कायाकल्प, लक्ष्य और एनक्वास को लेकर दिया गया प्रशिक्षण

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-सदर अस्पताल के विक्टोरिया भवन में डॉक्टरों को मिला प्रशिक्षण
-सभी अस्पतालों के प्रभारी और बीएचएम प्रशिक्षण में हुए शामिल
भागलपुर, 24 मार्च –
सदर अस्पताल के विक्टोरिया भवन में गुरुवार को कायाकल्प, लक्ष्य और एनक्वास (नेशनल क्वालिटी स्टैंडर्ड) की तैयारी को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा, डीपीएम फैजान आलम अशर्फी, डीएचएस के डॉ. प्रशांत, केयर इंडिया के डीटीओ फैसिलिटी राजेश मिश्रा और सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारी समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। इस दौरान लक्ष्य और एनक्वास को लेकर प्रशिक्षण देने का काम राजस्थान से आई डॉ. नीति शर्मा ने किया, जबकि कायाकल्प को लेकर डॉ. प्रशांत, फैजान आलम अशर्फी और डॉ. राजेश मिश्रा ने प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि कायाकल्प की स्टेट टीम की विजिट सभी अस्पतालों में हो चुकी है। जल्द ही उसका परिणाम आने वाला है। हालांकि इसके बावजूद अगली बार के लिए प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में मुख्य फोकस लक्ष्य और एनक्वास पर रहा। पिछली बार लक्ष्य में भागलपुर सदर अस्पताल को बेहतर अंक मिला था। इस बार और कैसे बेहतर करना है। इसके बारे में बताया गया। खासकर लेबर रूम और ओटी की व्यवस्था मानक के मुताबिक कैसी होनी चाहिए। यह बताया गया। जहां भी सुधार की गुंजाइश है, उस बारे में ध्यान दिलाया गया। इसके साथ-साथ अब एनक्वास की विजिट पर भी फोकस करने पर ध्यान देने के लिए कहा गया। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. नीति शर्मा ने बताया कि लक्ष्य और कायाकल्प को लेकर जिले के अस्पतालों की तैयारी अच्छी है, लेकिन एनक्वास की विजिट को लेकर अभी और तैयारी करनी पड़ेगी।
एनक्वास पर किया जाएगा फोकसः प्रशिक्षण के दौरान डॉ. नीति शर्मा ने बताया कि जिले के अस्पताल लक्ष्य और कायाकल्प में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। अब एनक्वास पर फोकस करना चाहिए। एनक्वास के मानक पर खरा उतरने के बाद बेहतर अंक लाने पर अस्पतालों में ढेर सारी सुविधाएं मिलती हैं। अस्पतालों में जब सुविधाएं बढ़ेंगी तो मरीजों को उससे खासा राहत मिलेगी। इसके लिए साफ-सफाई के साथ सुविधाओं को भी व्यवस्थित करनी होगी। वहीं सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कही गई बातों को अमल में लाने के लिए सभी अस्पतालों के प्रभारियों, बीएचएन एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को कहा गया है। सभी अस्पतालों में सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसे और बेहतर किया जाएगा, ताकि कायाकल्प, लक्ष्य और एनक्वास के मानकों पर भी अस्पताल खरा उतरे। इससे अच्छी रैंकिंग मिलेगी और अस्पताल की प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी।

