घर-घर जाकर मलेरिया के मरीजों की पहचान कर रहीं आशा कार्यकर्ता

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-मरीजों की पहचान को लेकर आशा को दिया गया था प्रशिक्षण
-जिले से मलेरिया उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध
बांका, 21 मार्च-
जिले को मलेरिया से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। इसे लेकर घर-घर अभियान चलाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में जाकर मरीजों की पहचान कर रही हैं। क्षेत्र भ्रमण के दौरान यदि कोई लक्षण वाला मरीज दिखता है तो तत्काल उसकी आरडीटी किट से जांच की जाती है। जांच में अगर मलेरिया की पुष्टि होती है तो मरीज का इलाज शुरू किया जाता है। ठीक होने तक मरीजों पर निगरानी रखी जाती है। जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि मलेरिया को लेकर जिले में लगातार अभियान चलता रहता है। अभी भी चल रहा है। इसे लेकर पिछले दिनों आशा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग भी दी गई थी। ट्रेनिंग में उन्हें मलेरिया के लक्षण और उसके बचाव की जानकारी दी गई थी। प्रशिक्षण के दौरान सभी आशा को क्षेत्र में तेज गति से जांच करने और क्षेत्र को मलेरिया से मुक्त करने में लग जाने के लिए कहा गया था, जिस पर अभी वह काम कर रही हैं।
किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है मलेरियाः डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि मलेरिया प्लाजमोडियम नामक परजीवी से संक्रमित मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया एक प्रकार का बुखार है जो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। इसमें कंपकंपी के साथ 103 से लेकर 105 डिग्री तक बुखार होता है। कुछ घंटों के बाद पसीने के साथ बुखार उतर जाता है, लेकिन बुखार आते-जाते रहता है। उन्होंने कहा कि फेलसीपेरम मलेरिया (दिमारी मलेरिया) की अवस्था में तेज बुखार होता है। खून की कमी हो जाती है। बुखार दिमाग पर चढ़ जाता है। फेफड़े में सूजन हो जाती है। पीलिया एवं गुर्दे की खराबी फेलसीपेरम मलेरिया की मुख्य पहचान है।
सोते समय मच्छरदानी का करें प्रयोगः डॉ. यादव ने मलेरिया से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े पहनें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। घर के आसपास जलजमाव वाली जगहों को मिट्टी से भर दें। जलजमाव वाले स्थान पर केरोसिन तेल या डीजल डालें। घर के आसापस बहने वाली नाले की साफ-सफाई करते रहें। उन्होंने कहा कि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की तरफ से डीडीटी का छिड़काव कराया जाता है। छिड़काव कर्मियों के आने पर उनका सहयोग करें और छिड़काव की तिथि की जानकारी ग्रामीणों को दें।
सरकारी अस्पतालों में जांच और इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने कहा कि मलेरिया बुखार होने पर पीड़ित व्यक्ति को नजदीकी सरकारी अस्पताल जाना चाहिए। खून की जांच में मलेरिया निकलने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इसकी निःशुल्क जांच और इलाज की व्यवस्था है। मलेरिया फैलाने वाला मच्छर किसी स्थान पर ठहरे हुए साफ पानी और धीमी गति से बहने वाली नालियों में अंडे देती है और वहां पर पनपती है।
आशा के लिए प्रोत्साहन राशि की भी व्यवस्थाः आरिफ इकबाल ने बताया कि आशा कार्यकर्ता क्षेत्र में जाकर मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों की आरडीटी किट से जांच कर रही हैं। प्रति जांच उन्हें 15 रुपये की राशि देने की भी व्यवस्था है। साथ ही मरीज मिलने पर उसका इलाज कराने पर 75 रुपये प्रति मरीज अलग से दिए जाने की व्यवस्था है। साफ है कि जिले को मलेरिया से मुक्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 2030 तक मलेरिया को खत्म करने का लक्ष्य है, इसे लेकर प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

