं।
सुशील कुमार सिंह प्रति दिन पांच से सात गांव का दौरा करके किसानों से डायरेक्ट संवाद कर उनकी समस्या चिट्ठी के माध्यम से जिलाधिकारी को देने की कर रहे है, इस अभियान से सारण जिले के किसानों और युवाओं में जोश दिखने लगा है। इस चिट्ठी पत्री अभियान में हजारों की संख्या में किसान अपनी समस्या को जिलाधिकारी के पास भेजने के लिए तैयार हैं।
सुशील कुमार सिंह ने कहा कि यह अभियान जिले बार पूरे बिहार में चलाया जाएगा ताकि गूंगी बहरी नीतीश सरकार जाग सके।
आप के बढ़ते प्रभाव से पुरे सारण जिले में जनता में तेज़ी से विश्वास के साथ साथ उम्मीद की किरण दिखने लगी है, साथ साथ बहुत तेजी से लोग आम आदमी पार्टी से लोग जुड़ रहे है।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की पंजाब में ऐतिहासिक जीत के बाद आम आदमी पार्टी बिहार प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह 28 अप्रैल से बिहार में विशेष रूप से सक्रिय हो गए है।
बिहार में किसानों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए आप बिहार प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह ने नीतीश सरकार को घेरने के लिए प्रखंड स्तर पर दौरा करना शुरू कर दिया है।
आप नेता सुशील कुमार सिंह 28 अप्रैल से 3 मार्च तक बिहार के सारण जिले से प्रखंड स्तरीय कार्यकर्ता संवाद करना शुरू कर दिया है इस दौरान लगभग बीस प्रखंडों का दौरा करेंगे।
सारण जिले में किसानों की सबसे बड़ी समस्या नीलगाय और और जंगली सुअर के आतंक से निजात दिलाना है ताकि किसानों का फ़सल बचाया जा सके।

किसानों द्वारा खेतों में लगे फ़सल को भारी नुकसान से बचाने के लिए नीतीश सरकार पुरी तरह से घिरती नजर आ रही है, इस अभियान से नीतीश सरकार के स्थानीय नेताओं में बेचैनी बढ़ गई है और यह भी कहा जा रहा है की सारण जिले में आप के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जेडीयू के स्थानीय नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संकेत भी दिए गए हैं।
ऐसा माना जा रहा है की सरकार जल्द ही किसानों की समस्या को लेकर प्रशासन को निर्देश दे दे ताकि आप के बढ़ते प्रभाव को लगाम लग सके।
सुशील कुमार सिंह ने कहा कि सैकड़ों झुंड में नीलगाय के खेत में आ जाने से फ़सल बर्बाद के साथ साथ, किसानों पर जान का खतरा बढ़ गया है।
सरकार के आला अधिकारी और प्रशासन कान में तेल डालकर आराम से सो रहें है।
आप नेता सुशील कुमार सिंह ने कहा कि पैक्स के लचर व्यवस्था की वजह से किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा हैं। पैक्स अध्यक्ष किसानों की मदद करने के बजाए भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। पैक्स अध्यक्ष पूरी तरह व्यवसायी के रूप में काम कर रहे है। किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
सुशील कुमार सिंह ने कहा कि किसानों से जुड़ी सुविधाए जैसे क्रेडिट कार्ड,खाद, बीज अन्य सिर्फ़ सरकार के कागजों में है, हकीकत में दिखता नहीं है।
सुशील कुमार सिंह ने कहा कि सभी किसानों से अपील किया है की अपनी अपनी समस्याओं को चिट्ठी में लिखे जिसे सभी को इकठे जिलाधिकारी को हजारों चिट्ठी के साथ ज्ञापन सौंपा जायगा।
आप नेता सुशील कुमार सिंह ने कहा कि किसानों और युवाओं के जोश नीतीश सरकार नज़र अंदाज़ करने के बजाए किसानों की समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द करे।
किसानों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए लगता है की नीतीश सरकार की पोल खुल चुकी है अब पंजाब दिल्ली के बाद बिहार में चलेगा केजरीवाल झाड़ू।
अब बिहार वासी हो जाओ तैयार अबकी बार केजरीवाल सरकार।

स्कूल स्तर पर 12 से 14 आयु वर्ग के बच्चों के कोविड वैक्सीनेशन के लिए जारी किए गए नए दिशा -निर्देश 

