पटना से आई स्टेट टीम ने विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का किया निरीक्षण, बच्चों को उचित पोषण की दी गई जानकारी

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– जिले के मानसी और गोगरी प्रखंड में संचालित विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का किया गया निरीक्षण
– आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वालों से बच्चों से की बातचीत और कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर दी गई जरूरी सलाह
खगड़िया, 14 मार्च-
सोमवार को केयर इंडिया के पोषण स्टेट सलाहकार प्रभाकर सिन्हा के नेतृत्व में स्टेट टीम खगड़िया पहुँची। जहाँ स्थानीय आईसीडीएस और केयर के पदाधिकारियों के साथ जिले के मानसी और गोगरी प्रखंड अंतर्गत विभिन्न पंचायतों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वाले बच्चों से बातचीत कर पोषण से संबंधित आवश्यक जानकारी ली। जिसके पश्चात कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर बच्चों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्र की सेविकाओं को भी जरूरी सलाह दी गई। साथ ही इस दौरान कुपोषण के कारणों को भी जाना गया। वहीं, पोषण के स्टेट सलाहकार ने बताया, कुपोषण मुक्त भारत निर्माण को लेकर शासन-प्रशासन गंभीर है। इसको लेकर सरकार द्वारा तमाम योजनाओं चलाई जा रही हैं। जिसके माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों को पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
– जिले में लगातार तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को किया जा रहा है जागरूक :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर नियमित तौर पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वाले बच्चों को पोषण से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जाती है। साथ ही बच्चों को उचित पोषण मिले, इसके लिए केंद्र पर पढ़ने वाले बच्चों को दी जाने वाली पोषाहार में पौष्टिक आहार की मात्रा अधिक हो, इस बात हमेशा ख्याल रखा जाता है। इसके अलावा समय-समय पर व्यापक पैमाने पर तमाम कार्यक्रमों का आयोजन कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को उचित पोषण के प्रति जागरूक किया जाता है।
– बच्चों से लेकर हर वर्ग के लोगों को दी जाती है उचित पोषण की जानकारी :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, कुपोषण की समस्या को पूरी तरह जड़ से मिटाने और सुपोषित समाज का निर्माण को लेकर बच्चों के साथ-साथ हर आयु वर्ग के लोगों को उचित पोषण, रहन-सहन में बदलाव समेत अन्य जानकारियाँ दी जाती हैं। जिसमें यह बताया जाता है कि कैसे बच्चे का सर्वागीण शारीरिक और मानसिक विकास होगा, युवा और बुजुर्ग कैसे स्वस्थ रहेंगे। इसके अलावा नवजात की माँ बच्चे को जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं एवं इसके बाद ऊपरी आहार देने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी जा रही है। साथ ही बच्चे का सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास एवं धातृ महिलाओं के स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारी भी दी जाती है।

पुरस्कार पाने के बाद आत्मसंतुष्ट नहीं हों, कड़ी मेहनत जारी रखें

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-अपनी सफलता का मूलमंत्र दूसरों को भी शेयर करें, ताकि वह भी अच्छा कर सके
-परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर करने वाले स्वास्थ्यर्मियों को दिया गया पुरस्कार
भागलपुर, 14 मार्च-
परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को सोमवार को पुरस्कृत किया गया। इसे लेकर भीखनपुर स्थित एक होटल में क्षेत्रीय प्रबंधन इकाई की ओर से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें भागलपुर और बांका जिले के स्वास्थ्यकर्मियों ने शिकरत की। कार्यक्रम का उद्घाटन क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवा के निदेशक डॉ. अजय कुमार सिंह और सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने किया। उद्घाटन के बाद कार्यक्रम में आए स्वास्थ्यकर्मियों को संबोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि आपलोगों ने काफी बेहतर काम किया है। इसी का परिणाम है कि आपलोगों को पुरस्कार दिया जा रहा है। लेकिन इस उत्साह को बरकरार रखने की जरूरत है। पुरस्कार पाकर संतुष्ट नहीं होना है, बल्कि क्षेत्र में जाकर और बेहतर कार्य करना है। खासकर नसबंदी के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने की जरूरत है। क्षेत्र के लोगों को यह सुनिश्चित कराएं कि दो बच्चे के बाद ही लोग आपरेशन करा लें। तीन-चार बच्चे के बाद ऑपरेशन कराने की नौबत नहीं आए।
वहीं सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने कहा कि पुरस्कार पाने वाले स्वास्थ्यकर्मी अपने सहयोगियों को भी प्रोत्साहित करें। उन्हें अपनी सफलता का मूलमंत्र बताएं। ऐसा करने से स्वास्थ्य सेवा और बेहतर होगी। क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों तक सुविधाएं पहुंचेंगी। इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। इसके बाद परिवार नियोजन के विकल्प अधिक से अधिक लोग अपनाएंगे।
रंगरा के डॉ. पिंकेश कुमार को प्रथम पुरस्कारः महिलाओं की सबसे अधिक नसबंदी करने में रंगरा पीएचसी के डॉ. पिंकेश कुमार को प्रथम पुरस्कार मिला तो पुरुष नसबंदी में नारायणपुर पीएचसी के प्रभारी रहे डॉ. विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी को प्रथम पुरस्कार दिया गया। इसी तरह सीएचसी धोरैया की एएनएम शालिनी प्रिया को परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। बांका पीएचसी के बैसा रामपुर की आशा कुमारी बीना मंडल को परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए प्रथम पुरस्कार दिया गया। पुरुषों को नसबंदी के लिए मोटिवेट करने के लिए नारायणपुर पीएचसी के गनौल गांव की साधना कुमारी को प्रथम पुरस्कार मिला। भागलपुर के सच्चिदानंदनगर यूपीएचसी को बेहतर सेवा के लिए पुरस्कार दिया गया। इसी तरह से कई वर्ग में लोगों को पुरस्कार दिया गया। मौके पर डीपीएम फैजान आलम अशर्फी, क्षेत्रीय लेखा प्रबंधक विजय कुमार राम, आशा के क्षेत्रीय समन्वयक कुणाल कुमार, केयर इंडिया की डॉ. सुपर्णा टाट, डॉ. राजेश मिश्रा, जितेंद्र कुमार सिंह, तौसीफ कमर और कन्हैया कुमार मौजूद थे।

