कोरोना संक्रमण से बचाव को सभी  अनिवार्य रूप से लें वैक्सीन की दूसरी डोज : डीआईओ 

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– रोग प्रतिरोधक क्षमता को अधिक समय तक कारगर बनाये रखने के लिए दूसरा डोज आवश्यक
– पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान के दौरान छुटे हुए 15 से 18 वर्ष के किशोरों का होगा सर्वे , अगले दिन कराया जाएगा टीकाकरण
मुंगेर, 25 फरवरी-
जिला भर में कोरोना संक्रमण से रोकथाम के लिए कोविड- 19 का टीकाकरण अभियान जारी है। कोविड-19 टीकाकरण अभियान अपने विभिन्न चरणों से गुजरता हुआ अब 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों को टीका लगाने के चरण तक पहुँच चुका है। सरकार द्वारा मैट्रिक एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षा में भाग ले रहे परीक्षार्थियों को तीसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कोवैक्सीन से आच्छादित किया जा चुका है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि जिला भर में आगामी 27 फरवरी से शुरू हो रहे पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान के दौरान 15 से 18 आयुवर्ग के छूटे हुए किशोर-किशोरियों का सर्वे किया जाएगा । उसके अगले दिन कोरोना टीकाकरण करने वाली वैक्सीनेशन टीम के द्वारा उन सभी किशोर-किशोरियों का टीकाकरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिला भर में आम सभा आयोजित कर पंचायत स्तर पर आयुवर्ग के अनुसार लाभुकों को जागरूक एवं प्रोत्साहित करते हुए उनको कोरोना वैक्सीन की  दूसरी डोज़ एवं प्रीकाॅशन डोज दी जा रही है। ऐसे में लोगों का कोविड-19 टीकाकरण के प्रति उदासीनता एवं कोविड अनुरूप व्यवहारों को अपनाने में कोताही किया जाना खतरनाक साबित हो सकता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को अधिक समय तक कारगर बनाये रखने के लिए दूसरा डोज आवश्यक –
उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कोविड- 19 वैक्सीन की दूसरी खुराक लेना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कोरोना वैक्सीन का निर्माण शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिए किया गया है। कोविड- 19 वैक्सीन की पहली डोज लेने से व्यक्ति के शरीर में विकसित रोग प्रतिरोधक क्षमता को और अधिक प्रभावी एवं अधिक समय तक कारगर बनाये रखने के लिए कोविड- 19 वैक्सीन की दूसरी खुराक लेना बेहद जरूरी है। दूसरा डोज लेने से आपके शरीर में विकसित रोग प्रतिरोधक क्षमता को अतिरिक्त मजबूती तो प्रदान होती ही है साथ ही यह आपमें विकसित रोग प्रतिरोधक क्षमता को अधिक समय तक प्रभावी बनाये रखने में अहम भूमिका निभाती है।
तीसरी लहर को कम प्रभावी करने में कोविड- 19 टीकाकरण की अहम भूमिका –
उन्होंने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना की तीसरी लहर के प्रभाव एवं प्रसार को कम करने में सरकार द्वारा अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को कोविड- 19 टीका से आच्छादित किया जाना एक महत्वपूर्ण एवं सफल रणनीति साबित हुई। उन्होंने बताया तीसरी लहर आने की आशंकाओं को देखते हुए सरकार ने 15 से 18 वर्ष के किशोर एवं किशोरियों के लिए कोवैक्सीन का टीका दिया जाना सुनिश्चित किया । सरकार द्वारा मैट्रिक-इंटर की परीक्षाओं से पूर्व कोरोना संक्रमण से किशोरों को बचाये रखने में यह अभियान कारगर हथियार साबित हुआ।
दूसरे डोज के प्रति न हो उदासीन-
उन्होंने बताया कि कोरोना के नये मामले नहीं मिलने से लोगों में कोविड- 19 वैक्सीन की दूसरी एवं प्रीकाॅशन डोज लेने में उदासीनता देखी जा रही है जो कभी भी खतरनाक साबित हो सकती है। इसके साथ ही लोगों द्वारा कोरोना उपयुक्त व्यवहार को अपनाये रखने में भी कोताही बरती जा रही है जो कोरोना वायरस को न्यौता देने के समान है। लोगों से समय पर कोरोना वैक्सीन की अपनी दूसरी डोज लेने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि जिनका भी  दूसरा डोज लेने का समय हो चुका है वो सभी लोग अनिवार्य रूप से कोविड- 19 वैक्सीन की दूसरी खुराक लें। साथ ही जिन्होनें अभी तक वैक्सीन की प्रीकॉशन डोज़ नहीं ली है वो भी अपने नजदीकी वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर प्रीकॉशन डोज़ ले लें।

