सीपीजे कॉलेज, नरेला में मार्केटेक-2022 फेस्ट का आयोजन

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नईदिल्ली-

सीपीजे कॉलेज नरेला,गुरु गोविद सिंह विश्वविद्यालय दिल्ली से संबद्ध ने दो दिवसीय मार्केटेक 2022, 8 वां प्रबंधन ओर आईटी इंटर कॉलेज फेस्ट जूम प्लेटफॉर्म के माध्यम से और सीपीजे कॉलेज परिसर में एडवांसड प्रैक्टिसेज इन मैनेजमेंट एंडइनफार्मेशन टेक्नोलोजी विषय पर आयोजित किया। डॉ अभिषेक जैन, महासचिव ओर युगांक चतुर्वेदी महानिदेशक ने मिलकर मुख्य अतिथि डॉ संजीव मित्तल कुलपति संभलपुर विश्वविद्यालय और डॉ अमिता देव, इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय का गर्मजोशी से स्वागत किया। जिन्होंने अपनी उपस्थिति और समृद्ध ज्ञान एवं मूल्यवान मार्गदर्शन से इस अवसर पर क्रमशः पहले और दूसरे दिन को गौरवान्वित किया।
मार्केटेक 2022 के कार्यक्रम के दौरान भारत भर के 25 से अधिक विश्वविद्यालयों शैक्षणिक संस्थानों के लगभग 250 छात्रों ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे आईटी पोस्टर मेकिंग, गेमिंग, आई.टी. प्रश्नोत्तरी, ऐड मैड शो, लोगो रिडिजाइनिंग, सेल्फी विज्ञापन प्रतियोगिता, वेबसाइट डिजाइनिंग और ब्रांड एडोर्सिंग शो में शिरकत किए।
यह वास्तव में एक यादगार कार्यक्रम रहा जिसके दौरान प्रतिभागी अपनी प्रबंधकीय क्षमताओं, तकनीकी ज्ञान, रचनात्मकता, रचना कौशल और पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाने में सक्षम थे। मानत अतिथियों और गणमाऩ्य व्यक्तियों ने कोविड 19 के दौरान बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल प्रौद्योगिकी और शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए सीपीजे कॉलेज के पूरे स्टाफ की तथा सीपीजे के अद्यक्ष सुभाष चंद जैन के मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने देश के व्यापार और अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण के समकालीन समय में प्रासंगिक विषय पर इस तरह के उच्चस्तरीय कार्यक्रम के आयोजन के लिए टीम सीपीजे की भी बहुत प्रशंसा की। कुल मिलाकर कार्यक्रम को जबरदस्त सफलता मिली। अंत में सीपीजे कॉलेज की सहायक प्रोफेसर इश्मीत कोर सोढ़ी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य प्राप्ति को 24 मार्च से 13 अप्रैल तक जिलाभर में विशेष अभियान

