पीएसए ऑक्सीजन प्लांट के तकनीकी ऑपरेटरों का दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ 

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• जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारियों का भी होगा ऑक्सीजन इकोसिस्टम पर उन्मुखीकरण
• राज्य स्वास्थ्य समिति एवं पाथ संस्था के सौजन्य से प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन
• राज्य में 125 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट क्रियाशील
पटना/ 25 मार्च –
पीएसए ऑक्सिजन प्लांट को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आईटीआई तकनीशियनों के लिए शुक्रवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला पटना के एक निजी होटल में प्रारम्भ हुआ। राज्य स्वास्थ्य समिति और पाथ संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारियों का भी उन्मुखीकरण किया जाएगा। प्रदेश में 125 पीएसए ( प्रेशर स्विंग एडजाब्र्र्शन) प्लांट संचालित हैं, जिसे आईटीआई तकनीशियन ऑपरेट करते हैं। दो दिवसीय कार्यशाला से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद तकनीशियन पीएसए प्लांट को बेहतर ढंग से संचालित कर सकेंगे, जिससे प्लांट से क्षमता के अनुरूप ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकेगा। इससे अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सुचारू रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति चालू रहेगी।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग को भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ी। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर ऑक्सीजन की कमी दूर करने को लेकर सभी मेडिकल कालेज अस्पताल, सभी सदर अस्पताल, सभी अनुमंडलीय अस्पताल समेत कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पीएसए प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया। राज्य में 125 पीएसए प्लांट क्रियाशील है।
बदलाव एवं शोध में तकनिशियनों की बड़ी भूमिका:
राज्य स्वास्थ्य समिति क़े प्रशासी पदाधिकारी कमल नयन ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में बड़े बदलाव एवं शोध का कार्य तकनीशियनो ने ही किए हैं। इसी प्रकार यह आवश्यक है कि प्रदेश में ऑक्सिजन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए आइ.टी.आई के लिए तकनीशियनों की भूमिका अहम है।
कार्यशाला को बिहार विकास मिशन के तकनीकि विशेषज्ञ आलोक कुमार ने भी संबोधित किया। राज्य के नोडल अधिकारी मनीष रंजन ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और प्रशिक्षण में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए आभार प्रकट किया।
प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए पाथ संस्था के राज्य प्रतिनिधि अजीत कुमार सिंह ने बिहार राज्य के द्वारा प्रतिदिन किए गए आई.टी.आई प्रोफ़ेशनल की प्रतिनियुक्ति की सराहना करते हुए कहा कि कोविड के बाद स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किए जा रहे प्रयासों को भारत के दूसरे प्रदेश द्वारा अंगीकार किया जा रहा है।
इस अवसर पर पाथ के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक अजीत कुमार सिंह, उप औषधि नियंत्रक राकेश कुमार, प्रशिक्षक, अलोक कुमार, ओमकार कुमार, निनाद, नितेश एवं शहाब हैदर ने पीएसए प्लांट को सही ढंग से देखरेख करने की तकनीक एवं मरीजों तक सुचारू रूप से ऑक्सीजन सप्लाई के तकनीकी पक्ष पर प्रकाश डाले और तकनीशियनों के सवालों के जवाब भी दिये।

