अब पीकेडीएल मरीजों की ऑख की भी होगी जाँच, गोगरी रेफरल अस्पताल में सुविधा की हुई शुरुआत 

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– जाँच के मिले पीकेडीएल संक्रमित मरीजों को उपलब्ध करायी जाएगी समुचित चिकित्सा सुविधा
– पीकेडीएल संक्रमित मरीजों को सरकार द्वारा आर्थिक सहयोग के रूप दी जाती है राशि
खगड़िया, 17 फरवरी-
पूरे प्रदेश में कालाजार उन्मूलन को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है । इसे सुनिश्चित करने को लेकर हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। जिसे सार्थक रूप देने के लिए जिले में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा जहाँ तमाम गतिविधियों समेत अन्य जरूरी पहल की जा रही है। वहीं, अब पीकेडीएल (चमरा वाला कालाजार) मरीजों की इलाज के दौरान ऑख की भी जाँच होगी। इस सुविधा की शुरुआत गोगरी रेफरल अस्पताल में की गई। जिसके बाद अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी सुविधाएं बहाल हुई। ताकि इस बीमारी से पीड़ित मरीज सुविधाजनक तरीके से अपना समुचित इलाज करवा सके। यह जाँच की सुविधा जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार के नेतृत्व में शुरू की गई है। यह सुविधा जिले वासियों के लिए सुखद खबर है।
– कालाजार उन्मूलन को लेकर को किए जा रहे हैं हर जरूरी प्रयास :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया, कालाजार उन्मूलन को लेकर जिले में लगातार हर प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि इस बीमारी का प्रभाव कम हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग इस बीमारी से सुरक्षित हो सकें। इसको लेकर लगातार घर-घर कालाजार मरीज खोज अभियान चलाकर मरीजों की पहचान की जा रही है। इस दौरान संक्रमित पाए जाने वालों मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा अब पीकेडीएल के मरीजों की ऑख की भी जाँच की सुविधा शुरू कर दी गई है। दरअसल, पूर्व ऐसे मरीजों में इलाज के पश्चात ऑख से संबंधित परेशानी सामने आई थी। जिसके कारण यह सुविधा शुरू की गई। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मरीजों में ऑख से संबंधित कोई परेशानी तो नहीं है। वहीं, उन्होंने बताया, ऐसे मरीजों का एक सप्ताह के अंतराल पर ऑख की जाँच की जाएगी।
– कालाजार मरीजों की जाँच से लेकर इलाज तक की अस्पतालों में निःशुल्क सुविधा है उपलब्ध :
केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती ने बताया, कालाजार मरीजों की जाँच से समुचित इलाज तक की सुविधा सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है। यही नहीं, मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने का प्रावधान है। साथ ही पाॅजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये की राशि संबंधित आशा कार्यकर्ता को दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया, 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे व्यक्ति, जिन्हें बुखार नहीं हो, लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए, ऐसे लोगों को तुरंत जाँच करानी चाहिए। ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके।

