अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष: घर की चारदिवारी से निकलकर आजादी के रंग में ख़ुद को रंगने को आतुर दिखीं महिलाएं

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-उमड़ते सौ करोड़ अभियान के तहत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन
-महिलाओं के समर्पण, उपलब्धियों और कामयाबी के जश्न के रूप में मनाया गया अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
-‘बेख़ौफ़ आजाद है जीना मुझे’ का नारा बुलंद किया 100 से अधिक महिलाओं एवं किशोरियों ने
-असमानता और हिंसा का व्यवहार बंद करने का सन्देश किया महिलाओं ने
पटना / 08 मार्च, 2022 :
मंगलवार को सहयोगी संस्था द्वारा इब्तिदा नेटवर्क के सहयोग से ‘उमड़ते सौ करोड़ अभियान’ के अंतर्गत अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पटना के तरुमित्रा में आयोजित किया गया। इस अवसर पर 100 से अधिक किशोरियों एवं महिलाओं ने भाग लिया। किशोरियों एवं महिलाओं ने महिला दिवस के जश्न पर बराबरी एवं हिंसा मुक्त समाज बनाने के लिए कविताओं, गीतों, नारों, चित्रकारी के द्वारा अपने सन्देश दिए।
स्लोगन एवं गीतों से दिया संदेश:
 अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के आयोजन पर अलग-अलग गांवों से आयी महिलाओं-किशोरियों, समाजसेवियों, छात्रों के साथ मिलकर तरुमित्रा में एक कार्यक्रम आजोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने गीत और कविता गाकर बराबरी और समानता का सन्देश दिया। किशोर-किशोरियों ने भी स्लोगन, चित्रकारी, आदि बनाकर अपने विचार व्यक्त किये।
महिलाएं ख़ुद को सीमित न करें:
इस अवसर पर सहयोगी संस्था की निदेशिका रजनी ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर साल 08 मार्च को अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के सम्मान में समर्पित है।उनके सम्मान और योगदान के लिए यह एक विशेष दिन समर्पित है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष महिला दिवस का थीम है – “एक स्थाई और समान कल के लिए समाज में लैंगिक समानता जरूरी”। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्ग को गौरव, आत्मसम्मान और बराबरी का अवसर देना आवश्यक है। अन्यथा देश की आधी आबादी के पीछे रह जाने से समग्र विकास की अवधारण अधूरी ही रहेगी। आज भी घर-परिवार और बाहर लड़कियों-महिलाओं के साथ अनेकों तरह की हिंसा और भेदभाव बरते जाते हैं। हर दिन अख़बारों में हिंसा की ख़बरें आती हैं। हम ऐसे व्यवहार स्वीकार नहीं करेंगे। हमें भी समानता और आजादी चाहिए। हमें बेख़ौफ़ होकर जीना है। इसके लिए महिलाएं ख़ुद को सीमित न करें। लड़कियों-महिलाओं ने घर, खेत, कारखाने, कार्यालय, सभी जगह अपना बराबर योगदान दिया है। अवसर मिलने पर उन्होंने अंतरिक्ष की भी उड़ान भरी है। बिहार में एक पावरग्रिड पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है जो अब तक केवल पुरुषों का कार्यक्षेत्र माना जाता था। अपनी प्रतिभा के बलबूते महिलाओं ने सभी क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। आज के समय में महिलाएं देश और समाज दोनों के निर्माण में बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं। अब पहले की तरह महिलाएं केवल घर की चारदीवारी के अंदर बंद नहीं हैं। वह आज घर से बाहर निकलकर अपने हुनर को प्रदर्शित कर रही हैं और समाज में एक सम्मान का स्थान प्राप्त कर रही है। महिलाओं ने बंदिशों के बावजूद  हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। महिलाओं के पूर्ण सम्मान और गरिमा स्थापित करने के लिए सभी का सहयोग अनिवार्य है।
साल के सभी दिन महिलाओं को मिले सम्मान:
कार्यक्रम में तरुमित्रा की देवोप्रिया ने कहा कि सभी तरह की हिंसा एवं भेदभाव की शिकार महिलाएँ एवं हमारी प्रकृति होती हैं। इस अवसर पर हम सन्देश देना चाहते हैं कि साल के सभी शेष दिन भी हमारा सम्मान हो। साथ ही हमारी प्रकृति के प्रति दोहन-शोषण समाप्त हो एवं सभी मिलकर इसका संरक्षण करें।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए समाजकर्मी रेशमा ने कहा कि ट्रांसजेंडर के प्रति हमारी सोच एवं रवैया सकारात्मक होना चाहिए। उन्हें भी बराबरी और सम्मान का अवसर मिलना चाहिए। आज के कार्यक्रम में किशोरियों ने स्लोगन और चित्रकारी करते हुए समाज में फैली कुरीतियों पर चोट किया, फरजाना, रुपाली, चित्राली ने बाल विवाह, भ्रूण हत्या, दहेज़ प्रताड़ना पर चित्र बनाकर समाज में फैली विद्रूपताओं के बारे में अपने विचार बताये। अन्य किशोर-किशोरियों एवं महिलाओं ने भी गीत और कविताओं द्वारा बताया कि बेटे-बेटी में अंतर नहीं करें। महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर एवं अधिकार मिलने चाहिए।
सहयोगी संस्था महिला सशक्तिकरण में दे रही योगदान:
ज्ञातव्य हो कि सहयोगी संस्था जेंडर हिंसा को समाप्त करने एवं समानता एवं भेदभाव मुक्त समाज बनाने के लिए विभिन्न प्रयास करती रही है। संस्था के द्वारा 2016 से बिहार में ‘उमड़ते सौ करोड़ अभियान’ का समन्वय कर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहे हैं एवं नेटवर्क संस्थाओं, समाजसेवियों, कलाकारों, मीडियाकर्मियों, छात्रों को इस अभियान से जोड़कर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।
  कार्यक्रम में सहयोगी से उषा, उन्नति, लाजवंती, रूबी, निर्मला, बिंदु, रिंकी, मनोज, धर्मेन्द्र, नितीश, किशन ने भाग लिया।