25 से भागलपुर जिले में सिंथेटिक पायराथायराइड का होगा छिड़काव

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-छिड़कावकर्मियों को सदर अस्पताल, नवगछिया व कहलगांव में दिया गया प्रशिक्षण
-जिले को कालाजार से मुक्त करने को स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध, लगातार चल रहा अभियान
भागलपुर, 21 मार्च-
कालाजार उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। इसी सिलसिले में 25 मार्च से जिले में सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव किया जाएगा। इसे लेकर सोमवार को सदर अस्पताल, नवगछिया पीएचसी और अनुमंडलीय अस्पताल कहलगांव में छिड़कावकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान उन्हें छिड़काव के तरीके बताए गए। घर की पूरी दीवार में छिड़काव का निर्देश दिया गया। साथ ही किवाड़ के पिछले हिस्से में भी छिड़काव करने के लिए कहा गया। छिड़काव के दौरान कोई हिस्सा छूट नहीं जाए, इसका ध्यान रखने के लिए कहा गया।
सदर अस्पताल के मलेरिया कार्यालय में वीबीडीएस श्रीमति अतियातुल मन्नान और केयर इंडिया के आनंद श्रीवास्तव ने तो कहलगांव में केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक और वीडीसीओ रविकांत साह व नवगछिया में वीबीडीएस संजीव कुमार और केयर इंडिया के सुमन कुमार ने प्रशिक्षण देने का काम किया। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कुंदन भाई पटेल ने बताया कि कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। प्रभावित प्रखंडों में छिड़काव का काम जल्द ही किया जाएगा।
घर के पास जलजमाव नहीं होने दें:  डॉ. पटेल ने बताया कि कालाजार उन्मूलन को लेकर दवा का छिड़काव किया जाएगा, लेकिन लोगों को भी बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने देना चाहिए। यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालना चाहिए। सोते समय मच्छरदानी लगाएं, साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं। कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील की गई।
कालाजार की ऐसे करें पहचान: डॉ. पटेल ने बताया कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है। कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है। यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है। यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही मरीज.को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है। यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है। बाल व त्वचा की परत भी सूखकर झड़ते हैं। उन्होंने बताया कि कालाजार के संभावित लक्षण दिखने पर क्षेत्र की आशा से तुरंत संपर्क करना चाहिए और रोगी को किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए।

*गोविंद माहेश्वरी आज असंख्य युवाओ के लिए प्रेरणास्रोत है -देवेश गाँधी*

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*एलन ग्रुप निदेशक गोविंद माहेश्वरी का बकानी में स्वागत अभिनन्दन*

हाल ही में बकानी की धरा में पधारे पहली बार एलन ग्रुप के निदेशक डॉ गोविंद माहेश्वरी का भव्य स्वागत किया गया । देवेश गाँधी ने बताया कि होली के इस पावन पर्व पर अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आध्यात्मिक एवं शिक्षा क्षेत्र की हाड़ौती क्षेत्र की एकमात्र छवि डॉ.गोविंद माहेश्वरी का बकानी पूर्व सरपंच मदनलाल गाँधी ,आर्थिक सांख्यिकी योजना भवन जयपुर परियोजना अधिकारी डॉ. नयन प्रकाश गाँधी ,बकानी मेड़तवाल नवयुवक संघ से अध्यक्ष संजय जुलानिया ,अरविंद गाँधी ,सत्यनारायण गाँधी ,पिंटू गाँधी ,धर्मेंद्र घाटिया ,राहुल गाँधी सभी की उपस्थिति में माल्यार्पण ,श्री फल ,शाल द्वारा अभिनन्दन किया गया एवं अमूल्य भेंट वार्ता हुई । गोविंद माहेश्वरी ने बताया कि मेड़तवाल एवं माहेश्वरी घटक का एक बरसो पुराना इतिहास है और गाँधी एक ऐसा गोत्र है जो माहेश्वरी एवं मेड़तवाल समाज एवं अन्य कई वैश्य घटकों के अंतर्गत भी आता है । पूर्व सरपंच मदनलाल गाँधी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि आज बकानी की धरा को गोविंद जी ने और मङ्गलमय बना दिया है । आगे देवेश गाँधी,अरविंद गाँधी
ने गाँधी परिवार एवं बकानी गांव से निकले एलन के कई पूर्व एवं वर्तमान छात्रों की जानकारी देते हुए बताया की बकानी ही नही सम्पूर्ण झालावाड़ से एलन कोचिंग संस्थान से निकले हुए पूर्व छात्र कई उच्च पदों पर आसीन है ,वाकई में संस्कार से सफलता तक एलन की टैगलाइन आज चरितार्थ होती हुई दिखाई दे रही है ,एलन ग्रुप से जुड़कर हर पेरेंट्स ,बच्चे स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते है।

