ऊषा केबल इंडस्ट्रीज के ब्राण्ड ऊषा केबल ने एग्रीकल्चर केबल तथा स्पेशल प्रोजेक्ट केबल को भारतीय बाजार में उतारा

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– ऊषा केबल ने किसानों की समस्याओं को ध्यान मे रखते हुए एग्रीकल्चर केबल तथा स्पेशल प्रोजेक्ट केबल को भारतीय बाजार में उतारा

 

नईदिल्ली-

भारत की आईएसआई और बीआईएस प्रमाणित कम्पनी ऊषा केबल इंडस्ट्रीज के ब्राण्ड ऊषा केबल ने किसानों की समस्याओं को ध्यान मे रखते हुए कम्पनी ने एग्रीकल्चर केबल तथा कम बजट के लोगों के लिए स्पेषल प्रोजेक्ट केबल को भारतीय बाजार में उतारा है।

 

ऊषा केबल इंडस्ट्रीज कम्पनी के निदेशक अमन गुप्ता ने कहा कि हमारी कम्पनी भारत सरकार के सभी मानकों ध्यान में रखते हुए तथा ग्राहकों की सुविधा के अनुसार क्वालिटी केबल्स का निर्माण करती है अभी कम्पनी ने किसानों के लिए एग्रीकल्चर केबल बनाया है जिसे किसान सीधे इ्रलेक्ट्रिक पोल से खेतों मे जमीन के नीचे दबाकर समरसेबल मे कनेक्ट कर सकता है यह केबल वाटरप्रूफ तथा फायरप्रुफ है जो किसानों के लिए बहुत ही फायदेमन्द है।

 

अमन गुप्ता ने कहा कि स्पेशल प्रोजेक्ट केबल कम्पनी ने छोटे बजट के लोगों के लिए बनाया गया है 90 मीटर केबल की 270 मीटर पाउच मे कर दी है। ऊषा केबल इंडस्ट्रीज का यह केबल बाजार मे ऊषा केबल के नाम से ही उपलब्ध है उन्होंने कहा कि कुछ लोग मिलते जुलते नामों से घटिया प्रोडक्ट बेच रहे हैं इससे ग्रांहकों को सावधान रहने की जरूरत है और अच्छी क्वालिटी के केबल जॉंच परख कर ही खरीदें।

 

सन 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ट्रूनेट मशीन से होगी टीबी मरीजों की जांच 

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– कोरोना काल में परम्परागत स्पुटम माइक्रोस्कोपी से हो रही है टीबी रोगियों की डायग्नोसिस एवम फॉलोअप जांच
– प्रखण्ड स्तर पर टीबी जांच के लिए किया जाएगा ट्रूनेट मशीन का उपयोग
मुंगेर, 4 मार्च-
  सन 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रखण्ड स्तर पर ट्रूनेट मशीन से टीबी मरीजों की जांच की जाएगी। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने एक पत्र जारी किया है।
मुंगेर के जिला टीबी/एचआईवी समन्वयक शैलेन्दु कुमार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के ग्लोबल टीबी रिपोर्ट के अनुसार कोरोना काल में टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को गहरा आघात लगा है। इस दौरान संभावित टीबी मरीजों की डायग्नोसिस एवं फॉलोअप जांच परम्परागत स्पुटम माइक्रोस्कोपी द्वारा की जाती रही है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक द्वारा जारी पत्र के अनुसार अब नयी परिस्थिति में जब राज्य के 21 जिलों में कोरोना के मरीज नहीं है और संक्रमण दर भी काफी कम हो गया है। इसके साथ ही 11 करोड़ से अधिक लोगों ने कोरोना की वैक्सीन भी लगा ली है। यह निर्णय लिया गया है कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज आए जिलान्तर्गत डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर में अविलम्ब लैबोरेटरी टेक्नीशियन की उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए प्रखण्ड स्तर पर टीबी जांच कराई जाय। इसके लिए जिला को आवंटित सीबीनेट और ट्रू नेट मशीन को इस प्रकार से इस्तेमाल किया जाए कि प्रखण्ड स्तर पर टीबी रोगियों की डायग्नोसिस सीबीनेट और ट्रू नेट मशीन से और फॉलोअप जांच स्पुटम माइक्रोस्कोपी के द्वारा की जाए।
उन्होंने बताया कि सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच के समय टीबी के लक्षणों की स्क्रीनिंग कर टीबी की लक्षण वाली महिलाओं को नजदीक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बलगम की जांच सुनिश्चित करने के लिए एएनएम और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर क़े सीएचओ को प्रशिक्षण और एसटीएस के माध्यम से आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कोई भी ट्रूनेट मशीन जो किसी स्वास्थ्य संस्थान में उपयोग में नहीं लाया जा रहा हो वहां से सिविल सर्जन और जिला संचारी रोग पदाधिकारी के आदेशानुसार दूसरे स्वास्थ्य संस्थान में स्थापित किया जाएगा। इस कार्य को दो सप्ताह के अंदर पूरा कर “निक्षय ” पोर्टल पर मैपिंग कर ली जाएगी ताकि उस मशीन से प्रतिदिन की जाने वाली जांचों का अनुश्रवण और समीक्षा समय से की जा सके।

