तम्बाकू मुक्त समाज और देश बनाने के लिए दंडात्मक शुल्क वसूली के साथ जन- जागरूकता भी जरूरी : जिलाधिकारी

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– सन 2003 में देशभर में लागू हुआ तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम (कोटपा)
– सन 2013 में तम्बाकू मुक्त जिला घोषित किया गया मुंगेर
– तम्बाकू नियंत्रण के प्रावधानों के उल्लंघन पर टोल फ़्री नंबर 800110456 पर कॉल कर सकते हैं शिकायत
मुंगेर, 16 मार्च-
तम्बाकू मुक्त समाज और देश के निर्माण के लिए दंडात्मक शुल्क वसूली के साथ- साथ जन- जागरूकता भी जरूरी । उक्त बात जिला तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम और जिला स्वास्थ्य समन्वय समिति की बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कही। उन्होंने बताया कि  स्वस्थ्य समाज और स्वस्थ देश से ही वास्तविक विकास संभव है। तम्बाकू नियंत्रण का यह पुनित कार्य सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय से ही संभव है। इसके लिए सभी सरकारी भवनों में धूम्रपान और तम्बाकू मुक्त सन्देश का प्रचार-प्रसार आवश्यक है। तम्बाकू नियंत्रण प्रावधानों के विकास के रूप में आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए मनरेगा और श्रम विभाग से समन्वय स्थापित करने कर सम्भावना तलाशने की आवश्यकता है। इस अवसर पर उन्होंने नगर निगम क्षेत्र में तम्बाकू नियंत्रण के लिए सतत छापेमारी करने का निर्देश दिया । उन्होंने बताया कि सभी विभागों के आपसी समन्वय से ही तम्बाकू मुक्त समाज का निर्माण हो सकता है। तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम (कोटपा) के प्रावधानों को लागू करने में नियमित रूप से निगरानी करने की आवश्यकता है । इसके बाद ही इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
बैठक में पीपीटी के माध्यम से प्रजेंटेशन देते हुए जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के . रंजन ने बताया कि सन 2003 में तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम  के प्रावधानों को लागू किया गया । सन 2013 में मुंगेर जिला को तम्बाकू मुक्त जिला घोषित किया गया। उस समय से ही मुंगेर ने इस दिशा में अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। इस अवसर पर उन्होंने कोटपा के विभिन्न प्रावधानों की चर्चा करते हुए बताया कि धारा 4 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान को निषेध किया गया है। वहीं धारा 5 के तहत प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापन को प्रतिबंधित किया गया है। इसके धारा 6 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के ब्यक्ति को तम्बाकू बेचने या शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचने पर पाबंदी लगायी गयी है। धारा 7 के तहत सभी तंबाकू उत्पादों पर सचित्र स्वास्थ्य संबंधित चेतावनी को प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि इन सभी प्रावधानों के उल्लंघन होने पर भारत सरकार के टोल फ्री नंबर 800110456 या शिकायत या अधिसूचित पुलिस पदाधिकारी से सम्पर्क किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम के तहत सन 2021- 22 में कुल 336 लोगों की काउंसलिंग की गई। वहीं स्क्रीनिंग की वाईओवाई परफॉर्मेंस के अनुसार मुंगेर जिला में सन 2020 में 6981 और 2021 में 8934 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसके साथ ही यदि मुंगेर जिला में 2021 में सबसे कम और अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की बात की जाय तो जुलाई सबसे कम 112 और दिसम्बर में सबसे अधिक 2286 लोगों की स्क्रीनिंग हुई। सन 2022 के तीन महीनों जनवरी में 1581, फरवरी में 1310 और 14 मार्च तक कुल 655 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

पल्स पोलियो अभियान:  उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को प्रशस्ति-पत्र देकर किया गया सम्मानित 