सघन मिशन इंद्रधनुष 4.0:  जिला भर में बनाए गए हैं 266 सत्र स्थल : सिविल सर्जन 

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– बच्चों के सम्पूर्ण टीकाकरण को ले जिला में  शुरू हुआ सघन मिशन इंद्रधनुष 4.0 : डीआईओ
– अभियान में जिला भर के 2376 बच्चों और 504 गर्भवती महिलाओं का सम्पूर्ण टीकाकरण होगा
लखीसराय , 7 मार्च-
बच्चों के सम्पूर्ण टीकाकरण के शत- प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति और सोमवार से मिशन इंद्रधनुष 4.0 की सफ़लता को ले जिला भर में 266 सत्र स्थल बनाए गए हैं। उक्त बातें सोमवार को जिला स्वास्थ्य समिति लखीसराय के सभागार में  सेंटर फ़ॉर एडफोकेसी एन्ड रिसर्च के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सघन मिशन इंद्रधनुष 4.0 के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित मीडिया कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र चौधरी ने कही। इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य समिति लखीसराय के डीपीएम खालिद हुसैन, यूनिसेफ के एसएमसी मो. नैय्यर उर आलम, डीटीएल केयर नावेद उर रहमान, डॉ. जूली सहित कई लोग उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि सोमवार से जिला भर के सभी प्रखण्डों में सघन मिशन इंद्रधनुष 4.0 के पहले चरण का शुभारंभ हुआ । सघन मिशन इंद्रधनुष 4.0 का दूसरा चरण 4 अप्रैल से और तीसरा चरण 2 मई से शुरु होगा। इसके लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अन्तर्गत सभी 266 सत्र स्थल पर ससमय वैक्सीन और लॉजिस्टिक उपलब्ध करा दी गयी है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कोरोना काल में नियमित टीकाकरण से छूटे हुए बच्चों और गर्भवती महिलाओं को    शत-प्रतिशत टीकाकृत करना है। कोरोना काल में लोग कोरोना संक्रमण से बचने के लिए नियमित टीकाकरण करवाने से परहेज बरत रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना सघन मिशन इंद्रधनुष 4.0 अभियान को तीन  चरणों में शुरू किया है। इसके पहले चरण का सोमवार से जिला के 266 सत्र स्थल पर  शुभारंभ हो गया है। इसके तहत जिलाभर के कुल 2376 चिह्नित बच्चों एवं 504 गर्भवती महिलाओं को टीकाकृत किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बड़हिया प्रखण्ड के कुल 36 सत्र स्थल पर 0 – 2 वर्ष  के लक्षित बच्चों की संख्या 277 और लक्षित गर्भवती महिलाओं की संख्या 49 है। इसी तरह से हलसी प्रखण्ड के कुल 24 सत्र पर लक्षित बच्चों की संख्या 170 और गर्भवती महिलाओं की संख्या 26 है।
लखीसराय प्रखण्ड के कुल 53 सत्र स्थल पर बच्चों की संख्या 643 और गर्भवती महिलाओं की संख्या 145 है। इसी तरह चानन के कुल 45 सत्र स्थल पर बच्चों की संख्या 529 और गर्भवती महिलाओं की संख्या 141 है। पिपरिया प्रखण्ड के कुल 29 सत्र स्थल पर बच्चों की संख्या 152 और गर्भवती महिलाओं की संख्या 26 है। इसी तरह रामगढ़ चौक प्रखण्ड के कुल 34 सत्र स्थल पर बच्चों की संख्या 314 और गर्भवती महिलाओं की संख्या 44 है। जिला के सूर्यगढ़ा प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत बनाए गए कुल 45 सत्र स्थल पर बच्चों की संख्या 291 और गर्भवती महिलाओं की कुल संख्या 73 है।

