छाया टैबलेट के इस्तेमाल को लेकर एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण

0
-एएनएम क्षेत्र में जाकर लोगों को छाया का इस्तेमाल करने को करेंगी जागरूक
-परिवार नियोजन को लेकर जिले में लगातार चल रहा है जागरूकता अभियान
भागलपुर, 22 फरवरी-
परिवार नियोजन को लेकर जिले में लगातार अभियान चल रहा है। इसी कड़ी में एएनएम को सदर अस्पताल में छाया टेबलेट के इस्तेमाल करने को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान एएनएम को छाया टेबसेट का कैसे इस्तेमाल करना है और इसके क्या फायदे हैं, इसकी जानकारी दी गई। एएनएम को प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर और नाथनगर रेफरल अस्पताल की प्रभारी डॉ. अनुपमा सहाय ने दिया। इस दौरान डीसीएम जफरुल इस्लाम, केयर इंडिया के एफपीसी आलोक कुमार और जितेंद्र कुमार सिंह भी मौजूद थे। मास्टर ट्रेनर ने एएनएम को परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्र में लगातार काउंसिलिंग करने के लिए कहा। आरोग्य दिवस, प्रधानमंत्री मातृत्व जांच और परिवार नियोजन दिवस के दिन लोगों को इसे लेकर जागरूक करने के लिए कहा गया।
एएनएम को प्रशिक्षण देते हुए डॉ. अनुपमा सहाय ने बताया कि परिवार नियोजन में छाया टेबलेट महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। बस सिर्फ इसका सही तरीके से इस्तेमाल करने लोगों को सिखना होगा। इसे लेकर एएनएम को क्षेत्र में जाकर लोगों को जागरूक करना होगा। उन्होंने बताया कि छाया टेबलेट का इस्तेमाल सप्ताह में दो बार करना चाहिए। पहला टेबलेट जिस दिन लिए हैं, उसके तीसरे दिन दूसरा टेबलेट लेना है। इससे लोगों को अनचाहे गर्भ से छुटकारा मिलेगा। इन बातों को लोगों को आपलोग क्षेत्र में जाकर समझाइए। इससे परिवार नियोजन को बढ़ावा मिलेगा।
डिलिवरी के तत्काल बाद भी इस्तेमाल कर सकती हैं छायाः डॉ.  सहाय ने बताया कि छाया टैबलेट का इस्तेमाल महिला डिलिवरी के दिन भी कर सकती हैं। जैसे अंतरा सुई का इस्तेमाल डिलिवरी के 42 दिन के बाद  ही किया जाता है, लेकिन छाया टैबलेट के इस्तेमाल में यह बंधन नहीं है। हां, सिर्फ इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि सप्ताह में छाया का इस्तेमाल सिर्फ दो ही दिन करना है और पहली गोली इस्तेमाल करने के बाद दूसरी गोली तीसरे दिन ही करना है। इन बातों का अगर ध्यान रख छाया टैबलेट का इस्तेमाल किया जाए तो लोग परिवार नियोजन के प्रति जागरूक हो सकते हैं।
बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल रखने में छाया सहायकः डॉ. सहाय ने कहा कि परिवार नियोजन को लेकर जागरूक करते वक्त लोगों को यह भी समझाएं कि दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल जरूरी है। ऐसा करने से जच्चा और बच्चा, दोनों स्वस्थ्य रहता है। दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल रखने में छाया टैबलेट और अंतरा इंजेक्शन का इस्तेमाल काफी सहायक साबित हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने से बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे बच्चा भविष्य में बीमारियों से बचा रहता है। प्रतिरोधक क्षमता अगर मजबूत रहती है तो बच्चा बीमार होने पर भी जल्द उबर जाता है।

 एक छोटे से गांव से सॉशेल चेंजमेकर बनी युवी  हेमलता गाँधी जैसी सभी प्रतिभूतिया राष्ट्र के लिए गौरव है –  लायन डॉ.गौरव गुप्ता प्रेसिडेंट लायंस क्लब वेज दिल्ली