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– राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर सम्मान समारोह में किया गया सम्मानित
– जिले के सभी प्रखंडों में समारोह का आयोजन कर प्रखंड स्तर पर कर्मियों को किया गया सम्मानित
लखीसराय, 16 मार्च-
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह के निर्देशानुसार राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर जिले के सभी प्रखंडों में प्रखंड स्तरीय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें इस बार 27 फरवरी से जिले में शुरू पाँच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान के दौरान उत्कृष्ट और बेहतर कार्य करने वाले चयनित कर्मियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। जिसमें पल्स पोलियो अभियान में  शामिल शहर में सेविका, सहायिक और ग्रामीण क्षेत्र में एएनएम और आशा कार्यकर्ता को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान सम्मानितों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की गई। वहीं, लखीसराय पीएचसी में आयोजित सम्मान समारोह में सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती, डीपीएम (हेल्थ) मो खालिद हुसैन एवं डब्ल्यूएचओ के एसएमओ के हाथों संयुक्त रूप से पल्स पोलियो अभियान के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा, सेविका और सहायिका को पीएचसी प्रबंधन द्वारा प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसी तरह जिले के सभी सभी पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में सम्मान समारोह का आयोजन कर सम्मानित किया गया।
– सर्वाधिक बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने वाले कर्मियों को किया गया सम्मानित :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जिले में 27 फरवरी से शुरू हुए पाँच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले सभी कर्मियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके लिए स्थानीय स्वास्थ्य प्रबंधन द्वारा अभियान के दौरान सर्वाधिक बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने वाले कर्मियों का चयन किया गया। जिसके आधार पर चयनित कर्मियों को सम्मानित किया गया। वहीं, उन्होंने कहा, मैं उत्कृष्ट कार्य करने वाले सभी कर्मियों की मेहनत की सराहना करता हूँ और आगे भी इसी अपनी जिम्मेदारी का पूरी मुस्तैदी के साथ निर्वहन करने की आशा और उम्मीद रखता हूँ। साथ ही सभी कर्मियों के उज्जवल भविष्य की कामना करना करता हूँ।
– उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों का हौसला बढ़ाने के लिए बेहतर पहल :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने कहा, मैं सम्मानित होने वाले सभी कर्मियों के कार्यों की तहे दिल से सराहना करता हूँ। उत्कृष्ट और बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों का हौसला बढ़ाने के लिए यह बेहतर पहल है। इससे ना सिर्फ सम्मानित होने वाले कर्मियों को सम्मान मिलता बल्कि, पूरे इलाके का मान-सम्मान भी बढ़ता है। इसलिए, मैं सभी कर्मियों से अपील करता हूँ कि सभी लोग इसी तरह अपनी मेहनत की बदौलत आगे बढ़ते रहें और पूरे संस्थान व इलाके का मान-सम्मान बढ़ाते रहें।

खगड़िया जिले में 12 से 14 आयु वर्ग के बच्चों का कोविड वैक्सीनेशन शिविर शुरू, लगाया गया सुरक्षा का टीका 

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– राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस • जिलाधिकारी ने उदघाटन  वैक्सीनेशन अभियान का किया शुभारंभ
– जिले के सभी प्रखंडों में चयनित और चिह्नित जगहों पर शिविर का हुआ आयोजन
खगड़िया, 16 मार्च-
राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर बुधवार से जिले में 12 से 14 आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों के कोविड वैक्सीनेशन अभियान का आगाज हो गया। इस अभियान की शुरुआत जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष एवं सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने खगड़िया सदर पीएचसी अंतर्गत मध्य विद्यालय रामगंज (संसारपुर) में आयोजित वैक्सीनेशन शिविर का  उदघाटन कर किया। इसके बाद जिले के सभी प्रखंडों में पूर्व से चयनित और चिह्नित जगहों पर शिविर का संचालन शुरू हुआ और सुविधाजनक तरीके से उक्त आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी बच्चों को सुरक्षा का टीका लगाया गया। इस दौरान जिले के सभी शिविर स्थलों पर लाभार्थियों की अच्छी-खासी भीड़ देखी गई । गाइडलाइन का पालन के साथ सभी लाभार्थियों ने उत्साह के साथ सुरक्षा का टीका लगवाया। टीका लेने के बाद टीकाकृत लाभार्थियों ने कहा, देर से ही सही, पर व्यवस्थित पहल के लिए सरकार का कदम सराहनीय है। सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन देने के लिए स्वास्थ्य विभाग धन्यवाद का पात्र है। इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, जिला शिक्षा पदाधिकारी कृष्ण कुमार, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, खगड़िया सदर पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव रंजन, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, प्रखंड प्रबंधक रेणुका कुमारी समेत विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिका सहित यूनिसेफ और केयर इंडिया के अन्य प्रतिनिधि मौजूद थे।
– कोविड से सुरक्षा के लिए वैक्सीन सबसे बेहतर और कारगर उपाय, बेचिहक कराएं वैक्सीनेशन :
जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने कहा, सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस घातक महामारी से सुरक्षित करने के लिए जिले में लगातार आवश्यक प्रयास जारी है । हर हाल में इसे सुनिश्चित करने को लेकर हर जरूरी पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में अब 12 से 14 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले बच्चों का भी वैक्सीनेशन शुरू कर दिया गया है। जिले के इन आयु वर्ग के तमाम  बच्चों से अपील करता हूँ कि इस घातक महामारी से बचाव के लिए निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और अपने अन्य साथियों को भी प्रेरित करें। वैक्सीन ना सिर्फ पूर्णतः सुरक्षित बल्कि, इस महामारी से बचाव के लिए काफी प्रभावी है। यही नहीं, कोविड से बचाव के लिए सबसे बेहतर और कारगर उपाय भी है। इससे ना सिर्फ  एक व्यक्ति विशेष सुरक्षित होगा बल्कि, पूरा समुदाय सुरक्षित होगा। सभी लोग खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे।
– शिविर स्थलों पर पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई गई  :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया जिले के सभी प्रखंडों में चयनित एवं चिह्नित स्थलों पर पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी। ताकि किशोर-किशोरियों को वैक्सीनेशन कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और व्यवस्थित तरीके से शिविर का संचालन सुनिश्चित हो सके। इसके लिए जहाँ सभी शिविर स्थलों पर पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन वाइल की उपलब्धता और कर्मियों की तैनाती की गई थी। वहीं, ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी सुनिश्चित की गई थी। ताकि सभी लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें और अधिकाधिक लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।
– 28 दिन के अंतराल पर दी जाएगी दूसरी डोज :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, निर्देशानुसार फिलहाल 12 से 14 आयु वर्ग सभी लाभार्थियों को सिर्फ कोर्बेवैक्स (सार्स-कोव-2) का टीका लगाया गया। वहीं, उन्होंने बताया जिन लाभार्थियों ने आज वैक्सीनेशन कराया, उन्हें नियमानुसार 28 दिन की समयावधि पूरी करने के बाद पुनः दूसरी डोज की भी वैक्सीन दी जाएगी। ताकि हर हाल में निर्धारित समय पर युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और इस महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड जाँच कराएं।

