कालाजार उन्मूलन को लेकर ग्रामीण चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण 

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– सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार हाॅल में प्रशिक्षण
– कालाजार उन्मूलन के लिए कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की दी गई जानकारी
शेखपुरा, 28 फरवरी-
कालाजार उन्मूलन अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए सोमवार को सिविल सर्जन डाॅ पृथ्वीराज की अध्यक्षता में उनके ही कार्यालय परिसर स्थित सभागार कक्ष में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें जिले के ग्रामीण चिकित्सकों को कालाजार से संबंधित एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी सह मास्टर ट्रेनर डाॅ अशोक कुमार सिंह एवं वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार द्वारा ग्रामीणों को चिकित्सकों को दिया गया। प्रशिक्षण में मौजूद ग्रामीण चिकित्सकों को कालाजार के लक्षण, कारण, बचाव एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त ग्रामीण चिकित्सक कालाजार से संबंधित मरीजों की आसानी से शुरुआती दौर में ही पहचान कर सकें और मरीजों को उचित इलाज के लिए आवश्यक जानकारी सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध करा सकें। साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए बेहतर तरीके से जागरूक कर सकें। इस प्रशिक्षण में वीबीडीएस मनोज कुमार, केबीसी अभिषेक कुमार आदि मौजूद थे।
– संक्रमित मरीजों को सहयोग करने पर ग्रामीणों चिकित्सकों को प्रति मरीज मिलेंगे 500 रुपये :
सिविल सर्जन डाॅ पृथ्वीराज ने बताया, प्रशिक्षण प्राप्त ग्रामीण चिकित्सकों को संक्रमित मरीजों को सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये दिए जाएंगे। यह लाभ वैसे चिकित्सकों को मिलेगा, जो मरीजों की पहचान कर समुचित इलाज के लिए उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भेजेंगे और इस दौरान मरीजों को आवश्यक सहयोग करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद सभी चिकित्सकों को इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है।
– लक्षण वाले मरीजों को जाँच के लिए नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान भेजने में करेंगे सहयोग :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी सह मास्टर ट्रेनर डाॅ अशोक कुमार सिंह ने बताया, ग्रामीण चिकित्सक अपने क्षेत्र के लक्षण वाले मरीजों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में जाँच कराने के लिए प्रेरित करेंगे। ताकि ससमय उन्हें बीमारी की सही जानकारी मिल सके और उचित इलाज शुरू हो सके। इसके अलावा ऐसे मरीजों को जाँच कराने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो, इसके लिए ग्रामीण चिकित्सक नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान पहुँचने में भी सहयोग करेंगे। साथ ही ऐसे मरीजों को चिह्नित कर स्थानीय पीएचसी को भी जानकारी उपलब्ध करेंगे। इससे ना सिर्फ ऐसे मरीजों का समय पर जाँच और सही बीमारी की जानकारी सुनिश्चित होगी। बल्कि, मरीजों को गंभीर परेशानियाँ का भी सामना नहीं करना पड़ेगा और सुविधाजनक तरीके से आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध करायी जाएगी।
– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।
– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरुनि दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरुनि दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं । छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की समस्याओं को करें दूर

