निजी बैंक के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिविर आयोजित 

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                           -सुविधाजनक तरीके से की जा रही है स्वास्थ्य जाँच
– जाँच के साथ-साथ कोविड वैक्सीनेशन पर दिया जा रहा  जोर
– एक माह में 30 हजार से अधिक का वैक्सीनेशन और 05 हजार से अधिक लोगों की हो चुकी स्वास्थ्य जाँच
बेगूसराय, 02 मार्च-
एक निजी बैंक के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग और केयर इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में बेगूसराय स्थित दिनकर कला भवन और बरौनी प्रखंड मुख्यालय परिसर में बीते 01 फरवरी से लगातार नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर का संचालन हो रहा है। जिसमें लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। दोनों जगहों पर आयोजित शिविर में मरीजों की स्वास्थ्य जाँच के साथ कोविड वैक्सीनेशन अभियान पर भी जोर दिया जा रहा है। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो और जिले में वैक्सीन से वंचित लोगों की संख्या शून्य हो। साथ ही इस दौरान पहला, दूसरा और प्रीकाॅशनरी तीनों डोज लेने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेट किया जा रहा है। ताकि दूसरा एवं प्रीकाॅशनरी डोज लेने वाले लाभार्थियों का निर्धारित समय पर वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित हो सकें।
– 10 प्रखंडों में वैक्सीनेशन एक्सप्रेस भी चलाकर लोगों को सुविधाजनक तरीके से किया जा रहा है वैक्सीनेट :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ गोपाल मिश्रा ने बताया, उक्त बैंक के सहयोग से दोनों जगहों पर तो स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा जिले के 10 प्रखंडों में वैक्सीनेशन एक्सप्रेस चलाकर लोगों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीनेट भी किया जा रहा है। ताकि जो लोग शिविर तक आने में असमर्थ हैं, उन्हें सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी जा सके और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।
– एक माह में 30 हजार से अधिक का वैक्सीनेशन और 05 हजार से अधिक लोगों की हो चुकी स्वास्थ्य जाँच :
केयर इंडिया के डीटीएल गुंजन गौरव ने बताया, दोनों जगहों पर एक फरवरी से लगातार नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर का आयोजन जा रहा है। जिसके दौरान शिविर एवं टीका एक्सप्रेस के सहयोग से एक माह में 30 हजार 652 लोगों का वैक्सीनेशन किया गया। जबकि, शिविर में विभिन्न शारीरिक समस्या से पीड़ित 5635 मरीजों का मेडिकल टीम द्वारा स्वास्थ्य जाँच की गयी। जिसमें 2786 पुरुष और 2849 महिलाओं की स्वास्थ्य जाँच कर आवश्यक दवाई और चिकित्सा परामर्श दिया गया। साथ ही इस दौरान दोनों जगहों पर नियमित रूप योग भी कराया जा रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहें हैं।
– 31 मार्च तक चलेगा स्वास्थ्य शिविर :
दोनों जगहों आयोजित शिविर का 28 फरवरी को समापन होना था। किन्तु, मरीजों की सुविधा को देखते हुए शिविर समापन की अवधि एक माह और बढ़ा दी गई है। यानी शिविर का समापन अब 31 मार्च को होगा।

पल्स पोलियो अभियान : घर-घर जाकर बच्चों को पिलाई जा रही दो बूँद की खुराक 

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– आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य कर्मियों द्वारा पिलाई जा रही है पोलियो की दवा
– चौक-चौराहे, रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक जगहों पर भी पिलाई जा रही है दवा
खगड़िया, 02 मार्च-
जिले में रविवार को शुरू हुए पाँच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान के तहत घर-घर जाकर बच्चों को दवाई पिलाई जा रही है। यह दवा अभियान में शामिल आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य कर्मियों द्वारा 0 से 05 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों को कोविड गाइडलाइन का पालन के साथ पिलाई जा रही है। इसके अलावा ड्यूटी में लगे कर्मी द्वारा चौक-चौराहे, रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक जगहों पर भी परिजनों के साथ सफर पर निकले बच्चों को दवा पिलाई जा रही है। ताकि सफर पर निकले बच्चे दवाई पीने से वंचित नहीं रहे और अभियान सफलतापूर्वक समापन सुनिश्चित हो सके। वहीं, अभियान को हर हाल में सफल बनाने को लेकर चिकित्सा पदाधिकारी, सुपरवाइजर समेत अन्य पदाधिकारी लगातार क्षेत्र भ्रमण कर अभियान का मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
–  हर दिन शाम में स्थानीय पीएचसी में होती है ब्रीफिंग :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, अभियान की सफलता को लेकर हर दिन शाम में जिले के सभी पीएचसी में ब्रीफिंग मीटिंग होती है। जिसमें पीएचसी प्रभारी, मैनेजर, सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिका (एल एस) समेत अन्य पदाधिकारी व कर्मी की मौजूदगी में दिनभर के कार्यों समीक्षा की  जाती है। साथ ही हर दिन कितने बच्चों को दवा पिलाई गई समेत पूरे दिन के कार्यों की रिपोर्ट तैयार की जाती है। जिसे देर शाम जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराया जाता है। वहीं, उन्होंने बताया, अभियान को सफल बनाने में डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और केयर इंडिया का भी सहयोग मिल रहा है।
– तीन लाख साठ हजार आठ सौ उनहत्तर बच्चों को पिलाई जाएगी दो बूँद की खुराक :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, पाँच दिवसीय इस अभियान के तहत पूरे जिले में कुल 03 लाख, 60 हजार, 08 सौ 69 बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाने का लक्ष्य है। जबकि, अभियान के सफल संचालन के लिए जिले में कुल 1020 टीम का गठन किया गया है। जिसमें घर-घर जाकर दवा पिलाने के लिए 749 टीम, 207 ट्रांजिट टीम, 23 वन मेन टीम एवं 41 मोबाइल दल का गठन किया गया है। इस टीम की मॉनिटरिंग के लिए कुल 306 सुपरवाइजर और 61 सब डिपो तैनात किया गया, जो अभियान को सफल बनाने के लिए टीम द्वारा की जा रही कार्यो की मॉनिटरिंग करेंगे।
– अभियान की सफलता को लेकर घर-घर जाकर पिलाई जा रही है दवा :
बेलदौर पीएचसी अंर्तगत विभिन्न गाँवों का भ्रमण कर पिलाई जा रही दवा का निरीक्षण कर रहे चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ केदार रजक ने बताया, अभियान के दौरान एक भी बच्चा दवाई पीने से वंचित नहीं रहें, इस बात का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर ड्यूटी में तैनात टीम द्वारा घर-घर जाकर एक-एक बच्चों को चिह्नित कर दवाई पिलाई जा रही है। ताकि एक भी बच्चा दवाई पीने से छूटे नहीं और हर हाल में अभियान का सफलतापूर्वक समापन हो सके।

