एईएस को मात देने के लिए एकजुट होकर काम करना जरूरी: सिविल सर्जन 

0
– सिविल सर्जन कार्यालय में जिले के चिकित्सकों को एईएस से निपटने का दिया गया प्रशिक्षण
– चमकी से बचाव के लिए तीन धमकियां खिलाओ, जगाओ और अस्पताल ले जाओ का पालन जरूरी
शेखपुरा, 30 मार्च-
बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय परिसर स्थित सभागार हाॅल में एईएस/जेई (चमकी बुखार/मस्तिष्क ज्वर) पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया । जिसमें जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम, बीसीएम, पारा मेडिकल स्टाफ समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को एईएस से निपटने की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही इस बीमारी से बचाव के अलावा इसके कारण, लक्षण एवं समुचित इलाज की भी जानकारियाँ दी गई। यह प्रशिक्षण सिविल सर्जन डाॅ पृथ्वीराज की अध्यक्षता में दिया गया। वहीं, सिविल सर्जन ने कहा कि एईएस/जेई से निपटने और जिले को इनसे मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को एकजुट होकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने की जरूरत है। तभी हम इस बीमारी से सुरक्षित रह सकते और हमारा जिला एईएस/जेई मुक्त बन सकता है। इसलिए, मैं प्रशिक्षण में मौजूद सभी प्रतिभागियों से अनुरोध करता हूँ कि सभी लोग एकजुट होकर अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करें। वहीं, उन्होंने कहा, इसके लिए सामुदायिक स्तर पर जन जागरूकता भी जरूरी है। इसलिए, अभियान चलाकर लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूक भी करें और आवश्यक जानकारियाँ भी उपलब्ध कराएं।  उन्होंने कहा, इसके अलावा जन सहयोग की भी जरूरत है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि सभी लोग एकजुट होकर इस बीमारी के खिलाफ आगे आएं और इस बीमारी से बचाव के लिए चिकित्सा परामर्श का पालन करें।
– एईएस से बचाव को बच्चों को भी करें जागरूक :
प्रशिक्षण के दौरान मौजूद प्रतिभागियों को एईएस/जेई पर रोकथाम के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए डीभीबीडीसीओ डाॅ अशोक कुमार सिंह ने कहा, इस बीमारी से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर बच्चों को जागरूक करने की जरूरत है। इसलिए, विद्यालय, ऑगनबाड़ी केंद्रों समेत अन्य संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को चेतना सत्र के तहत एईएस/जेई से बचाव को क्या कराना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए समेत बचाव से संबंधित अन्य जानकारियाँ दें और इस बीमारी के कारण, लक्षण एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दें। ताकि लक्षण महसूस होते ही बच्चे अपने अभिभावकों को अपनी परेशानी से अवगत करा सके और समय पर संबंधित बच्चों का इलाज शुरू हो सके। क्योंकि, इस बीमारी को मात देने के लिए समय पर इलाज शुरू कराना बेहद जरूरी है।
– चमकी से बचाव के लिए तीन धमकियां का पालन करने को लोगों को करें जागरूक :
भीडीसीओ श्याम सुंदर कुमार ने कहा, चमकी से बचाव के लिए तीन धमकियां का पालन करने के लिए लोगों को जागरूक करें। पहला खिलाओ, दूसरा जगाओ और तीसरा अस्पताल ले जाओ। इसी के तहत बच्चों को रात में बिना खिलाए नहीं सुलाने, सुबह में जगाने और लक्षण महसूस होने पर तुरंत स्थानीय और नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान ले जाने के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करें। वहीं, उन्होंने कहा, मैं तमाम जिले वासियों से भी अपील करता हूँ कि बच्चों को एईएस से बचाने के लिए माता-पिता को शिशु के स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट रहना चाहिए। समय-समय पर देखभाल करते रहना चाहिए। बच्चों को मौसमी फल, सूखे मेवों का सेवन करवाना चाहिए। साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चों को माँ का दूध पिलाना बेहद आवश्यक है। अप्रैल से जुलाई तक बच्चों में मस्तिष्क ज्वर की संभावना बनी रहती है। बच्चे के माता-पिता को चमकी (मस्तिष्क) बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच और जाँच के बाद आवश्यक इलाज कराना चाहिए।
– ये है चमकी बुखार के प्रारंभिक लक्षण :
– लगातार तेज बुखार रहना।
– बदन में लगातार ऐंठन होना।
– दांत पर दांत दबाए रहना।
– सुस्ती चढ़ना।
– कमजोरी की वजह से बेहोशी आना।
– चिउटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि।
– चमकी बुखार से बचाव के लिए ये सावधानियाँ हैं जरूरी :
– बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें।
–  गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें।
– ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
– रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
– बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
–  पारासिटामोल की गोली या सिरप दें।