लखीसराय के कछियाना एपीएचसी में परिवार नियोजन की स्थाई साधन सेवा शुरू 

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– अब स्थाई साधन के लिए लाभार्थियों को नहीं जाना पड़ेगा गाँव से बाहर, एपीएचसी में ही होगा ऑपरेशन
– अनावश्यक परेशानियों का नहीं करना पड़ेगा सामना, आसानी व सुविधाजनक तरीके से मिलेगा लाभ
लखीसराय, 25 फरवरी-
लखीसराय पीएचसी के अधीनस्थ कछियाना गाँव में संचालित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में परिवार नियोजन की स्थाई साधन सेवा शुरू कर दी गई है। जो इस क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। इससे अब योग्य लाभार्थियों को परिवार नियोजन के स्थाई साधन को अपनाने के लिए गाँव से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। बल्कि, एपीएचसी में यानी गाँव में ही बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा। साथ ही स्थाई साधन अपनाने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। गाँव से बाहर जाने में सफर के दौरान होने वाली जद्दोजहद से भी निजात मिलेगी। इस सुविधा के शुरू होने से इलाके के लोगों में खुशी है।
– आसानी से मिलेगा समुचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ :
लखीसराय पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ रौशेक कुमार ने बताया, कछियाना एपीएचसी में परिवार नियोजन की स्थाई साधन सेवा शुरू कर दी गई है। अब इस क्षेत्र के परिवार नियोजन को अपनाने वाली योग्य लाभार्थियों को एपीएचसी में समुचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उपलब्ध करायी जाएगी। यह सुविधा  स्वास्थ्य विभाग का बेहतर कदम है। इस पहल से अब उस इलाके के लोगों को इलाज के लिए प्रखंड और जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। बल्कि, एपीएचसी स्तर पर मिलने वाली सभी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं गाँव में ही मिलेगी। सभी लोग सुविधाजनक तरीके से लाभ भी ले सकेंगे। वहीं, उन्होंने बताया, कछियाना एपीएचसी में कार्यरत सभी आशा कार्यकर्त्ता को जिम्मेदारी दी गई है कि वह अपने-अपने क्षेत्र में योग्य लाभार्थियों को जागरूक कर सुविधा की जानकारी उपलब्ध कराएं।
– छोटा और खुशहाल परिवार के लिए परिवार नियोजन जरूरी :
सर्जन डाॅ हरि प्रिया ने बताया, छोटा और खुशहाल परिवार के लिए परिवार नियोजन  अपनाना  बेहद जरूरी है। क्योंकि, जब हमारा परिवार छोटा होगा, तभी हम गुणवत्तापूर्ण जीवन-यापन कर सकते हैं। इसी उद्देश्य से एपीएचसी स्तर पर परिवार नियोजन की स्थाई साधन की व्यवस्था की गई है। ताकि सभी इच्छुक और योग्य लाभार्थी आसानी के साथ स्थाई साधन को अपना सकें ।  वहीं, उन्होंने बताया, इसे सफल बनाने के लिए सामुदायिक स्तर पर अभियान चलाकर योग्य लाभार्थियों को जागरूक और प्रेरित किया जाएगा।

मानसी प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों पर  नियमित और कोविड टीकाकरण का आयोजन 

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– गर्भवती महिलाओं और शिशुओं का नियमित टीकाकरण और योग्य लाभार्थियों को दी गई कोविड वैक्सीन
– संस्थागत प्रसव को लेकर भी गर्भवती महिलाओं को किया गया जागरूक
खगड़िया, 25 फरवरी-
जिले में कोविड वैक्सीनेशन के साथ नियमित टीकाकरण का भी आयोजन किया जा रहा है। ताकि गर्भवती एवं शिशु का ससमय नियमित टीकाकरण भी सुनिश्चित हो सके और बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके। जिसे सार्थक रूप देने के लिए निर्धारित तिथि के अनुसार जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण अभियान चल रहा है। जिसके माध्यम से कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा सेविका एवं आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से गर्भवती एवं शिशु का नियमित टीकाकरण किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिले के मानसी प्रखंड अंर्तगत संचालित विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित सह कोविड टीकाकरण का आयोजन किया गया। जिसमें गर्भवती और शिशु का नियमित टीकाकरण किया गया तो योग्य लाभार्थियों का कोविड वैक्सीनेशन किया गया। वहीं, इस दौरान नियमित टीकाकरण के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को जरूरी सलाह के साथ-साथ गर्भावस्था के दौरान बतरी जाने वाली सावधानियाँ के अलावा खान-पान, रहन-सहन समेत सुरक्षित और सामान्य प्रसव को लेकर अन्य आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
– गर्भवती और शिशु के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी :
आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित टीकाकरण का निरीक्षण कर रहे आरबीएसके के चिकित्सक डाॅ ए के मित्तल ने बताया, सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने एवं शिशु के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए समय पर नियमित टीकाकरण जरूरी है। इसलिए, कोविड के साथ नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का भी आयोजन कर योग्य लाभार्थी का नियमित टीकाकरण भी किया जा रहा है। ताकि ससमय पर नियमित टीकाकरण भी सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, नियमित टीकाकरण के दौरान शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के टीके लगाए जाते हैं और गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
– संस्थागत प्रसव को लेकर भी किया जाता है जागरूक :
केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक करण कुमार ने बताया, इस दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार वालों को संस्थागत प्रसव को लेकर भी जागरूक किया जाता है। जिसके दौरान यह बताया गया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। योग्य एवं प्रशिक्षित एएनएम द्वारा चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रसव कराया जाता है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को अपनाने के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की जरूरत है। वहीं, उन्होंने बताया, इस दौरान कोविड वैक्सीन का पहला, दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज भी दिया गया।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