0
👍 पिछले बीस वर्षों में प्रत्यक्ष एवंम अप्रत्यक्ष रूप से असंख्य महिलाओं ,बेटियों तक प्रेरणा की मिसाल कायम की
👍 राष्ट्रीय ,राज्य स्तर पर केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा सम्मानित
👍 लेंगिक समानता ,बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ ,महिला आजीविका सशक्तिकरण पर पिछले बीस सालों से निरन्तर सक्रिय
सवांददाता नई दिल्ली रिपोर्ट  – 
हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के सुप्रतिष्टित हसंराज कालेज के  भव्यसभागार आडिटोरियम मे आयोजित नारी शक्ति एक नयी पहल फाउन्डेशन एवं लायंस क्लब वेज नई दिल्ली के  प्रतिष्ठत महिला पुरुस्कार -2022 के भव्य समारोह मे राजस्थान से कोटा शिक्षा नगरी की सुश्री हेमलता गांधी को देश भर से पधारे अन्तराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय बोर्ड जुरी मेंबर्स एवं सम्मानीय अतिथियों की उपस्थिति में  आज सम्मानित किया गया ।
,लायंस क्लब वेज चार्टर प्रेसीडेंट लायंस डॉ गौरव गुप्ता ,निधि सिंह फाउन्डर नाद फाउन्डेशन तथा डां नूपूर धायमल सुप्रीम कोर्ट फाउन्डर प्रसिडेंट , त्रिपति सोमानी फाउन्डर, प्रसिडेन्ट वूमन इनोवेटर नर्ई दिल्ली  आई.सी.डब्ल्यू.ई.ए. , वर्ल्ड सीख  चेम्बर आंफ कार्मस ,डब्ल्यू.एस.सी.सी. ,एसएमईबीज नई दिल्ली जैसी अनेक प्रतिष्टित सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों सयुक्त तत्वाधान द्वारा सुश्री गांधी को अवार्ड शील्ड दुशाला प्रशस्ति पत्र से नवाजा गया ।  चार्टर प्रेसिडेंट डॉ.गौरव ने बताया कि  पूरे भारत के अनेक राज्यो से महिलाओं ने भाग लिया एवं  नवाचार के तहत ऐसी  महिलाओं का चयन किया गया  जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र  समाज मे अपने उल्लेखनीय कार्यो से  महिलाओं व बेटियो के आर्थिक सामाजिक सशक्तिकरण के साथ समान अवसर देकर ही हम बदलाव व  परिवर्तन से महिलाओं की स्थिति मे बेहतर सुधार करने की पेरवी की। सुश्री गांधी झालावाड़ जिले के छोटे से गांव बकानी से निकलकर  आज गाव से राजधानी दिल्ली तक नाम रोशन किया । वूमन प्रेसटिज अर्वाड -2022 का  पूरे कोटा सम्भाग से गाँधी  को इस सम्मान से अलंकृत किया गया  तथा समाज मे एकल ,विधवा ,परित्यागता,दिव्यांग, गरीब ,अभावग्रस्त महिलाओं को जागरूक कर उनका हौसला बढाया । सुश्री गांधी पिछले बीस वर्षो  से  विभिन्न तबके के गरीब ,असहाय ,जरूरतमंद ,विधवा ,विकलांग आदि वर्गो के साथ कार्य कर रही है सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को अन्तिम व्यक्ति तक पहुचाने के साथ ही  समाज की मुख्यधारा से जोडने का काम कर रही है । जेन्डर इक्वलिटी से
शिक्षा ,स्वास्थ्य, आजीविका, पर्यावरण संरक्षण ,नशा मुक्ति ,स्वच्छता , बेटे व बेटीयो को  लैगिक समानता की पुरजोर सर्मथक रही है । सामाजिक स्तर पर जहाँ भी बेटे बेटियो मे भेदभाव होता सुश्री गांधी ने बेटियो को हर स्तर पर मोटिवेशन देकर आगे बढाने कि कोशिशकी  तथा आज लाखो  बेटियो ,महिलाओं, युवाओं  के लिये रांलमांडल बनी हुयी है व सामाजिक चेन्ज मेकर के नाम से जानी जाती है  । सुश्री गांधी ने सम्मान का श्रेय अपने माता पिता परिवारजन,लायन्स क्लब एवं अन्य सभी सहयोगी राष्ट्रोय सामाजिक संस्थाओं के बोर्ड जूरी मेंबर्स,  वरिष्ठ आधिकारिक मार्गदर्शक कोटा जिला प्रशासन नगर निगम अधिकारीगण आदि को दिया । गाँधी ने कहा यह मेरा अकेले का नही अपितु उन सभी बेटियों, महिलाओं का सम्मान है जिनकी यथा सम्भव सेवा , सहायता एवं जीवन को सम्बल बनाने का सुअवसर ईश्वर ने मुझे प्रदान किया ताकि में हर जरूरतमंद बेटी ,हर असहाय महिला ,हर समाज से अछूती परित्यक्ता ,विधवा का किसी न किसी रूप में सहारा बन सकू।

