पीएसए ऑक्सीजन प्लांट के तकनीकी ऑपरेटरों का दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ
बाँका जिले के सीएचओ और एएनएम को दिया गया टीबी का प्रशिक्षण
पोषण पखवाड़ा से कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर लोगों को किया जा रहा जागरूक
बच्चों में पोषण के स्तर में सुधार को ले जिलाभर में पोषण पखवाड़ा का आयोजन
लखीसराय जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सकों को दिया जाएगा एईएस का प्रशिक्षण
मधुमेह से पीड़ित महिलाएं गर्भावस्था के दौरान रहें सावधान
-उचित प्रबंधध से सुरक्षित प्रसव संभव, चिकित्सकीय परामर्श का करें पालन
-लापरवाही पर गर्भस्थ शिशु को भी परेशानी का करना पड़ सकता है सामना
बांका, 25 मार्च।
बदलती जीवनशैली और परिवेश में अब मधुमेह की समस्या भी आम हो गई है। वर्तमान दौर में इस परेशानी से किसी भी आयु वर्ग के लोग पीड़ित हो सकते हैं। इसका परिणाम यह है कि मधुमेह रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में लोगों को इससे बचाव के लिए सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। खासकर मधुमेह से पीड़ित हो चुकी गर्भवती महिलाओं को तो और सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान ऐसी पीड़ित महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने से सुरक्षित और सामान्य प्रसव संभव है। इसे लेकर सरकार भी हर जरूरी प्रयास कर रही है । स्थानीय स्तर भी समुचित जांच और उचित प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। इसलिए मधुमेह से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच जरूर करानी चाहिए।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से पीड़ित महिलाओं की समय पर जांच और आवश्यक उपचार जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही होने पर बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, मधुमेह के प्रति लापरवाही करने से ना केवल गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि गर्भस्थ शिशु का विकास भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की जांच जरूर करानी चाहिए, ताकि समय पर परेशानी का पता चल सके और ससमय ही जरूरी इलाज सुनिश्चित हो सके। जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मधुमेह जांच की मुफ्त सुविधा उपलब्ध है।
समय पर उपचार नहीं हुआ तो होगी परेशानीः यदि समय से उपचार नहीं हो पाता है, तब आगे चलकर प्रसूता एवं गर्भस्थ शिशु में विभिन्न जटिलताएं हो सकती हैं और दोनों टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित हो सकते। इससे गर्भवती महिलाओं में इन्फेक्शन, प्रसव अवधि में बढ़ोतरी, जटिलतापूर्ण प्रसव, सिजेरियन प्रसव, प्रसव के बाद गर्भाशय का सिकुड़ नहीं पाना एवं प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव जैसी तमाम जटिल समस्या उत्पन्न हो सकती है। इससे प्रसूता की जान पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। गर्भावस्था जनित मधुमेह से गर्भस्थ शिशु को भी समस्या हो सकती है। इससे गर्भस्थ शिशु की मृत्यु, मृत शिशु का जन्म, बर्थ डिफेक्ट, बर्थ इन्जरी एवं नवजात शिशु में ग्लूकोज की कमी के साथ पहले तीन महीने में अचानक गर्भपात की संभावना 30 से 60 प्रतिशत तक हो सकती है।
इलाज के लिए तीन तरह की है व्यवस्थाः गर्भावस्था में मधुमेह के उपचार के लिए सरकार ने तीन तरह व्यवस्था की हैं। पहला भोजन एवं पोषण संबंधित, दूसरा दवाई द्वारा एवं तीसरा इन्सुलिन इंजेक्शन के द्वारा। गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित महिला को पोषण संबंधी जानकारी दी जानी जरूरी है, जिससे वह समझ सके कि गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए पोषण युक्त आहार क्या है। उपयुक्त वजन में बढ़ोतरी कितनी होनी चाहिए एवं खून में सामान्य ग्लूकोज स्तर को प्राप्त करने एवं बनाये रखने के लिए कितना और कौन-सा भोजन लेना है। जिन मधुमेह पॉजिटिव महिलाओं का मधुमेह, पोषण संबंधित उपचार से नियंत्रित नहीं होता है, उन्हें दवा दी जाती है। साथ ही जब दवा सेवन के बाद भी मधुमेह अनियंत्रित होता है, तब चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन द्वारा इन्सुलिन की डोज दी जाती है।
सन 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लिए जन-जन को जागरूक होना जरूरी : प्रभारी सिविल सर्जन
– टीबी उन्मूलन के प्रयासों को जन आंदोलन का रूप देने का हो रहा प्रयास : डीपीएम
