22 फरवरी को पंचायतीराज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों द्वारा आयोजित की जायेगी आमसभा 

0
– सभा में प्रीकॉशन डोज़ से वंचित 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोरोना टीकाकरण के लिए किया जाएगा प्रेरित
– आंगनबाड़ी केंद्रों पर वीएचएसएनडी कार्यक्रम के दौरान दिये जाने वाले सेवाओं की दी जाएगी जानकारी
– टेलीमेडिसीन कंसल्टेशन सर्विसेज का लाइव डिमोन्सट्रशन
मुंगेर, 19 फरवरी। आगामी 22 फरवरी  को पंचायत स्तर पर  पंचायतीराज संस्थाओं के द्वारा जिलाभर में आम सभा आयोजित की जायेगी। इस दौरान कोरोना टीका के प्रीकॉशन डोज से वंचित 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को कोरोना टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा ।
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक अनिमेष कुमार के द्वारा जारी पत्र के अनुसार 22 फरवरी  को जिलाभर के पंचायतीराज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के द्वारा पंचायत स्तर पर आयोजित आमसभा में कोरोना टीकाकरण के प्रीकॉशन डोज से वंचित 60 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के कॉमोर्बिड श्रेणी के लाभार्थियों को ग्रामवार ड्यू लिस्ट के अनुसार टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिलाभर में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए विभिन्न आयुवर्ग जैसे 15 से 18 और 18 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के सभी लोगों को कोरोना टीकाकरण के फर्स्ट और सेकेंड के साथ-साथ 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों को कोरोना वैक्सीन के प्रीकॉशन डोज लगायी जा रही है।
उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को ही सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित किए जाने वाले वीएचएसएनडी कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली जानकारी देने के साथ ही टेलीमेडिसीन कंसल्टेशन जैसे ई संजीवनी (हब और स्पोक) एवं  ई संजीवनी ओपीडी ( पेशेंट डॉक्टर) का लाइव डिमोन्सट्रेशन किया जाना है ताकि सामुदायिक स्तर पर इससे होने वाले लाभ से आम जनों को अवगत कराया जा सके।
उन्होंने बताया कि इन सभी गतिविधियों के सफल संचालन के लिए सभी स्तर पर कार्यरत सहयोगी संस्थाओं जैसे डब्ल्यूएचओ, केयर इंडिया, यूनिसेफ, पीसीआई, डॉक्टर्स फ़ॉर यू के प्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाएगा।

