फाइलेरिया से बचाव के लिए जरूर खाएं दवा : सीएस

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-24 मार्च से घर-घर जाकर खिलाई जाएगी फाईलेरिया से बचाव की दवा
 सीफार के सहयोग से मीडिया कार्यशाला का हुआ आयोजन
हाजीपुर- 23 मार्च
सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च, स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन के सहयोग से बुधवार को एनएम स्कूल सभागार में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन पर मीडिया कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार मोहन ने किया।
इस अवसर पर डॉ. मोहन ने  कहा कि हाथीपांव के नाम से जाना जाने वाला फाइलेरिया रोग के उन्मूलन के लिये एमडीए-आईडीए कायक्रम जिले में 24 मार्च से शुरू होगा। इस मीडिया वर्कशॉप के माध्यम से जन-जन तक इस बात को पहुंचाना है कि लोग इस दौरान फाइलेरिया दवा का सेवन जरूर करें। सिविल सर्जन ने  समुदाय को इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने की बात कही।
ग्रामीण क्षेत्र में 1729 और शहरी में 121 टीम करेगी गृह भ्रमण
जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल अधिकारी डॉ सत्येन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान जिले में 4070668  लोगों को ग्रामीण, जबकि 302101 लोगों को शहरी क्षेत्र में दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र में 1729 और शहरी में 121 टीम को लगाया गया है।
अभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्र में 594801 घरों और शहरी क्षेत्र के 44143 घरों तक कर्मी भ्रमण करेंगे। इस दौरान वे अपनी निगरानी में दवा खिलाएंगे। दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोग से ग्रस्त लोगों को दवा नहीं खिलाई जायेगी। उन्होंने बताया कि जिले के चयनित गांवों में माइक्रो फाइलेरिया परजीवी की जांच के लिए नाइट ब्लड सर्वे किया गया है।  नाइट ब्लड सर्वे कर लोगों के रक्त के सैंपल लिए गए हैं, ताकि जिले में फाइलेरिया की स्थिति और नए मरीजों की खोज हो सके।
तीन प्रकार की दवा खिलायी जाएगी
जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल अधिकारी डॉ सत्येन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि एमडीए-आईडीए अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग संकल्पित है। अभियान की सफलता के लिए माइक्रो-प्लान बनाया गया है। 24 मार्च से चलने वाले फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए तीन प्रकार की दवा खिलायी जाएगी। जिसमें डीईसी टैबलेट, अल्बेंडाजोल एवं आइवरमेक्टिन दवा शामिल है।
फाइलेरिया दीर्घकालिक विकलांगता का प्रमुख कारण
विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य समन्वयक डॉ राजेश पांडेय ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। यह रोग मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। लोगों की जिम्मेदारी है कि जब स्वास्थ्य कर्मी घर पहुंचे तो फाइलेरिया से मुक्ति के लिए दवा का सेवन करें। इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। कुछ लोगों में दवा का मामूली रिएक्शन जैसे उल्टी, खुजली व बुखार आदि हो सकता है।
आधे से एक घंटे में सब कुछ नार्मल हो जाता है। उन्होंने कहा कि दवा खाने के बाद उन्हीं लोगों को किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट होता है जिनके शरीर में पहले से ही फाईलेरिया के परजीवी मौजूद होते हैं।
सीफार के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक रणविजय कुमार ने भी इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया की भूमिका पर चर्चा की। वहीं, पीसीआई के अशोक सोनी ने फाईलेरिया पर जागरूकता के लिए पंचायत प्रतिनिधियों एवं जीविका सदस्यों को शामिल करने की बात कही।
मौके पर केयर के प्रतिनिधि सुमित कुमार, सोमनाथ ओझा, प्रीति कुमारी, पीसीआई के अशोक सोनी, डब्ल्यूएचओ से डॉ माधुरी, जीएचएस से दीपक मिश्रा, यूनिसेफ से मधुमिता, चाय से डॉ मानिक, भीबीडीसी धीरेंद्र कुमार उपस्थित रहे।

टीबी मुक्त बाँका बनाने का लिया संकल्प, धर्मगुरुओं ने हरसंभव सहयोग का दिया आश्वासन 