हाईड्रोसील फाइलेरिया से पीड़ित मरीजों का होगा ऑपरेशन, मिलेगी बेहतर सुविधाएं

0
– हाइड्रोसील फाइलेरिया से पीड़ित मरीजों की पहचान कर तैयार की जाएगी सूची
– शिविर आयोजित कर मरीजों का किया जाएगा ऑपरेशन, उपलब्ध कराई जाएगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
खगड़िया, 21 फरवरी-
फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। इसको लेकर आवश्यकतानुसार हर जरूरी प्रयास भी जारी है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए हाइड्रोसील फाइलेरिया से पीड़ित मरीजों को ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। ताकि मरीजों को बीमारी से स्थाई निजात मिल सके। वहीँ बीमारी पर विराम संभव हो सके। इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने पत्र जारी कर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें एएनएम, आशा समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से ऐसे मरीजों को चिह्नित कर सूची तैयार कराने एवं ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराने को कहा।
– शिविर आयोजित कर किया जाएगा ऑपरेशन :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ कुमार ने बताया, हाइड्रोसील फाइलेरिया से पीड़ित मरीजों को पहले चिह्नित कर, उनकी सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद शिविर आयोजित ऐसे मरीजों का ऑपरेशन किया जाएगा। शिविर के अलावा स्वास्थ्य प्रबंधन अपनी सुविधा के अनुसार डेली बेसिस पर ऑपरेशन का आयोजन कर सकते हैं। ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाएगा। ताकि ऑपरेशन के दौरान मरीजों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी मरीज सुविधाजनक तरीके से ऑपरेशन करा सकें।
– ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को उपलब्ध कराई जाएगी समुचित स्वास्थ्य सुविधा :
केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती ने बताया, ऑपरेशन के दौरान मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी एवं मिलने वाली सभी सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा जाएगा। ताकि सभी लाभार्थी का सुविधाजनक तरीके से सफल ऑपरेशन सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, हाइड्रोसील फाइलेरिया से स्थाई निजात के लिए ऑपरेशन ही सबसे बेहतर और कारगर उपाय है। इसलिए, मैं तमाम ऐसे मरीजों से अपील करता हूँ कि वह इस सुविधा का लाभ लेने के लिए आगे आएं और अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में सुविधाजनक तरीके ऑपरेशन कराएं।
– फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाइड्रोसील (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।
– फाइलेरिया से बचाव के उपाय :
– सोने के समय मच्छरदानी का निश्चित रूप से प्रयोग करें।
– घर के आसपास गंदा पानी जमा नहीं होने दें।
– अल्बेंडाजोल व डीईसी दवा का निश्चित रूप से सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

टीबी की जाँच कराना हुआ आसान, खाँसी की आवाज से की जा रही मरीजों की पहचान 

0
– फिल्डी एप की मदद से जाँच कर टीबी मरीजों की हो रही जाँच, दी जा रही है आवश्यक चिकित्सा परामर्श
– जाँच के पश्चात रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध कराई जा रही है स्वास्थ्य सुविधा
लखीसराय, 21 फरवरी-
अब टीबी मरीजों को अपनी बीमारी जाँच कराने के लिए पूर्व की तरह बलगम का सैंपल देने समेत अन्य परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि, सुविधाजनक तरीके से जाँच कराने के लिए सरकार ने एडवांस टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए फिल्डी एप नामक एक मोबाइल एप लांच किया है। जिसके माध्यम से जिले में टीबी के संभावित मरीजों की जाँच शुरू कर दी गयी है। जिला से लेकर पीएचसी स्तर पर इसी एप के माध्यम से मरीजों की जाँच की जा रही है। साथ ही जाँच रिपोर्ट के अनुसार आगे की चिकित्सा परामर्श और चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। ताकि मरीजों को ना सिर्फ जाँच कराने में सहूलियत हो, बल्कि रिपोर्ट पाॅजिटिव आने पर सुविधाजनक तरीके से समुचित इलाज भी सुनिश्चित हो सके।
– खाँसी की आवाज से की जा रही है टीबी मरीजों की जाँच :
संचारी रोग पदाधिकारी डॉ पीसी वर्मा ने बताया, मरीजों की सुविधाजनक तरीके से जाँच सुनिश्चित करने को लेकर फिल्डी एप नामक एक मोबाइल एप लांच किया गया है। जिसके माध्यम से संभावित मरीजों की खाँसी (कफ) की आवाज से टीबी की जाँच की जा रही है। जाँच के पश्चात आवश्यक चिकित्सा परामर्श और चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, उन्होंने ने बताया, इस एप की मदद से टीबी मरीजों को चिह्नित करने में काफी सहूलियत हो रही है। मरीजों को भी जाँच कराने में पहले से आसानी हो रही है। साथ ही ससमय मरीजों की पहचान और इलाज शुरू होना भी सुनिश्चित हो रहा है। रोगी की पहचान होने के बाद उन्हें प्रोत्साहित कर सफल इलाज कराने वाले ट्रीटमेंट सपोर्टर को 1000 रुपए की प्रोत्साहन राशि, जबकि टीबी से संक्रमित मरीजों को इलाज कराने के दौरान पोषण योजना के तहत 500 रुपए प्रति माह दिया जाएगा।
– टीबी से बचाव के उपाय :
1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें ।
– मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
– मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
– पौष्टिक खाना खाएं, व्यायाम व योग करें ।
– बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
– भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।
– ये हैं टीबी के लक्षण :
– भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
– हलका बुखार रहना।
– खांसी एवं खांसी में बलगम तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
– गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
– महिलाओं के साथ  पुरुषों को बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
– टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