– विश्व यक्ष्मा दिवस पर एएनएम स्कूल की छात्राओं ने निकाली प्रभात फेरी
मुंगेर, 24 मार्च-
सन 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लिए जन-जन को जागरूक होना जरूरी । उक्त बात गुरुवार को विश्व यक्ष्मा दिवस पर जिला यक्ष्मा केंद्र मुंगेर से एएनएम स्कूल की छात्राओं द्वारा निकाली गई प्रभात फेरी को हरी झंडी दिखाते हुए प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आंनद शंकर शरण ने कही। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 तक देश में टीबी के मामलों को पूरी तरह खत्म करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं । लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी सहित कई अन्य कारणों से समाज का गरीब तबका इस रोग से ज्यादा प्रभावित हो रहा है। इस पर प्रभावी नियंत्रण के लिये जन- जागरूकता के साथ-साथ सघन अभियान संचालित कर मरीजों की खोज व उनका समुचित इलाज सुनिश्चित कराना जरूरी है। जिला यक्ष्मा केंद्र से निकली प्रभात फेरी एक नंबर ट्रैफिक से राजीव गांधी चौक, तोपखाना बाजार, गोयनका मातृ सदन होते हुए पुनः जिला यक्ष्मा केंद्र पर आकर समाप्त हो गयी। इस अवसर पर डीपीएम नसीम रजि, एएनएम स्कूल मुंगेर की प्राचार्य रागिनी कुमारी ,जिला यक्ष्मा केंद्र में पदस्थापित जिला यक्ष्मा एवम एचआईवी एड्स समन्वयक शैलेन्दु कुमार, सुमित सागर, दीपक कुमार सिन्हा, चैतन्य महाप्रभु, मनोज कुमार, सुरेश कुमार सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।
समय पर इलाज नहीं होने से जानलेवा हो सकता है टीबी :
प्रभात फेरी को हरी झंडी दिखाते हुए जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम 2025 को सफल बनाने के लिए लगातार विशेष अभियान चलाकर टीबी रोगियों की पहचान, जांच और समुचित इलाज किया जा रहा है। राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत पूरे देश में टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान संचालित किया जा रहा है।
विभिन्न स्तरों पर किया गया लोगों को जागरूक :
डिस्ट्रिक्ट टीबी/एचआईवी कोऑर्डिनेटर शैलेन्दु कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक डॉ. रॉबर्ट कोच ने 24 मार्च सन 1882 में टीबी के बैक्टीरिया की खोज की थी। उनके सम्मान में हर वर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस साल टीबी को खत्म करने के लिये “निवेश करें जीवन बचायें” की थीम पर विश्व टीबी दिवस आयोजित किया जा रहा है। इसको लेकर पूरे महीने विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को रोग के कारण, इसके उपचार सहित इसको लेकर संचालित सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने संबंधी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि टीबी संक्रमित व्यक्ति एक साल में कम से कम 10 से 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है। सभी सरकारी संस्थानों में टीबी की जांच व नि:शुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही रोगियों को निक्षय योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह आर्थिक मदद भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
लखीसराय जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंड के चार गाँवों में चलेगा छिड़काव अभियान
– अभियान की सफलता को लेकर कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण
– लखीसराय, सूर्यगढ़ा, पिपरिया एवं बड़हिया प्रखंड के कालाजार प्रभावित गाँव में चलेगा अभियान
लखीसराय, 24 मार्च-
पूरे प्रदेश में कालाजार उन्मूलन को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है । इसे सुनिश्चित करने को लेकर हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंडों लखीसराय, सूर्यगढ़ा, पिपरिया एवं बड़हिया में शुरू होने वाले डीडीटी छिड़काव की सफलता को लेकर कर्मियों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण डीवीबीडी सलाहकार नरेंद्र कुमार के द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद छिड़काव कर्मियों को घर-घर जाकर कैसे छिड़काव करनी है, छिड़काव के दौरान किन-किन बातों का ख्याल रखना ,आदि तमाम जानकारियाँ विस्तार पूर्वक दी गई। इस मौके पर वीडीसीओ भगवान दास, गौतम प्रसाद, वीडीएस विनोद कुमार चौबे, केयर इंडिया की केबीसी ललिता कुमारी आदि मौजूद थी।
– प्रथम चक्र के तहत 60 दिनों तक चलेगा छिड़काव अभियान :