इंद्रधनुष अभियान : जिले में साप्ताहिक अभियान की हुई शुरुआत 

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– मानसी प्रखंड के मध्य विद्यालय मटिहानी में आयोजित शिविर का जिलाधिकारी ने उदघाटन कर अभियान की शुरुआत की
– तीन राउंड में आयोजित होगा साप्ताहिक अभियान, टीका से छूटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं का प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा नियमित टीकाकरण
खगड़िया, 07 मार्च-
जिले में सोमवार को साप्ताहिक इंद्रधनुष अभियान का आगाज हो गया। इस अभियान की शुरुआत जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने जिले के मानसी प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय मटिहानी में आयोजित शिविर का उदघाटन कर किया। इसके बाद जिले के सभी प्रखंडों में अभियान की शुरुआत हुई और टीका से छूटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं का प्राथमिकता के आधार पर नियमित टीकाकरण (आर आई) किया गया। इस मौके पर जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे ना केवल गंभीर बीमारी से बचाव होगा, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी बढ़ावा मिलेगा तथा बच्चों को शारीरिक विकास भी अवरूद्ध नहीं होगा। इसलिए, मैं जिले के तमाम ऐसे लाभार्थियों से अपील करता हूँ कि जो नियमित टीकाकरण नहीं करा पाएं हैं, वह अपने नजदीकी शिविर स्थलों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं। इस मौके पर सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, मानसी पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन आदि मौजूद थे।
– टीका से छूटे गर्भवती और बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा नियमित टीकाकरण :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, सोमवार से जिले में इंद्रधनुष अभियान के तहत साप्ताहिक नियमित टीकाकरण का शुभारंभ हो गया। जिसके माध्यम से टीका से छूटे गर्भवती और बच्चों को जागरूक कर प्राथमिकता के आधार पर टीकाकृत किया जाएगा। वहीं, उन्होंने बताया, अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ताकि छूटे सभी लाभार्थी टीकाकृत हो सके और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
– गंभीर बीमारियों से बचाव करता है नियमित टीकाकरण :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों पर होता है। जिसके माध्यम से शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा अभियान में गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। उक्त टीकाकरण अभियान का जिले भर में सोमवार से शुभारंभ हो गया। जहाँ जिले के सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जा रहा है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
– तीन राउंड में आयोजित होगा साप्ताहिक नियमित टीकाकरण :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, इंद्रधनुष अभियान के तहत तीन राउंड में साप्ताहिक नियमित टीकाकरण का जिले भर में आयोजन होगा। पहला राउंड 07 से 13 मार्च तक , दूसरा 04 से 10 अप्रैल तक एवं तीसरा  राउंड का 02 से 08 मई तक आयोजन होगा। प्रत्येक राउंड में पूरे सप्ताह नियमित टीकाकरण का आयोजन किया जाएगा। इसको लेकर सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई। ताकि सामुदायिक स्तर पर अधिकाधिक लोग लाभांवित हो सकें और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।

अब एक क्लिक पर मिलेगी परिवार नियोजन से संबंधित सभी जानकारी 

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-लोगों को घर बैठे जानकारी प्राप्त करने में वरदान साबित होगा व्हाट्सएप बोट
-9031691691 पर एक क्लिक करते ही मोबाइल स्क्रीन पर मिल जाएगी जानकारी
भागलपुर, 7 मार्च –
परिवार नियोजन अभियान को सफल बनाने और इसके संदेश को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। इसे सार्थक रूप देने के लिए तमाम जरूरी निर्णय लिए जा रहे  और तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि इस अभियान का संदेश समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंच सके और अधिकाधिक लोग सुविधाजनक तरीके से लाभान्वित हो सकें। इसी कड़ी में केयर इंडिया के सहयोग से कोमल दीदी व्हाट्सएप बोट नामक एक एप जारी किया गया है। जिसपर एक क्लिक करते ही परिवार नियोजन से संबंधित सभी प्रकार (स्थाई और अस्थाई) की तमाम जानकारियां मोबाइल स्क्रीन पर मिलेंगी। यह एप परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए वरदान साबित होंगी। इस एप के माध्यम से किसी क्षेत्र के इच्छुक व्यक्ति घर बैठे सभी जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे।
नंबर को मोबाइल में सेव कर व्हाट्सएप फंक्शन में करना होगा क्लिक: केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया, लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित सभी प्रकार की जानकारियां प्राप्त करने के लिए कोमल दीदी व्हाट्सएप बोट लांच किया गया है। इसका नंबर 9031691691 है। इस जारी नंबर पर कोई भी व्यक्ति सुविधाजनक तरीके से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। किन्तु, जानकारी प्राप्त करने के लिए जारी नंबर को अपने मोबाइल में सेव करना होगा, जिसके बाद व्हाट्सएप फंक्शन में जाकर अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखकर क्लिक करना है। इसके बाद आने वाले विकल्प को क्लिक कर कोई भी व्यक्ति परिवार नियोजन से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया, यह सुविधा परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए ना सिर्फ सुविधाजनक बल्कि लोगों को घरों से बाहर भी नहीं निकलना पड़ेगा। यानी घर बैठे ही सारी जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे।
गोपनीयता के साथ दी जाएगी जानकारी: इस एप के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की किसी प्रकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यानी सभी जानकारियां गोपनीयता के साथ दी जाएगी और लाभार्थियों की पहचान भी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, ताकि खासकर महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करते हुए सुविधाजनक तरीके से जानकारी प्राप्त कर सकें जिससे एप का उद्देश्य सफल हो सके। साथ ही अधिकाधिक लोग लाभान्वित हो सके।