पारा मेडिकल संस्थान में एएनएम के छह दिवसीय प्रशिक्षण का समापन

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-प्रशिक्षण के दौरान जिले की एएनएम को जिम्मेदारियों से कराया गया अवगत
-सभी प्रखंडों की दो-दो एएनएम ने लिया प्रशिक्षण, नए एएनएम को देंगी जानकारी
बांका, 14 मार्च-
पारा मेडिकल संस्थान में छह दिनों तक चले एएनएम के प्रशिक्षण का सोमवार को समापन हो गया। छह दिनों तक मास्टर ट्रेनरों ने सभी एएनएम को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी क्या भूमिका है, इसके बारे में उन्हें बताया गया। क्षेत्र में किस तरह काम करना है और अस्पताल में किस तरह की भूमिका रहती है, इसके बारे में जानकारी दी गई। माना जाता है कि स्वास्थ्य सेवा में नर्सों की भूमिका 30 प्रतिशत तक होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एएनएम को व्यवस्था, नीतियों, प्रोटोकॉल और तकनीकों से छह दिनों तक अवगत कराया गया। अब ये प्रशिक्षित एएनएम अपने क्षेत्र की नए एएनएम या फिर जिन्हें इसकी जानकारी नहीं है, उन्हें प्रशिक्षित करेंगी। प्रशिक्षण देने का काम मास्टर ट्रेनर रिंकु कुमारी, वंदना कुमारी और श्रीशैल गेनीजर ने किया। इसमें केयर इंडिया की मेरी जूली, सुषमा और राहिल सुमिता ने भी सहयोग किया।
प्रशिक्षण के आखिरी दिन एएनएम को आरोग्य दिवस, स्टॉक पंजी, टीकाकरण, परिवार नियोजन, लॉकबुक और चेकलिस्ट की जानकारी दी गई। इस तरह के काम को कैसे करना है, इसका प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनरों ने दिया। इससे पहले पांच दिनों तक प्रशिक्षण के दौरान कही गई बातों को दोहराया गया। पहले दिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ओवरव्यू, एएनएम की भूमिका और जिम्मेदारी, नर्सों की नीति संहिता, अस्पताल का दौरा, संगठनात्मक चार्ट, एसबीएआर का उपयोग करते हुए संचार और सामान्य सेवा नियम, दूसरे दिन क्लीनिकल पोस्टिंग, प्रजनन व बाल स्वास्थ्य रजिस्टर, मातृ एवं शिशु सुरक्षा, घटना की जानकारी, प्रलेखन, हाथ धोना और व्यक्तिगत रक्षा उपकरण और रोगाणुनाशन व स्टरलाइजेशन, तीसरे दिन नवजात शिशु का पुनर्जीविकरण, नवजात का पुनर्जीविकरण और जैव चिकित्सकीय अपशिष्ठ प्रबंधन, चौथे दिन सामान्य प्रसव कैसे कराना है, मरीज को शिफ्ट करना, हीमोग्लोबिन की जांच, पेशाब में शुगर और एल्युमिन की जांच, इंजेक्शन लगाने, पांचवें दिन सलाह देने की तकनीक, ऑक्सीजन देना, यूरिन कथेटर लगाना, बेसिक लाइफ सपोर्ट, घाव की मरहम-पट्टी, नवजात बच्चों में खतरे के लक्षण और गर्भवती महिलाओं में खतरे के लक्षण की जानकारी दी गई थी, जिसे दोहराया गया।
सभी प्रखंडों से दो-दो एएनएम हैं शामिलः प्रशिक्षण में मौजूद रहे केयर इंडिया के डीटीएल तौसीफ कमर ने बताया कि एएनएम के छह दिवसीय प्रशिक्षण का सोमवार को समापन हो गया। उम्मीद है कि प्रशिक्षण में बताई गई सलाह को एएनएम क्षेत्र में लागू करेंगी, जिससे स्वास्थ्य सेवा बेहतर होगी। दरअसल, स्वास्थ्य सेवा में एएनएम की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उन्हें उनकी भूमिका के बारे में अवगत कराना बहुत ही आवश्यक है। इसी को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में सभी प्रखंडों से दो-दो एएनएम शामिल हुईं। ये लोग प्रशिक्षण लेकर अपने क्षेत्र की नई एएनएम या फिर जिन्हें इन बातों को जानकारी नहीं है, उन्हें यह साझा करेंगी। इसके बाद क्षेत्र में सेवा के दौरान एएनएम इन बातों का ध्यान रखेंगी। प्रशिक्षण के दौरान केयर इंडिया के एफपीसी कन्हैया कुमार भी मौजूद रहे।

