लैंगिक असामानता, माहवारी स्वच्छता और महिला हिंसा पर प्रतिभागियों ने की चर्चा 

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सहयोगी और साहस संस्था की साझेदारी में हुआ तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
प्रतिभागियों को कार्यशाला में मिली माहवारी से जुड़ी भ्रांतियों व मिथकों पर जानकारी
घर और समाज के पुरुषों को भी महिलाओं के समस्याओं पर जागरूक करने पर बल
पटना, 10 फरवरी:
समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव और हिंसा के प्रति समुदाय में जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है. इसके लिए किशोरियों व महिलाओं के साथ विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है. जिला के दानापुर तथा बिहटा प्रखंड के विभिन्न गांवों में उमड़ते सौ करोड़ अभियान के तहत अलग अलग गतिविधियों में बड़ी संख्या में किशोरियां व महिलाएं हिस्सा ले रहीं हैं. उमड़ते सौ करोड़ अभियान एक अन्तर्राष्ट्रीय अभियान है जो विश्व के दो सौ से अधिक देशों में जेंडर आधारित भेदभाव व हिंसा के विरुद्ध एक सशक्त आवाज है. यह अभियान सभी प्रकार की हिंसा को समाप्त करने तथा समानता को बढ़ावा देने का प्रयास है.  बिहार में सहयोगी नामक संस्था द्वारा वर्ष 2016 से इस अभियान को दिशा मिल रही है. इसके तहत विभिन्न नेटवर्क संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों, महिलाओं, किशोर-किशोरियों, छात्रों के साथ बैठक कर लैंगिक हिंसा के प्रति जागरूक किया जा रहा है. संस्था घरेलु हिंसा को समाप्त करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर रही है.
तीन दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन:
इस अभिायान के तहत सहयोगी संस्था और साहस संस्था की साझेदारी में लैंगिक असामानता पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है. ऑनलाइन कार्यशाला में दो सौ से अधिक प्रतिभागियों एवं प्रशिक्षुओं ने भाग लिया. इस दौरान जेंडर, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी गई, साथ ही प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों को साझा किया. सहयोगी की प्रोग्राम डायरेक्टर रजनी ने कहा कि कोरोना महामारी के तीसरे लहर के कारण आॅनलाइन कार्यशाला का आयोजन ​किया गया है. उन्होंने बताया कार्यशाला के पहले दिन जेंडर असमानता विषय पर किशोरियों ने अपने विचार रखें और कहा कि उन्हें अपने घर के पुरुषों की तरह आजादी नहीं मिल पाती है. घर के साथ साथ खेती बारी के काम में भी बेटियां हाथ बंटाती हैं फिर भी उनके काम को महत्व नहीं दिया जाता है. किशोरियों ने बताया घर के बाहर भी उन्हें कई परेशानियों का सामना करना होता है. लोगों का ताना, छेड़छाड़ तथा लैंगिक असमानता का सामना करना पड़ता है.
सोशल मीडिया पर होता है भेदभाव:
कार्यशाला के दौरान किशोरियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाओं के मजाक उड़ाये जाते हैं और गालियों से भी संबोधित किया जाता है. प्रतिभागी निशु ने कहा कि माहवारी के दौरान धार्मिक प्रतिबंधों का सामना महिलाएं करती हैं और कक्षा में साफ सफाई की जिम्मेदारी लडकियों की होती है. जबकि लड़कों पर ऐसे कामों की जिम्मेदारी नहीं दी जाती है.
प्रतिभागियों ने कहा  पुरुष केवल घर के बाहर का ही काम करना चाहते हैं, जबकि उन्हें भी बच्चों की देखभाल और घरेलु काम में सहयोग करना चाहिए. यद्यपि कुछ महिलाओं ने यह स्वीकार किया कि कुछ किशोर, पुरुष घर के कार्यों में सहयोग करते हैं. माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के बारे में बात करते हुए प्रतिभागी शिवानी ने कहा कि माहवारी को लेकर कोई जागरूकता संबंधी बातचीत नहीं की जाती है. समाज में आज भी इसके प्रति भ्रांतियां व गलत धारणाएं हैं. इसे दूर किये जाने की जरूरत है.  अन्य प्रतिभागियों ने बताया कि परेशानी या तकलीफ में हम दोस्तों से या माँ-बहन से बात कर लेते हैं, गाना गाते हैं, छत पर घूम लेते हैं तो मन हल्का हो जाता है। साहस संस्था की मोना ने कहा कठिनाई, भय अथवा चिंता के समाधान लिए सकारात्मक पहल करना चाहिए, उपयुक्त व्यक्ति से सलाह-मशवरा कर उसका निदान करना चाहिए।  ऑनलाइन कार्यशाला में सहयोगी संस्था से उन्नति, लाजवंती, उषा, बिंदु, निर्मला, रूबी, मुन्नी, रिंकी, मनोज, धर्मेन्द्र, नितीश ने भाग लिया।