भुगतान के लिए लाभुकों को चक्कर नहीं काटना पड़ेगा, सीधे खाते में जाएगी राशि

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-सुविधाओं को बढ़ाने के लिए भी अस्पतालों के खाते में चली जाएगी राशि
-स्टेट नोडल एकाउंटेंसी (एसएनए) के तहत लेखापालों को दी गई ट्रेनिंग
भागलपुर, 21 मार्च –
स्वास्थ्य सेवा के तहत अब लाभुकों के खाते में डायरेक्ट राशि जाएगी। इसके लिए लाभुकों को अस्पतालों और कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इतना ही नहीं, स्वास्थ्यकर्मियों और अस्पतालों की जरूरतों के लिए भी राशि का सीधा खाते में भुगतान किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय कार्यालय या फिर अन्य कार्यालय नहीं आना पड़ेगा। इसे लेकर सोमवार को भीखनपुर स्थित एक होटल में क्षेत्रीय प्रबंधन ईकाई की ओर से एसएनए के तहत एकदिवसीय ट्रेनिंग आयोजित की गई, जिसमें भागलपुर और बांका जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के लेखापाल शामिल हुए। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें भुगतान को लेकर नई प्रक्रिया के बारे में अवगत कराया गया।
ट्रेनिंग सत्र को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, भागलपुर डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा को लोगों के लिए फ्रेंडली बनाया जा रहा है। इसे लेकर लगातार पहल की जा रही है। इसमें भुगतान सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अगर समय से भुगतान हो जाता है तो लाभुकों को इसका बेहतर फायदा मिलता है। इसलिए प्रक्रियाओं की जटिलता को खत्म किया जा रहा है। अगर किसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं को बढ़ाने के लिए राशि की आवश्यकता है तो उसके लिए वहां के लेखापाल को अब क्षेत्रीय कार्यालय या फिर अन्य दफ्तरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि लेखापाल खर्च का एक ब्योरा बना लें। ब्योरा बन जाने के बाद उसे ऑनलाइन फीड कर लें। ऑनलाइन ही उसकी जांच होगी और उसे अप्रूवल मिल जाएगा। यदि कोई कमी होगी तो उसे ठीक करने की सलाह भी ऑनलाइन ही दी जाएगी। कमियों को दोबारा दुरुस्त करने के बाद उसे फिर से भेजने पर अप्रूव कर दिया जाएगा। इसके बाद अस्पताल के खाते में सीधे तौर पर राशि चली जाएगी।
डॉ. सिंह ने कहा कि इसी तरह लाभुकों के खाते में भी सीधी राशि जाएगी। उन्हें भी दफ्तरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। लाभुकों को नजदीकि अस्पतालों में जाकर अपना विवरण ऑनलाइन कराना होगा। विवरण ऑनलाइन होने के साथ ही उन्हें राशि मिल जाएगी। ठीक इसी तरह स्वास्थ्यकर्मियों को भी प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा। ट्रेनिंग के दौरान आशा के क्षेत्रीय समन्वयक कुणाल कुमार और क्षेत्रीय लेखा प्रबंधक विजय कुमार राम, बांका जिला के लेखा प्रबंधक सोमेश कुमार झा एवं भागलपुर जिला लेखा प्रबंधक विकास कुमार समेत कई स्वास्थ्यकर्मी भी मौजूद थे।

*‘ग्रामीण विकास ट्रस्ट’ को ‘इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स’ द्वारा उत्कृष्ट कार्य हेतु किया सम्मानित*