पोषण पखवाड़ा : कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर लोगों को किया जा रहा है जागरूक

0
– कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने पर दिया जा रहा जोर, उचित पोषण की दी जा रही जानकारी
– पोषण पखवाड़ा के तहत 04 अप्रैल तक जिले में होगा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन
लखीसराय, 30 मार्च-
कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को शासन-प्रशासन काफी गंभीर है । इसे सुनिश्चित करने को लेकर तमाम गतिविधियों का आयोजन कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में कुपोषण मुक्त समाज निर्माण के उद्देश्य को सार्थक रूप देने के लिए जिले में पोषण पखवाड़ा चल रहा है।21 मार्च से शुरू हुए इस पखवाड़ा का 04 अप्रैल को समापन होगा। इस दौरान विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर जहाँ कुपोषण की समस्या जड़ से मिटाने के लिए आवश्यक पहल की जाएगी। वहीं, सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। ताकि लोगों को उचित पोषण की जानकारी मिल सके और पोषण की महत्ता को समझ सकें। इसको लेकर आईसीडीएस के पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा जिला से लेकर गाँव स्तर पर तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर घर-घर पोषण का संदेश पहुँचाया जा रहा है। इस दौरान सही पोषण, देश रोशन अभियान को बढ़ावा देने के लिए लोगों को सही पोषण एवं मानव जीवन के लिए पोषण की महत्ता की जानकारी दी जा रही है।
– 04 अप्रैल तक चलेगा पोषण पखवाड़ा, सामुदायिक स्तर पर लोगों को दी जाएगी उचित पोषण की जानकारी :
आईसीडीएस की डीपीओ (जिला कार्यक्रम पदाधिकारी) रश्मि चौधरी ने बताया, 21 मार्च से शुरू  पोषण पखवाड़ा आगामी 04 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान आईसीडीएस के पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस पखवाड़ा के तहत खासकर महिलाओं को विशेष रूप से जागरूक किया जाएगा। जिसमें उचित पोषण की महत्ता की जानकारी देते हुए बताया जाएगा कि समय पर खाना खाएं, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, पुराने ख्यालात से बाहर आकर खुद के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। खुद के साथ छोटे-छोटे बच्चों के प्रति खान-पान को लेकर सजग रहें।
– पोषण के पाँच सूत्र की जानकारी देकर लोगों को किया जाएगा जागरूक :
पखवाड़ा के दौरान गर्भवती और धातृ महिलाओं को पोषण के पांच सूत्र, पहले एक हजार दिन, एनीमिया, डायरिया से बचाव, स्वच्छता, हाथों की सफाई और पौष्टिक आहार के बारे में जागरूक किया जा  रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक लाभार्थी गर्भवती महिला और 6 वर्ष तक के बच्चों का वजन लेने के साथ ही आवश्यक परामर्श दिया जाना है। साथ ही पखवाड़ा के दौरान छोटे- छोटे समूह में यक्ष्मा ( टीबी) पर समुदाय आधारित जागरुकता चौपाल का आयोजन किया जाना है। साथ ही सभी विद्यालयों में किशोर- किशोरियों के साथ पोषण पर चर्चा, सभी प्रखंड मुख्यालय पर बीसीएपी की बैठक, प्रखंड और जिला मुख्यालय पर पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना, प्रखंड के पोषक क्षेत्र में ई. रिक्शा, ऑटो रिक्शा और रिक्शा के माध्यम से पोषक संदेशों का प्रचार-प्रसार, पूरे राज्य में निदेशालय के द्वारा टीवी, रेडियो, न्यूज़ पेपर, सोशल मास मीडिया के माध्यम से विज्ञापन के जरिये प्रचार- प्रसार किया जाएगा।
– कुपोषण से बचाव के लिए उचित पोषण जरूरी :
कुपोषण को मिटाने एवं इससे बचाव के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसके लिए समय पर खाना, स्वास्थ्य के प्रति हर आवश्यक बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