मातृ मृत्यु अनुपात में 19 अंकों की हुई कमी

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– स्वास्थ्य प्रणाली में अप्रत्याशित सुधार एवं आधारभूत संरचनाओं का विकास बना प्रभावी
-संस्थागत प्रसव का बढ़ावा एवं आधुनिक लेबर रूम का निर्माण सहित चिकित्सकों एवं नर्सों की नियुक्ति तथा प्रशिक्षण बना महत्वपूर्ण कारक
बाका:  बिहार के मातृ मृत्यु अनुपात में 19 अंकों की कमी आयी है। सैंपल रेस्जिस्ट्रेशन सर्वे द्वारा जारी रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है।  वर्ष 2016-18 में मातृ मृत्यु अनुपात 149 थी, जो 2017-19 में घटकर 130 हुई है. इस तरह से मातृ मृत्यु अनुपात में 19 अंकों की कमी के साथ 12.8 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। इससे 3सालों में लगभग 1500 माताओं की संभावित मृत्यु को रोका जा सका। किसी भी राज्य के स्वास्थ्य प्रणाली की सुदृढ़ता को मातृ मृत्यु अनुपात प्रमुखता से इंगित करता है।
स्वास्थ्य प्रणाली हुई सुदृढ़:
   स्वास्थ्य प्रणाली में अप्रत्याशित सुधार, आधारभूत संरचनाओं के विकास, आधुनिक लेबर रूम का निर्माण सहित योग्य चिकित्सकों एवं नर्सों की नियुक्ति एवं प्रशिक्षण से मातृ मृत्यु अनुपात के आंकड़ों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है। विशेषतौर पर बिहार में मातृ मृत्यु अनुपात में कमी लाने में स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी तरीके से क्रियान्वित होना भी  प्रमुख कारण बना है. मातृ मृत्यु अनुपात का घटना राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में  एक सकारात्मक पहल है.
मातृ मृत्यु अनुपात में लगातार हो रही है कमी:
 एसआरएस के मुताबिक वर्ष  2016-18 में भी 16 अंकों की कमी दर्ज हुई थी।  इसके बाद 2017-19 में फिर से मातृ मृत्यु अनुपात में 19 अंकों की कमी आयी।  इस तरह इन सालों में 35 अंकों की कमी दर्ज हुई है। मातृ मृत्यु अनुपात में आई कमी जन समुदाय में इसके प्रति जागरूकता को भी प्रदर्शित करता है।
संस्थागत प्रसव एवं उच्च जोखिम प्रसव प्रबंधन कारगर:
   बिहार में मातृ मृत्यु अनुपात में आयी कमी स्वास्थ्य महकमा के गंभीर प्रयास की ओर ईशारा करते हैं। मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने में सबसे बड़ा महत्वपूर्ण कारण संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित किया जाना है। वहीं उच्च जोखिम प्रसव के प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व स्वास्थ्य अभियान कार्यक्रम के तहत गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित किया जाना भी एक अति प्रभावी कदम साबित हुआ।  दूसरी तरफ गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल लाने व ले जाने के लिए  एम्बुलेंस की बेहतर सुविधा मुहैया कराना भी इसमें शामिल है। मातृ मृत्यु अनुपात में कमी लाने में प्रसव कक्षों एवं ऑपेरशन थिएटर का सुदृढ़ीकरण भी अहम साबित हुआ। इसके लिए अस्पतालों को निरंतर रूप से लक्ष्य सर्टिफिकेशन किया जा रहा है।
जच्चा-बच्चा को सुरक्षित रखना उद्देश्य:
 एसीएमओ डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि सरकार का मकसद है कि स्वास्थ्य प्रणाली को इतना सुदृढ़ किया जाए कि किसी भी माता एवं बच्चे को अपनी जान नहीं गँवानी पड़े। इस दिशा में सरकार न सिर्फ गंभीर है। बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की दिशा में निरंतर कार्य भी कर रही है।