लखीसराय ने एक लाख लोगों की कोविड आरटीपीसीआर जाँच की उपलब्धि की पूरी 

0
– सिविल सर्जन की अध्यक्षता में  स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों और कर्मियों ने मनाई खुशियाँ ,जताया आभार
– पदाधिकारियों और कर्मियों की मेहनत के साथ-साथ जिले के आमजनों के सकारात्मक सहयोग से मिली उपलब्धि
लखीसराय, 19 फरवरी-
जिले में बीते वर्ष 21 सितम्बर से कोविड संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए शुरू कोविड जाँच में अबतक एक लाख लोगों की आरटीपीएस जाँच करने की लखीसराय ने उपलब्धि पूरी कर ली है। यह उपलब्धि जिले के तमाम पदाधिकारियों एवं कर्मियों की मेहनत और जिले के आमजनों के सकारात्मक सहयोग का परिणाम है। वहीं, इस उपलब्धि की खुशी में शनिवार को सदर अस्पताल परिसर स्थित आरटीपीसीआर लैब में एक समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी की अध्यक्षता में केक काटकर स्वास्थ्य विभाग के मौजूद तमाम पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने खुशी का इजहार किया और  सभी ने एक-दूसरे को बधाई दी। इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (डीएस) डाॅ राकेश कुमार, सर्जन डाॅ अशोक कुमार, संचारी रोग पदाधिकारी सह कोविड जाँच के नोडल पदाधिकारी डाॅ पीसी वर्मा, टीबी के मोबलाइजर पंकज कुमार, इप्डोमोलोजिस्ट डाॅ जूली कुमारी, आईडीएसपी के डीईओ सौरभ कुमार आदि मौजूद थे।
– पदाधिकारियों और कर्मियों की मेहनत और आमजनों के सकारात्मक सहयोग की बदौलत मिली उपलब्धि :
इस मौके पर सिविल सर्जन डाॅ  चौधरी ने कहा, यह उपलब्धि जहाँ जिले के तमाम पदाधिकारियों और कर्मियों के सकारात्मक उम्मीद के साथ मुश्किल भरे दौर में कड़ी मेहनत का परिणाम है। वहीं, जिले के आमजनों के सकारात्मक सहयोग का भी परिणाम है। जिलेवासियों ने मुश्किल भरे दौर और चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी जो सकारात्मक सहयोग में सहभागिता दिखाई, वह ना सिर्फ प्रशंसनीय है बल्कि, काफी सराहनीय भी है। मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि इसी तरह आगे भी इस घातक महामारी के खिलाफ कोविड वैक्सीनेशन और जाँच में आप सहयोग करते रहें। इसी के बदौलत हर हाल में इस घातक महामारी की हार और आपकी जीत सुनिश्चित है।
– सामुदायिक स्तर पर लोगों में आई जागरूकता से मिली उपलब्धि :
संचारी रोग पदाधिकारी सह कोविड जाँच के नोडल पदाधिकारी डाॅ पीसी वर्मा ने कहा, यह उपलब्धि सामुदायिक स्तर पर लोगों में आई सकारात्मक जागरूकता परिणाम है। मुश्किल भरे दौर में भी जहाँ जिले के तमाम पदाधिकारियों और कर्मी अपनी जिम्मेदारी डटे रहे वहीं, जिले के आमजनों की सहभागिता भी बढ़ती गई। जिसका परिणाम आज पूरे जिले वासियों के सामने है। इसी के बदौलत में सामुदायिक स्तर पर लोग तीसरी लहर में भी काफी हद तक इस घातक महामारी से सुरक्षित रहे। वहीं, उन्होंने कहा, मैं इस उपलब्धि के लिए जिले के तमाम पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ-साथ जिले के आमजनों को भी बधाई देता हूँ।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

मुंगेर जिला में कोविड के साथ नियमित टीकाकरण पर भी दिया जा रहा जोर

0

– गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी
– संस्थागत प्रसव को लेकर भी गर्भवती महिलाओं को किया गया जागरूक

मुंगेर, 18 फरवरी-

जिला  में नियमित तौर पर लगातार कोविड वैक्सीनेशन अभियान तो चल ही रहा व साथ ही गर्भवती और शिशु के नियमित टीकाकरण पर भी जोर दिया जा रहा है । ताकि गर्भवती एवं शिशु का ससमय नियमित टीकाकरण भी सुनिश्चित हो सके और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके। इसे सार्थक रूप देने के लिए जिला के विभिन्न ऑगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ ही संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा सेविका एवं आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से गर्भवती एवं शिशु का नि

लखीसराय जिले में 126 वीएचएसएनडी साइट पर ई-टेलीमेडिसीन सेवा का ड्राईरन 

0

– ड्राईरन के सफल संचालन को लेकर जिले में बनाए गए थे 14 हब
– मरीजों की मोबाइल एप व वीडियो काॅल के जरिए ऑनलाइन हुई स्वास्थ्य जाँच, दी गई चिकित्सा परामर्श

लखीसराय, 18 फरवरी।
मरीजों को सुविधाजनक तरीके से स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है।  इसे सुनिश्चित करने को लेकर लगातार हर जरूरी प्रयास भी किए जा रहे हैं। जिसे सार्थक रूप देने के लिए शुक्रवार को जिले में ई-टेलीमेडिसीन सेवा का ड्राईरन हुआ। जिसके तहत मोबाइल एप के माध्यम से वीडियो काॅल के जरिए  मरीजों की ऑनलाइन स्वास्थ्य जाँच हुई । जाँच के पश्चात आवश्यक चिकित्सा परामर्श दी गई। साथ ही जरूरतमंद मरीजों को दवाई भी उपलब्ध कराई गई। वहीं, इस ड्राईरन के सफल संचालन को स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक व्यवस्था की गई थी। ताकि मरीजों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी मरीजों सुविधाजनक तरीके से इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सके।