अपनी मेहनत और लगन से पंचायत में कराया शत-प्रतिशत टीकाकरण

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-बलियामहरा एपीएचसी में तैनात एएनएम ज्योति प्रिया की कहानी
-लोगों को स्वास्थ्य़ के प्रति जागरूक करने में निभा रही अपनी भूमिका
–महिला दिवस पर विशेष
बांका, 7 फरवरी-
आज महिला दिवस है। मौजूदा समय में महिलाएं पुरुष से कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। किसी मायने में महिलाएं पुरुष से पीछे नहीं हैं। ऐसे में आज के दिन सफल महिला के बारे में जानना जरूरी है। दो साल से कोरोना काल चल रहा है। कोरोना की तीन लहर आई और चली भी गई। कोरोना से लोगों को बचाने में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाई। लोगों की कोरोना जांच से लेकर टीकाकरण तक में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज हम ऐसी ही एक महिला स्वास्थ्यकर्मी की चर्चा कर रहे हैं। बलियामहरा एपीएचसी में तैनात एएनएम ज्योति प्रिया की हम बात कर रहे हैं।
2020 में जब से कोरोना काल शुरू हुआ है, तब से वह अपनी भूमिका निभा रही हैं। कोरोना की जब शुरुआत हुई थी तो नाम सुनकर भी लोग डरते थे, लेकिन ज्योति प्रिया उसी समय से जांच से लेकर टीकाकरण तक में बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभा रही हैं। जब कोरोना टीकाकरण की शुरुआत हुई तो उसमें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीकाकरण में उनके योगदान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बलियामहरा पंचायत में लगभग सभी लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है। अल्पसंख्यक बहुत क्षेत्र होने के बावजूद उन्होंने सभी लोगों को टीका लेने के लिए मना लिया।
एक ही व्यक्ति के पास बार-बार जाकर किया जागरूकः ऐसा नहीं था कि सभी लोग राजी-खुशी से टीका लेने को तैयार थे। ज्योति प्रिया कहती हैं, शुरुआत में लोग बिल्कुल भी टीका नहीं लेना चाहते थे। उनके मन में तमाम तरह की आशंकाएं थी, जिसे दूर किया गया। तब जाकर लोगों ने कोरोना का टीका लिया। कई लोग तो ऐसे भी थे जो साफतौर पर टीका लेने से मना कर रहे थे, लेकिन एक ही व्यक्ति के पास बार-बार जाकर उन्हें टीका लेने के लिए मनाया। आज इसका परिणाम भी दिख रहा है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि ज्योति प्रिया की सबसे अच्छी बात यह है कि जो भी काम देते हैं, उसे पूरी मेहनत और लगन के साथ करती है। इसी का परिणाम है कि शत-प्रतिशत परिणाम मिलता है। चाहे कोरोना हो या नियमित टीकाकरण, दोनों में उसका काम सराहनीय है।
नियमित टीककारण के लिए भी लोगों को किया जागरूकः ज्योति प्रिया की बलियामहरा एपीएचसी में तैनाती 2019 में हुई है। इससे पहले 2014 से लेकर 19 तक धोरैया पीएचसी में तैनात थी। जब ज्योति प्रिया बलियामहरा आई थी तो उस वक्त यहां पर नियमित टीका लेने से भी लोग कतराते थे। गर्भवती महिलाएं तो खुद टीका लेने से बचती ही थीं, साथ में बच्चों को भी टीका दिलवाने से परहेज करती थी। लेकिन ज्योति प्रिया ने हार नहीं मानी और काउंसिलिंग के जरिये लगातार लोगों को जागरूक करने का काम करती रहीं। आज बलियामहरा पंचायत के लोग नियमित से लेकर कोरोना टीकाकरण को लेकर काफी सजग हैं। पंचायत के लोगों में स्वास्थ्य के प्रति गजब की जागरूकता आई है।

एसजेएमसी में डिजिटल शिक्षा एवं कंटेंट डेवलपमेंट पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन

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-एसजेएमसी ने बिहार को डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है
– कोविड ने हमें समझा दिया है कि डिजिटल शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है
– डिजिटल शिक्षा की मदद से वंचितों को लाभ पहुंचाया जा सकता है
– कार्यशाला का उद्देश्य बिहार में डिजिटल शिक्षा को लोकप्रिय बनाना है
– कार्यशाला में बिहार के विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों के पचास से अधिक संकाय सदस्य, शोधकर्ता भाग ले रहे हैं
पटना:
स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (एसजेएमसी), आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में “डिजिटल एजुकेशन: मल्टीमीडिया कंटेंट डेवलपमेंट एंड डिलीवरी” नामक नए और अभिनव डिजिटल मीडिया पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। कार्यशाला का आयोजन कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (सीईसी), नई दिल्ली के सहयोग से किया जा रहा है। सीईसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का एक स्वायत्त संस्थान है जो संचार के विभिन्न आईसीटी मोड के माध्यम से शैक्षिक सामग्री के प्रसार के लिए जिम्मेदार है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि बिहार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री सुमित कुमार सिंह थे। कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि एसजेएमसी ने बिहार को डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि कोविड ने हमें समझा दिया है कि डिजिटल शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है और यह कैसे शिक्षा की पहुंच को बढ़ाती है।
शिक्षा और नवाचार से बिहार में विकास हो सकता है
सीईसी के निदेशक प्रो. जे.बी. नड्डा ने कहा कि शिक्षा और नवाचार से बिहार में विकास हो सकता है। उन्होंने कहा कि पटना चूँकि शैक्षणिक संस्थानों का केंद्र है, यहाँ डिजिटल कंटेंट निर्माण के लिए शिक्षण संस्थानों को सुदृढ़ किया जा सकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एसजेएमसी इस दिशा में आगे बढ़ने में सक्षम होगी क्योंकि केंद्र के पास आवश्यक विशेषज्ञता है और साथ ही बिहार सरकार ने क्लास रूम और वीडियो उत्पादन के लिए नवीनतम उपकरणों की खरीद के लिए भी सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि अगर बिहार सरकार एसजेएमसी का समर्थन करना जारी रखती है, तो सीईसी के लिए एसजेएमसी के साथ जुड़ना आसान हो जाएगा। उन्होंने बिहार में पहली बार ऐसी कार्यशाला के आयोजन पर खुशी जताया।
शिक्षा जगत और सरकार के बीच की दूरी को पाटने की जरूरत है
इस अवसर पर बोलते हुए श्री संजय कुमार, अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार ने डिजिटल शिक्षा के समक्ष चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अगर हम डिजिटल शिक्षा की ओर आगे बढ़ रहे हैं तो हमें भी उसी के अनुरूप कंटेंट तैयार करने के बारे में सोचना चाहिए। यह केवल पहले से उपलब्ध सामग्री की एक प्रति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रो जे बी नड्डा के नेतृत्व में सीईसी के साथ राज्य के विश्वविद्यालयों के सभी कुलपतियों की एक बैठक आयोजित की जानी चाहिए ताकि भविष्य की रणनीति तैयार की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा जगत और सरकार के बीच की दूरी को पाटने की जरूरत है ताकि शिक्षा में प्रगति के लिए समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने में पहुंच एक महत्वपूर्ण कारक बनने जा रही है। वर्तमान स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष लगभग 15 लाख परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होते हैं, इंटर तक आते आते 12 लाख ही रह जाते हैं और विश्वविद्यालयों तक उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले मात्र 4 लाख ही रह जाते हैं। ऐसे में डिजिटल शिक्षा की मदद से वंचितों को लाभ पहुंचाया जा सकता है ।
एजुकेशन का मतलब सिर्फ डिग्री लेना नहीं होता है
राकेश कुमार सिंह, रजिस्ट्रार (प्रभारी), आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ने डिजिटल शिक्षा के परिणामस्वरूप उभरने वाली चुनौतियों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में एजुकेशन का मतलब सिर्फ डिग्री लेना नहीं होता है। हमारे भीतर देखने, सुनने और समझने का जज्बा होना चाहिए जिसे डिजिटल एजुकेशन से मुमकिन बनाया जा सकता है।
आज के समय में शिक्षा टेक्नोलॉजी आधारित हो गई है
अपने स्वागत भाषण में, निदेशक एसजेएमसी, इफ्तेखार अहमद ने डिजिटल एजुकेशन  की विशेषता बताते हुए कहा कि आज के समय में शिक्षा टेक्नोलॉजी आधारित हो गई है। भारत का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 30 प्रतिशत है जबकि बिहार का महज 14.5 प्रतिशत ही है। इस पर उन्होंने चिंता जताई।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत एमए प्रथम सेमेस्टर की छात्राओं प्रियंका, अदिति और अनन्या द्वारा भक्ति गीत से किया गया जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलित की गई।
तकनीकी सत्र में, डॉ सुनील मेहरू, संयुक्त निदेशक, सीईसी ने “एमओओसी: परिचय और उत्पादन” पर बात की। डॉ. समीर एस. सहस्रबुद्धे, निदेशक, ईएमएमआरसी, एसपीपीयू, पुणे ने ‘एमओओसीः डिजाइन और डिलिवरी’ विषय पर चर्चा की।
कार्यशाला का उद्देश्य बिहार में डिजिटल शिक्षा को लोकप्रिय बनाना
कार्यशाला का उद्देश्य बिहार में डिजिटल शिक्षा को लोकप्रिय बनाना, इसके महत्व को समझना, एमओओसी/डिजिटल कार्यक्रम उत्पादन प्रक्रिया को समझना और प्रतिभाशाली और अभिनव शिक्षकों/शोधकर्ताओं/मीडिया पेशेवरों को बढ़ावा देना है जो डिजिटल कार्यक्रमों/एमओओसी में प्रभावी रूप से योगदान दे सकते हैं।
कार्यशाला में बिहार के विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों के पचास से अधिक संकाय सदस्य, शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन एसजेएमसी की समन्वयक डॉ मनीषा प्रकाश ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के बच्चों के साथ ही शिक्षक डॉ. अजय कुमार सिंह,  डॉ. अमित कुमार और डॉ. अफ़ाक हैदर का अहम योगदान रहा।