हमलोगों ने ठाना है, बांका को टीबी मुक्त बनाना है

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-यक्ष्मा दिवस पर सदर अस्पताल से निकाली गई जागरूकता रैली
-रैली में स्वास्थ्यकर्मियों ने लोगों से टीबी से बचाव की अपील की
बांका, 24 मार्च-
यक्ष्मा दिवस के अवसर पर गुरुवार को सदर अस्पताल में कई कार्यक्रम हुए। सुबह सबसे पहले जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में शामिल लोग सदर अस्पताल के जीएनएम स्कूल से विजयनगर तक गए। फिर वहां से वापस सदर अस्पताल में आकर रैली खत्म हुई। रैली का नेतृत्व जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा कर रहे थे। जिला ड्रग प्रभारी राजदेव राय रैली में शामिल लोगों से नारा लगवाकर टीबी के प्रति जागरूक होने की अपील करवा रहे थे। रैली में शामिल लोग टीबी हारेगा, देश जीतेगा, हमलोगों ने ठाना है, बांका को टीबी मुक्त बनाना है और प्रधानमंत्री का यही सपना, टीबी मुक्त हो भारत अपना के नारे लगा रहे थे।
इसके बाद एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी की अध्यक्षता में सदर अस्पताल में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में जिला यक्ष्मा रोग पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सोहैल अंजुम, जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल, केयर इंडिया के डीटीएल तौसीफ कमर समेत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारी शामिल हुए। इस दौरान एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि जिले को 2025 से पहले टीबी से मुक्त बनाना है। इस दिशा में हमलोग आगे भी बढ़ रहे हैं। जिले में घर-घर जाकर टीबी मरीजों की पहचान हो रही है। अभियान में अगर कोई मरीज चिह्नित होता है तो उसका न सिर्फ इलाज मुफ्त किया जाता है, बल्कि उसे पौष्टिक आहार लेने के लिए सरकार की तरफ से राशि भी दी जाती है। हमें अपना प्रयास जारी रखना होगा, जिससे समय से पहले हमलोग बांका जिला को टीबी से मुक्त बना लेंगे।
लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभा दिलाएं : वहीं जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा ने जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारी से कहा कि टीबी को जड़ से खत्म करने में जनआंदोलन बहुत कारगर हो रहा है। आपलोग क्षेत्र में जाकर टीबी मरीजों की पहचान को तेज कर दीजिए। दो सप्ताह से अधिक खांसी होने या फिर बलगम में खून आने जैसी शिकायत वाले लोगों की तत्काल टीबी जांच कराएं और उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलाएं। साथ ही जिस टीबी मरीज का इलाज चल रहा हो, उसे बीच में दवा छोड़ने के लिए मत कहिए। ऐसा करने से एमडीआर टीबी होने का खतरा रहता है। एमडीआर टीबी से उबरने में मरीजों को समय लग जाता है।
आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बताइए, मुफ्त में होगा आपका इलाजः वहीं चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सोहैल अंजुम ने कहा कि टीबी के तमाम लक्षणों से आपलोग अवगत हैं। एएनएन, आशा कार्यकर्ताओं व तकनीशियनों को टीबी उन्मूलन के काम में जोर-शोर से लग जाने के लिए कहिए। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बताइए कि न सिर्फ आपना इलाज मुफ्त में होगा, बल्कि आपको ठीक होने तक 500 रुपये प्रतिमाह की राशि भी दी जाएगी। सेमिनार को कई अन्य डॉक्टरों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रमों को सफल बनाने में जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय, डीपीएस गणेश झा, अनुज कुमार दत्त, एसटीएस शिव रंजन और एसटीएलएस संजय कुमार सिंह समेत सभी स्वास्थ्यकर्मी लगे रहे।

जल जीवन मिशन के साथ ग्रामीण विकास ट्रस्ट ने मनाया विश्व जल दिवस

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जेवर:

जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण विकास ट्रस्ट ने विश्व जल दिवस के अवसर पर हर घर जल मिशन की दिशा में उनकी कड़ी मेहनत और प्रगति के सम्मान में जेवर ब्लॉक कार्यालय, गौतम बुद्ध नगर में ग्राम पंचायत के ग्राम सदस्यों की सराहना की। विश्व जल दिवस कार्यक्रम पांच गांवों की वीडब्ल्यूएससी महिलाओं और ग्राम प्रधान ललितेश के विभिन्न हितधारकों को सराहता है। मेवला गोपालगढ़ ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान श्री ईश्वर, एडीओ जेवर ब्लॉक, लोगों के जीवन में जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अदृश्य को स्पष्ट करने के लिए भूजल पर लोगों को बताया। मेहंदीपुर ग्राम पंचायत के मो.अली ग्राम प्रधान ने वर्तमान जल आपूर्ति योजनाओं, जलापूर्ति/सुरक्षा कार्रवाई रणनीति, साथ ही जल संचालन और रखरखाव के बारे में बात की. ग्रामीण विकास ट्रस्ट की तृप्ति खन्ना (राष्ट्र कार्यक्रम प्रमुख) के सहयोग से, अनिल कुमार, जीवीटी एमआईएस समन्वयक, सुभाष शर्मा टीम लीडर, अमित, बिट्टू और जेजेएम जेवर ब्लॉक के बंटी समन्वयक के साथ, जल की गहन खोज की सभी ग्राम सदस्यों के बीच जीवन मिशन, जिसमें दृष्टि, उद्देश्य, घटक, और जल आपूर्ति के विभिन्न दृष्टिकोण, साथ ही साथ जल सुरक्षा, जल गुणवत्ता निगरानी, जल संचयन, योजना डिजाइन, ग्राम पंचायत की भूमिका, वीडब्ल्यूएससी, जैसे विषय शामिल हैं। गांव की जलापूर्ति/सुरक्षा कार्य योजना, साथ ही इसके संचालन और रख-रखाव पर भी गहन चर्चा की गई।
इस अवसर पर बोलते हुए शिव शंकर सिंह (सीईओ, ग्रामीण विकास ट्रस्ट) ने कहा, “आज हम वास्तव में अपने जेजेएम सदस्यों के साथ विश्व जल दिवस मनाकर और जल जीवन मिशन के बारे में ग्रामीणों को जागरुक कर सम्मानित महसूस कर रहे हैं कि कैसे पानी हमारे प्रत्येक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। मैं जेजेएम सदस्यों की कड़ी मेहनत और मेरे विजन और मिशन को पूरा करने में योगदान के लिए उनकी हार्दिक सराहना करता हूं।