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*‘ग्रामीण आबादी को सशक्त बनाने’ और ‘किसान आय वृद्धि’ को लेकर ‘ग्रामीण विकास ट्रस्ट’ की हुई सराहना*
नई दिल्ली-
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देने वाले संगठनों और कार्यक्रमों को पहचानने और प्रदर्शित करने के उद्देश्य से अपने चौथे आईसीसी ‘सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2022’ का आयोजन किया। इस समारोह में
राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रही ‘ग्रामीण विकास ट्रस्ट’ को ‘ग्रामीण आबादी का सशक्तिकरण’ और ‘किसान आय वृद्धि’ के लिए एक उत्कृष्ट कार्य करने के लिए बेस्ट एनजीओ के रूप में सम्मानित किया गया है।
इस अवसर पर ग्रामीण विकास ट्रस्ट की ओर से राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रमुख तृप्ति खन्ना  और व्यवसाय विकास प्रबंधक प्रिया कुमार ने पुरस्कार प्राप्त किया। विभिन्न श्रेणियों के लिए पैन इंडिया से 30 से अधिक संगठनों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। ग्रामीण विकास ट्रस्ट अपने एचआरडीपी कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण आबादी का सशक्तिकरण कर रहा है, जो बेहतर कृषि और संबद्ध गतिविधियों जैसे- प्रशिक्षण कार्यक्रम और क्षमता निर्माण के माध्यम से ग्रामीणों की आय में स्थायी वृद्धि पैदा करने पर केंद्रित है।
ग्रामीण विकास ट्रस्ट, डब्ल्यूएडीआई (वेस्टलैंड एरिया डेवलपमेंट इनिशियएटिव) के नाम से किसान आय वृद्धि परियोजनाओं को लागू कर रहा है। यह परियोजना छोटे फलों के बागों के विकास और पारिस्थितिक हस्तक्षेप और मृदा संरक्षण उपायों के माध्यम से अस्वीकृत भूमि की बहाली पर केंद्रित है।
इस उपलब्धि पर बोलते हुए, ग्रामीण विकास ट्रस्ट के सीईओ शिव शंकर सिंह ने कहा, “यह जीवीटी सदस्यों के शानदार और उत्कृष्ट प्रदर्शन के बिना संभव नहीं होता, इसलिए इन सभी सदस्यों के योगदान को स्वीकार करने का समय आ गया है, जिन्होंने किसानों के साथ अपनी आजीविका और आय बढ़ाने के लिए काम करके इस लक्ष्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मैं यह पुरस्कार अपनी पूरी टीम को उनके समर्थन और इसे संभव बनाने में सराहनीय प्रयासों के लिए समर्पित करता हूं।
ग्रामीण विकास ट्रस्ट के लीड बिजनेस डेवलपमेंट शैलेश कोटरू ने कहा, “आज हम वास्तव में ग्रामीण आबादी को सशक्त बनाने के लिए एक उत्कृष्ट कार्यान्वयन एनजीओ के लिए इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा सम्मानित किए जाने पर सम्मानित महसूस कर रहे हैं। मैं इस उपलब्धि को पूरा करने के लिए जीवीटी सदस्यों को हार्दिक बधाई देता हूं।’
ग्रामीण विकास ट्रस्ट (जीवीटी) एक राष्ट्रीय स्तर का विकास संगठन है, जिसे कृभको द्वारा प्रोत्साहित और समर्थित किया गया है। यह 1999 से भारत के 25 राज्यों में काम कर रहा है। वर्षों से अपने विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से, जीवीटी ने सीमांत और वंचित समुदायों को एकीकृत कृषि और आजीविका सहायता प्रदान करने वाले आय वृद्धि कार्यक्रमों को विकसित और कार्यान्वित करने में कामयाबी हासिल की है। जीवीटी ने केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण, नाबार्ड, विश्व बैंक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), रॉकफेलर फाउंडेशन, एशियाई विकास बैंक जैसे कई वित्त पोषण और परोपकारी विकास एजेंसियों, विभागों और संगठनों तथ्ाा यूरोपीय आयोग और कॉरपोरेट जैसे- लार्सन एंड टुब्रो, लैंको, सीएफसीएल और एनटीपीसी विकास परियोजनाओं और आजीविका कार्यक्रमों को लागू करने के लिए (जो अब तक किए गए हैं) के साथ भागीदारी की है।

होलिका दहन- की पूजा विधि

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प्रथम पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर अपने गोत्र का एवं अपना नाम तथा पत्नी बच्चों का नाम लेकर बोले मेरे एवं मेरे परिवार की सुण्डा नाम राक्षसी द्वार की हुई पीड़ा सर्वदा के लिए समाप्त हो अतैव मैं होलिका का यथाशक्ति पूजन कर रहा हूं।

ऊं होलिकायै नमः बोलकर ध्यान करें फिर गंगाजल, रोली, चावल पुष्प, धूप दीप नेवेद्म (भोग) फल, पान सुपाड़ी, द्रव्य होली को अर्पण करें। सुविधा के लिए पीले या लाल वस्त्र में उपर्युक्त सामग्री मौली से बांध कर होली में डालें, फिर कपूर से आरती करे तथा प्रार्थना करें कि हे होली माता मेरे एवं मेरे परिवार तथा मेरे देश में निरंतर सुख समृद्धि की वृद्धि हो एवं ईर्ष्या द्वेष, असत्य काम क्रोध लोभ मोह सदा दूर हों एवं नवीन वर्ष पूर्व मंगलमय हो। होवें सुखी सब लोग हे प्रभु अरु निरामय हो सभी कल्याण को देखें सभी कोई न पावे दुख कमी।

 

गर्भवती एवं गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी आयोडीन जरूरी

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– उचित आयोडीन से बच्चों का मजबूत होगा शारीरिक और मानसिक विकास
– आयोडीन की कमी से गर्भस्थ शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास में हो सकती है परेशानी