कालाजार का मरीज मिलते ही उसका कराया जा रहा इलाज

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कालाजार उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध
अमरपुर में मरीज मिला तो तत्काल कराया उसका इलाज
बांका,  17 फरवरी
कालाजार पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। जिले में जहां भी कोई मरीज मिलता है, तत्काल उसका इलाज किया जाता है। हाल ही में अमरपुर प्रखंड की इटहरी पंचायत के गदाल गांव की शांति देवी कालाजार से प्रभावित मिली। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनका इलाज करवाया और अब वह स्वस्थ है।
शांति देवी कहती है, मैं काफी दिनों से बीमार थी। निजी क्लीनिक में इलाज करवा रही थी. लेकिन उसका फायदा नहीं मिल रहा था। स्वास्थ्य विभाग की टीम को जब जानकारी मिली तो उन्होंने मेरा टेस्ट करवाया, जिसमें कालाजार की पुष्टि हुई। इसके बाद मेरा इलाज करवाया गया. अब मैं स्वस्थ हूं। स्वास्थ्य विभाग की तत्परता का परिणाम है कि जिले के कई प्रखंड अभी कालाजार से मुक्त है। अभी जिले के अमरपुर, बांका सदर, बौंसी, बाराहाट और धोरैया प्रखंड ही कालाजार प्रभावित है। इन प्रखंडों को भी कालाजार से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है। लगातार यहां पर सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव कराया जाता है।
7100 रुपये की मिलेगी राशिः कालाजार से ठीक हुई महिला को 7100 रुपये दिए जाते हैं। जिसमें 500 रुपये केंद्र सरकार की ओर से एवं 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से दी जाती है। मरीज को पौष्टिक भोजन के लिए यह राशि दी जाती है। शांति देवी को भी यह राशि जल्द ही दी जाएगी। एक-दो दिनों में सर्टिफिकेट मिल जाएगा, इसके बाद राशि देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कालाजार की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट: जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। प्रभावित प्रखंडों में छिड़काव का काम लगातार करवाया जाता है। डॉ. यादव ने लोगों से अपील की कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें। यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें। सोते समय मच्छरदानी लगाएं। साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं। कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील उन्होंने की।
कालाजार की ऐसे करें पहचान: वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने बताया कि कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है। कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है। यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है। कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है। यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार हफ्ते से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही मरीज को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है। यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है। बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते हैं। कालाजार के लक्षणों के दिखने पर रोगी को तुरंत किसी नजदीकी अस्पताला या पीएचसी भेजा जाना चाहिए। सभी पीएचसी में कालाजार की जांच मुफ्त में की जाती है। साथ ही इसका इलाज एक दिन में ही सिंगल डोज एंबीसम द्वारा जिले के सदर अस्पताल में बिल्कुल मुफ्त है।

बांका जिले में टेलीमेडिसीन सेवा का ड्राई रन आज 

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-इसे लेकर एएनएम और डॉक्टरों की टीम का किया गया गठन
-शहर समेत जिले के सभी प्रखंडों में भी टीम का किया गया गठन
बांका, 17 फरवरी-
जिले में ई-संजीवनी ओपीडी के तहत टेलीमेडिसीन सेवा का आगाज जल्द होने जा रहा है। इसके तहत अब घर बैठे मरीजों का न केवल इलाज होगा, बल्कि उन्हें घर पर दवा भी उपलब्ध करा दी जाएगी। जिले में इसे लेकर आज ड्राईरन किया जाएगा। ड्राईरन को लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि टेलीमेडिसीन सेवा का ड्राईरन शुक्रवार को होगा। बांका शहर समेत जिले के सभी प्रखंड में टेलीमेडिसीन टीम का गठन कर दिया गया है। ड्राईरन के दौरान टीमें अपनी-अपनी तैनाती वाले अस्पताल में मौजूद रहेंगी। इसके लिए डॉक्टर और एएनएम की तैनाती की गयी है। डॉक्टर ऑनलाइन तरीके से मरीज से रूबरू होंगे। मरीज की डॉक्टर से बात कराने से लेकर जांच रिपोर्ट तक दिखाने की जिम्मेदारी एएनएम की होगी। मरीज की जांच रिपोर्ट व उसके द्वारा बताई गई परेशानी व लक्षण के आधार पर डॉक्टर मरीज को दवा लिखेंगे।
ग्रीन चैनल के जरिये मरीजों के घर तक पहुंचेगी दवाः टेलीमेडिसीन सेवा के तहत मरीजों के लिए 37 प्रकार की दवा उपलब्ध कराई गई है। डॉक्टर के दवा लिखे जाने के बाद ग्रीन चैनल के जरिये मरीजों के घर तक निःशुल्क दवा पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा एचआईवी, हेपेटाइटिस व सिफलिस व गर्भ की जांच से लेकर कोरोना का टीका भी ग्रीन चैनल के जरिये दिया जाएगा। ई-संजीवनी के जरिये सभी ओपीडी दिवस के दिन पूर्व में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा टेलीमेडिसीन सेवा दी जाएगी। इसे लेकर एएनएम व चिकित्सकों को ट्रेनिंग तक दे दी गई है। दवा पहुंचाने की जिम्मेदारी कूरियर की होगी। दवा बच जाने पर उसे वापस भी कूरियर ही करेगा। इसे लेकर कूरियर को प्रतिदिन 100 रुपये का भुगतान भी किया जाएगा।
मरीजों को अस्पताल का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर: टेलीमेडिसीन की स्वास्थ्य सुविधा लेने के लिए मरीजों को अपने नजदीकी चयनित स्वास्थ्य संस्थान पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद वहां तैनात एएनएम स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल के माध्यम के टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा की सुविधा दिलाएंगी। डॉक्टर के चिकित्सा परामर्श के अनुसार एएनएम मरीजों को दवाई समेत अन्य चिकित्सा सेवा सुनिश्चित कराएंगी। यानी अब इलाज कराने के लिए मरीजों को अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि सुविधाजनक तरीके से पूरी तरह मुफ्त ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा।
दूर-दराज के इलाके के लोगों को लिए वरदान साबित होगी यह सेवाः दुर्गम इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सेवा लेने में होने वाली परेशानियों को दूर करने में टेलीमेडिसीन सेवा वरदान साबित होगी। दुर्गम इलाके के मरीजों को आने-जाने के लिए काफी दूरी का सफर समेत अन्य परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और समुचित इलाज के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। बांका जिले का काफी क्षेत्र जिला मुख्यालय से दूर है या फिर स्थानीय प्रखंड मुख्यालय से भी अच्छी-खासी दूरी पर है। उन क्षेत्रों के मरीजों को इसका काफी लाभ होगा।