बदलते मौसम में रहें संभलकर, स्वास्थ्य का रखें ख्याल

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-सुबह और शाम में घर से निकलते वक्त गर्म कपड़ें जरूर पहनें
-बीमार पड़ने की स्थिति में डॉक्टर से दिखाकर दवा का सेवन करें
बांका, 2 मार्च-
मौसम में बदलाव हो रहा है। सर्दी का मौसम अपने अंतिम पड़ाव पर है। गर्मी आने ही वाला है। ऐसे में मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव है। कभी सर्दी तो कभी गर्मी। खासकर दिन में तपिश वाली धूप रहती है तो शाम के बाद ठंड लगने लगती है। देखा जाता है कि इस तरह के मौसम में लोग अक्सर लापरवाह हो जाते हैं। शाम के वक्त घरों से निकलते वक्त गर्म कपड़े ले जाना भूल जाते हैं। अगर आने में देरी हुई तो रात में फिर ठंड लगने लगती है। ठंड लगने से बीमार पड़ने की भी संभावना रहती है। इसलिए ऐसे मौसम में संभलकर रहने की जरूरत है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि ऐसे मौसम में संभलकर रहना बहुत जरूरी है। कब गर्मी और कब ठंड लगने लगती है पता नहीं चल पाता है। अभी कुछ और दिनों तक लोगों को गर्म कपड़े पहनना चाहिए। जब पूरी तरह से गर्मी आ जाएगी तब गर्म कपड़े पहनना बंद करना चाहिए। कम कपड़े पहनने की लापरवाही भारी पड़ सकती है। बीमार होने से बचने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है सावधान रहिए।
सुबह टहलने जाते वक्त भी गर्म कपड़ा पहनना न भूलेः डॉ. चौधरी कहते हैं कि ठंड में कमी आ जाने के बाद अब सुबह-सुबह काफी संख्या में लोग ठहलने के लिए भी जाने लगे हैं, जो  अच्छी बात है। लेकिन टहलने जाते वक्त गर्म कपड़े को जरूर पहन लें। सुबह के वक्त अभी सर्दी रहती है। बेशक टहलकर आते वक्त धूप खिलने लगती है और ठंड खत्म हो जाती है, लेकिन जिस समय घर से निकलते हैं उस समय ठंड रहती है। इसलिए सुबह-सुबह गर्म कपड़ा जरूर पहनें।
बीमारों और बुजुर्गों का रखें ख्यालः वैसे तो हर मौसम में हर समय बीमारों और बुजुर्गों का ख्याल रखा जाता है, लेकिन ऐसे मौसम में इनलोगों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। बुजुर्ग लोगों को सुबह में हल्की धूप आने के बाद ही घर से टहलने निकलने देना चाहिए। ऐसे लोगों को खान-पान पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हाइपरटेंशन, शुगर, कॉलेस्ट्रॉल की बीमारी से पीड़ित लोगों को तेल मसाले युक्त भोजन के इस्तेमाल से बचना चाहिए। बुजुर्ग लोग जो किसी बीमारी से ग्रसित नहीं हैं उन्हें भी संयमित आहार लेना चाहिए।
परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करेः इस मौसम में किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अपने मन से दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। डॉक्टर अच्छी तरह से चेकअप कर जो भी सलाह देंगे, उसका पालन करना चाहिए। साथ में जिस तरह की जांच की सलाह दें या फिर जो दवा दें उसका ही सेवन करें। इन बातों का पालन करने से स्वस्थ्य बने रहेंगे। किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर का पालन जरूरी 