कायाकल्प की टीम के निरीक्षण में खरा उतरा अमरपुर रेफरल अस्पताल 

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-रेफरल अस्पताल परिसर की सफाई व्यवस्था को देखा और जानकारी ली
-पटना से आई कायाकल्प की टीम ने रेफरल अस्पताल का लिया जायजा
बांका, 25 फरवरी-
पटना से आई कायाकल्प की टीम ने शुक्रवार को अमरपुर स्थित रेफरल अस्पताल का निरीक्षण किया। कायाकल्प टीम की जांच में रेफरल अस्पताल खरा उतरा। टीम यहां की सफाई व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं से संतुष्ट दिखी। टीम में पटना से निकले आई डॉ. सुर्चना चंद्रा और राजेश नल्लामुत्थू थे। उनके साथ केयर इंडिया के डीटीओ ऑन राकेश कुमार राय भी थे। सभी ने अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को देखा। खासकर अस्पताल की सफाई व्यवस्था की टीम ने बारीकी से निरीक्षण किया। मालूम हो कि कायाकल्प की जिले की टीम के निरीक्षण में अमरपुर रेफरल अस्पताल खरा उतरा है। इसके बाद अब राज्य की टीम निरीक्षण कर रही है। इसमें भी खरा उतरने पर अस्पताल को पुरस्कार के तौर पर मोटी राशि मिलेगी।
कायाकल्प की टीम अमरपुर रेफरल अस्पताल के अंदर से लेकर परिसर तक की सफाई व्यवस्था को परखा। पटना से आई डॉक्टर सुर्चना चंद्रा ने बताया कि यहां की व्यवस्था अच्छी थी। खासकर सफाई का बेहतर तरीके से ध्यान रखा जाता है। न सिर्फ अस्पताल के अंदर, बल्कि परिसर भी साफ-सुथरा था। प्रसव कक्ष, ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर में गंदगी नहीं दिखी। प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि हमलोगों ने ठीक से तैयारी की थी। कायाकल्प की टीम भी संतुष्ट दिखी। अब अंक मिलने के बाद पता चलेगा निरीक्षण कितना अच्छा रहा। उन्होंने बताया कि सिर्फ कायाकल्प के निरीक्षण के दौरान ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी अस्पताल में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। मरीजों का स्वच्छ माहौल में यहां पर इलाज किया जाता है।
अच्छे अंक मिले तो पुरस्कार का हकदार होगा रेफरल अस्पताल: कायाकल्प की टीम के निरीक्षण में राज्य भर में टॉप करने पर अस्पताल को 17 लाख रुपये की राशि मिलती है। दूसरे और तीसरे स्थान वाले को भी राशि मिलती है। उस राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाने पर खर्च किया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि अस्पताल के कर्मियों में उत्साह बढ़ाने के लिए खर्च किया जाता है। दोनों ही अस्पताल पहले जिला स्तरीय टीम के निरीक्षण में खरा उतर चुका है। अब अगर राज्य स्तरीय कायाकल्प टीम के निरीक्षण में खरा उतरता है तो पुरस्कार का हकदार हो जाएगा।