– ड्राईरन के सफल संचालन को लेकर जिले में बनाए गए थे 126 साइट और 14 हब :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, ई-टेलीमेडिसीन सेवा के ड्राई रन के सफल संचालन को लेकर जिले में जहाँ 126 वीएचएसएनडी साइट बनाया गया था। वहीं, 14 हब भी बनाया गया था। ताकि मरीजों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और हर हाल में ड्राईरन का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा पर्याप्त कर्मियों की तैनाती समेत अन्य व्यापक व्यवस्था की गई थी। वहीं, उन्होंने बताया, सभी हब पर तैनात चिकित्सक वीडियो काॅल के जरिए मरीजों की स्वास्थ्य जाँच की। साइट पर तैनात कर्मियों द्वारा चिकित्सा परामर्श के अनुसार आवश्यक दवाई उपलब्ध कराई गई।

– सभी वीएचएसएनडी साइट पर गर्भवती महिलाओं की देखी गई अधिक संख्या :
ई-टेलीमेडिसीन सेवा के ड्राईरन के दौरान जिले के सभी वीएचएसएनडी साइट पर मौजूद मरीजों में सबसे अधिक गर्भवती महिलाओं की संख्या देखी गई। सभी मरीजों ने बारी-बारी  सुविधाजनक तरीके से अपनी स्वास्थ्य जाँच करायी । जाँच के बाद चिकित्सा परामर्श के अनुसार दवाई प्राप्त की। सभी वीएचएसएनडी साइट पर एएनएम, स्थानीय आँगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई थी।

अलौली के सूरजनगर में कालाजार के चार संभावित मरीजों की स्वास्थ्य जाँच 

0
– घर-घर जाकर मेडिकल टीम द्वारा की गई स्वास्थ्य जाँच, दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श
– सभी मरीजों की रिपोर्ट आई निगेटिव, कालाजार से बचाव के लिए दी गई आवश्यक जानकारी
खगड़िया, 18 फरवरी-
जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत कालाजार प्रभावित क्षेत्र में आने वाले सूरजनगर गाँव में कालाजार उन्मूलन को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा और  संक्रमित पाऐ जाने वाले मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सेवा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसी कड़ी में चार संभावित मरीजों की सूचना पर शुक्रवार को पुनः मेडिकल टीम सूरजनगर गाँव पहुँची। जहाँ सभी मरीजों को घर-घर जाकर सुविधाजनक तरीके से स्वास्थ्य जाँच की गई और आवश्यक चिकित्सा परामर्श दी गई। हालाँकि, सभी मरीज निगेटिव पाए गए। इसके बाद मेडिकल टीम द्वारा सभी मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय सेवा और परामर्श उपलब्ध कराई गई। मेडिकल टीम के साथ में केयर इंडिया के प्रखंड समन्वयक संजय कुमार, वीबीडी सुपरवाइजर अरुण कुमार, आशा कार्यकर्ता रेणु कुमारी आदि मौजूद थी।
– कालाजार मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है समुचित स्वास्थ्य सेवा :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया, कालाजार मरीजों को स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा समुचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसलिए, म जिले के तमाम लोगों से अपील है कि कालाजार का लक्षण दिखने पर तुरंत इसकी जानकारी स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों को उपलब्ध कराएं। हर हाल में मरीजों को उनके सुविधा के अनुसार समुचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करायी जाएगी। वहीं, उन्होंने बताया, सरकारी अस्पतालों में जाँच एवं इलाज की मुफ्त  व्यवस्था उपलब्ध है। यहीं नहीं, ऐसे मरीजों को सरकार द्वारा सहायता राशि भी उपलब्ध कराई जाती है। इस बीमारी से बचाव के लिए जमीन पर नहीं सोएं। मच्छरदानी का नियमित रूप से उपयोग करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
– सूरजनगर गाँव में कालाजार से बचाव को लेकर लगातार गतिविधियों का आयोजन :
केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती ने बताया, जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत कालाजार प्रभावित सूरजनगर गाँव में कालाजार उन्मूलन को लेकर लगातार तमाम गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान इस बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक सलाह और जानकारी उपलब्ध कराई जा रही और संक्रमित मरीजों को सुविधाजनक तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। पूर्व में भी घर-घर मरीज खोज अभियान के तहत एक-एक व्यक्ति स्वास्थ्य जाँच, कैलेंडर वितरण, गाँव के जनप्रतिनिधियों, गणमान्यों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बैठक समेत अन्य पहल की जा चुकी है। इसके अलावा लगातार नियमित तौर पर हर जरूरी प्रयास और पहल किए जा रहे हैं। वहीं, उन्होंने बताया, स्वास्थ्य विभाग, पंचायतीराज विभाग के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि, जीविका, आईसीडीएस समेत अन्य विभागों से संपर्क किया जा रहा है। जल्द ही सूरजनगर गाँव में व्यापक पैमाने पर आम सभा का आयोजन किया जाएगा। जिसमें लोगों को कालाजार से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा ।  बचाव के कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी दी जाएगी।