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– शिशु को माँ के सीने से चिपकाने से शिशु में होती गर्माहट
– धड़कन सुनकर शिशु को राहत का होता है एहसास, मिलता है आराम
लखीसराय, 01 मार्च-
समय के पूर्व जन्म लेने वाले शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर का पालन करना बहुत जरूरी है। दरअसल, समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशु का ना सिर्फ वजन कम होता बल्कि, ऐसे शिशु जन्म लेने के बाद भी कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं। ऐसे शिशु के  स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए कंगारू मदर केयर तरीके को अपनाना सबसे आसान एवं बेहतर उपाय है। इस उपाय को अपनाने से ना सिर्फ शिशु स्वस्थ्य होता बल्कि, शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत होता है।
– बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास का होता है निर्माण :       सिविल सर्जन  डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कंगारू मदर केयर बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास के निर्माण करने में काफी सहयोग करता है। बच्चा जब अपने माँ के नजदीक रहता तो माँ और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता है। यह बिना खर्च का सबसे अच्छा उपाय है।
– क्या है कंगारू मदर केयर, इसका उपयोग किस तरह होता है :
कंगारू मदर केयर एक ऐसा उपाय है जो कम वजन के साथ जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अपनाया जाता है। इससे शिशु का वजन बढ़ता है। स्तनपान बेहतर होता है। बच्चे का तापमान सही रहता और वह संक्रमण से दूर रहता है। बच्चे और माँ के बीच रिश्ता मजबूत होता है। इसमें माँ अपने सीने पर सीधे पोजिशन में शिशु को चिपकाकर रखती हैं। इस स्थिति में माँ की छाती पूरी तरह खुली होनी चाहिए। जिससे माँ की शरीर की गर्माहट आसानी से और जल्दी शिशु में स्थानांतरित हो सके। इससे शिशु का तापमान सही रहता है। कंगारू मदर केयर माँ के अलावा पिता व परिवार के अन्य सदस्य भी दे सकते हैं। सिर्फ इस दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि शिशु को कंगारू मदर केयर की सुविधा देने वाले स्वस्थ्य हों।
– कंगारू मदर केयर अपनाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा भी किया जाता है जागरूक :
समय पूर्व जन्म लेने वाले शिशु और जन्म के पश्चात शारीरिक पीड़ा से ग्रसित शिशु के परिजनों को एएनएम, आशा, केयर इंडिया के कर्मियों एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य कर्मियों द्वारा भी कंगारू मदर केयर तकनीक को अपनाने के लिए जागरूक किया जाता है। दरअसल, यह तकनीक बिना खर्च का सबसे आसान और बेहतर उपाय है। इसके अलावा ऐसे शिशु का गृह भ्रमण कर भी स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा देखभाल एवं आवश्यक मॉनिटरिंग की जाती है। ताकि शिशु को किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर उनका समय पर उचित उपचार हो सके और बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके।
– इन बातों का रखें ख्याल :-
– बच्चे को साफ हाथों से ही छूएं।
– यदि माँ बुखार, सर्दी या खाँसी से पीड़ित हो तो शिशु को कंगारू मदर केयर नहीं दें।
– घर के कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति नवजात को कंगारू मदर केयर प्रदान कर सकते हैं।

कोविड संक्रमण की शिकायत जरूर हो रही कम, पर अभी और सावधान रहने की है जरूरत

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– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें, इसी की बदौलत हम तीसरी लहर में भी सुरक्षित रहे
– कोविड संक्रमण के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का जारी है अभियान
खगड़िया, 01 मार्च-
जिले में कोविड संक्रमण की शिकायत कम हुई है। फिलहाल जिले में संक्रमण की शिकायत नहीं के बराबर है। किन्तु, इस घातक महामारी से स्थाई निजात के लिए अभी और सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, हम सतर्कता और सावधानी की बदौलत ही तीसरी लहर में भी सुरक्षित रहे। यह सुखद समाचार ना सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के बेहतर प्रबंधन और सकारात्मक पहल का परिणाम है बल्कि, इसमें जिले के आमजनों का भी सकारात्मक सहयोग और सामुदायिक स्तर पर आई जागरूकता का अहम योगदान रहा है। किन्तु, संक्रमण की शिकायत में कमी आने  के साथ लोगों में भी थोड़ी लापरवाही आने लगी है। बिना मास्क व भीड़-भाड़ वाली तस्वीर सामने आने लगी है। जो इस घातक महामारी से सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। इसलिए, अभी और सतर्कता व सावधानी बरतने की जरूरत है। इसके लिए मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अभी सतर्कता और सावधानी जारी रखने की जरूरत :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया कोविड संक्रमण की बढ़ती शिकायत पर जरूर विराम लगा है। किन्तु, इस घातक महामारी से स्थाई निजात के लिए अभी और सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, इसी की बदौलत और सामुदायिक स्तर पर लोगों में आई सकारात्मक जागरूकता से ही संक्रमण की शिकायत फिलहाल कम हुई है। इसलिए, मैं जिले वासियों से अपील करता हूँ कि इस घातक महामारी से स्थाई निजात के लिए मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी पालन, साफ-सफाई का विशेष ख्याल समेत अन्य गाइडलाइन का पालन जारी रखें। तभी इस घातक महामारी से स्थाई निजात संभव है।
– कोविड संक्रमण के खिलाफ जिले में जारी है अभियान :
इस घातक महामारी के खिलाफ जिले में अभियान जारी है। जिसके माध्यम से लगातार नियमित तौर पर वैक्सीनेशन एवं जाँच अभियान चल रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण कोविड वैक्सीनेशन का आयोजन कर वैक्सीन से वंचित लोगों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी जा रही है। ताकि एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहे और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो। इसके अलावा सेकेंड डोज एवं प्रीकाॅशनरी डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा करने वाले लाभार्थियों को चिह्नित कर वैक्सीनेट किया जा रहा है।