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– जिला संचारी रोग कार्यालय में धर्म गुरुओं के साथ स्वास्थ्य विभाग ने की बैठक
– टीबी लाइलाज नहीं, पर समय पर इलाज शुरू कराना जरूरी, इसलिए लक्षण दिखते ही कराएं जाँच
बाँका, 22 मार्च-
टीबी मुक्त बाँका निर्माण को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है और इसे सार्थक रूप देने के लिए जिले में हर जरूरी पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को जिला टीबी कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस बैठक में पंडित और मौलवी शामिल हुए। बैठक के दौरान शुरू होने वाले अभियान की सफलता को लेकर विस्तृत चर्चा की गई और मौजूद धर्मगुरुओं से सहयोग करने की अपील भी की गई। जिसपर सभी पंडित और मौलवी ने एक स्वर में हरसंभव सकारात्मक सहयोग करने का आश्वासन दिया। साथ ही मौजूद गणमान्यों को चिकित्सकों द्वारा टीबी के लक्षण, कारण, बचाव एवं उपचार की भी विस्तृत जानकारी दी गई। इस मौके पर जिला संचारी रोग पदाधिकारी डाॅ उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा, डाॅ सोहैल अंजुम, गणेश झा, अनुज कुमार आदि मौजूद थे।
– टीबी मरीजों की सूचना देने पर पंडित और मौलवी को भी मिलेगी प्रोत्साहन राशि :
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डाॅ उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा ने बताया, अब टीबी मरीजों की सूचना देने पर ना सिर्फ स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। बल्कि, पंडित और मौलवी भी सूचना उपलब्ध कराऐंगे तो उन्हें भी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसलिए, मैं जिले के तमाम धर्मगुरुओं से अपील करता हूँ कि टीबी मुक्त समाज और देश निर्माण के लिए आप भी आगे आएं। वहीं, उन्होंने बताया, बैठक के दौरान मौजूद सभी गणमान्यों को टीबी मरीज मिलने पर उसे जाँच के लिए कहाँ भेजना है, पहले किसको जानकारी देना सहित तमाम जानकारियाँ दी गई। ताकि वे सुविधाजनक तरीके से मरीजों का इलाज शुरू करवाने में जरूरी मदद कर सकें और मरीजों का समय पर इलाज शुरू हो सके।
जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि टीबी को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अभी एक महीने तक इस पर विशेष तौर फोकस किया गया है। इसमें आशा कार्यकर्ता टीबी मरीजों को ढूंढ रही हैं। क्षेत्र में भ्रमण के दौरान जिस किसी में टीबी का लक्षण दिखाई पड़ता है, उसे आशा कार्यकर्ता नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच के लिए ले जाती हैं। टीबी मरीजों का न सिर्फ निःशुल्क इलाज कराया जाता है, बल्कि उसे 500 रुपये प्रतिमाह पौष्टिक भोजन लेने के लिए राशि भी मिलती है। इसके साथ-साथ दवा भी मुफ्त में मिलती है। वहीं आशा कार्यकर्ताओं को एक टीबी मरीज ढूंढने पर 500 रुपये भी दिया जाता है। सिर्फ आशा ही नहीं, बल्कि कोई भी व्यक्ति अगर टीबी मरीज की सूचना देते हैं तो उन्हें 500 रुपये इनाम के तौर पर दिया जाता है।
एमओटीसी डाॅ सोहैल अंजुम कहते हैं कि अगर टीबी का हल्का सा भी लक्षण दिखे तो जांच कराने स्वास्थ्य केंद्र जाएं। जांच में पुष्टि हो जाने के बाद आपको मुफ्त में दवा मिलेगी। साथ में भोजन के लिए भी पैसे मिलेंगे। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन में जनभागीदारी बहुत ही जरूरी है। अगर लोग सहयोग करें तो यह बीमारी समय से पहले खत्म हो सकती है। 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त कराया जाएगा। इसे लेकर विभाग प्रतिबद्ध है।
एक टीबी मरीज कई लोगों को कर सकता है संक्रमित: डॉ. अंजुम ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। इलाज नहीं कराने पर कई लोग संक्रमित हो सकते हैं। एक टीबी मरीज के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा। इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं।
छुआछूत की बीमारी नहीं रही टीबी: डॉ. अंजुम ने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीबी समाप्त हो जाएगा।

बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को बाधित करते हैं मिट्टी संचारित कृमि 