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-गर्भवती महिलाओं को कोई परेशानी हो तो उसे सदर अस्पताल लेकर आएं
-शहरी आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण के पहले दिन मास्टर ट्रेनर ने दिए टिप्स
भागलपुर, 28 फरवरी-
आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को चिह्नित करें और अगर उन्हें कोई परेशानी आ रही हो तो उसका समाधान करें। परेशानी ज्यादा हो तो गर्भवती महिलाओं को सदर अस्पताल लेकर आएं और जरूरी जांच कराएं। उक्त बातें क्षेत्रीय प्रबंधन ईकाई की ओर से शहर के एक होटल में शहरी आशा कार्यकर्ताओं की छह दिवसीय प्रशिक्षण के पहले दिन सोमवार को मास्टर ट्रेनर ने कही। मास्टर ट्रेनर केयर इंडिया की मनीषा और शंभू कुमार ने आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को चिह्नित करने के दौरान उन्हें होने वाली परेशानियों को दूर करने के तरीके भी बताए।
मास्टर ट्रेनर ने प्रशिक्षण के दौरान आशा कार्य़कर्ताओं को प्रसव की संभावित तिथि का पता कैसे लगाना है, इसकी जानकारी दी। इससे परिजनों और गर्भवती महिलाओं को मानसिक रूप से तैयार होने में मदद मिलती है। साथ ही प्रसव से पहले क्या-क्या तैयारी करनी चाहिए, इसकी भी जानकारी दी गई। इस दौरान क्षेत्र में संस्थागत प्रसव पर जोर देने की सलाह आशा कार्यकर्ताओं को दी गई। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षित अभियान के तहत लाभुकों को क्या-क्या फायदा मिलता है, इसके बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए भी कहा गया। हर महीने की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। इससे क्या फायदा होता है, इसे लेकर गर्भवती महिलाओं को जागरूक करने के लिए कहा गया। साथ ही इन लोगों को क्या संवैधिनाक अधिकार मिले हुए हैं, इसके बारे में भी आशा कार्यकर्ताओं को जानकारी दी गई।
गर्भसमापन को है कानूनी मान्यताः मास्टर ट्रेनरों ने आशा कार्यकर्ताओं को बताया कि समाज में गर्भसमापन को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। बहुत लोगों को यह जानकारी नहीं है कि भारत में गर्भसमापन को कानूनी मान्यता मिली हुई है। इसे लेकर 1971 के एमपीटी एक्ट के बारे में भी आशा को बताया गया। आशा कार्यकर्ताओं से कहा गया कि तीन महीने तक की गर्भवती महिलाओं का गर्भसमापन स्थानीय सरकारी अस्पताल में आसानी से हो सकता है। अगर गर्भ दूसरी तिमाही में चला गया है तो वैसी महिलाओं को सदर अस्पताल या फिर मायागंज अस्पताल लेकर जाएं। वहां पर विशेषज्ञों द्वारा आसानी से गर्भसमापन कराया जाएगा। अभी कोरोना काल में बहुत सारी महिलाएं अनचाहे तरीके से गर्भवती हो गई हैं। वे गर्भसमापन करवाना चाहती हैं, लेकिन कानूनी जानकारी नहीं होने और आवागमन की सुविधा कम होने के कारण ऐसा नहीं कर पा रही हैं। ऐसी गर्भवती महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें गर्भसमापन में मदद करें।
इससे पहले छह दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का उद्घाटन क्षेत्रीय अपर निदेशक, स्वास्थ्य सेवाए डॉ. अजय कुमार सिंह, क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक अरुण प्रकाश और क्षेत्रीय आशा समन्वयक कुणाल कुमार और लेखापाल विजय कुमार राम ने संयुक्त रूप से किया। डॉ. अजय कुमार सिंह ने आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका, कौशल और क्षेत्र में कैसे विजिट करना है, इसके बारे में बताया। इसके साथ छह दिन तक चलने वाली ट्रेनिंग का एजेंडा बताया गया, जिसमें किस दिन क्या होगा, इसकी जानकारी दी गई।