बाँका जिले के सीएचओ और एएनएम को दिया गया  टीबी का प्रशिक्षण

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– पारामेडिकल संस्थान में सिविल सर्जन की अध्यक्षता में दिया गया प्रशिक्षण
– मरीजों की पहचान करने और टीबी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने की दी गई विस्तृत जानकारी
बाँका, 25 मार्च-
टीबी मुक्त भारत निर्माण को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है।इसको लेकर हर जरूरी पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में बुधवार को बाँका स्थित पारामेडिकल संस्थान में जिले के सीएचओ (सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी) और एएनएम को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण सिविल सर्जन डाॅ रवीन्द्र नारायण की अध्यक्षता में मास्टर ट्रेनर सह टीबी के जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय एवं केयर इंडिया के डीटीएल तौसिफ कमर द्वारा दिया गया। जिसमें मौजूद सभी कर्मियों को मरीजों की पहचान करने, जाँच और इलाज के प्रेरित करने, सामुदायिक स्तर पर टीबी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने समेत अन्य कई जानकारियाँ विस्तारपूर्वक दी गई। इस मौके पर सीडीओ डाॅ उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा, डाॅ सोहैल अंजुम, शिवरंजन कुमार, अभिनंदन प्रसाद, सुनील कुमार आदि मौजूद थे।
– एक-एक मरीजों की पहचान कर जाँच और इलाज कराने के लिए करें प्रेरित :
सिविल सर्जन डाॅ रवीन्द्र नारायण ने कहा, आपलोग एक-एक मरीज तक पहुँच कर उन्हें जाँच और इलाज कराने के लिए प्रेरित करें। इस दौरान मरीजों को स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराएं। ताकि मरीज बेहिचक अपनी जाँच और इलाज करवा सकें। इस दौरान किसी प्रकार की कोई समस्या हो तो मुझे बताएं। आपकी समस्याओं के समाधान के लिए भी आवश्यक पहल की जाएगी।
– जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है टीबी की मुफ्त जाँच की सुविधा :
सीडीओ डाॅ उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा ने बताया, जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जाँच के लिए सरकार द्वारा मुफ्त जाँच की सुविधा बहाल की गई है। जहाँ कोई भी टीबी के लक्षण वाले व्यक्ति निःशुल्क जाँच करा सकते हैं। जाँच के साथ निःशुल्क दवाई भी दी जाती है, जो जाँच सेंटर पर ही उपलब्ध है। इतना ही नहीं, इसके अलावा मरीजों को उचित खान-पान के लिए आर्थिक सहायता राशि भी दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन को सफल बनाने के लिए टीबी रोगी खोज अभियान के तहत भी मरीजों को चिह्नित कर उन्हें सरकारी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ताकि शत-प्रतिशत मरीजों को सरकार की सुविधा का लाभ मिल सके।
– टीबी लाइलाज नहीं, पर समय पर जाँच के साथ इलाज शुरू कराना जरूरी :
डाॅ सोहैल अंजुम ने बताया, टीबी लाइलाज नहीं है। किन्तु, समय पर जाँच और जाँच के पश्चात चिकित्सकों के सलाहानुसार इलाज शुरू कराना जरूरी है। क्योंकि, शुरुआती दौर में ही इलाज शुरू कराने से इस बीमारी को आसानी के साथ मात दी सकती  और अनावश्यक परेशानियों का भी सामना नहीं पड़ेगा। इसके लिए सरकार द्वारा स्थानीय स्तर पर समुचित जाँच और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि लक्षण महसूस होने पर तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जाकर जाँच कराएं और जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श के अनुसार अपना इलाज भी शुरू कराएं।
– टीबी मुक्त भारत निर्माण के सामुदायिक स्तर पर हर व्यक्ति का सहयोग जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीएल तौसिफ कमर ने बताया, सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक पूर्ण रूप से टीबी मुक्त भारत निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसे सार्थक रूप देने के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। इसलिए, इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए ना केवल खुद जागरूक होने की जरुरत है बल्कि, पूरे समुदाय को भी जागरूक करने की जरूरत है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि ना सिर्फ खुद बल्कि आपको अन्य कोई भी टीबी लक्षण वाले लोग दिखे तो उन्हें तुरंत  स्वास्थ्य जाँच और इलाज कराने के प्रेरित करें। साथ ही अपने स्तर से जाँच व इलाज कराने में सहयोग भी करें। आपकी यही पहल टीबी मुक्त भारत निर्माण और राष्ट्रहित में सबसे बेहतर और सराहनीय कदम होगी।
 – ये हैं टीबी बीमारी के प्रारंभिक लक्षण :-
– 15 दिन या इससे अधिक दिनों तक लगातार खांसी या बुखार रहना
– बलगम में खून आना
– एक माह या इससे अधिक दिनों तक सीने में दर्द रहना
– लगातार शरीर का वजन कम होना एवं कमजोरी महसूस होना

पोषण पखवाड़ा से कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर लोगों को किया जा रहा जागरूक