फाइलेरिया उन्मूलन में पेशेंट नेटवर्क समूह का योगदान अहम् 

0
• घर पर आकर दवा खिलाने वाली टीम का करें सहयोग :  डॉ. राजेश पांडेय
• दवा सेवन के साथ स्वच्छता का पालन आवश्यक
• डॉ. रजनीकांत ने ख़ुद हाथीपांव की सफाई कर दिया मरीजों को संदेश
पटना/ 30 मार्च-
फाइलेरिया में राहत पाने के लिए इसके मरीजों को दवा सेवन के साथ स्वच्छता का पालन करना भी बेहद आवश्यक है. घर के समीप पानी जमा नहीं होने दें और साफ़-सफाई का ध्यान रखें. हमेश रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें ताकि मच्छर से सुरक्षा मिल सके. सावधानी से ही फाइलेरिया से बचाव संभव है. उक्त बातें जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार ) द्वारा गठित संकुल नेटवर्क समूह के प्रथम बैठक के शुभारंभ के अवसर पर कही.
घर पर आकर दवा खिलाने वाली टीम का करें सहयोग- डॉ. राजेश पांडेय:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के नॉन ट्रॉपिकल डिजीज के राज्य समन्वयक  डॉ. राजेश पांडेय ने फाइलेरिया रोग के विषय में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के साथ लोगों को दवा खिलाने की भी जिम्मेदारी सबकी है. सभी को घर में आकर दवा खिलाने वाली टीम का सहयोग करना चाहिए और दवा खानी चाहिए. उन्होंने कहा कि साल में एक बार डी.ई.सी. और अल्बेनडाजॉल की दवा खाना पर्याप्त है. डॉ. राजेश ने बताया कि फाइलेरिया महिलाओं के जननांगों एवं स्तनों को भी संक्रमित कर सकता है.
फ़ाइलेरिया मरीजों ने जाने प्रबंधन के गुर:
लेप्रा सोसाइटी बिहार के राज्य समन्वयक डॉ. रजनीकांत ने मरीजों को उनके फ़ाइलेरिया ग्रसित अंगों के साफ़-सफाई के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने हाथीपांव से ग्रसित मरीज रणजीत कुमार के पैर की सफाई करते हुए सभी शामिल प्रतिभागियों को इसकी बारीकी के बारे में दिखाया और इसकी महत्ता के बारे में समझाया. उन्होंने कई मरीजों के साथ साफ़- सफाई करने के तरीकों को विस्तारपूर्वक दर्शाया.
फाइलेरिया यूनिट, दानापुर की इंचार्ज डॉ. उषा ने मरीजों को भरोसा दिलाया की नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा एवं जांच की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है और सभी फाइलेरिया मरीज इसका लाभ उठा सकते हैं. डॉ. उषा ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन में पेशेंट नेटवर्क समूह का योगदान अहम् साबित होगा. कार्यक्रम का संचालन करते हुए सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक रणविजय कुमार ने चिकित्सकों और विशेषज्ञों को संकुल समूह के बारे में विस्तार से बताया और शामिल मरीजों को अपनी बात मंच के समक्ष रखने के लिए प्रेरित किया.
मरीजों ने रखी अपनी बात:
जहाज घाट, दीघा की निवासी सीता देवी ने चिकित्सकों और विशेषज्ञों के समक्ष अपनी फाइलेरिया से जंग की पूरी बात बताई और कहा की सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च द्वारा गठित पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़कर उन्होंने फाइलेरिया के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की और ग्रुप के सहयोग से उन्हें अब दवा भी सुगमता से उपलब्ध हो सकी है. संकुल समूह की बैठक में तीन सपोर्ट ग्रुप क्रमशः गंगा वैली ग्रुप, रामजी चक समूह और केश्वर समूह के 48 फाइलेरिया मरीजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी

परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने को प्रेरित करेंगी एएनएम,हुईं प्रशिक्षित