कोरोना काल में बेहतर कार्य करने की हुई सराहना, मिला सम्मान

0
-शहरी पीएचसी के डॉ. बजरंग को जिलाधिकारी ने किया सम्मानित
-पिछले दो साल से दिन-रात एक कर निभा रहे हैं अपनी जिम्मेदारी
बांका, 21 फरवरी
कोरोना काल में स्वास्थ्यकर्मियों की चुनौती काफी बढ़ गई, लेकिन इस चुनौती को अपना कर्तव्य समझकर बहुत सारे लोगों ने काम किया। इन्हीं लोगों में से एक हैं डॉ. बजरंग। डॉ. बजरंग की तैनाती शहरी पीएचसी में है। कोरोना की पहली लहर जब आई तो उनकी ड्यूटी जांच से लेकर होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की देखभाल तक में लगी, जिसे उन्होंने बहुत ही ईमानदारी से किया। वैसे समय में जब कोरोना का नाम सुनकर ही लोग डर जाते थे, उस परिस्थिति में कोरोना मरीजों का बेहतर तरीके से इलाज और देखभाल करना आसान नहीं था। लेकिन डॉ. बजरंग ने अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारीपूर्वक किया। इसी का परिणाम है कि जिला प्रशासन ने उनके योगदान को पहचाना और उचित सम्मान दिया। सोमवार को जिलाधिकारी सुहर्ष भगत ने पिछले दो साल से कोरोना काल के दौरान बेहतर कार्य करने के लिए डॉ. बजरंग को सम्मानित किया।
मुझसे जो भी अपेक्षा है, उसे पूरा करने की कोशिश करूंगाः सम्मानित होने के बाद डॉ. बजरंग ने कहा, जब आपके काम को पहचान मिलती है और उसके बदले सम्मान मिलता है तो अच्छा लगता है। मैं तो पूरी ईमानदारी से अपना काम कर ही रहा था। सम्मान मिलने के बाद उत्साह और दोगुना हो गया। सिर्फ कोरोना ही नहीं, बल्कि अन्य मरीजों की सेवा के लिए भी मैं तत्पर रहता हूं। अभी कोरोना पर फोकस है तो इस पर ज्यादा काम करता हूं। मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसका मैं पूरी ईमानदारी से निर्वहन करूंगा। मुझे खुशी इस बात की है कि कर्तव्य के निर्वहन के दौरान मैंने जो भी काम किया, आमलोगों ने भी उसे हाथोंहाथ लिया। मेरी सलाह को लोगों ने माना। इसी का परिणाम है कि मेरे काम को पहचान मिली। काम को पहचान मिलने का ही नतीजा है कि मुझे सम्मानित किया गया। सम्मान पाने के बाद मैं संतुष्ट नहीं रहूंगा, बल्कि काम करने के प्रति मेरी भूख और बढ़ गई। मेरे सीनियर से लेकर मेरी सेवा पाने वाले आमलोगों को मुझसे जो भी अपेक्षा है, उस पर मैं खरा उतरने का प्रयास करूंगा।
डॉ. बजरंग के सम्मान के सही हकदारः शहरी पीएचसी के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि कोरोना की पहली लहर से ही डॉ. बजरंग ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन शानदार तरीके से किया। होम आइसोलेशन में मरीजों की देखभाल की बात हो या फिर मरीजों की जांच और इलाज की बात हो, हर मोर्चे पर उन्होंने डटकर काम किया। आज उसका परिणाम सबके सामने है। दूसरी लहर से ठीक पहले कोरोना टीकाकरण की जब शुरुआत हुई तो डॉ. बजरंग ने उसमें भी अपनी भूमिका शानदार तरीके से निभाई। गांधी चौक पर जब 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र की शुरुआत हुई तो वहां पर भी वह मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी करते रहे। कोरोना के साथ-साथ अन्य काम में भी वह अपनी भूमिका निभाते रहे। वह सम्मान के सही हकदार थे। मुझे खुशी है कि जिला प्रशासन ने उनके काम को पहचाना और डीएम ने उन्हें सम्मानित किया।