भारतीय शार्पशूटर प्रकाशी तोमर ने ग्रामीण विकास ट्रस्ट के ‘जल जीवन मिशन’ को सराहा

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ग्रामीण विकास ट्रस्ट ने मनाया विश्व जल दिवस

बागपत:-

‘ग्रामीण विकास ट्रस्ट’ जिला बागपत में राष्ट्रीय कार्यक्रम “जल जीवन मिशन” को कार्यान्वयन सहायता एजेंसी के रूप में कार्यान्वित कर रहा है। “विश्व जल दिवस” के अवसर पर जीवीटी द्वारा जिला बागपत के बड़ौत प्रखंड एवं जिला बागपत के जीपी धनोरा टिकरी, बिनौली प्रखंड में जल जीवन मिशन कार्यक्रम के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम पर विशिष्ट अतिथि प्रकाशी तोमर मौजूद रहीं, जो एक भारतीय शार्पशूटर हैं और दुनिया की सबसे उम्रदराज शार्पशूटरों में से एक हैं। वह निशानेबाजी की दुनिया में एक प्रतीक हैं और रितिका वेदवान जो एक अंतर्राष्ट्रीय महिला तीरंदाज खिलाड़ी हैं और उन्हें यूपी राज्य के सर्वोच्च खेल पुरस्कार “रानी लक्ष्मी पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है, भी उपस्थित रहीं। सीईओ ग्रामीण विकास ट्रस्ट शिव शंकर सिंह के समर्थन और मार्गदर्शन से विश्व जल दिवस पर जल गुणवत्ता के महत्व और इसके सुरक्षित और विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उनकी दृष्टि को सफल बनाने और स्वच्छ और सुरक्षित पानी प्रदान करने के लिए बढ़ावा दिया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अविनाश गुप्ता (कार्यकारी अभियंता, जल निगम ग्रामीण) और आलम जी (डीपीएमयू) ने जेजेएम सदस्यों के प्रयासों की सराहना की और प्रतिभागियों के बीच हर घर में पानी के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने, भूजल प्रबंधन, और लोगों के स्वास्थ्य पर पानी की गुणवत्ता का प्रभाव के बारे में बताया। तृप्ति खन्ना (राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रमुख) के मार्गदर्शन में और जीवीटी के अवनीश प्रताप सिंह (वरिष्ठ प्रबंधक) के समन्वय में और जिला टीम लीडर मोनू राणा और टीम सदस्य पूजा तोमर, पूनम और ज्योति की मदद से कार्यक्रम आयोजित किया गया. और पानी के महत्व और सही उपयोग के बारे में बताया। इसके अलावा कार्यक्रम को सफल बनाने में ग्राम प्रधान  सोहन पाल, ग्राम पंचायत सचिव सचिन कुमार, आशा-आंगनवाड़ी महिलाओं एवं प्राथमिक विद्यालय के बच्चों का भी योगदान रहा।