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– राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत 1 से 19 वर्ष के बच्चों को खिलायी जाती है अल्बेंडाजोल टैबलेट
– कृमि नाशक गोलियों का सामुदायिक स्तर पर एक साथ सेवन जरूरी
मुंगेर, 22 मार्च। बच्चों को कुपोषण सहित अन्य कई प्रकार की परेशानियों का एक कारण उनका मिट्टी संचारित कृमि (एसटीएच) से संक्रमित होना है। जो बच्चों में मल से फैलता है। इसे दूर करने के लिए सन 2015 से राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम शुरू किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। 10 फरवरी से 10 अगस्त तक अर्धवार्षिक आधार पर बच्चों को कृमि मुक्ति के लिए दवा खिलाई जाती है। इस कार्यक्रम के तहत जिला भर के 1 वर्ष से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अल्बेंडाजोल 400 मिलीग्राम की निश्चित खुराक कोविड अनुरूप व्यवहारों का पालन करते हुए खिलायी जायेगी। इस अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्त्ता, आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका, जीविका दीदियों सहित स्वास्थ्य विभाग के सहयोगी संस्थाएं एवं हितधारी संगठनों से भी अपेक्षित सहयोग लिया जाता है। इसके साथ ही इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आवश्यक प्रचार- प्रसार भी किया जाता है।
शारीरिक एवं मानसिक विकास बाधित करते हैं कृमि –
कृमि संक्रमण के प्रभाव एवं संचरण चक्र पर प्रकाश डालते हुए जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि कृमि ऐसे परजीवी हैं जो मनुष्य के आंत में रहते हैं। आंतों में रहकर ये परजीवी जीवित रहने के लिए मानव शरीर के आवश्यक पोषक तत्वों पर ही निर्भर रहते हैं। जिससे मानव शरीर आवश्यक पोषक तत्वों की कमी का शिकार हो जाता और वे कई अन्य प्रकार की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। खासकर बच्चों, किशोर एवं किशोरियों पर कृमि के कई दुष्प्रभाव पड़ते हैं। जैसे- मानसिक और शारीरिक विकास का बाधित होना, कुपोषण का शिकार होने से शरीर के अंगों का विकास अवरूद्ध होना, खून की कमी होना आदि जो आगे चलकर उनकी उत्पादक क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। कृमि का संचरण चक्र संक्रमित बच्चे के खुले में शौच से आरंभ होता है। खुले में शौच करने से कृमि के अंडे मिट्टी में मिल जाते और विकसित होते हैं। अन्य बच्चे जो नंगे पैर चलते हैं या गंदे हाथों से खाना खाते या बिना ढ़के हुए भोजन का सेवन करते हैं ,आदि लार्वा के संपर्क में आकर संक्रमित हो जाते हैं। इसके लक्षणों में दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, उल्टी और भूख का न लगना आदि है। संक्रमित बच्चों में कृमि की मात्रा जितनी अधिक होगी उनमें उतने ही अधिक लक्षण परिलक्षित होते हैं। हल्के संक्रमण वाले बच्चों व किशोरों में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखाई पड़ते हैं।
कृमि नाशक गोलियों का सामुदायिक स्तर पर एक साथ सेवन जरूरी –
कृमि नाशक गोलियों अल्बेंडाजोल के सेवन की आवश्यकता पर बल देते हुए जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. रौशन ने बताया कृमि नाशक गोलियाँ अल्बेंडाजोल का साल में एक बार सेवन करने से बच्चों के शरीर पर किसी प्रकार के विपरीत परिणाम नहीं आते हैं। इसके सेवन से उनके शरीर में पल रहे कृमि नष्ट हो जाते जिससे उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में विकास होता है। उनके स्वास्थ्य और पोषण में सुधार आता है। जिससे उनके शारीरिक विकास के उचित लक्षण दिखाई देने लगते हैं। एनीमिया का शिकार होने से बच पाते हैं। यही नहीं एक साथ इस आयुवर्ग के बच्चों द्वारा कृमि नाशक गोलियों का सेवन किये जाने से सामुदायिक स्तर पर कृमि से किसी अन्य के संक्रमित हो जाने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। इसलिए सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष एक साथ इस आयु वर्ग के बच्चों और किशोर एवं किशोरियों को कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम चलाते हुए अल्बेंडाजोल की निश्चित खुराक खिलायी जाती है।
उन्होंने बताया कि जिन राज्यों में मिट्टी संचारित कृमि (एसटीएच) का संक्रमण 20 प्रतिशत से अधिक होता है वहां कृमि मुक्ति के द्विवार्षिक और शेष जगहों पर वार्षिक कृमि मुक्ति अभियान आयोजित किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार भारत में 1 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 241 मिलियन बच्चों में मिट्टी संचारित कृमि संक्रमण का खतरा है।

बिहार दिवस : विशेष स्वास्थ्य शिविर में दी गई सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी 

