अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर पटना में आयोजित सम्मान समारोह में जिले की तीन महिला स्वास्थ्यकर्मी सम्मानित 

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– कोविड और स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर किया गया सम्मानित
खगड़िया, 10 मार्च।
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शुरुआत में पता चलने पर किडनी की बीमारी पर हो सकता है नियंत्रण

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-इसके लिए नियमित तौर पर ब्लडप्रेशर और शुगर की जांच कराएं
-किडनी की बेहतर देखभाल कर लोग जी सकते हैं स्वस्थ्य जीवन
किडनी दिवस;
बांका, 10 मार्च
10 मार्च को हर साल विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है। इस बार का थीम किडनी हेल्थ फॉर ऑल है। किडनी की बेहतर तरीके से देखभाल हो सके, इसे लेकर तमाम तरह के जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। किडनी की बेहतर तरीके से देखभाल की जानकारी लोगों को होना जरूरी है। लोगों को जाकरूकता कार्यक्रम से जानकारी इकट्ठा कर उस पर ध्यान देने करने की जरूरत है। इसे लेकर जांच और इलाज से लेकर जो भी जरूरी बाते हैं उस पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि बेहतर जीवन जी सकें।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि किडनी की बीमारी का अगर शुरुआत में पता चल जाता है और इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। साथ ही इसका पूरी तरीके से इलाज संभव है। इसके लिए जरूरी है कि लोग नियमित तौर पर शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहें। साथ ही खून की मात्रा और प्रोटीन की जांच के साथ खून में यूरिया व किडनी की पथरी की जांच नियमित तौर पर करवानी चाहिए। साथ ही पेशाब की मात्रा व धार की भी जांच नियमित तौर पर जरूरी है। जांच में अगर कुछ निकल कर आता है तो डॉक्टर के मुताबिक दवा का सेवन करना चाहिए। ऐसा करते रहने से हम किडनी की बेहतर तरीके से देखभाल कर सकेंगे।
शुगर के मरीज रहें संभलकरः डॉ. चौधरी कहते हैं कि शुगर के मरीजों को किडनी की बीमारी को लेकर विशेष तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है। लापरवाही करने पर शुगर के मरीजों की किडनी खराब होने का खतरा ज्यादा रहता है। यदि शुगर अनियंत्रित हो जाता है तो आगे चलकर सीकेडी यानी क्रॉनिक किडनी डिजीज का शिकार हो जाता है। इससे आगे चलकर दोनों किडनी खराब होने की आशंका रहती है। इसलिए शुगर के मरीज नियमित तौर पर ब्लडप्रेशर और शुगर की जांच कराते रहें। 35 साल से अधिक उम्र होने पर तो जरूर नियमित तौर पर जांच कराते रहें।
कोरोना काल में बेहतर देखभाल करने की जरूरतः वैसे तो हमेशा लोगों को किडनी के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन कोरोना काल में इस पर खास ध्यान की जरूरत है। डॉ चौधरी कहते हैं कि कोरोना की तीनों लहर में देखा गया कि किडनी के मरीज अगर संक्रमित हुए तो उन्हें परेशानी ज्यादा हुई। गंभीर स्थिति होने पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इसलिए जो लोग किडनी के बीमार हैं, उन्हें कोरोना को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। कोरोना की सभी गाइडलाइन का पालन करने की जरूरत है, ताकि किडनी के मरीज कोरोना की चपेट में जल्द नहीं आ सकें।
नियमित तौर पर करें व्यायामः डॉ. चौधरी कहते हैं कि बार-बार पेशाब होना या पेशान में खून आना या फिर जलन की समस्या हो तो सतर्क रहने की जरूरत है। इसके अलावा जल्दी थक जाना, पैरों व आंखों में सूजन आना , ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होना और पेशाब की मात्रा में कमी आने की शिकायत हो तो भी सतर्क हो जाएं। इससे बचने के लिए नियमित तौर पर व्यायाम करें। खूब पानी पीएं। रोजाना तीन से चार लीटर पानी पीएं। धूम्रपान, शराब या किसी भी तरह के नशे से दूरी बनाकर रहें। फास्ट फूड से भी बचें। खाने में नमक का कम सेवन करें। दर्द की गोलियों का सेवन अनावश्यक तौर पर नहीं करें। डॉक्टर अगर दर्द की गोली खाने की सलाह दे, तभी उसका सेवन करें। इन सावधानियों को अगर हम अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेते हैं तो किडनी की बेहतर तरीके से देखभाल कर सकते हैं।