कोरोना के सक्रिय मरीज शून्य फिर भी रहें सतर्क

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-स्वास्थ्य विभाग की मेहनत से जिले में कोरोना पर हुआ काबू
-जिले में अब एक भी कोरोना के सक्रिय मरीज नहीं, सभी स्वस्थ
बांका, 28 फरवरी
स्वास्थ्य विभाग की मेहनत की वजह से कोरोना की तीसरी लहर पर अब लगभग काबू पा लिया गया है। जिले में एक भी अब अस्वस्थ मरीज नहीं बचे हैं। सभी मरीज स्वस्थ्य हो चुके हैं। तीसरी लहर के दौरान 1200 से अधिक कोरोना मरीजों की बेहतर तरीके से देखभाल और इलाज किया गया। इतना कुछ के बावजूद अभी भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी पर सतर्कता और टीकाकरण से ही काबू पाया जा सकता है। इसलिए सतर्क रहने का सिलसिला जारी रखें।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि यह बहुत ही अच्छी बात है कि अब कोरोना के कोई सक्रिय मरीज नहीं है। ऐसा सभी लोगों के सहयोग से हो पाया। स्वास्थ्य विभाग के लोगों ने तो बेहतर काम किया ही, साथ में आमलोगों ने भी इसमें सहयोग किया। लोगों ने मास्क पहना, सामाजिक दूरी का पालन किया। कुल मिलाकर कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया। इसी का नतीजा है कि अब स्थिति बेहतर होती जा रही है। लेकिन कोरोना दोबारा पांव नहीं पसार सके, इसलिए अभी कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते रहने की जरूरत है। जरा सा भी लापरवाही लोग नहीं बरतें।
80 प्रतिशत से अधिक का हो गया है टीकाकरणः जिले के 80 प्रतिशत से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इसमें बहुत सारे लोगों ने कोरोना का दूसरा टीका भी ले लिया है। किशोर-किशोरी भी बड़ी संख्या में टीका लेने के लिए सामने आ रहे हैं। साथ में फ्रंटलाइन वर्कर और स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना टीका की प्रीकॉशन यानी तीसरी डोज भी दी जा रही है। जिले की एक बड़ी आबादी ने कोरोना का टीका ले लिया है। बहुत ही कम लोग टीका लेने के लिए बचे हैं। ऐसे बचे हुए लोग भी जल्द से जल्द टीका ले लें तो अच्छा रहेगा। अगर जिले के सभी लोग कोरोना का टीका ले लेंगे तो फिर से कोरोना के पांव पसारने का खतरा कम हो जाएगा।
लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क करेः अगर कोई भी व्यक्ति बीमार पड़े तो उसे डॉक्टर के संपर्क में जाना चाहिए। अगर कोरोना के लक्षण दिखाई तो जांच कराकर डॉक्टर से सलाह लें। साथ ही बिना लक्षण वाले भी कोरोना के मरीज काफी संख्या में इस बार पाए गए। इसलिए कोई परेशानी हो तो उसे नजरअंदाज नहीं करें, बल्कि डॉक्टर से संपर्क कर अपना इलाज करवाएं। खुद डॉक्टर बनने की लापरवाही भारी प़ड़ सकती है।

खगड़िया जिलाधिकारी ने शिशु को दो बूँद दवा पिलाकर पल्स पोलियो अभियान का किया शुभारंभ

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– खगड़िया प्रखंड के परमानंदपुर गाँव स्थित ऑगनबाड़ी केंद्र से अभियान का हुआ शुभारंभ
– जिले के 3.60 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी दो बूँद की खुराक
खगड़िया, 27 फरवरी-
रविवार को जिले में पाँच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ हो गया। यह आगामी 03 मार्च तक चलेगा। इस अभियान की शुरुआत जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने खगड़िया प्रखंड के परमानंदपुर गाँव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर शिशु को पोलियो की दो बूँद दवा पिलाकर की। 03 मार्च तक चलने वाले इस अभियान के सफलतापूर्वक समापन के लिए ड्यूटी में लगे सभी कर्मी चौक-चौराहे, रेलवे स्टेशन, घर-घर जाकर बच्चों को जिंदगी के लिए महत्वपूर्ण दो बूँद पोलियो की दवा पिलाएंगे। साथ ही इस बात का ख्याल रखेंगे कि एक भी बच्चा दवा पीने से छूटे नहीं। इस मौके पर सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, खगड़िया सदर पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव रंजन समेत अन्य पदाधिकारी और कर्मी मौजूद थे।
– जिले के सभी पीएचसी में अभियान का हुआ शुभारंभ :                           सिविल सर्जन  डॉ अमरनाथ झा ने बताया,पल्स पोलियो अभियान का जिले के सभी पीएचसी में शुभारंभ किया गया है। अभियान के सफल संचालन के लिए सुपरवाइजर, कर्मी के दल का गठन किया गया है। जिसमें मुख्य रूप से स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता व ऑगनबाड़ी सेविका को शामिल किया गया है। जो घर-घर जाकर 0 से 05 वर्षों तक बच्चों को पोलियो की दवा पिलएंगी। इसके अलावा चौक-चौराहे, रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक जगहों पर भी दवा पिलाने के लिए कर्मियों की तैनाती की गई है। ताकि सफर पर निकले बच्चे भी दवा पीने से नहीं छूटे और शत-प्रतिशत बच्चों को दवा पिलाई जा सके।
– 3.60 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी दो बूँद की खुराक :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डाॅ देवनंदन पासवान ने बताया,  पूरे जिले में कुल 03 लाख, 60 हजार, 08 सौ 69 बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाने का लक्ष्य है। यह लक्ष्य अभियान के निर्धारित दिनों में पूरा किया जाएगा। दवा पीने से एक भी बच्चा वंचित नहीं हो इसको लेकर सभी कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। वहीं, उन्होंने बताया, अभियान को सफल बनाने में डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और केयर इंडिया की टीम भी आवश्यक सहयोग करेगी।
– 1020 टीम की मॉनिटरिंग के लिए 306 सुपरवाइजर की टीम गठित :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, पल्स पोलियो अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में कुल 1020 टीम का गठन किया गया है। जिसमें घर-घर जाकर दवा पिलाने के लिए 749 टीम, 207 ट्रांजिट टीम, 23 वन मेन टीम एवं 41 मोबाइल दल का गठन किया गया है। इस टीम की मॉनिटरिंग के लिए कुल 306 सुपरवाइजर और 61 सब डिपो को तैनात किया गया, जो अभियान को सफल बनाने के लिए टीम द्वारा की जा रही कार्यो की मॉनिटरिंग करेंगे।
– कोविड से सुरक्षा मद्देनजर कर्मियों को दिया गया मास्क व सैनिटाइजर :
डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार ने बताया, कोविड से सुरक्षा के मद्देनजर सभी कर्मियों को मास्क व सैनिटाइजर दिया गया है। साथ ही कोविड से बचाव के लिए के आवश्यक जानकारी दी गई और कोविड से संबंधित जारी गाइडलाइन का पालन करने का निर्देश दिया गया। इस दौरान आज की आवाज, पोलियो रहित समाज, पोलियो हटाएं, देश बचाऐं आदि जैसे स्लोगन पर बल देते हुए कर्मियों को टिप्स दिया गया। सभी कर्मियों को हर दिन नया मास्क दिया जाएगा। इसको लेकर पीएचसी स्तर पर कर्मियों के अनुसार पर्याप्त मात्रा में मास्क व सैनिटाइजर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी है। वहीं, उन्होंने बताया, कोविड के हर मानकों का ख्याल रखते हुए अभियान का सफलता के साथ समापन होगा। इसको लेकर विभाग द्वारा मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करने, शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करने, सैनिटाइजर का उपयोग समेत अन्य सभी प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश दिया गया।