बांका में 350 साइट पर टेलीमेडिसीन सेवा का आगाज

0
-पहले ही दिन 500 से अधिक लोगों ने उठाया इसका लाभ
-350 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी सेवा को सफल बनाने में लगे रहे
बांका, 18 फरवरी –
जिले में ई-संजीवनी ओपीडी के तहत टेलीमेडिसीन सेवा का शुक्रवार को आगाज हो गया। पहले ही दिन 500 से अधिक लोगों ने इस सेवा का लाभ उठाया। लोगों का न केवल इलाज हुआ, बल्कि उन्हें दवा भी उपलब्ध करा दी गई। घर के पास इलाज होने से मरीजों में खासा उत्साह देखा गया। उन्हें इलाज के लिए दूर तक नहीं जाना पड़ा, साथ ही उन्हें तत्काल ही दवा उपलब्ध करा दी गई। एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि टेलीमेडिसीन सेवा का ड्राईरन शुक्रवार को सफल रहा। बांका शहर समेत जिले के सभी प्रखंड में टेलीमेडिसीन टीम का गठन किया गया था। पूरे जिले में 350 जगहों पर टीमें अपनी-अपनी तैनाती वाले अस्पताल में मौजूद थीं। डॉक्टर ऑनलाइन तरीके से मरीजों से रूबरू हुए। मरीज की डॉक्टर से बात कराने से लेकर जांच रिपोर्ट तक दिखाने का काम एएनएम ने किया। मरीज की जांच रिपोर्ट व उसके द्वारा बताई गई परेशानी व लक्षण के आधार पर डॉक्टर ने मरीज का इलाज किया।
ग्रीन चैनल के जरिये मरीजों तक पहुंची दवाः टेलीमेडिसीन सेवा के तहत मरीजों के लिए 37 प्रकार की दवा उपलब्ध कराई गई है। डॉक्टर के दवा लिखे जाने के बाद ग्रीन चैनल के जरिये मरीजों तक निःशुल्क दवा पहुंचाई गई। आगे एचआईवी, हेपेटाइटिस व सिफलिस व गर्भवती की जांच से लेकर कोरोना का टीका भी ग्रीन चैनल के जरिये दिया जाएगा। ई-संजीवनी के जरिये सभी ओपीडी दिवस के दिन पूर्व में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा टेलीमेडिसीन सेवा दी जाएगी। इसे लेकर एएनएम व चिकित्सकों को ट्रेनिंग दे दी गई है। दवा पहुंचाने का काम कूरियर ने किया। इसे लेकर कूरियर को प्रतिदिन 100 के हिसाब से भुगतान भी किया जाएगा।
बुधवार और शुक्रवार को मिलेगी यह सेवा: टेलीमेडिसीन की स्वास्थ्य सुविधा लेने के लिए मरीजों को अपने नजदीकी चयनित स्वास्थ्य संस्थान पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद वहां तैनात एएनएम स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल के माध्यम के टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा की सुविधा दिलाएंगी। डॉक्टर के चिकित्सा परामर्श के अनुसार एएनएम मरीजों को दवाई समेत अन्य चिकित्सा सेवा सुनिश्चित कराएंगी। यानी अब इलाज कराने के लिए मरीजों को अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि सुविधाजनक तरीके से पूरी तरह मुफ्त ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा। हर बुधवार और शुक्रवार को यह सेवा उपलब्ध रहेगी।
दूर-दराज के इलाके के लोगों को लिए वरदान साबित होगी यह सेवाः दुर्गम इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सेवा लेने में होने वाली परेशानियों को दूर करने में टेलीमेडिसीन सेवा वरदान साबित होगी। दुर्गम इलाके के मरीजों को आने-जाने के लिए काफी दूरी का सफर समेत अन्य परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और समुचित इलाज के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। बांका जिले का काफी क्षेत्र जिला मुख्यालय से दूर है या फिर स्थानीय प्रखंड मुख्यालय से भी अच्छी-खासी दूरी पर है। उन क्षेत्रों के मरीजों को इसका काफी लाभ होगा।