0

-रंगरा पीएएचसी में एफपीएलएमआईएस का दिया गया प्रशिक्षण
-परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री ऑनलाइन लेने के बताए तरीके
भागलपुर, 30 मार्च।
परिवार नियोजन के साधनों को एएनएम देंगी बढ़ावा। क्षेत्र के लोगों को इसके इस्तेमाल के बारे में बताएंगी। एएनएम अब ऑनलाइन भी सामग्री मंगवा सकती हैं। इसे लेकर रंगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में क्षेत्र की एएनएम को फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक इनफॉरमेशन सिस्टम (एफपीएलएमआईएस) का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक जितेंद्र कुमार सिंह ने दिया। प्रशिक्षण के दौरान सभी लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित सामग्रियों को ऑनलाइन कैसे प्राप्त करना है, इसकी जानकारी दी गई। इंडेंट करने से लेकर रिसीव करने के तरीके प्रशिक्षण के दौरान बताए गए। कंडोम, कॉपर टी, अंतरा आदि सामग्री को ऑनलाइन प्राप्त करने की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी गई। सामग्री प्राप्त कर क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार से लेकर वितरण करने तक के बारे में प्रशिक्षण के दौरान बताया गया। मौके पर रंगरा पीएचसी के प्रभारी डॉ. रंजन कुमार, बीएचएम श्वेता कुमारी, बीसीएम सुधीर पासवान और केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर धर्मेंद्र ओझा समेत कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। प्रशिक्षण ले रही एएनएम को सभी बारीकी को समझकर क्षेत्र में बेहतर तरीके से काम करने के लिए कहा गया।
परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार भी करेंगी एएनएमः प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के बाद एएनएम अब परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन मंगवाकर उसे क्षेत्र में वितरण करने का काम करेंगी। साथ ही परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के इंडेंट से लेकर प्राप्त करने के तरीके और इसका क्षेत्र में किस तरह से प्रचार-प्रसार करना है, इसकी जानकारी वे अपने सहयोगी को भी देंगे। सामग्री के वितरण के दौरान इसे लेकर लोगों को जागरूक करने का काम भी एएनएम करेंगी। लोगों को समझाएंगी कि इसके इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
तीन तरीके से प्राप्त कर सकेंगे परिवार नियोजन की सामग्रीः प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि परिवार नियोजन सामग्री को ऑनलाइन तीन तरीके से मंगाया जा सकता है। पहला मोबाइल एप के जरिये, दूसरा मोबाइल से मैसेज कर और तीसरा कंप्यूटर के जरिये ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। एएनएम इसे मोबाइल एप और मैसेज के जरिये मंगा सकती हैं, जबकि स्टोरकीपर मैसेज और कंप्यूटर से ऑनलाइन इंडेंट कर भी मंगवा सकती हैं। पहले क्षेत्र के लोगों की जरूरतों के मुताबिक इंडेंट करेंगे। सामग्री आ जाने के बाद फिर उसका क्षेत्र के लोगों के बीच वितरण करेंगी।
परिवार नियोजन पर किया जा रहा फोकसः पीएचसी प्रभारी डॉ. रंजन कुमार ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन को लेकर लगातार फोकस किया जा रहा है। इसे लेकर परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के वितरण से लेकर समय-समय पर कैंप और मेला भी लगाया जाता है। जहां पर लोगों को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में बताया जाता है। साथ ही किस तरह से बच्चे की प्लानिंग करती है, इसकी जानकारी दी जाती है। दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल और पहला बच्चा 20 साल से पहले नहीं हो, इस बारे में बताया जाता है। दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रहने से जच्चा और बच्चा, दोनों स्वस्थ रहता है। बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है, जिससे वह भविष्य में होने वाली बीमारी से सुरक्षित रहता है।