सारी तैयारी पूरी, जिले में टेली मेडिसीन सेवा का ड्राई रन आज

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-विडियो कॉल के जरिये डॉक्टर जानेंगे मरीजों का हाल, देखेंगे जांच रिपोर्ट
-भागलपुर शहर समेत जिले के सभी प्रखंडों में टीम का किया गया है गठन
भागलपुर, 17 फरवरी-
जिले में ई-संजीवनी ओपीडी के तहत टेलीमेडिसीन सेवा का आगाज जल्द होने जा रहा है। इसे लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके तहत अब घर बैठे मरीजों का न केवल इलाज होगा, बल्कि उन्हें घर पर दवा भी उपलब्ध करा दी जाएगी। जिले में इसे लेकर आज ड्राई रन किया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि टेलीमेडिसीन सेवा का ड्राई रन शुक्रवार को होगा। भागलपुर शहर समेत जिले के सभी प्रखंड में टेली मेडिसीन टीम का गठन कर दिया गया है। ड्राई रन के दौरान टीमें अपनी-अपनी तैनाती वाले अस्पताल में मौजूद रहेंगी। इसके लिए 76 डॉक्टर तो करीब 400 एएनएम की तैनाती की गयी है। डॉक्टर ऑनलाइन तरीके से मरीज से रूबरू होंगे। मरीज की डॉक्टर से बात कराने से लेकर जांच रिपोर्ट तक दिखाने की जिम्मेदारी एएनएम की होगी। मरीज की जांच रिपोर्ट व उसके द्वारा बताई गई परेशानी व लक्षण के आधार पर डॉक्टर मरीज को दवा लिखेंगे।
मरीजों को 37 तरह की दवा मिलेगीः टेलीमेडिसीन सेवा के तहत मरीजों के लिए 37 प्रकार की दवा उपलब्ध कराई गई है। डॉक्टर के दवा लिखे जाने के बाद ग्रीन चैनल के जरिये मरीजों के घर तक निःशुल्क दवा पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा एचआईवी, हेपेटाइटिस व सिफलिस व गर्भ की जांच से लेकर कोरोना का टीका भी ग्रीन चैनल के जरिये दिया जाएगा। सिविल सर्जन ने बताया कि ई-संजीवनी के जरिये सभी ओपीडी दिवस के दिन पूर्व में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा टेलीमेडिसीन सेवा दी जाएगी। इसे लेकर एएनएम व चिकित्सकों को ट्रेनिंग तक दे दी गई है।
मरीजों को अस्पताल का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर: टेलीमेडिसीन की स्वास्थ्य सुविधा लेने के लिए मरीजों को अपने नजदीकी चयनित स्वास्थ्य संस्थान पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद वहां तैनात एएनएम स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल के माध्यम के टेलीमेडिसीन स्वास्थ्य सेवा की सुविधा दिलाएंगी। डॉक्टर के चिकित्सा परामर्श के अनुसार एएनएम मरीजों को दवाई समेत अन्य चिकित्सा सेवा सुनिश्चित कराएंगी। यानी अब इलाज कराने के लिए मरीजों को अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि सुविधाजनक तरीके से पूरी तरह मुफ्त ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा। दुर्गम इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सेवा लेने में होने वाली परेशानियों को दूर करने में टेलीमेडिसीन सेवा वरदान साबित होगी। दुर्गम इलाके के मरीजों को आने-जाने के लिए काफी दूरी का सफर समेत अन्य परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और समुचित इलाज के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी।