डीवीबीडी सलाहकार नरेंद्र कुमार ने बताया, जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंडों के चार गाँवों में शुरू होने वाले प्रथम चक्र का छिड़काव अभियान 60 दिनों तक चलेगा। इस छिड़काव करने वाली स्वास्थ्य टीम लखीसराय के रजौना चौकी, सूर्यगढ़ा के रामपुर, पिपरिया के रामचंद्रपुर एवं बड़हिया के आदर्श लक्ष्मीपुर गाँव में घर-घर जाकर छिड़काव करेगी। इस दौरान इस बात का विशेष ख्याल रखा जाएगा कि एक भी घर छिड़काव से छूटे नहीं और हर हाल शत-प्रतिशत घरों में छिड़काव सुनिश्चित रूप से हो।
– सदर अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की सुविधा है उपलब्ध :
कालाजार मरीजों की जाँच की सुविधा जिले के सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है। जबकि, सदर अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जिसके कारण संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें संबंधित पीएचसी द्वारा सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने के प्रावधान की जानकारी उन्हें दी जायेगी। साथ ही पाॅजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये संबंधित आशा कार्यकर्ता को दी जाती है। 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वैसे व्यक्ति जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं।
– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रूक-रूक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं , छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन समाग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।
विश्व यक्ष्मा दिवस पर जिले में निकाली गई टीबी जागरूकता रैली
– एएनएम स्कूल परिसर ने निकाली गई रैली, टीबी हारेगा और भारत जीतेगा नारे पर दिया गया बल
– दो हफ्ते से अधिक की खाँसी टीबी का है डर सताती, बलगम का तुम जाँच कराओ डाट्स विधि से दूर भगाओ स्लोगन से लोगों को किया गया जागरूक
खगड़िया, 24 मार्च।
टीबी मुक्त भारत निर्माण को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। इसके लिए हर जरूरी पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में 24 मार्च को विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर गुरुवार को टीबी जागरूकता रैली निकाली गई। यह रैली खगड़िया स्थित एएनएम स्कूल परिसर से निकाली गई। जिसे सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, सीडीओ रवीन्द्र नारायण चौधरी, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार एवं केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद रैली पूरे शहर का भ्रमण करते हुए पुनः एएनएम स्कूल पहुँच समाप्त हुई। इस दौरान रैली में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा टीबी हारेगा और भारत जीतेगा, दो हफ्ते से अधिक की खाँसी टीबी का है डर सताती, बलगम का तुम जाँच कराओ डाट्स विधि से दूर भगाओ, आदि नारे और स्लोगन के माध्यम से लोगों को टीबी से बचाव के लिए जागरूक किया गया। साथ ही टीबी मुक्त भारत निर्माण के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए प्रेरित किया गया। दरअसल, वर्ष 2025 तक सरकार द्वारा पूर्ण रूप से टीबी मुक्त भारत निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
– जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों में उपलब्ध है टीबी की मुफ्त जाँच की सुविधा :
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रवींद्र नारायण चौधरी ने बताया कि जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जाँच के लिए सरकार द्वारा मुफ्त जाँच की सुविधा बहाल की गई है। जहाँ कोई भी टीबी लक्षण वाले व्यक्ति निःशुल्क जाँच करा सकते हैं। जाँच के साथ निःशुल्क दवाई भी दी जाती है, जो जाँच सेंटर पर ही उपलब्ध है। इतना ही नहीं, इसके अलावा मरीजों को उचित खान-पान के लिए आर्थिक सहायता राशि भी दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन को सफल बनाने के लिए टीबी रोगी खोज अभियान के तहत भी मरीजों को चिह्नित कर उन्हें सरकारी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ताकि शत-प्रतिशत मरीजों को सरकार की सुविधा का लाभ मिल सके।