बच्चों के संतुलित पोषण से बौनेपन में आयेगी कमी 

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 -छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार है जरूरी
लखीसराय ,5 मार्च-
बेहतर मातृ एवं शिशु पोषण सुनिश्चित कराना पहले से ही एक चुनौती रही है लेकिन कोरोना महामारी ने इस समस्या को और गति दी है।  मातृ एवं शिशुओं को कुपोषण के दंश से बचाने के लिए पोषण पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है जितना कि एक शरीर के लिए शुद्ध हवा।
डॉ. रूपा कुमारी बताती हैं  सही और  संतुलित पोषण न मिलने से बच्चे  बौनेपन के शिकार हो जाते हैं। इसलिए  प्रसव के एक घन्टे के भीतर ही शिशु को स्तनपान जरूर कराना चाहिए। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. जबकि शिशु जन्म के 6 महीने तक बच्चे को केवल स्तनपान ही कराना चाहिए। इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए।
छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार है जरूरी : डॉ. कुमारी पूजा बताती हैं कि 6 माह के बाद बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से शुरू हो जाता है। इसलिए 6 माह के बाद सिर्फ स्तनपान से जरूरी पोषक तत्त्व बच्चे को नहीं मिल पाता है। इसलिए छ्ह माह के उपरान्त अर्ध ठोस आहiर जैसे खिचड़ी, गाढ़ा दलिया, पका हुआ केला एवं मूंग का दाल दिन में तीन से चार बार जरूर देना चाहिए। दो साल तक अनुपूरक आहार के साथ माँ का दूध भी पिलाते रहना चाहिए ताकि शिशु का पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास हो पाए। उन्होंने बताया कि उम्र के हिसाब से ऊँचाई में वांछित बढ़ोतरी नहीं होने से शिशु बौनेपन का शिकार हो जाता है। इसे रोकने के लिए शिशु को स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरूर देना चाहिए।
जिला सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया पहले 1000 दिन नवजात के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है जो कि महिला के गर्भधारण करने से प्रारम्भ हो जाते हैं। आरंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों का  शारीरिक एवं बोद्धिक  विकास अवरुद्ध हो सकता है जिसकी भरपाई बाद में नहीं हो पाती है। शिशु  जन्म के बाद पहले वर्ष का पोषण बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के स्वस्थ्य विकास और प्रतिरोधकता बढ़ाने में बुनियादी भूमिका निभाता है। शुरुआती के 1000 दिनों में बेहतर पोषण सुनश्चित होने से मोटापा और जटिल रोगों से भी बचा जा सकता है।
डॉ चौधरी ने बताया गर्भावस्था के दौरान महिला को  प्रतिदिन के भोजन के साथ आयरन और फॉलिक एसिड एवं कैल्सियम की गोली लेना भी जरूरी है। एक गर्भवती महिला को अधिक से अधिक आहार सेवन में विविधता लानी चहिए। गर्भावस्था में बेहतर पोषण शिशु को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान आयरन और फॉलिक एसिड के सेवन से महिला एनीमिया से सुरक्षित रहती है एवं इससे प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से होने वाली जटिलताओं से भी बचा जा सकता है। वहीँ कैल्सियम का सेवन भी गर्भवती महिलाओं के लिए काफ़ी जरूरी है। इससे गर्भस्थ शिशु के हड्डी का विकास पूर्ण रूप से हो पाता है एवं जन्म के बाद हड्डी संबंधित रोगों से शिशु का बचाव भी होता है।