स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं की हुई प्रसव पूर्व जाँच 

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– प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर का आयोजन कर जाँच
– सामान्य और सुरक्षित प्रसव को लेकर दी गई आवश्यक जानकारियाँ
खगड़िया, 09 मार्च-
बुधवार को जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी, रेफरल ,अनुमंडलीय व जिला अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की  प्रसव पूर्व (एएनसी) जाँच की गई। यह जाँच स्वास्थ्य संस्थानों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर आयोजित कर की गई। जिसमें बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं ने आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए एएनसी जाँच करवाई। इस दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती की जाँच की गई और जाँच के पश्चात चिकित्सकों द्वारा आवश्यकतानुसार चिकित्सा परामर्श दिया गया। जिसमें रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ,  समेत अन्य चिकित्सा परामर्श विस्तार पूर्वक दिया गया।
– गर्भवती महिलाओं की हुई समुचित जाँच :
आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं शामिल  हुईं । शिविर में जाँच कर रही मेडिकल टीम द्वारा गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन, यूरिन, एचआईवी, ब्लड ग्रुप, बीपी, हार्ट-बिट आदि की भी जाँच की गई। एएनसी जांच के लिए शिविर में मौजूद महिलाओं को प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने की सलाह दी गई।
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत जाँच करानी चाहिए। दरअसल, समय पर जाँच कराने से किसी भी प्रकार की परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता चल जाता जिससे उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक माह की 09 तारीख को पीएचसी स्तर पर एएनसी जाँच की व्यवस्था की गई है। ताकि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार की अनावश्यक शारीरिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिल सके। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है।
– शिशु-मृत्यु दर में कमी लाने की है बेहतर व्यवस्था :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जाँच के लिए की गई यह व्यवस्था शिशु-मृत्यु दर में कमी लाने की बेहतर व्यवस्था है। सरकार की यह व्यवस्था मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में अच्छी पहल है। इससे  सुरक्षित प्रसव व शिशु-मृत्यु दर पर भी विराम लगेगा। इसके साथ ही जच्चा-बच्चा दोनों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
– संस्थागत प्रसव को लेकर किया गया जागरूक :
केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक राजेश पांडेय ने बताया, एएनसी जाँच के दौरान महिलाओं को संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूक किया गया। इस दौरान सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई। ताकि महिलाओं में सुरक्षा के दृष्टिकोण से संस्थागत प्रसव को लेकर किसी प्रकार की हिचकिचाहट नहीं रहे और सभी महिलाएं संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दें।

बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए सही और संतुलित आहार के साथ सही देखभाल जरूरी 

