कायाकल्प की टीम ने रजौन और कटोरिया अस्पताल का किया निरीक्षण

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-अस्पताल के अंदर और परिसर की सफाई व्यवस्था को देखा और जानकारी ली
-दोनों ही अस्पतालों की सफाई व्यवस्था से कायाकल्प की टीम संतुष्ट दिखी
बांका, 24 फरवरी-
पटना से आई कायाकल्प की टीम ने गुरुवार को कटोरिया स्थित रेफरल अस्पताल और रजौन पीएचसी का निरीक्षण किया। टीम में पटना से आई यूनिसेफ की डॉ. सुर्चना चंद्रा और राजेश नल्लामुत्थू थे। उनके साथ केयर इंडिया के डीटीओ ऑन राकेश कुमार राय भी थे। सभी ने दोनों अस्पतालों की सुविधाओं को देखा। खासकर अस्पताल की सफाई व्यवस्था की टीम ने बारीकी से निरीक्षण किया। मालूम हो कि कायाकल्प की जिले की टीम के निरीक्षण में दोनों ही अस्पताल खरा उतरा है। इसके बाद अब राज्य की टीम निरीक्षण कर रही है। इसमें भी खरा उतरने पर अस्पताल को पुरस्कार के तौर पर मोटी राशि मिलेगी।
टीम ने सबसे पहले रजौन पीएचसी का निरीक्षण किया। यहां पर प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार से अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सारी सुविधाओं की जानकारी ली। पटना से आई डॉ. सुर्चना चंद्रा ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था संतोषजनक थी। प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थियेटर साफ-सुथरा था। हालांकि सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है, लेकिन व्यवस्था फिर भी ठीक-ठाक थी। वहीं प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में सफाई पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को यहां से किसी तरह का संक्रमण नहीं हो, इसका हमलोग ख्याल रखते हैं। उम्मीद है कि कायाकल्प की टीम यहां की व्यवस्था से संतुष्ट हुई होगी और अस्पताल को बेहतर अंक मिलेगा।
रजौन में निरीक्षण करने के बाद कायाकल्प की टीम कटोरिया रेफरल अस्पताल गई। वहां पर भी सभी लोगों ने अस्पताल के अंदर से लेकर परिसर तक की सफाई व्यवस्था को परखा। पटना से आए राजेश नल्लामुत्थू ने बताया कि यहां की व्यवस्था अच्छी थी। खासकर सफाई का बेहतर तरीके से ध्यान रखा जाता है। न सिर्फ अस्पताल के अंदर, बल्कि परिसर भी साफ-सुथरा था। प्रसव कक्ष, ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर में गंदगी नहीं दिखी। प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि हमलोगों ने ठीक से तैयारी की थी। अब कायाकल्प की टीम कितनी संतुष्ट हुई, यह अंक मिलने के बाद पता चलेगा। उन्होंने बताया कि सिर्फ कायाकल्प के निरीक्षण के दौरान ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी अस्पताल में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। मरीजों का स्वच्छ माहौल में यहां पर इलाज किया जाता है।
टॉप करने पर 17 लाख की मिलती है राशिः कायाकल्प की टीम के निरीक्षण में राज्य भर में टॉप करने पर अस्पताल को 17 लाख रुपये की राशि मिलती है। दूसरे और तीसरे स्थान वाले को भी राशि मिलती है। उस राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाने पर खर्च किया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि अस्पताल के कर्मियों में उत्साह बढ़ाने के लिए खर्च किया जाता है। दोनों ही अस्पताल पहले जिला स्तरीय टीम के निरीक्षण में खरा उतर चुकी है। अब अगर राज्य स्तरीय कायाकल्प टीम के निरीक्षण में खरा उतरता है तो पुरस्कार का हकदार हो जाएगा।

पंचायत स्तरीय आम सभा में टेलीमेडिसीन से आम लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच में मुंगेर राज्य में दूसरे स्थान पर 