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– कुपोषित बच्चों की पहचान कर सुपोषित के लिए दी जा रही आवश्यक जानकारी
– पोषण पखवाड़ा के तहत 04 अप्रैल तक जिले में होगा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन
खगड़िया, 25 मार्च-
कुपोषण मुक्त समाज निर्माण के उद्देश्य को सार्थक रूप देने के लिए जिले में पोषण पखवाड़ा का संचालन हो रहा है। 21 मार्च से शुरू हुए इस पखवाड़ा का 04 अप्रैल को समापन होगा। इस दौरान विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर जहाँ कुपोषण की समस्या जड़ से मिटाने के लिए आवश्यक पहल की जाएगी वहीं, सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। ताकि लोगों को उचित पोषण की जानकारी मिल सके जिससे पोषण की महत्ता को समझ सकें। इसको लेकर आईसीडीएस के पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा गाँव से लेकर जिला स्तर पर तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर घर-घर पोषण का संदेश पहुँचाई जा रही है। इस दौरान सही पोषण, देश रोशन अभियान को बढ़ावा देने के लिए लोगों को सही पोषण एवं मानव जीवन के लिए पोषण की महत्ता की जानकारी दी जा रही है।
– 04 अप्रैल तक चलेगा पोषण पखवाड़ा :
पखवाड़ा का नेतृत्व कर रहे आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज ने बताया, 21 मार्च से शुरू यह पोषण पखवाड़ा आगामी 04 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान आईसीडीएस के पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस पखवाड़ा के तहत खासकर महिलाओं को विशेष रूप से जागरूक किया जाएगा। जिसमें उचित पोषण की महत्ता की जानकारी देते हुए बताया जाएगा कि समय पर खाना खाएं, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, पुराने ख्यालात से बाहर आकर खुद के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। खुद के साथ छोटे-छोटे बच्चों के प्रति खान-पान को लेकर सजग रहें।
– पोषण के पाँच सूत्र की जानकारी देकर लोगों को किया जाएगा जागरूक :
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने बताया पखवाड़ा के दौरान गर्भवती और धातृ महिलाओं को पोषण के पांच सूत्र ,पहले एक हजार दिन एनीमिया, डायरिया से बचाव, स्वच्छता, हाथों की सफाई और पौष्टिक आहार के बारे में जागरूक किया जा  रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक लाभार्थी गर्भवती महिला और 6 वर्ष तक के बच्चों का वजन लेने के साथ ही आवश्यक परामर्श दिया जाना है। वहीं, उन्होंने बताया, पखवाड़ा के दौरान छोटे- छोटे समूह में यक्ष्मा ( टीबी) पर समुदाय आधारित जागरूकता चौपाल का आयोजन किया जाना है। साथ ही सभी विद्यालयों में किशोर- किशोरियों के साथ पोषण पर चर्चा, सभी प्रखंड मुख्यालय पर बीसीएपी की बैठक, प्रखंड और जिला मुख्यालय पर पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना, प्रखंड के पोषक क्षेत्र में ई. रिक्शा, ऑटो रिक्शा और रिक्शा के माध्यम से पोषक संदेशों का प्रचार-प्रसार, पूरे राज्य में निदेशालय के द्वारा टीवी, रेडियो, न्यूज़ पेपर, सोशल मास मीडिया के माध्यम से विज्ञापन के जरिये प्रचार- प्रसार किया जाएगा।
– कुपोषण से बचाव के लिए उचित पोषण जरूरी :
सदर सीडीपीओ विनीता कुमारी ने बताया, कुपोषण को मिटाने एवं इससे बचाव के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसके लिए समय पर खाना, स्वास्थ्य के प्रति हर आवश्यक बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