आशा कार्यकर्ता के सहयोग से 10 वर्षीय बच्चे ने फाइलेरिया को दी मात 

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– आशा कार्यकर्ता की पहल और बीमारी की शुरुआती दौर में ही पहचान होने के कारण मिली सफलता
– परबत्ता सीएचसी के कुल्हाड़िया गाँव की आशा कार्यकर्ता रीता कुमारी के प्रयास से स्वस्थ्य हुआ किशोर
खगड़िया, 16 फरवरी
जिले में फाइलेरिया और कालाजार उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए परबत्ता सीएचसी अंतर्गत कुल्हाड़िया पंचायत के कुल्हाड़िया गाँव (वार्ड संख्या – 2) में संचालित स्वास्थ्य उप केंद्र की आशा कार्यकर्ता रीता कुमारी अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर हैं। वह अपने पोषक क्षेत्र में ना सिर्फ घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया और कालाजार से बचाव के लिए जागरूक कर रही बल्कि, जरूरतमंदों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराने में मदद कर रही हैं। आशा की इस सकारात्मक पहल का परिणाम यह है कि इसी क्षेत्र का एक 10 वर्षीय बच्चा फाइलेरिया जैसी बीमारी को मात देने के सफल रहा। यह सब आशा कार्यकर्ता के  प्रयास और बीमारी की शुरुआती दौर में ही पहचान होने से संभव हुआ। पीड़ित बच्चा इसी गाँव के निवासी अमरजीत कुमार का पुत्र पियुष कुमार है । जो आज सामान्य बच्चों की तरह स्वस्थ है।
– फाइलेरिया से बचाव के लिए दवाई सेवन कराने के दौरान मिला बच्चा, कराया समुचित इलाज :
आशा कार्यकर्ता रीता कुमारी ने बताया, बीते वर्ष 20 सितम्बर से जिले के साथ-साथ मेरे प्रखंड में फाइलेरिया से बचाव के लिए एमडीए अभियान की शुरुआत हुई थी। जिसके बाद अन्य आशा कार्यकर्ता की तरह मैं भी अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को दवाई के सेवन के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ खुद के सामने में लोगों को दवाई का सेवन भी कराती थी। इसी दौरान मुझे अमरजीत कुमार और रुक्मिणी देवी का 10 वर्षीय पुत्र पियुष कुमार मिला। उसे देखने से मुझे लगा कि यह फाइलेरिया से पीड़ित है। जिसके बाद मैंने स्थानीय सीएचसी को सूचना दी। फिर अगले दिन केयर इंडिया के श्रवण कुमार के साथ पुनः पीड़ित बच्चे के घर जाकर उसके स्वास्थ्य का अवलोकन किया। इसके बाद स्थानीय सीएचसी में जाँच करने के बाद फाइलेरिया संक्रमित होने की बात सामने आई। इसके बाद मैंने बच्चे को अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा का सेवन कराया। साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में समुचित इलाज करवाया जिससे आज वह स्वस्थ्य है। हालाँकि, अब भी होम विजिट कर बच्चे के  स्वास्थ्य का अवलोकन करना जारी है।
– आशा कार्यकर्ता के सकारात्मक प्रयास और शुरुआती दौर में ही पहचान होने से फाइलेरिया को मात देने में सफल रहा बच्चा :
केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती एवं परबत्ता सीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक दीपक कुमार ने बताया, आशा कार्यकर्ता के सकारात्मक प्रयास और शुरुआती दौर में बीमारी की पहचान होने से पीड़ित बच्चा फाइलेरिया जैसी बीमारी को मात देने में सफल रहा। इसलिए, मैं तमाम लोगों से अपील करता हूँ कि लक्षण महसूस होने पर लापरवाही नहीं, बल्कि शुरुआती दौर में ही समय पर इलाज शुरू करें। क्योंकि, समय पर इलाज शुरू होने से बीमारी को आसानी के साथ मात देना संभव है।
– आशा कार्यकर्ता के  प्रयास से स्वस्थ हुआ मेरा बेटा :
पीड़ित बच्चे के पिता अमरजीत कुमार एवं माता रुक्मिणी देवी ने बताया, आशा कार्यकर्ता के सकारात्मक प्रयास से ही मेरा बेटा स्वस्थ हुआ। आशा दीदी ने ना सिर्फ मुझे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई बल्कि, घर से लेकर अस्पताल तक इलाज के दौरान साथ में खड़ी भी रही। इस कार्य के लिए मेरा पूरा परिवार आशा दीदी का आभारी है।