सघन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम:  छूटे हुए बच्चों और गर्भवती महिलाओं के शत- प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य करें :  जिलाधिकारी 

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– टेलीमेडिसीन सर्विस के दौरान हब और स्पोक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का भी दिया निर्देश
– सभी स्वास्थ्य सूचकांक में डिस्ट्रिक्ट रैंकिंग को बेहतर बनाएं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और  कर्मचारी
मुंगेर, 11 मार्च-
जिलाधिकारी नवीन कुमार की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक  हुई। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने 7 मार्च से शुरू हुए सघन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम के तहत कोरोना काल में नियमित टीकाकरण में छूटे हुए बच्चों व गर्भवती महिलाओं के शत- प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैठक में मुंगेर के प्रभारी सिविल सर्जन और एसीएमओ डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह, जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी उपस्थित थे।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबन्धक नसीम रजि ने बताया कि बैठक में जिलाधिकारी ने टेलीमेडिसीन सर्विस के तहत सभी हब और स्पोक को सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांक में डिस्ट्रिक्ट रैंकिंग की चर्चा करते हुए जिला में कार्यरत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांक में जिला की रैंकिंग में सुधार को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
तीन महीनों में तीन चरणों में चलेगा सघन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई  बैठक में मुख्य रूप से विगत 7 मार्च से जिला के 517 केंद्र पर शुरू हुए सघन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम की शत-प्रतिशत सफ़लता को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने बताया कि तीन महीनों मार्च, अप्रैल और मई महीने में तीन चरणों 7 से 13 मार्च, 4 से 10 अप्रैल और 2 से 8 मई तक सघन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम चलेगा। इस अभियान की शुरुआत सोमवार 7 मार्च से हो गई है। इस दौरान कोरोना काल में नियमित टीकाकरण से वंचित 5064 बच्चों और  918 गर्भवती महिलाओं को टीकाकृत किया जाएगा। इसके लिए जिला भर में 517 टीकाकरण स्थल बनाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि सघन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम के दौरान टीकाकरण के शत प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करने में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ अन्य विभाग जैसे शिक्षा, समेकित बाल विकास निदेशालय, जीविका सहित अन्य सहयोगी संस्था भी मदद कर रही है।

शत-प्रतिशत कोविड वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर चौथम में बैठक