परिवार नियोजन दिवस पर अस्पतालों में लगे मेले

0
-मेले में परिवार नियोजन को लेकर दंपति को किया गया जागरूक
-परिवार नियोजन के अस्थाई संसाधनों का भी किया गया वितरण
भागलपुर, 21 फरवरी-
हर महीने की 21 तारीख को अब परिवार नियोजन दिवस मनाया जा रहा है। सोमवार को भी जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में परिवार नियोजन दिवस मनाया गया। इसे लेकर मेले का भी आयोजन किया गया। सदर अस्पताल समेत जिले के सभी अस्पतालों में परिवार नियोजन मेला लगाया गया। मेले में विभिन्न तरह के काउंटर लगाए गए थे। काउंटर पर परिवार नियोजन से संबंधित अस्थाई सामग्री का वितरण किया जा रहा था। लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा था । इससे होने वाले फायदे के बारे में बताया जा रहा था। मौके पर आशा के जिला समन्वयक जफरूल इस्लाम और केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक आलोक कुमार और जितेंद्र कुमार सिंह भी मौजूद थे।
एसीएमओ डॉ. अंजना ने बताया कि अब हर महीने की 21 तारीख को परिवार नियोजन दिवस का आयोजन किया जा रहा है। इससे परिवार नियोजन के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। परिवार नियोजन दिवस के मौके पर कई तरह के आयोजन किए जा रहे हैं, जिससे लोगों में परिवार नियोजन के प्रति दिलचस्पी बढ़ रही है। मेले में किसी काउंटर पर परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री का वितरण किया गया तो कहीं लोगों की काउंसिलिंग की गई। लोगों को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में भी बताया गया। उन्होंने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण है लोगों को परिवार नियोजन के प्रति अस्थाई संसाधनों पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करना। लोगों में इसके प्रति थोड़ा भ्रम रहता है। उसे दूर करने की जरूरत है। लोगों में यह सोच विकसित करनी पड़ेगी कि कंडोम, अंतरा जैसे अस्थायी संसाधनों के इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
दो बच्चों के बीच 3 साल का अंतराल जरूरीः डॉ. अंजना ने बताया कि दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल जरूरी है। इसे लोगों को समझाना बहुत आवश्यक है। अगर दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल रहता है तो जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है। इससे बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित रहने से बच्चा भविष्य में होने वाली किसी भी तरह की बीमारी से सुरक्षित रहता है। इन सब बातों को लोगों को समझाने की जरूरत है।
काउंसिलिंग पर जोरः डॉ. अंजना ने बताया कि परिवार नियोजन दिवस पर योग्य दंपतियों की काउंसिलिंग पर फोकस किया जा रहा है। एक बच्चे वाले दंपति को दूसरा बच्चा के लिए तीन साल का गैप रखना, 20 साल के बाद ही पहला बच्चा और अगर दो बच्चे हो गए हैं तो दंपति को बंध्याकरण के लिए मार्गदर्शन करने पर फोकस किया जा रहा है। ऐसा करने से होने वाले फायदे के बारे में भी दंपति को समझाया गया। काउंसिलिंग वाले काउंटर पर एएनएम ने कई योग्य दंपतियों की काउंसिलिंग की। जरूरत पड़ने पर वहां पर डॉक्टर भी जाकर दंपति को समझाने का काम करते दिखे। सबसे महत्वपूर्ण यह कि काउंसिलिंग के दौरान जो लोग जिस चीज के लिए तैयार हो गए, उनका रजिस्ट्रेशन कर तत्काल सामग्री का वितरण किया गया।