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– राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने सभी जिलों के सिविल सर्जन, डीआईओ और जिला शिक्षा पदाधिकारी को जारी किए निर्देश
– देश के कई राज्यों में टीकाकरण के बाद इस आयु वर्ग के बच्चों के हॉस्पिटलाइजेशन की सूचना मिलने के बाद जारी किया गया दिशा- निर्देश
मुंगेर, 2 अप्रैल-
स्कूल के  स्तर पर 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के कोविड वैक्सीनेशन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने नए दिशा -निर्देश जारी किए हैं। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने डॉ. नरेंद्र कुमार सिन्हा ने राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन, डीआईओ और जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा- निर्देश   जारी किए हैं।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (डीआईओ) डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए  स्कूल स्तर पर ही कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही है। राज्य स्वास्थ्य समिति से प्राप्त सूचना के अनुसार  देश के कई राज्यों में उक्त आयु वर्ग के कई बच्चों के कोरोना टीकाकरण के बाद उनके हॉस्पिटलाइजेशन की सूचना प्राप्त हुई है। इसके प्रारंभिक कारणों में बच्चों में एंग्जायटी पायी गयी है जिसमें बच्चे डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। इसको देखते हुए उक्त आयु वर्ग के बच्चों के लिए विद्यालय स्तर पर लगाए जा रहे सत्र स्थलों पर निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं  –
– टीकाकरण कक्ष में एक समय में केवल एक ही बच्चा का प्रवेश कराया जाय।
– प्रतीक्षा, टीकाकरण एवं 30 मिनट के अवलोकन के लिए अलग-अलग कमरे का प्रबंध किया जाय।
– टीकाकरण की प्रतीक्षा करने वाले बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करायी जाय तथा वहां लंबी लाइन नहीं लगाई जाय।
– टीकाकरण के लिए बच्चों को खाली पेट नहीं रखा जाय।
– टीकाकरण की प्रक्रिया से बच्चों का ध्यान नहीं हटाने के लिए अवलोकन कक्ष में खेल, मनोरंजन आदि का व्यवस्था की जाय।
उन्होंने बताया कि विद्यालय स्तर पर 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का टीकाकरण स्थानीय स्तर पर कार्यरत शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर कराए जाएंगे।

पिरामल स्वास्थ्य ने जिलाधिकारी को सौंपा 12 हजार एन-95 फेस मास्क

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– अच्छी पहल • पिरामल स्वास्थ्य के स्थानीय डीपीएल ने डीएम को सुपुर्द किया मास्क
– जिलाधिकारी ने पिरामल स्वास्थ्य के नाम से प्रशस्ति-पत्र जारी कर दी बधाई
खगड़िया, 02 अप्रैल-
जिले में आम जनों की सजगता और सकारात्मक सहयोग के साथ-साथ स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की कड़ी मेहनत से फिलहाल कोविड संक्रमण पर विराम लगा है।इससे पूरे जिले वासियों ने राहत की साँस ली है। किन्तु, अभी इस घातक महामारी का खतरा पूर्ण रूप से खत्म नहीं हुआ है। इसलिए, अब भी इस महामारी से बचाव के लिए खुद की सुरक्षा का ख्याल रखने की हर व्यक्ति को जरूरत है। ताकि फिर से इस  संकट का सामना नहीं करना पड़े और सभी लोग सुरक्षित रह सकें। हालाँकि, इस घातक महामारी के प्रभाव को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य अब भी प्रयासरत है । जिले में नियमित तौर पर लगातार वैक्सीनेशन अभियान चलाकर हर आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीनेट किया जा रहा है। वहीं, इस घातक महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए फ्रंटलाइन वर्करों की सुरक्षा के लिहाज से पिरामल स्वास्थ्य ने जिला प्रशासन को 12 हजार एन-95 फेस मास्क उपलब्ध कराया है। जो पिरामल स्वास्थ्य के स्थानीय डीपीएल प्रफुल्ल झा ने जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष के हाथों सुपुर्द किया। इस मौके पर डिप्टी कलेक्टर टीएल सिंह भी मौजूद थे।
– जिलाधिकारी ने पिरामल स्वास्थ्य के नाम से प्रशस्ति-पत्र देकर पूरी टीम को दी बधाई :
फेस मास्क प्राप्त करने के बाद जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने इस बेहतर पहल की सराहना की। साथ ही पिरामल स्वास्थ्य के नाम से प्रशस्ति-पत्र जारी कर उक्त संस्था की पूरी टीम को बधाई दी एवं उज्जवल भविष्य की कामना की। वहीं, जिलाधिकारी ने बताया, पिरामल मस्वास्थ्य की यह पहल ना केवल सराहनीय  बल्कि, समाज और राष्ट्रहित में बेहतर कदम भी है।
– आवश्यकतानुसार जिले के पदाधिकारियों और कर्मियों को उपलब्ध कराया जाएगा फेस मास्क :
जिलाधिकारी ने बताया, पिरामल स्वास्थ्य द्वारा कोविड के खिलाफ लड़ाई के लिए उपलब्ध कराये फेस मास्क को फिलहाल आपदा प्रबंधन में सुरक्षित रखा गया है। जिसे आवश्यकतानुसार पदाधिकारियों एवं कर्मियों के बीच वितरित किया जाएगा। ताकि सभी कर्मी खुद सुरक्षित रखते हुए कोविड के खिलाफ अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर सकें। वहीं, उन्होंने बताया, मास्क सिर्फ कोविड ही नहीं, बल्कि अन्य कई तरह की संक्रामक बीमारी से बचाव करता है। इसलिए, मैं जिले के तमाम पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ-साथ आमजनों से भी अपील करता हूँ कि मास्क का उपयोग जारी रखें और विभिन्न संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रहें। वहीं, डिप्टी कलेक्टर टीएल सिंह ने भी पिरामल स्वास्थ्य की इस पहल की सराहना की व  पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल समेत पूरी टीम को धन्यवाद दिया है।