– टीबी लाइलाज नहीं, पर समय पर जाँच के साथ इलाज शुरू कराना जरूरी :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, टीबी लाइलाज नहीं है। किन्तु, समय पर जाँच और जाँच के पश्चात चिकित्सकों के सलाहानुसार इलाज शुरू कराना जरूरी है। क्योंकि, शुरुआती दौर में ही इलाज शुरू कराने से इस बीमारी को आसानी के साथ मात दी सकती है। इसके लिए सरकार द्वारा स्थानीय स्तर पर समुचित जाँच और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इसलिए, तमाम जिलेवासियों से अपील है कि लक्षण महसूस होने पर तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जाकर जाँच कराएं और जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श के अनुसार अपना इलाज भी शुरू कराएं।
– टीबी मुक्त भारत निर्माण के लिए सामुदायिक स्तर पर हर व्यक्ति का सहयोग जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक पूर्ण रूप से टीबी मुक्त भारत निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसे सार्थक रूप देने के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। इसलिए, इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए ना केवल खुद जागरूक होने की जरुरत है बल्कि, पूरे समुदाय को भी जागरूक करने की जरूरत है। इसलिए, जिले वासियों से अपील है कि ना सिर्फ खुद बल्कि अन्य कोई भी टीबी लक्षण वाले लोग दिखे तो उन्हें तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य जाँच और इलाज कराने के लिए प्रेरित करें। साथ ही अपने स्तर से जाँच व इलाज कराने में सहयोग भी करें। आपकी यही पहल टीबी मुक्त भारत निर्माण और राष्ट्रहित में सबसे बेहतर और सराहनीय कदम होगी।
– ये हैं टीबी बीमारी का प्रारंभिक लक्षण :-
– 15 दिन या इससे अधिक दिनों तक लगातार खांसी या बुखार रहना
– बलगम में खून आना
– एक माह या इससे अधिक दिनों तक सीने में दर्द रहना
– लगातार शरीर वजन कम होना एवं कमजोरी महसूस होना
नवगछिया में केएचपीटी ने टीबी को लेकर निकाली जागरूकता रैली
-यक्ष्मा केंद्र के चिकित्सा प्रभारी ने दिखायी हरी झंडी
-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने रैली का किया नेतृत्व
भागलपुर, 24 मार्च-
यक्ष्मा दिवस पर गुरुवार को नवगछिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से केएचपीटी ने जागरूकता रैली निकाली। रैली का नेतृत्व पीएचसी प्रभारी डॉ. वरुण कुमार ने किया, जबकि यक्ष्मा केंद्र की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. भारती सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। रैली में नवगछिया यक्ष्मा केंद्र के समन्वयक संदीप कुमार, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक ओम गुप्ता, प्रखंड सामुदायिक समन्वयक सुमीत कुमार, यक्ष्मा पर्यवेक्षक राकेश कुमार, नगर परिषद के मिशन मैनेजर रंजीत कुमार और संदीप कुमार के साथ-साथ आशा, जीविका और नगर पंचायत समूह की महिलाएं, टीबी के इलाजरत और ठीक हो चुके मरीज और उनके परिजन आदि शामिल थे। प्रभारी डॉ. वरुण कुमार ने बताया कि टीबी को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। अब धीरे-धीरे लोग इसके इलाज के लिए सामने आ रहे हैं। सरकार भी टीबी खत्म करने को लेकर लगातार प्रयासरत है। जांच-इलाज से लेकर सहायता राशि तक उपलब्ध करवा रही है। उम्मीद है जल्द ही हमलोग टीबी पर काबू पा लेंगे।
लोगों को लक्षण और बचाव की दी गई जानकारीः रैली शहर के विभिन्न मार्गों में भ्रमण करते हुए वापस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में समाप्त हुई। इस दौरान लोगों को टीबी के लक्षण और बचाव की जानकारी दी गई। टीबी को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं करने की लोगों से अपील की गई। अगर टीबी के मरीज मिले तो उसे इलाज के लिए अस्पताल लेने के लिए कहा गया। साथ में यह भी बताया गया कि अगर टीबी के मरीज को आप अस्पताल पहुंचाते हैं और जांच में उसकी पुष्टि हो जाती है तो आपको भी पांच सौ रुपये मिलेंगे। इसके साथ-साथ मरीजों का मुफ्त में इलाज भी होगा। साथ में पौष्टिक भोजन के लिए पैसा भी मिलेगा।
सबौर में पौधरोपण और प्रतियोगिता आयोजितः वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सबौर में यक्ष्मा दिवस पर पौधरोपण किया गया। इसमें अस्पताल के वरीय अधिकारी और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के लोग शामिल हुए। इसके बाद एनटीईपी के साथ मिलकर कन्या मध्य विद्यालय, बडी हाट सबौर में जाकर बच्चों के बीच टीबी के लक्षण, जांच और उपचार को लेकर सवाल-जवाब किया गया। बच्चों से सवाल पूछा गया। प्रतियोगिता में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान हासिल करने वाले छात्रों को पुरस्कार दिया गया। इसमें स्कूल के मास्टर और हेडमास्टर ने भी सहयोग किया।