परिवार नियोजन क्यों जरूरी है, पहले दें इसकी जानकारीः सिविल सर्जन

0
परिवार नियोजन को लेकर कब-कब करनी है काउंसिलिंग, इसकी दी जानकारी
सदर अस्पताल में एएनएम को परिवार नियोजन को लेकर दिया गया प्रशिक्षण
भागलपुर, 19 फरवरी
परिवार नियोजन क्यों जरूरी है, काउंसिलिंग के दौरान सबसे पहले इसकी जानकारी दें। आरोग्य दिवस, परिवार नियोजन दिवस और प्रधानमंत्री मातृत्व जांच अभियान के दौरान लोगों को परिवार नियोजन को लेकर काउंसिलिंग अवश्य करें। काउसिलिंग के दौरान लोगों को अंतरा और छाया के बारे में सही-सही जानकारी दें, ताकि लोग इसका इस्तेमाल कर परिवार नियोजन कर सके। उक्त बातें सिविस सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने शनिवार को सदर अस्पताल में एएनएम के प्रशिक्षण के दौरान कही। उन्होंने प्रशिक्षण ले रही एएनएम को क्षेत्र में जाकर लोगों को परिवार नियोजन को लेकर लागातार जागरूक करते रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि अस्थायी सामग्री का इस्तेमाल कर लोग परिवार नियोजन कर सकते हैं। इसलिए क्षेत्र में लागातार लोगों की काउसिलिंग होती रहनी चाहिए। साथ ही परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री का भी वितरण करते रहने चाहिए। परिवार नियोजन को लेकर लोग जितना ज्यादा जागरूक होंगे, उतना ही लोगों पर इसका असर होगा। मौके पर डीपीएम, फैजान आलम अशर्फी, मास्टर ट्रेनर डॉ. अनुपमा सहाय, डीसीएम जफरिल इस्लाम, केयर इंडिया के एफपीसी जितेंद्र कुमार सिंह और आलोक कुमार भी मौजूद थे। शनिवार को प्रशिक्षण के एएनएम को अंतरा के बारे में बताया गया। रविवार को छाया के इस्तेमाल और उससे होने वाले फायदे के बारे में बताया जाएगा।
माहवारी के सात दिन के अंदर लगाएं अंतरा का इंजेक्शनः प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर डॉ. अनुपमा सहाय ने एएनएम को क्षेत्र में जाकर लोगों को अंतरा के इस्तेमाल करने के तरीके की जानकारी देने को कहा। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन के लिए अंतरा बहुत ही सरल माध्यम है। अंतरा का इंजेक्शन लगाते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। माहवारी के सात दिनों के अंतर ही अंतरा का इंजेक्शन लगाना होता है। साथ ही डिलेवरी होने के 42 दिनों के बाद ही अंतरा का इंजेक्शन लगाना चाहिए। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। इंजेक्शन लगने के बाद कभी-कभी ब्लीडिंग ज्यादा हो जाता है, जिससे आसानी से छुटकारा मिल जाता है।
दो बच्चों के बीच तीन साल के अंतराल के लिए अंतरा बेहतर साधनः एएनएम को प्रशिक्षण देते हुए मास्टर ट्रेनर अनुपमा सहाय ने बताया कि दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल जरूरी होता है। इससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्था रहता है। साथ ही बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है, जिससे वह भविष्य में बीमारियों की चपेट में आने से बचा रहता है। अगर बीमारी की चपेट में आ भी गया तो उससे वह आसानी से उबर जाता है। इसके लिए बेहतर साधन है। साल में 4 बार अंतरा का इंजेक्शन लगाकर दो बच्चों के बीच आसानी से तीन साल का अंतराल रखा जा सकता है। अंतरा का असर तीन महीने तक होता है।