जीविका दीदियों को सुरक्षित गर्भपात के बारे में दिया गया प्रशिक्षण

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-बाराहाट में सुरक्षित गर्भपात पर जागरूकता लाने के बारे में कहा गया
-समाज के सभी लोगों को इस पर काम करने की बताई गई जरूरत
बांका, 16 मार्च-
सुरक्षित गर्भपात कानूनी तौर पर वैध है या नहीं, इस बात की जानकारी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को नहीं है। इस कारण नीम-हकीम के चक्कर में पड़कर महिलाएं अपनी जान गंवा रही हैं। इसी जानकारी देने के उद्देश्य से बुधवार को बाराहाट प्रखंड में आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के तत्वावधान में जीविका दीदियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान आईपास के रिसर्च एंड ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर रितेश रंजन ने कहा कि महिलाएं अनचाहे रूप से गर्भवती हो जाने पर सुरक्षित गर्भपात भी नहीं करा पाती हैं। सरकारी अस्पतालों में मिल रही सुविधाओं से वह वंचित रह जाती हैं। जिनन महिलाओं का गर्भ अब पहली तिमाही से दूसरी तिमाही में प्रवेश कर चुका है, उन्हें सुरक्षित तरीके से चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है। इससे वह सुरक्षित तरीके से अपना गर्भपात करा सकेंगी। इसे लेकर समाज में जागरूकता लानी होगी। इस पर सभी लोगों को प्रयास करने की जरूरत है।
सुरक्षित गर्भपात को लेकर परिजनों को ध्यान देने की जरूरतः रितेश रंजन ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट -1971 के तहत 20 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त करने की कानूनी तौर पर इजाजत है। 1971 में बने इस कानून को लेकर हालांकि कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। इसे लेकर परिजनों को खास ध्यान देने की आवश्यकता है। बिचौलिये के संपर्क में नहीं पड़ना चाहिए। समस्या होने पर पास के सरकारी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में कानूनी तौर पर निःशुल्क गर्भपात की सुविधा है। विशेष परिस्थिति पैदा होने पर एंबुलेंस के जरिये महिला मरीज को अच्छी जगह भेजने की व्यवस्था मौजूद है। 12 सप्ताह तक एक प्रशिक्षित डॉक्टर और 13 से 20 सप्ताह के अंदर तक दो प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में सरकारी अस्पताल या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल में गर्भपात होनी चाहिए।
दूसरी तिमाही में गर्भपात कराने के लिए जाएं मायागंजः आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के रितेश रंजन ने कहा कि भारत में होने वाली मातृ मृत्यु में आठ प्रतिशत मृत्यु असुरक्षित गर्भपात के कारण होती है। यदि किसी महिला को माहवारी के दिन चढ़ गए हो या उससे अनचाहे गर्भ ठहरने की आशंका हो तो तत्काल एएनएम से संपर्क करना चाहिए। या फिर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि गर्भधारण की पुष्टि होती है और महिला गर्भ नहीं रखना चाहती है तो तत्काल गर्भपात का निर्णय लेना चाहिए। अगर गर्भ नौ सप्ताह तक का है तो गोलियों से भी गर्भपात हो सकता है। गर्भपात जितना जल्द कराया जाता है, उतना ही सरल और सुरक्षित रहता है। बौंसी रेफरल अस्पताल में सिर्फ पहली तिमाही में गर्भपात सेवा दी जाती है। दूसरी तिमाही में गर्भपात कराने के लिए भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल का रुख करना चाहिए। गर्भपात के साथ तत्काल गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग करना चाहिए। गर्भपात और गर्भधारण के बीच छह महीने का अंतराल होना जरूरी है।