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– सही और संतुलित पोषण से बच्चे नहीं होते हैं बौनापन का शिकार
 – जन्म से छह माह तक बच्चे के लिए मां का स्तनपान ही सम्पूर्ण आहार,इसके बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार है जरूरी
मुंगेर, 09 मार्च-
गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और शिशु को संतुलित पोषण सुनिश्चित कराना पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहा है।  कोरोना महामारी के दौर ने इस समस्या को और भी गति दी है।  मातृ एवं शिशुओं को कुपोषण के दंश से बचाने के लिए पोषण पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है जितना कि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन युक्त शुद्ध हवा ।
एनआरसी मुंगेर की फीडिंग डिमांस्ट्रेटर रचना भारती ने बताया कि सही और संतुलित पोषण न मिलने से बच्चे बौनेपन के शिकार हो जाते हैं। इसलिए प्रसव के  एक घन्टा के भीतर ही शिशु को स्तनपान कराना चाहिए। इससे बच्चे की रोग- प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। शिशु जन्म के 6 महीने बाद तक बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां का स्तनपान ही कराना चाहिए। इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए ।
छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार है जरूरी :  उन्होंने बताया कि 6 माह के बाद बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से शुरू हो जाता है। इसलिए 6 माह के बाद सिर्फ स्तनपान से जरूरी पोषक तत्त्व बच्चे को नहीं मिल पाता है। इसलिए छ्ह माह के उपरान्त अर्ध ठोस आहiर जैसे खिचड़ी, गाढ़ा दलिया, पका हुआ केला एवं मूंग का दाल दिन में तीन से चार बार जरूर देना चाहिए। दो साल तक अनुपूरक आहार के साथ माँ का दूध भी पिलाते रहना चाहिए ताकि शिशु का पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास हो पाए। उन्होंने बताया कि उम्र के हिसाब से ऊँचाई में वांछित बढ़ोतरी नहीं होने से शिशु बौनेपन का शिकार हो जाता है। इसे रोकने के लिए शिशु को स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरूर देना चाहिए।
एनआरसी मुंगेर के नोडल अधिकारी विकास कुमार ने बताया कि शुरुआत के 1000 दिन नवजात शिशु के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है । जो कि महिला के गर्भधारण करने से हीं प्रारम्भ हो जाते हैं। आरंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों का  शारीरिक एवं बौद्धिक विकास अवरुद्ध हो सकता है। जिसकी भरपाई बाद में नहीं हो पाती है। शिशु जन्म के बाद पहले वर्ष का पोषण बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के स्वस्थ्य विकास और रोग प्रतिरोधकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शुरुआती के 1000 दिनों में बेहतर पोषण सुनश्चित होने से मोटापा और जटिल रोगों से भी बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिला को प्रतिदिन के भोजन के साथ आयरन ,फॉलिक एसिड एवं कैल्सियम की गोली लेना भी जरूरी है। इसके साथ ही एक गर्भवती महिला को अधिक से अधिक आहार सेवन में भी विविधता लानी चहिए। गर्भावस्था में बेहतर पोषण शिशु को भी स्वस्थ्य रखने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान आयरन और फॉलिक एसिड के सेवन से महिला एनीमिया से सुरक्षित रहती  एवं इससे प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से होने वाली जटिलताओं से भी बचा जा सकता है। वहीँ कैल्सियम का सेवन भी गर्भवती महिलाओं के लिए काफ़ी जरूरी है। इससे गर्भस्थ शिशु के हड्डी का विकास पूर्ण रूप से हो पाता एवं जन्म के बाद हड्डी संबंधित रोगों से शिशु का बचाव भी होता है।

कायाकल्प की टीम ने खरीक और नारायणपुर पीएचसी का किया निरीक्षण

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-अस्पताल के अंदर और परिसर की सफाई व्यवस्था को देखा और जानकारी ली
-नारायणपुर पीएचसी की सफाई व्यवस्था से कायाकल्प की टीम संतुष्ट दिखी
भागलपुर, 9 मार्च।
कायाकल्प की टीम ने बुधवार को खरीक और नारायणपुर पीएचसी का निरीक्षण किया। टीम में डीएचएस के डॉ. प्रशांत, केयर इंडिया के एफपीसी जितेंद्र कुमार सिंह और पीरपैंती के स्वास्थ्य मैनेजर प्रणव कुमार सिंह थे। टीम के सदस्यों ने दोनों अस्पतालों की सुविधाओं को देखा। खासकर अस्पताल की सफाई व्यवस्था की टीम ने बारीकी से निरीक्षण किया। मालूम हो कि पहले कायाकल्प की जिले की टीम के निरीक्षण में दोनों ही अस्पताल खरा उतरा है। इसके बाद फिर से टीम ने निरीक्षण किया। इसमें भी खरा उतरने पर अस्पताल को पुरस्कार के तौर पर मोटी राशि मिलती है।
टीम ने सबसे पहले खरीक पीएचसी का निरीक्षण किया। यहां पर प्रभारी डॉ. नीरज कुमार सिंह से अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सारी सुविधाओं की जानकारी ली। डॉ. प्रशांत ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था संतोषजनक थी। प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थियेटर साफ-सुथरा था। हालांकि सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है, लेकिन व्यवस्था फिर भी ठीक-ठाक थी। जो भी कमियां थीं, उसे ठीक करने के लिए कहा गया। वहीं प्रभारी डॉ. नीरज कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में सफाई पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को यहां से किसी तरह का संक्रमण नहीं हो, इसका हमलोग ख्याल रखते हैं। उम्मीद है कि कायाकल्प की टीम यहां की व्यवस्था से संतुष्ट हुई होगी और अस्पताल को बेहतर अंक मिलेगा।
खरीक में निरीक्षण करने के बाद कायाकल्प की टीम नारायणपुर पीएचसी गई। वहां पर भी सभी लोगों ने अस्पताल के अंदर से लेकर परिसर तक की सफाई व्यवस्था को परखा। डॉ. प्रशांत ने बताया कि यहां व्यवस्था अच्छी थी। खासकर सफाई का बेहतर तरीके से ध्यान रखा जाता है। न सिर्फ अस्पताल के अंदर, बल्कि परिसर भी साफ-सुथरा था। प्रसव कक्ष, ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर में गंदगी नहीं दिखी। कुल मिलाकर नारायणपुर पीएचसी की व्यवस्था से कायाकल्प की टीम संतुष्ट नजर आई। प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि हमलोगों ने ठीक से तैयारी की थी। अब कायाकल्प की टीम कितनी संतुष्ट हुई, यह अंक मिलने के बाद पता चलेगा। उन्होंने बताया कि सिर्फ कायाकल्प के निरीक्षण के दौरान ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी अस्पताल में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। मरीजों का स्वच्छ माहौल में यहां पर इलाज किया जाता है।
टॉप करने पर 17 लाख की मिलती है राशिः कायाकल्प की टीम के निरीक्षण में राज्य भर में टॉप करने पर अस्पताल को 17 लाख रुपये की राशि मिलती है। दूसरे और तीसरे स्थान वाले को भी राशि मिलती है। उस राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाने पर खर्च किया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि अस्पताल के कर्मियों में उत्साह बढ़ाने के लिए खर्च किया जाता है। दोनों ही अस्पताल पहले जिला स्तरीय टीम के निरीक्षण में खरा उतर चुकी है। अब अगर राज्य स्तरीय कायाकल्प टीम के निरीक्षण में खरा उतरता है तो पुरस्कार का हकदार हो जाएगा।