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– शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों की हुई स्वास्थ्य जाँच और दवाई भी कराई गई उपलब्ध
– चित्रगुप्त नगर के चिल्ड्रेन पार्क में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाया स्वास्थ्य शिविर
खगड़िया, 22 मार्च-
मंगलवार को जिले में काफी धूमधाम व उत्सवी माहौल में बिहार दिवस मनाया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न इलाके और क्षेत्रों में तमाम विभागों द्वारा तरह-तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में चित्रगुप्त नगर स्थित चिल्ड्रेन पार्क परिसर में जिला स्तरीय भव्य मेला सह प्रदर्शनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें तमाम विभागों द्वारा स्टाॅल लगातार सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही तमाम योजनाओं की पारदर्शिता के साथ जानकारी दी गई और योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया गया। इस अवसर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा केयर इंडिया के सहयोग से मेला परिसर में व्यापक और विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जिसका उदघाटन जिलाधिकारी डॉ आलोक रंजन घोष ने किया। शिविर में लोगों को स्टाॅल पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी और कर्मी द्वारा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी गई । तमाम योजनाओं का सुविधाजनक तरीके से लाभ लेने के लिए लोगों को आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराई गई। साथ ही योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया गया। ताकि सभी लोगों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मिल सके और सामुदायिक स्तर पर अधिकाधिक जरूरतमंद लोग लाभान्वित भी हो सकें। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ अमरनाथ झा, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रेयसी, सदर पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव रंजन, केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार, एफपीसी राजेश पांडेय, प्रखंड प्रबंधक रेणुका कुमारी आदि मौजूद थी।
– शिविर में बड़ी संख्या में पहुँचे मरीजों की स्वास्थ्य जाँच भी की गयी :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, बिहार दिवस के अवसर पर आयोजित जिलास्तरीय विशेष स्वास्थ्य शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों ने भाग लिया। सभी मरीजों की स्वास्थ्य जाँच की गयी। जाँच के पश्चात आवश्यक चिकित्सा परामर्श और जरूरी दवाई भी उपलब्ध कराई गई। साथ ही स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न प्रदर्शनी का भी आयोजन कर लोगों को जागरूक किया गया। इस दौरान सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी मौजूद लोगों को दी गई।
– कोविड वैक्सीनेशन के प्रति भी लोगों को किया गया जागरूक :
डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार ने बताया, शिविर स्थल पर कोविड वैक्सीनेशन का भी आयोजन किया गया है। जिसके माध्यम से योग्य लाभार्थियों को ऑन द स्पॉट वैक्सीन दी गई और वैक्सीनेशन के प्रति जागरूक भी किया गया। साथ ही अन्य लोगों को भी वैक्सीनेशन के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित भी किया गया। शिविर में पहला, दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज के लाभार्थियों का वैक्सीनेशन किया गया।
– परिवार नियोजन और सुरक्षित प्रसव को लेकर भी दी गई जानकारी और किया गया जागरूक :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, शिविर के दौरान मौजूद लोगों खासकर महिलाओं को परिवार नियोजन के प्रति भी जागरूक किया गया। जिसके दौरान परिवार नियोजन को अपनाने से होने वाले फायदे समेत अन्य जानकारियाँ दी गई और इस साधन को अपनाने के लिए स्थानीय स्तर पर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी दी गई। साथ ही सुरक्षित प्रसव के लिए भी आवश्यक जानकारी दी गई।

बिहार दिवस के अवसर पर विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन, किशोर-किशोरियों को लगाया गया टीका 