जिलाधिकारी ने डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स टीम के साथ की समीक्षात्मक बैठक, दिए निर्देश 

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– कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सभागार हाॅल में बैठक का हुआ आयोजन, -स्वास्थ्य विभाग से संबंधित तमाम बिंदुओं पर हुई चर्चा
– डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स टीम में शामिल सदस्यों ने लिया भाग, एक-एक कर्मियों से ली गयी फीडबैक
खगड़िया, 4मार्च –
शुक्रवार को जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने अपने कार्यालय परिसर स्थित सभागार हाॅल में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स टीम के साथ एक समीक्षात्मक बैठक की। जिसमें टास्क फोर्स टीम के सदस्यों के अलावा सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद समेत अन्य पदाधिकारी और कर्मी शामिल हुए। बैठक के दौरान एमआई 4.0, लेबर रूम समेत स्वास्थ्य विभाग से संबंधित अन्य रनिंग एक्टीविटी और नीति आयोग की टीम के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा करते हुए एक-एक बिंदु की समीक्षा की गई। साथ ही सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही तमाम स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इसके बाद मौजूद संबंधित पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए।
– लेबर रूम की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने पर दिया गया बल :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, समीक्षात्मक बैठक के दौरान जिले के तमाम स्वास्थ्य संस्थानों में संचालित लेवर रूम में उपलब्ध सुविधाओं पर चर्चा करते हुए समीक्षा की गई। जिसके दौरान सुविधाओं और बेहतर बनाने पर बल दिया गया। इसे सुनिश्चित करने को लेकर एक्शन प्लान तैयार कर प्रसव के लिए अस्पताल आने वाली प्रसूति महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की निर्देश दिया गया। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी चर्चा की गई।
– कोविड वैक्सीनेशन की भी की गयी समीक्षा :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, समीक्षात्मक बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सभी कार्यों की समीक्षा की गई। इसके अलावा जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में चल रहे कोविड वैक्सीनेशन अभियान की भी समीक्षा की गई। जिसके पश्चात मौजूद संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। ताकि वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति मिल सके एवं जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा सेकेंड डोज एवं प्रीकाॅशनरी डोज अभियान को भी गति देने के लिए ऐसे लाभार्थियों का हर हाल में निर्धारित समय पर वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने का भी निर्देश दिया गया। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसके माध्यम से नियमित तौर पर शिविर आयोजित कर योग्य लाभार्थियों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी जा रही है। साथ ही लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।