स्पर्श कुष्ठ पखवाड़ा के दौरान 35 मरीजों की हुई पहचान

0
-मरीजों में 8 बच्चे भी शामिल, सभी का शुरू किया गया इलाज
-30 जनवरी से 13 फरवरी तक चला था कुष्ठ स्पर्श पखवाड़ा
बांका, 19 फरवरी-
महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर 30 जनवरी से जिले में चलाए गए स्पर्श कुष्ठ पखवाड़ा के दौरान 35 कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई। इनमें से 8 बच्चे भी हैं। सभी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है। जिले में पखवाड़ा 13 फरवरी तक चला था। इस दौरान कुष्ठ निवारण को लेकर तमाम कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके जरिये लोगों को कुष्ठ के प्रति जागरूक किया गया। जिला पर्यवेक्षक मृत्युंजय कुमार सिंह ने बताया कि पखवाड़ा के दौरान आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से जिले के 2254 गांवों के 22,32,826 लोगों को कुष्ठ के बारे में जागरूक किया गया। सभी लोगों को कुष्ठ के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई और इससे बचाव के तरीके बताए गए। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 3177 सभाओं का आयोजन किया गया। लोगों से महात्मा गांधी के कुष्ठ मुक्त भारत के सपने को साकार करने के लिए कुष्ठ रोगियों से भेदभाव नहीं करने और अगर मरीज दिखे तो उसका इलाज करवाने की अपील की गई। साथ ही कुष्ठ रोग से विकलांग हुए लोगों के लिए ग्रेड-2 के तहत मिलने वाली पेंशन प्रति महीना 1500 रुपये देने की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा उनके आश्रितों को 1000 रुपये प्रतिमाह राशि देने की बात भी लोगों को बताई गई। गांवों में सभाओं के जरिये 2,92,136 लोगों को कुष्ठ रोगियों से भेदभाव नहीं करने औऱ उसका इलाज कराने का संकल्प दिलाया गया।
कुष्ठ रोगियों से दूरी नहीं बनाएं, उनका इलाज करवाएं: एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि कुष्ठ दिवस से शुरू हुआ पखवाड़ा जिले में काफी सफल रहा। काफी संख्या में लोगों ने कुष्ठ को खत्म करने की शपथ ली। लोगों ने कुष्ठ रोगियों से किसी तरह का भेदभाव नहीं करने की बात कही। अगर कोई कुष्ठरोगी दिखे तो तत्काल उसे अस्पताल ले जाकर उसका इलाज करवाने की बात कही हई। साथ ही कुष्ठ रोगियों की पहचान कैसे करनी है, इसके भी तरीके बताए गए। लोग अगर कुष्ठ रोगियों से दूरी बनाने की बजाय उसका इलाज करवाएंगे तो यह बीमारी समाज से खत्म हो जाएगा।
कुष्ठ का पूर्ण इलाज संभवः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कुष्ठ की बीमारी जीवाणु से होता है, जिसका पूर्ण इलाज संभव है। इसकी पहचान बहुत ही आसान है। चमड़े पर किसी प्रकार का दाग या धब्बा, जिसमें दर्द या खुजली नहीं होती है और वह जन्म से नहीं है तो वह कुष्ठ का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। समय से इलाज होने पर यह पूरी तरह से ठीक हो जाता है और वह पहले वाली जिंदगी जी सकता है। एमडीटी का पूरा खुराक नियमानुसार लेने के बाद कुष्ठ पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है। इलाज नहीं कराने पर उस व्यक्ति से कई लोगों में संक्रमण हो सकता है। इसलिए अगर कोई कुष्ठ रोगी दिखे तो उसका तत्काल इलाज करवाएं।

जनप्रतिनिधि शत प्रतिशत कोरोना टीकाकरण में करें सहयोग 

0
-सोनाडीहा दक्षिणी पंचायत में कोरोना टीकाकरण को लेकर कार्यशाला का आयोजन
-पिरामल के सहयोग से जनप्रतिनिधियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया
बांका, 19 फरवरी-
बाराहाट प्रखंड की सोनडीहा दक्षिणी पंचायत में शनिवार को 15 से अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों के शत प्रतिशत कोरोना टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर कार्य़शाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन पिरामल स्वास्थ्य के डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम लीड (डीपीएल) मासूम रेजा ने कराया और अध्यक्षता मुखिया मोहम्मद निजामुद्दीन ने की। इसमें पंचायत के सभी 13 वार्ड सदस्यों, पूर्व मुखिया एवं समाजसेवियों ने भाग लिया। सभी लोगों से जल्द से जल्द पंचायत के सभी लोगों के टीकाकरण कराने में मदद की अपील की गई। कार्यशाला में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों को डीपीएल मासूम रेजा ने कोरोना टीकाकरण के महत्व के बारे में बताया और इससे संबंधित सभी प्रकार की जानकारी दी गई। कोरोना टीका के प्रति लोगों के मन से भ्रम को दूर किया गया। जनप्रतिनिधियों को यह अहसास कराया गया कि आपके प्रयास से पंचायत में शत प्रतिशत टीकाकरण हो सकता है। कोरोना टीका से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। इसलिए जल्द से जल्द सभी लोगों का टीकाकरण कराने की अपील की गई।
सभी लोगों का टीकाकरण कराना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारीः वहीं पंचायत के मुखिया मोहम्मद निजामुद्दीन ने जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपको सरकार की योजनाओं को आमजन तक पहुंचाना है। कोरोना का टीका भी सरकार सभी लोगों को मुफ्त में दे रही है। इसलिए आपका दायित्व बनता है कि पंचायत में 15 से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित कराएं। अगल टीका के प्रति लोगों के मन में किसी तरह का भ्रम हो तो उसे दूर कर उस व्यक्ति का टीकाकरण कराएं। टीकाकरण अभियान में स्वास्थ्य विभाग को पूर्ण सहयोग करें। सभी लोगों का टीकाकरण जितना जल्द होगा, समाज उतना ही जल्द कोरोना से सुरक्षित होगा।
टीका नहीं लेने वालों को चिह्नित करने की अपीलः इस अवसर पर मौजूद समाजसेवियों ने कहा कि सोनडीहा दक्षिणी पंचायत के सभी 13 वार्ड सदस्य अगर कोरोना टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग की मदद करें तो शत प्रतिशत लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है। इसके लिए 15 वर्ष के ऊपर के सभी लोगों को जिनकी पहली या दूसरी खुराक या फिर प्रीकॉशन डोज बाकी है उन्हें चिह्नित कर टीकाकरण करवाएं। ऐसा करने से लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। बैठक में वार्ड 1 के सदस्य मिथिलेश कुमार, 2 की बुलबुल देवी, 3 की ममता देवी, 4 की कविता कुमारी, 5 की टिंकू देवी, 6 की परमिला देवी, 7 की ममता देवी,  8 के अनिक लाल दास, 9 के मोहम्मद मुख्तार अंसारी, 10 के बासुकी ठाकुर, 11 की बीबी जरीना, 12 की सूफियाना खातून, 13 के शिव प्रसाद राय और सोनडीहा दक्षिणी पंचायत के समाजसेवियों ने भाग लिया।