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– इस दौरान कोरोना टीका के प्रीकॉशन डोज से वंचित 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोरोना टीकाकरण के लिए किया गया प्रेरित
मुंगेर, 23 फरवरी-
22 फरवरी को पंचायत स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं के द्वारा जिलाभर में आम सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान कोरोना टीका के प्रीकॉशन डोज से वंचित 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को कोरोना टीकाकरण के लिए प्रेरित करने के साथ ही टेलीमेडिसीन सर्विस के माध्यम से चिकित्सक के द्वारा आम लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। 22 फरवरी को जारी डिस्ट्रिक्ट वाइज टेलीमेडिसीन फाइनल रिपोर्ट के अनुसार मुंगेर जिला इस मामले में पूरे बिहार में दूसरे स्थान पर आया है।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि 22 फरवरी को जिलाभर के पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के द्वारा पंचायत स्तर पर आयोजित आम सभा में कोरोना टीकाकरण के प्रीकॉशन डोज से वंचित 60 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के कॉमोर्बिड श्रेणी के लाभार्थियों के ग्रामवार ड्यू लिस्ट के अनुसार टीकाकरण के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही टेलीमेडिसीन कंसल्टेंसी जैसे ई संजीवनी (हब और स्पोक) एवं  ई संजीवनी ओपीडी ( पेशेंट डॉक्टर) का लाइव डिमोन्सट्रेशन किया गया। ताकि सामुदायिक स्तर पर होने वाले लाभ से आमजनों को अवगत कराया जा सके। इस अवसर पर चिकित्सक के द्वारा टेलीमेडिसीन सर्विस के माध्यम से आम लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई।
उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को जारी डिस्ट्रिक्ट वाइज टेलीमेडिसीन फाइनल रिपोर्ट के अनुसार उस दिन टेलीमेडिसीन के माध्यम से आम लोगों के स्वास्थ्य की जांच करने में मुंगेर जिला राज्य में दूसरे स्थान पर रहा। वहीं सारण पहले और सुपौल तीसरे स्थान पर रहा । उन्होंने बताया कि टेलीमेडिसीन के माध्यम से आम लोगों को चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने वाले मुंगेर में हब की संख्या 47 और स्पोक की संख्या 217 रही। वहीं कुल कंसल्टेंसी की संख्या 916 रही। जिला में यदि प्रति स्पोक किए गए औसत कंसल्टेंसी की यदि बात करें तो वो 4.1 रही । यानी प्रत्येक स्पोक से 4 से अधिक लोगों को टेलीमेडिसीन के माध्यम  डॉक्टर के साथ परामर्श और इलाज कराया गया।
उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर कुल 1714 हब और 13,883 स्पोक पर टेलीमेडिसीन के माध्यम से डॉक्टर के द्वारा आम लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। राज्य स्तर पर कुल कंसल्टेंसी की संख्या 24,446 रही। राज्य स्तर पर प्रति स्पोक किए गए औसत कंसल्टेंसी रेट की यदि बात की जाय तो वो 1.6 रही।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को लेकर हर शनिवार को आयोजित होगा विशेष शिविर 