अब एक क्लिक पर मिलेगी परिवार नियोजन से संबंधित सभी जानकारी 

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– घर बैठे जानकारी प्राप्त करने के लिए वरदान साबित होगी कोमल दीदी व्हाट्सएप बोर्ड
– 9031691691 पर एक क्लिक करते ही मोबाइल स्क्रीन पर मिलेगी जानकारी
लखीसराय, 04 मार्च।
परिवार नियोजन अभियान को सफल बनाने और इसके संदेश को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है । इसे सार्थक रूप देने के लिए तमाम जरूरी निर्णय लिए जा रहे तथा गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। ताकि इस अभियान का संदेश समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुँच सके और अधिकाधिक लोग सुविधाजनक तरीके से से लाभान्वित हो सकें। इसी कड़ी में केयर इंडिया के सहयोग से कोमल दीदी व्हाट्सएप बोर्ड नामक एक एप जारी किया गया है। जिसपर एक क्लिक करते ही परिवार नियोजन से संबंधित सभी प्रकार (स्थाई और अस्थाई) तमाम जानकारियाँ मोबाइल स्क्रीन पर मिलेगी। यह एप परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए वरदान साबित होंगी। क्योंकि, इस एप के माध्यम से किसी क्षेत्र के इच्छुक व्यक्ति घर बैठे सभी जानकारियाँ प्राप्त कर सकेंगे।
– जानकारी प्राप्त करने के लिए जारी नंबर को मोबाइल में सेव कर व्हाट्स एप फंक्शन में करना होगा क्लिक :
केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक अनुराग गुंजन ने बताया, लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित सभी प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त करने के लिए कोमल दीदी व्हाट्स बोर्ड लांच किया गया है। जिसका नंबर 9031691691 है। इस जारी नंबर पर कोई भी व्यक्ति सुविधाजनक तरीके से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। किन्तु, जानकारी प्राप्त करने के लिए जारी नंबर को अपने मोबाइल में सेव करना होगा। जिसके बाद व्हाट्सएप फंक्शन में जाकर अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखकर क्लिक करना है। इसके बाद आनेवाले विकल्प को क्लिक कर कोई भी व्यक्ति परिवार नियोजन से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया, यह सुविधा परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए ना सिर्फ सुविधाजनक बल्कि लोगों को घरों से बाहर भी नहीं निकलना पड़ेगा। यानी घर बैठे ही सारी जानकारियाँ प्राप्त कर सकेंगे।
– गोपनीयता के साथ दी जाएगी जानकारी :
इस एप के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की किसी प्रकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यानी सभी जानकारियाँ गोपनीयता के साथ दी जाएगी और लाभार्थियों की पहचान भी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। ताकि खासकर महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करते हुए सुविधाजनक तरीके से जानकारी प्राप्त कर सकें  जिससे एप का उद्देश्य सफल हो सके। साथ ही अधिकाधिक लोग लाभान्वित हो सके।

जेंडर समानता के मुद्दे पर पंचायत प्रतिनिधियों का उन्मुखीकरण, गैर-बराबरी एवं हिंसा को रोकने पर हुई चर्चा