वार्ड सभा में  कोविड वैक्सीनेशन को लेकर  किया जा रहा जागरूक व  योग्य लाभार्थियों को दी जा रही वैक्सीन 

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– पंचायतों में वार्ड स्तर पर आयोजित हो रही वार्ड सभा, शामिल हो रही है स्वास्थ्य टीम, टेलीमेडिसीन की भी दी जा रही जानकारी
– पहले, दूसरे और प्रीकाॅशनरी डोज लेने वाले लाभार्थियों को किया जा रहा जागरूक
लखीसराय, 16 फरवरी-
जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर लेकर स्वास्थ्य काफी गंभीर है । जरूरत के अनुसार हर जरूरी फैसले भी लिए जा रहे हैं। मिशन, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों के तीनों डोज (पहले, दूसरे और प्रीकाॅशनरी) का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो और जिले में वैक्सीन से वंचित लोगों की संख्या शून्य हो। जिसे सार्थक रूप देने के लिए पंचायतों में वार्ड स्तर पर वार्ड क्रियान्वयन समिति का गठन कर लोगों को सरकार द्वारा पंचायत स्तर पर जनहित में चलाई जा रही तमाम योजनाओं की पारदर्शिता के साथ जानकारी उपलब्ध करायी जा रही है।  इस वार्ड सभा के दौरान भी लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक किया जा रहा है।  वार्ड सभा में  स्वास्थ्य टीम में शामिल एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी और स्वास्थ्य विभाग के सहयोगी संगठन के प्रतिनिधियों द्वारा लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक किया जा रहा है। साथ ही ऑन द स्पॉट योग्य लाभार्थियों को वैक्सीन भी दी जा रही है। ताकि सामुदायिक स्तर पर वैक्सीनेशन का संदेश पहुँच सके । जिससे अफवाहों से बाहर आकरअधिकाधिक लोग वैक्सीनेशन करा सकें।
– शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने के लिए पंचायतीराज के तमाम जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य व्यक्ति का भी सहयोग जरूरी है। इसी उद्देश्य से वार्ड सभा के दौरान मेडिकल टीम द्वारा लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक किया जा रहा है। ताकि जनप्रतिनिधियों का सहयोग मिल सके और सामुदायिक स्तर पर लोग जागरूक हो सकें। वहीं, उन्होंने बताया, इस दौरान मौके पर ही योग्य लाभार्थियों को चिह्नित कर वैक्सीनेट भी किया जा रहा है।
– टेलीमेडिसीन सेवा की भी उपलब्ध कराई जा रही है जानकारी :
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, वार्ड सभा के दौरान कोविड वैक्सीनेशन के साथ-साथ आरोग्य दिवस पर आयोजित होने वाली टेलीमेडिसीन सेवा की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। जिसके दौरान लोगों को यह जानकारी दी जा रही कि आरोग्य दिवस के अवसर सभी स्वास्थ्य उप केंद्र और ऑगनबाड़ी केंद्रों पर टेलीमेडिसीन सेवा के तहत ऑनलाइन मरीजों की स्वास्थ्य जाँच की जाएगी। जिसमें जरूरतमंद व्यक्ति शामिल होकर इस सेवा का लाभ ले सकते हैं।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