एसजेएमसी में डिजिटल शिक्षा और सामग्री विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न

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-प्रतिभागियों को मिला प्रमाण पत्र
-इस तरह की कार्यशाला आगे भी होना चाहिए
-प्रतिभागियों को दो दिन लगे कम
पटना:
पत्रकारिता और जनसंचार स्कूल (एसजेएमसी), आर्यभट्ट नॉलेज में ‘डिजिटल एजुकेशन: मल्टीमीडिया कंटेंट डेवलपमेंट एंड डिलीवरी’ नामक नए और अभिनव डिजिटल मीडिया पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आज भी जारी रही। पटना स्थित विश्वविद्यालय में कार्यशाला का आयोजन कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (सीईसी), नई दिल्ली के सहयोग से हुआ । सीईसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का एक स्वायत्त संगठन है जो संचार के विभिन्न आईसीटी मोड के माध्यम से शैक्षिक सामग्री के प्रसार के लिए जिम्मेदार है।
ऑडियो-विजुअल संचार समझ को बढ़ाते है
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. इफ्तेकर अहमद, निदेशक, एसजेएमसी, एकेयू द्वारा डिजिटल शिक्षा में ऑडियो-विजुअल संचार को बढ़ाने पर आयोजित कार्यशाला की कार्यवाही की प्रस्तुति के साथ हुई। प्रो. तेजिंदरपाल सिंह, पीयू, चंडीगढ़ ने प्रतिभागियों को डिजिटल शिक्षा और शिक्षाशास्त्र पर विस्तार से बताया। उन्होंने ई-कंटेंट डेवलपमेंट एंड क्रिएशन के बारे में बात की।  प्रो. एस.के. भौमिक, निदेशक, पाटलिपुत्र स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स ने समापन सत्र में एकेयू की स्थापना और इस कार्यशाला की उपयोगिता के बारे में बात करते हुए संबोधित किया।
कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर हुआ
श्री असंगबा चुबा एओ, सचिव, शिक्षा विभाग, एसडी, सरकार बिहार सरकार ने कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र  प्रदान किया।
कार्यक्रम का संचालन एसजेएमसी की समन्वयक डॉ मनीषा प्रकाश ने किया। कार्यक्रम में यहाँ के बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। विभाग के शिक्षक डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. अमित कुमार और डॉ. अफ़ाक हैदर पूरी सक्रियता के साथ बच्चों का हौसला बढ़ाते दिखें।

हर क्षेत्र में महिलाएं लहरा रही हैं कामयाबी का परचम, बढ़ा रही है समाज का मान : जिलाधिकारी