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: अभियान के तहत आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर उपलब्ध कराई जा रही टीबी सेवाएँ
: हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के चौथे स्थापना दिवस से पहले टीबी मरीजों की सुविधा के लिए आयोजित किए जा रहे कई कार्यक्रम
मुंगेर, 28 मार्च। सस्टेनेबल डेवलपमेन्ट गोल के तहत 2025 तक देश को टीबी की बीमारी से मुक्त बनाने के लिए जिलाभर के विभिन्न हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर पर 24 मार्च से 13 अप्रैल तक 21 दिनों का विशेष अभियान चल रहा है। इस दौरान वहां टीबी रोगियों की सुविधा के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के साथ- साथ समाज के लोगों के बीच टीबी को लेकर मनोवैज्ञानिक ,सामाजिक स्पोर्ट भी उपलब्ध करायी जा रही है।
डिस्ट्रिक्ट टीबी/एचआईवी कोऑर्डिनेटर शैलेन्दु कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अपर सचिव विकासशील के निर्देशानुसार सन 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीबी सेवाओं को आयुष्मान भारत हेल्थ और वेलनेस सेंटर तक उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यहां टीबी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराने के साथ ही समुदाय से जुड़ने और लोगों के बीच टीबी के प्रति जन- जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ समय रहते टीबी मरीजों को चिह्नित करने, उसकी जांच करने और सही उपचार सुनिश्चित कराना है। इसके साथ ही हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर के माध्यम से टीबी मरीजों और उसके परिवार वालों को मनोवैज्ञानिक सामाजिक स्पोर्ट भी उपलब्ध कराना है।
 उन्होंने बताया कि आगामी 14 अपैल को आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के चौथे स्थापना दिवस से पूर्व जिला भर के विभिन्न हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर विश्व यक्ष्मा दिवस 24 मार्च से 13 अप्रैल तक 21 दिनों का विशेष कैम्प आयोजित किया गया है। इस दौरान वहां टीबी जागरूकता के विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन गतिविधियों की मॉनिटरिंग जिला और राज्य स्तर पर की जा रही है। इस दौरान हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) पर बड़ी जिम्मेवारी है कि वो घर के दरवाजे से बाहर आ रहे लोगों को बेहतर ढंग से टीबी की जांच और इलाज के साथ- साथ इससे बचने के लिए लोगों को टीबी के लक्षण और सावधानियों के बारे में अच्छी तरह से जागरूक करें।
उन्होंने बताया कि जिला के सभी प्रखंडों में टीबी पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पूरे मार्च महीने  से 13 अप्रैल तक ‘टीबी पेशेन्ट सपोर्ट ग्रुप’ की बैठक हो रही है । जिसमें उन्हें टीबी के लक्षण सहित इलाज के विषय में जानकारी दी जा रही है। मैं यह अपील करूँगा कि इस मुहिम से जुड़े सभी लोग अपनी शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करें ताकि हर टीबी रोगी चाहे वह सरकारी अस्पताल या प्राइवेट अस्पताल से इलाज करायें उनकी सभी जाँच एवं दवाएं निःशुल्क मिले और रोगी अकेला महसूस नहीं करे तभी टीबी हारेगा, देश जीतेगा।
उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण को मात देने के बाद अब हमलोगों को टीबी उन्मूलन की दिशा में भी मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। टीबी मरीजों की ससमय पहचान करने एवं उन्हें गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क इलाज प्रदान करने के लिए हमारे पास पर्याप्त मात्रा में संसाधन उपलब्ध हैं। इसके साथ ही टीबी पीड़ित मरीज को उनके इलाज के दौरान प्रति माह भारत सरकार की तरफ से 500 रुपये की पोषण राशि भी उनके बैंक अकाउंट में सीधे दी जा रही है। मैं आमजनों से अपील करता हूँ कि यदि आपको दो सप्ताह या अधिक समय से खाँसी हो, बुखार हो या शाम में शरीर गर्म हो रहा हो, वजन में कमी आ रही हो, भूख नहीं लग रहा हो, छाती में दर्द हो रहा हो, खांसने पर बलगम में खून आ रहा हो एवं अत्यधिक कमजोरी एवं थकान लगता हो तो बिना देर किए नजदीकी टीबी केंद्र में जाकर संपर्क जरूर करें।