परिवार नियोजन के क्षेत्र में बांका के स्वास्थ्यकर्मियों ने गाड़े झंडे

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-डॉक्टर, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं ने बढ़ाया जिले का मान
-जिले के कई स्वास्थ्यकर्मियों को तीन श्रेणी में दिया गया पुरस्कार
बांका, 16 मार्च-
परिवार नियोजन के क्षेत्र में बांका के स्वास्थ्यकर्मी पूरी मेहनत कर रहे हैं। इसका प्रमाण है पिछलों दिनों परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्रीय प्रबंध इकाई की ओर से आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह, जिसमें ढेरों पुरस्कार बांका के स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने नाम किए। परिवार नियोजन के तहत सबसे अधिक ऑपरेशन करने वालों में सीएचसी धोरैया के डॉ. एसएस दास प्रमंडल में दूसरे स्थाने पर रहे, जबकि तीसरे स्थान पर भी जिले के बौंसी रेफरल अस्पताल के डॉ. रामानुज कुमार सिंह रहे। इसी तरह से पुरुषों की नसबंदी करने में चांदन सीएचसी के डॉ. एके सिन्हा तीसरे और बौंसी रेफरल अस्पताल के रामानुज कुमार सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
इतना ही नहीं, रामानुज कुमार सिंह डिलीवरी के सात दिनों के अंदर सबसे अधिक परिवार नियोजन के तहत  ऑपरेशन करने वालों में भी तीसरे स्थान पर रहे। इसी कैटेगरी में शंभूगंज सीएचसी के डॉ. अजय कुमार शर्मा तीसरे स्थान पर रहे। गर्भपात के बाद पूरे प्रमंडल में सबसे अधिक ऑपरेशन करने के मामले में सीएचसी धोरैया के डॉ. एसएस दास सबसे आगे रहे। वहीं फुल्लीडुमर सीएचसी की डॉ. पूनम कुमारी इसी कैटेगरी में दूसरे स्थान पर रहीं।
एएनएम भी किसी से कम नहीं : ये तो हुई डॉक्टरों की बात। जिले की एएनएम भी किसी से कम नहीं हैं। परिवार नियोजन को लेकर बंध्याकरण में सहयोग करने में धोरैया सीएचसी की एएनएम शालिनी प्रिया अव्वल रही। वहीं कटोरिया रेफरल अस्पताल की उषा कुमारी इसी कैटेगरी में तीसरे स्थान पर रही। परिवार नियोजन को लेकर लोगों तक सुविधा पहुंचाने में बाराहाट पीएचसी की इंदु कुमारी अव्वल रही। परिवार नियोजन को लेकर बेहतर सेवा करने में धोरैया सीएचसी की पार्वती कुमारी अव्वल रही। आईयूसीडी सर्विस को लेकर भी धोरैया सीएचसी की एएनएम पार्वती कुमार पहले स्थान पर रही, जबकि दूसरे स्थान पर खरौंदा एपीएचसी की कल्पना कुमारी रही। परिवार नियोजन सामग्री के वितरण में बाराहाट प्रखंड के पंजवारा की सबिता कुमारी टॉपर रही।
आशा कार्यकर्ताओं ने भी बढ़ाया जिले का मानः महिलाओं को बंध्याकरण के लिए प्रेरित करने में सदर पीएचसी के तहत बैसा रामपुर आंगनबाड़ी केंद्र की कुमारी बीना मंडल को प्रथम पुरस्कार मिला तो बांका पीएचसी के ही तहत पलयार आंगनबाड़ी केंद्र की रीना झा दूसरे और सैदपुर की बीना देवी तीसरे स्थान पर रही। इसी तरह आईयूसीडी के लिए प्रेरित करने के लिए बाराहाट पीएचसी के लीलावरण की बीवी रोशन पहले स्थान पर रही, जबकि दूसरे स्थान पर बौंसी के हथिया की वंदना कुमारी रही। कटोरिया के खुटबरी की कविता कुमारी तीसरे स्थान पर रही। इसी तरह दो बच्चों के बीच सही अंतराल रखने के लिए प्रेरित करने के मामले में बाराहाट सीएचसी के तहत सबलपुर की नीतू देवी पहले स्थान पर रही तो बौंसी के गोरगमा की बेबी कुमारी तीसरे स्थान पर। दो बच्चों के बाद परिवार नियोजन के साधन अपनाने को लेकर लोगों को प्रेरित करने में बेलहर पीएचसी के बारा गांव की आशा बबिता कुमारी को तीसरा पुरस्कार मिला। इसके अलावा आशा प्रभावती देवी, अनिता देवी और प्यारी खातून को भी पुरस्कार दिया गया। आशा के क्षेत्रीय समन्वयक कुणाल कुमार कहते हैं कि परिवार नियोजन के क्षेत्र में बांका के डॉक्टर से लेकर एएनएम और आशा ने बेहतर कार्य किया है। बेहतर काम के साथ जब पुरस्कार मिलता है तो उत्साह और दोगुना हो जाता है। उम्मीद है ये लोग आगे और बेहतर काम करेंगे। साथ ही नए चैंपियन भी उभरेंगे।

नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम: संबंधित विभाग के साथ समन्वय बनाघ मासिक कार्य योजना के अनुसार करें कार्य : जिलाधिकारी 

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 ;हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्तर पर स्पुटम की जांच कराएं सुनिश्चित
: पिछले एक वर्ष में टीबी से हुई मौतों का डिटेल डेटा भी रखें तैयार
मुंगेर, 15 मार्च –
नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम (एनटीईपी) 2025 को सफल बनाने के लिए संबंधित विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर मासिक कार्य योजना के अनुसार कार्य करें। उक्त बातें मंगलवार को मुंगेर समाहणालय सभागार में  आयोजित डिस्ट्रिक्ट टीबी फोरम और डिस्ट्रिक्ट टीबी कोमोरबिलिटी कोऑर्डिनेशन मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कही। इस अवसर पर  टीबी से जुड़े सभी से हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्तर पर स्पुटम की जांच सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में टीबी की वजह से कितने लोगों मौतें हुई ,इसका भी डिटेल डेटा तैयार करें।  इसके साथ ही शिक्षा विभाग, आईसीडीएस सहित अन्य विभाग जिसके साथ मिलकर टीबी पर काम करना है उनके साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत मासिक कार्य योजना बनाएं और उसके अनुसार काम करें। इस अवसर पर प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनन्द शंकर शरण सिंह, जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के.रंजन, जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. ध्रुव कुमार शाह, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन, डीपीएम नसीम रजि सहित जिला और प्रखण्ड स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और डेवलपमेन्ट पार्टनर डब्ल्यूएचओ, केयर इंडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
इससे पहले जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. ध्रुव कुमार साह ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम 2025 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1962 में नेशनल ट्यूबरक्लोसिस कंट्रोल प्रोग्राम ( एनटीसीपी) और 1993 में  रिवाइज्ड नेशनल ट्यूबरक्लोसिस कंट्रोल प्रोग्राम (आरएनटीसीपी) पायलट प्रोजेक्ट और 1997 में डॉट्स स्ट्रेटजी के तहत शुरू हुआ। इसके बाद 2014 में टीबी फ्री इंडिया कैम्पेन के तहत नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम 2025 शुरू किया गया। इसको सफल बनाने के लिए देश भर में “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” कार्यक्रम चल रहा है।
उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों के पोषण के लिए भारत सरकार के द्वारा निक्षय पोषण योजना के तहत जब तक टीबी मरीज का इलाज चलता है तब तक 500 रुपये प्रति महीने के अनुसार राशि दी जाती है। उन्होंने बताया कि जिला भर में सन 2021 में टीबी नोटिफाइड मरीजों की कुल संख्या 2977 है।
उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों की सहायता के लिए 1800-11-6666 एक टोल फ्री नंबर जारी किया गया है। जो सुबह 7 बजे से रात के 11 बजे तक काम करता है।
उन्होंने बताया कि नेशनल प्रोग्राम फ़ॉर कैंसर, डायबिटीज, कार्डियो वैस्कुलर डिजीज, और स्ट्रोक्स जिसका स्लोगन है हेल्थ इन योर हैंड्स, के साथ नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम, जिसका स्लोगन है टीबी हारेगा और देश जीतेगा और नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको ) को मिलाकर डिस्ट्रिक्ट टीबी  कोमोरबिलिटी कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाई गई है। इस कमेटी के चेयरपर्सन मुंगेर के जिलाधिकारी हैं।