कोरोना को लेकर बच्चों को भी रखें सतर्क

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-घर से बाहर भेजते वक्त मास्क जरूर पहनाएं
-कोरोना अभी पूरी तरह से नहीं हुआ है खत्म
बांका, 27 फरवरी
कोरोना की तीसरी लहर लगभग खत्म हो चुकी है। मरीजों के मिलने का सिलसिला अब खत्म हो गया है, लेकिन कोरोना अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इसलिए सतर्कता अभी भी जरूरी है। बड़े लोग तो सतर्क रहे हीं, साथ में बच्चों को भी कोरोना से सतर्क रखें। तीसरी लहर के दौरान संक्रमित होने वालों में बच्चों की संख्या भी ठीकठाक रही। इसलिए बच्चों पर लगातार निगरानी रखने की जरूरत है। अगर घर के बड़े सदस्य संक्रमित हो गए तो उससे बच्चे में भी संक्रमण हो सकता है। इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना के लक्षण वाले जो मरीज होते हैं, उसकी पहचान हो जाती है और लोग उससे बचाव भी करते हैं। लेकिन बिना लक्षण वाले जो कोरोना संक्रमित होते हैं, इससे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। लोगों को जानकारी नहीं होती है कि वह व्यक्ति संक्रमित है। इस वजह से लोग ज्यादा सतर्कता नहीं बरतते हैं और संक्रमित हो जाते हैं। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे अगर किसी अनजान व्यक्ति के पास जा रहा है तो उसे मास्क जरूर पहनाएं और सामाजिक दूरी का भी ध्यान रखने के लिए कहें।
जल्द से जल्द ले लें टीकाः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना से बचाव में टीका सबसे बड़ा हथियार है। कोरोना का टीका ले लेंगे तो आप तो सुरक्षित हो ही जाएंगे, आपके बच्चे भी सुरक्षित रहेंगे। अगर आप सुरक्षित रहेंगे तो आपके बच्चे में भी संक्रमण नहीं होगा। अब तो 15 से 17 साल के उम्र के लोगों के लिए भी कोरोना का टीका आ गया है। 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण पहले से ही हो रहा है। यानी कि अब 15 साल से अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों का टीकाकरण हो रहा है। साथ में स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्करों और बीमारों व बुजुर्गों को प्रीकॉशन यानी की तीसरी डोज भी दी जा रही है। इसलिए जल्द से जल्द कोरोना टीका की सभी डोज ले लें।
जरा सा भी लक्षण दिखाई पड़े तो हो जाएं सतर्कः डॉ. चौधरी कहते हैं कि अब जब कोरोना का शोर खत्म हो गया है तो लोगों को और थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। कोरोना फिर अपना पांव पसार नहीं सके, इसलिए जागरूक रहने की जरूरत है। अगर बीमार पड़ें और कोरोना का लक्षण दिखे तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर अगर कोरोना जांच के लिए कहें तो जांच जरूर करवा लें। जांच में अगर कोरोना की पुष्टि होती है तो डॉक्टर के अनुसार अपना इलाज करवाएं। अगर कोरोना की पुष्टि नहीं होती है तो डॉक्टर जो सलाह देंगे, उसका पालन करें और जल्द से जल्द स्वस्थ्य होने की कोशिश करें।