कायाकल्प विजेता : पूरे प्रदेश में भागलपुर अव्वल, जीता 88 लाख का पुरस्कार 

0
– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने देर शाम पत्र जारी कर विजेता अस्पतालों की जारी की सूची
– विजेता अस्पतालों को रोगी कल्याण समिति के खाते के माध्यम से भेजी जाएगी राशि
भागलपुर, 29 मार्च, 2022
सोमवार की देर शाम राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर कायाकल्प कार्यक्रम अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में विजेता अस्पतालों की सूची जारी किया। जिसमें भागलपुर पूरे प्रदेश में अव्वल रहा और उक्त कार्यक्रम में बेहतर क्रियान्वयन कर पूरे प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का डंका बजा दिया। वहीं, इस उपलब्धि के लिए जिले के स्वास्थ्य महकमे में खुशी का माहौल है और जानकारी मिलते ही सभी पदाधिकारी खुशी से झूम उठे। वहीं, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थानों पर रहने वाले सभी जिले के सिविल सर्जन को अपने-अपने जिले के विजेता अस्पतालों को रोगी कल्याण समिति के खाते के माध्यम से पुरस्कृत राशि भेजने का निर्देश दिया है।
– पूरे प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का उपलब्ध कराने का बजाया डंका और जीता 88 लाख :
कायाकल्प कार्यक्रम के तहत अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का पूरे प्रदेश में डंका बजाने वाले भागलपुर जिला 88 लाख का पुरस्कार जीता है। जिसमें जिला अस्पताल को 50 लाख, सीएचसी शाहकुंड को 20 लाख, रेफरल अस्पताल सुल्तानगंज को 10 लाख रूपये पुरस्कार राशि दी जाएगी। जबकि, अनुमंडलीय अस्पताल नवगछिया, रेफरल अस्पताल पीरपैंती, सीएचसी जगदीश, बिहपुर, गोपालपुर, सबौर, रंगरा, इस्माइलपुर को एक-एक लाख रुपए का पुरस्कार राशि दी जाएगी।
– सभी विजेता स्वास्थ्य संस्थानों के पूरी टीम का साकारात्मक मेहनत का बेहतर नतीजा :
सिविल सर्जन डाॅ उमेश कुमार शर्मा ने सभी विजेता स्वास्थ्य संस्थानों के पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संबंधित सभी स्वास्थ्य स्थानों के पूरी टीम का साकारात्मक मेहनत का बेहतर नतीजा है। मैं जिले सभी स्वास्थ्य स्थानों के प्रबंधन से इसी तरह आगे भी बेहतर परिणाम बनाएं रखने की उम्मीद करता है। वहीं, केयर इंडिया के डीटीओ फैसिलिटी  राजेश मिश्रा ने कहा, यह सभी स्वास्थ्य स्थानों के एक-एक पदाधिकारियों और कर्मियों का मेहनत का परिणाम है। मैं इसके लिए सभी विजेता स्वास्थ्य संस्थानों के पूरी टीम को बधाई देता हूँ।

स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सकों को दिया गया एईएस का प्रशिक्षण 

0
– जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय परिसर स्थित सभागार हाॅल में दिया गया प्रशिक्षण
– सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम, बीसीएम, वीबीडीएस प्रशिक्षण में हुए शामिल
लखीसराय, 29 मार्च।
सोमवार को जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय परिसर स्थित सभागार हाॅल में एईएस/जेई (चमकी बुखार/मस्तिष्क ज्वर) पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम, बीसीएम और जिले के सभी प्रखंडों के कालाजार के वीबीडीएस शामिल हुए। यह प्रशिक्षण सदर अस्पताल लखीसराय के चिकित्सक डाॅ विभूषण कुमार द्वारा मौजूद सभी प्रतिभागियों को विस्तार पूर्वक दिया गया। जिसमें एईएस/जेई का इलाज एवं रोकथाम की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं, जिला वीबीडी सलाहकार नरेंद्र कुमार ने भी प्रशिक्षण में मौजूद सभी प्रतिभागियों को एईएस रोकथाम के लिए विस्तारपूर्वक जानकारी दी । साथ ही सदर अस्पताल समेत जिले के सभी पीएचसी में एक-एक जेई वार्ड बनाने एवं वार्ड के सफल संचालन के लिए पाँच सदस्यीय टीम गठन करने की भी जानकारी दी गई।
– चमकी बुखार के कारण, लक्षण, बचाव और समुचित उपचार की दी गई जानकारी :
डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय के सभागार हाॅल में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण में मौजूद सभी प्रतिभागियों को चमकी बुखार  के कारण, लक्षण, बचाव और समुचित इलाज की विस्तृत जानकारी दी गई। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागी संबंधित मरीजों का सुविधाजनक तरीके जरूरी इलाज कर सकें और मरीजों को भी इलाज के लिए जिले से बाहर नहीं जाना पड़े। इसको लेकर सभी प्रतिभागियों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं।
– चमकी बुखार से बचाव के लिए जागरूकता भी जरूरी :
प्रशिक्षण देने वाले चिकित्सकों डाॅ विभूषण कुमार ने बताया, चमकी बुखार से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर जन जागरूकता भी बेहद आवश्यक और जरूरी है। इसलिए, प्रशिक्षण के दौरान संबंधित मरीजों की जरूरी समुचित जाँच और इलाज के साथ-साथ इस बीमारी से बचाव के सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने की भी जानकारी दी जाएगी। साथ ही मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि बच्चों को एईएस से बचाने के लिए माता-पिता को शिशु के स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट रहना चाहिए। समय-समय पर देखभाल करते रहना चाहिए। स्वस्थ बच्चों को मौसमी फलों, सूखे मेवों का सेवन करवाना चाहिए। साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चों को माँ का दूध पिलाना बेहद आवश्यक है। अप्रैल से जुलाई तक बच्चों में मस्तिष्क ज्वर की संभावना बनी रहती है। बच्चे के माता-पिता चमकी बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच और जाँच के बाद आवश्यक इलाज कराना चाहिए।
– ये है चमकी बुखार के प्रारंभिक लक्षण :
– लगातार तेज बुखार चढ़े रहना।
– बदन में लगातार ऐंठन होना।
– दांत पर दांत दबाए रहना।
– सुस्ती चढ़ना।
– कमजोरी की वजह से बेहोशी आना।
– चिउटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि।
– चमकी बुखार से बचाव के लिए ये सावधानियाँ हैं जरूरी :
– बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें।
–  गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें।
– ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
– रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
– बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
–  पारासिटामोल की गोली या सिरप दें।