बेहतर कार्य करने के लिए आईसीडीएस के जिला समन्वयक को किया गया सम्मानित 

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– कलेक्ट्रेट परिसर में सम्मान समारोह का आयोजन ,जिलाधिकारी के हाथों किया गया सम्मानित
– पोषण, बाल-विवाह, भ्रूण हत्या, महिला सशक्तीकरण समेत विभाग से संबंधित कार्यों में बेहतर कार्य को   सम्मानित
खगड़िया, 15 मार्च-
अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर और उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिले के तमाम पदाधिकारियों और कर्मियों को लगातार सम्मानित किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार की शाम कलेक्ट्रेट परिसर में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें आईसीडीएस के जिला समन्वयक (डीसी) अंबुज कुमार को बेहतर कार्य करने के लिए जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष एवं डीडीसी अभिलाषा कुमारी शर्मा के हाथों संयुक्त रूप से प्रशस्ति-पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया। समारोह में  पदाधिकारियों द्वारा जिला समन्वयक को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की गई। इधर, आईसीडीएस की डीपीओ सुनीता कुमारी, सीडीपीओ कामिनी कुमारी, विनीता कुमारी, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, डीटीओ-ऑन चंदन कुमार आदि ने इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और उनके उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की है।
– विभाग से संबंधित कार्यों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए किया गया सम्मानित :
आईसीडीएस की डीपीओ सुनीता कुमारी ने बताया, जिला समन्वयक अपने जिम्मेदारी के प्रति हमेशा संकल्पित रहते और सकारात्मक परिणाम की उम्मीद के साथ हमेशा अपनी तमाम जिम्मेदारियां का पूरी मुस्तैदी के साथ निर्वहन करते रहें हैं। इस दौरान तमाम चुनौतियों का भी इन्हें सामना करना पड़ा। किन्तु, हमेशा चुनौती को अवसर के रूप में लेकर अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया। इन्हें पोषण, बाल-विवाह, भ्रूण हत्या, महिला सशक्तीकरण, कोविड समेत आईसीडीएस से संबंधित अन्य कार्यों में बेहतर और उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।
– कोविड के दौरान भी जिला समन्वयक का रहा सराहनीय कार्य :
जिला समन्वयक अंबुज कुमार कोविड के दौरान भी अपनी जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटे। कोविड के मुश्किल भरे दौर में जहाँ पूरा समाज तमाम परेशानियों से गुजर रहा था व लोग अपने से भी दूरी बनाने लगे थे। तब ऐसी विपरीत और विषम परिस्थितियों में भी  जिला समन्वयक अपनी जिम्मेदारी पर डटे रहे। इस दौरान कोविड जैसी घातक महामारी से बचाव के लिए अपने विभाग के कर्मियों के साथ-साथ आमलोगों को भी जागरूक करते रहे। इस दौरान लोगों को कोविड जाँच, वैक्सीनेशन के साथ-साथ गाइडलाइन का पालन करने के लिए जागरूक और प्रेरित करते रहे।