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– पिरामल स्वास्थ्य के प्रतिनिधियों ने प्रखंड में बीडीओ और सीएचसी में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की अध्यक्षता में की बैठक
–  बैठक में जनप्रतिनिधि एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मी हुए शामिल
खगड़िया, 11 मार्च-
जिले के चौथम प्रखंड मुख्यालय और सीएचसी परिसर में जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का कोविड वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक पिरामल स्वास्थ्य संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा प्रखंड मुख्यालय में बीडीओ उषा कुमारी की अध्यक्षता में प्रखंड के रोहियार पंचायत के पंचायतीराज के जनप्रतिनिधियों के साथ की गई। जिसमें उक्त पंचायत के मुखिया भुजंगी यादव सहित वार्ड सदस्य एवं अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सीएचसी में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ अनिल कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। जिसमें सीएचसी के चिकित्सक, हेल्थ वर्कर समेत अन्य पदाधिकारी व कर्मी शामिल हुए। दोनों जगहों पर आयोजित बैठक का संचालन पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल प्रफुल्ल झा ने की। बैठक के दौरान जिले में चल रहे कोविड वैक्सीनेशन अभियान पर विस्तृत चर्चा की गई। जिसमें अभियान को और तेज गति देने के लिए एक-एक व्यक्ति तक पहुँच कर वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित करने पर बल दिया गया।
– शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जनप्रतिनिधियों का सहयोग जरूरी :
बैठक के दौरान बीडीओ उषा कुमारी ने कहा, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर प्रखंड में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। किन्तु, इसे सार्थक रूप देने के लिए प्रखंड के सभी जनप्रतिनिधियों का सहयोग जरूरी है। इसलिए, मैं तमाम जनप्रतिनिधियों से अपील करती हूँ कि आपलोग भी अपने स्तर से लोगों को जागरूक कर वैक्सीनेशन कराने के लिए प्रेरित करें और वैक्सीनेशन टीम का सहयोग करें। तभी यह मिशन सफल होगा और सभी लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित होंगे।
– अभियान चलाकर एक-एक व्यक्ति को किया जाएगा जागरूक :
पिरामल स्वास्थ्य संस्था के जिला कार्यक्रम समन्यवक (डीपीएल) प्रफुल्ल झा ने बताया, बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अभियान चलाकर एक व्यक्ति तक पहुँच कर वैक्सीनेशन कराने के लिए जागरूक किया जाएगा। बैठक में मौजूद सभी लोगों ने भी अपने-अपने स्तर से लोगों को जागरूक करने की बात कही। साथ ही गणमान्यों ने अभियान में भी हरसंभव अपनी भागीदारी देने की बात कही। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।
– इंद्रधनुष अभियान पर भी दिया गया बल :
चौथम सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ अनिल कुमार ने बताया, बैठक में कोविड वैक्सीनेशन के अलावा प्रखंड में चल रहे इंद्रधनुष अभियान के तहत विशेष नियमित टीकाकरण शिविर पर भी बल दिया गया। जिसमें नियमित टीकाकरण के लिए लोगों को जागरूक करने की बात कही गई। साथ ही आरोग्य दिवस के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर होने वाली तमाम गतिविधियों पर भी चर्चा की गई।
– युवाओं के वैक्सीनेशन पर भी दिया गया बल :
बैठक के दौरान जिले में  15 से 18 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी युवाओं के वैक्सीनेशन अभियान को भी गति देने पर बल दिया गया। जिसके दौरान मौजूद गणमान्यों से अपील की गयी कि सभी लोग अपने-अपने बच्चे को वैक्सीनेशन से होने वाले फायदे की जानकारी दें और ये भी बताएं कि वैक्सीनेशन पूरी तरह सुरक्षित और काफी प्रभावी है। इसलिए, इस घातक महामारी से बचाव के लिए हर व्यक्ति को वैक्सीनेशन कराने की जरूरत है। साथ ही उन्हें वैक्सीन लेने के लिए प्रेरित भी करें। इसके अलावा पहला, दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज पर भी चर्चा की गई। जिसमें बताया गया कि जो लाभार्थी सेकेंड डोज लेने के बाद 09 माह की समयावधि को पूरी कर चुके हैं, उन्हें प्रीकाॅशनरी यानी बूस्टर डोज भी दी जा रही है। ऐसे लोगों को भी बूस्टर डोज लेने के लिए जागरूक करें। साथ ही जिस एरिया के लोग वैक्सीन से वंचित हैं, उस एरिया में शिविर आयोजित कर वंचितों को वैक्सीनेट करने की भी बात कही गई। जिसमें सभी गणमान्यों ने हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन दिए।