बच्चों में पोषण के स्तर में सुधार को ले जिलाभर में पोषण पखवाड़ा का आयोजन 

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– कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें सुपोषित करना पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य
– आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिशुओं के विकास व पोषण के स्तर की होगी जांच
मुंगेर, 25 मार्च-
जिलाभर में कुपोषण के मामलों में कमी लाने के उद्देश्य से 21 मार्च से 4 अप्रैल तक पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष पखवाड़ा में 0 से 06 साल के बच्चों में पोषण के स्तर में सुधार को लेकर विभिन्न स्तरों पर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार के महिला व बाल विकास मंत्रालय से प्राप्त दिशा- निर्देश के आलोक में पोषण संबंधी परिणाम में सुधार का प्रयास अभियान का मुख्य उद्देश्य है। इस क्रम में 0 से 6 साल के बच्चों में पोषण की स्थिति की जांच करते हुए कुपोषित बच्चों को चिह्नित करते हुए पोषण परामर्श केंद्र के माध्यम से उन्हें सुपोषित किये जाने का प्रयास किया जाना है।
कुपोषण के मामलों में कमी लाना पखवाड़ा का उद्देश्य :
पोषण पखवाड़ा से संबंधित जानकारी देते हुए डीपीओ आईसीडीएस वन्दना पांडेय ने बताया कि उचित पोषण के प्रति आम लोगों को जागरूक करते हुए कुपोषण के मामलों में कमी लाना पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिये आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 0 से 06 वर्ष के बच्चों के पोषण स्तर की जांच की जायेगी। इस दौरान कुपोषित बच्चों को चिह्नित करते हुए उन्हें सुपोषित किये जाने को लेकर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों की हो रही जांच संबंधी रिपोर्ट प्रतिदिन जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए आईसीडीएस पोषण ट्रैकर एप पर अपलोड किया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न स्तरों पर जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित करते हुए आम लोगों को उचित पोषण संबंधी जानकारी भी उपलब्ध करायी जा रही है। ताकि वे अपने घर के बच्चों का उचित पोषण सुनिश्चित करा सकें।
उन्होंने बताया कि पोषण पखवाड़ा में स्वस्थ्य बच्चे की पहचान, समुदाय स्तर पर पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करने, एनीमिया की रोकथाम, पारंपरिक भोजन के जरिये उचित पोषाहार की प्राप्ति सहित अन्य विषयों पर आंगनबाड़ी केंद्र स्तर से समुदाय के लोगों को प्रेरित व जागरूक किये जाने को लेकर प्रयास किये जा रहे हैं।
उचित पोषण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने का हो रहा प्रयास :
उन्होंने बताया कि पोषण पखवाड़ा के तहत सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर उम्र के हिसाब से बच्चों कि वृद्धि की समुचित निगरानी की जा रही है। बच्चों का वजन, लंबाई की माप करते हुए इसे पोषण ट्रैकर एप पर अपलोड किया जा रहा है। इसी तरह जल संरक्षण के उपायों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। इसके साथ ही केंद्र व समुदाय स्तर पर वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट की स्थापना को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जायेगा। विभिन्न स्तरों पर बैठक व गोष्ठी आयोजित कर एनीमिया से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक किया जाना है। सेविकाओं के जरिये स्थानीय महिलाओं को भी बेहतर पोषाहार के उपयोग के लिये प्रेरित किया जा रहा है। ताकि गर्भवती व धात्री महिलाओं के साथ-साथ कम उम्र के बच्चों में पोषण की स्थिति में सुधार लाया जा सके।

लखीसराय जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सकों को दिया जाएगा एईएस का प्रशिक्षण 

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– 29 मार्च को जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय परिसर स्थित सभागार हाॅल में दिया जाएगा प्रशिक्षण
– सिविल सर्जन ने पत्र जारी कर जारी कर सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में शामिल होने के दिए निर्देश
लखीसराय, 25 मार्च।
आगामी 29 मार्च को जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय परिसर स्थित सभागार हाॅल में जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सकों को एईएस (चमकी बुखार) का एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, एक-एक एमबीबीएस डाॅक्टर, आरबीएसके के डाॅक्टर समेत बीएचएम, बीसीएम और कालाजार के वीबीडीएस शामिल होंगे। प्रशिक्षण की सफलता को चल रही तैयारियाँ को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं, आयोजित होने वाले प्रशिक्षण में शत-प्रतिशत प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को लेकर सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने पत्र जारी कर सभी प्रतिभागियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। ताकि शत-प्रतिशत प्रतिभागी प्रशिक्षण में शामिल हो सकें और प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक समापन सुनिश्चित हो सके। प्रशिक्षण का शुभारंभ 11 बजे से होगा।
– चमकी बुखार के कारण, लक्षण, बचाव और समुचित उपचार की दी जाएगी जानकारी :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, 29 मार्च को दिन के 11 बजे से जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय के सभागार हाॅल में एक दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ होगा। जिसमें सभी प्रतिभागियों को चमकी (एईएस) बुखार के कारण, लक्षण, बचाव और समुचित इलाज की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागी संबंधित मरीजों का सुविधाजनक तरीके जरूरी इलाज कर सकें और मरीजों को भी इलाज के लिए जिले से बाहर नहीं जाना पड़े। इसको लेकर सभी प्रतिभागियों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं।
– राज्यस्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले चिकित्सकों द्वारा दिया जाएगा प्रशिक्षण :
यह प्रशिक्षण चिकित्सक डाॅ अश्विनी कुमार और डाॅ विभूषण कुमार द्वारा जिले के सभी प्रतिभागियों को दिया जाएगा। दोनों प्रशिक्षक चिकित्सक, राज्यस्तर पर एईएस का पूर्व में ही प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। वहीं, प्रशिक्षण के सफल संचालन को लेकर करीब-करीब सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई है। शेष बची तैयारियाँ को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
– ये है चमकी बुखार के लक्षण :
– लगातार तेज बुखार चढ़े रहना।
– बदन में लगातार ऐंठन होना।
– दांत पर दांत दबाए रहना।
– सुस्ती चढ़ना।
– कमजोरी की वजह से बेहोशी आना।
– चिउंटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि।
– चमकी बुखार से बचाव को ये सावधानियां हैं जरूरी :
– बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें।
–  गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें।
– ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
– रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
– बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
–  पारासिटामोल की गोली या सिरप दें।