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– जिले के विभिन्न प्रखंडों में शिविर का आयोजन, बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर दी गई वैक्सीन
–  शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर लगातार चल रहा अभियान
लखीसराय, 22 मार्च-
मंगलवार को बिहार दिवस के अवसर पर जिले भर में विशेष कोविड वैक्सीनेशन अभियान चलाया गया। जिसके माध्यम से जिले के विभिन्न प्रखंडों में चयनित एवं चिह्नित जगहों पर विशेष वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन कर वैक्सीन से वंचित लोगों को वैक्सीनेट किया गया। वहीं, 12 से 14 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले किशोर-किशोरियों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षा का टीका लगाया गया।  शिविर के सफल संचालन के लिए सभी सेशन साइटों पर व्यापक व्यवस्था की गई थी। ताकि किसी भी लाभार्थियों को वैक्सीनेशन कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें।
– जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिले में लगातार चल रहा है अभियान :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिले में लगातार नियमित तौर पर वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसके माध्यम से वैक्सीन से वंचित एक-एक लोगों को चिह्नित कर वैक्सीनेट किया जा रहा है। साथ ही सेकेंड और प्रीकाॅशनरी डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरी करने वाले लाभार्थियों को चिह्नित कर वैक्सीन दी जा रही है। वहीं, उन्होंने बताया, जिले के सभी प्रखंडों में चयनित एवं चिह्नित स्थलों पर आयोजित शिविर में पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी। ताकि किशोर-किशोरियों को वैक्सीनेशन कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सुविधाजनक तरीके से सभी लाभार्थी वैक्सीनेशन करा सकें। इसके लिए जहाँ सभी शिविर स्थलों पर पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन वाइल की उपलब्धता और कर्मियों की तैनाती की गई थी। वहीं, ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी सुनिश्चित की गई थी। ताकि सभी लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें और अधिकाधिक लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।
– 28 दिन के अंतराल पर दी जाएगी दूसरी डोज :
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, निर्देशानुसार फिलहाल 12 से 14 आयु वर्ग सभी लाभार्थियों को सिर्फ कोर्बेवैक्स (सार्स-कोव-2) का टीका लगाया गया। वहीं, उन्होंने बताया जिन लाभार्थियों ने आज वैक्सीनेशन कराया, उन्हें नियमानुसार 28 दिन की समयावधि पूरी करने के बाद पुनः दूसरी डोज की भी वैक्सीन दी जाएगी। ताकि हर हाल में निर्धारित समय पर दूसरे डोज का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और इस घातक महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। उन्होंने बताया, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर हर आयु वर्ग के लाभार्थियों का नियमित तौर पर वैक्सीनेशन हो रहा है। जिसके माध्यम से वैक्सीन से वंचित एक-एक व्यक्ति को चिह्नित कर वैक्सीनेट किया जा रहा है। उन्होंने बताया, जल्द से जल्द 12 से 14 आयु वर्ग के स्कूल जाने वाले शत-प्रतिशत किशोर-किशोरियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने में शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन द्वारा भी सहयोग किया जाना है।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।

बिहार दिवस पर रक्तदान शिविर का आयोजन

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-रक्तदान शिविर में कुल 13 यूनिट रक्त का किया गया संग्रह
-संग्रहित रक्त सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में किया गया जमा
भागलपुर, 22 मार्च-
बिहार दिवस के मौके पर मंगलवार को सदर अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 13 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया। रक्त देने वालों में से केयर इंडिया की डीटीओ आउटरिच डॉ. सुपर्णा टाटा और डीटीओ फैसिलिटी डॉ. राजेश कुमार मिश्र प्रमुख थे। इसके अलावा केयर इंडिया के कई अन्य कर्मियों ने भी रक्तदान में हिस्सा लिया। रक्त देने के लिए सामाजिक संगठनों के लोग भी सामने आए। रक्तदान शिविर के समापन के बाद रक्त को सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में जमा कर दिया गया। मौके पर सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा, सदर अस्पताल के ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. शैलेश कुमार पंकज, डीपीएम फैजान आलम अशर्फी, सदर अस्पताल के मैनेजर जावेद मंजूर करीमी और केयर इंडिया के डीटीओ असद जावेद व आलोक कुमार भी मौजूद थे।
रक्तदान शिविर का उद्घाटन करने के बाद सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्तदान जीवनदान जैसा है। इसलिए समय-समय पर रक्तदान कर लोगों के जीवन बचाने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से न सिर्फ दूसरों का जीवन बचता है, बल्कि रक्तदान करने वाले को भी फायदा पहुंचता है। मौके पर मौजूद डीपीएम फैजान आलम आशर्फी ने कहा कि रक्तदान करने के लिए कई सामाजिक संस्थाओं के लोग सामने आ रहे हैं। यह अच्छी बात है। भागलपुर में जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के बाद सदर अस्पताल में भी ब्लड बैंक हो गया है। रक्तदान में संग्रहित रक्त सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में ही जाएगा। इससे भविष्य में यहां पर आने वाले मरीजों को जरूरत के हिसाब से दिया जाएगा। खासकर डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं को इससे खासा फायदा होगा। पहले रक्त की जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल मरीजों को भेजा जाता था, जबकि अब ऐसी जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए अधिक-से-अधिक लोगों को रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए। रक्तदान करने से उनका भी भला होगा और समाज का भी।