कोमल दीदी व्हाट्सएप बोर्ड पर एक मात्र क्लिक से घर बैठे प्राप्त करें परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी

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– 9031691691 पर एक क्लिक करते ही मोबाइल स्क्रीन पर प्राप्त होगी जानकारी
मुंगेर, 05 मार्च-
जिला में परिवार नियोजन अभियान को सफल बनाने और इसके संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग काफी गंभीर है । इसको ले तमाम आवश्यक निर्णय लेते हुए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। ताकि इस अभियान का संदेश समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुँच सके और अधिकाधिक लोग इस सुविधा से लाभान्वित हो सकें। इसी क्रम में केयर इंडिया के सहयोग से कोमल दीदी व्हाट्सएप बोर्ड नाम का एक एप जारी किया गया है। जिस पर एक क्लिक करते ही परिवार नियोजन से संबंधित सभी स्थाई और अस्थाई मैथेड से जुड़ी तमाम जानकारियाँ मोबाइल स्क्रीन पर मिलेगी। यह एप परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए एक वरदान साबित होगा । क्योंकि, इस एप के माध्यम से किसी क्षेत्र के इच्छुक व्यक्ति घर बैठे सभी जानकारियाँ प्राप्त कर सकेंगे।
– जानकारी प्राप्त करने के लिए जारी नंबर को मोबाइल में सेव कर व्हाट्स एप फंक्शन में करना होगा क्लिक :
केयर इंडिया की फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक तस्नीम रजि ने बताया कि लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित सभी प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त करने के लिए कोमल दीदी व्हाट्स बोर्ड लांच किया गया है। जिसका नंबर 9031691691 है। जारी इस नंबर पर कोई भी व्यक्ति सुविधाजनक तरीके से जानकारी प्राप्त कर सकता हैं। किन्तु, जानकारी प्राप्त करने के लिए जारी नंबर को अपने मोबाइल में सेव करना होगा। इसके बाद व्हाट्सएप फंक्शन में जाकर अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखकर क्लिक करना है। इसके बाद आने वाले विकल्प को क्लिक कर कोई भी व्यक्ति परिवार नियोजन से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यह सुविधा परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए ना सिर्फ सुविधाजनक बल्कि लोगों को घरों से बाहर भी नहीं निकलना पड़ेगा। यानी घर बैठे ही सारी जानकारियाँ प्राप्त कर सकेंगे।
– गोपनीयता के साथ दी जाएगी जानकारी  :
इस एप के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की किसी प्रकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यानी सभी जानकारियाँ गोपनीयता के साथ दी जाएगी और लाभार्थियों की पहचान भी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। ताकि खासकर महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करते हुए सुविधाजनक तरीके से जानकारी प्राप्त कर सकें  जिससे एप का उद्देश्य सफल हो सके। साथ ही अधिकाधिक लोग लाभान्वित हो सके।

एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीन युक्त खाना का करें सेवन 

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– लक्षण दिखते ही समय पर कराएं इलाज, चिकित्सा परामर्श का करें पालन
– थोड़ी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी का सबब, इसलिए सर्तकता और सावधानी जरूरी
खगड़िया, 05 मार्च-
एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीन युक्त खाना का सेवन करें। यह बीमारी खून की कमी से होती है। इसलिए, इससे बचाव के लिए आयरन युक्त खाना का भी सेवन करना जरूरी है। दरअसल, शरीर में पर्याप्त आयरन रहने से इस बीमारी की संभावना ना के बराबर रहती है। इसलिए, खान-पान एवं रहन-सहन का विशेष ख्याल रखें और सकारात्मक बदलाव ही बीमारी से बचाव का बड़ा उपचार है। यह बीमारी खून  में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन कम होने से होती है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं और चिकित्सा परामर्श का पालन करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत और परेशानी का सबब बन सकती है। इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। ऐसे में समय पर जाँच के लिए अस्पताल जाने एवं चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए। जो आगे की मुसीबत उत्पन्न नहीं होने देगी एवं आपके लिए फायदेमंद साबित होगा तथा आसानी के साथ आपको बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।
– आयरनयुक्त खाना का करें सेवन :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, आयरन की कमी के कारण एनीमिया होती है। इसलिए इस बीमारी से लोगों को आहार बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने से बचाव होगा।
– ये हैं एनीमिया के प्रारंभिक लक्षण :
एनीमिया बीमारी का शुरूआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द आदि  होना है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराएं।
– प्रोटीनयुक्त खाने का करें सेवन :
एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें। जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूँगफली का मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। जो कि आपके शरीर की कमी को पूरा करता एवं हीमोग्लोबिन जैसी कमी भी दूर होती है । इससे आपको एनीमिया बीमारी से बचाव मिल सकता है।
– चिकित्सकों की सलाह का करें पालन :
एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जाँच कराएं। जिसके बाद चिकित्सकों द्वारा दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन करें, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।
– गर्भवती महिलाएँ रखें विशेष ख्याल :
गर्भवती महिलाएँ को गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। जिसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाएँ को गर्भ दौरान लगातार हीमोग्लोबिन समेत अन्य आवश्यक जाँच करानी चाहिए एवं चिकित्सकों के चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।
– समय पर खाएं खाना :
एनीमिया से बचाव के लिए समय पर खाना ,खाना भी जरूरी है। इसलिए, इस बात विशेष ख्याल रखें कि समय पर खाना खाएं और परिवार के अन्य सदस्यों का भी खान-पान का ख्याल रखें। खासकर घर के बच्चे और बुजुर्गों के खान-पान को लेकर विशेष ख्याल रखें।