लखीसराय जिले के आयुष चिकित्सकों और सीएचओ को दिया गया टीबी प्रशिक्षण 

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– सदर अस्पताल में आयोजित प्रशिक्षण में जिले के सभी आयुष चिकित्सक और सीएचओ हुए शामिल
– मरीजों की पहचान करने और टीबी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने की दी गई विस्तृत जानकारी
लखीसराय, 28 मार्च।
टीबी मुक्त भारत निर्माण को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। हर जरूरी पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में सोमवार को सदर अस्पताल परिसर स्थित सभाकक्ष में एक दिवसीय उन्मुखीकरण का आयोजन किया गया। जिसमें जिले के सभी आयुष चिकित्सक और सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी(सीएचओ) शामिल हुए। प्रशिक्षण में मौजूद सभी आयुष चिकित्सक और सीएचओ को मरीजों की पहचान करने, जाँच और इलाज को प्रेरित करने, सामुदायिक स्तर पर टीबी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने समेत अन्य कई जानकारियाँ विस्तारपूर्वक दी गई। इस मौके पर सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी, डीआईओ सह एसीएमओ डॉ अशोक कुमार भारती, सीडीओ डाॅ पीसी वर्मा, केयर इंडिया के डीटीएल नवेद उर रहमान, आयुष चिकित्सक के टीम लीड डाॅ शिव शंकर आदि मौजूद थे।
– एक-एक मरीज की पहचान कर जाँच और इलाज कराने के लिए प्रेरित करने पर दिया गया बल :
सीडीओ डाॅ पीसी वर्मा ने बताया, प्रशिक्षण के दौरान मौजूद आयुष चिकित्सक और सीएचओ को टीबी के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही अपने-अपने क्षेत्र के मरीजों को जाँच एवं इलाज कराने के लिए प्रेरित करने पर भी बल दिया गया। ताकि मरीजों को समय पर बीमारी का पता लग सके और शुरुआती दौर में ही इलाज भी शुरू हो सके। इससे ना केवल आसानी के साथ मरीज स्वस्थ्य होंगे, बल्कि अन्य लोग भी संक्रमण के दायरे में नहीं आएंगे। वहीं, उन्होंने बताया, जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जाँच के लिए सरकार द्वारा मुफ्त जाँच की सुविधा बहाल की गई है। जहाँ कोई भी  व्यक्ति निःशुल्क जाँच करा सकते हैं। जाँच के साथ निःशुल्क दवाई भी दी जाती है, जो जाँच सेंटर पर ही उपलब्ध है। इतना ही नहीं, इसके अलावा मरीजों को उचित खान-पान के लिए आर्थिक सहायता राशि भी दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन को सफल बनाने के लिए टीबी रोगी खोज अभियान के तहत भी मरीजों को चिह्नित कर उन्हें सरकारी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ताकि शत-प्रतिशत मरीजों को सरकार की सुविधा का लाभ मिल सके।
– टीबी लाइलाज नहीं, पर समय पर जाँच के साथ इलाज शुरू कराना जरूरी :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, टीबी लाइलाज नहीं है। किन्तु, समय पर जाँच और जाँच के पश्चात चिकित्सकों के सलाहानुसार इलाज शुरू कराना जरूरी है। क्योंकि, शुरुआती दौर में ही इलाज शुरू कराने से इस बीमारी को आसानी के साथ मात दी जा सकती है । इसके लिए सरकार द्वारा स्थानीय स्तर पर समुचित जाँच और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि लक्षण महसूस होने पर तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जाकर जाँच कराएं और जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श के अनुसार अपना इलाज भी शुरू कराएं।
– टीबी मुक्त भारत निर्माण के सामुदायिक स्तर पर हर व्यक्ति का सहयोग जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीएल नवेद उर रहमान ने बताया, सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक पूर्ण रूप से टीबी मुक्त भारत निर्माण का लक्ष्य है। इसे सार्थक रूप देने के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। इसलिए, इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए ना केवल खुद जागरूक होने की जरुरत है बल्कि, पूरे समुदाय को भी जागरूक करने की जरूरत है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि ना सिर्फ खुद बल्कि आपको अन्य कोई भी टीबी लक्षण वाले लोग दिखे तो उन्हें तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य जाँच और इलाज कराने के प्रेरित करें। साथ ही आवश्यकता अपने स्तर से जाँच व इलाज कराने में सहयोग भी करें। आपकी यही पहल टीबी मुक्त भारत निर्माण और राष्ट्रहित में सबसे बेहतर और सराहनीय कदम होगा। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में मिले के टीबी मरीजों का फॉलोअप समेत टीबी उन्मूलन को केयर इंडिया द्वारा हरसंभव  सहयोग किया जाएगा।
 – ये हैं टीबी बीमारी के प्रारंभिक लक्षण :-
– 15 दिन या इससे अधिक दिनों तक लगातार खांसी या बुखार रहना
– बलगम में खून आना
– एक माह या इससे अधिक दिनों तक सीने में दर्द रहना
– लगातार शरीर वजन कम होना एवं कमजोरी महसूस होना

अलौली के सूरजनगर में कालाजार की सघन खोज अभियान का डीएम ने किया निरीक्षण, दिए निर्देश 

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– घर-घर जाकर एक-एक व्यक्ति की की जा रही है स्वास्थ्य जाँच, ली जा रही आवश्यक जानकारी
– 03 वर्ष एवं इससे अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों का लिया जा रहा है ब्लड सैंपल
खगड़िया, 28 मार्च-
जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत सूरजनगर गाँव में कालाजार उन्मूलन को लेकर बीमारी फैलने के कारणों का पता लगाने के लिए सघन खोज अभियान चल रहा है। यह अभियान स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के सहयोग से चल रहा है। जिसके तहत मेडिकल टीम द्वारा घर-घर जाकर एक-एक व्यक्ति की स्वास्थ्य जाँच की जाँच की जा रही है। इस दौरान बीमारी के कारणों की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य टीम प्रत्येक व्यक्ति से बातचीत कर उनके रहन-सहन समेत स्वास्थ्य से संबंधित अन्य जानकारियाँ भी ले रही है। ताकि ये स्पष्ट हो सके कि आखिर किन-किन वजहों से यहाँ बीमारी का प्रभाव खत्म नहीं हो रहा, लोग कहाँ लापरवाही बरत रहे और बचाव के साथ-साथ इस बीमारी के प्रभाव को खत्म करने की जरूरी पहल की जा सके। वहीं, जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद समेत अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी भी सूरजनगर गाँव पहुँच कर चल रहे अभियान का निरीक्षण किया। सभी पदाधिकारी ने भी लोगों से मिलकर आवश्यक जानकारियाँ ली। जिसके बाद गाँव में कैम्प कर रहे मेडिकल टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर केयर इंडिया के डीपीओ-वीएल कृष्णा कुमार भारती, डीवीबीडीसीओ बबलू सहनी, डीवीडीसी शहनवाज आलम, बीवीडीएस अरूण कुमार, केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक नवीन कुमार समेत स्थानीय एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ता मौजूद थे।
– कालाजार पीड़ित मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी पीएम आवास योजना का लाभ :
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने कहा, कालाजार पीड़ित मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाएगा। इसको लेकर उन्होंने स्थानीय संबंधित अफसरों को योग्य लाभार्थियों का चयन कर उन्हें हर हाल में पीएम आवास योजना से लाभान्वित करने का निर्देश दिया। साथ ही सभी लोगों से इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए स्वास्थ्य टीम का सहयोग करने की भी अपील की।
– 03 वर्ष एवं इससे अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों का लिया जा रहा है ब्लड सैंपल :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया, मेडिकल टीम द्वारा 03 वर्ष एवं इससे अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों का ब्लड सैंपल लिया जा रहा है। ताकि एक भी संक्रमित मरीज छूटे नहीं और सभी मरीजों को ससमय संक्रमण की जानकारी मिल सके। ताकि मरीजों का समय पर इलाज शुरू हो सके और अन्य लोग भी सुरक्षित रह सकें।
– लक्षण दिखते ही कराएं इलाज, सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है समुचित व्यवस्था :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, लोगों को कालाजार का लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पतालों में जाँच करानी चाहिए और चिकित्सकों के सलाह के अनुसार उचित व समुचित इलाज कराना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में जाँच एवं इलाज की मुफ्त समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। साथ ही इन बीमारियों से बचने के जमीन पर नहीं सोऐं। मच्छरदानी का नियमित रूप से उपयोग करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।
– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को मिला पुरस्कार