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– आईसीडीएस निदेशक ने पत्र जारी कर राज्य के सभी डीपीओ को दिए निर्देश
– प्रत्येक शनिवार को ऑगनबाड़ी केंद्र संचालन के पश्चात आयोजित होगा शिविर, लाभार्थियों का जमा होगा फार्म
लखीसराय, 23 फरवरी-
शत-प्रतिशत लाभुकों को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ सुनिश्चित कराने को लेकर जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रत्येक शनिवार को विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। ताकि सभी पात्र लाभार्थी अपने नजदीकी केंद्र पर जाकर सुविधाजनक तरीके से अपना आवेदन जमा कर सकें जिससे एक भी लाभार्थी उक्त योजना से वंचित नहीं रहें। यह शिविर प्रत्येक शनिवार को केंद्र संचालन की समयावधि खत्म होने के बाद आयोजित किया जाएगा। जिसके दौरान सभी पात्र लाभार्थी अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इसे सुनिश्चित करने को लेकर आईसीडीएस निदेशक ने पत्र जारी कर राज्य के सभी डीपीओ (आईसीडीएस) आवश्यक निर्देश दिए हैं। साथ ही इसे हर हाल में सफल बनाने के लिए हर जरूरी पहल करने को कहा।
– शिविर के सफल संचालन को जिले के सभी सीडीपीओ को दिए गए हैं आवश्यक निर्देश :
आईसीडीएस डीपीओ आभा कुमारी ने बताया, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रत्येक शनिवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों एवं प्रखंड बाल विकास परियोजना कार्यालय में विशेष शिविर आयोजित करने का निर्देश प्राप्त हुआ। इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी सीडीपीओ को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। ताकि अधिकाधिक पात्र लाभार्थी शिविर में शामिल होकर आवेदन जमा कर सकें जिससे  शिविर का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में कुल 06 परियोजना अंतर्गत कुल 1175 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से प्रति आंगनबाड़ी 4 के अनुसार 4700 फार्म अपलोड करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसमें 03 फरवरी को जारी पीएमएमवीवाई – सीएएस स्टेटस अपडेट के अनुसार जिला में 70 प्रतिशत फॉर्म अपलोडिंग करते हुए कुल 3306 फॉर्म को अपलोड किया गया है। जिला में अभी सेकेंड इंस्टॉलमेंट के लिए कुल 03 और थर्ड इंस्टॉलमेंट के लिए कुल 573 योग्य लाभार्थी हैं। वहीं, उन्होंने बताया, राज्य भर में वितीय वर्ष 2021-22 के अंतर्गत  कुल 2, 68,560 लाभुकों को पंजीकृत किया गया है, जो कुल लक्ष्य का 58% ही है। कुल लक्ष्य प्राप्ति एवं लंबित आवेदनों के निष्पादन के लिए लगातार पत्राचार और समीक्षा की जा रही है। कैम्प के दौरान ऐसे लाभुक, जो तीनों किस्तों की पात्रता पूरी कर चुके हैं  बावजूद इसके अभी तक वो लाभ से वंचित हैं या जिनका प्रथम जीवित संतान 15 महीने से कम का हो तो उनके तीनों किस्तों का आवेदन एक साथ अपलोड किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक शनिवार को केंद्र संचालन की अवधि के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों पर कैम्प लगाकर योग्य लाभार्थी से पीएमएमवीवाई का आवेदन प्रपत्र एकत्रित किया जाएगा। इस दौरान शून्य लाभार्थी वाले या जिस आंगनबाड़ी केंद्र से अब तक एक भी आवदेन अपलोड नहीं हुआ है, वैसे आंगनबाड़ी केंद्र को प्राथमिकता दी जायेगी।
– सीडीपीओ करेंगी आवेदन का सत्यापन :
सीडीपीओ पीएमएमवीवाई -सीएएस लंबित आवेदन प्रपत्रों का सत्यापन प्रतिदिन करेंगी। इसके साथ ही केंद्र और सेक्टर वाइज आवेदन प्राप्ति की समीक्षा एवं अनुश्रवण करते हुए कैम्प का साप्ताहिक प्रतिवेदन मेरे माध्यम से निदेशालय को उपलब्ध कराई जाएगी। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी योग्य लाभार्थी इस योजना के तहत लाभ से वंचित नहीं रहे।

पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करें गर्भवती महिलाएं, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलेगा बढ़ावा 

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– गर्भावस्था के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक पीड़ा होने पर तुरंत चिकित्सकों से कराएं जाँच
– चिकित्सा परामर्श का करें पालन, व्यक्तिगत साफ-सफाई का रखें ख्याल
खगड़िया, 23 फरवरी-
गर्भधारण के साथ ही हर महिला सुरक्षित और सामान्य प्रसव की पहली चाहत रखती है। किन्तु, यह आसान भी नहीं है। इसके लिए हर गर्भवती महिला को खुद के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत होती है। दरअसल, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य होना बेहद जरूरी है। तभी सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ्य बच्चे का जन्म हो सकता है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना बेहद जरूरी है। इससे ना सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा। बल्कि, स्वस्थ्य बच्चे का जन्म भी होगा।
– स्वस्थ माँ ही सुरक्षित और सामान्य प्रसव को दे सकती हैं बढ़ावा :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया सुरक्षित और सामान्य प्रसव तभी संभव है, जब गर्भवती महिला शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ्य रहेंगी। इसके लिए महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए। साथ ही पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना भी बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ महिलाएँ स्वस्थ्य रहती हैं बल्कि गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ्य और मजबूत होता है।
– गर्भधारण के पूर्व शारीरिक और मानसिक रूप से रहें स्वस्थ्य :
अगर कोई महिला गर्भधारण के बारे में सोच रही है तो उन्हें तीन-चार माह पूर्व से योजना बनानी चाहिए और सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ्य रहना चाहिए। ताकि गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानियां उत्पन्न नहीं हो ।
– गर्भधारण के लिए सही उम्र होना जरूरी :
गर्भधारण के लिए महिलाओं का सही उम्र होना भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, कम उम्र में गर्भधारण होने से हमेशा समय पूर्व प्रसव होने की संभावना बनी रहती है। जिससे महिलाओं को कई प्रकार की जटिल परेशानियों से जूझना पड़ जाता है। इसलिए, गर्भधारण के लिए महिलाओं का कम से कम 20 वर्ष का होना जरूरी है। इसलिए, इस उम्र में ही गर्भधारण कराना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी उत्पन्न नहीं हो।
– प्रसव पूर्व समय-समय पर कराते रहें जाँच :
सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जाँच कराते रहना चाहिए। प्रसव पूर्व जाँच के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर भी मुफ्त जाँच की व्यवस्था की गई है। जहाँ हर माह नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जाँच होती और जाँचोपरांत आवश्यक चिकित्सा परामर्श दी जाती है।
 – गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, आयरन और कैल्सियम युक्त खाने का सेवन ज्यादा करना चाहिए :
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रोटीन, आयरन  और कैल्सियमयुक्त खाने का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। इस दौरान दाल, पनीर, अंडा, पालक, सोयाबिन, नॉनवेज, गुड़, अनार, नारियल, चना, हरी सब्जी आदि का सेवन करना चाहिए। साथ ही व्यक्तिगत साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए।