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• सहयोगी संस्था के द्वारा जेंडर समानता स्थापित करने हेतु आयोजित किया गया पंचायत प्रतिनिधियों का उन्मुखीकरण,
• जेंडर हिंसा को रोकने में पंचायत प्रतिनिधि निभा सकते हैं महत्वपूर्ण भूमिका
• पंचायत विकास की योजनाएँ जेंडर संवेदनशील हों ताकि समग्र विकास हो सके।
पटना, 04 मार्च –
पटना जिले के बिहटा स्थित सिमरी पंचायत में सहयोगी संस्था के द्वारा शुक्रवार को नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के लिए उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम सिमरी के स्थानीय सरकार पंचायत भवन में संपन्न हुआ। कार्यशाला में सिमरी और पैनाठी पंचायत के 35 प्रतिनिधियों ने प्रतिभागिता की एवं इनमें 9 महिला प्रतिनिधि भी शामिल हुईं। इस कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों को समाज में व्याप्त जेंडर आधारित गैर-बराबरी और हिंसा के मुद्दों पर जागरूक किया गया।
 उल्लेखनीय है की सहयोगी संस्था शुरुआत से ही जेंडर हिंसा एवं घरेलु हिंसा को समाप्त करने की दिशा में कार्य कर रही है एवं इस उद्देश्य को पाने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन कर जागरूकता फ़ैलाने का कार्य करती है। सहयोगी द्वारा पटना के बिहटा प्रखंड के 5 पंचायतों एवं 25 गांवों में जेंडर हिंसा एवं भेदभाव को समाप्त करने के लिए ‘जेंडर हिंसा से मुक्त निजी एवं सार्वजनिक स्थान’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत समुदाय एवं हितधारकों को मुद्दे पर जागरूक करने के लिए उनका उन्मुखीकरण, प्रशिक्षण, बैठकों, सत्रों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, अभियानों, आदि का आयोजन किया जाता है।
लड़कियों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा की होती है अनदेखी :
इस अवसर पर संस्था की प्रमुख रजनी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, यह कार्यक्रम हमारे समाज में व्याप्त जेंडर भेदभाव एवं हिंसा को समाप्त करने में उनके योगदान को सुनिश्चित कराने के लिए आयोजित किया गया है। घर के बाहर की हिंसा के साथ-साथ लड़कियां-महिलाएं घर में भी अनेक तरह की हिंसा और भेदभाव झेलती हैं। जन्म से ही लड़कियों को दोयम दर्जे का समझा जाता है। उनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा की अनदेखी होती है। समान अवसर एवं अधिकार से वंचित रखा जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में जेंडर समानता स्थापित करने में पंचायत प्रतिनिधियों,  विशेषकर महिला प्रतिनिधियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम का उद्देश्य चुने गए पंचायत प्रतिनिधि एवं खासकर महिला पंचायत प्रतिनिधियों के नेतृत्व को सशक्त कर उनकी क्षमता वृद्धि में सहायता करना है। जिससे वे स्थानीय सरकार (पंचायतीराज संस्था) में और समुदाय के स्तर पर परिवर्तन के एजेंट के रूप में प्रभावशाली ढंग से काम करने के लिए सक्षम हो सकें। साथ ही, वे यौन व प्रजनन, स्वास्थ्य एवं अधिकार तथा जेंडर आधारित हिंसा से जुड़े मुद्दों सहित अपने समुदाय में महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को हल करने और संबोधित करने के लिए आवाज उठा सकें।
सरकार की पहली पायदान है पंचायती राज व्यवस्था :
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को बताया गया कि पंचायती राज व्यवस्था गांव के स्तर की शासन व्यवस्था है। इस प्रक्रिया के द्वारा गांव के लोग सरकार के काम में भाग लेते हैं। यह जनता द्वारा चुनी गई सरकार की पहली पायदान है। पंचायत की जरूरतों को पहचानना और योजना बनाना, महिला एवं बाल विकास की योजनाओं को लागू करना, महिलाओं से जुड़े मुद्दों एवं उनकी चिंताओं को उजागर करने के लिए सरकारी अधिकारीयों से बातचीत करना और मुद्दों को आगे बढ़कर सुलझाना, महिला प्रतिनिधियों की भूमिका और जिम्मेवारी कई गुना होती है। सबसे जरूरी यह समझना है कि सभी प्रमुख हितधारकों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श कर एक एकीकृत या आपस में जुड़ी स्थानीय योजनाएं बनाने के लिए जिम्मेवार होंगी। आपको यह भी देखना है कि ऐसी योजनाएं जेंडर संवेदनशील हों। कार्यक्रम में पंचायत डेवलपमेंट प्लान के बारे में चर्चा की गई एवं जेंडर समानता को ध्यान में रखने की बात कही गई।
उन्मुखीकरण कार्यक्रम के आयोजन से हमारी क्षमता में वृद्धि होगी :
कार्यक्रम में प्रतिनिधियों से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर चलाए जा रहे योजनाओं यथा – वृद्धा पेंशन, विकलांग पेंशन, विधवा पेंशन, राशन, आदि से महिलाओं को विशेष रूप से जोड़ने की बात कही गई। कार्यक्रम में प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों ने प्रतिभागियों को इन योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक बताया कि किस प्रकार इन योजनाओं से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर सिमरी पंचायत के मुखिया ओमप्रकाश, उपमुखिया राकेश कुमार, वार्ड सदस्य मनोज कुमार चौधरी, हमीदा बेगम, सोनी प्रवीण, शर्मीला प्रवीण उषा देवी ने भी अपने विचार व्यक्त किये एवं सहयोगी द्वारा किये जाने वाले प्रयासों की सराहना की। मुखिया ओमप्रकाश ने कहा कि इस तरह के उन्मुखीकरण कार्यक्रम के आयोजन से हमारी क्षमता में वृद्धि होगी, ऐसे कार्यक्रम आगे भी आयोजित किये जाने चाहिए। वार्ड सदस्या हमीदा बेगम ने कहा कि हम भी इस कार्यक्रम से मिली जानकारियों को समुदाय में फ़ैलाने का काम करेंगीं।
 कार्यक्रम में सहयोगी से मनोज, सुरेन्द्र, धर्मेन्द्र, अशोक कुमार, बिंदु, निर्मला, रिंकी, रूबी ने भाग लिया।

संशोधित सुरक्षित गर्भसमापन कानून 2021 पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा समीक्षा बैठक का हुआ आयोजन  