मौसम में बदलाव और बढ़ती गर्मी के बीच बच्चों के शरीर में नहीं होने दें डिहाइड्रेशन

0
 – डिहाइड्रेशन और डायरिया  शिशु की मृत्यु दर में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण
– ओआरएस घोल से 90 प्रतिशत तक डायरिया का प्रबंधन संभव
: कुपोषित बच्चों में डायरिया से बढ़ सकती है समस्याएं
मुंगेर, 29 मार्च। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और बढ़ रही गर्मी के बीच बच्चों में डायरिया का होना सबसे सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। डायरिया से बच्चे तो बच्चे बड़े लोग भी पीड़ित हो सकते हैं। डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं। यहां तक कि इस दौरान कुशल प्रबंधन नहीं होने से यह जानलेवा भी हो जाता है। स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े भी इसे शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं। सही समय पर डायरिया के लक्षणों को जानकर एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर बच्चों को इस गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है।
बच्चों के शारीरिक बदलाव पर ध्यान देते हुए इन लक्षणों के प्रति रहें सतर्क :
एनआरसी मुंगेर के नोडल अधिकारी और जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) विकास कुमार ने बताया कि डायरिया के शुरुआती लक्षणों का ध्यान रख माताएं इसकी आसानी से पहचान कर सकती हैं। इससे केवल नवजातों को ही नहीं बल्कि बड़े बच्चों को भी डायरिया से बचाया जा सकता है।
डायरिया के कुछ लक्षण इस प्रकार से हैं : –
– लगातार पतले दस्त आना ।
– बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना ।
– प्यास बढ़ जाना ।
– भूख का कम जाना या खाना नहीं खाना ।
– दस्त के साथ हल्के बुखार का आना ।
– कभी- कभी स्थिति गंभीर हो जाने पर दस्त में खून भी आने लगता है ।
बड़े बच्चों को ओआरएस देकर करें बचाव :
उन्होंने बताया कि बार- बार डायरिया /दस्त लगने से हुये डिहाइड्रेशन को दूर करने के लिए बड़े बच्चों को ओरल रीहाइड्रेशन सोल्यूशन (ओआरएस) का घोल पिलाएँ। इससे दस्त के कारण पानी के साथ शरीर से निकले  जरूरी एल्क्ट्रोलाइट्स ( सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड एवं बाईकार्बोनेट) की कमी को दूर किया जा सकता है। माताएँ अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र या सेविका दीदी से संपर्क कर इस बात की जानकारी ले सकती हैं कि ओआरएस का घोल कैसे बनाना और किस उम्र के बच्चे को इसकी कितनी मात्रा कितने बार दिया जाना है ।
नवजातों व 6 महीने तक के शिशु के लिए स्तनपान ही एक मात्र विकल्प :
एनआरसी मुंगेर की फीडिंग डिमांस्ट्रेटर रचना भारती ने बताया कि 6 माह तक के शिशुओं को डायरिया से बचाने के लिए नियमित स्तनपान पर अधिक जोर देने की जरूरत है। 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने से शिशु का डायरिया एवं निमोनिया जैसे गंभीर रोगों से बचाव होता है। डायरिया के लक्षण यदि ओ.आर.एस. के सेवन के बाद भी रहे तो अविलम्ब मरीज को डॉक्टर के पास ले जाकर उचित उपचार कराना आवश्यक है। लोगों को नीम- हकीम द्वारा बताये गए उपायों से बचना चाहिए तथा ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। बच्चों में डायरिया से होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण उपचार में की गयी देरी होती है। बारिश के मौसम में जल जनित संक्रमण का खतरा बढ़ जाता और भोजन बनाने और खाने समय साफ़- सफाई रखने के अलावा शुद्ध जल का सेवन अनिवार्य है।