कालाजार के मरीज की सूचना देने या रेफर करने पर मिलेंगे 500 रुपये

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-सदर अस्पताल में ग्रामीण चिकित्सकों को कालाजार को लेकर दिया गया प्रशिक्षण
-प्रशिक्षण के दौरान ग्रामीण चिकित्सकों को लक्षण से लेकर बचाव की दी गई जानकारी
बांका, 25 फरवरी-
ग्रामीण चिकित्सक अगर कालाजार के मरीज की सूचना देते हैं या फिर सरकारी अस्पताल रेफर करते हैं तो उन्हें 500 रुपये दिया जाएगा। यह बात शुक्रवार को सदर अस्पताल में ग्रामीण चिकित्सकों को प्रशिक्षण के दौरान कही गई। कालाजार को लेकर प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल और केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने दिया। मौके पर सुभाष कुमार साह और राकेश कुमार भी मौजूद थे।
प्रशिक्षण के दौरान ग्रामीण चिकित्सकों को कालाजार की पहचान के बारे में बताया गया। इसके लक्षण की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि कालाजार बीमारी बालू मक्खी के काटने से होता है। एंटी मलेरिया या एंटीबायोटिक दवा खाने के बाद भी 15 दिन से अधिक बुखार हो तो कालाजार हो सकता है। कम भूख लगना, वजन का घटना, लिवर और तिल्ली का बढ़ जाना ये सब कालाजार के लक्षण हैं। कालाजार की जांच सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त में होती है। साथ ही इसका इलाज सदर अस्पताल में बिल्कुल ही निःशुल्क है। कालाजार उन्मूलन को लेकर ज़िले के बौंसी, बाराहाट, धोरैया और बांका सदर प्रखंडों के 10 गांवों के 18530 आबादी के 3548 घरों में 05 मार्च 2021 से सिंथेटिक पाइराथायरायड पाउडर का छिड़काव लगातार कराया जा रहा है।
7100 रुपये की मिलेती है राशिः प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि कालाजार के मरीज को सरकार की तरफ से 7100 रुपये दिए जाते हैं। इसमें 500 रुपये केंद्र सरकार की ओर से और 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से दिया जाता है। मरीज को पौष्टिक भोजन के लिए यह राशि दी जाती है। कालाजार के मरीज जैसे ही मिलते हैं, सबसे पहले उसका इलाज कराया जाता है। इसके बाद मरीज का सर्टिफिकेट बनाकर उसे सहायता राशि दी जाती है।
कालाजार की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट: जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। प्रभावित प्रखंडों में छिड़काव का काम लगातार करवाया जाता है। डॉ. यादव ने लोगों से अपील की कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें। यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें। सोते समय मच्छरदानी लगाएं। साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं। कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील उन्होंने की।
इलाज में नहीं करें लापरवाही: वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने बताया कि कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है। कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है। यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है। कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है। यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है। बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते हैं। कालाजार के लक्षणों के दिखने पर रोगी को तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल या पीएचसी भेजा जाना चाहिए।

खुद के साथ पूरे परिवार को खिलवायें फाइलेरिया की दवा- डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद 