बांका पीएचसी शत प्रतिशत टीकाकरण की ओर

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-टीकाकरण को लेकर लगातार चलाया जा रहा अभियान
-किशोरों समेत सभी वर्ग के लोगों का हो रहा टीकाकरण
बांका, 11 फरवरी
कोरोना टीकाकरण को लेकर बांका पीएचसी की स्थिति काफी बेहतर है। लगातार चल रहे टीकाकरण और जागरूकता अभियान की वजह से बांका पीएचसी अब शत प्रतिशत टीकाकरण की ओर बढ़ रहा है। अभी तक यहां 2,56,457 टीके की डोज लोगों को लग चुकी है। इसमें 1,41,777 पहली तो 1,31,913 लोगों को दूसरी डोज लग चुकी है। इसमें 15 से 17 साल के किशोर भी शामिल हैं। इसके अलावा प्रीकॉशन डोज भी यहां के लोगों को दी जा रही है। अब तक 75 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों को प्रीकॉशन डोज लग चुकी है तो फ्रंटलाइन वर्करों और बीमारों और बुजुर्गों को भी कोरोना टीका की प्रीकॉशन डोज देने का सिलसिला जारी है।
प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण बहुत ही जरूरी है। जब से टीकाकरण की शुरुआत हुई है तब से लगातार लोगों को कोरोना का टीका दिया जा रहा है। बीच में किशोरों को टीका देने का भी काम शुरू किया गया। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्करों के साथ-साथ बीमारों और बुजुर्गों को भी प्रीकॉशन डोज दी जा रही है। अधिक से अधिक लोगों को कोरोना का टीका लग सके, इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। जब तक एक-एक व्यक्ति का टीकाकरण नहीं हो जाएगा, तब तक हमलोग दम नहीं लेंगे।
कोरोना की जांच भी जारीः डॉ. चौधरी ने बताया कि कोरोना टीकाकरण के साथ-साथ जांच भी लगातार चल रही है। कोरोना का संक्रमण नहीं हो, इसके लिए लोगों की कोरोना जांच बहुत ही जरूरी है। पीएचसी में प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की एंटीजन और आरटीपीसीआर पद्धति से जांच की जा रही है। लोगों को लगातार सलाह दी जा रही है कि अगर कोरोना का लक्षण दिखाई दे तो जांच कराएं। इसे लेकर हमलोग लगातार काम कर रहे हैं। अब तीसरी लहर में कोरोना के मामले कम होने लगे हैं। इसके बावजूद जांच अभियान को थमने नहीं दे रहे हैं।
कोरोना की गाइडलाइन का पालन जरूरीः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना के केस कम हो रहे हैं, यह बात सही है लेकिन इसके बावजूद लोगों को गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते रहने से दोबारा इसके उभरने की संभावना कम हो जाती है। इसलिए घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ से बचते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करें। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें। ऐसा करते रहने से आप तो संक्रमित होने से बचे रहेंगे ही, साथ ही आपके संपर्क में रहने वाले भी कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे। इसलिए कोरोना को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं करें।