समाज के वंचित समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाएं आशा कार्य़कर्ता

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-शहर के एक होटल में चल रहे छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन
-आशा कार्य़कर्ताओं को निर्णय व समन्वय कौशल के बारे में दी गई जानकारी
भागलपुर, 5 मार्च-
भीखनपुर स्थित एक होटल में चल रहे शहरी आशा कार्यकर्ताओं का छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। प्रशिक्षण के आखिरी दिन शनिवार को मास्टर ट्रेनर मनीषा और शंभू कुमार ने शहरी आशा कार्यकर्ताओं को निर्णय कौशल, समन्वय कौशल, लेखन कौशल, सकारात्मक बदलाव, सामाजिक लामबंदी से समाज के कैसे प्रोत्साहित करें, इसके बारे में बताया। साथ में समुदाय में काम करने के लिए कैसे योजना बनानी है, इसकी जानकारी दी गई। शहरी आशा कार्यकर्ताओं को समाज के वंचित समुदायों तक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाने की सीख दी गई। इसके लिए किन-किन बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, इसके बारे में उन्हें जानकारी दी गई।
मास्टर ट्रेनर शंभू कुमार ने कहा कि आशा कार्यक्रर्ताओं को क्षेत्र में काम करने के लिए पहले इन बातों पर विमर्श करना जरूरी है। अगर आप इन बातों को ध्यान में रखेंगे तो समाज के आखिरी व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाने में सफल रहेंगे। लोगों को इस बात के लिए जागरूक करना है कि स्वास्थ्य से संबंधित सेवाएं आपका हक है। सरकार आपके लिए बहुत सारा पैसा खर्च कर रही है। इसका लाभ उठाना आपका कर्तव्य है। वहीं मनीषा ने बताया कि आशा कार्य़कर्ताओं को क्षेत्र में काम करने के लिए निर्णय कौशल बहुत जरूरी है। गर्भवती महिलाओं को लेकर निर्णय लेने की क्षमता अगर आप में रहेगी तो आप उसे किसी तरह की परेशानी में नहीं आने देंगे। सही समय पर अस्पताल ले जाने से लेकर अन्य काम करेंगे। परिवार के लोगों को डिलीवरी की तारीख बताकर मानसिक तौर पर तैयार होने में मदद करेंगे। इससे उनका काम आसान होगा।
समन्वय कौशल पर भी दिया गया जोरः ट्रेनिंग के दौरान समन्वय कौशल पर भी जोर दिया गया। मनीषा ने कहा कि बेहतर समन्वय स्थापित कर आशा कार्यकर्ता क्षेत्र के गरीब से गरीब लोगों को मुश्किलों से बचा सकती हैं। ऐसा करने के लिए आपको चौकन्ना रहना होगा और ट्रेनिंग के दौरान जो बातें आपने सीखीं, उसे व्यावहारिक तौर पर अपनाना होगा। ट्रेनिंग के समापन के बाद सभी आशा कार्य़कर्ताओं से मूल्यांकन पत्र भरवाया गया, जिसे मास्टर ट्रेनर ने देखा कि छह दिन में शहरी आशा कार्यकर्ताओं ने क्या-क्या सीखा।
प्रशिक्षण का मकसद  कार्य़कर्ताओं का कौशल विकाल करनाः प्रशिक्षण के अंतिम दिन क्षेत्रीय अपर निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं ड़ॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का मकसद आशा कार्यकर्ताओं का कौशल विकास है, जिससे वे क्षेत्र में बेहतर सेवा दे सकें। समाज के वंचित तबकों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में सक्रियता बढ़े। वहीं क्षेत्रीय लेखा प्रबंधक विजय कुमार राम ने कार्यक्रम में मौजूद शहरी क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि के बारे में बताया। किस काम के लिए कितनी प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा तय है, इसकी जानकारी दी। आशा के क्षेत्रीय समन्वय कुणाल कुमार ने सभी आशा कार्य़कर्ताओं को अश्विन पोर्टल के बारे में जानकारी दी।