टेलीमेडिसीन सेवा का 911 मरीजों ने उठाया लाभ

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-जिले में 280 से भी अधिक केंद्र बनाए गए थे
-घर के नजदीक इलाज होने से मरीजों में खुशी
भागलपुर, 23 फरवरी-
जिले में ई-संजीवनी ओपीडी के तहत टेलीमेडिसीन सेवा का आगाज हो चुका है। बुधवार को जिले के 280 केंद्रों पर 911 मरीजों ने इसका लाभ उठाया और 300 एमएम और 50 डॉक्टर मरीजों की सेवा में लगे रहे। सभी लोगों को डॉक्टरी परामर्श के बाद दवा दी गई। जिले के सभी केंद्रों पर कूरियर के जरिये दवा पहुंचाई गई, जिसे बाद में मरीजों की जरूरत के हिसाब से बांटी गई। घर बैठे इलाज होने से मरीजों के चेहरे पर खुशी देखी गई। साथ ही तत्काल मुफ्त में दवा मिल जाने से भी मरीजों को राहत मिली। सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि टेलीमेडिसीन सेवा का आगाज होने से मरीजों को काफी राहत मिली है। मरीजों को इलाज के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ रहा है, इससे उन्हें राहत महसूस हो रही है। सभी प्रखंड में टेलीमेडिसीन की टीम ने मरीजों का बेहतर तरीके से इलाज किया। डॉक्टर ऑनलाइन तरीके से मरीजों से रूबरू हुए। मरीज की डॉक्टर से बात कराने से लेकर जांच रिपोर्ट तक दिखाने का काम एएनएम ने किया। मरीज की जांच रिपोर्ट व उसके द्वारा बताई गई परेशानी व लक्षण के आधार पर डॉक्टर ने मरीजों को दवा लिखी।
मरीजों को मुफ्त में दी गई दवाः टेलीमेडिसीन सेवा के तहत मरीजों के लिए 37 प्रकार की दवा उपलब्ध कराई गई है। इन्हीं दवाओं में से मरीजों को जरूरत के हिसाब से दवा दी गई। डॉक्टर के दवा लिखे जाने के बाद ग्रीन चैनल के जरिये मरीजों को निःशुल्क दवा दी गई। इसके अलावा आगे से एचआईवी, हेपेटाइटिस व सिफलिस व गर्भवती की जांच से लेकर कोरोना का टीका भी ग्रीन चैनल के जरिये दिया जाएगा। सिविल सर्जन ने बताया कि ई-संजीवनी के जरिये सभी ओपीडी दिवस के दिन पूर्व में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा   टेलीमेडिसीन सेवा दी जाएगी। इसे लेकर एएनएम व चिकित्सकों को ट्रेनिंग तक दे दी गई है।
सेवा का इस तरह से उठाएं लाभ: टेलीमेडिसीन की स्वास्थ्य सुविधा लेने के लिए मरीजों को अपने नजदीकी चयनित स्वास्थ्य संस्थान पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद वहां तैनात एएनएम स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल के माध्यम के टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा की सुविधा उपलब्ध कराती हैं। डॉक्टर के चिकित्सा परामर्श के अनुसार एएनएम मरीजों को दवाई समेत अन्य चिकित्सा सेवा सुनिश्चित कराती हैं। अब इलाज कराने के लिए मरीजों को अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि सुविधाजनक तरीके से पूरी तरह मुफ्त ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा। उम्मीद है कि दुर्गम इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सेवा लेने में होने वाली परेशानियों को दूर करने में टेलीमेडिसीन सेवा वरदान साबित होगी। मरीजों को आने-जाने के लिए काफी दूरी का सफर समेत अन्य परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और समुचित इलाज के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी।