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• राज्य के सभी जिलों की हुई प्रगति समीक्षा
• एचएमआईएस पोर्टल पर ससमय आंकड़ों को डालने का दिया गया निर्देश
पटना/ 4 मार्च-
डॉ. सरिता, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, मातृ स्वास्थ्य की अध्यक्षता में राज्य के सभी 38 जिलों के सदर अस्पताल के जिला उपाधीक्षक एवं चिकित्सा पदाधिकारी के साथ समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया. बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षित गर्भसमापन कानून 2021 में हुए संशोधन के बारे में शामिल चिकित्साकर्मियों को जागरूक करना था. दो दिवसीय बैठक में प्रत्येक दिन 19 जिलों की समीक्षा की गयी. बैठक का आयोजन राज्य स्वास्थ्य समिति एवं आई पास डेवलपमेंट फाउंडेशन के तत्वावधान में किया गया.
अस्पताल एवं कर्मियों के काम की हुई समीक्षा:
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी मातृ स्वास्थ्य डॉ. सरिता ने सभी जिलों में सुरक्षित गर्भसमापन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर्मियों के कार्यों की समीक्षा की. जनवरी 2021 से दिसंबर 2021 के बीच किये गए सुरक्षित गर्भसमापन की समीक्षा की गयी. डॉ. सरिता ने क्रमवार सभी जिलों के अस्पताल एवं कर्मियों द्वारा सुरक्षित गर्भसमापन सेवा कितनी और कैसे प्रदान की जा रही है उसकी समीक्षा की. सुरक्षित गर्भसमापन सेवा प्रदान करने में अस्पताल एवं कर्मियों द्वारा सामने आ रही दिक्कतों पर भी उन्होंने चर्चा की.
संशोधित सुरक्षित गर्भसमापन कानून 2021की दी गयी जानकारी:
आई पास डेवलपमेंट फाउंडेशन की डॉ. छाया तिवारी ने स्वास्थ्यकर्मियों को 2021में गर्भसमापन कानून में हुए संशोधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी एवं गर्भपात एक्ट के अधीन दस्तावेजीकरण पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि राज्य की मातृ मृत्यु दर 149 है जो की राष्ट्रीय औसत 113 से कही ज्यादा है और इसे समुदाय को सुरक्षित गर्भसमापन की सुविधा उपलब्ध करा कर काफी हद तक कम किया जा सकता है. डॉ. सुमिता घोष, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने बैठक में ऑनलाइन जुड़कर सभी को बैठक के उद्देश्य से अवगत कराया.
एचएमआईएस पोर्टल पर ससमय आंकड़ों को डालने का दिया गया निर्देश:
आई पास डेवलपमेंट फाउंडेशन के शंकर दयाल सिंह ने एचएमआईएस पोर्टल पर दर्ज सुरक्षित गर्भपात के आंकड़ों की महत्ता पर चर्चा की. उन्होंने बाते कि किन किन अस्पतालों के रजिस्टर एवं एचएमआईएस पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में अंतर है. उन्होंने सभी को निर्देश दिया की एचएमआईएस पोर्टल पर वास्तविक आंकड़े ससमय डाले जाएँ और रजिस्टर एवं एचएमआईएस पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में समानता सुनिश्चित की जाये.
आई पास डेवलपमेंट फाउंडेशन के वरीय राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी निलेश कुमार ने एक सदर अस्पताल में सुरक्षित गर्भसमापन सेवा उपलब्ध कराने संबंधित केंद्र सरकार की अपेक्षा और इसकी उपलब्धि पर चर्चा की और सभी चिकित्साकर्मियों को सुरक्षित गर्भसमापन सेवा उपलब्ध कराने की महत्ता से अवगत कराया.
मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए सुरक्षित गर्भसमापन सेवा उपलब्ध कराना अनिवार्य:
राज्य स्वास्थ्य समिति से डॉ. जयति श्रीवास्तव ने राज्य में चिकित्सा पदाधिकारियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण के बारे में अवगत कराया एवं बताया कि प्रशिक्षण के बाद कितने स्वास्थ्यकर्मी कितने महिलाओं को सुरक्षित गर्भपात की सेवा प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए महिलाओं को सुचारू रूप से सुरक्षित गर्भसमापन सेवा उपलब्ध कराना अनिवार्य है