टेली मेडिसीन सेवा का आगाज, पहले ही दिन सैकड़ों मरीजों ने उठाया लाभ

0
भागलपुर, 18 फरवरी
जिले में ई-संजीवनी ओपीडी के तहत टेलीमेडिसीन सेवा का शुक्रवार को आगाज हो गया। पहले ही दिन जिले के सैकड़ों मरीजों ने इसका लाभ उठाया। सभी लोगों को डॉक्टरी परामर्श के बाद दवा दी गई। पहले दिन जिले के कई केंद्रों पर सेवा की शुरुआत की गई। सभी जगहों पर कूरियर के जरिये दवा पहुंचाई गई, जिसे बाद में मरीजों की जरूरत के हिसाब से बांटी गई। घर बैठे इलाज होने से मरीजों के चेहरे पर खुशी देखी गई। साथ ही तत्काल मुफ्त में दवा मिल जाने से भी मरीजों को राहत मिली।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि टेलीमेडिसीन सेवा का शुक्रवार को ड्राई रन किया गया। पहले दिन जिले के कई केंद्रों पर इस सेवा की शुरुआत हुई, लेकिन इस सेवा को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में शुरू की जाएगी। शुक्रवार को जहां बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी थी, वहां इसे चालू किया गया। आगे इसे और बढ़ाया जाएगा। सभी प्रखंड में टेली मेडिसीन टीम का गठन कर दिया गया है, जो हर बुधवार और शुक्रवार को अपनी सेवा देगी। आगे से भी डॉक्टर ऑनलाइन तरीके से मरीज से रूबरू होंगे। मरीज की डॉक्टर से बात कराने से लेकर जांच रिपोर्ट तक दिखाने की जिम्मेदारी एएनएम की होगी। मरीज की जांच रिपोर्ट व उसके द्वारा बताई गई परेशानी व लक्षण के आधार पर डॉक्टर मरीज को दवा लिखेंगे
मरीजों को मुफ्त में दी गई दवाः टेलीमेडिसीन सेवा के तहत मरीजों के लिए 37 प्रकार की दवा उपलब्ध कराई गई है। ड्राई रन के दौरान इन्हीं दवाओं में से मरीजों को जरूरत के हिसाब से दिया गया। डॉक्टर के दवा लिखे जाने के बाद ग्रीन चैनल के जरिये मरीजों को निःशुल्क दवा दी गई। इसके अलावा आगे से एचआईवी, हेपेटाइटिस व सिफलिस व गर्भवती की जांच से लेकर कोरोना का टीका भी ग्रीन चैनल के जरिये दिया जाएगा। सिविल सर्जन ने बताया कि ई-संजीवनी के जरिये सभी ओपीडी दिवस के दिन पूर्व में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा   टेलीमेडिसीन सेवा दी जाएगी। इसे लेकर एएनएम व चिकित्सकों को ट्रेनिंग तक दे दी गई है।
सेवा का इस तरह से उठाएं लाभ: टेलीमेडिसीन की स्वास्थ्य सुविधा लेने के लिए मरीजों को अपने नजदीकी चयनित स्वास्थ्य संस्थान पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद वहां तैनात एएनएम स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल के माध्यम के टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा की सुविधा उपलब्ध कराती हैं। डॉक्टर के चिकित्सा परामर्श के अनुसार एएनएम मरीजों को दवाई समेत अन्य चिकित्सा सेवा सुनिश्चित कराती हैं। अब इलाज कराने के लिए मरीजों को अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि सुविधाजनक तरीके से पूरी तरह मुफ्त ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा। उम्मीद है कि दुर्गम इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सेवा लेने में होने वाली परेशानियों को दूर करने में टेलीमेडिसीन सेवा वरदान साबित होगी। मरीजों को आने-जाने के लिए काफी दूरी का सफर समेत अन्य परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और समुचित इलाज के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी।