निक्षय पोषण योजना के तहत लाभुकों तक भेजे गए 12 करोड़ रुपये

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-टीबी रोकथाम के लिए 19 जिलों में पेशेंट प्रोवाइडर सपोर्ट एंजेंसी
-जांच व इलाज के लिए राज्य में 6 नोडल ड्रग रेसिटेंट टीबी सेंटर
पटना: 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस है.  टीबी रोकथाम की दिशा में बिहार का भी प्रयास उल्लेखनीय है.
सभी जिलों में टीबी फोरम की स्थापना:
राज्य में निक्षय पोषण योजना के तहत साल 2021 में 64 हजार 275 टीबी के मरीजों को पोषण प्रोत्साहन राशि के रूप में 12 करोड़ रुपये उनके खाते में भेजे गये. टीबी की रोकथाम व इसके प्रति जागरूकता लाने के लिए राज्य के 38 जिलों में टीबी फोरम का गठन किया गया है. वहीं इस वर्ष के दौरान सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर 61 हजार 916 मरीज निक्षय पोर्टल पर अधिसूचित किये गये. जबकि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में 70 हजार 229 मरीज निक्षय पोर्टल पर अधिसूचित किये गये. पूरे वर्ष के दौरान एक लाख 32 हजार 145 टीबी के मरीज निक्षय पोर्टल पर अधिसूचित किये गये. टीबी की रोकथाम को लेकर प्रधानमंत्री के 2025 तक टीबी मुक्त भारत के संकल्प को पूरा करने का गंभीर प्रयास किया गया है.
राज्य में 6 नोडल ड्रग रेजिस्टेंट टीबी सेंटर:
राज्य यक्ष्मा कार्यक्रम अधिकारी डॉ बीके मिश्रा ने बताया टीबी की रोकथाम के लिए ड्रग रेजिसटेंट टीबी मरीजों के उपचार की सुविधा के लिए पटना स्थित टीबी ड्रग रेजिसटेंट सेंटर तथा 37 जिला स्तर के टीबी सेंटर पर नि:शुल्क इलाज की सुविधा है. वहीं टीबी की रोकथाम के लिए 6 नोडल ड्रग रेजिसटेंट टीबी सेंटर बनाये गये हैं. इनमें पटना पीएमसीएच और आइजीआएमएस सहित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय भागलपुर, श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल मुजफ्फरपुर, दरभंगा चिकित्सा महाविद्यालय, दरभंगा, अनुग्रह नारायण मगध चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल, गया शामिल हैं. उन्होंने बताया कि 495 टीबी सर्वाइवर को प्रशिक्षण देकर टीबी चैंपियन के रूप में नामित किया गया. जिले के 14 जिलों में रोगियों को उपचार पूरा करने तथा समाज में टीबी रोगी के साथ भेदभाव या बहिष्कार कम करने के लिए टीबी चैंपियन की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो रही है. इनके द्वारा 9500 टीबी मरीजों को परामर्श दिया गया है.
राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन के तहत नि:शुल्क जांच:
टीबी की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम पूरे राज्य में चलाये जा रहे हैं. इस कार्यक्रम के तहत आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का विस्तार किया गया है. इसमें डीसीटी लैब, सीबीनेट, ट्रूनेट मशीन से टीबी की नि:शुल्क जांच की सुविधा प्रदान की गयी है. कार्यक्रम के तहत हर स्तर पर रिकॉर्डिंग रिपोर्टिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का क्रियान्वयन, आयुष, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, शहरी स्वास्थ्य केंद्रों तथा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के साथ प्रभावी समन्वयन, सामुदायिक सहभागिता के लिए राज्य एवं जिला टीबी फोरम का गठन, ड्रग रेजिस्टेंट टीबी मरीजों के उपचार की सुविधा शामिल है.
19 जिलों में पेशेंट प्रोवाइडर सपोर्ट एंजेसी:
निजी क्षेत्र में उपचार पा रहे रोगियों के नोटिफिकेशन और ट्रीटमेंट को बढ़ाने के लिए 19 जिलों में मरीजों की सहायता के लिए पेशेंट प्रोवाइडर सपोर्ट एंजेंसी के साथ काम किया जा रहा है. टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान के तहत उच्च जोखिम वाले समूह जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, वृद्ध, कुपोषित, शहरी मलिन बस्तियों, कारा एवं सुधारगृह तथा दूरस्थ एवं कठिन क्षेत्रों में रहने वालों के बीच टीबी की खोज कर उपचार किया जा रहा है. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अब तक 19 लाख छह हजार 459 लोगों का स्क्रीनिंग कर कुल 40 हजार 791 संभावित टीबी रोगियों की जांच की गयी जिसमें तीन हजार 209 टीबी के मरीज की खोज कर उपचार प्रारंभ किया गया है.
तीन जिलों में चल रहा ब्रेकिंग द बेरियर प्रोग्राम:
टीबी की रोकथाम के लिए ब्रेकिंग द बैरियर के तहत कर्नाटक हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट तथा यूसऐड के सहयोग से भागलपुर, पूर्णिया और पश्चिम चंपारण जिले के में इस प्रोग्राम के तहत प्रवासी तथा शहरी आबादी के बीच रोग के प्रति व्यवहार परिवर्तन के लिए जन सहभागिता मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है.