आंगनबाड़ी सेविकाओं की बैठक में दी गई सुरक्षित गर्भपात की जानकारी 

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– संग्रामपुर प्रखण्ड के बाल विकास परियोजना कार्यालय में बैठक
– आईपास डेवलपमेन्ट फाउंडेशन के सहयोग से बैठक का आयोजन
 मुंगेर , 26 फरवरी। मुंगेर जिलान्तर्गत संग्रामपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय में शनिवार को आईपास संस्था के द्वारा सुरक्षित गर्भपात विषय पर आंगनबाड़ी सेविकाओं की एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें सुरक्षित गर्भपात के तमाम तकनीकी पहलुओं पर आईपास के  प्रतिनिधि के द्वारा विस्तारपूर्वक सेविका को जानकारी दी गई।
सेविकाओं की बैठक को सम्बोधित करते हुए संग्रामपुर प्रखण्ड की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) रंजू देवी ने बताया कि सुरक्षित गर्भपात कानूनी तौर पर पूरी तरह से वैध है। इस बात की जानकारी आज भी  ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को नहीं है। जिसके कारण आज भी वो गांव- देहात के नीम- हकीम और झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में पड़कर अपने प्राण तक गंवा रही हैं। सुरक्षित गर्भपात के बारे में ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को आईपास डेवलपमेन्ट फाउंडेशन के सहयोग से संग्रामपुर प्रखंड क्षेत्र से आई करीब 80 से अधिक आंगनबाड़ी सेविकाओं को सुरक्षित गर्भपात के तमाम तकनीकी और वैधानिक पहलुओं के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर  इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन की रिसर्च एंड ट्रेनिंग को- ऑर्डिनेटर अर्पणा झा ने बताया कि 20 सप्ताह तक गर्भ समापन कराना वैध है। बावजूद इसके 12 सप्ताह के अंदर एक प्रशिक्षित डॉक्टर एवं 12 सप्ताह से ऊपर तथा 20 सप्ताह तक में दो प्रशिक्षित डॉक्टर की उपस्थिति में सदर अस्पताल या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल में ही प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में सुरक्षित गर्भपात कराया जाना चाहिये । उन्होंने बताया कि इस विषय पर समाज को जागरूक करने की बहुत जरूरत है । हमारे प्रखण्ड संग्रामपुर के अस्पताल में प्रशिक्षित डॉक्टर एवं नर्स उपलब्ध हैं फिर भी महिलाएं नीम- हकीम और झोला छाप डॉक्टर के चक्कर में पड़कर अपनी जान गंवा रही हैं। एक कहावत भी है कि ” नीम-हकीम खतरे जान ” इसलिए महिलाओं को इस चक्कर में पड़ने से बचाने के लिए उन्हें आंगनबाड़ी सेविकाओं के सहयोग से सुरक्षित गर्भपात के बारे में जागरूक किया जाना आवश्यक है।