पोषण पखवाड़ा : कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर लोगों को किया जा रहा है जागरूक

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– कुपोषित बच्चों की पहचान कर सुपोषित के लिए दी जा रही है आवश्यक जानकारी
– पोषण पखवाड़ा के तहत 04 अप्रैल तक जिले में होगा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन
बेगूसराय, 02 अप्रैल
कुपोषण मुक्त समाज निर्माण के उद्देश्य को सार्थक रूप देने के लिए जिले में पोषण पखवाड़ा का संचालन हो रहा है। 21 मार्च से शुरू हुए इस पखवाड़ा का 04 अप्रैल को समापन होगा। इस दौरान विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर जहाँ कुपोषण की समस्या को जड़ से मिटाने के लिए आवश्यक पहल की जाएगी। वहीं, सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। ताकि लोगों को उचित पोषण की जानकारी मिल सके और पोषण की महत्ता को समझ सकें। इसको लेकर आईसीडीएस के पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा गाँव से लेकर जिला स्तर पर तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर घर-घर पोषण का संदेश पहुँचाया जा रहा है। इस दौरान सही पोषण, देश रोशन अभियान को बढ़ावा देने के लिए लोगों को सही पोषण एवं मानव जीवन के लिए पोषण की महत्ता की जानकारी दी जा रही है।
– 04 अप्रैल तक चलेगा पोषण पखवाड़ा, सामुदायिक स्तर पर लोगों को दी जाएगी उचित पोषण की जानकारी :
आईसीडीएस की डीपीओ (जिला कार्यक्रम पदाधिकारी) रचना सिन्हा ने बताया पोषण पखवाड़ा के दौरान आईसीडीएस के पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस पखवाड़ा के तहत खासकर महिलाओं को विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है। जिसमें उचित पोषण की महत्ता की जानकारी देते हुए बताया जा रहा कि समय पर खाना खाएं, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, पुराने ख्यालात से बाहर आकर खुद के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। खुद के साथ छोटे-छोटे बच्चों के प्रति खान-पान को लेकर सजग रहें।
– पोषण के पाँच सूत्र की जानकारी देकर लोगों को किया जा रहा जागरूक :
सदर सीडीपीओ पूजा रानी ने बताया, पखवाड़ा के दौरान गर्भवती और धातृ महिलाओं को पोषण के पांच सूत्र पहले एक हजार दिन एनीमिया, डायरिया से बचाव, स्वच्छता, हाथों की सफाई और पौष्टिक आहार के बारे में जागरूक किया जा  रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक लाभार्थी गर्भवती महिला और 6 वर्ष तक के बच्चों का वजन लेने के साथ ही आवश्यक परामर्श दी जा रही है। वहीं, उन्होंने बताया, सभी विद्यालयों में किशोर- किशोरियों के साथ पोषण पर चर्चा, सभी प्रखंड मुख्यालय पर बीसीएपी की बैठक, प्रखंड और जिला मुख्यालय पर पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना, सोशल मास मीडिया के माध्यम से विज्ञापन के जरिये प्रचार- प्रसार किया जा रहा है।
– कुपोषण से बचाव के लिए उचित पोषण जरूरी :
कुपोषण को मिटाने एवं इससे बचाव के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसके लिए समय पर खाना, स्वास्थ्य के प्रति हर आवश्यक बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

समाहरणालय परिसर में पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया गया, डीएम ने किया उद्घाटन