एएनएम को जिम्मेदारियों से कराया जा रहा अवगत

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-पारा मेडिकल संस्थान में एएनएम को दिया जा रहा प्रशिक्षण
-प्रशिक्षित एएनएम क्षेत्र में नए एएनएम को देंगी जानकारी
बांका, 11 मार्च-
पारा मेडिकल संस्थान में एएनएम का छह दिवसीय प्रशिक्षण चल रहा है। शुक्रवार को प्रशिक्षण का तीसरा दिन था। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें एएनएम के कार्यों के बारे में बताया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवा में उनकी भूमिका क्या है और उसे कैसे लागू करना है, इस बारे में बताया जा रहा है। दरअसल, स्वास्थ्य सेवा में नर्सों की भूमिका 30 प्रतिशत तक होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एएनएम को व्यवस्था, नीतियों, प्रोटोकॉल और तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है। प्रशिक्षण देने का काम मास्टर ट्रेनर रिंकु कुमारी, वंदना कुमारी और श्रीशैल गेनीजर कर रही हैं। इसमें केयर इंडिया की मेरी जूली, सुषमा और राहिल सुमिता भी सहयोग कर रही हैं।
तीसरे दिन, प्रशिक्षण से पहले सभी लोगों को पहले दो दिन तक दिए गए प्रशिक्षण की पुनरावृत्ति की गई। इसमें पहले दिन बताए गए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ओवरव्यू, एएनएम की भूमिका और जिम्मेदारी, नर्सों की नीति संहिता, अस्पताल का दौरा, संगठानात्मक चार्ट, एसबीएआर का उपयोग करते हुए संचार और सामान्य सेवा नियम के बारे में बताया गया था, जिसे फिर से दोहराया गया। इसी तरह दूसरे दिन क्लीनिकल पोस्टिंग, प्रजनन व बाल स्वास्थ्य रजिस्टर, मातृ एवं शिशु सुरक्षा, घटना की जानकारी, प्रलेखन, हाथ धोना और व्यक्तिगत रक्षा उपकरण और रोगाणुनाशन व स्टरलाइजेशन की जानकारी दी गई थी। इसे भी दोहराया गया। इसके बाद तीसरे दिन का प्रशिक्षण शुरू किया गया। इसमें क्लीनिकल पोस्टिंग, नवजात शिशु का पुनर्जीविकरण,  और जैव चिकित्सकीय अपशिष्ठ प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान एएनएम को स्वास्थ्य सेवा में उनकी भूमिका को लेकर ए टू जेड जानकारी दी जा रही है।
सभी प्रखंडों से दो-दो एएनएम हैं शामिलः प्रशिक्षण में मौजूद रहे केयर इंडिया के डीटीएल तौसीफ कमर ने बताया कि स्वास्थ्य सेवा में एएनएम की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उन्हें उनकी भूमिका के बारे में अवगत कराना बहुत ही आवश्यक है। इसी को लेकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में सभी प्रखंडों से दो-दो एएनएम शामिल हैं। ये लोग प्रशिक्षण लेकर अपने क्षेत्र की नई एएनएम या फिर जिन्हें इन बातों को जानकारी नहीं है, उन्हें यह साझा करेंगी। इसके बाद क्षेत्र में सेवा के दौरान एएनएम इन बातों का ध्यान रखेंगी। प्रशिक्षण का समापण रविवार को होगा। कुल छह दिनों तक चलने वाले प्रशिक्षण में इन्हें ओपीडी से लेकर क्षेत्र तक में काम करने की पूरी जानकारी दी जाएगी। लोगों की काउंसिलिंग कैसे करनी है, इस बारे में बताया जाएगा। साथ ही नवजात से लेकर मातृ स्वास्थ्य के बारे में भी इन्हें जानकारी दी जा रही है। कागजी प्रक्रिया से लेकर उनके मुख्य काम के बारे में बताया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान केयर इंडिया के एफपीसी कन्हैया कुमार भी मौजूद रहे।

चुनाव नतीजों पर मोदी ने जनता को बधाई देते हुए कहा उत्साह और उत्सव का दिन है

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उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। चार राज्यों में भाजपा की सरकार बनती दिखाई दे रही है। हालांकि देश दुनिया की निगाहें उत्तर प्रदेश पर थी। उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए सत्ता में वापसी करना एक बड़ी चुनौती थी। इन सब के बीच भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 270 से ज्यादा सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। जाहिर सी बात है कि एक बार फिर से उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती दिखाई दे रही है। इसी को लेकर भाजपा में जबरदस्त जश्न का माहौल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी कार्यालय पहुंचे जहां हो भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनका स्वागत किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज उत्साह और उत्सव का दिन है। मैं इन चुनावों में हिस्सा लेने वाले सभी मतदाताओं को बधाई देता हूं। उनके निर्णय के लिए मतदाताओं का आभार व्यक्त करता हूं। विशेष रूप से हमारी माताओं, बहनों और युवाओं ने जिस तरह से भाजपा का समर्थन किया वह अपने आप में बड़ा संदेश है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मुझसे वादा किया था कि इस बार होली 10 मार्च से ही शुरू हो जाएगी। हमारे कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अपने वादे को पूरा करके दिखाया है। मैं अपने कार्यकर्ताओं की भूरी-भूरी प्रशंसा करूंगा, जिन्होंने इन चुनावों में कड़ी मेहनत की है।
मोदी ने कहा कि बीजेपी का वोट शेयर मणिपुर, उत्तर प्रदेश और गोवा में सत्ता में रहने के बाद भी बढ़ा है. गोवा में सभी एग्जिट पोल गलत साबित हुए और गोवा के लोगों ने हमें लगातार तीसरी बार उनकी सेवा करने का मौका दिया है। यूपी ने देश को अनेक प्रधानमंत्री दिए हैं, लेकिन 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले मुख्यमंत्री के दोबारा चुने जाने का ये पहला उदाहरण है। यूपी में 37 साल बाद कोई सरकार लगातार दूसरी बार आई है। तीन राज्य यूपी, गोवा और मणिपुर में सरकार में होने के बावजूद भाजपा के वोट शेयर में वृद्धि हुई है। गोवा में सारे एग्जिट पोल गलत निकल गए और वहां की जनता ने तीसरी बार सेवा करने का मौका दिया है। सीमा से सटा एक पहाड़ी राज्य, एक समुद्र तटीय राज्य, मां गंगा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त एक राज्य और पूर्वोत्तर सीमा पर एक राज्य, भाजपा को चारों दिशाओं से आशीर्वाद मिला है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन राज्यों की चुनौतियों भिन्न हैं, सबकी विकास यात्रा का मार्ग भिन्न है, लेकिन सबको जो बात एक सूत्र में पिरो रही है, वो है- भाजपा पर विश्वास, भाजपा की नीति, भाजपा की नीयत और भाजपा के निर्णयों पर अपार विश्वास। उन्होंने कहा कि गरीबों के नाम पर घोषणाएं बहुत बनी, योजनाएं बहुत बनी, लेकिन जिस गरीब का उस पर हक था, वो हक उसे बिना परेशानी के मिले, उसके लिए गुड गवर्नेंस और डिलिवरी का बड़ा महत्व होता है। भाजपा इस बात को समझती है। इन चुनावों में राज्यों की महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने हमें आशीर्वाद दिया है – हमने उन क्षेत्रों में शानदार जीत हासिल की है जहां महिला मतदाताओं का दबदबा है। हमारी नारी शक्ति इस जीत में हमारी सहयोगी रही है। कुछ लोग ये कहकर यूपी को बदनाम करते हैं कि यहां के चुनाव में तो जाति ही चलती है। 2014 के चुनाव नतीजे देखें, 2017, 2019 के नतीजे देखें और अब फिर 2022 में भी देख रहे हैं, हर बार यूपी के लोगों ने विकासवाद की राजनीति को ही चुना है।