टीबी रोगी की सूचना देने वाले निजी डॉक्टरों को मिली प्रोत्साहन राशि

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– डीबीटी के माध्यम से खाते में गयी राशि
– नि:शुल्क शिविर का भी किया गया आयोजन
बेगूसराय, 26 फरवरी –
 जिले के निजी चिकित्सकों को टीबी रोगियों के नोटिफिकेशन पर पहली बार प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खाते में पहुंची। डॉक्टर फॉर यू के डॉ शिव कुमार रावत ने कहा कि टीबी के ऐसे बहुत सारे मरीज हैं जो सरकारी अस्पताल के अलावा निजी चिकित्सक के द्वारा भी अपना इलाज कराते हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच से लेकर पूरा उपचार बिल्कुल ही मुफ्त है। सरकार के 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के मद्देनजर फैसला लिया गया था कि निजी चिकित्सक भी सरकार को टीबी मरीजों के बारे में जानकारी देगें। जिससे टीबी रोगियों को मुफ्त में उपचार हो सके। इसके लिए निजी चिकित्सकों को टीबी मरीजों को नोटिफाई करने पर पांच सौ रुपए तथा कोर्स की अवधि पूरी होने पर पांच सौ रुपए देने का प्रावधान है। जिसकी शुरुआत जिले में कर दी गयी है। डीबीटी के माध्यम से निजी चिकित्सकों को राशि देने की शुरुआत हो चुकी है। जल्द ही टीबी मरीजों को  नोटिफाई करने वाले हर निजी चिकित्सक को राशि खाते में मिल जाएगी।
टीबी मरीजों को भी मिलती है आर्थिक सहायता-
डॉ रावत ने कहा कि टीबी मरीजों को उनके पूरे इलाज के दौरान निक्षय योजना के तहत पोषण के लिए 500 रुपये की राशि प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे उनके खाते में जाती है। वहीं जांच से लेकर उपचार मुफ्त में की जाती है।
स्वास्थ्य शिविर का किया गया आयोजन –
ग्लोकल हॉस्पिटल एवं एनटीईपी के अंतर्गत कार्य कर रहे डॉक्टर्स फॉर यू के सदस्यों द्वारा बछवारा प्रखंड के चमथा पंचायत के वार्ड नंबर 5 में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में डॉ आनंद कुमार वत्स के द्वारा लोगों  की नि:शुल्क स्क्रीनिंग की गयी। वहीं टीबी के लक्षण वाले मरीजों को बलगम जांच के लिए भेजने के साथ टीबी के मरीजों को मुफ्त में दवा का वितरण किया गया। मौके पर डॉक्टर फॉर यू के  एमआईएस तुषार कुमार झा , फील्ड ऑफिसर रामविलास पासवान एवं अन्य लोग मौजूद थे।