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• पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सौजन्य से फाइलेरिया मरीजों का हुआ उन्मुखीकरण
• मरीजों को वितरित की गयी निशुल्क दवा
• 35 मरीजों को मिली फाइलेरिया प्रबंधन के टिप्स
पटना/ 24 फ़रवरी:   सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग फाईलेरिया से मुक्ति के लिए संकल्पित है और नियमित अंतराल पर एमडीए कार्यक्रम चलाकर लक्षित लोगों को फाइलेरिया दवा खिलाने की मुहिम चलाती है. सीफार(सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च) द्वारा गुरुवार को पटना के फुलवारी प्रखंड के आलमपुर गुनपुरा पंचायत में फाइलेरिया से होने वाली रुग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता रोकने के लिए फाइलेरिया रोगियों का प्रशिक्षण एवं विमर्श का आयोजन किया गया. यह आयोजन सीफार द्वारा गठित फाइलेरिया रोगियों के पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के लिए की गयी थी. जिसमें आलमपुर गुनपुरा पंचायत के भुसेला दानापुर, गोरिया डेरा तथा लहियारचक गाँव के 35 फ़ाइलेरिया मरीज सम्मिलित हुए. कार्यक्रम का संचालन जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में हुई. आयोजित कार्यक्रम में फाइलेरिया मरीजों को रोग के समुचित प्रबंधन की जानकारी दी गयी और उनके बीच नि:शुल्क दवा का वितरण भी किया गया.
खुद के साथ पूरे परिवार को खिलवायें फ़ाइलेरिया की दवा- डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद:
मरीजों को फाइलेरिया प्रबंधन और नियमित दवा सेवन के महत्त्व के बारे में जानकारी देते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने बताया, संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए जरुरी है कि मरीज नियमित रूप से बताये गए दवा का सेवन करें और अपने परिवारजनों को भी चाहे वो मरीज न भी हों तो एमडीए अभियान के दौरान डीइसी एवं एल्बेंडाजोल दवा का सेवन जरुर करने के लिए प्रेरित करें. पाँच साल तक एक बार इन दवाओं के सेवन से कोई भी व्यक्ति आजीवन फाइलेरिया के खतरे से मुक्त हो सकता है. उन्होंने बताया कि स्वच्छता का ध्यान और सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग फाइलेरिया से सुरक्षा देता है.
डॉ. प्रसाद ने बताया फाइलेरिया उन्मूलन के लिए रोग पर दोहरा प्रहार करने की जरुरत है. एक तरफ जहाँ मरीजों का उपचार एवं प्रबंधन तो दुसरे तरफ ज्यादा से ज्यादा लोगों को साल में एक बार डीइसी एवं एल्बेंडाजोल दवा का सेवन कराना. जनमानस को दवा के लाभ के बारे में जागरूक करने की जरुरत है ताकि लोग फाइलेरिया रोग की गंभीरता और उसके खतरे से अवगत हो सकें.
35 मरीजों को मिली फाइलेरिया प्रबंधन के टिप्स:
कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया इंस्पेक्टर मोहम्मद मुस्तफा ने हाथीपाँव से पीड़ित मरीजों को अपने पाँव का सही तरीके से ख्याल रखने के विषय में विस्तार से जानकारी दी. साथ ही उन्होंने पैरों को कैसे साफ़ करना चाहिए, इसके विषय में प्रदर्शन भी किया. उन्होंने कहा कि हाथीपाँव से पीड़ित रोगियों को अधिक समय तक खड़ा नहीं रहना चाहिए.साथ ही सोते समय उन्हें अपने पैरों के नीचे एक तकिये रख कर ही सोना चाहिए. बैठने के दौरान घुटने को नहीं मोड़ना चाहिए. इस दौरान 35 फाइलेरिया मरीजों को फाइलेरिया प्रबंधन की जानकारी दी गयी.
मरीजों को संबोधित करते हुए फाइलेरिया इंस्पेक्टर मोहम्मद मुस्तफा ने बताया कि फाइलेरिया को हाथीपावं रोग के नाम से भी जाना जाता है. यह एक दर्दनाक रोग है जिसके कारण शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है. यह क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से फैलता है. आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है. फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा( पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसील(अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों के आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है.
पंचायत मुखिया प्रमोद कुमार शर्मा ने ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा कि फ़ाइलेरिया जैसे गंभीर रोग के प्रति पहले की तुलना में अब सरकार अधिक सजग है. उन्होंने फ़ाइलेरिया मरीजों से अपील करते हुए कहा कि प्रशिक्षकों द्वारा प्रदान की गयी जानकारी को सभी सही रूप से अपनाएं. साथ ही उन्होंने सीफार संस्था को फ़ाइलेरिया मरीजों के प्रति संवेदनशील पूर्वक कार्य करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया.
इस अवसर पर वेक्टर जनित रोग सलाहकार कल्याणी कुमारी, पंकज कुमार,जिला वेक्टर जनित रोग अधिकारी, केयर इंडिया के डीपीओ वीएल अमर कुमार सहित सीफार टीम के उप राज्य कार्यक्रम प्रबंधक, रणजीत कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यालय के अधिकारीगण एवं अन्य उपस्थित थे.