सस्टेनेबल डेवलपमेन्ट गोल के तहत वैश्विक स्तर पर 2015 के मुकाबले वर्ष 2025 में टीबी रोगियों की संख्या में 80% की कमी लाने का लक्ष्य : जिलाधिकारी 

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: वर्ल्ड टीबी डे की पूर्व संध्या पर जिलाधिकारी ने मीडिया को किया संबोधित
: टीबी अभी भी जानलेवा संक्रामक रोगों की सूची में शामिल है : जिला संचारी रोग पदाधिकारी
लखीसराय, 23 मार्च-
सस्टेनेबल डेवलपमेन्ट गोल के तहत वैश्विक स्तर पर 2015 के मुकाबले वर्ष 2030 में टीबी रोगियों की संख्या में 80% की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था । इसके साथ ही टीबी से होने वाली कुल मौतों में भी 90% की कमी करने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन देश के प्रधानमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी दृषिटकोण से इसी लक्ष्य को वर्ष 2025 तक प्राप्त करने का निर्णय लिया है। उक्त बातें वर्ल्ड टीबी डे की पूर्व संध्या पर केयर इंडिया और सीफार के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग द्वारा  आयोजित मीडिया कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने कही। उन्होंने बताया कि सन 1882 के 24 मार्च को ही डॉ. रोबर्ट कोच ने सबसे पहले टीबी के जीवाणु का पता लगाया था, जिसके बाद ही टीबी रोग की पहचान एवं उपचार का मार्ग प्रशस्त हो सका। इस वर्ष भी हमलोग 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाने वाले हैं। लेकिन इस वर्ष का विश्व टीबी दिवस देश के साथ राज्य के लिए भी महत्वपूर्ण होने वाला है। वर्ष 2025 तक टीबी रोग ख़त्म करने का संकल्प प्रधानमंत्री ने लिया है। हम उनके इस संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बार के विश्व टीबी दिवस की थीम ‘क्लॉक इज टिकिंग’ रखी गयी है। इसका मतलब है कि टीबी को खत्म करने के लिए अब हमारे पास ज्यादा समय नहीं है इसलिए पूरी ऊर्जा के साथ हमें टीबी को हराने की तैयारी करनी होगी। उन्होंने कहा कि याद रखें ‘टीबी हारेगा तभी देश जीतेगा’’। प्रधानमंत्री के इस महत्वाकांक्षी सोच को साकार करने के लिए हमें मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। इसे संभव करने के लिए टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को एक जनांदोलन का रूप देने की जरूरत है। इस अवसर पर केयर इंडिया के एफपीसी अनुराग गुंजन, डीटीओ ओन राकेश कुमार साहू सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. पीसी वर्मा ने कहा कि टीबी अभी भी जानलेवा संक्रामक रोगों की सूची में शामिल है। मानव इतिहास में अन्य जानलेवा रोगों जैसे हैजा, प्लेग, इन्फ्लुएंजा, स्माल पॉक्स, मलेरिया एवं एचआईवी की तुलना में टीबी से मरने वाले लोगों की संख्या अधिक है। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशानुसार टीबी के उन्मूलन के लिए कार्यक्रम को जनांदोलन का रूप देना आवश्यक है। प्रत्येक प्रखंड में टीबी पेशेंट सपोर्ट ग्रुप का गठन कर केयर इंडिया के द्वारा सभी प्रखंड मुख्यालयों में जनप्रतिनिधियों, धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों, टीबी चैंपियन, ट्रीटमेंट सपोर्टर एवं  प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों के बीच राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध निःशुल्क जाँच, उपचार एवं  निक्षय पोषण योजना आदि  तमाम विषय पर व्यापक जानकारी दी जाएगी ताकि पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक हर निर्वाचित जन प्रतिनिधि टीबी मुक्त पंचायत , विधान सभा क्षेत्र अथवा संसदीय क्षेत्र की कल्पना को साकार कर सकें।
केयर इंडिया के डीटीएल नावेद उर रहमान ने बताया कि विगत दिनों देश के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी टीबी उन्मूलन के लिए जनांदोलन की बात कही है। बिहार सरकार इसी दिशा में एक नवीन पहल कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से प्रदेश के सभी प्रखंडों में टीबी पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पूरे मार्च महीने ‘टीबी पेशेन्ट सपोर्ट ग्रुप’ की बैठक होगी, जिसमें उन्हें टीबी के लक्षण सहित इलाज के विषय में जानकारी दी जाएगी। मैं यह अपील करूँगा कि इस मुहिम से जुड़े सभी लोग अपनी शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करें ताकि हर टीबी रोगी चाहे वह सरकारी अस्पताल या प्राइवेट अस्पताल से इलाज करायें उनकी सभी जाँच एवं दवाएं निःशुल्क मिले। रोगी अकेला महसूस नहीं करे। टीबी हारेगा, देश जीतेगा।
उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण को मात देने के बाद अब हमलोगों को टीबी उन्मूलन की दिशा में भी मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। कोरोना जैसी महामारी के बाद भी वर्ष 2020 में राज्य में लगभग 1 लाख नए टीबी मरीजों को ढूंढने में सफ़लता मिली है। इस वर्ष भी हमें अधिक से अधिक टीबी रोगियों की पहचान करने का प्रयास करना होगा। टीबी मरीजों की ससमय पहचान करने एवं उन्हें गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क इलाज प्रदान करने के लिए हमारे पास पर्याप्त मात्रा में संसाधन उपलब्ध हैं। साथ ही टीबी पीड़ित मरीज को उनके इलाज के दौरान प्रति माह भारत सरकार की तरफ से 500 रुपये की पोषण राशि भी उनके बैंक अकाउंट में सीधे दी जा रही है। मैं आमजनों से अपील करता हूँ कि यदि आपको दो सप्ताह या अधिक समय से खाँसी हो, बुखार हो या शाम में शरीर गर्म हो रहा हो, वजन में कमी आ रही हो, भूख नहीं लग रही हो, छाती में दर्द हो रहा हो, खांसने पर बलगम में खून आ रहा हो एवं अत्यधिक कमजोरी एवं थकान लगता हो तो बिना देर किए नजदीकी टीबी केंद्र में जाकर संपर्क जरूर करें।