बांका में 600 से अधिक मरीजों ने टेलीमेडिसीन सेवा का उठाया लाभ

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-350 केंद्रों पर टेलीमेडिसीन सेवा के जरिये मरीजों का हुआ इलाज
-ग्रामीण क्षेत्र के काफी संख्या में मरीजों ने उठाया इसका लाभ
बांका, 23 फरवरी –
जिले में ई-संजीवनी ओपीडी के तहत टेलीमेडिसीन सेवा सफलतापूर्वक  चल रही है। बुधवार को 600 से अधिक लोगों ने इस सेवा का लाभ उठाया। लोगों का न केवल इलाज हुआ, बल्कि उन्हें दवा भी उपलब्ध करा दी गई। घर के पास इलाज होने से मरीजों में खासा उत्साह देखा गया। उन्हें इलाज के लिए दूर तक नहीं जाना पड़ा, साथ ही उन्हें तत्काल ही दवा उपलब्ध करा दी गई। एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि टेलीमेडिसीन सेवा का लाभ काफी संख्या में मरीज उठा रहे हैं। बांका शहर समेत जिले के सभी प्रखंड में टेलीमेडिसीन टीम का गठन किया गया है। पूरे जिले में 350 जगहों पर टीमें अपनी-अपनी तैनाती वाले अस्पताल में मौजूद रहीं। डॉक्टर ऑनलाइन तरीके से मरीजों से रूबरू हुए। मरीज की डॉक्टर से बात कराने से लेकर जांच रिपोर्ट तक दिखाने का काम एएनएम ने किया। मरीज की जांच रिपोर्ट व उसके द्वारा बताई गई परेशानी व लक्षण के आधार पर डॉक्टर ने मरीज का इलाज किया।
ग्रीन चैनल के जरिये मरीजों तक पहुंची दवाः टेलीमेडिसीन सेवा के तहत मरीजों के लिए 37 प्रकार की दवा उपलब्ध कराई गई है। डॉक्टर के दवा लिखे जाने के बाद ग्रीन चैनल के जरिये मरीजों तक निःशुल्क दवा पहुंचाई गई। आगे एचआईवी, हेपेटाइटिस व सिफलिस व गर्भवती की जांच से लेकर कोरोना का टीका भी ग्रीन चैनल के जरिये दिया जाएगा। ई-संजीवनी के जरिये सभी ओपीडी दिवस के दिन पूर्व में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा टेलीमेडिसीन सेवा दी जाएगी। इसे लेकर एएनएम व चिकित्सकों को ट्रेनिंग दे दी गई है। दवा पहुंचाने का काम कूरियर ने किया। इसे लेकर कूरियर को प्रतिदिन 100 के हिसाब से भुगतान भी किया जाएगा।
बुधवार और शुक्रवार को मिलेगी यह सेवा: टेलीमेडिसीन की स्वास्थ्य सुविधा लेने के लिए मरीजों को अपने नजदीकी चयनित स्वास्थ्य संस्थान पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद वहां तैनात एएनएम स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल के माध्यम के टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा की सुविधा दिलाएंगी। डॉक्टर के चिकित्सा परामर्श के अनुसार एएनएम मरीजों को दवाई समेत अन्य चिकित्सा सेवा सुनिश्चित कराएंगी। यानी अब इलाज कराने के लिए मरीजों को अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि सुविधाजनक तरीके से पूरी तरह मुफ्त ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा। हर बुधवार और शुक्रवार को यह सेवा उपलब्ध रहेगी।
दूर-दराज के इलाके के लोगों को लिए वरदान साबित होगी यह सेवाः दुर्गम इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सेवा लेने में होने वाली परेशानियों को दूर करने में टेलीमेडिसीन सेवा वरदान साबित होगी। दुर्गम इलाके के मरीजों को आने-जाने के लिए काफी दूरी का सफर समेत अन्य परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और समुचित इलाज के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। बांका जिले का काफी क्षेत्र जिला मुख्यालय से दूर है या फिर स्थानीय प्रखंड मुख्यालय से भी अच्छी-खासी दूरी पर है। उन क्षेत्रों के मरीजों को इसका काफी लाभ होगा।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: प्रत्येक शनिवार को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित होगा विशेष कैम्प 