अभियान में छूटे हुए बच्चों को भी पिलाई जा रही पोलियो की दवा

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-जिले में रविवार से गुरुवार तक चला पल्स पोलियो अभियान
-आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका पिला रहीं बच्चों को दवा
बांका, 4 मार्च –
जिले में रविवार को शुरू हुआ पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान का समापन तो गुरुवार को हो गया, लेकिन इसके बावजूद छुटे हुए बच्चों को भी दवा पिलाई जा रही है। पोलियो उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग काफी सक्रिय है, इसी के मद्देनजर छूटे हुए बच्चों को भी दवा पिलाने का काम किया जा रहा है। इसके तहत आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता और एएनएम घर-घर जाकर 0 से 05 वर्ष के सभी बच्चों को दवा पिला रही हैं। कई भी बच्चा छूट नहीं जाए, इसे लेकर एक-एक घर का दरवाजा खटखटाया जा रहा है। परिजनों से बच्चों की जानकारी लेकर दवा पिलाने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा चौक-चौराहों, रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक जगहों पर भी परिजनों के साथ सफर पर निकले बच्चों को भी दवा पिलाई जा रही है। सफर पर निकले बच्चे दवा पीने से वंचित नहीं रहे और अभियान सफलतापूर्वक चल सके, इसे लेकर यद कवायद की जा रही है। अभियान को हर हाल में सफल बनाने को लेकर चिकित्सा पदाधिकारी, सुपरवाइजर समेत अन्य पदाधिकारी लगातार क्षेत्र भ्रमण कर अभियान का मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
एसीएमओ डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि अभियान की सफलता को लेकर प्रतिदिन अभियान की मॉनिटरिंग की जा रही है। हर दिन शाम में जिले के सभी पीएचसी में बैठक होती है, जिसमें पीएचसी प्रभारी, मैनेजर, सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिका (एल एस) समेत अन्य पदाधिकारी व कर्मी की मौजूदगी में दिनभर के कार्यों समीक्षा की जाती है। साथ ही हर दिन कितने बच्चों को दवा पिलाई गई समेत पूरे दिन के कार्यों की रिपोर्ट तैयार की जाती है। जिसे देर शाम जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराया जाता है। इस अभियान को सफल बनाने में डब्ल्यूएचओ के डॉक्टर सोमाल्या घोष और यूनिसेफ के राजीव शेखर सिन्हा भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। ये लोग लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर इस अभियान को सफल बनाने में लगे हुए हैं।
      जिले के 381155 बच्चों को दवा पिलाने का है लक्ष्यः डॉ चौधरी ने बताया कि पांच दिवसीय इस अभियान के तहत पूरे जिले में कुल 3,81,155 बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अधिकतर बच्चों को दवा पिला दी गई है। अब कुछ छूटे हुए बच्चों को दवा पिलाने का काम चल रहा है। हमलोगों का प्रयास रहता है कि कोई भी बच्चा छूट नहीं जाए, इसलिए यह कवायद चल रही है। छूटे हुए बच्चों को दवा पिलाने का काम कल भी चलेगा। उम्मीद है कि तबतक हमलोग अपने लक्ष्य को पा लेंगे। लोगों से मेरी अपील है कि यदि किसी के घर में पांच वर्ष से कम उम्र का बच्चा है तो उसे जरूर पोलियो की दवा पिलाएं। स्वास्थ्यकर्मी आपके घर नहीं आए हैं तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर संपर्क भी कर सकते हैं।

कोलोरेक्टल कैंसर से प्रभावित होती है बड़ी आंत, बचाव के लिए संभावित लक्षणों की रखें जानकारी