भागलपुर और बांका की एएनएम को कॉपर टी लगाने का दिया जा रहा प्रशिक्षण

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-स्वास्थ्य प्रबंधन की क्षेत्रीय ईकाई की ओर से प्रशिक्षण का किया जा रहा आयोजन
-दोनों जिलों के अलग-अलग प्रखंडों की छह-छह एएनएम प्रशिक्षण में हुईं शामिल
भागलपुर, 22 मार्च-
परिवार नियोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार अभियान चलाते रहता है। अंतरा, छाया और कॉपर टी यानी कि अस्थाई संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसी सिलसिले में प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। अभी स्वास्थ्य प्रबंधन की क्षेत्रीय ईकाई की ओर से सदर अस्पताल स्थित क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र में एएनएम को प्रशिक्षण देने का काम किया जा रहा है। पांच दिवसीय प्रशिक्षण का मंगलवार को दूसरा दिन था। प्रशिक्षण में भागलपुर और बांका के अलग-अलग प्रखंडों की छह-छह एएनएम भाग ले रही हैं। प्रशिक्षण देने का काम जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल की डॉ. सीमा सिन्हा और भागलपुर सदर अस्पताल की डॉ. अल्पना मित्रा  कर रही हैं।
प्रशिक्षण के दौरान एएनएम को कॉपर टी लगाने के विभिन्न तरीकों के बारे में बताया जा रहा है। मंगलवार को उन्हें पीपीआईयूसीडी, आईयूसीडी और पीएआईयूसीडी के बारे में बताया गया। इस दौरान मास्टर ट्रेनर ने बताया कि पीपीआईयूसीडी डिलीवरी के 48 घंटे के बाद लगाया जाता है। जबकि आईयूसीडी डिलीवरी के 42वें दिन लगाया जाता है। इसी तरह पीआईयूसीडी गर्भपात के बाद लगाया जाता है। इस दौरान एएनएम को कितने दिनों तक गर्भपात कानूनन वैध है, इसकी भी जानकारी दी गई। मास्टर ट्रेनर डॉ. सीमा सिन्हा ने बताया कि सभी लोगों को कॉपर टी लगाने के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले इनलोगों को वीडियो दिखाकर तरीके के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके बाद जो भी सवाल बनते हैं, उसका जवाब दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ कॉपर टी लगाने के दौरान आने वाली परिस्थितियों के बारे में भी उन्हें अवगत कराया गया। जब इनलोगों का प्रशिक्षण समाप्त हो जाएगा, तब ये लोग अपने क्षेत्र में जाकर इस पर अमल करेंगी।
अस्थाई संसाधनों के इस्तेमाल पर जोरः वहीं मास्टर ट्रेनर डॉ. अल्पना मित्रा ने बताया कि परिवार नियोजन के अस्थायी संसाधनों के अधिक से अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इसे लेकर लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। लोगों को समझाया जा रहा है कि इससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। अस्थायी संसाधनों का इस्तेमाल कर लोग परिवार नियोजन पर काम करें। इससे लोगों का जीवन भी खुशहाल रहता है। साथ में जच्चा और बच्चा तो स्वस्थ रहता ही है। इसी मकसद से भागलपुर और बांका की एएनएम को कॉपर टी लगाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान आशा के प्रमंडल समन्वयक कुणाल कुमार और केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक आलोक कुमार भी मौजूद थे। प्रशिक्षण अभी तीन दिन और चलेगा और शुक्रवार को इसका समापन होगा।

“जल-जीवन हरियाली” थीम पर होगा बिहार दिवस का आयोजन

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• थीम आधारित आई.ई.सी प्रदर्शनी एवं हैंडबिल का होगा वितरण
• बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा कराया जा रहा आयोजन
• स्टाल पर होगी स्वास्थ्य जांच एवं प्राथमिक उपचार की सुविधा
पटना/ 22 मार्च- बिहार दिवस 2022 का आयोजन बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा कराया जा रहा है. “जल-जीवन हरियाली” को इस वर्ष की थीम के रूप में निर्धारित किया गया है. इस आयोजन में जनमानस के लिए स्वास्थ्य जांच, कोविड जांच के साथ कोविड टीकाकरण एवं नियमित टीकाकरण की भी व्यवस्था की गयी है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक जगह पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की यह अनूठी पहल है.

निम्न गतिविधियों का होगा आयोजन:
 बिहार दिवस की थीम “जल-जीवन हरियाली” पर विशेष बल देते हुए स्टाल / प्रदर्शनी का आयोजन करना
 स्टाल में एम्बुलेंस, आवश्यक दवाओं, उपकरणों सहित चिकित्सकों/ परा मेडिकल कर्मियों एवं अन्य कर्मियों की पर्याप्त मात्रा में रोस्टरवार प्रतिनियुक्ति करते हुए वांछित स्वास्थ्य जांच एवं प्राथमिक उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध कराना
 नियमित टीकाकरण की सुविधा
 कोविड-19 की जांच एवं कोविड टीकाकरण की सुविधा
 परिवार कल्याण, मधुमेह आदि की काउंसिलिंग, नेत्र जांच एवं मधुमेह जांच आदि की सुविधा
 आयोजन को आकर्षक एवं भव्य बनाने के उद्देश्य से आयोजन के अवसर पर थीम पर आधारित एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों से संबंधित आई.ई.सी प्रदर्शनी एवं हैंडबिल का वितरण

राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार से उक्त आयोजन के अवसर पर श्री उत्तम ज्योति नारायण, मीडिया सलाहकार को नोडल पदाधिकारी नमित किया गया है.
जिला सिविल सर्जन डॉ विभा कुमारी सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी विवेक कुमार एवं राज्य स्वास्थ्य समिती के मीडिया सलाहकार उत्तम ज्योति नारायण ने देर शाम गांधी मैदान में बिहार दिवस की तैयारियों का निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिया।

लखीसराय जिले में मनाया गया परिवार नियोजन दिवस, महिलाओं को किया गया जागरूक 

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– परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को दी गई परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधन की जानकारी
– सास-बहू सम्मेलन का भी आयोजन -छोटा परिवार और खुशहाल परिवार पर दिया गया बल
लखीसराय, 21 मार्च-
सोमवार को जिले में परिवार नियोजन योजना को बढ़ावा देने के लिए परिवार नियोजन दिवस मनाया गया। इस अवसर पर जिले के तमाम स्वास्थ्य संस्थानों में शिविर आयोजन किया गया। जिसमें जहाँ गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जाँच की गई वहीं, परिवार नियोजन अभियान को बढ़ावा देने के लिए जागरूक भी किया गया। जिसके दौरान परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधन की विस्तृत जानकारी दी गई और इस साधन को अपनाने से होने वाले फायदे की भी महिलाओं को जानकारी दी गई। ताकि अधिकाधिक योग्य महिलाएं इस साधन को सुविधाजनक तरीके से अपना सकें और अभियान का उद्देश्य फलीभूत हो सके। मालूम हो कि राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार हर माह 21 तारीख को स्वास्थ्य संस्थानों में इस तरह का कार्यक्रम कर महिलाओं को जागरूक किया जाना है।
– गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन साधन को अपनाना बेहद जरूरी :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, समाज के हर तबके के सभी परिवार को गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना बेहद जरूरी है। क्योंकि, हम तभी गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जी सकते हैं और बच्चे को उचित परवरिश व अच्छी शिक्षा दे सकते जब हमारा परिवार छोटा और सीमित होगा। छोटा और सीमित परिवार के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना सबसे पहली नींव है। वहीं, उन्होंने बताया, परिवार नियोजन दिवस के अवसर पर आयोजित शिविर के दौरान योग्य और सक्षम इच्छुक लाभार्थियों को परिवार नियोजन साधन को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
– सास-बहू सम्मेलन का भी आयोजन कर किया गया जागरूक :
परिवार नियोजन दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर सास-बहू सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। जिसमें सास-बहू को एकसाथ परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए जागरूक किया गया। जिसके दौरान बताया गया कि बच्चे की शादी सही उम्र पर ही करें। शादी के कम से कम दो साल बाद ही पहला बच्चा हो और दूसरे बच्चे में कम से कम तीन साल का अंतर हो। इससे ना सिर्फ जनसंख्या स्थिरीकरण सफल होगा, बल्कि माँ और बच्चे दोनों स्वस्थ भी रहेंगे। स्वस्थ माँ से ही मजबूत बच्चा संभव है और तभी हम स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जी सकते हैं।
– परिवार नियोजन के लिए सास-बहू का आपसी सामंजस्य महत्वपूर्ण :
सामाजिक व्यवस्थाओं में परिवार का बड़ा महत्व है। खासकर घर की सबसे बड़ी व बुजुर्ग महिला की। शायद, यही वजह होगा कि बहू का निर्णय कहीं ना कहीं सास के विचार धाराओं से प्रभावित रहता है। इसलिए, सास और बहू के आपसी सामंजस्य से परिवार नियोजन कार्यक्रम सफल होगा और जनसंख्या स्थिरीकरण को बल मिलेगा। यही कारण है कि सरकार द्वारा सास-बहू सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन कराया जा रहें हैं। क्योंकि, इसके लिए दोनों (सास-बहू) का सामंजस्य महत्वपूर्ण है। जिसके कारण एक मंच पर दोनों को एक साथ लाकर जागरूक किया जा रहा है। साथ ही बेहतर सामंजस्य वाले सास-बहू को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कृत भी किया जाता है।
– छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का दिया गया संदेश :
सास-बहू सम्मेलन कार्यक्रम के माध्यम से खासकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को छोटा परिवार, खुशहाल परिवार का संदेश दिया गया। दरअसल, आज भी देखा जा रहा है कि लोग परिवार नियोजन को उचित नहीं मानते हैं। खासकर पुराने ख्यालात के लोग तो इसे किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं मानते हैं। जो कि महज एक अवधारणा है और यह अवधारणा वर्षों से चली आ रही है। उक्त कार्यक्रम से ना सिर्फ लोग परिवार नियोजन के लिए जागरूक होंगे, बल्कि वर्षों से चली आ रही है बेटे-बेटियों में फर्क का अवधारणा भी दूर होगा। इसके लिए बच्चे दो ही अच्छे स्लोगन के माध्यम से सास-बहू को जागरूक किया गया और छोटे परिवार के महत्व की जानकारी दी गई।