कोरोना टीकाकरण में सभी वर्ग के लोग ले रहे हैं रुचि

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-,स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता कार्यक्रम का हो रहा है असर
-टीकाकरण के 13 महीने के सफर में जिले की शानदार उपलब्धि
बांका, 16 फरवरी-
जिले में कोरोना टीकाकरण के सफर के 13 महीने पूरे हो चुके हैं। 16 जनवरी 2021 से शुरू हुआ कोरोना टीकाकरण लगातार सफल होता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता कार्यक्रम की वजह से काफी संख्या में जिले के लोग अब तक टीकाकरण करवा चुके हैं। 80 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने कोरोना टीका की पहली डोज ले रखी है। जागरूकता कार्यक्रम का असर इतना व्यापक हुआ कि लोग अब अपने मन से टीका लेने के लिए सामने आ रहे हैं। लोगों के मन में जो भ्रांतियां थीं, वह अब खत्म हो चुकी है। जिले के अधिक से अधिक लोगों के टीका लेने की ही वजह से कोरोना की तीसरी लहर का असर व्यापक नहीं हुआ। अब जिले में लगभग तीसरी लहर खत्म हो चुकी है।
पहली ही नहीं, बल्कि लक्षित आबादी के 84 प्रतिशत से अधिक लोग कोरोना टीका की दूसरी डोज भी ले चुके हैं। जागरूकता का ही असर है कि जब किशोरों का टीकाकरण शुरू हुआ तो उसकी भी गति काफी तेज रही। अबतक लगभग 60 प्रतिशत किशोर कोरोना का टीका ले चुके हैं। समय पूरा होने के बाद दूसरी डोज लेने के लिए भी लोग समय से आगे आ रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रीकॉशन डोज यानी की तीसरी की शुरुआत हुई। लगभग 80 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रीकॉशन डोज भी ले ली है। इसी तरह लगभग 50 प्रतिशत फ्रंटलाइन वर्करों ने प्रीकॉशन ले रखी है। साथ ही 35 सौ से अधिक बीमारों और बुजुर्गों ने भी प्रीकॉशन डोज ले ली है। साफ है कि जिले के लोग कोरोना का टीका लेने में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य विभाग का जागरूकता कार्यक्रम है।
लोगों को चिह्नित कर दिया जा रहा टीकाः शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना टीकाकरण लगातार चल रहा है। 15 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण लगातार चल रहा है। हालांकि अब तो लोग खुद ही टीका लेने के लिए सामने आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जागरूकता कार्यक्रम भी चल रहा है। जिन लोगों ने अबतक एक भी डोज नहीं ली है, उन्हें चिह्नित कर टीकाकरण केंद्रों तक लाया जा रहा है। साथ ही जिनलोगों ने पहली डोज ले ली है, उन्हें दूसरी डोज समय पर दिया जा रहा है। 15 से 17 साल के किशोर समय से आकर अपना टीका ले ले रहे हैं। प्रीकॉशन डोज लेने के लिए भी लोग ठीकठाक संख्या में आ रहे हैं।
कोरोना की गाइडलाइन का करें पालनः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर भी अब लगभग शांत पड़ चुकी है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाना चाहिए और सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए। एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करना चाहिए और भीड़भाड़ से बचना चाहिए। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई करनी चाहिए।