टीबी मरीजों और उसकी देखभाल करने वालों की समस्याओं का हुआ समाधान

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-नवगछिया पीएचसी में टीबी केयर और सपोर्ट ग्रुप की हुई बैठक
-बैठक में टीबी मरीजों को इससे उबरने के बताए गए तौर-तरीके
भागलपुर, 11 फरवरी
नवगछिया पीएचसी में शुक्रवार को टीबी विभाग के केयर और सपोर्ट ग्रुप की बैठक हुई। बैठक का आयोजन केएचपीटी के सहयोग से किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. भारती सिन्हा ने की। इसमें 9 मरीज, 6 देखभाल करने वाले और 1 टीबी चैंपियन ने भाग लिया। इसमें टीबी रोगियों और देखभाल करने वालों की परेशानियों को दूर किया गया। उन्हें कैसे इस बीमारी से उबरना है, इसके बारे में बताया गया। समाज में टीबी रोगियों के प्रति जो भ्रांतियां हैं, उससे कैसे निपटा जाए इसके बारे में बताया गया। मौके पर प्रतीक जोयस, संदीप कुमार, जमशेद, सुजीत, व सुमित आदि उपस्थित थे।
डॉ. भारती सिन्हा ने बताया कि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। लोगों को जागरूक कर ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। डॉ. सिन्हा ने बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः डॉ. सिन्हा ने बताया कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते  और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसीलिए  टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

*पद्मश्री योगी एरन ने किया  ‘बस्तापैक लाइब्रेरी’ का उद्घाटन*

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*चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर ने साथ मिलकर  ‘बस्तापैक लाइब्रेरी’ (उत्तराखंड की पहली स्ट्रीट लाइब्रेरी) की स्थापना की*
*ऋषिकेश।* बसंत पंचमी के के अवसर पर चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर ने साथ मिलकर  ‘बस्तापैक लाइब्रेरी’ (उत्तराखंड की पहली स्ट्रीट लाइब्रेरी) की स्थापना की, जिसका उद्घाटन उत्तराखंड  के रत्न पद्मश्री योगी एरन ने किया। यह लाइब्रेरी तपोवन के सार्वजनिक घाट में लगाई गई है। इस मौके पर योगी एरन ने टीम की प्रसंशा करते हुए कहा, “हमें ऐसे ही युवाओं की ज़रूरत है जो सोसाइटी के बारे में सोचे। चलत मुसाफ़िर की फाउंडर मोनिका मरांडी और प्रज्ञा श्रीवास्तव,  बस्ता पैक के फाउंडर गिरिजांश गोपालन और प्रदीप भट्ट की ये मुहिम कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। ” घाट पर आए पर्यटकों ने लाइब्रेरी को देखते हुए टीम से ये राय साझा की, “स्ट्रीट लाइब्रेरी एक बेहतरीन मुहिम है और ऐसी मुहिमों को लगातार होना चाहिए। ऐसी मुहिम से लोगों को पढ़ने की इच्छा जागेगी जो पैसों के अभाव में पढ़ नहीं पाते हैं।”
बस्तापैक एडवेंचर के संस्थापक गिरिजांश के मुताबिक, “ये तो बस शुरुआत है, हम उत्तराखंड के रिमोट एरिया तक किताबें पहुंचाना चाह रहे हैं। गांवों-गलियों तक अलग-अलग किस्म की किताबें पहुंचे, ये हमारा उद्देश्य है।”
चलत मुसाफ़िर की संस्थापक मोनिका मरांडी के मुताबिक, “ज्ञान बांटने से बढ़ता है, आप शहरों से अपनी किताबें हमारे पास भेजिए, हम उसे उन बच्चों और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाएंगे जो सिर्फ विकल्पों के अभाव में किताबों से वंचित रह जाते हैं।”