पोषण की स्थिति में सुधार लाने के लिए स्वस्थ्य बालक – बा​लिका स्पर्द्धा 

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– बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति अभिभावकों में प्रतिस्पर्धा की भावना लाना उद्देश्य
– शून्य से 6 वर्ष के बच्चे होंगे शामिल, स्पर्द्धा सोमवार से 27 मार्च तक
– आईसीडीएस निदेशालय ने दिये स्पर्द्धा संबंधी निर्देश
मुंगेर, 21 मार्च –
बच्चों के पोषण संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित कराते हुए देशव्यापी स्वस्थ्य बालक- बालिका स्पर्द्धा का आयोजन सोमवार से शुरू हो गया जो आगामी 27 मार्च तक होगा । स्वस्थ्य बालक- बालिका स्पर्द्धा के लिए जिला के जिलाधिकारी नोडल पर्सन हैं। इस कार्य में सीडीपीओ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है । इस संबंध में राज्य के समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशालय के निदेशक आलोक कुमार ने जिलाधिकारी को पत्र लिख कर स्पर्धा आयोजन के संबंध में आवश्यक निर्देश दिये हैं।
पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन में दर्ज होगी 0—6 वर्ष बच्चों की जानकारी :
आईसीडीएस निदेशक आलोक कुमार के द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों के पोषक क्षेत्र के शून्य से 6 वर्ष आयुवर्ग के सभी बच्चों की वृद्धि निगरानी कर उसकी जानकारी पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन में दर्ज कराई जानी है। इसके साथ ही वैसे ग्रामीण व शहरी इलाके जहां आंगनबाड़ी केंद्र अवस्थित नहीं हैं, उस स्थिति में संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी वैसे क्षेत्र के सभी लाभार्थियों को नजदीक के आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ टैग कर सभी शून्य से 6 वर्ष के बच्चों की वृद्धि निगरानी कराते हुए पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन में दर्ज कराना सुनिश्चित करायेंगे। इसके साथ ही इस काम के लिए विभिन्न एंजेंसी जैसे एनजीओ, केयर इंडिया, पाथ फाइनडर, लायंस क्लब, रोटरी क्लब्स, रेसिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, पीडियाट्रिक एसोसिएशन, इम्प्लायर्स एसोसिएशन, स्कूल टीचर्स, यूथ क्लब्स, सीफार, इत्यादि की भी सहभागिता इस अभियान में ली जा सकती है। इस संबंध में शून्य से 6 वर्ष के सभी बच्चों की वृद्धि निगरानी करने के लिए आॅनलाइन पंजीकरण जिला प्रोग्राम पदाधिकारी के स्तर से पोषण ट्रैकर के वेबसाइट पर कराया जा सकता है।
पोषण की स्थिति में सुधार लाना स्पर्द्धा का उद्देश्य:
आईसीडीएस मुंगेर की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी(डीपीओ) वन्दना पांडेय ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य शून्य से 6 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों में पोषण की स्थिति में सुधार लाना, बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सामुदायिक स्तर पर जागरूकता तथा लोगों को बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर संवेदीकरण, अभिभावकों में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति प्रतिस्पर्द्धा की भावना का बढ़ाना, आईसीडीएस सेवाओं से वंचित बच्चों तक कवरेज को बढ़ाना, नियमित रूप से बच्चों की वृद्धि का अनुश्रवण तथा कुपोषित बच्चों के लिए उपचारात्मक पहल किया जाना, नाटे, दुबले तथा कम वजन वाले बच्चों की पहचान और निवारण आदि शामिल है। बच्चों की वृद्धि निगरानी तथा माप के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक स्कूल, पंचायत भवन, घर, प्राथमिक तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या ऐसे अन्य स्थानों को चिह्नित कर वहां यह कार्य किया जायेगा।