जीविका दीदी टीबी मरीजों की पहचान कर इलाज के लिए करेंगी प्रेरित

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-जीविका दीदियों को टीबी की पहचान को लेकर लक्षण की दी गई जानकारी
-हबीबपुर में केएचपीटी के सहयोग से प्रशिक्षण का किया गया आयोजन
भागलपुर, 16 फरवरी-
हबीबपुर के सीएलएफ ऑफिस में पर्सपेक्टिव बिल्डिंग वर्कशॉप के तहत जीविका एवं स्वयं सहायता समूह की दीदियों को टीबी बीमारी का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रोमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की गाइडलाइन का पालन कराते हुए कराया। इस दौरान दीदियों को टीबी बीमारी की पहचान को लेकर उसके लक्षण के बारे में बताया गया, ताकि वह क्षेत्र में टीबी मरीजों की पहचान कर उसे इलाज के लिए प्रेरित कर सकें। अगर किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण मिले तो तत्काल क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दिया गया।
केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान दीदियों को बताया गया कि अगर आपके स्वयं सहायता समूह या पड़ोस में किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक जागरूकता से ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। जीविका दीदियां अपने स्वयं सहायता समूह के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी जागरूक करेंगी तो हम समाज से टीबी बीमारी को खत्म कर सकते हैं। मौके पर आराधना मिश्रा, अभिषेक, फैयाज खान, सुमित और कृष्णा कुमारी भी मौजूद थी।
ज्यादातर मामले घनी आबादी वाले इलाके में : मौके पर डीटीओ डॉ. दीनानाथ ने जीविका दीदियों को बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चल रहा है। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे  और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। डॉ. दीनानाथ ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा।
पौष्टिक भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

जीविका दीदी टीबी मरीजों की पहचान कर इलाज के लिए करेंगी प्रेरित

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-जीविका दीदियों को टीबी की पहचान को लेकर लक्षण की दी गई जानकारी
-हबीबपुर में केएचपीटी के सहयोग से प्रशिक्षण का किया गया आयोजन
भागलपुर, 14 फरवरी-
हबीबपुर के सीएलएफ ऑफिस में पर्सपेक्टिव बिल्डिंग वर्कशॉप के तहत जीविका एवं स्वयं सहायता समूह की दीदियों को टीबी बीमारी का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रोमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की गाइडलाइन का पालन कराते हुए कराया। इस दौरान दीदियों को टीबी बीमारी की पहचान को लेकर उसके लक्षण के बारे में बताया गया, ताकि वह क्षेत्र में टीबी मरीजों की पहचान कर उसे इलाज के लिए प्रेरित कर सकें। अगर किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण मिले तो तत्काल क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दिया गया।
केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान दीदियों को बताया गया कि अगर आपके स्वयं सहायता समूह या पड़ोस में किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक जागरूकता से ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। जीविका दीदियां अपने स्वयं सहायता समूह के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी जागरूक करेंगी तो हम समाज से टीबी बीमारी को खत्म कर सकते हैं। मौके पर आराधना मिश्रा, अभिषेक, फैयाज खान, सुमित और कृष्णा कुमारी भी मौजूद थी।
ज्यादातर मामले घनी आबादी वाले इलाके में : मौके पर डीटीओ डॉ. दीनानाथ ने जीविका दीदियों को बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चल रहा है। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे  और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। डॉ. दीनानाथ ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा।
पौष्टिक भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

पीएम मोदी पहुंचे करोल बाग के संत रविदास विश्राम धाम मंदिर, महिलाओं संग कीर्तन में बजाया मंजीरा

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आज यानि 16 फरवरी को संत रविदास जयंती है। विधानसभा चुनाव के बीच दलित वौटबैंक के लिए आज का दिन नेताओं के लिए काफी ज्यादा खास माना जा रहा है। बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के करोल बाग में गुरु रविदास मंदिर के दर्शन करने पहुंचे जहां उन्हें संत रविदास की मूर्ति भेंट की गई। संत रविदास जंयती के मौके पर पूजा-अर्चना करने के बाद पीएम मोदी ने लोगों के साथ बैठकर मंजीरा भी बजाया।

बता दें कि, पीएम मोदी रविदास मंदिर में दर्शन करने के बाद दोपहर 12 बजे पंजाब के पठानकोट में रैली करेंगे फिर यूपी में दोपहर 3.50 बजे यूपी के सीतापुर में जनसभा को संबोधित करेंगे। वहीं आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल जालंधर में रविदास मंदिर में दर्शन कर रोड शो करेंगे।