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– आईसीडीएस निदेशक ने सभी जिलों के डीपीओ आईसीडीएस को जारी किया पत्र
– 3 फरवरी को जारी डिस्ट्रिक्ट वाइज पीएमएमवीवाई स्टेटस अपडेट के अनुसार में 99 प्रतिशत फॉर्म अपलोड किया जा चुका है
मुंगेर, 22 फरवरी-
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के अंतर्गत प्रत्येक शनिवार को जिला के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष कैम्प आयोजित किया जाएगा । इसको ले आईसीडीएस निदेशक ने सभी जिलों के डीपीओ आईसीडीएस को पत्र जारी किया है।
समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) मुंगेर की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) वंदना पांडेय ने बताया कि आईसीडीएस निदेशक द्वारा जारी पत्र के अनुसार प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत प्रत्येक शनिवार को जिला के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों और प्रखण्ड मुख्यालय स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय पर विशेष कैम्प का आयोजन किया जाना है। उन्होंने बताया कि मुंगेर में कुल 10 परियोजना अंतर्गत कुल 1598 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से प्रति आंगनबाड़ी 4 के अनुसार 6392 फॉर्म अपलोड का टारगेट निर्धारित किया गया था। इनमें से 3 फरवरी को जारी पीएमएमवीवाई – सीएएस स्टेटस अपडेट के अनुसार जिला में 99 प्रतिशत फॉर्म अपलोडिंग करते हुए कुल 6334 फॉर्म को अपलोड किया गया है। जिला में अभी सेकेंड इंस्टॉलमेंट के लिए कुल 7 और थर्ड इंस्टॉलमेंट के लिए कुल 928 योग्य लाभार्थी हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य भर में वितीय वर्ष 2021-22 के अंतर्गत  कुल 2, 68,560 लाभुकों को पंजीकृत किया गया है जो कुल लक्ष्य का 58 प्रतिशत ही है। कुल लक्ष्य प्राप्ति एवं लंबित आवेदनों के निष्पादन के लिए लगातार पत्राचार और समीक्षा की जा रही है। कैम्प के दौरान ऐसे लाभुक जिन्होंने तीनों किस्तों कि पात्रता पूरी कर ली है बावजूद इसके अभी तक वो लाभ से वंचित हैं या जिनका प्रथम जीवित संतान 15 महीने से कम का हो तो उनके तीनों किस्तों का आवेदन एक साथ अपलोड किया जाएगा।  इसके अलावा प्रत्येक शनिवार को केंद्र संचालन की अवधि के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों पर कैम्प लगाकर योग्य लाभार्थी से पीएमएमवीवाई का आवेदन प्रपत्र  एकत्रित किया जाएगा। इस दौरान शून्य लाभार्थी वाले या जिस आंगनबाड़ी केंद्र से अब तक एक भी आवदेन अपलोड नहीं हुआ है वैसे आंगनबाड़ी केंद्र को प्राथमिकता दी जायेगी।
उन्होंने बताया कि जिला के सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) पीएमएमवीवाई -सीएएस लंबित आवेदन प्रपत्रों का सत्यापन प्रतिदिन करेंगी । इसके साथ ही केन्द्रवार/सेक्टरवार आवेदन प्राप्ति की समीक्षा एवं अनुश्रवण करते हुए कैम्प का साप्ताहिक प्रतिवेदन मेरे माध्यम से निदेशालय को उपलब्ध कराएगी। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी योग्य लाभार्थी इस योजना के तहत लाभ से वंचित नहीं रहने पाए।

पंचायतस्तरीय आम सभा का आयोजन ,कोविड वैक्सीनेशन को लेकर योग्य लाभार्थियों को किया गया जागरूक 