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गर्भवती-धातृ महिलाओं व किशोरियों की खून जांच, बच्चों का वजन लिया गया।
महिलाओं की जांच और बच्चों के वजन के बाद सभी को दिया गया उचित परामर्श
भागलपुर, 2 अप्रैल
राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत शनिवार को समाहरणालय परिसर में पोषण पखवाड़ा अंतर्गत विभिन्न स्टॉल लगाया गया एवं जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा इसका उद्घाटन किया गया। मेला में कई तरह के स्टॉल लगाए गए थे। जैसे गर्भवती, धात्री एवं किशोरियों के खून की जांच के लिए अनीमिया स्टॉल, जीरो से छः वर्ष के बच्चों के वृद्धि निगरानी के लिए  वृद्धि स्टॉल, जल संचय में महिलाओं की भूमिका के लिए स्टॉल,आंगनबाड़ी केंद्रों की ओर से क्राफ्ट, पेंटिंग व खाद्य पदार्थों के स्टॉल लगाए गए थे। जिलाधिकारी ने स्टॉल का निरीक्षण किया और आंगनवाड़ी सेविका के बनाए गए विभिन्न उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने लड्डू, रसिया, क्राफ्ट, पेंटिंग सहित अन्य चीजों के बारे में मौके पर मौजूद आंगनबाड़ी सेविकाओं से जानकारी ली।
एनीमिया के स्टॉल पर गर्भवती व धातृ महिलाओं और किशोरियों के खून की जांच की गई। जांच में जो एनीमिक थी, उसे उचित खान-पान का परामर्श दिया गया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयरन की गोली दी गई। इसी तरह वृद्धि निगरानी स्टॉल पर छह साल तक के बच्चों के वजन और ऊंचाई की जांच की गई। इसमें डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार जो बच्चे स्वस्थ थे, उसे डीपीओ द्वारा सर्टिफिकेट दिया गया। साथ ही जो कुपोषित थे उसे पोषण पुनर्वास केंद्र जाने की सलाह दी गई। वहीं जल संरक्षण में महिलाओं की भूमिका स्टॉल के अंतर्गत सेविकाओं द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र का मॉडल तैयार किया गया था। इसमें जल संचय की विधि को दर्शाया गया था। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा भी जल संचय के बारे में बताया गया। खाद्य पदार्थों की प्रदर्शनी स्टॉल पर अलग-अलग सेविकाओं द्वारा क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों का उपयोग करते हुए स्वादिष्ट व्यंजन तैयार कर उसका प्रदर्शन किया गया था। वहीं आईसीडीएस सर्विसेज स्टॉल के तहत अन्नप्राशन औऱ गोदभराई का आयोजन किया गया।
पोषण के पांच सूत्रीय मंत्र की दी गई जानकारीः आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) सीलिमा कुमारी ने बताया कि पोषण पखवाड़ा के तहत आज का आयोजन किया गया, जिसमें गर्भवती और धातृ महिलाओं को पोषण के पांच सूत्रीय मंत्र के बारे में जानकारी दी गई। इसके तहत एक हजार दिन एनीमिया, डायरिया से बचाव, स्वच्छता, हाथों की सफाई और पौष्टिक आहार के बारे में उन्हें बताया गया। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं की जांच और छह वर्ष तक के बच्चों का वजन लेने का काम भी किया गया। जरूरत के अनुसार आवश्यक परामर्श भी दिया गया। महिलाओं को उचित पोषण के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। महिलाओं को समय पर खाना खाएं, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, पुराने ख्यालात से बाहर आकर खुद के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने के लिए कहा जा रहा है। साथ ही खुद के साथ छोटे-छोटे बच्चों के खान-पान के प्रति सजग रहने के लिए कहा जा रहा है।
प्रखंडों में भी लगाए जाएंगे स्टॉलः आईसीडीएस के जिला समन्वयक अरविंद पांडेय ने बताया कि पोषण पखवाड़ा के तहत सभी प्रखंडों में भी स्टॉल लगाए जाएंगे। वहां पर आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका द्वारा स्टॉल लगाया जाएगा। इसके साथ-साथ सभी स्कूलों में किशोर-किशोरियों के साथ पोषण पर चर्चा, सभी प्रखंड मुख्यालयों पर बीसी बीपीए की बैठक, प्रखंड और जिला मुख्यालय पर पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना, सोशल मास मीडिया के माध्यम से प्रचार- प्रसार करने का काम किया जा रहा है। कजरैली के तेतरहाट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका रंजना कुमारी ने बताया कि हमलोगों ने स्टॉल पर आने वाली महिलाओं को उचित पोषण के बारे में बताया। गर्भवती और धातृ महिलाओं की जांच की और बच्चों का वजन किया।