वाराणसी से सांसद ने कहा कि मैं आज ये भी कहूंगा कि 2019 के चुनाव नतीजों के बाद, कुछ पॉलिटिकल ज्ञानियों ने कहा था कि 2017 के नतीजों ने 2019 के नतीजे तय कर दिए। मैं मानता हूं इस बार भी वो यही कहेंगे कि 2022 के नतीजों ने 2024 के नतीजे तय कर दिए। मैं आज पंजाब के भाजपा कार्यकर्ताओं की भी विशेष प्रशंसा करूंगा। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में जिस प्रकार पार्टी का झंडा बुलंद किया है, वो आने वाले समय में पंजाब में भाजपा की और देश की मजबूती को एक अहम स्थान के रूप में विकसित करेंगे। मोदी ने कहा कि सीमावर्ती राज्य होने के नाते, पंजाब को अलगाववादी राजनीति से सतर्क रखने के कार्य को भाजपा का कार्यकर्ता जान की बाजी लगाकर भी करता रहेगा। आने वाले 5 सालों में भाजपा का हर कार्यकर्ता वहां इस दायित्व को जोर शोर से निभाने वाले है, ये विश्वास मैं आज पंजाब की जनता को देना चाहता हूं।

मोदी ने कहा कि इस वैश्विक संदर्भ में, इन कठिनाइयों के बीच इस बार के बजट पर नजर डालें तो एक विश्वास पैदा होता है कि देश आत्मनिर्भर भारत अभियान के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। इस भावना को इस बार के बजट से और ऊर्जा मिली है। वैक्सीनेशन के हमारे प्रयासों की दुनिया प्रशंसा कर रही है लेकिन इस पवित्र कार्य पर, भारत की वैक्सीन पर सवाल उठाए गए। दुर्भाग्य की बात है कि जब यूक्रेन में हजारों भारतीय छात्र, भारतीय नागरिक फंसे हुए थे, तब भी देश का मनोबल तोड़ने की बातें हो रहीं थीं। इन चुनावों में मैंने लगातार हर विषय पर भाजपा का विजन लोगों के सामने रखा। इसके साथ ही जिस बात पर मैंने चिंता जताई थी, वो थी घोर परिवारवाद। मैं किसी परिवार के खिलाफ नहीं हूं, न ही मेरी किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी है। मैं लोकतंत्र की चिंता करता हूं।

पार्टी कार्यालय में भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह अमित शाह और नितिन गडकरी भी मौजूद रहे। हजारों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय में मौजूद थे।

 

बिहार कोविड पोर्टल पर नाम नहीं दर्ज रहने पर भी कोरोना से मृत हुए लोगों के आश्रितों को मिलेगी अनुदान राशि 