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-भीखनपुर स्थित एक होटल में जिला स्वास्थ्य समिति का कार्यक्रम आयोजित
-सिविल सर्जन, एसीएमओ और डीआईओ भी कार्यक्रम में की भागीदारी
भागलपुर, 28 मार्च।
जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से भीखनपुर स्थित एक होटल में सोमवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान साल 2021-22 में परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर करने वालों स्वास्थ्यकर्मियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने किया। मौके पर एसीएमओ डॉ. अंजना, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (डीआईओ) डॉ. मनोज कुमार चौधरी, डीपीएम फैजान आलम अशर्फी, सदर अस्पताल के मैनेजर जावेद मंजूर करीमी, केयर इंडिया की डॉ. सुपर्णा टाट, जितेंद्र कुमार सिंह, आलोक कुमार और आशा के जिला समन्वयक जफरूल इस्माल समेत कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे।
उद्घाटन के बाद सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने स्वास्थ्यकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि पुरस्कार मिलने से आपके काम की पहचान होती है, लेकिन संतुष्ट नहीं होना है। काम करने की भूख को और बढ़ाना है और अगले साल और बेहतर करना है। यह आयोजन ही इस बात का प्रमाण है कि आपलोगों ने सालोंभर बढ़िया काम किया है। इस उत्साह को बरकरार रखने की जरूरत है। नसबंदी के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने की जरूरत है। क्षेत्र के लोगों को यह सुनिश्चित कराएं कि दो बच्चे के बाद ही लोग आपरेशन करा लें। तीन-चार बच्चे के बाद ऑपरेशन कराने की नौबत नहीं आए। साथ ही पुरस्कार पाने वाले स्वास्थ्यकर्मी अपने सहयोगियों को भी प्रोत्साहित करें। उन्हें अपनी सफलता का मूलमंत्र बताएं। ऐसा करने से स्वास्थ्य सेवा और बेहतर होगी। क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों तक सुविधाएं पहुंचेंगी।
डॉ. पींकेश औऱ डॉ. विद्यार्थी बेस्टः महिला नसबंदी में डॉ. पींकेश कुमार तो पुरुष नसबंदी में डॉ. विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी को प्रथम पुरस्कार दिया गया। डॉ. पींकेश कुमार ने 13 सौ से अधिक महिलाओं की नसबंदी पिछले साल की तो नारायणपुर पीएचसी के पूर्व प्रभारी डॉ. विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी ने 25 पुरुषों की नसबंदी की। बेस्ट आशा का पुरस्कार रंगरा की सोनी कुमारी को मिला तो परिवार नियोजन में बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए खरीक पीएचसी के डॉ. नीरज कुमार सिंह को प्रथम पुरस्कार मिला। बेस्ट एएनएम का पुरस्कार शाहकुंड की नूतन कुमारी को दिया गया। मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी और एसीएमओ को परिवार नियोजन में सहयोग करने के लिए विशेष पुरस्कार दिया गया। वहीं केयर इंडिया के जिला परिवार नियोजन समन्वयक आलोक कुमार और जितेंद्र कुमार सिंह को भी सम्मानित किया गया।
इनलोगों को भी दिया गया पुरस्कारः मौके पर बेस्ट अस्पताल प्रभारी का पुरस्कार पीरपैंती के डॉ. सुकेश रंजन को मिला तो इसी कटेगरी में दूसरे स्थान पर कहलगांव अनुमंडल अस्पताल के प्रभारी डॉ. विवेकानंद दास रहे, जबकि तीसरे स्थान पर सीएचसी रंगरा के डॉ. रंजन कुमार रहे। वहीं पीरपैंती रेफरल अस्पताल के बीएचएम प्रणव कुमार, सीएचसी रंगरा की बीएचएम श्वेता कुमारी और रेफरल अस्पताल नाथनगर की बीएचएम अपर्णा कुमारी को भी पुरस्कार दिया गया। बेस्ट अकाउंटेंट के लिए सीएचसी बिहपुर के रौशन झा, सीएचसी गोपालपुर के जरार कासिम और पीरपैंती के समीर कुमार भदौरिया को पुरस्कार मिला। सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल के कुमार नलीनाक्ष्य, सीएचसी बिहपुर के मो. शमशाद और पीरपैंती रेफरल अस्पताल के मोबिल अहमद को बेस्ट बीसीएम का पुरस्कार दिया गया। बेस्ट काउंसिलर का पुरस्कार पीरपैंती के नंदकिशोर पासवान को दिया गया।