नवनियुक्त एएनएम और जीएनएम के मास्टर ट्रेनर के प्रशिक्षण का हुआ समापन 

0
–  सभी प्रतिभागियों को समापन के बाद दिया गया प्रमाण-पत्र
– प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागी अब अपने-अपने प्रखंडों में देंगे प्रशिक्षण
खगड़िया, 29 मार्च-
जिले के नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम को पुराना जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय के सभागार में दिए जा रहे छः दिवसीय मास्टर ट्रेनर के प्रशिक्षण का सोमवार की शाम समापन हो गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी जीएनएम और एएनएम को प्रमाण-पत्र दिया गया। प्रमाण-पत्र डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार एवं केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद के हाथों दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रशिक्षणार्थी को स्वास्थ्य विभाग से संबंधित तमाम कार्यों की विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई। जिसमें अस्पताल की तमाम सुविधाओं समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी गई। ताकि प्रशिक्षण के बाद सभी प्रशिक्षणार्थी अपने कर्तव्य का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकें। साथ ही लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके। यह प्रशिक्षण सदर अस्पताल खगड़िया की स्टाफ नर्स भवानी कुमारी, शांति कुमारी, एएनएम स्कूल की नर्सिंग ट्यूटर खुशबू कुमारी द्वारा केयर इंडिया के एफपीसी राजेश पांडेय की मॉनिटरिंग में दिया गया।
– सफलतापूर्वक प्रशिक्षण का हुआ समापन :
डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार ने बताया छः दिवसीय मास्टर ट्रेनर के प्रशिक्षण का समापन सफलतापूर्वक हो गया, जो प्रशिक्षण देने वाली पूरी टीम की सकारात्मक मेहनत का बेहतर नतीजा है। वहीं, उन्होंने बताया, प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रशिक्षणार्थियों को बेहतर तरीके से तमाम जानकारियाँ उपलब्ध कराई गई। ताकि वह अपने-अपने प्रखंडों में अन्य कर्मियों को भी बेहतर तरीके से प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण दे सकें जिससे प्रखंड स्तर पर कार्य करने वाली सभी एएनएम भी बेहतर तरीके से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।
– प्रशिक्षण समापन के मौके पर सभी प्रशिक्षणार्थी को दिया गया प्रमाण-पत्र :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, जिले के नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम के छः दिवसीय प्रशिक्षण के समापन के मौके पर सभी प्रशिक्षित जीएनएम और एएनएम को प्रमाण-पत्र दिया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम को सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही तमाम स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर संचालन की जानकारी सुनिश्चित कराना है। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी जीएनएम और एएनएम लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में खुद को सक्षम महसूस करें और लोगों को सुविधाजनक तरीके से सभी सुविधाओं का लाभ मिल सके। इसके लिए प्रशिक्षण के दौरान अस्पताल में होने वाली तमाम सुविधाएं एवं उसके क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी गई है।
– जिले के विभिन्न प्रखंडों के 14 नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण :
केयर इंडिया के एफपीसी राजेश पांडेय ने बताया, जिले के विभिन्न प्रखंडों के कुल 14 नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम को यह प्रशिक्षण दिया गया। ताकि सभी जीएनएम और एएनएम को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके जिससे सभी प्रशिक्षण के महत्व और उद्देश्य को बेहतर तरीके से समझ सके। साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने कर्तव्य का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सके।