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– अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस • कलेक्ट्रेट परिसर से निकाली गई बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जागरूकता रथ
– जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रथ को किया रवाना, बेहतर कार्य करने वाली महिलाओं को किया गया सम्मानित
खगड़िया, 08 मार्च-
मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के सम्मान में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें कोविड, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाली जिले की महिला डाॅक्टर, एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ताओं समेत अन्य कर्मियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जागरूकता रथ निकाली गयी, जिसे जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने हरी झंडी दिखाकर कलेक्ट्रेट परिसर से रवाना किया। जिसके माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इससे पूर्व इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि हर क्षेत्र में महिलाएं कामयाबी और सफलता की परचम लहरा रही हैं,जो सामुदायिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव का परिणाम है। किन्तु, अभी और बदलाव की जरूरत है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि बेटों की तरह बेटियों को भी आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक सहयोग करें। इस मौके पर आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी, जिला समन्वयक अंबुज कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद आदि मौजूद थे।
– हम किसी से कम नहीं दावे को मेहनत के बल पर सार्थक रूप दे रही महिलाएं :
इस अवसर पर आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने कहा, बदलते दौर में सामाजिक कुरीतियों को मात मिली है। जिसका जीता जागता उदाहरण यह है कि आज हर क्षेत्र में बेटों से बेटियाँ आगे निकल रही और हम किसी से कम नहीं के दावे को अपने मेहनत के बल पर सार्थक रूप दे रही हैं। सिर्फ, बेटियों को थोड़ी सी सपोर्ट मिल जाए तो बड़ी उड़ान निश्चित है। इसलिए, इस बदलते दौर में हर किसी को बेटे-बेटियाँ में फर्क वाली कुप्रथाओं को भूलने और सहयोग करने की जरूरत है।
– बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नारे को सार्थक रूप देने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने कहा, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को नारे को सार्थक रूप देने के लिए हर किसी को बेटे की तरह बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को स्थापित करने और बेटियों के प्रति पुराने ख्यालातों से बाहर आकर सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की जरूरत है। हालाँकि, बीते जमाने की तरह सामाजिक स्तर पर बहुत बदलाव हुआ भी है, किन्तु अभी और सकारात्मक बदलाव की जरूरत है। जैसे-जैसे लोगों की मानसिकता बदल रही है वैसे-वैसे बेटियाँ आगे बढ़ रही हैं। हर क्षेत्र में बेटियाँ कामयाबी की मिसाल पेश कर नई कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। अब वो दिन दूर नहीं, जब हर क्षेत्र के शीर्ष कमान की जिम्मेदारी बेटियों के हाथ होगी।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाने में जुटी  हैं एएनएम शांति कुमारी 