मधुमेह से पीड़ित महिलाएं गर्भावस्था के दौरान रहें सावधान 

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-उचित प्रबंधध से सुरक्षित प्रसव संभव, चिकित्सकीय परामर्श का करें पालन
-लापरवाही पर गर्भस्थ शिशु को भी परेशानी का करना पड़ सकता है सामना
बांका, 25 मार्च।
बदलती जीवनशैली और परिवेश में अब मधुमेह की समस्या भी आम हो गई है। वर्तमान दौर में इस परेशानी से किसी भी आयु वर्ग के लोग पीड़ित हो सकते हैं। इसका परिणाम यह है कि मधुमेह रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में लोगों को इससे बचाव के लिए सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। खासकर मधुमेह से पीड़ित हो चुकी गर्भवती महिलाओं को तो और सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान ऐसी पीड़ित महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने से सुरक्षित और सामान्य प्रसव संभव है। इसे लेकर सरकार भी हर जरूरी प्रयास कर रही है । स्थानीय स्तर भी समुचित जांच और उचित प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। इसलिए मधुमेह से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच जरूर करानी चाहिए।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से पीड़ित महिलाओं की समय पर जांच और आवश्यक उपचार जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही होने पर बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, मधुमेह के प्रति लापरवाही करने से ना केवल गर्भवती महिलाओं को  परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि गर्भस्थ शिशु का विकास भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की जांच जरूर करानी चाहिए, ताकि समय पर परेशानी का पता चल सके और ससमय ही जरूरी इलाज सुनिश्चित हो सके। जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मधुमेह जांच की मुफ्त सुविधा उपलब्ध है।
समय पर उपचार नहीं हुआ तो होगी परेशानीः यदि समय से उपचार नहीं हो पाता है, तब आगे चलकर प्रसूता एवं गर्भस्थ शिशु में विभिन्न जटिलताएं हो सकती हैं और दोनों टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित हो सकते। इससे गर्भवती महिलाओं में इन्फेक्शन, प्रसव अवधि में बढ़ोतरी, जटिलतापूर्ण प्रसव, सिजेरियन प्रसव, प्रसव के बाद गर्भाशय का सिकुड़ नहीं पाना एवं प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव जैसी तमाम जटिल समस्या उत्पन्न हो सकती है। इससे प्रसूता की जान पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। गर्भावस्था जनित मधुमेह से गर्भस्थ शिशु को भी समस्या हो सकती है। इससे गर्भस्थ शिशु की मृत्यु, मृत शिशु का जन्म, बर्थ डिफेक्ट, बर्थ इन्जरी एवं नवजात शिशु में ग्लूकोज की कमी के साथ पहले तीन महीने में अचानक गर्भपात की संभावना 30 से 60 प्रतिशत तक हो सकती है।
इलाज के लिए तीन तरह की है व्यवस्थाः गर्भावस्था में मधुमेह के उपचार के लिए सरकार ने तीन तरह व्यवस्था की हैं। पहला भोजन एवं पोषण संबंधित, दूसरा दवाई द्वारा एवं तीसरा इन्सुलिन इंजेक्शन के द्वारा। गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित महिला को पोषण संबंधी जानकारी दी जानी जरूरी है, जिससे वह समझ सके कि गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए पोषण युक्त आहार क्या है। उपयुक्त वजन में बढ़ोतरी कितनी होनी चाहिए एवं खून में सामान्य ग्लूकोज स्तर को प्राप्त करने एवं बनाये रखने के लिए कितना और कौन-सा भोजन लेना है। जिन मधुमेह पॉजिटिव महिलाओं का मधुमेह, पोषण संबंधित उपचार से नियंत्रित नहीं होता है, उन्हें दवा दी जाती है। साथ ही जब दवा सेवन के बाद भी मधुमेह अनियंत्रित होता है, तब चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन द्वारा इन्सुलिन की डोज दी जाती है।

सन 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लिए जन-जन को जागरूक होना जरूरी : प्रभारी सिविल सर्जन