खगड़िया, 17 मार्च।
गर्भधारण के साथ ही हर महिला में सुरक्षित प्रसव व स्वस्थ्य बच्चे का जन्म का पहली चाहत होती है। किन्तु, इसके लिए हर गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। तभी सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ्य बच्चे का जन्म होगा। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है। इसके लिए शरीर में उचित आयोडीन की मात्रा हो इसको लेकर सजग रहने की जरूरत है। दरअसल, आयोडीन की कमी से गर्भस्थ शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। इसलिए, स्वस्थ बच्चे का जन्म के लिए शरीर में पर्याप्त आयोडीन होना जरूरी है।

– गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आयोडीन जरूरी :
खगड़िया सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने बताया कि गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए गर्भवती के शरीर में उचित मात्रा में आयोडीन होना जरूरी है। दरअसल, आयोडीन की कमी के कारण कम वजन वाला शिशु जन्म लेता है। इतना ही नहीं ऐसे में मृत शिशु का भी जन्म हो सकता है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान हर गर्भवती को आयोडीन को लेकर सजग रहना चाहिए। इसके लिए चिकित्सकों से सलाह लेनी चाहिए।

– आयोडीनयुक्त नमक का करें उपयोग :
आयोडीन , मिट्टी एवं पानी में पाई जाने वाला सूक्ष्म तत्व है। आयोडीन की कमी की समस्याओं को दूर करने के लिए आयोडीन युक्त नमक का सेवन करना चाहिए। यह हर आयु वर्ग के लोगों के लिए जरूरी है। क्योंकि, आयोडीन का शरीर में उचित मात्रा होना हर किसी के लिए जरूरी है। हालाँकि, अल्पमात्रा में ही आयोडीन हमारे शरीर के लिए जरूरी है।

– आयोडीन की कमी का महसूस होते ही चिकित्सकों से कराएं जाँच :
शरीर में आयोडीन की कमी का महसूस होते ही तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराना चाहिए और चिकित्सा परामर्श के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। इसका शुरुआती लक्षण है शुष्क त्वचा, बालों का झड़ना, बोली में भारीपन समेत शरीर में अन्य परेशानी महसूस होना। इसलिए, आहार के साथ उचित आयोडीन का सेवन करना जरूरी है।

– आयोडीन की कमी से कई तरह की होती है परेशानी :
आयोडीन एक पोषक तत्व है। जिसकी कमी से लोगों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। जैसे कि, नींद अधिक आना, श्वास व हृदय से संबंधित परेशानी, डिप्रेशन, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द, गर्भपात, विकलांगता आदि परेशानी आयोडीन की कमी से ही होता है। इसलिए, भले ही शरीर में आयोडीन अल्पमात्रा में ही जरूरी है। किन्तु, कमी होने पर बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वयस्कों के लिए सामान्यतः प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम (एमसीजी)आयोडीन की आवश्यकता होती है। जबकि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रति दिन 200 एमसीजी जरूरी है।

मधुमेह से पीड़ित गर्भवती महिलाएं रहें सावधान और सतर्क, गर्भावस्था के दौरान उचित प्रबंधन जरूरी