कोरोना से बचाव को लेकर बच्चों का रखें विशेष ख्याल

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-पारा मेडिकल संस्थान में डॉक्टरों और नर्सों को दिया गया प्रशिक्षण
-कोरोना से बच्चों के बचाव की डॉक्टरों व नर्सों को दी गई जानकारी
बांका, 28 मार्च-
बच्चों को कोरोना से बचाव को लेकर विशेष सावधान रहने की जरूरत है। डॉक्टर और नर्स अगर सतर्क रहेंगे तो कोरोना से बच्चों को पूरी तरह से बचाया जा सकता है। हालांकि कोरोना की तीसरी लहर भी समाप्त हो चुकी है, लेकिन फिर भी हमें सतर्क रहने की जरूरत है। छोटे बच्चे अपनी परेशानी बताने में सक्षम नहीं होते , इस वजह से उनकी परेशानी को ध्यान से समझने की जरूरत है। अगर हम बच्चे की परेशानी को समझ जाएंगे तो उसका इलाज भी बेहतर होगा। यह बातें सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र नारायण ने सोमवार को पारा मेडिकल संस्थान में डॉक्टरों और नर्सों के प्रशिक्षण के दौरान कही।
कोरोना से बच्चों के बचाव को लेकर डॉक्टरों और नर्सों को सोमवार को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण देने का काम जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के डॉ. राजीव रंजन, केयर इंडिया की ट्रेनर मैरी जूली और सदर अस्पताल की जीएनएम वंदना कुमारी ने किया। मौके पर केयर इंडिया के डीटीएल तौसीफ कमर, डीसीएम राजेश कुमार और डीसीक्यूए डॉ. जावेद अली भी मौजूद थे। प्रशिक्षण के दौरान सभी डॉक्टरों और नर्सों को कोरोना से बच्चों को बचाने के लिए तकनीकी जानकारी भी दी गई। उन्हें बताया गया कि किस परिस्थिति में मरीज को रेफर करना है और किस परिस्थिति में उसे भर्ती करना है। कोरोना की गाइडलाइन का पालन करवाते रहने के लिए कहा गया। साथ ही मास्क पहनने व सामाजिक दूरी का पालन करते रहने की सलाह भी लोगों को देने के लिए कहा गया। सिविल सर्जन ने बच्चे के इलाज के दौरान परिजनों को सतर्क रहने की भी सलाह देने की बात कही।
बच्चों को मानसिक रूप से करें मजबूत: मास्टर ट्रेनर डॉ. राजीव रंजन ने डॉक्टरों एवं नर्सों को बताया कि कोरोना से बच्चों को किस तरह से बचाना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए उसके परिजन को भी सतर्क रहना चाहिए। अगर परिजन सतर्क रहेंगे तो बच्चे भी इससे बचे रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्कूल खुल गए हैं। बड़ी संख्या में भीड़ होने लगी है। ऐसे में बच्चे भी संक्रमण की जद में आ सकते हैं। इससे बचने के लिए एहतियात की जरूरत है। उन्होंने बच्चों की मानसिक देखभाल पर ध्यान देने की बात कही।
सभी बच्चों को नहीं पड़ा है टीका, इसलिए रहें सतर्क: केयर इंडिया की ट्रेनर मैरी जूली ने बताया कि कोरोना का टीका सभी बच्चों को नहीं लगा है। अभी सभी उम्र के बच्चों के लिए कोरोना का टीका आया भी नहीं है। इस वजह से बच्चे के कोरोना की चपेट में आने की आशंका है। इसलिए हमलोगों को बच्चों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। इस भ्रांति में नहीं रहना चाहिए कि बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और उन्हें कोरोना नहीं होगा। हमलोगों को बच्चों को कोरोना से बचाव के लिए विशेष सतर्क रहना होगा।
स्तनपान कराने से पहले हाथ को साफ कर लें और मास्क पहनें: जीएनएम वंदना कुमारी ने बताया कि बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए मां को भी सतर्क रहना चाहिए। स्तनपान कराने से पहले हाथ की सफाई कर लेनी चाहिए। मास्क लगा लेना चाहिए, ताकि बच्चे में मां से संक्रमण नहीं हो। अगर मां सतर्क रहेंगी तो बच्चे भी कोरोना से बचे रहेंगे। मौके पर कई स्वास्थ्यकर्मी भी मौजूद थे।