नाथनगर में एफपीएलएमआईएस का दिया गया प्रशिक्षण

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-परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री ऑनलाइन लेने के बताए तरीके
-एएनएम ऑनलाइन सामग्री मंगवाकर क्षेत्र के लोगों में उसे बांटेंगी
भागलपुर, 15 मार्च-
नाथनगर स्थित ट्रायसेम भवन में मंगलवार को क्षेत्र की एएनएम को फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक इनफॉरमेशन सिस्टम (एफपीएलएमआईएस) का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक आलोक कुमार और धर्मेंद्र कुमार ने दिया। प्रशिक्षण के दौरान सभी लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित सामग्रियों को ऑनलाइन कैसे प्राप्त करना है, इसकी जानकारी दी गई। इंडेंट करने से लेकर रिसीव करने के तरीके प्रशिक्षण के दौरान बताए गए। कंडोम, कॉपर टी, अंतरा आदि सामग्री को ऑनलाइन प्राप्त करने की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी गई। सामग्री प्राप्त कर क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार से लेकर वितरण करने तक के बारे में प्रशिक्षण के दौरान बताया गया। मौके पर नाथनगर रेफरल अस्पताल की प्रभारी डॉ. अनुपमा सिन्हा, बीएम मनीषा समेत कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। प्रशिक्षण ले रही एएनएम को सभी बारीकी को समझ कर क्षेत्र में बेहतर तरीके से काम करने के लिए कहा।
परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार भी करेंगी एएनएमः प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के बाद एएनएम अब परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन मंगवाकर उसे क्षेत्र में वितरण करने का काम करेंगी। साथ ही परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के इंडेंट से लेकर प्राप्त करने के तरीके और इसका क्षेत्र में किस तरह से प्रचार-प्रसार करना है, इसकी जानकारी वे अपने सहयोगी को भी देंगे। सामग्री के वितरण के दौरान इसे लेकर लोगों को जागरूक करने का काम भी एएनएम करेंगी। लोगों को समझाएंगी कि इसके इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
तीन तरीके से प्राप्त कर सकेंगे परिवार नियोजन की सामग्रीः प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि परिवार नियोजन सामग्री को ऑनलाइन तीन तरीके से मंगाया जा सकता है। पहला मोबाइल एप के जरिये, दूसरा मोबाइल से मैसेज कर और तीसरा कंप्यूटर के जरिये ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। एएनएम इसे मोबाइल एप और मैसेज के जरिये मंगा सकती हैं, जबकि स्टोरकीपर मैसेज और कंप्यूटर से ऑनलाइन इंडेंट कर भी मंगवा सकते हैं। पहले क्षेत्र के लोगों की जरूरतों के मुताबिक इंडेंट करेंगे। सामग्री आ जाने के बाद फिर उसका क्षेत्र के लोगों के बीच वितरण करेंगी।
परिवार नियोजन पर किया जा रहा फोकसः नाथनगर रेफरल अस्पताल की प्रभारी डॉ. अनुपमा सहाय ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन को लेकर लगातार फोकस किया जा रहा है। इसे लेकर परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के वितरण से लेकर समय-समय पर कैंप और मेला भी लगाया जाता है। जहां पर कि लोगों को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में बताया जाता है। साथ ही किस तरह से बच्चे की प्लानिंग करती है, इसकी जानकारी दी जाती है। दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल और पहला बच्चा 20 साल से पहले नहीं हो, इस बारे में बताया जाता है।

लखीसराय जिले में दो दिवसीय कोविड मेगा ड्राइव शुरू, विशेष वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर लाभार्थियों को दी गई वैक्सीन

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– 199 सेशन साइटों पर आयोजित हुआ विशेष वैक्सीनेशन शिविर, वंचितों को चिह्नित कर सुविधाजनक तरीके से दी गई वैक्सीन
– प्रीकाॅशनरी और 15 से 18 आयु वर्ग के लाभार्थियों को प्राथमिकता के तौर पर लगाया गया सुरक्षा का टीका
लखीसराय, 14 मार्च।
जिले में शत-प्रतिशत लोगों का कोविड वैक्सीनेशन जल्द से जल्द सुनिश्चित करने को लेकर लगातार वैक्सीनेशन अभियान चलाकर कर लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। जिसका सार्थक परिणाम भी दिखने लगा है। वहीं, अभियान को और तेज गति देने के लिए सोमवार को जिलेभर में दो दिवसीय कोविड मेगा ड्राइव शुभारंभ हुआ। जिसके माध्यम से शिविर के पहले दिन जिले के सभी प्रखंड में विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर वैक्सीन से वंचित लोगों को वैक्सीनेट किया गया। वहीं, इस शिविर का समापन मंगलवार को होगा। शिविर के सफल संचालन के लिए सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती समेत अन्य पदाधिकारी विभिन्न सेशन साइटों का मॉनिटरिंग करते दिखे।
– सभी लाभार्थी प्राथमिकता के आधार पर कराएं वैक्सीनेशन और सुरक्षित माहौल में मनाएं त्यौहार :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, दो दिन बाद होली होने वाला है। जिसको लेकर देश के विभिन्न राज्यों में रहकर मजदूरी करने वाले कामगारों का भी अपना घर आने का सिलसिला शुरू हो चुका है । हर दिन बडी संख्या में लोग आ भी रहे हैं। इसलिए, मैं खासकर ऐसे लोगों से अपील करता हूँ कि अगर आप प्रदेश में ही वैक्सीन की पहली या दूसरी डोज ले चुके हैं और दूसरा या प्रीकाॅशनरी डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरी कर चुके हैं तो घर आने के साथ अपने नजदीकी वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं। साथ ही मैं ऐसे लाभार्थियों से कहना चाहूँगा कि जो अबतक किसी भी कारणवश वैक्सीन की कोई डोज नहीं ले पाएं हैं, यानी पूरी तरह वैक्सीन से वंचित हैं तो वह भी निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और सुरक्षित माहौल में त्यौहार मनाएं। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में कुल 199 सेशन साइटों पर वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन किया गया। सभी जगह सभी लाभार्थियों को तैनात मेडिकल टीम द्वारा सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी गई।
– प्रीकाॅशनरी और 15 से 18 आयु वर्ग के लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर दी गई वैक्सीन :
जिले के सभी वैक्सीनेशन सेंटर पर तीनों पहला, दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज के लाभार्थियों को वैक्सीनेट करने के लिए पर्याप्त वैक्सीन वाइल की व्यवस्था की गई थी। ताकि एक भी लाभार्थियों को बिना वैक्सीनेशन कराए लौटने की स्थिति उत्पन्न नहीं हो और सभी लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से वैक्सीनेशन करा सकें। इस दौरान प्रीकाॅशनरी और 15 से 18 आयु वर्ग के लाभार्थियों पर विशेष फोकस करते हुए प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन दी गई। इसके अलावा जो लोग वैक्सीनेशन शिविर स्थल तक आने में असमर्थ थे, उन्हें होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। ताकि ऐसी लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