अश्विन पोर्टल से अब ग्रामीण आशा और आशा फैसिलिटेटर की प्रोत्साहन राशि का समय पर हो सकेगा भुगतान 

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–  राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी की संशोधित मार्गदर्शिका
–  प्रत्येक स्तर पर दावा राशि के अग्रसारण के लिए निर्धारित की गई समय सीमा
– निर्धारित समय सीमा तक दावा राशि का अनुमोदन नहीं होने पर स्वतः अनुमोदित होकर अगले स्तर पर हो जाएगा अग्रसारित
मुंगेर, 01 मार्च-
अश्विन पोर्टल के माध्यम से ग्रामीण आशा और आशा फैसिलिटेटर की प्रोत्साहन राशि का अब समय पर  भुगतान हो सकेगा । इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार ने सभी जिलों के सिविल सर्जन सहित जिला स्वास्थ्य समिति के अन्य अधिकारियों को पत्र के साथ अश्विन पोर्टल के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर काम करने वाली आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर की प्रोत्साहन राशि के  ऑनलाइन भुगतान के लिए संशोधित मार्गदर्शिका जारी की है।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला सामुदायिक उत्प्रेरक निखिल राज ने बताया कि आशा वर्कर परफॉर्मेंस एंड इंसेंटिव पोर्टल “अश्विन ” के माध्यम से दिसम्बर 2020 से ग्रामीण आशा एवम आशा फैसिलिटेटर को ऑनलाइन डीबीटी से उनके खाते में सीधे राज्यस्तर से प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा रहा है। पिछले दिनों हुई राज्य स्तरीय समीक्षा के बाद यह ज्ञात हुआ कि  प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक के स्तर से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर द्वारा दावा की गई राशि को अनुमोदन के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को समय से अग्रसारित नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह से प्रोत्साहन राशि के भुगतान में काफी विलम्ब हो जा रहा है। अब राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी संशोधित मार्गदर्शिका के अनुसार प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक के स्तर को अश्विन पोर्टल से हटाया गया है। इसके अलावा प्रत्येक स्तर पर दावा राशि के अग्रसारण के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है। निर्धारित समय सीमा पर दावा राशि को अनुमोदित कर अग्रसारित नहीं करने पर वो स्वतः अनुमोदित कर अगले स्तर पर अग्रसारित हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि संशोधित मार्गदर्शिका के अनुसार प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक द्वारा अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक प्रत्येक आशा एवम आशा फैसिलिटेटर द्वारा अश्विन पोर्टल पर की गई सभी दावा राशि का 30 अप्रैल 2022 तक निश्चित रूप से अनुमोदन कर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को अग्रसारित करने और अप्रैल माह से संशोधित मार्गदर्शिका के अनुसार अश्विन पोर्टल के द्वारा आशा एवम आशा फैसिलिटेटर के दावा राशि का भुगतान करने का निर्देश गया है।
पोर्टल पर आशा एवम आशा फैसिलिटेटर के दावा भुगतान की प्रकिया इस प्रकार से होगी :
सर्वप्रथम आशा एवम आशा फैसिलिटेटर के द्वारा वर्तमान माह की एक तारीख से माह के अंतिम तारीख तक किए गए कार्यों से संबंधित दावा प्रपत्र को 5 तारीख तक अपलोड किया जाएगा। इसके बाद संबंधित स्वास्थ्य उपकेंद्र की एएनएम के द्वारा आशा एवं आशा फैसिलिटेटर द्वारा अपलोड किए गए कार्यों का मिलान एवम सत्यापन उसी माह की 10 तारीख तक अनिवार्य रूप से कर लिया जाएगा। इसके बाद 17 तारीख तक चार अंकों के ओटीपी को आशा द्वारा अश्विन पोर्टल पर सबमिट करने के बाद फाइनल सबमिशन किया जाएगा। ऐसा नहीं होने पर भी लॉगिन आईडी स्वतः प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को अग्रसारित हो जाएगा। इसके बाद  प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा प्रविष्ट की गई प्रोत्साहन राशि के दावा को 22 तारीख तक अनिवार्य रूप से अनुमोदित कर भुगतान के लिए राज्य स्तर पर अग्रसारित करना है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्धारित समय पर ऐसा नहीं करने पर दावा स्वतः भुगतान के लिए राज्य स्तर पर अग्रसारित हो जाएगा।

आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर ढूंढ रहीं टीबी के मरीज

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-टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान के तहत टीबी मरीजों की हो रही खोज
-24 फरवरी से 24 मार्च तक टीबी उन्मूलन को लेकर चलाया जा रहा अभियान
बांका, 1 मार्च
2025 तक जिले को टीबी से मुक्त कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। इसी सिलसिले में अभी टीबी मरीजों की खोज को लेकर अभियान चल रहा है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर टीबी मरीजों की खोज कर रही हैं। इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण में उन्हें टीबी के लक्षण और बचाव की जानकारी दी गई है। इसके बाद वह क्षेत्र में टीबी मरीजों को ढूंढने का काम कर रही हैं।
जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि टीबी को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अभी एक महीने तक इस पर विशेष तौर पर फोकस किया गया है। इसमें आशा कार्यकर्ता टीबी मरीजों को ढूंढ रही हैं। क्षेत्र में भ्रमण के दौरान जिस किसी में टीबी का लक्षण दिखाई पड़ता है, उसे आशा कार्यकर्ता नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच के लिए ले जाती हैं। टीबी मरीजों का न सिर्फ निःशुल्क इलाज कराया जाता है, बल्कि उसे 500 रुपये प्रतिमाह पौष्टिक भोजन लेने के लिए राशि भी मिलती है। इसके साथ-साथ दवा भी मुफ्त में मिलती है। वहीं आशा कार्यकर्ताओं को एक टीबी मरीज ढूंढने पर 500 रुपये भी दिया जाता है। सिर्फ आशा ही नहीं, बल्कि कोई भी व्यक्ति अगर टीबी मरीज की सूचना देते हैं और जांच में टीबी मरीज की पुष्टि हो जाती है तो उन्हें 500 रुपये इनाम के तौर पर दिया जाता है। राजदेव राय ने कहा कि दो सप्ताह या ज्यादा दिनों तक खांसी, बुखार या शाम के वक्त शरीर गर्म होना, वजन में कमी, रात में पसीना आना, भूख न लगना, छाती में दर्द, बलगम में खून आना और कमजोरी और थकान हो तो तत्काल टीबी की जांच कराएं।
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा कहते हैं कि अगर टीबी का हल्का सा भी लक्षण दिखे तो जांच कराने स्वास्थ्य केंद्र जाएं। जांच में पुष्टि हो जाने के बाद आपको मुफ्त में दवा मिलेगी। साथ में भोजन के लिए भी पैसे मिलेंगे। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन में जनभागीदारी बहुत ही जरूरी है। अगर लोग सहयोग करें तो यह बीमारी समय से पहले खत्म हो सकती है। 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त कराया जाएगा। इसे लेकर विभाग प्रतिबद्ध है।
एक टीबी मरीज कई लोगों को कर सकता है संक्रमित: डॉ. सिन्हा ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। इलाज नहीं कराने पर कई लोग संक्रमित हो सकते हैं। एक टीबी मरीज के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा। इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं।
छुआछूत की बीमारी नहीं रही टीबी: डॉ. सिन्हा ने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और  जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीवी समाप्त हो जाएगा।