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-पेट में ऐंठन और दर्द, गैस्ट्रिक, कब्जियत, मल में खून आना है मुख्य रूप से कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण
– बड़ी आंत के कैंसर से बचाव के लिए भोजन में शामिल करें उच्च फाइबर वाले आहार
– प्रति वर्ष एक से 31 मार्च तक मनाया जाता है राष्ट्रीय कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह
मुंगेर, 3 मार्च-
मनुष्य के शरीर में भोजन को शरीर के अंदर अवशोषित करने की प्रक्रिया में पाचन तंत्र का बड़ा योगदान होता है। किसी कारणवश यदि मनुष्य का पाचनतंत्र प्रभावित होता है तो उसके शरीर में भोजन का अवशोषण नहीं हो पाता है। शरीर में भोजन का अवशोषण नहीं होने से पेट की समस्या होने लगती है। इसका कारण सही खानपान नहीं होना है जो पाचन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। ऐसे में व्यक्ति नियमित तौर पर दस्त या ​कब्जियत की समस्या से जूझने लगता है। इन समस्याओं के साथ पेट में ऐंठन व दर्द रहता है। कुछ समय बाद यह कोलोरेक्टल कैंसर यानि बड़ी आंत के कैंसर का रूप ले लेता है। कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया भर में तीसरा सबसे अधिक होने वाला कैंसर है। इस कैंसर के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रति वर्ष एक से 31 मार्च तक राष्ट्रीय कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। बड़ीं आंत का कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है। इसकी शुरुआत बड़ी आंत की दीवार के सबसे भीतरी परत में छोटी सूजन से होती है।
बड़ी आंत के कैंसर के संभावित लक्षणों की रखें जानकारी :
मुंगेर जिला के गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के. रंजन ने बताया कि बड़ी आंत के कैंसर के संभावित लक्षणों की पहचान कर पेट की जांच अवश्य करानी चाहिए। कोलोरेक्टल कैंसर के संभावित लक्षणों में मल त्याग की आदतों में परिवर्तन और लगातार दस्त रहना, कब्जियत रहना या पेट का पूरी तरह से साफ नहीं रहना आदि है। इसके अलावा व्यक्ति को हमेशा कमजोरी और थकान, भूख नहीं लगना, वजन कम होना, एनीमिया, पेट में दर्द या बेचैनी, मल में हमेशा खून आना, गैस्ट्रिक, पेट में ऐंठन व दर्द आदि की समस्या रहती है। ऐसे लक्षणों की अनदेखी करना जोखिम भरा हो सकता है। अमूमन लोग इस प्रकार के लक्षणों को साधारण पेट की समस्या मान कर बिना चिकित्सीय परामर्श के ही दवा का सेवन करते रहते हैं। ये सभी लक्षण बड़ी आंत के कैंसर की तरफ इशारा करते हैं। यदि व्यक्ति इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजिज से पीड़ित हों तो जांच जरूरी हो जाती है।
फाइबर वाले भोजन और नियमित व्यायाम का रखें ध्यान :
उन्होंने बताया कि बड़ी आंत के कैंसर से बचाव के लिए वसा वाले भोजन से दूरी बनायें करते हुए बहुत अधिक प्रोसेस्ड मीट का सेवन नहीं करना चाहिए। कम फाइबर वाले खाद्य पदार्थ कब्जियत बनाते हैं। इसलिए आहार में फाइबर वाली सब्जियां व फल लें। मोटापा से बचाव, सही वजन के लिए नियमित व्यायाम आदि का ध्यान रखें। धूम्रपान व शराब से भी पेट की आंत को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए रोजाना 30 मिनट तक व्यायाम जरूर करें। कैल्सियम तथा विटामिन डी से भरपुर खाद्य पदार्थ लें। इसके अलावा मधुमेह, मोटापा,  कम फाइबर आहार लेना, एक बड़ा जोखिम होता है। रेशे वाले फल सब्जियों में फाइबर होता है। फाइबर वाले खाद्य पदार्थ पेट को आसानी से साफ करते हैं। इससे गैस्ट्रिक सिस्टम भी सही ढंग से काम करता है। शरीर में फाइबर की कमी से कई परेशानियां होने का खतरा रहता है। फाइबर नहीं होने से आंतों का काम करना बंद होने लगता है। फाइबर भोजन को एकत्र कर बड़ी आंत तक ले जाता है जिससे पाचन की प्रकिया में मदद मिलती है। फाइबरयुक्त चीजों में चोकर सहित गेहूं के आटे, हरी पत्तेदार सब्जियां, सेब, पपीता, अंगूर, खीरा, टमाटर, प्याज, छिलके वाली दाल, सलाद, ईसबगोल की भूसी, दलिया, सूजी  में पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है। इसे अपने आहार का हिस्सा जरूर बनायें।

शिशु को डायरिया निमोनिया से बचाव के लिए नियमित स्तनपान जरूरी

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-जन्म के पहले घंटे के भीतर का स्तनपान, बनेगा जीवन का वरदान
लखीसराय, 3 मार्च-
कोरोना संक्रमण के बाद हम सभी को एहतियात बरतने के साथ  रोग प्रतिरोधक क्षमता को  भी लेकर जागरूक रहने की जरूरत  है। ऐसे में शिशुओं के भी पोषण का खास ख्याल रखा जाना जरूरी है। शिशुओं के लिए आधारभूत पोषण में स्तनपान शामिल है। बच्चे के सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए माँ का दूध जरूरी  है। माँ के दूध  के अलावा छ्ह माह तक के बच्चे को ऊपर से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है। स्तनपान कराने से बच्चे में भावनात्मक लगाव पैदा होता है और उसे यह सुरक्षा का बोध भी कराता। लैंसेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 फीसद और 15 फीसद कमी लायी जा सकती है।
शुरुआती स्तनपान जरूरी: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक भारती ने बताया डायरिया व निमोनिया से बचाव के लिए स्तनपान बहुत अधिक कारगर है। माँ के दूध की महत्ता को समझते स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी यह सुनिश्चित कराया जा रहा है कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे को माँ की छाती पर रखकर स्तानपान की शुरुआत लेबर रूम के अंदर ही हो। इसके अलावा माँ को स्तनपान की पोजीशन, बच्चे का स्तन से जुड़ाव और माँ के दूध निकालने की विधि को समझाने में भी नर्स द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है । ताकि कोई भी बच्चा अमृत समान माँ के दूध से वंचित न रह जाये।
उन्होंने बताया कि यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाये तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। बच्चे को छ्ह माह तक लगातार केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए और उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय अथवा भैंस का दूध नहीं देना चाहिए। क्योंकि वह बच्चे के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सम्पूर्ण आहार के रूप में  काम करता है। बच्चे को हर डेढ़ से दो घंटे में भूख लगती है। इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके माँ का दूध पिलाते रहना चाहिए। माँ का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है लेकिन वह बच्चे के लिए पूर्ण होता है। अधिकतर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनका दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं पड़ रहा  और वह बाहरी दूध देना शुरू कर देती हैं। जो कि एक भ्रांति के सिवाय और कुछ नहीं है। माँ के दूध में भरपूर पानी और पोषक तत्व होते हैं इसलिए बच्चे को बाहर का कुछ देने की जरूरत नहीं होती।