खगड़िया जिला अस्पताल में दो दिवसीय लक्ष्य कार्यक्रम प्रशिक्षण का हुआ समापन 

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– प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थियेटर की एएनएम और अन्य कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण
– लक्ष्य कार्यक्रम से गुणवत्तापूर्ण प्रसव को मिलेगा बल, मातृ एवं शिशु की अस्वस्थता व मृत्यु दर में आएगी कमी
खगड़िया, 24 फरवरी।
बुधवार से जिला अस्पताल में चल रहे लक्ष्य कार्यक्रम से संबंधित दो दिवसीय प्रशिक्षण का गुरुवार को समापन हो गया। इस प्रशिक्षण का आयोजन सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रेयसी की देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।  यह प्रशिक्षण डाॅ गजेंद्र कुमार एवं केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक राजेश पांडेय द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण में अस्पताल के प्रसव कक्ष एवं ऑपरेशन थियेटर के सभी एएनएम एवं अन्य कर्मी शामिल हुए। जिसमें मौजूद सभी कर्मियों को प्रशिक्षक द्वारा लक्ष्य कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए मूल्यांकन चेकलिस्ट के क्रियान्वयन समेत अन्य जानकारियाँ विस्तार पूर्वक दी गई। साथ ही उक्त कार्यक्रम का जरूरतमंदों को सुविधाजनक तरीके से लाभ मिल सके, इस पर भी बल दिया गया।
– लक्ष्य कार्यक्रम के तहत प्रसव पीड़िता को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा :
खगड़िया सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रेयसी ने बताया, लक्ष्य कार्यक्रम से ना सिर्फ गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, इससे शिशु-मातृ मृत्यु दर में भी कमी आएगी। इसका सकारात्मक बदलाव भी देखा जा रहा है। दरअसल, इस कार्यक्रम का उद्देश्य ही है प्रसव एवं प्रसव के बाद देखभाल में सुधार करना। इस कार्यक्रम के तहत लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। लक्ष्य कार्यक्रम सभी अस्पतालों में क्रियान्वित की जा रही है । सभी जगह इस कार्यक्रम के तहत सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसव को बढ़ावा मिल रहा है।
– लक्ष्य कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिला की देखभाल में होगा सुधार :
केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक राजेश पांडेय ने बताया, इस कार्यक्रम के तहत प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, प्रसव संबंधी गहन देखभाल इकाइयों और उच्च निर्भरता इकाइयों (एचडीयू) में गर्भवती महिलाओं की देखभाल में सुधार होगा।  साथ ही प्रत्येक गर्भवती महिला और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में जन्म लेने वाले नवजात शिशु लाभान्वित होंगे। सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सम्मानीय मातृत्व देखभाल (आरएमसी) की सुविधा प्रदान की जाएगी। इस पहल के अंतर्गत बहुमुखी रणनीति अपनाई गई है। जिनमें बुनियादी ढांचागत सुधार, उन्नयन, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना, स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाना और प्रसूति गृहों में सुविधाओं में सुधार लाना शामिल है।
– लक्ष्य कार्यक्रम में केयर इंडिया भी कर रहा है सहयोग :
लक्ष्य कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए केयर इंडिया भी सहयोग कर रहा व  कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए हर संभव मदद कर रहा है। ताकि इस कार्यक्रम का लोगों को बेहतर तरीके से लाभ मिले सके और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से लाभान्वित हो सकें।

लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा सीएचसी का कायाकल्प कार्यक्रम अंतर्गत मूल्यांकन आज 

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– कायाकल्प योजना से सुदृढ़ होगी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा
– मरीजों को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा, साफ-सफाई का रखा जाएगा ख्याल
लखीसराय, 24 फरवरी।
शुक्रवार को कायाकल्प योजना के अंतर्गत सूर्यगढ़ा सीएचसी  का मूल्यांकन किया जाएगा। यह मूल्यांकन स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित स्टेट टीम में शामिल पीएमसीएच ब्लड बैंक (ईए) के डाॅ उमाशंकर सिंह, यूनिसेफ के एसआरयू डाॅ सूरचना चंद्र द्वारा किया जाएगा। इस दौरान अस्पताल में उक्त कार्यक्रम अंतर्गत आने वाली तमाम स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तृत अवलोकन एवं भौतिक स्थिति की जानकारी ली जाएगी। ताकि उक्त कार्यक्रम का बेहतर संचालन हो सके और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके। साथ ही उक्त कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाली तमाम स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित रूप से मरीजों को उपलब्ध करायी जा सके।
– कायाकल्प योजना से सुदृढ़ होगी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा :
सूर्यगढ़ा सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ सत्येंद्र कुमार ने बताया, शुक्रवार स्टेट टीम द्वारा कायाकल्प कार्यक्रम के तहत सीएचसी का मूल्यांकन किया जाएगा। जिसको लेकर सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। वहीं, उन्होंने बताया, उक्त कार्यक्रम के तहत मरीजों को उचित प्रबंधन के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए सरकार द्वारा लाई गई कायाकल्प योजना से सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा सुदृढ़ होगी और स्वास्थ्य संस्थानों की तस्वीर में पूर्व की भाँति सकारात्मक बदलाव भी होगा। इससे मरीजों को ना सिर्फ ना सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी बल्कि, समुचित व्यवस्था के साथ स्वास्थ्य सेवा दी जाएगी। दरअसल, स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतर बदलाव एवं मूलभूत सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए ही सरकार द्वारा यह योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। साथ ही अस्पताल में स्वच्छता समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं में सकारात्मक बदलाव होगा।
– साफ-सफाई समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं का रखा जाएगा ख्याल :
सूर्यगढ़ा सीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अनिल कुमार कुशवाहा ने बताया, इस योजना के तहत साफ-सफाई समेत अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली अन्य मूलभूत सुविधाओं का ख्याल रखा जाएगा। ताकि मरीजों को बेहतर प्रबंधन के बीच मरीजों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके और मरीजों को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। इसके अलावा मरीजों को मिलने वाली सभी सुविधाओं का भी ख्याल रखा जाएगा।
– केयर इंडिया भी कर रहा है सहयोग :
इस योजना को सफल बनाने के लिए केयर इंडिया भी सहयोग कर रहा है। दरअसल, इस योजना का सफल संचालन स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया की संयुक्त पहल से ही संभव है। इसको लेकर तमाम पदाधिकारी एवं कर्मी ने आवश्यक कवायद तेज कर दी है।

नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम: जिलाभर में शुरू हुआ विशेष अभियान

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– 24 फरवरी से 24 मार्च के दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को किया जायेगा जागरूक
– जिला के सभी पीएचसी और सीएचसी पर प्रत्येक मंगलवार को मनाया जाएगा # टीबी ट्यूजडे
– टीबी हारेगा, देश जीतेगा कैंपेन के तहत जिला भर आयोजित होगी कई गतिविधियां
मुंगेर, 24 फरवरी-
नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम के तहत  24 फरवरी से अगले माह 24 मार्च तक सामुदायिक स्तर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है। मालूम हो प्रति वर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला भर में अगले एक माह तक टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 24 फरवरी से 24 मार्च तक जिला भर में टीबी हारेगा, देश जीतेगा कैंपेन के तहत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जायेगा। इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, सेंट्रल टीबी डिविजन के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. राजेंद्र पी जोशी ने पत्र जारी कर आवश्यक दिशा- निर्देश दिया है। सेंट्रल टीबी डिविजन ने टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान के तहत एक महीने का अभियान, पूर्ण संकल्प, संयुक्त प्रयास शुरू किया है।
डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर मुंगेर में कार्यरत डिस्ट्रिक्ट टीबी /एचआईवी कॉर्डिनेटर शैलेन्दु कुमार ने बताया कि टीबी जागरूकता अभियान निक्षय दिवस से शुरू होकर विश्व टीबी दिवस 24 मार्च तक मनाया जाएगा। इस दौरान टीबी चैंपियन/मंचों का पर्याप्त रूप से उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही टीबी प्रकोष्ठों के सभी अधिकारियों और सलाहकारों को भी जमीनी स्तर पर और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकतम आबादी तक पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास करना है।
महिलाओं की सहभागिता होगी सुनिश्चित :
उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन अभियान में महिलाओं की सहभागिता को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस अभियान के दौरान भी महिलाओं के साथ बैठक कर टीबी के प्रति उन्हें जागरूक किया जायेगा। इसके साथ ही सामुदायिक स्तर पर धर्मगुरू के साथ भी मीटिंग की जायेगी। इस दौरान सामूहिक सहभागिता से टीबी उन्मूलन के सपने को साकार करने का प्रयास किया जायेगा। इस अभियान में जनप्रतिनिधि, धर्मगुरू, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जायेगा। इस दौरान टीबी के प्रति महिलाओं को संवेदनशील बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जायेगा। एक्टिव मरीज खोज अभियान के तहत महिलाओं पर विशेष फोकस किया जायेगा।
स्कूलों में टीबी पर प्रतियोगिता का होगा आयोजन :
उन्होंने बताया कि टीबी के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से जिले के स्कूलों में छात्र-छात्राओं के साथ विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जायेगा। पत्र के माध्यम से प्राप्त निर्देश के अनुसार इस दौरान निबंध प्रतियोगिता, पेंटिंग, स्लोगन लेखन जैसे गतिविधियां आयोजित की जाये। इसके साथ वाल पेंटिंग के माध्यम से टीबी से बचाव का संदेश दिया जायेगा। टीबी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जायेगा।
24 फरवरी से 24 मार्च के दौरान प्रत्येक मंगलवार को पीएचसी/सीएचसी स्तर पर मनाया जाएगा# टीबी ट्यूजडे :
उन्होंने बताया कि 24 फरवरी से 24 मार्च तक प्रत्येक मंगलवार को जिला के सभी पीएचसी/सीएचसी स्तर पर #टीबी ट्यूजडे मनाया जायेगा। इस हैसटैग के माध्यम से सोशल मीडिया पर टीबी के प्रति आमजनों को जागरूक करने का प्रयास किया जायेगा। जिला के एक-एक गांव में यह गतिविधि आयोजित की जायेगी। इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जायेगा। इस दौरान टीबी मुक्त भारत का संकल्प भी दिलाया जायेगा साथ हीं हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जायेगा।
विभिन्न कार्यक्रमों में टीबी के प्रति किया जायेगा जागरूक :
पूरे माह अभियान के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में टीबी पर विशेष फोकस करने का निर्देश दिया गया है। टीबी हारेगा, देश जीतेगा कैंपेन में लोगों का उपयोग किया जायेगा। इसके साथ टीबी चैंपियन की कहानी और चित्र प्रदर्शित की जायेगी। अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा ।