महाशिवरात्रि पर विशेष- हर हर महादेव, कल्याण के देवता हैं शिव

शिव के कई नाम हैं और सभी नामों के अलग अर्थ और अलग महत्व है। वैसे तो कई देवता ऐसे हैं जिनके सहस्र नाम सहजता से पाए जाते हैं किंतु शिव के नामों का अर्थ विस्तार उनकी जन प्रियता का प्रमाण है। उनके ये नाम उनकी उत्पत्ति और सामाजिकता के सूचक हैं। विद्वान उन्हें वैदिक देवता के साथ ही अनार्य देवता भी सिद्ध करते आ रहे हैं। शिव का स्वरूप ही ऐसा है कि कोई उन्हें चाहे तो वैदिक देवता सिद्ध कर दे चाहे तो अवैदिक और अनार्य और आदिवासी समाज का देव भी। जाकी रही भावना जैसी वाली बात शिव पर सर्वथा लागू होती है। शिव योगी और गृहस्थ, विद्यापति और मूर्खता की सीमा तक भोले, सफल गृहस्थ और अनिकेतन सब कुछ एक साथ हैं। ऐसे अनेक विरोधाभासों का सहज मेल ही शिव का सच्चा स्वरूप है। पहले दक्षपुत्री सती के साथ और आगे चल कर हिमालय की पुत्री गौरा पार्वती के साथ उथल-पुथल भरा किन्तु सफल दाम्पत्य निर्वाह करने और अकुल से कुल ओर जाने की सहज शक्ति के केन्द्र हैं शिव। शिव अकुल हैं। यानी उनका कोई अपना पूर्वज नहीं है। भारतीय संस्कृति का विकास शिव स्वरूप के विकास से जुड़ता है। ज्ञान और कलाओं, व्याकरण, अक्षर, संगीत और नाट्य शास्त्र, धनुर्वेद और ज्योतिष जैसी विद्याओं के कारक के रूप में शिव का नाम सहज ही सामने आता है। उनके धनुर्वेद का ज्ञान ही महाभारत के युद्ध में कौरव और पाण्डव दोनों पक्षों के योद्धाओं के धनुष की टंकार बनता है। परशुराम और अर्जुन के द्वारा यह विद्या दोनों पक्षों में पहुँची है। भारतीय साहित्य-कला, इतिहास-पुरातत्व, लोक-शास्त्र का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहाँ शिव की छाप न हो। सिंधुघाटी के महायोगी का वैदिक रुद्र से जुड़ कर पशुपति स्वरूप ग्रहण करना और देवता के आसन से ऊपर उठ कर महादेव या महेश हो जाना शिव के देवत्व का ही विस्तार है।
शिव के रूप के साथ ही शिव के कर्म में भी एक विचित्र प्रकार की विविधता है। वे संहार के साथ ही कल्याण के देवता है। वे आशुतोष रूप में शीघ्र प्रसन्न होकर वर देते हैं तो रुद्र रूप में संसार को नष्ट करने के लिए उद्धत हो जाते हैं। भारतीय सभ्यता के प्रथम देवता हैं जिनका अंकन मानवाकृति में किया गया है। साथ ही लिंग-चिह्न रूप में भी उनका होना वर्णित है। शिवलिंग और शिवाकृति दोनों रुप सिंधु सभ्यता की मुहरों में पाई गई है। अथर्व वेद में उन्हें सदाशिव, शिव और महादेव कह कर संबोधित किया गया है। आगे चल कर शंभु, विश्वनाथ, उमा का पति होने के नाते उमेश, पशुओं का रक्षक होने के नाते पशुपति पशुपति, मत्युंजय जैसे कई नाम प्राप्त हुए। गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी नाम शिव के आर्य देवता होने से संबंधित हैं।
महाशिवरात्रि व्रत का विशेष महत्व है। आइए इस पावन मौके पर जाने द्वादश ज्योतिर्लिंगों के बारे में।
नागेश्वर- भगवान शिव का यह प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग गुजरात प्रांत में द्वारकापुरी से लगभग 17 मील की दूरी पर स्थित है। इस पवित्र ज्योतिर्लिंग के दर्शन की शास्त्रों में बड़ी महीमा बताई गई है। कहा गया है कि जो श्रद्धापूर्वक इसकी उत्पत्ति और माहात्मय की कथा सुनेगा, वह सारे पापों से छुटकारा पाकर समस्त सुखों का भोग करता हुआ अंत में भगवान शिव के परम पवित्र दिव्य धाम को प्राप्त होगा। भगवान शिव के आदेश से ही इस ज्योतिर्लिंग का नाम नागेश्वर पड़ा।
त्र्वम्बकेश्वर- भगवान त्र्वम्बकेश्वर का ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र प्रांत में नासिक से 30 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित है। बहुत से ऋषियों, मुनियों और देवगणों ने वहां एकत्र होकर भगवान शिव से सदा वहां निवास करने की प्रार्थना की। वे उनकी बात मानकर वहां त्र्यबक ज्योतिर्लिंग के नाम से स्थापित हो गए। गौतम जी द्वारा लाई गई गंगा जी भी वहीं पास में गोदावरी नाम से प्रवाहित होने लगी। यह ज्योतिर्लिंग समसत पुण्यों को प्रदान करने वाला है।
रामेश्वर –इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम ने की थी। स्कंदपुराण में इसकी महिमा विस्तार से वर्णित है। इसके विषय में यह कथा कही जाती है जब भगवान राम लंका पर चढ़ाई करने के लिए जा रहे थे, तब इसी स्थान पर उन्होंने समुद्रतट की बालुका से शिवलिंग बनाकर उसका पूजना किया था।
वैद्यनाथ- यह ज्योतिर्लिंग झारखंड के संथाल परगना में स्थित है। यह वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग अनंत फलों को देने वाला है। दरअसल रावण इस शिवलिंग को लेकर लंका ले जा रहा था, लेकिन शिव की महिमा के कारण ऐसा नहीं सका था। फलस्वरूप वह यहीं पर शिवलिंग छोड़कर चला गया। इसके बाद ब्रह्मा, विष्णु आदि देवताओं ने यहां इस शिवलिंग की प्रतिष्ठा की।
विश्वेश्वर- यह ज्योतिर्लिंग उत्तर भारत की प्रसिद्ध नगरी काशी में स्थित है। इस नगरी का प्रलयकाल में भी लोप नहीं होता। इस नगरी का प्रलयकाल में भी लोप नहीं होता। उस समय भगवान अपनी वासभूमि इस पवित्र नगरी को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं और सृष्टिकाल आने पर पुनः यथास्थान रख देते हैं। सृष्टि की आदि स्थली भी इसी नगरी को बताया जाता है। भगवान विष्णु ने इसी स्थान पर अपनी तपस्या द्वारा भगवान शिव को संतुष्ट किया था।
भीमेश्वर- यह ज्योतिर्लिंग पुणे से लगभग 100 किलोमीटर दूर सेह्याद्री की पहाड़ी पर स्थित है। इसे भीमाशंकर भी कहते हैं। देवताओं ने शिव से प्रार्थना की कि लोककल्याणार्थ आप यहीं निवास करें। देवों की प्रार्थना स्वीकार कर शिव सदा के लिए वहां ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए।
केदारनाथ- यह ज्योतिर्लिंग पर्वतराज हिमालय की केदार नामक चोटी पर स्थित है। पुराणों एवं शास्त्रों में केदारेश्वर- ज्योतिर्लिंग की महिमा का वर्णन किया गया है। इस चोटी के पश्चिम भाग में पुण्यमयी मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित केदारेश्वर महादेव का मंदिर अपने स्वरूप से ही धर्म और अध्यात्म की ओर बढ़ने का संदेश देता है। चोटी के पूर्व में अलकनंदा के सुरम्य तट पर बदरीनाथ का परम प्रसिद्ध मंदिर है।
ओंकारेश्वर- यह ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। इस स्थान पर नर्मदा के दो धाराओं में विभक्त हो जाने से बीच में एक टापूप सा बन गया है। इस टापू को मान्धाता पर्वत या शिवपुरी कहते हैं। नदी की एक धारा इस पर्वत के उत्तर और दूसरी दक्षिण होकर बहती है। दक्षिण वाली धारा ही मुख्य धारा मानी जाती है। इसी मान्धता पर्वत पर श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंदिर स्थित है।
महाकालेश्वर- यह ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के उज्जैन नगर में है। पुण्यसलिला क्षिप्रा में उज्जयिनी के नाम से विख्यात था। इसे अवन्तिकापुरी भी कहते थे। यह भारत की परम पवित्र सप्तपुरियों में से एक हैं। महाभारत, शिवपुराण एवं स्कंदपुराण में महाकाल ज्योतिर्लिंग की महिमा का पूरे विस्तार के साथ वर्णन किया गया है।
मल्लिकार्जुन- आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर दक्षिण का कैलाश कहे जाने वाले श्रीशैलपर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग स्थित है। महाभारत, शिवपुराण तथा पद्मपुराण आदि धर्मग्रंथों मंर इसकी महिला और महत्ता का विस्तार से वर्णन किया गया है।
धुश्मेश्वर –इसे घुश्मेश्वर, घुसृणेश्वर या घृष्णेश्वर भी कहा जाता है। यह महाराष्ट्र में दौलताबाद से बारह मील दूर वेरुलगांव के पास स्थित है।
सोमनाथ-यह ज्योतिर्लिंग गुजरात प्रांत के काठियाबाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे स्थित है। पहले यह क्षेत्र प्रभासक्षेत्र के नाम से जाना जाता था। यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने जरा नामक व्याध के बाण को निमित्त बनाकर अपनी लीला का संवरण किया था।

बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार जरूरी

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– संतुलित आहार से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता होगी विकसित, -बच्चों के भोजन में दूध और अनाज की मात्रा बढ़ाएं
– पानी और जूस भी अधिक से अधिक देने की कोशिश करें
खगड़िया, 28 फरवरी-
बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार जरूरी है। इससे ना सिर्फ बच्चे का सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास होगा, बल्कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होगी। खासकर बदलते मौसम में तो बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे में खुद के साथ-साथ बच्चों की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। छोटे-छोटे बच्चों का उसके स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए कौन सा आहार हो, इसको लेकर सावधान रहने की दरकार है। संतुलित आहार से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। बच्चों को अगर विटामिन और मिनरल्स नहीं मिलते हैं तो उसके शरीर की धीरे-धीरे प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है।
– बच्चों के आहार का रखें विशेष ख्याल :
खगड़िया सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने बताया, बच्चों के आहार के प्रति थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। दरअसल,अभी उनमें तेजी से प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। अभी अगर थोड़ा से सावधान रहें तो आगे ज्यादा परेशानी नहीं होगी। इसलिए जरूरी है कि उनके भोजन में दूध, अनाज की मात्रा बढ़ाएं। साथ ही पानी और जूस भी अधिक से अधिक दें।
– शारीरिक विकास के लिए प्रोटीन जरूरी :
बच्चे के शारीरिक विकास के लिए कैलोरी बहुत जरूरी है। अधिक कैलोरी के लिए दूध और साबुत अनाज अधिक देने पर ध्यान दें। सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार के मुताबिक बच्चों को कॉर्नफ्लैक्स व ओट्स दे सकते हैं। वहीं, प्रोटीन की कमी से शारीरिक विकास सही तरीके से नहीं हो पाता है और मस्तिष्क संबंधी भी कई तरह के विकार पैदा हो जाते हैं। इसके अलावा मांसपेशियों और हड्डियों की  मजबूती के लिए भी प्रोटीन बहुत जरूरी है। प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाने के लिए बच्चों को पूरी मात्रा में विटामिन और मिनरल दें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बच्चों को पानी पिलाते रंहे।
इन बातों का रखें ध्यान :
(1)जन्म के शुरुआती 1 घण्टे में नवजात को कराएं स्तनपान।
(2)6 माह तक सिर्फ शिशु को कराएं स्तनपान(ऊपर से कुछ भी न दें। पानी भी नहीं)। स्तनपान को कम से कम 2 साल तक जारी रखें।
(3)6 माह पूर्ण होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ संपूरक आहार देना शुरू करें।
(4)शुरुआत में प्रतिदिन बच्चे को अलग-अलग आहार खिलाएं। इस बात का ध्यान रखें कि इनमें पौष्टिक तत्व भरपुर मात्रा में शामिल हों।
(5)बच्चे को प्यार से समझाएं। उसे खेल-खेल में खाना खिलाएं।
(6)कलरफुल चीजें बच्चे को बहुत पसंद होती हैं। यह बात आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। उन्हें सलाद, फल और सब्जियां काट कर दें।
(7)बच्चों  को खेलने दें, वह जितना ज्यादा थकेंगे उन्हें उतनी ही भूख लगनी शुरू हो जाएगी। वह खुद खाना मांगेगा ।
(8) बच्चे को पौष्टिक खाना खाने की आदत डालें और बाहरी खाना से बचाएं।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर आरोग्य दिवस पर बच्चों का हो रहा है टीकाकरण