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– उचित प्रबंधध से सुरक्षित प्रसव संभव, चिकित्सा परामर्श का करें पालन
– लापरवाही से गर्भवती के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु को भी परेशानियाँ का करना पड़ सकता है सामना
लखीसराय, 17 मार्च। बदलते जीवनशैली और परिवेश के साथ-साथ मधुमेह की समस्या भी आम हो गई है। वर्तमान दौर में इस परेशानी से किसी भी आयु वर्ग के लोग पीड़ित हो सकते हैं। इसका प्रमाण यह है कि दिनों-दिन लगातार ऐसे पीड़ित लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ऐसे में लोगों को इससे बचाव के लिए सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। खासकर मधुमेह से पीड़ित हो चुकी गर्भवती महिलाओं को तो और सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान ऐसी पीड़ित महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने से सुरक्षित और सामान्य प्रसव संभव है। इसको लेकर सरकार द्वारा भी हर जरूरी प्रयास किया जा रहा है । स्थानीय स्तर भी समुचित जाँच और उचित प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। इसलिए ऐसे पीड़ित गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जाँच जरूर करानी चाहिए।
– मधुमेह से पीड़ित गर्भवती को समय पर जाँच कराना बेहद जरूरी :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से पीड़ित महिलाओं का समय पर जाँच और आवश्यक उपचार जरूरी है। अन्यथा थोड़ी-सी लापरवाही बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है। दरअसल, मधुमेह के प्रति लापरवाही करने से ना केवल गर्भवती को  परेशानियाँ से सामना पड़ सकता बल्कि, गर्भस्थ शिशु का विकास भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की जाँच जरूर करानी चाहिए। ताकि समय पर परेशानी का पता चल सके और ससमय ही जरूरी इलाज सुनिश्चित हो सके। जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों में मधुमेह जाँच की मुफ्त सुविधा उपलब्ध है।
– 30 से 60 प्रतिशत गर्भपात की भी रहती है संभावना :
यदि समय से उपचार नहीं हो पता है तब आगे चलकर प्रसूता एवं गर्भस्थ शिशु में विभिन्न जटिलताएं हो सकती एवं दोनों टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित हो सकते हैं। इससे गर्भवती में इन्फेक्शन, प्रसव अवधि में बढ़ोतरी, जटिलतापूर्ण प्रसव, सिजेरियन प्रसव, प्रसव के बाद गर्भाशय का सिकुड़ नहीं पाना एवं प्रसव के बाद अत्यधिक रक्त स्राव जैसी तमाम जटिल समस्या उत्पन्न हो सकती है। जिससे प्रसूता की जान पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। गर्भावस्था जनित मधुमेह से गर्भस्थ शिशु को भी समस्या हो सकती है। इससे गर्भस्थ शिशु की मृत्यु, मृत शिशु का जन्म, बर्थ डिफेक्ट, बर्थ इन्जरी एवं नवजात शिशु में ग्लूकोज की कमी के साथ पहले तीन महीने में अचानक गर्भपात की संभावना 30 से 60 प्रतिशत तक हो सकती है।
– गर्भवस्था में मधुमेह का उपचार :
इसके उपचार के लिए सरकार द्वारा तीन व्यवस्थाएं की गयी हैं। पहला भोजन एवं पोषण संबंधित, दूसरा दवाई द्वारा एवं तीसरा इन्सुलिन इंजेक्शन के द्वारा। गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित महिला को पोषण संबंधी जानकारी दी जानी जरूरी है। जिससे वह समझ सके कि गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए पोषण युक्त आहार क्या है। उपयुक्त वजन में बढ़ोत्तरी कितनी होनी चाहिए एवं खून में सामान्य ग्लूकोज स्तर को प्राप्त करने एवं बनाये रखने के लिए कितना और कौन सा भोजन लेना है। जिन मधुमेह पॉजिटिव महिलाओं का मधुमेह, पोषण संबंधित उपचार से नियंत्रित नहीं होता है, उन्हें दवा दी जाती है। साथ ही जब दवा सेवन के बाद भी मधुमेह अनियंत्रित होता है तब चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन द्वारा इन्सुलिन की डोज दी जाती है।