बिहार कोविड पोर्टल पर नाम दर्ज नहीं रहने पर भी कोरोना से मृत लोगों के आश्रितों को मिलेगी अनुदान राशि 

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– स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने पत्र जारी कर सभी आयुक्त, डीएम और सिविल सर्जन को दिए निर्देश
– अनुदान राशि प्राप्त करने के लिए मृतक के आश्रितों को पर्याप्त साक्ष्य के साथ आवेदन कर करना होगा दावा
मुंगेर, 14 मार्च-
कोरोना वायरस के संक्रमण से मृत लोगों के आश्रितों को मृत्यु के उपरांत मिलने वाली अनुग्रह अनुदान राशि मिलने में अब कोई बाधा नहीं होगी। जिनका तकनीकी या फिर किसी अन्य कारणों से बिहार कोविड पोर्टल पर नाम दर्ज नहीं हो पाया हो उनके परिजनों को भी अनुदान राशि प्राप्त करने में कोई परेशानी नहीं होगी। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पत्र जारी कर राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और सिविल सर्जन सहित अन्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसके अनुसार यदि किसी कोरोना से मृत हुए व्यक्ति का नाम किसी कारणवश बिहार कोविड पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाया हो किन्तु, मृतक के आश्रितों के पास पर्याप्त साक्ष्य है तो ऐसे लाभार्थियों को अविलंब अनुग्रह अनुदान योजना की राशि उपलब्ध करायी जाएगी।
– सभी लाभार्थियों को सुविधा जनक तरीके से मिलेगी राशि :
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि जिन मृतक का किसी भी कारण बिहार कोविड पोर्टल पर नाम नहीं दर्ज हो पाया है, उनके भी आश्रितों को राशि उपलब्ध कराने का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ताकि ऐसे सभी लाभार्थियों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सुविधाजनक तरीके से अनुग्रह अनुदान राशि मिल सके। यह लाभ कोविड की तीनों लहरों में मृत हुए व्यक्तियों के आश्रितों को दी जाएगी।
– अनुग्रह अनुदान राशि के रूप में मिलते हैं साढ़े चार लाख रुपये :
उन्होंने बताया कि कोरोना से मृत हुए लोगों के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान योजना के तहत साढ़े चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है। बिहार राज्य में कोरोना संक्रमण से मृत व्यक्तियों के निकटतम आश्रितों के अनुग्रह अनुदान राशि संबंधी दावा या आवेदनों के वैसे सभी मामले, जिनमें यह निश्चित हो कि व्यक्ति की मृत्यु कोरोना संक्रमण से हुई है और इसका पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध है भले ही किसी कारणवश पोर्टल पर मृतक का नाम दर्ज नहीं हो पाया हो, उनकी सम्यक समीक्षा कर सूची राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार को अविलंब उपलब्ध करायी जानी है। ताकि ऐसे मामलों की जल्द से जल्द अनुदान राशि के भुगतान संबंधी कार्रवाई की जा सके।