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– शिशु मृत्यु दर से बचाव के लिए जरूरी है टीकाकरण
– 5 साल तक के बच्चों को कई बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए लगाया जाता है टीका
मुंगेर, 28 फरवरी
जिला में बुधवार और शुक्रवार को आयोजित होने वाले आरोग्य दिवस के दिन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के टीकाकरण के साथ ही ई- संजीवनी ओपीडी सेवाऐं भी सफलतापूवर्क प्रदान की जा रही हैं। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य संबंधित आवश्यक जानकारियां भी उनकी माताओं को दी जा रही हैं। इस अवसर पर सेविका, सहायिका के द्वारा महिलाओं के स्वास्थ्य के विषय में भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी  दी जाती हैं। जिला के विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से दी जाने वाली टेलीमेडिसीन की सुविधा का अब तक हजारों की संख्या में मरीजों द्वारा लाभ उठाया जा चुका है। जिला के सभी केन्द्रों पर कूरियर के माध्यम से दवाइयाँ पहुँचायी जा रही हैं। जिसे मरीजों को उनके आवश्यकता अनुरूप उपलब्ध करायी जा रही है। घर बैठे इलाज पा मरीजों के चेहरों पर खुशी देखी जा रही है। सरकार द्वारा घर बैठे लोगों का टेलीमेडिसीन के माध्यम से निपुण चिकित्सकों द्वारा परामर्श एवं दवा पा मरीजों को काफी राहत मिली। जिले के सभी प्रखंडों में टेलीमेडिसीन की टीम मरीजों का बेहतर तरीके से इलाज कर रही है।
-विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मरीज़ों को दी जा रही हैं जानकारी : डीआईओ
ज़िला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ.राजेश कुमार रौशन ने बताया कि जिलेवासियों को टेलीमेडिसीन की सुविधा सभी आरोग्य दिवस साइट्स पर एएनएम द्वारा  टेलीफोन या मोबाइल के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों से बातचीत करा कर दी जा रही है। इस दौरान मरीजों के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी चिकित्सकों द्वारा ली जा रही है। इसके साथ ही उन्हें इलाज के लिए आवश्यक उपचार एवं दवा खाने के लिए परामर्श भी दिया जा रहा है। उसके बाद स्थानीय एएनएम द्वारा लाभार्थी मरीज को चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। जब से इस  अभियान की शुरुआत की गई तब से मरीजों को अन्य तरह की सुविधाएं मिलनी शुरू हो गयी हैं।
– शिशु मृत्यु दर से बचाव के लिए जरूरी है टीकाकरण :
 जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. रौशन ने बताया कि शिशुओं के सम्पूर्ण टीकाकरण के जरिए बच्चों को संक्रामक रोगों के विरुद्ध सुरक्षित किया जाता है। जो न केवल बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाता  बल्कि नवजात व शिशुओं के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का भी विकास करता है। इसके साथ ही समय से बच्चों को प्रतिरक्षित करने से बच्चों में होने वाली सामान्य रोगों में भी कमी आती है। उन्होंने बताया, शिशु मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से अनेक ऐसी बीमारियां हैं, जिनको नियमित टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है। लेकिन इन सभी टीकों का सही समय पर दिया जाना भी महत्वपूर्ण है। ताकि, बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सके। बच्चों में होने वाले पोलियो, टीबी, खसरा एवं रूबेला, निमोनिया, डायरिया, हेपेटाइटिस-बी, गलाघोंटू, काली खांसी, दिमागी बुखार एवं टीटनेस जैसे कई गंभीर रोगों से टीकाकरण बचाव करता एवं शिशु मृत्यु दर में काफ़ी कमी लाता है। जिले के सभी बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिये सदर अस्पताल के साथ-साथ प्रखंड स्तर के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टीका उपलब्ध है।
आरोग्य दिवस सप्ताह में दो दिन आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित किया जाता है टीकाकरण :
जिला में सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सप्ताह में दो दिन बुधवार एवं शुक्रवार को आरोग्य दिवस यानि ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस मनाया जाता है। इस दौरान 5 साल तक के बच्चों को नियमित टीकाकरण सारणी के अनुसार टीका लगाया जाता है। आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम के सहयोग से आरोग्य दिवस का सफ़ल संचालन किया जाता है। जिले के सभी आशा एवं एएनएम को टीकाकरण की महता पर नियमित उन्मुखीकरण भी किया जाता है। गृह आधारित नवजात देखभाल कार्यक्रम के तहत आशाएं नियमित गृह भ्रमण करती हैं। वह नवजातों की देखभाल के साथ उनके परिजनों को टीकाकरण के विषय में भी जागरूक करती हैं।