कायाकल्प की टीम के निरीक्षण में खरा उतरा नवगछिया अनुमंडल अस्पताल 

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-अनुमंडल अस्पताल परिसर की सफाई व्यवस्था को देखा और जानकारी ली
-पटना से आई कायाकल्प की टीम ने अनुमंडल अस्पताल का लिया जायजा
भागलपुर, 26 फरवरी
पटना से आई कायाकल्प की टीम ने शनिवार को नवगछिया रेफरल अस्पताल का निरीक्षण किया। कायाकल्प टीम की जांच में अनुमंडल अस्पताल खरा उतरा। टीम यहां की सफाई व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं से संतुष्ट दिखी। टीम में पटना से निकले आए डॉ. पंकज मिश्रा और डॉ. विकास कुमार। उनके साथ डीपीएम फैजान आलम अशर्फी, केयर इंडिया के एफपीसी जितेंद्र कुमार सिंह भी थे। सभी ने अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को देखा। खासकर अस्पताल की सफाई व्यवस्था की टीम ने बारीकी से निरीक्षण किया। मौके पर विनय कुमार, आदित्य कुमार, सरोज कुमार, अमित कुमार और आलोक कुमार भी मौजूद थे। मालूम हो कि कायाकल्प की जिले की टीम के निरीक्षण में अमरपुर रेफरल अस्पताल खरा उतरा है। इसके बाद अब राज्य की टीम निरीक्षण कर रही है। इसमें भी खरा उतरने पर अस्पताल को पुरस्कार के तौर पर मोटी राशि मिलेगी।
कायाकल्प की टीम अमरपुर रेफरल अस्पताल के अंदर से लेकर परिसर तक की सफाई व्यवस्था को परखा। पटना से आए डॉक्टर पंकज मिश्रा और डॉ. विकास कुमार ने बताया कि यहां की व्यवस्था अच्छी थी। खासकर सफाई का बेहतर तरीके से ध्यान रखा जाता है। न सिर्फ अस्पताल के अंदर, बल्कि परिसर भी साफ-सुथरा था। प्रसव कक्ष, ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर में गंदगी नहीं दिखी। प्रभारी डॉ. अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि हमलोगों ने ठीक से तैयारी की थी। कायाकल्प की टीम भी संतुष्ट दिखी। अब अंक मिलने के बाद पता चलेगा निरीक्षण कितना अच्छा रहा। उन्होंने बताया कि सिर्फ कायाकल्प के निरीक्षण के दौरान ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी अस्पताल में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। मरीजों का स्वच्छ माहौल में यहां पर इलाज किया जाता है।
अच्छे अंक मिले तो पुरस्कार का हकदार होगा रेफरल अस्पताल: कायाकल्प की टीम के निरीक्षण में राज्य भर में टॉप करने पर अस्पताल को 17 लाख रुपये की राशि मिलती है। दूसरे और तीसरे स्थान वाले को भी राशि मिलती है। उस राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाने पर खर्च किया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि अस्पताल के कर्मियों में उत्साह बढ़ाने के लिए खर्च किया जाता है। दोनों ही अस्पताल पहले जिला स्तरीय टीम के निरीक्षण में खरा उतर चुका है। अब अगर राज्य स्तरीय कायाकल्प टीम के निरीक्षण में खरा उतरता है तो पुरस्कार का हकदार हो जाएगा।

ईशान तनेजा एमेटी कॉरपोरेट एक्सलेंस अवार्ड से सम्मानित

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– एमेटी यूनिवर्सिटी में 22 वें इंटरनेशनल बिजनेस हॉरिजन इनबुस इरा वर्ल्ड समिट 2022

– यूएएस इंटरनेशनल ग्रुप के एमडी ईशान तनेजा को एमेटी कॉरपोरेट एक्सलेंस अवार्ड

नईदिल्ली-

एमेटी यूनिवर्सिटी में 22 वें इंटरनेशनल बिजनेस हॉरिजन इनबुस इरा वर्ल्ड समिट 2022 का आयोजन किया गया। इस मौके में यूएएस इंटरनेशनल ग्रुप के एमडी ईशान तनेजा को एमेटी कॉरपोरेट एक्सलेंस अवार्ड से नवाजा गया। ईशान तनेजा को यह अवार्ड उनके द्वारा वेल्थ मैनेजमेंट एवं ट्रैवल व टूरिज्म बिजनेस में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया गया। इस मौके पर एमेटी एजुकेशन ग्रुप के प्रेसिडेंट व चांसलर अतुल चौहान ने कहा कि ईशान तनेजा युवा सीईओ हैं। इन्होंने इतने कम समय में एजुकेशन सहित अन्य सेक्टरों में बेहतरीन कार्य किए हैं। जो एक मिसाल है। इस मौके पर एमेटी यूनिवर्सिटी लंदन के प्रिंसिपल डॉ. लुमी ने ईशान तनेजा को बधाई देते हुए कहा कि इनके जैसे युवा को आज वैश्विक स्तर पर जरूरत है। खासकर एजुकेशन स्टेक होल्डर की भूमिका नई एजुकेशन पॉलिसी भारत में लाई गई है, जहां इनके कार्य को विस्तार मिलेगा। ईशान तनेजा के कार्य अद्भूत हैं।

एमेटी यूनिवर्सिटी के ग्रुप वाइस चांसलर डॉ गुरिंदर सिंह ने ईशान तनेजा को बधाई देते हुए कहा कि आज व्यावसायिक कुशलता की आवश्यकता है जो सारे गुण इनमें हैं। खासकर इनकी कंपनी यूएएस इंटरनेशनल छात्रों में व्यावसायिक कुशलता के साथ साथ उनकी व्यवसायिक क्षमता की भी उन्नति करता है। इसके लिए कई तरह की बाउंडिंग भी करता है।