नवनियुक्त एएनएम और जीएनएम के मास्टर ट्रेनर का छः दिवसीय प्रशिक्षण शुरू 

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– पुराना जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय के सभागार हाॅल में प्रशिक्षण का शुभारंभ
– जिले के विभिन्न प्रखंडों के कुल 14 नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम को दिया जा रहा प्रशिक्षण
खगड़िया, 23 मार्च-
जिले के नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम को दिये जाने वाले छह दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण का बुधवार से शुभारंभ हो गया। । स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में पुराना जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय के सभागार में यह प्रशिक्षण शुरू हुआ। प्रशिक्षण का उदघाटन सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद एवं डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने संयुक्त रूप से किया। प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रशिक्षणार्थी को स्वास्थ्य विभाग से संबंधित तमाम कार्यों की विस्तार पूर्वक जानकारी दी जाएगी। जिसमें अस्पताल की तमाम सुविधाओं समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी जाएगी। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी प्रशिक्षणार्थी अपने कर्तव्य का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकें और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके। यह प्रशिक्षण सदर अस्पताल खगड़िया की स्टाफ नर्स भवानी कुमारी, शांति कुमारी, एएनएम स्कूल की नर्सिंग ट्यूटर खुशबू कुमारी द्वारा केयर इंडिया के एफपीसी राजेश पांडेय की मॉनिटरिंग में दिया जा रहा है।
– प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रशिक्षणार्थी अपने-अपने प्रखंडों में अन्य कर्मियों को देंगे प्रशिक्षण :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, प्रशिक्षण में शामिल सभी प्रशिक्षणार्थियों को मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी प्रशिक्षणार्थी अपने-अपने प्रखंडों में अन्य एएनएम को भी प्रशिक्षण देंगे। ताकि प्रखंड स्तर पर कार्य करने वाली सभी एएनएम को भी बेहतर से बेहतर कार्य करने की जानकारी प्राप्त हो सके और अपने कर्तव्य का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकें।
– प्रशिक्षण समापन के मौके पर सभी प्रशिक्षणार्थी को दिया जाएगा प्रमाण-पत्र :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, जिले के नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम के छः दिवसीय प्रशिक्षण के समापन के मौके पर सभी प्रशिक्षित जीएनएम और एएनएम को प्रमाण-पत्र भी दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम को सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही तमाम स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर संचालन की जानकारी सुनिश्चित कराना है। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी जीएनएम और एएनएम लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में खुद को सक्षम महसूस करें और लोगों को सुविधाजनक तरीके से सभी सुविधाओं का लाभ मिल सके। इसके लिए प्रशिक्षण के दौरान अस्पताल में होने वाली तमाम सुविधाओं एवं उसके क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
– जिले के 14 नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम को दिया जा रहा प्रशिक्षण :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, जिले के विभिन्न प्रखंडों के कुल 14 नवनियुक्त जीएनएम और एएनएम को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि सभी जीएनएम और एएनएम को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके जिससे सभी प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण के महत्व और उद्देश्य को बेहतर तरीके से समझ सकें व प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने कर्तव्य का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकें।