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– आम सभा में ई-टेलीमेडिसीन सेवा की भी दी गई जानकारी और लाभ लेने के लिए किया गया प्रेरित
– पहला, दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज लेने वाले लाभार्थियों को किया गया जागरूक
लखीसराय, 22 फरवरी-
मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक अनिमेष कुमार के निर्देशानुसार जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने जिले के सभी पंचायतों में पंचायतस्तरीय आम सभा का आयोजन किया गया। जिसमें मुखिया, वार्ड, सरपंच, पंच, पंसस समेत पंचायती राज के अन्य जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्यों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। आम सभा संबंधित पंचायत के मुखिया की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमें जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का तीनों डोज (पहला, दूसरा और प्रीकाॅशनरी) का वैक्सीनेशन सुनिश्चित पर बल दिया गया। आम सभा शामिल होने वाली स्वास्थ्य टीम में शामिल एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी और स्वास्थ्य विभाग के सहयोगी संगठन के प्रतिनिधियों द्वारा लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक किया गया। साथ ही ऑन द स्पॉट योग्य लाभार्थियों का वैक्सीनेशन भी किया गया।
– शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने के लिए पंचायतीराज के तमाम जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य व्यक्ति का भी सहयोग जरूरी है। इसी उद्देश्य से आम सभा के दौरान मेडिकल टीम द्वारा लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक किया जा रहा है। ताकि जनप्रतिनिधियों का सहयोग मिल सके और सामुदायिक स्तर पर लोग जागरूक हो सकें। वहीं, उन्होंने बताया, इस दौरान मौके पर ही योग्य लाभार्थियों को चिह्नित कर वैक्सीनेट भी किया जा रहा है। इसके अलावा वैक्सीन से वंचित लोगों के एवं दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरी करने वाले लाभार्थियों की सूची तैयार कर वैक्सीनेशन किया जाएगा।
– टेलीमेडिसीन सेवा की भी उपलब्ध कराई गई जानकारी :
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, आम सभा के दौरान कोविड वैक्सीनेशन के साथ-साथ आरोग्य दिवस पर आयोजित होने वाली टेलीमेडिसीन सेवा की भी जानकारी उपलब्ध कराई गई। लोगों को यह जानकारी दी गई कि आरोग्य दिवस के अवसर सभी स्वास्थ्य उप केंद्र और आंगनबाड़ी केंद्रों पर टेलीमेडिसीन सेवा के तहत ऑनलाइन मरीजों की स्वास्थ्य जाँच की जा रही है। जिसमें जरूरतमंद व्यक्ति शामिल होकर इस सेवा का लाभ ले सकते हैं। साथ ही ई-टेलीमेडिसीन सेवा के तहत ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने की जानकारी भी दी गई।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

जिले के गोगरी रेफरल अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं और होगी सुदृढ़, मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा 

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– प्रसूति महिलाओं को प्रसव के दौरान उपलब्ध कराई जाएगी समुचित और बेहतर सुविधा, संस्थागत प्रसव को मिलेगा बढ़ावा
– प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने गुणवत्ता यकीन समिति की बैठक के दौरान कर्मियों को दिए निर्देश
खगड़िया, 22 फरवरी-
जिले के गोगरी रेफरल अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं और सुदृढ़ और बेहतर होगी। साथ ही प्रसव कराने के लिए अस्पताल आने वाली प्रसूति महिलाओं को प्रसव के दौरान समुचित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि सभी प्रसूति महिलाओं का सुरक्षित और सामान्य प्रसव सुनिश्चित हो सके और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा सीएचसी स्तर पर लोगों को मिलने वाली अन्य तमाम स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सकारात्मक बदलाव होगा। इसको लेकर सोमवार की शाम रेफरल अस्पताल परिसर में गुणवत्ता यकीन समिति की एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें पीएचसी के सभी चिकित्सक, पदाधिकारी, कर्मी के साथ-साथ केयर इंडिया के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ चंद्र प्रकाश एवं संचालन स्वास्थ्य प्रबंधक रिपुंजय कुमार ने किया। बैठक के दौरान प्रसव कक्ष में उपलब्ध सुविधाओं को विस्तार कर और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया। इसे सुनिश्चित करने को लेकर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने लेबर इंचार्ज समेत अन्य कर्मियों से फीडबैक ली। जिसके बाद आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही बैठक में मौजूद अन्य कर्मियों से भी अस्पताल में उपलब्ध अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की भी जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए।
– सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर सरकार द्वारा चलाई जा रही है विभिन्न योजना :
रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ चंद्र प्रकाश ने बताया, सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले, इसे सुनिश्चित कराने को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए तमाम योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। ताकि लोगों को सुविधाजनक तरीके से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके और सामुदायिक स्तर पर लोग स्वास्थ्य सुविधा से लाभान्वित हो सकें। वहीं, उन्होंने बताया, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के लिए आने वाली प्रसूति महिलाओं को प्रसव के दौरान समुचित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके, इसको लेकर भी सरकार द्वारा तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। ताकि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसूति को सुविधाजनक तरीके से समुचित स्वास्थ्य सेवा मिल सके ।  इससे ना सिर्फ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे मातृ-शिशु मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित होगा। क्योंकि, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा के हर मानकों के पालन के साथ प्रशिक्षित एएनएम द्वारा चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रसव करायी जाती है।
– संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं को जागरूक करने पर भी दिया गया बल :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, बैठक के दौरान प्रसव कक्ष की सुविधा को और बेहतर बनाने, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने समेत अन्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया। जिसमें मौजूद कर्मियों को गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करने एवं प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाली प्रसूति महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने समेत अन्य आवश्यक निर्देश दिए गए। साथ ही अन्य सुविधाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जिसके बाद आवश्यक निर्देश दिए गए।