कायाकल्प की टीम ने नाथनगर और रंगरा अस्पताल का किया निरीक्षण

0

-अस्पताल के अंदर और परिसर की सफाई व्यवस्था को देखा और जानकारी ली
-दोनों ही अस्पतालों की सफाई व्यवस्था से कायाकल्प की टीम संतुष्ट दिखी
भागलपुर, 18 फरवरी
पटना से आई कायाकल्प की टीम ने शुक्रवार को नाथनगर स्थित रेफरल अस्पताल और रंगरा पीएचसी का निरीक्षण किया। टीम में पटना से आए डॉ. विजय कुमार झा, डॉ. विजय कुमार चौधरी और डॉ. राकेश कुमार थे। उनके साथ डीएचएस के डॉ. प्रशांत और केयर इंडिया के डीटीओ फैसिलिटी डॉ. राजेश मिश्रा भी थे। सभी ने दोनों अस्पतालों की सुविधाओं को देखा। खासकर अस्पताल की सफाई व्यवस्था की टीम ने बारीकी से निरीक्षण किया। मालूम हो कि कायाकल्प की जिले की टीम के निरीक्षण में दोनों ही अस्पताल खरा उतरा है। इसके बाद अब राज्य की टीम निरीक्षण कर रही है। इसमें भी खरा उतरने पर अस्पताल को पुरस्कार के तौर पर मोटी राशि मिलेगी।
टीम ने सबसे पहले रंगरा पीएचसी का निरीक्षण किया। यहां पर प्रभारी डॉ. रंजन कुमार से अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सारी सुविधाओं की जानकारी ली। पटना से आए डॉ. विजय कुमार झा ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था संतोषजनक थी। प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थियेटर साफ-सुथरा था। हालांकि सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है, लेकिन व्यवस्था फिर भी ठीक-ठाक थी। वहीं प्रभारी डॉ. रंजन कुमार ने बताया कि अस्पताल में सफाई पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को यहां से किसी तरह का संक्रमण नहीं हो, इसका हमलोग ख्याल रखते हैं। उम्मीद है कि कायाकल्प की टीम यहां की व्यवस्था से संतुष्ट हुई होगी और अस्पताल को बेहतर अंक मिलेगा।
रंगरा में निरीक्षण करने के बाद कायाकल्प की टीम नाथनगर रेफरल अस्पताल गई। वहां पर भी सभी लोगों ने अस्पताल के अंदर से लेकर परिसर तक की सफाई व्यवस्था को परखा। पटना से आए डॉ. विजय कुमार चौधरी और डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि यहां व्यवस्था अच्छी थी। खासकर सफाई का बेहतर तरीके से ध्यान रखा जाता है। न सिर्फ अस्पताल के अंदर, बल्कि परिसर भी साफ-सुथरा था। प्रसव कक्ष, ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर में गंदगी नहीं दिखी। प्रभारी डॉ. अनुपमा सहाय ने बताया कि हमलोगों ने ठीक से तैयारी की थी। अब कायाकल्प की टीम कितनी संतुष्ट हुई, यह अंक मिलने के बाद पता चलेगा। उन्होंने बताया कि सिर्फ कायाकल्प के निरीक्षण के दौरान ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी अस्पताल में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। मरीजों का स्वच्छ माहौल में यहां पर इलाज किया जाता है।
टॉप करने पर 17 लाख की मिलती है राशिः कायाकल्प की टीम के निरीक्षण में राज्य भर में टॉप करने पर अस्पताल को 17 लाख रुपये की राशि मिलती है। दूसरे और तीसरे स्थान वाले को भी राशि मिलती है। उस राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाने पर खर्च किया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि अस्पताल के कर्मियों में उत्साह बढ़ाने के लिए खर्च किया जाता है। दोनों ही अस्पताल पहले जिला स्तरीय टीम के निरीक्षण में खरा उतर चुकी है। अब अगर राज्य स्तरीय कायाकल्प टीम के निरीक्षण में खरा उतरता है तो पुरस्कार का हकदार हो जाएगा।

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराकर टीबी को दी मात, अब पूरी तरह स्वस्थ्य होकर राजन जी रहे हैं सामान्य जीवन 