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– टीबी उन्मूलन के प्रयासों को जन आंदोलन का रूप देने का हो रहा प्रयास : डीपीएम

– विश्व यक्ष्मा दिवस पर एएनएम स्कूल की छात्राओं ने निकाली प्रभात फेरी

मुंगेर, 24 मार्च-

सन 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लिए जन-जन को जागरूक होना जरूरी । उक्त बात गुरुवार को विश्व यक्ष्मा दिवस पर जिला यक्ष्मा केंद्र मुंगेर से एएनएम स्कूल की छात्राओं द्वारा निकाली गई प्रभात फेरी को हरी झंडी दिखाते हुए प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आंनद शंकर शरण ने कही। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 तक देश में टीबी के मामलों को पूरी तरह खत्म करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं । लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी सहित कई अन्य कारणों से समाज का गरीब तबका इस रोग से ज्यादा प्रभावित हो रहा है। इस पर प्रभावी नियंत्रण के लिये जन- जागरूकता के साथ-साथ सघन अभियान संचालित कर मरीजों की खोज व उनका समुचित इलाज सुनिश्चित कराना जरूरी है। जिला यक्ष्मा केंद्र से निकली प्रभात फेरी एक नंबर ट्रैफिक से राजीव गांधी चौक, तोपखाना बाजार, गोयनका मातृ सदन होते हुए पुनः जिला यक्ष्मा केंद्र पर आकर समाप्त हो गयी। इस अवसर पर डीपीएम नसीम रजि, एएनएम स्कूल मुंगेर की प्राचार्य रागिनी कुमारी ,जिला यक्ष्मा केंद्र में पदस्थापित जिला यक्ष्मा एवम एचआईवी एड्स समन्वयक शैलेन्दु कुमार, सुमित सागर, दीपक कुमार सिन्हा, चैतन्य महाप्रभु, मनोज कुमार, सुरेश कुमार सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।

समय पर इलाज नहीं होने से जानलेवा हो सकता है टीबी :
प्रभात फेरी को हरी झंडी दिखाते हुए जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम 2025 को सफल बनाने के लिए लगातार विशेष अभियान चलाकर टीबी रोगियों की पहचान, जांच और समुचित इलाज किया जा रहा है। राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत पूरे देश में टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान संचालित किया जा रहा है।

विभिन्न स्तरों पर किया गया लोगों को जागरूक :
डिस्ट्रिक्ट टीबी/एचआईवी कोऑर्डिनेटर शैलेन्दु कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक डॉ. रॉबर्ट कोच ने 24 मार्च सन 1882 में टीबी के बैक्टीरिया की खोज की थी। उनके सम्मान में हर वर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस साल टीबी को खत्म करने के लिये “निवेश करें जीवन बचायें” की थीम पर विश्व टीबी दिवस आयोजित किया जा रहा है। इसको लेकर पूरे महीने विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को रोग के कारण, इसके उपचार सहित इसको लेकर संचालित सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने संबंधी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि टीबी संक्रमित व्यक्ति एक साल में कम से कम 10 से 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है। सभी सरकारी संस्थानों में टीबी की जांच व नि:शुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही रोगियों को निक्षय योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह आर्थिक मदद भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

लखीसराय जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंड के चार गाँवों में चलेगा छिड़काव अभियान

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– अभियान की सफलता को लेकर कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण
– लखीसराय, सूर्यगढ़ा, पिपरिया एवं बड़हिया प्रखंड के कालाजार प्रभावित गाँव में चलेगा अभियान

लखीसराय, 24 मार्च-

पूरे प्रदेश में कालाजार उन्मूलन को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है । इसे सुनिश्चित करने को लेकर हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंडों लखीसराय, सूर्यगढ़ा, पिपरिया एवं बड़हिया में शुरू होने वाले डीडीटी छिड़काव की सफलता को लेकर कर्मियों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण डीवीबीडी सलाहकार नरेंद्र कुमार के द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद छिड़काव कर्मियों को घर-घर जाकर कैसे छिड़काव करनी है, छिड़काव के दौरान किन-किन बातों का ख्याल रखना ,आदि तमाम जानकारियाँ विस्तार पूर्वक दी गई। इस मौके पर वीडीसीओ भगवान दास, गौतम प्रसाद, वीडीएस विनोद कुमार चौबे, केयर इंडिया की केबीसी ललिता कुमारी आदि मौजूद थी।