कोरोना काल में शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाकर खुद को रखें स्वस्थ्य

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-शारीरिक गतिविधियां बढ़ने से बिना संक्रमण वाली बीमारियों से होता है बचाव
-घर से निकलते वक्त मास्क जरूर पहनें और खुली हवा में रहने की कोशिश करें
बांका, 3 मार्च
कोरोना  काल में लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने लगे हैं। लोग न सिर्फ मास्क और ग्लब्स पहन रहे हैं, बल्कि स्वस्थ्य रहने के लिए अन्य एहतियात भी बरत रहे हैं। बहुत सारे लोगों ने खाना-पीना पर नियंत्रण कर रखा है तो कुछ लोग योग और ध्यान कर खुद को स्वस्थ्य रख रहे। ये सारी चीजें तो जरूरी हैं ही, इसके साथ-साथ शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाकर भी लोग खुद को निरोग और स्वस्थ्य रख सकते हैं।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं शारीरिक गतिविधियां तो पहले भी लोग करते थे,  लेकिन कोरोना काल में ऐसा करने वालों की संख्या बढ़ी है। पहले सिर्फ जागरूक लोग ऐसा करते थे, लेकिन कोरोना काल में आमलोगों का भी रुझान इस ओर बढ़ा है। दरअसल, शारीरिक गतिविधियों से न सिर्फ शरीर स्वस्थ्य रहता है, बल्कि तमाम रोगों से भी बचाव होता है। खासकर वैसे रोग जिसका संक्रमण दूसरे से नहीं होता है। वैसी बीमारियां शारीरिक गतिविधियां रहने से नहीं होती हैं।
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता होती है विकसित: डॉ. चौधरी कहते हैं शारीरिक गतिविधियां करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे तमाम तरह की बीमारियों से लोगों का बचाव होता है। अगर व्यक्ति किसी बीमारी की चपेट में आ भी गया तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अधिक रहने से वह व्यक्ति जल्द ही उस बीमारी से उबर जाता है। इसलिए लोगों को शारीरिक गतिविधियों को करते रहना चाहिए।
शुगर, हार्ट और हाइपरटेंशन से होता है बचाव: डॉक्टर चौधरी कहते हैं शारीरिक गतिविधियां करने से लोग शुगर, हाइपरटेंशन और हार्ट की बीमारियों से बचे रहते हैं। यह सारी बीमारियां शरीर बढ़ने से हो जाती है। यानी वजन अधिक रहने से। वजन बढ़ने से लोग शुगर की चपेट में भी आते हैं। आमतौर पर जिस व्यक्ति को शुगर है, वह व्यक्ति हाइपरटेंशन की भी चपेट में आ जाता है। फिर ह्रदय(हार्ट) की बीमारी की चपेट में आ जाता है। जो व्यक्ति शारीरिक गतिविधियां करते हैं, वे इन सब बीमारियों से बचे रहते हैं।
मानसिक तौर पर  मिलती है राहत: डॉ. चौधरी कहते हैं शारीरिक गतिविधियां करने से लोग मानसिक तौर पर स्वस्थ्य रहते हैं। जो व्यक्ति सुबह की सैर (मॉर्निंग वॉक) करता हो या फिर शरीर को ज्यादा समय तक सक्रिय (एक्टिव) रखता हो, उस व्यक्ति में किसी तरह का तनाव (स्ट्रेस) नहीं आता है। इस वजह से वह मानसिक तौर पर मजबूत रहता है। ऐसे व्यक्ति लोगों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाते हैं।