सन्हौला पीएएचसी में एफपीएलएमआईएस का दिया गया प्रशिक्षण

0
-परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री ऑनलाइन लेने के बताए तरीके
-एएनएम ऑनलाइन सामग्री मंगवाकर क्षेत्र के लोगों में उसे बांटेंगी
भागलपुर, 29 मार्च-
सन्हौला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में मंगलवार को क्षेत्र की एएनएम को फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक इनफॉरमेशन सिस्टम (एफपीएलएमआईएस) का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर आलोक कुमार ने दिया। प्रशिक्षण के दौरान सभी लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित सामग्रियों को ऑनलाइन कैसे प्राप्त करना है, इसकी जानकारी दी गई। इंडेंट करने से लेकर रिसीव करने के तरीके प्रशिक्षण के दौरान बताए गए। कंडोम, कॉपर टी, अंतरा आदि सामग्री को ऑनलाइन प्राप्त करने की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी गई। सामग्री प्राप्त कर क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार से लेकर वितरण करने तक के बारे में प्रशिक्षण के दौरान बताया गया। मौके पर सन्हौला पीएचसी के प्रभारी डॉ. लखन मुर्मू और बीसीएम अनंत कुमार समेत कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। प्रशिक्षण ले रही एएनएम को सभी बारीकी को समझ कर क्षेत्र में बेहतर तरीके से काम करने के लिए कहा गया।
परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार भी करेंगी एएनएमः प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के बाद एएनएम अब परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन मंगवाकर उसे क्षेत्र में वितरण करने का काम करेंगी। साथ ही परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के इंडेंट से लेकर प्राप्त करने के तरीके और इसका क्षेत्र में किस तरह से प्रचार-प्रसार करना है, इसकी जानकारी वे अपने सहयोगी को भी देंगे। सामग्री के वितरण के दौरान इसे लेकर लोगों को जागरूक करने का काम भी एएनएम करेंगी। लोगों को समझाएंगी कि इसके इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
तीन तरीके से प्राप्त कर सकेंगे परिवार नियोजन की सामग्रीः प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि परिवार नियोजन सामग्री को ऑनलाइन तीन तरीके से मंगाया जा सकता है। पहला मोबाइल एप के जरिये, दूसरा मोबाइल से मैसेज कर और तीसरा कंप्यूटर के जरिये ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। एएनएम इसे मोबाइल एप और मैसेज के जरिये मंगा सकती हैं, जबकि स्टोरकीपर मैसेज और कंप्यूटर से ऑनलाइन इंडेंट कर भी मंगवा सकते हैं। पहले क्षेत्र के लोगों की जरूरतों के मुताबिक इंडेंट करेंगे। सामग्री आ जाने के बाद फिर उसका क्षेत्र के लोगों के बीच वितरण करेंगी।
परिवार नियोजन पर किया जा रहा फोकसः सन्हौला पीएचसी के प्रभारी डॉ. लखन मुर्मू ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन को लेकर लगातार फोकस किया जा रहा है। इसे लेकर परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के वितरण से लेकर समय-समय पर कैंप और मेला भी लगाया जाता है। जहां पर कि लोगों को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में बताया जाता है। साथ ही किस तरह से बच्चे की प्लानिंग करती है, इसकी जानकारी दी जाती है। दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल और पहला बच्चा 20 साल से पहले नहीं हो, इस बारे में बताया जाता है। दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रहने से जच्चा और बच्चा, दोनों स्वस्थ रहता है। बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है, जिससे वह भविष्य में होने वाली बीमारी से सुरक्षित रहता है।

जीविका दीदी टीबी मरीजों की पहचान कर इलाज के लिए करेंगी प्रेरित

0
-जीविका दीदियों को टीबी की पहचान को लेकर लक्षण की दी गई जानकारी
-सबौर के लैलख में केएचपीटी ने जीविका के प्रशिक्षण का किया आयोजन
भागलपुर, 29 मार्च-
सबौर प्रखंड के लैलख में पर्सपेक्टिव बिल्डिंग वर्कशॉप के तहत जीविका दीदियों को टीबी बीमारी का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। सोमवार को शुरू हुए प्रशिक्षण का समापन मंगलवार को हो गया। प्रशिक्षण का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रोमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने स्वास्थ्य विभाग और जीविका के सहयोग से किया। इस दौरान दीदियों को टीबी बीमारी की पहचान को लेकर उसके लक्षण के बारे में बताया गया, ताकि वह क्षेत्र में टीबी मरीजों की पहचान कर उसे इलाज के लिए प्रेरित कर सकें। अगर किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण मिले तो तत्काल क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दिया गया।
केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान दीदियों को बताया गया कि अगर आपके स्वयं सहायता समूह या पड़ोस में किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक जागरूकता से ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। जीविका दीदियां अपने स्वयं सहायता समूह के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी जागरूक करेंगी तो हम समाज से टीबी बीमारी को खत्म कर सकते हैं। मौके पर कृष्णा कुमारी, संदीप कुमार, श्वेता कुमारी और मिथिलेश झा मौजूद थे।
ज्यादातर मामले घनी आबादी वाले इलाके में- जीविका दीदियों को बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता है और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चल रहा है। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो लोगों को तत्काल इलाज कराने के लिए कहें। टीबी का अगर कोई इलाज नहीं कराता है तो यह बीमारी कई लोगों में जा सकता है। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा।
पौष्टिक भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।