– प्रथम चक्र के तहत 60 दिनों तक चलेगा छिड़काव अभियान :
डीवीबीडी सलाहकार नरेंद्र कुमार ने बताया, जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंडों के चार गाँवों में शुरू होने वाले प्रथम चक्र का छिड़काव अभियान 60 दिनों तक चलेगा। इस छिड़काव करने वाली स्वास्थ्य टीम लखीसराय के रजौना चौकी, सूर्यगढ़ा के रामपुर, पिपरिया के रामचंद्रपुर एवं बड़हिया के आदर्श लक्ष्मीपुर गाँव में घर-घर जाकर छिड़काव करेगी। इस दौरान इस बात का विशेष ख्याल रखा जाएगा कि एक भी घर छिड़काव से छूटे नहीं और हर हाल शत-प्रतिशत घरों में छिड़काव सुनिश्चित रूप से हो।

– सदर अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की सुविधा है उपलब्ध :
कालाजार मरीजों की जाँच की सुविधा जिले के सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है। जबकि, सदर अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जिसके कारण संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें संबंधित पीएचसी द्वारा सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने के प्रावधान की जानकारी उन्हें दी जायेगी। साथ ही पाॅजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये संबंधित आशा कार्यकर्ता को दी जाती है। 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वैसे व्यक्ति जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं।

– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रूक-रूक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।

– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं , छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन समाग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

विश्व यक्ष्मा दिवस पर जिले में निकाली गई टीबी जागरूकता रैली

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– एएनएम स्कूल परिसर ने निकाली गई रैली, टीबी हारेगा और भारत जीतेगा नारे पर दिया गया बल
– दो हफ्ते से अधिक की खाँसी टीबी का है डर सताती, बलगम का तुम जाँच कराओ डाट्स विधि से दूर भगाओ स्लोगन से लोगों को किया गया जागरूक

खगड़िया, 24 मार्च।
टीबी मुक्त भारत निर्माण को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। इसके लिए हर जरूरी पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में 24 मार्च को विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर गुरुवार को टीबी जागरूकता रैली निकाली गई। यह रैली खगड़िया स्थित एएनएम स्कूल परिसर से निकाली गई। जिसे सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, सीडीओ रवीन्द्र नारायण चौधरी, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार एवं केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद रैली पूरे शहर का भ्रमण करते हुए पुनः एएनएम स्कूल पहुँच समाप्त हुई। इस दौरान रैली में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा टीबी हारेगा और भारत जीतेगा, दो हफ्ते से अधिक की खाँसी टीबी का है डर सताती, बलगम का तुम जाँच कराओ डाट्स विधि से दूर भगाओ, आदि नारे और स्लोगन के माध्यम से लोगों को टीबी से बचाव के लिए जागरूक किया गया। साथ ही टीबी मुक्त भारत निर्माण के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए प्रेरित किया गया। दरअसल, वर्ष 2025 तक सरकार द्वारा पूर्ण रूप से टीबी मुक्त भारत निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

– जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों में उपलब्ध है टीबी की मुफ्त जाँच की सुविधा :
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रवींद्र नारायण चौधरी ने बताया कि जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जाँच के लिए सरकार द्वारा मुफ्त जाँच की सुविधा बहाल की गई है। जहाँ कोई भी टीबी लक्षण वाले व्यक्ति निःशुल्क जाँच करा सकते हैं। जाँच के साथ निःशुल्क दवाई भी दी जाती है, जो जाँच सेंटर पर ही उपलब्ध है। इतना ही नहीं, इसके अलावा मरीजों को उचित खान-पान के लिए आर्थिक सहायता राशि भी दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन को सफल बनाने के लिए टीबी रोगी खोज अभियान के तहत भी मरीजों को चिह्नित कर उन्हें सरकारी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ताकि शत-प्रतिशत मरीजों को सरकार की सुविधा का लाभ मिल सके।

– टीबी लाइलाज नहीं, पर समय पर जाँच के साथ इलाज शुरू कराना जरूरी :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, टीबी लाइलाज नहीं है। किन्तु, समय पर जाँच और जाँच के पश्चात चिकित्सकों के सलाहानुसार इलाज शुरू कराना जरूरी है। क्योंकि, शुरुआती दौर में ही इलाज शुरू कराने से इस बीमारी को आसानी के साथ मात दी सकती है। इसके लिए सरकार द्वारा स्थानीय स्तर पर समुचित जाँच और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इसलिए, तमाम जिलेवासियों से अपील है कि लक्षण महसूस होने पर तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जाकर जाँच कराएं और जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श के अनुसार अपना इलाज भी शुरू कराएं।