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– स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने पत्र जारी कर सभी आयुक्त, डीएम और सिविल सर्जन को दिए निर्देश
– अनुदान राशि लेने के लिए आश्रितों को पर्याप्त साक्ष्य के साथ आवेदन के माध्यम से करना होगा दावा
लखीसराय, 10 मार्च-
कोरोना से मृत हुए ऐसे मृतक के आश्रितों को मृत्यु के उपरांत मिलने वाली अनुग्रह अनुदान राशि मिलने में कोई बाधा नहीं होगी जिनका तकनीकी या फिर अन्य कारणों से बिहार कोविड पोर्टल पर नाम नहीं दर्ज हुआ हो। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पत्र जारी कर राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें कहा है कि अगर किसी भी कोरोना से मृत हुए व्यक्ति का नाम किसी भी कारणवश बिहार कोविड पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाया हो किन्तु, मृतक के आश्रितों के पास पर्याप्त साक्ष्य है तो ऐसे लाभार्थियों को अविलंब अनुग्रह अनुदान योजना की राशि उपलब्ध करायी जानी है।
– सभी लाभार्थियों को सुविधाजनक तरीके से मिलेगी राशि :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, जिन मृतक का किसी भी कारण बिहार कोविड पोर्टल पर नाम नहीं दर्ज हो पाया है, उनके भी आश्रितों को राशि उपलब्ध कराने का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ताकि ऐसे सभी लाभार्थियों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सुविधाजनक तरीके से अनुग्रह अनुदान राशि मिल सके। यह लाभ कोविड की तीनों लहरों में मृत हुए व्यक्तियों के आश्रितों को दी जाएगी।
– अनुग्रह अनुदान राशि के रूप में मिलते हैं साढ़े चार लाख रुपये :
कोरोना से मृत हुए लोगों के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान योजना के तहत साढ़े चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है। बिहार राज्य में कोरोना संक्रमण से मृत व्यक्तियों के निकटतम आश्रितों के अनुग्रह अनुदान राशि संबंधी दावा या आवेदनों के वैसे सभी मामले, जिनमें यह निश्चित हो कि व्यक्ति की मृत्यु कोरोना संक्रमण से हुई है और इसका पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध है। भले ही किसी कारणवश पोर्टल पर मृतक का नाम दर्ज नहीं हो पाया, उनकी सम्यक समीक्षा कर सूची राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार को अविलंब उपलब्ध करायी जानी है। ताकि ऐसे मामलों की जल्द से जल्द अनुदान राशि के भुगतान संबंधी कार्रवाई की जा सके।

एनीमिया से बचने के लिए करें प्रोटीन और आयरन युक्त भोजन का सेवन

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– एनीमिया का लक्षण दिखते ही चिकित्स्कीय परामर्श लेते हुए समय पर कराएं इलाज
मुंगेर, 10 मार्च।
एनीमिया से बचने के लिए प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करना आवश्यक है। एनीमिया की बीमारी खून की कमी से होती है। इसलिए इससे बचने के लिए आयरन युक्त भोजन का भी सेवन जरूरी है। मालूम हो कि शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयरन रहने से इस बीमारी के होने की संभावना ना के बराबर रहती है। इसलिए, खान-पान एवं रहन-सहन का विशेष ख्याल रखें और सकारात्मक बदलाव ही बीमारी से बचाव का बड़ा उपचार है। यह बीमारी खून में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन कम होने से होती है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं और चिकित्सक द्वारा दिए गए चिकित्सकीय  परामर्श का भी पालन करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी मुसीबत और परेशानी का सबब बन सकती है। इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। ऐसे में समय पर जाँच के लिए अस्पताल जाने एवं चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए। जो आगे की मुसीबत उत्पन्न नहीं होने देगी, आपके लिए फायदेमंद साबित होगा तथा आसानी के साथ आपको बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।
– आयरनयुक्त खाना का करें सेवन
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि आयरन की कमी के कारण एनीमिया होती है। इसलिए इस बीमारी से लोगों को आहार बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने से बचाव होगा।
– ये हैं एनीमिया के प्रारंभिक लक्षण :
उन्होंने बताया कि एनीमिया बीमारी का शुरुआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द आदि होना है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराएं।
– प्रोटीन युक्त खाने का करें सेवन :
उन्होंने बताया कि एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें। जैसे पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूँगफली का मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। जो आपके शरीर की कमी को पूरी करता एवं हीमोग्लोबिन जैसी कमी भी दूर होती है । इससे आपको एनीमिया बीमारी से बचाव मिल सकता है।
– चिकित्सकों की सलाह का करें पालन :
जिला सामुदायिक उत्प्रेरक निखिल राज ने बताया कि एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जाँच कराएं । जिसके बाद चिकित्सकों द्वारा दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन करें, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।
– गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ख्याल :
उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाएँ को गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। जिसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाएँ को गर्भ के दौरान लगातार हीमोग्लोबिन समेत अन्य आवश्यक जाँच करानी चाहिए एवं चिकित्सकों के चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।
– समय पर खाएं खाना :
एनीमिया से बचाव के लिए समय पर खाना भी जरूरी है। इसलिए, इस बात का विशेष ख्याल रखें कि समय पर खाना खाएं और परिवार के अन्य सदस्यों के भी खान-पान का ख्याल रखें। खासकर घर के बच्चे और बुजुर्गों के खान-पान को लेकर विशेष ख्याल रखें।