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक द्वारा पुस्तक का  लोकार्पण

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-सभी जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी को प्रदान की गयी आवश्यक प्रशिक्षण
-आईटीआई टेक्निशियन की दक्षता से प्रसन्न हुए कार्यपालक
पटना: राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जिले के अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी एवं नवनियुक्त ऑक्सीजन इको सिस्टम के प्रबंधकों की दो दिवसीय कार्यशाला को संबोेधित करते हुए कहा कि राज्य के सभी जिला अस्पताल, चिकित्सा महाविद्यालय में 125 संयत्रों, ऑक्सीजन काॅनसंट्रेटर तथा लगभग 50000 सिलिंडर के प्रतिदिन के प्रबंधन करना एक दूरूह कार्य था।  जिसके लिए बिहार सरकार ने आईटीआई के तकनिशियन को नियुक्त किया है। इनको प्रशिक्षित करने में पाथ संस्था को अभार दिया और इस नये तकनीकी क्षमता में दक्षता के वैश्विक ज्ञान को बिहार के लोगों की बेहतरी के लिए किये जा रहे संस्था की सहयोग की सराहना की।
पाथ संस्था के द्वारा ऑक्सीजन इको सिस्टम प्रबंधन हेतु मार्गदर्शिका-सह-प्रशिक्षण माॅड्यूल पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण  संजय कुमार सिंह, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कर कमलों द्वारा किया गया।
श्री सिंह ने इस पुस्तक की रचना की अहमियत पर भी प्रकाश डाला और पाथ संस्था की सराहना की।
विदित हो कि इस पुस्तक में ऑक्सीजन ईको सिस्टम के प्रबंधन पर विचार की चर्चा की गयी। जिससे सिलेंडर की रख-रखाव, संचालन आदि में आवश्यक तकनीकी जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं।
इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मे बिहार के सभी जिलों के अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारियों ने भाग लिया और पोर्टल में स्वास्थ्य से संबंधित वांछनीय डाटा अंकित करने में आ रही समस्याओं के समाधान के बारे में तकनीकी विशेषज्ञों से जानकारियां प्राप्त की।
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक  संजय कुमार सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में समापन से पूर्व  आईटीआई टेकनिशियन से कुछ तकनीकी सवाल किये। तकनिशियनों ने सही उत्तर दिया। सही जवाब पाकर कार्यपालक निदेशक ने उनकी दक्षता का प्रशंसा की और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना भी दी।
बिहार के सभी जिले से आये अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारियों एवं आईटीआई टेकनिशियनों को कार्यपालक निदेशक  संजय कुमार सिंह, प्रशासी पदाधिकारी  कमलनयन, पाथ के स्टेट हेड श्री अजित कुमार सिंह, द्वारा प्रमाण-पत्र वितरण किया गया। श्री मनीष रंजन, नोडल आॅफिसर, च्ै। प्लांट, स्टेट हेल्थ सोसायटी, पटना द्वारा धन्यवाद ज्ञापन की गयी।
इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में पाथ की टीम ने अहम भूमिका अदा की, जिसकी सभी पदाधिकारियों ने प्रशंसा की।