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– विश्व महिला दिवस • उम्र के आखिरी पड़ाव में भी नहीं थकी शांति, समाज के आखिरी  व्यक्ति तक पहुँचा रही स्वास्थ्य सुविधा
– नियमित टीकाकरण के साथ परिवार नियोजन के लिए भी योग्य महिलाओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में कर रही है सहयोग
लखीसराय, 08 मार्च-
आज पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर तमाम चुनौतियों को अवसर के रूप में लेकर बेहतर कार्य करने वाली तमाम महिलाओं को सम्मानित किया जा रहा है। ऐसे ही महिलाओं में एक एएनएम का नाम पूरे जिले में शुमार है। कहते हैं अगर किसी महिला में पूरी शिद्दत से किसी कार्य को करने की चाह जाग जाए तो दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जिसे वह नहीं कर सकती है। कुछ ऐसी ही सोच को साकार किया है लखीसराय पीएचसी अंतर्गत चानन प्रखंड के नक्सल प्रभावित और सुदूरवर्ती इलाके में स्थित कुंदर पंचायत में संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्र में तैनात एएनएम शांति कुमारी। शांति की उम्र तकरीबन 55 वर्ष यानी अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में है। बावजूद इसके ना वह थकी और ना ही उनके कदम रुके। मसलन, उम्र के अंतिम पड़ाव में भी वह तमाम चुनौतियों को अवसर के रूप में लेकर नक्सल प्रभावित और सुदूरवर्ती इलाके में स्थित अपने कार्य क्षेत्र में लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए पूरी शिद्दत के साथ जुटी हैं।
– समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुँचा  रही स्वास्थ्य सुविधा का लाभ :
एएनएम शांति कुमारी, जिस क्षेत्र में कार्यरत हैं,उसका सफ़र बहुत कठिन एवं  विषम परिस्थितियों से भरा  है। इसके  बावजूद वह नियमित रूप से अपने क्षेत्र जाती और लोगों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की ना केवल जानकारियाँ देतीं  बल्कि सुविधा का लाभ भी दिलाने में जरूरी सहयोग करती हैं। ताकि समाज के आखिरी व्यक्ति को भी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ मिल सके और सरकार की मंशा फलीभूत हो सके।
– नियमित टीकाकरण से लेकर परिवार नियोजन की सुविधा उपलब्ध कराने में कर रही है बेहतर कार्य :
एएनएम शांति अपने क्षेत्र की सभी गर्भवती और बच्चा को नियमित टीकाकरण (आर आई) से आच्छादित करने को लेकर  ना केवल रूटीन वर्क की तरह आंगनबाड़ी जाकर टीकाकरण करती बल्कि, एक दिन पूर्व टीकाकरण कराने के लिए ऐसे लाभार्थियों को जागरूक कर प्रेरित भी करती हैं। इसके अलावा वह अपने क्षेत्र के योग्य और सक्षम व  इच्छुक लाभार्थियों को परिवार नियोजन के लिए भी जागरूक कर प्रेरित करती हैं। इस दौरान अधिकाधिक लाभार्थी परिवार नियोजन के स्थाई साधन को  अपनाएं, इस बात का विशेष ख्याल रखती हैं। ताकि सभी परिवार तमाम चुनौतियों के बाबजूद गुणवत्तापूर्ण जीवन-यापन कर सके। शांति की इस पहल का उक्त नक्सल प्रभावित और सुदूरवर्ती इलाके के लोगों में सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। वहीं, शांति बताती हैं कि मेरा एक ही सपना है स्वस्थ्य, स्वच्छ और शिक्षित समाज का निर्माण हो। यह तभी संभव होगा, जब सामुदायिक स्तर पर लोगों में जागरूकता आएगी। इसी उद्देश्य से मैं अपने वर्क प्रोफाइल से हटकर लोगों को हर स्तर पर जागरूक कर रही हूँ।

शत-प्रतिशत कोरोना टीकाकरण को लेकर बैठक आयोजित कर किया गया जागरूक

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– बाँका प्रखंड के दुधारी पंचायत के मुखिया की अध्यक्षता में बैठक का हुआ आयोजन
– पंचायत के जनप्रतिनिधि, गणमान्य और बुद्धिजीवी हुए शामिल
बाँका, 08 मार्च-
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मंगलवार को बाँका प्रखंड के दुधारी पंचायत में 15 वर्ष एवं इससे ऊपर सभी आयु वर्ग के सभी व्यक्तियों का शत-प्रतिशत कोरोना टीकाकरण सुनिश्चित कराने को एक बैठक आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता पंचायत की मुखिया समीना खातुन एवं संचालन पिरामल स्वास्थ्य के डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम लीड मासूम रेजा ने की। बैठक में पंचायत के सभी जनप्रतिनिधि, गणमान्य और बुद्धिजीवी शामिल हुए। बैठक में उपस्थित सभी गणमान्यों को  डी पी एल मासूम रेजा के द्वारा कोरोना टीकाकरण के महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ भ्रांतियों को दूर करते हुए कोरोना टीका से होने वाले फायदे समेत अन्य जानकारियाँ भी दी गई। इस मौके पर राधिया देवी, किरण कुमारी, चंद्रशेखर कुमार, हेमा देवी, काजल कुमारी, घनश्याम साह,कांति देवी, इम्तियाज अंसारी, शंकर बेसरा, कल्पना देवी, बीबी सुलेटा खातून, महफूज आलम, विपिन यादव, जियाउल अंसारी, बसंती देवी, आशा देवी, अमीन कुमार दास आदि मौजूद थे।
– सभी वार्डों में शिविर आयोजित कर वंचितों को किया जाएगा टीकाकृत :
पिरामल के डी पी एल मासूम रेजा ने बताया, पंचायत के सभी 17 वार्डों में बारी-बारी से टीकाकरण शिविर का आयोजन कर अबतक टीका से वंचित लोगों को टीकाकृत किया जाएगा। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और वंचित लोगों की संख्या शून्य हो सके। साथ ही शिविर के सफल संचालन को लेकर स्थानीय आशा कार्यकर्ता, आँगनबाड़ी सेविका समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा घर-घर लोगों जागरूक किया जाएगा और आयोजित शिविर में आकर टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा।
– शिविर के सफल संचालन में हर संभव किया जाएगा सहयोग :
मुखिया समीना खातुन ने कहा, आयोजित होनी वाले शिविर के सफल संचालन के लिए मैं अपने स्तर हरसंभव जरूरी और सकारात्मक सहयोग करूँगी। साथ ही मैं पंचायत के सभी जनप्रतिनिधियों से भी अपने स्तर से लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक करने की अपील करती हूँ। तभी पूरे पंचायत का टीकाकृत होना संभव है।