समय से पूर्व प्रसव होने पर चिकित्सकों के सलाह अनुसार ही कराएं उपचार

0
– जच्चा-बच्चा दोनों को परेशानियों का करना पड़ सकता है सामना
– समय से पूर्व प्रसव होने पर शिशु रहता है बेहद कमजोर, इसलिए उचित इलाज जरूरी
खगड़िया, 19 फरवरी।
हर महिला में गर्भावस्था के दौरान ससमय एवं सुरक्षित प्रसव होने की लालसा रहती है। इस दौरान मन में तरह-तरह के सवाल और खुशियाँ भी रहती है। हालाँकि, इस दौरान थोड़ी सी अनदेखी और लापरवाही बड़ी मुश्किल बन जाती और महिलाओं को तरह-तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। ऐसी ही एक परेशानी समय पूर्व प्रसव होना है, जो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए परेशानी बन जाती है। हालाँकि, समय पूर्व प्रसव होने के कई कारण हैं। किन्तु सामान्यतः कमजोर महिलाएं खासकर इस दायरे में आ ही जाती है। समय पूर्व प्रसव में जन्म लेने वाले शिशु भी बेहद कमजोर होते हैं। क्योंकि, समय पूर्व प्रसव होने के कारण शिशु गर्भ के दौरान मानसिक, शारीरिक रूप से संबल नहीं हो पाता है। इसलिए ऐसी स्थिति में जच्चा-बच्चा का योग्य चिकित्सकों के सलाह के अनुसार ही इलाज कराएं। क्योंकि, ऐसे शिशु जन्म लेने के साथ कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं। इसलिए, ऐसे शिशु के स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए उचित और समुचित इलाज जरूरी है।
– कम उम्र में गर्भधारण से भी होती है समय पूर्व प्रसव :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, समय पूर्व प्रसव होने के कई कारण हैं। जैसे कि माता का 40 किलोग्राम से कम वजन होना, शरीर में खून की कमी, गर्भावस्था के दौरान या प्रसव पूर्व रक्तस्राव होना, गर्भाशय मुख का बेहद कमजोर होना आदि। इसलिए गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर चिकित्सकों से जाँच करानी चाहिए एवं उनके चिकित्सा परामर्श के अनुसार आवश्यक इलाज भी कराना चाहिए। हालाँकि, इसमें कम उम्र में गर्भधारण करना और गर्भावस्था के दौरान उचित खान-पान का सेवन नहीं करना आदि मुख्य कारण हैं। क्योंकि, ऐसी स्थिति में महिलाएँ काफी कमजोर हो जाती हैं। जिसके कारण सुरक्षित प्रसव नहीं हो पाती है।
– क्या है समय से पूर्व प्रसव :
37 हफ्ते के बाद होने वाली प्रसव को सामान्य एवं परिपक्व प्रसव कहा जाता है। किन्तु, इससे पूर्व प्रसव होने पर समय पूर्व प्रसव कहा जाता है। इस स्थिति में माँ के साथ-साथ जन्म लेने वाले शिशु काफी कमजोर होते हैं और दोनों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है। दरअसल, समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चे मानसिक एवं शारीरिक रूप से बेहद कमजोर होते ही हैं। इसके अलावा ऐसे शिशु में स्तनपान के लिए माँ की छाती को चूसने एवं साँस लेने की क्षमता भी नहीं होती है। जिसके कारण बच्चे कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।