मोदीजी के नेतृत्व में भारत का गौरव विश्व में बढ़ा है- रामचंद्र जांगड़ा,सांसद

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– भाजपा को चार राज्यों में अपार सफलता पर विजयोत्सव होटल एसके वेस्टेन्ड जनकपुरी में आयोजित किया गया
नईदिल्ली-
भाजपा को चार राज्यों में अपार सफलता पर विजयोत्सव होटल एसके वेस्टेन्ड जनकपुरी में एसके ग्रुप ऑफ होटल और न्यू जर्नी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा मौजूद थे। इस खास मौके पर गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में लोकसभा सांसद मनोज रजोरिया और राज्यसभा सांसद इरण्ण कडाडी मौजूद थे। इस खास आयोजन पर विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद जनरल डीपी वत्स मौजूद थे। इस विजयोत्सव में पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के पोते इंद्रजीत सिंह, जितेंद्र सिंह गगी, और सरदार बलविंद्र सिंह संद्दू कार्यक्रम में शामिल हुए और कार्यकर्ताओं का हौसला आफजाई भी किया।
भाजपा के विजयोत्सव की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस मौके पर अतिथियों का स्वागत करते हुए एसके ग्रुप ऑफ होटल के चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि भाजपा को जिस प्रकार से जीत हासिल हुई है यह अद्भूत है। विजय कपूर ने कहा कि इस खास कार्यक्रम में सांसद रामचंद्र जांगड़ा, सांसद मनोज रजोरिया, सांसद इरण्ण कडाडी, सांसद जनरल डीपी वत्स ने समय निकाला है यह हमारे लिए खास है।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने कहा कि दशकों तक राजनीति में वंशवाद और क्षेत्रवाद का बोलबाला था अब देश में विकास की सशक्तिकरण की, युवाओं, महिलाओं के सशक्तिकरण की राजनीति है जिससे भाजपा को सफलता हासिल हुई है।
रामचंद्र जांगड़ा ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में यह कमाल हुआ है। भारत का गौरव पूरे विश्व में बढ़ा है। जहां रुस युद्ध के समय में भी तरजीह दिया वहीं यूक्रेन में पड़ोसी देश के छात्र भी भारत का झंड़ा लेकर बोर्डर पार किए। निश्चिततौर पर आने वाला समय भाजपा का है।
रामचद्रं जांगड़ा ने कहा कि देश में लंबे समय तक राष्ट्रवाद ही चलता है भाजपा इसी राह पर है इसलिए अभी कोई पार्टी इसके आसपास भी नहीं है।
इस मौके पर जनरल डीपी वत्स ने कहा कि देश आज क्षेत्रीयता से ऊपर उठकर आगे बढ़ रहा है। पूर्वोत्तर में जिस प्रकार से भाजपा की हवा चली है यह अद्भूत है। यूपी जैसे बड़े राज्य में इतनी बड़ी सफलता एक साथ कई कहानी बयां कहती है। भाजपा सदा गरीबों के हितों के लिए कार्य किया है जिसके परिणाम सबके सामने साफ-साफ दिख रहे हैं। आगे अभी और सफलता हासिल होगी।
इस खास मौके पर स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को याद करते हुए नमन भी किया गया। शहीदों की याद में मातृभूमि सेवा संस्था ने एक कैलेंडर जारी किया जिसका अनावरण मुख्य अतिथि ने किया।
इस मौके पर धन्यवाद ज्ञापन करते हुए न्यू जर्नी कंपनी के चेयरमैन पीके गुप्ता ने कहा कि विजयोत्सव इसलिए मना रहे हैं ताकि कार्यकर्ताओं में उत्साह बना रहे। यह जीत जनता की जीत है कार्यकर्ता की जीत है जो दिन रात एककरके भाजपा को जीत हासिल करवाई है। आज जब संकट का समय था इस समय इसे पाटते हुए जनता ने भाजपा को चार राज्यों में अपार बहुमत दिया है यह अपने आप में एक मिसाल है।
इस विजयोत्सव के मौके पर न्यू जर्नी के वाइस चेयरमैन शैलेश शर्मा, बार एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट सचिव रोहित पांडे, संयुक्त सचिव रतन लाल जांगड़ा, जनरल वीके चतुर्वेदी, जनरल रंजीत ग्रेवाल, भाजपा नेता रूबी यादव भी उपस्थित थे। इस खास मौके पर देश भक्ति गीत ने विजयोत्सव में चार चांद लगा दिए। जिसपर सभी आंगतुक झुमते हुए नजर आए।