बेहतर कार्य करने वाली महिला डाॅक्टर, एएनएम, सेविका और आशा कार्यकर्ताओं को किया गया सम्मानित 

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– अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस •  शहर के एक होटल में सम्मान समारोह का आयोजन कर प्रशस्ति-पत्र और उपहार देकर किया गया सम्मानित
– राज्य के दस जिलों के लाभार्थियों को किया गया सम्मानित,  बेहतर कार्य के लिए दी गई बधाई
भागलपुर, 08 मार्च-
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मंगलवार को शहर के एक होटल में कोविड, पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाली महिला डाॅक्टर, एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने के लिए एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है। यह आयोजन स्वास्थ्य विभाग, केयर इंडिया और आईसीडीएस के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जिसका उदघाटन सिविल सर्जन डाॅ उमेश कुमार शर्मा, डीपीएम फैजान आलम अशर्फी, क्षेत्रीय निदेशक (स्वास्थ्य) डाॅ अजय कुमार सिंह, आईसीडीएस की डीपीओ सीलिमा कुमारी, केयर इंडिया की डीटीओ-ऑन सुपर्णा टाट ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित और फीता काटकर विधिवत रूप से किया। इस आयोजन में प्रदेश के दस जिलों के चयनित लाभार्थियों को प्रशस्ति-पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया गया। जिसमें भागलपुर सहित बाँका, जमुई, नवादा, खगड़िया, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज और मुंगेर के बेहतर कार्य करने वाली महिला डाॅक्टर, एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ता को सम्मानित व बेहतर कार्य करने के लिए बधाई दी गई। इस मौके पर जिला स्वास्थ्य समिति के डाॅ प्रशांत कुमार, केयर इंडिया के राजेश मिश्रा, कन्हैया कुमार, आलोक कुमार, मानस नायक, कुणाल कुमार आदि मौजूद थे।
– बेटों से आगे निकल रही है बेटियाँ, सिर्फ सकारात्मक सहयोग  जरूरी : इस अवसर पर सिविल सर्जन डाॅ उमेश कुमार शर्मा ने कहा कि बदलते दौर में सामाजिक कुरीतियों को मात मिली है। जिसका जीता जागता उदाहरण यह है कि आज हर क्षेत्र में बेटों से बेटियाँ आगे निकल रही हैं। सिर्फ, बेटियों को सकारात्मक सपोर्ट की जरूरत है। इसलिए, मैं मौजूद तमाम लोगों से अपील करूँगा कि पुराने ख्यालातों से बाहर आकर बेटे की तरह ही बेटियों को भी सपोर्ट करें। मुझे भी तीन बेटी और एक बेटा है। किन्तु, मैंने कभी बेटा और बेटी में  फर्क नहीं समझा। बेटे की तरह तीनों बेटियों को भी अच्छी शिक्षा दी।
– हर क्षेत्र में बेटियाँ पेश कर रही  कामयाबी की मिसाल : क्षेत्रीय निदेशक (स्वास्थ्य) डाॅ अजय कुमार सिंह ने कहा, अमेरिका जैसे विकसित देशों से महिला दिवस की शुरुआत हुई और आज पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि बेटियों के प्रति पुराने ख्यालातों से बाहर आकर सामाजिक कुरीतियों को खत्म करना। हालाँकि, बीते जमाने की तरह सामाजिक स्तर पर बहुत बदलाव भी हुआ और अभी और होने की जरूरत है। जैसे लोगों की मानसिकता बदल रही है वैसे-वैसे बेटियाँ आगे बढ़ रही हैं। हर क्षेत्र में बेटियाँ कामयाबी की मिसाल पेश कर नई कीर्तिमान स्थापित कर रही है। वहीं, डीपीएम (हेल्थ) फैजान आलम अशर्फी ने कहा कि अब वो दिन दूर नहीं, जब हर क्षेत्र के शीर्ष कमान की जिम्मेदारी बेटियों की हाथ होगी।