0
– अब टीबी का लक्षण दिखने वाले लोगों को जाँच कराने के लिए कर रहे हैं जागरूक
लखीसराय, 17 फरवरी
लखीसराय के बिलौरी गाँव निवासी 22 वर्षीय युवक राजन कुमार को खांसी की परेशानी हुई और परेशानी कम होने की बजाय बढ़ती ही रही थी। शरीर के वजन में भी लगातार गिरावट  आ रही थी। यह सिलसिला 15 दिनों तक चलता रहा। इसके बाद उन्होंने स्थानीय अस्पताल लखीसराय में टीबी जाँच करायी। जहाँ जाँच में उनकी रिपोर्ट पाॅजिटिव आयी। जिसके बाद वह कुछ देर के लिए जरूर घबरा गया। किन्तु हिम्मत नहीं हारे और सकारात्मक उम्मीद के साथ सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ही अपना इलाज शुरू करवाया। जहाँ उन्हें अस्पताल में जाँच रिपोर्ट पाॅजिटिव आने के बाद जरूरी दवाई उपलब्ध कराई गई। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की बदौलत राजन टीबी को मात देने में सफल रहा। वहीं, पूरी तरह स्वस्थ हो चुके राजन अब अन्य लोगों को भी टीबी से बचाव के लिए जागरूक कर रहे हैं।  वह खांसी, सर्दी, बुखार समेत टीबी के अन्य लक्षण वाले लोगों को यथाशीघ्र जाँच कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की भी लोगों को जानकारी दे रहे हैं।
– इलाज के दौरान अस्पतालों में मिली बेहतर स्वास्थ्य सुविधा :
राजन ने बताया, इलाज के दौरान अस्पतालों में मुझे बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिली और पूरी तरह निःशुल्क इलाज हुआ। इलाज के दौरान अस्पताल कर्मियों का काफी सहयोग मिला एवं कर्मियों ने मेरा काफी ख्याल रखा। जिसका परिणाम यह है कि मैं आसानी के साथ इस बीमारी को मात देने में सफल रहा। वहीं, उन्होंने बताया, अस्पताल में दवाई मिलने के साथ मैं नियमित रूप से चिकित्सा परामर्श के अनुसार दवाई का सेवन करने लगा। मुझे दो-तीन माह में ही लगने लगा कि मैं पूरी तरह स्वस्थ हो चुका हूँ। किन्तु, मैं दवाई की पूरी डोज पूरा करने के लिए छः माह तक दवाई का सेवन जारी रखा और अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूँ।
– टीबी बीमारी होने पर घबराएं नहीं, अस्पतालों में उपलब्ध है समुचित जाँच और इलाज की मुफ्त सुविधा :
सदर अस्पताल में तैनात टीबी के सीनियर पर्यवेक्षक कमल नयन पांडेय ने बताया, टीबी बीमारी होने पर घबराना नहीं चाहिए। बल्कि, लक्षण दिखते ही स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान में जाँच करानी चाहिए। दरअसल, यह एक सामान्य बीमारी है और समय पर जाँच कराने से आसानी के साथ बीमारी से स्थाई निजात मिल सकती है। इसके लिए अस्पतालों में मुफ्त समुचित जाँच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इसलिए, किसी भी व्यक्ति को इलाज के लिए खर्च की भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा सरकार द्वारा सहायता राशि भी दी जाती है।
– ये हैं टीबी बीमारी का प्रारंभिक लक्षण :-
– 15 दिन या इससे अधिक दिनों तक लगातार खांसी या बुखार रहना
– बलगम में खून आना
– एक माह या इससे अधिक दिनों तक सीने में दर्द रहना
– लगातार शरीर वजन कम होना एवं कमजोरी महसूस होना।

पोषण एवं पुनर्वास केंद्र में  साढ़े पांच महीने की अतिकुपोषित बच्ची सुंदन कुमारी का चल रहा है इलाज 