मधुमेह से पीड़ित महिलाएं गर्भावस्था के दौरान रहें सावधान

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-उचित प्रबंधध से सुरक्षित प्रसव संभव, चिकित्सकीय परामर्श का करें पालन
-लापरवाही पर गर्भस्थ शिशु को भी परेशानी का करना पड़ सकता है सामना
बांका, 25 मार्च।
बदलती जीवनशैली और परिवेश में अब मधुमेह की समस्या भी आम हो गई है। वर्तमान दौर में इस परेशानी से किसी भी आयु वर्ग के लोग पीड़ित हो सकते हैं। इसका परिणाम यह है कि मधुमेह रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में लोगों को इससे बचाव के लिए सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। खासकर मधुमेह से पीड़ित हो चुकी गर्भवती महिलाओं को तो और सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान ऐसी पीड़ित महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने से सुरक्षित और सामान्य प्रसव संभव है। इसे लेकर सरकार भी हर जरूरी प्रयास कर रही है । स्थानीय स्तर भी समुचित जांच और उचित प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। इसलिए मधुमेह से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच जरूर करानी चाहिए।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से पीड़ित महिलाओं की समय पर जांच और आवश्यक उपचार जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही होने पर बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, मधुमेह के प्रति लापरवाही करने से ना केवल गर्भवती महिलाओं को  परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि गर्भस्थ शिशु का विकास भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की जांच जरूर करानी चाहिए, ताकि समय पर परेशानी का पता चल सके और ससमय ही जरूरी इलाज सुनिश्चित हो सके। जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मधुमेह जांच की मुफ्त सुविधा उपलब्ध है।
समय पर उपचार नहीं हुआ तो होगी परेशानीः यदि समय से उपचार नहीं हो पाता है, तब आगे चलकर प्रसूता एवं गर्भस्थ शिशु में विभिन्न जटिलताएं हो सकती हैं और दोनों टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित हो सकते। इससे गर्भवती महिलाओं में इन्फेक्शन, प्रसव अवधि में बढ़ोतरी, जटिलतापूर्ण प्रसव, सिजेरियन प्रसव, प्रसव के बाद गर्भाशय का सिकुड़ नहीं पाना एवं प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव जैसी तमाम जटिल समस्या उत्पन्न हो सकती है। इससे प्रसूता की जान पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। गर्भावस्था जनित मधुमेह से गर्भस्थ शिशु को भी समस्या हो सकती है। इससे गर्भस्थ शिशु की मृत्यु, मृत शिशु का जन्म, बर्थ डिफेक्ट, बर्थ इन्जरी एवं नवजात शिशु में ग्लूकोज की कमी के साथ पहले तीन महीने में अचानक गर्भपात की संभावना 30 से 60 प्रतिशत तक हो सकती है।
इलाज के लिए तीन तरह की है व्यवस्थाः गर्भावस्था में मधुमेह के उपचार के लिए सरकार ने तीन तरह व्यवस्था की हैं। पहला भोजन एवं पोषण संबंधित, दूसरा दवाई द्वारा एवं तीसरा इन्सुलिन इंजेक्शन के द्वारा। गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित महिला को पोषण संबंधी जानकारी दी जानी जरूरी है, जिससे वह समझ सके कि गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए पोषण युक्त आहार क्या है। उपयुक्त वजन में बढ़ोतरी कितनी होनी चाहिए एवं खून में सामान्य ग्लूकोज स्तर को प्राप्त करने एवं बनाये रखने के लिए कितना और कौन-सा भोजन लेना है। जिन मधुमेह पॉजिटिव महिलाओं का मधुमेह, पोषण संबंधित उपचार से नियंत्रित नहीं होता है, उन्हें दवा दी जाती है। साथ ही जब दवा सेवन के बाद भी मधुमेह अनियंत्रित होता है, तब चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन द्वारा इन्सुलिन की डोज दी जाती है।

यूपी में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ,रचा इतिहास

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25 मार्च 2022 को लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में लगभग 80 हजार लोगों के समक्ष लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर योगी आदित्यनाथ ने  नया इतिहास बनाया।

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम केंद्रीय मंत्री, बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनके डिप्टी के रूप में केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी शपथ ली। कैबिनेट मंत्री के तौर पर स्वतंत्र देव सिंह, सुरेश खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, बेबी रानी मौर्या, लक्ष्मी नारायण चौधरी, जयवीर सिंह, धर्मपाल सिंह, नन्द गोपाल गुप्ता नंदी, भूपेंद्र सिंह चौधरी, अनिल राजभर, जितिन प्रसाद, राकेश सचान, अरविन्द कुमार शर्मा, योगेंद्र उपाध्याय, आशीष पटेल, संजय निषाद ने भी शपथ ली।
राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के तौर पर नितिन अग्रवाल, कपिलदेव अग्रवाल, असीम अरुण नरेंद्र कश्यप, रविंद्र जायसवाल, संदीप सिंह, गुलाब देवी, गिरीश यादव, धर्मवीर प्रजापति, जेसीएस राठौर, दयाशंकर सिंह, अरुण सक्सेना, दिनेश प्रताप सिंह, दयाशंकर मिश्र, मयंकेश्वर सिंह, दिनेश खटिक, संजीव गौड़, बलदेव औलख, अजीत पाल, जसवंत सैनी ने भी शपथ ली।