मजबूत नेतृत्व एवं प्रभावी कार्य योजना से कोविड पर मिली जीत : डॉ. मनसुख 

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• कोविड प्रबंधन पर देश की सार्वजानिक स्वास्थ्य रणनीति को लेकर वेबिनार आयोजित
• देशभर में 180 करोड़ से अधिक  डोज दिए गए
• केवल 42  दिनों में तीसरी लहर से देश को मिली निज़ात
• विश्व की तुलना में भारत में  कोविड  के कारण दोगुना से अधिक मृत्यु हुयी कम
भागलपुर/17, मार्च  : मजबूत नेतृत्व एवं  प्रभावी कार्ययोजना  के कारण देश कोरोना जैसी गंभीर वैश्विक चुनौती को मात देने में  सफल  हुआ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने अपनी क्षमता को पहचान कर इसका इस्तेमाल प्रभावी रूप से किया। जिसमें ससमय देश के अंदर कोविड टीके का निर्माण शुरू करना एवं 180  करोड़ से अधिक कोविड टीके का डोज लगाना उल्लेखनीय है।  देश में कोविड  की तीसरी लहर का अन्य देशों की तुलना में भारत में न्यूनतम प्रभाव दिखा। एक दिन में 2. 5 करोड़ से अधिक डोज देश में टीका आपूर्ति, उपलब्धता  एवं टीकाकरण  सत्रों का उचित प्रबंधन को प्रदर्शित करता है । उक्त बातें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने गुरूवार को कोविड प्रबंधन पर भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य की रणनीति पर आयोजित वेबिनार के दौरान कही।
डॉ. मंडाविया ने कहा कि दुनियाभर के कई देश भारत की प्रभावी कोविड प्रबंधन रणनीति से सीख  ले रहे हैं। देश में बड़े स्तर पर टीकाकरण, सेल्फ एवं होम आइसोलेशन एवं  कंटेंटमेन्ट जोन के  निर्माण पर ध्यान दिया गया।  साथ ही  कोविड रोकथाम एवं उपचार के दिशानिर्देश भी जारी किए गए। जिससे अन्य देशों की तुलना में देश में कोविड प्रबंधन में सहूलियत मिली।  इस मुकाम तक पहुँचने में एनजीओ एवं स्थानीय इकाईयों ने भरपूर सहयोग किया।  उन्होंने कहा कि कोविड से लड़ने में जिस तरह से  पूरे  देश ने सहयोग किया है, उसी तरह से अन्य स्वास्थ्य के मुद्दों पर भी देश को एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि  देश में 1.5 लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर ई-संजीवनी यानी टेलीमेडिसिन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए जरुरी है कि एजीओ इसमें सक्रिय भूमिका अदा  करें।  समुदाय में लोगों को हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर की जानकारी दें एवं उन्हें केंद्र पर उपलब्ध कई गंभीर रोगों की जाँच  एवं उपचार के विषय में प्रेरित भी करे।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण बना सबसे बड़ा हथियार:
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण की वजह से देश कोरोना जैसी महामारी के ख़िलाफ़ मजबूती से लड़ाई करने में सक्षम हो सका। वहीं नवाचार, प्रभावी सर्विलांस एवं टीकाकरण की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हुयी।  उन्होंने कहा कि सिविल सोसाइटी एवं एनजीओ  के साथ कई बैठकें  की गयी जो टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के साथ कोविड को लेकर फ़ैल रही भ्रांतियों को दूर करने में असरदार साबित हुआ. साथ ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाते हुए विभिन्न आयुवर्ग का टीकाकरण किया गया। इससे कोरोना संक्रमण की प्रसार को नियंत्रित करने में आसानी हुयी।
42  दिनों में ओमीक्रॉन से मिली निजात:
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी लाल अग्रवाल ने पीपीटी के जरिए कोविड प्रबंधन पर देश की रणनीति एवं इसमें मिली सफलता को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि  तीसरी लहर यानी  ओमीक्रॉन को डेल्टा वेरियंट से 10 गुना तेजी से फ़ैलने  वाला बताया गया था।  देश एवं विदेश की कई मानक संस्थाओं ने इस बात की आशंका जाहिर की थी कि  देश में जनवरी से फरवरी माह में प्रतिदिन 5  लाख से 16  लाख कोविड के मामले आ सकते हैं।  लेकिन देश में तीसरी लहर के पीक  में भी सबसे अधिक 3 .11 लाख कोविड केसेस आए जो अब घटकर औसतन 3500  रह गए हैं।  तीसरी लहर में विश्व स्तर पर केवल 47.8% मौतों में कमी देखी गयी. वहीं भारत में 95% की कमी दर्ज हुयी। दुनिया के कई विकसित देश कोरोना से अधिक प्रभावित हुए. फ्रांस में  कुल आबादी का 36.10%, ब्रिटेन में 28.94%, अमेरिका में 24. 31% एवं स्पेन में 24% लोग कोविड से ग्रसित हुए. जबकि भारत में सिर्फ 3.15% आबादी ही कोविड से ग्रसित हुयी। साथ ही प्रति 10 लाख आबादी पर विश्व में 779 लोगों की मौत कोविड से हुयी।  भारत में केवल 368 मौतें ही हुयी। इस तरह  भारत में विश्व की तुलना में दोगुना से अधिक कम मृत्यु हुयी। उन्होंने कहा कि  देश में कुल 180 करोड़ से अधिक कोविड डोज दिए जा चुके हैं।  जिसमें  18  से ऊपर आयुवर्ग में 91.17 करोड़ को प्रथम डोज,78. 33 करोड़ को दूसरा डोज एवं 2. 15 करोड़ को प्रीकॉशनरी डोज दिया गया है.वहीं 15 से 18 आयुवर्ग में 5. 61 करोड़ को पहला डोज एवं 3.51 करोड़ को दूसरा डोज दिया गया है।
बिल एन्ड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सीईओ क्रिस इलियास ने कहा कि  गेट्स फाउंडेशन कोरोना रोकथाम एवं प्रबंधन की दिशा में भारत सरकार  को सहयोग कर रही है। जिसमें वैक्सीन निर्माण में तकनीकी सहयोग , कोल्ड चेन प्रबंधन, वैक्सीन आपूर्ति प्रोसेस ट्रैकिंग एवं स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण शामिल है।
सेंटर फॉर एडवोकेसी एन्ड रिसर्च की निदेशिका अखिला शिवदास ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में कोविड नियंत्रण एवं इसकी रोकथाम को लेकर संशय को दूर किया गया है। इसे समुदाय के नेतृत्व में हेल्प डेस्क की सहायता से किया गया। इस मॉडल की शुरुआत बैंगलोर शहर में जमीनी स्तर पर कार्य वाले सीएसओ के साथ किया गया। बाद में इसे पूना, भुवनेश्वर, अजमेर, दिल्ली एवं कोलकाता शहर में विस्तारित किया गया। इस दौरान लगभग 87000 आबादी के 29000 घरों का सर्वे किया गया।  वहीं 3500 से अधिक समुदाय के साथ छोटी-छोटी बैठकें की गई। साथ ही 33000 से अधिक लोगों को कोविड टेस्ट कराने के लिए प्रेरित भी किया गया। हेल्प डेस्क 1.5 लाख से अधिक लोगों को कोविड टीकाकरण पर जागरूक भी किया।
वहीं, स्मार्ट की तरफ से अर्चना ने सामुदयिक रेडियो की भूमिका पर जानकारी दी। साथ ही  टाटा समूह की तरफ से श्यामल ने भी अपने योगदान का जिक्र किया।
इस दौरान देशभर से 5000 से अधिक लोग वेबिनार से जुड़े रहे।