आशा कार्यकर्ताओं को आरडीटी किट से मलेरिया जांच का मिला प्रशिक्षण

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-जांच करने पर प्रति व्यक्ति 15 और मरीज का इलाज कराने पर 75 रुपये की राशि मिलेगी
-सदर अस्पताल में जिले की आशा कार्यकर्ताओं को मलेरिया को लेकर दिया गया प्रशिक्षण
बांका, 22 फरवरी-
सदर अस्पताल में मंगलवार को आशा कार्यकर्ताओं को मलेरिया को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान उन्हें बताया गया कि अपने पोषक क्षेत्र में जाकर आरडीटी किट से लोगों की मलेरिया जांच करें। इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं को प्रति व्यक्ति जांच करने पर 15 रुपये की राशि भी दी जाती है। साथ ही मलेरिया के मरीज मिलने पर उसका इलाज कराने पर 75 रुपये की राशि अलग से दी जाती है। प्रशिक्षण के दौरान सभी आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में तेज गति से जांच करने और क्षेत्र को मलेरिया से मुक्त करने में लग जाने के लिए कहा गया। इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं को मलेरिया की पहचान करने को लेकर इसके लक्षण और बचाव की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में अमरपुर, बाराहाट, बौंसी, बेलहर, चांदन एवं फुल्लीडुमर की आशा कार्यकर्ता शामिल थीं। ट्रेनिंग देने का काम जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव और वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने किया। मौके पर सुभाष कुमार साह, राकेश कुमार और सौरभ कुमार भी मौजूद थे।
आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देते हुए डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि मलेरिया प्लाजमोडियम नामक परजीवी से संक्रमित मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया एक प्रकार का बुखार है जो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। इसमें कंपकंपी के साथ 103 से लेकर 105 डिग्री तक बुखार होता है। कुछ घंटों के बाद पसीने के साथ बुखार उतर जाता है, लेकिन बुखार आते-जाते रहता है। उन्होंने कहा कि फेलसीपेरम मलेरिया (दिमारी मलेरिया) की अवस्था में तेज बुखार होता है। खून की कमी हो जाती है। बुखार दिमाग पर चढ़ जाता है। फेफड़े में सूजन हो जाती है। पीलिया एवं गुर्दे की खराबी फेलसीपेरम मलेरिया की मुख्य पहचान है।
सरकारी अस्पतालों में जांच और इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः डॉ. यादव ने कहा कि मलेरिया बुखार होने पर पीड़ित व्यक्ति को नजदीकी सरकारी अस्पताल जाना चाहिए। खून की जांच में मलेरिया निकलने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इसकी निःशुल्क जांच और इलाज की व्यवस्था है। मलेरिया फैलाने वाला मच्छर किसी स्थान पर ठहरे हुए साफ पानी और धीमी गति से बहने वाली नालियों में अंडे देती है और वहां पर पनपती है।
सोते समय मच्छरदानी का करें प्रयोगः आरिफ इकबाल ने  मलेरिया से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े पहनें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। घर के आसपास जलजमाव वाली जगहों को मिट्टी से भर दें। जलजमाव वाले स्थान पर केरोसिन तेल या डीजल डालें। घर के आसापस बहने वाली नाले की साफ-सफाई करते रहें। उन्होंने कहा कि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की तरफ से डीडीटी का छिड़काव कराया जाता है। छिड़काव कर्मियों के आने पर उनका सहयोग करें और छिड़काव की तिथि की जानकारी ग्रामीणों को दें।