मलेरिया मरीज का इलाज कराने पर आशा को मिलेगा 75 रुपये, जांच करने पर 15

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-सदर अस्पताल में जिले की आशा कार्यकर्ताओं को मलेरिया को लेकर दिया गया प्रशिक्षण
-आशा कार्यकर्ताओं को मलेरिया के लक्षण और आरडीटी किट से जांच के तरीके बताए गए
बांका, 24 फरवरी-
आशा कार्यकर्ता क्षेत्र में जाकर मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों की आरडीटी किट से जांच करेंगी। प्रति जांच उन्हें 15 रुपये की राशि भी दी जाएगी। साथ ही मरीज मिलने पर उसका इलाज कराने पर 75 रुपये प्रति मरीज अलग से दिया जाएगा। इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं को गुरुवार को सदर अस्पताल में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में उन्हें मलेरिया के लक्षण और उसके बचाव की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान सभी आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में तेज गति से जांच करने और क्षेत्र को मलेरिया से मुक्त करने में लग जाने के लिए कहा गया। प्रशिक्षण में शंभूगंज, बांका, कटोरिया, धोरैया और रजौन प्रखंड की 50 आशा कार्यकर्ता शामिल थीं। ट्रेनिंग देने का काम जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव और वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने किया। मौके पर जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा, चिकित्सा पदाधिकारी यक्ष्मा डॉ. सोहैल अंजुम, गणेश झा, सुभाष कुमार साह, राकेश कुमार और सौरभ कुमार भी मौजूद थे। इस दौरान जिला संचारी रोग पदाधिकारी ने आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में जाकर यक्ष्मा पर भी काम करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही बांका जिला में शत प्रतिशत 100 आशा कार्य़कर्ताओं का प्रशिक्षण वित्तीय वर्ष 2021-22 में संपन्न हो गया। मालूम हो कि मलेरिया उन्मूलन को लेकर सभी जिलों में 100 आशा कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण कराया जा रहा है, ताकि 2030 तक मलेरिया को खत्म किया जा सके। इसी सिलसिले में इस प्रशिक्षण का आयोजन कराया गया।
आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देते हुए डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि मलेरिया प्लाजमोडियम नामक परजीवी से संक्रमित मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया एक प्रकार का बुखार है जो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। इसमें कंपकंपी के साथ 103 से लेकर 105 डिग्री तक बुखार होता है। कुछ घंटों के बाद पसीने के साथ बुखार उतर जाता है, लेकिन बुखार आते-जाते रहता है। उन्होंने कहा कि फेलसीपेरम मलेरिया (दिमारी मलेरिया) की अवस्था में तेज बुखार होता है। खून की कमी हो जाती है। बुखार दिमाग पर चढ़ जाता है। फेफड़े में सूजन हो जाती है। पीलिया एवं गुर्दे की खराबी फेलसीपेरम मलेरिया की मुख्य पहचान है।
सरकारी अस्पतालों में जांच और इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः डॉ. यादव ने कहा कि मलेरिया बुखार होने पर पीड़ित व्यक्ति को नजदीकी सरकारी अस्पताल जाना चाहिए। खून की जांच में मलेरिया निकलने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इसकी निःशुल्क जांच और इलाज की व्यवस्था है। मलेरिया फैलाने वाला मच्छर किसी स्थान पर ठहरे हुए साफ पानी और धीमी गति से बहने वाली नालियों में अंडे देती है और वहां पर पनपती है।
सोते समय मच्छरदानी का करें प्रयोगः आरिफ इकबाल ने  मलेरिया से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े पहनें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। घर के आसपास जलजमाव वाली जगहों को मिट्टी से भर दें। जलजमाव वाले स्थान पर केरोसिन तेल या डीजल डालें। घर के आसापस बहने वाली नाले की साफ-सफाई करते रहें। उन्होंने कहा कि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की तरफ से डीडीटी का छिड़काव कराया जाता है। छिड़काव कर्मियों के आने पर उनका सहयोग करें और छिड़काव की तिथि की जानकारी ग्रामीणों को दें।