0
– 29 जनवरी को एनआरसी में भर्ती के वक्त बच्ची नहीं कर पा रही थी मां का स्तनपान
– सप्लीमेंट सकिंग टेक्नीक से ट्यूब के जरिये बच्ची को कराया गया मां का स्तनपान
मुंगेर , 17 फरवरी-
सदर अस्पताल मुंगेर स्थित पोषण एवं पुनर्वास केंद्र में इन दिनों घोरघट, बरियारपुर से आई अति कुपोषित  बच्ची साढ़े पांच महीने की सुंदन कुमारी की सफल इलाज के साथ-साथ सही पोषण दी जा रही है। इसका परिणाम है कि जिस बच्ची का वजन एनआरसी में भर्ती होने के वक्त महज 2.9 किलोग्राम और लम्बाई 55 सेमी था वो अब बढ़कर लगभग 4 किलोग्राम हो गया है और लम्बाई में भी उसके अनुरूप वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही भर्ती के वक्त मां का स्तनपान करने में अक्षम बच्ची सुंदन कुमारी अब आसानी से मां का स्तनपान कर रही है।
एनआरसी मुंगेर के नोडल ऑफिसर विकास कुमार ने बताया कि विगत 29 जनवरी  को बाल विकास परियोजना बरियारपुर के करहरिया पंचायत पूर्वी घोरघट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 96 की सेविका खुशबू कुमारी और लेडी सुपरवाइजर प्रीति कुमारी ने शिव कुमार सिंह और उनकी पत्नी काजल कुमारी की दूसरी बेटी साढ़े पांच महीने की अति कुपोषित बच्ची सुंदन कुमारी को एनआरसी में भर्ती कराया । एनआरसी में भर्ती के वक्त बच्ची का वजन काफी कम था और वो मां का स्तनपान भी नहीं कर पा रही थी। इसके के लिए सप्लीमेंट सकिंग टेक्नीक अप्लाई किया गया जिसके तहत एक ट्यूब की मदद से बच्ची को स्तनपान कराया गया। अब बच्ची आसानी से मां का स्तनपान कर रही है। उन्होंने बताया कि बच्ची सुंदन हाइपो ग्लेसिमिया नामक बीमारी से पीड़ित थी जिसमें बच्चे का ग्लूकोस लेवल काफी कम हो जाता है।
एनआरसी मुंगेर की फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर रचना भारती ने बताया कि एनआरसी में भर्ती के वक्त बच्ची सुंदन अपनी मां का स्तनपान नहीं कर पा रही थी। हालांकि बच्ची के जन्म के दो से तीन घन्टे के अंदर बच्ची की मां 21 वर्षीय काजल कुमारी ने स्तनपान कराने का प्रयास किया था। इसके बाद एफ 100 डाल्युटेंट फीड का 35 एमएल प्रत्येक दो से तीन घन्टे में देना शुरू किया गया।  इसके बाद सप्लीमेंट सकिंग टेक्नीक अपनाया गया। इस टेक्नीक में कटोरी-चम्मच की जगह एक टयूब की मदद से बच्ची को मां का स्तनपान कराया गया। इसके साथ ही बच्ची को आयरन और कैल्सियम का टेबलेट खाने के साथ स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया गया। पांच से छह दिनों तक यह टेक्नीक इस्तेमाल करने के बाद अब बच्ची आसानी से स्तनपान कर पा रही है। अब 2 घन्टे के अंतराल को बढ़ा कर 3 से 4 घन्टे के अंतराल पर एफ100 डाइल्यूटेन्ट फीड दी जा रही है। बच्ची के वजन में भी अब काफी सुधार हुआ है। अब बच्ची का वजन 2.9 से बढ़कर लगभग 4 किलो हो गया है।
बच्ची की मां 21 वर्षीय काजल कुमारी ने बताया कि सुंदन मेरी दूसरी बेटी है। जन्म से ही यह कुपोषण की शिकार हो गई। इसका हाथ और पैर काफी पतला-पतला था । इसके साथ ही इसका वजन भी बहुत कम था। इस सबके साथ जो सबसे बड़ी बात थी वो ये कि वो मेरा स्तनपान भी नही कर पा रही थी। इसके बाद मेरे करहरिया पूर्वी पंचायत की आंगनबाड़ी सेविका खुशबू कुमारी ने मुझे यहां पोषण पुर्नवास केंद्र में रहकर इलाज करवाने की सलाह दी और साथ आकर यहां भर्ती करवाया । अब मेरी बच्ची बिल्कुल ठीक है ।अब वो ठीक से स्तनपान भी कर रही और उसका वजन भी पहले की  तुलना में बढ़ा है। यहां मेरे और दोनों बच्चियों के स्वास्थ्य और पोषण का पूरा-पूरा ख्याल रखा जा रहा है। यहां खाने -पीने के साथ-साथ दवाइयां भी मिल रही हैं।