सच्चिदानंदनगर में टीबी मरीजों की खोज को लेकर चलाया गया अभियान

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-133 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, 10 संभावित मरीज निकले
-सभी को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने की दी गई सलाह
भागलपुर, 23 मार्च-
स्वास्थ्य विभाग और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट ने सच्चिदानंदनगर में बुधवार को टीबी मरीजों की खोज को लेकर अभियान चलाया। इस दौरान 133 टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 10 संभावित मरीजों की पहचान की गई। सभी संभावित मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर जांच कराने की सलाह दी गई। उन्हें बताया गया कि टीबी मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में जांच से लेकर इलाज तक की मुफ्त व्यवस्था है। इसलिए किसी तरह का संकोच नहीं करें और तत्काल इलाज कराने के लिए अस्पताल जाएं। साथ ही 500 रुपये महीने पौष्टित आहार लेने के लिए भी मिलेगा। अभियान के दौरान फैयाज और सुमित ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सामाजिक ढांचा संस्था ने भी इसमें सहयोग किया।
टीबी मरीज से नहीं करें भेदभावः अभियान के बारे में बताते हुए सीडीओ डॉ. दीनानाथ ने कहा कि पहले टीबी बीमारी के प्रति छुआछूत अधिक थी, लेकिन जागरूकता बढ़ने से इसमें कमी आई है। टीबी एक संक्रामक बीमारी जरूर है, लेकिन इसका इलाज संभव है। अगर कोई टीबी के लक्षण वाले लोग दिखते हैं तो उससे घृणा करने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करें। ऐसा करने से मरीज का इलाज समय पर हो जाएगा और वह ठीक हो जाएगा। उसके ठीक होने से इसका संक्रमण दूसरों में भी नहीं होगा। साथ ही टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। ऐसा करने से एमडीआर टीबी होने की आशंका रहती है। एमडीआर टीबी होने पर ठीक होने में ज्यादा समय लग जाता है। इसलिए बीच में दवा नहीं छोड़ें।
टीबी को हल्के में नहीं लेना चाहिएः डॉ दीनानाथ ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा। इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं। डॉ दीनानाथ ने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीबी समाप्त हो जाएगा।