पोषण की स्थिति में सुधार लाने के लिए होगी स्वस्थ्य बालक बा​लिका स्पर्द्धा 

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-बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति अभिभावकों में प्रतिस्पर्धा की भावना लाना उद्देश्य
-शून्य से 6 वर्ष के बच्चे होंगे शामिल, स्पर्द्धा 21 मार्च से 27 मार्च तक
-आईसीडीएस निदेशालय ने डीएम को दिये स्पर्द्धा संबंधी निर्देश
बांका,, 17 मार्च। बच्चों के पोषण संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित कराते हुए देशव्यापी स्वस्थ्य बालक बालिका स्पर्द्धा का आयोजन 21 मार्च से 27 मार्च 2022 तक किया जायेगा। स्वस्थ बालक बालिक स्पर्द्धा के लिए संबंधित जिला के जिलाधिकारी नोडल पर्सन होंगे। इस कार्य में सीडीपीओ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस संबंध में राज्य के समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशालय के निदेशक आलोक कुमार ने जिलाधिकारी को पत्र लिख कर स्पर्धा आयोजन के संबंध में आवश्यक निर्देश दिये हैं।
पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन में दर्ज होगी 0—6 वर्ष बच्चों की जानकारी:
निर्देश में कहा गया है प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों के पोषक क्षेत्र के शून्य से 6 वर्ष आयुवर्ग के सभी बच्चों की वृद्धि निगरानी कर उसकी जानकारी पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन में दर्ज करायी जानी है। साथ ही वैसे ग्रामीण व शहरी इलाके जहां आंगनबाड़ी केंद्र अवस्थित नहीं हैं, उस स्थिति में संबंधित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी वैसे क्षेत्र के सभी लाभार्थियों को नजदीक के आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ टैग कर सभी शून्य से 6 वर्ष के बच्चों की  वृद्धि निगरानी कराते हुए पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन में दर्ज कराना सुनिश्चित करायेंगे। साथ ही इस काम के लिए विभिन्न एंजेंसी जैसे एनजीओ, केयर इंडिया, पाथ फाइनडर, लायंस क्लब, रोटरी क्लब्स, रेसिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, पीडियाट्रिक एसोसिएशन, इम्प्लायर्स एसोसिएशन, स्कूल टीचर्स, यूथ क्लब्स, सीफार, इत्यादि की भी सहभागिता इस अभियान में ली जा सकती है। इस संबंध में शून्य से 6 वर्ष के सभी बच्चों की वृद्धि निगरानी करने के लिए आॅनलाइन पंजीकरण जिला प्रोग्राम पदाधिकारी के स्तर से पोषण ट्रैकर के वेबसाइट पर कराया जा सकता है।
पोषण की स्थिति में सुधार लाना स्पर्द्धा का उद्देश्य:
इस आयोजन का उद्देश्य शून्य से 6 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों में पोषण की स्थिति में सुधार लाना, बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सामुदायिक स्तर पर जागरूकता तथा लोगों को बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर संवेदीकरण, अभिभावकों में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति प्रतिस्पर्द्धा की भावना का बढ़ाना, आईसीडीएस सेवाओं से वंचित बच्चों तक कवरेज को बढ़ाना, नियमित रूप से बच्चों की वृद्धि का अनुश्रवण तथा कुपोषित बच्चों के लिए उपचारात्मक पहल किया जाना, नाटे, इुबले तथा कम वजन वाले बच्चों की पहचान और निवारण आदि शामिल है। बच्चों की वृद्धि निगरानी तथा माप के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक स्कूल, पंचायत भवन, घर, प्राथमिक तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या ऐसे अन्य स्थानों को चिह्नित कर वहां यह कार्य किया जायेगा।