अवार्ड मिलने पर ईशान तनेजा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमने अपने कार्य में निरंतरता बनाए रखा है। कोशिश यही है कि आज के कठिन दौर में इसे कैसे रेलवेन्ट बनाए जाए। इसपर हमने रिसर्च किया। जिसे लोगों ने इसे मजबूती के साथ सराहा। ईशान तनेजा ने कहा कि ऐसे अवार्ड से हमारा उत्साह दोगुना हो गया है वहीं उत्तरदायित्व भी बढ़ गया है। यूएएस देश भर में अपना बिजनेस को आगे बढ़ाया है जिसके विस्तार पर हम लगातार कार्य कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी पिछले नौ वर्षों में चार कंपनियों सफलतापूर्वक चल रहा है। जिसमें यूएएस इंटरनेशनल वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी, यूएएस इंटरनेशनल हॉस्टल चेन, यूएएस इंटरनेशनल हॉलिडेज प्रा. लि. है और अभी एलोफ्ट करियर नाम से ऑन लाइन एजुकेशन का नया प्लेटफोर्म तैयार किया गया है जिसको लेकर युवाओं में उत्साह है।

स्टडी इन इंडिया डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव का किया गया आयोजन 

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नई दिल्ली, एजेंसी
आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में, भारत की आजादी के 75 साल के उत्सव के रूप में, एडसिल ने भारत में विदेशी छात्रों को शिक्षा के अवसर प्रदान करने के लिए भारत के शिक्षा क्षेत्र विशेष रूप से नीतियों और योजनाओं को प्रदर्शित करने के लिए ‘स्टडी इन इंडिया’ डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 24 फरवरी, 2022 को सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, जिसमें दुनिया के 20 देशों के राजनयिकों की भागीदारी थी। केंद्रीय विदेश और शिक्षा राज्य मंत्री, श्री राजकुमार रंजन सिंह ने श्री सौरभ कुमार – सचिव (पूर्व), श्री अनिल कुमार राय – संयुक्त सचिव (समन्वय और संसद) और एडसिल (भारत) के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की। ) सीमित। अपने उद्घाटन भाषण में मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत सरकार के ‘स्टडी इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए उपलब्ध अवसरों पर जोर दिया।
स्टडी इन इंडिया डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव’ का उद्देश्य विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के माध्यम से विविध शिक्षा प्रणालियों के बीच बातचीत के माध्यम से सर्वोत्तम शैक्षणिक और अनुसंधान प्रथाओं के साझाकरण को बढ़ावा देना था, जिन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनाई जाने वाली उच्च शिक्षा प्रणालियों को समझने में मदद की। विदेशी गणमान्य व्यक्तियों ने अपने-अपने देश की शिक्षा प्रणाली, और भारतीय शिक्षा प्रणाली पर अपने विचार, हमारे शिक्षण शिक्षण की क्षमता और भारतीय शिक्षाविदों के साथ बातचीत के दौरान उनके द्वारा अनुभव की गई अन्य विशिष्ट विशेषताओं के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने-अपने देशों के छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली अपनी अपेक्षाओं और चुनौतियों को भी साझा किया।
इस कार्यक्रम ने एनआईआरएफ शीर्ष 100 रैंकिंग और एनएएसी मान्यता स्कोर (4 में से 3.26 या उससे अधिक) के आधार पर चुने गए आईआईएम, आईआईटी, एनआईटी, निजी और सरकारी संस्थानों जैसे 100 से अधिक प्रमुख भारतीय संस्थानों के साथ भागीदारी की है। ये संस्थान एसआईआई पोर्टल (www.studyinindia.gov.in) के माध्यम से यूजी, पीजी, पीएचडी और आला क्षेत्रों के पाठ्यक्रमों के साथ उज्ज्वल अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 100% तक आकर्षक ट्यूशन फीस छूट की पेशकश कर रहे हैं। “स्टडी इन इंडिया” में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है जहां एक छात्र को वेबसाइट (www.studyinindia.gov.in) पर जाना है, पंजीकरण करना है, लॉगिन करना है, छात्र की जानकारी भरना है, शीर्ष संस्थान में शुल्क छूट के साथ पाठ्यक्रम चुनना है। उनकी पसंद और आवेदन जमा करें। मॉक और फाइनल काउंसलिंग राउंड के बाद, आपके चुने हुए कॉलेज आपको आवंटन पत्र के साथ वापस कर देंगे। पूरी प्रक्रिया नि:शुल्क है।