– टीबी मुक्त भारत निर्माण के लिए सामुदायिक स्तर पर हर व्यक्ति का सहयोग जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक पूर्ण रूप से टीबी मुक्त भारत निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसे सार्थक रूप देने के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। इसलिए, इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए ना केवल खुद जागरूक होने की जरुरत है बल्कि, पूरे समुदाय को भी जागरूक करने की जरूरत है। इसलिए, जिले वासियों से अपील है कि ना सिर्फ खुद बल्कि अन्य कोई भी टीबी लक्षण वाले लोग दिखे तो उन्हें तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य जाँच और इलाज कराने के लिए प्रेरित करें। साथ ही अपने स्तर से जाँच व इलाज कराने में सहयोग भी करें। आपकी यही पहल टीबी मुक्त भारत निर्माण और राष्ट्रहित में सबसे बेहतर और सराहनीय कदम होगी।

– ये हैं टीबी बीमारी का प्रारंभिक लक्षण :-
– 15 दिन या इससे अधिक दिनों तक लगातार खांसी या बुखार रहना
– बलगम में खून आना
– एक माह या इससे अधिक दिनों तक सीने में दर्द रहना
– लगातार शरीर वजन कम होना एवं कमजोरी महसूस होना

नवगछिया में केएचपीटी ने टीबी को लेकर निकाली जागरूकता रैली

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-यक्ष्मा केंद्र के चिकित्सा प्रभारी ने दिखायी हरी झंडी
-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने रैली का किया नेतृत्व

भागलपुर, 24 मार्च-

यक्ष्मा दिवस पर गुरुवार को नवगछिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से केएचपीटी ने जागरूकता रैली निकाली। रैली का नेतृत्व पीएचसी प्रभारी डॉ. वरुण कुमार ने किया, जबकि यक्ष्मा केंद्र की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. भारती सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। रैली में नवगछिया यक्ष्मा केंद्र के समन्वयक संदीप कुमार, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक ओम गुप्ता, प्रखंड सामुदायिक समन्वयक सुमीत कुमार, यक्ष्मा पर्यवेक्षक राकेश कुमार, नगर परिषद के मिशन मैनेजर रंजीत कुमार और संदीप कुमार के साथ-साथ आशा, जीविका और नगर पंचायत समूह की महिलाएं, टीबी के इलाजरत और ठीक हो चुके मरीज और उनके परिजन आदि शामिल थे। प्रभारी डॉ. वरुण कुमार ने बताया कि टीबी को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। अब धीरे-धीरे लोग इसके इलाज के लिए सामने आ रहे हैं। सरकार भी टीबी खत्म करने को लेकर लगातार प्रयासरत है। जांच-इलाज से लेकर सहायता राशि तक उपलब्ध करवा रही है। उम्मीद है जल्द ही हमलोग टीबी पर काबू पा लेंगे।
लोगों को लक्षण और बचाव की दी गई जानकारीः रैली शहर के विभिन्न मार्गों में भ्रमण करते हुए वापस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में समाप्त हुई। इस दौरान लोगों को टीबी के लक्षण और बचाव की जानकारी दी गई। टीबी को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं करने की लोगों से अपील की गई। अगर टीबी के मरीज मिले तो उसे इलाज के लिए अस्पताल लेने के लिए कहा गया। साथ में यह भी बताया गया कि अगर टीबी के मरीज को आप अस्पताल पहुंचाते हैं और जांच में उसकी पुष्टि हो जाती है तो आपको भी पांच सौ रुपये मिलेंगे। इसके साथ-साथ मरीजों का मुफ्त में इलाज भी होगा। साथ में पौष्टिक भोजन के लिए पैसा भी मिलेगा।
सबौर में पौधरोपण और प्रतियोगिता आयोजितः वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सबौर में यक्ष्मा दिवस पर पौधरोपण किया गया। इसमें अस्पताल के वरीय अधिकारी और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के लोग शामिल हुए। इसके बाद एनटीईपी के साथ मिलकर कन्या मध्य विद्यालय, बडी हाट सबौर में जाकर बच्चों के बीच टीबी के लक्षण, जांच और उपचार को लेकर सवाल-जवाब किया गया। बच्चों से सवाल पूछा गया। प्रतियोगिता में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान हासिल करने वाले छात्रों को पुरस्कार दिया गया। इसमें स्कूल के मास्टर और हेडमास्टर ने भी सहयोग किया।