जन्म के बाद पहले 60 सेकेंड तक बच्चों की निगरानी बहुत जरूरी

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-नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों को दिया गया प्रशिक्षण
-प्रशिक्षण के दौरान प्रायोगिक तौर पर करके भी दिखाया गया डॉक्टरों को
बांका, 23 मार्च-
नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत बुधवार को पारा मेडिकल संस्थान में जिले के डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान जिले की शिशु मृत्यु दर को कैसे कम किया जाए, इस पर फोकस किया गया। इसके लिए जरूरी उपायों के बारे में डॉक्टरों को जानकारी दी गई। खासकर जन्म के बाद नवजात की देखभाल कैसे की जानी है, इसे बताया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी, डीआईओ डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल और डीसीएम राजेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने का काम मास्टर ट्रेनर अंजनी कुमार, डॉ. संध्या गुप्ता, केयर इंडिया के डीटीएल तौसीफ कमर और केयर इंडिया की मेंटर मैरी जूली ने किया।
प्रशिक्षण के दौरान एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए जन्म के पहले 60 सेकेंड तक बच्चे की देखभाल बहुत ही आवश्यक होता है। जन्म के तुरंत बाद उसकी निगरानी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। यदि नवजात पूरी तरह से स्वस्थ्य है तो ठीक है, लेकिन जन्म के बाद अगर कोई हरकत नहीं कर रहा है तो उसे किस ट्रीटमेंट की जरूरत है, इसकी पहचान करना बहुत जरूरी हो जाता है। अगर इसकी पहचान हो जाती है तो फिर बच्चे का इलाज आसान हो जाता है।
जन्म के बाद एक-एक सेकेंड जरूरीः प्रशिक्षण के दौरान केयर इंडिया की मैरी जूली ने बताया कि जन्म के बाद नवजात की देखभाल के लिए एक-एक सेकेंड बहुत महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, जन्म के बाद तीन बातों पर ध्यान देना आवश्यक होता है। सबसे पहले तो यह पता करना होता है कि किस नवजात को पुनर्जीवन की जरूरत है। दूसरा पुनर्जीवन वाले बच्चे की पहचान भी उतना ही जरूरी है और तीसरा सबसे अंतिम बच्चे के पुनर्जीवन के बाद भी यदि उसकी देखभाल की जरूरत है या नहीं। इस तीनों प्रक्रियाओं की पहचान करना बहुत ही जरूरी होता है। यदि इसकी पहचान हो गई तो फिर आगे की राह आसान हो जाती है।
ज्यादा गंभीर होने पर एसएनसीयू रेफर कर देना चाहिएः मैरी जूली ने बताया कि जन्म के बाद पहले 60 सेकेंड तक बच्चों की निगरानी भी दो भागों में करने की जरूरत है। पुनर्जीवन वाले बच्चे अगर 30 सेकेंड की ट्रीटमेंट में बेहतर हो गया तो ठीक है। यदि नहीं नहीं हुआ तो अगले 30 सेकेंड तक किस तरह से उसका ट्रीटमेंट करना है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। जन्म के बाद नवजात एक मिनट के अंदर रोया या नहीं, शरीर कहीं पीला तो नहीं पड़ रहा है। यदि बच्चे की ब्लड, शुगर इत्यादि जांच करानी है तो इसे जल्द पहचानना पड़ता है। यदि नवजात ज्यादा गंभीर लगे तो उसे सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू में रेफर कर देना बेहतर होता है।

टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान को  लेकर आरबीएसके टीम का किया गया उन्मुखीकरण

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-पारा मेडिकल संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में जिले की सभी आरबीएसके टीम  शामिल
– आरबीएसके टीम से क्षेत्र में टीबी जांच में तेजी लाने की अपील की गई
बांका, 23 मार्च-
टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान के तहत पारा मेडिकल संस्थान में बुधवार को जिले की सभी 11 आरबीएसके टीम का उन्मुखीकरण किया गया। इस दौरान टीम के सदस्यों से क्षेत्र में भ्रमण के दौरान टीबी जांच की गति तेज करने की अपील की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि आरबीएसके की टीम के सदस्य जब बीमारियों की जांच करने के लिए स्कूल का भ्रमण करती है तो उस दौरान स्कूल में टीबी जांच अवश्य करें। साथ ही टीबी के प्रति लोगों को जागरूक जरूर करें। ऐसा करने से टीबी रोगियों की संख्या तेजी से घटेगी।
वहीं जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा ने कहा कि 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। आरबीएसके की टीम भी इस मुहिम में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। स्कूलों में टीबी की जांच और जागरूकता बढ़ने से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा। इससे टीबी बीमारी जल्द खत्म होगी। वहीं चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सोहैल अंजुम ने सभी को टीबी जांच के तरीके के बारे में बताया। उन्होंने आरबीएसके की टीम को बच्चों और बड़ों की टीबी जांच किस तरह से करनी है, इसकी जानकारी दी।
टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रहीः केयर इंडिया के डीटीएल तौसीफ कमर ने भी आरबीएसके टीम में शामिल डॉक्टरों, एएनएम और टेक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीवी समाप्त हो जाएगा। इस दौरान जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय, डीपीएस गणेश झा, एसटीएस शिवरंजन कुमार, एसटीएलएस संजय कुमार सिंह और डाटा ऑपरेटर अनुज कुमार भी मौजूद रहे।
टीबी को हल्के में नहीं लेना चाहिएः एसीएमओ डॉ. चौधरी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा। इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं।
दो हफ्ते तक खांसी हो तो कराएं टीबी जांचः जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा ने कहा कि टीबी एक संक्रामक रोग जरूर है, लेकिन इसका इलाज संभव है। अगर दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी और खांसी में खून आए तो तत्काल जांच कराएं। जांच कराने के बाद अगर टीबी की पुष्टि हो जाती है तो तत्काल इलाज शुरू कर दें। समय पर इलाज हो जाने से टीबी जल्द ठीक हो जाता और यह दूसरों में भी नहीं फैलता है। इसलिए समय पर इलाज कराना जरूरी है।