*पद्मभूषण अनिल जोशी जी ने किया  ऋषिकेश में ‘स्मृति वृक्ष’  कैंपेन का उद्घाटन*

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*ऋषिकेश।* “किसी अपने का गुजर जाना, बहुत सारे भाव लाता है, हम उस दिवंगत आत्मा को बहुत प्यार करते हैं और किसी तरह उनकी उपस्थिति को अपने साथ महसूस करना चाहते हैं। क्या हो अगर हम अपने प्रियजनों की याद को किसी अनुपम तरीके से सहेज लें और पर्यावरण की बेहतरी में भी योगदान करें!”
इस परिकल्पना का समाधान प्रदान करने के लिए, चलत मुसाफिर और बस्तापैक एडवेंचर की टीमों ने उत्तराखंड के ऋषिकेश में ‘स्मृति वृक्ष’  कैंपेन शुरू किया है।  उत्तराखंड स्थित बस्तापैक कैंपसाइट पर स्मृति वृक्ष कैंपेन की शुरुआत, जिसका उद्घाटन पद्मभूषण अनिल जोशी जी ने किया। इस मुहिम के तहत चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर की टीम लोगों को ये अपील कर रही है, “आपके जो भी प्रियजन जो अब शारीरिक तौर पर इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन आप उनकी स्मृतियों को सहेज कर रखना चाहते हैं, उनके नाम का एक पौधा बस्तापैक कैंपसाइट पर आकर लगाएं। हमारी टीम उनके नाम का एक प्लेट लगाएगी ताकि पौधा बढ़ने के साथ-साथ उसकी पहचान आपके प्रियजन के नाम से रहे।”
अनिल जोशी जी ने अपना पहला पेड़ माँ प्रकृति को समर्पित किया क्योंकि हमारे लिए प्रकृति भी मर रही है। इस कार्यक्रम पर अपनी राय साझा करते हुए कहा, “पहाड़ों पर टूरिज्म पर बिज़नेस तो बहुत लोग करते हैं पर हमें एक रिसपॉन्सिबल टूरिज्म इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है। हमें प्रकृति की ओर लौटना  चाहिए, जो ज्यादातर लोग करना भूल जाते हैं। चलत मुसाफ़िर और बस्ता पैक की टीम इसे बखूबी आगे बढ़ा रही है। इस इसके लिए में दोनों टीमों की तारीफ करना चाहूंगा कि जो यहां उत्तराखंड के लोग नहीं कर पा रहे हैं, वो काम ये दोनों टीमें कर रही है।”
स्मृति वृक्ष एक समावेशी अवधारणा है जो लोगों को पर्यावरण में रचनात्मक रूप से योगदान करने देती है। यह किसी प्रियजन की याद में एक पेड़ लगाने का अवसर प्रदान करता है जो इस दुनिया में शारीरिक रूप से आपके साथ नहीं है। अनिल जोशी ने देश के युवाओं से अपील की है कि वे जिम्मेदार पर्यटन के मार्ग पर चलें और जितना हो सके पेड़ लगाएं।
चलत मुसाफिर के संस्थापक के अनुसार, “हम सॉल्यूशन-ओरिंटेड टीम हैं, हम इस अभियान को उत्तराखंड के बाहर भी ले जाना चाहते हैं। जल्द ही आप अन्य राज्यों में भी ‘स्मृति वृक्ष’ वृक्षारोपण अभियान देखेंगे।”
इस कार्यक्रम में पद्मश्री योगी एरोन भी मौजूद थे। उन्होंने अपनी दिवंगत बेटी तनु को एक पौधा समर्पित किया है। वहां मौजूद पर्यटकों ने भी इस पहल में योगदान देने के लिए अपने स्लॉट बुक कर लिए हैं। उनकी ओर से चलत मुसाफिर और बस्तापैक एडवेंचर की एकीकृत टीम पौधारोपण करेगी। टीम हर पौधे को एक समर्पित नेम प्लेट भी लगाती है।

गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच को बढ़ावा देने एवं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को ट्रैक करने को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का विस्तार

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– अभियान के तहत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी की गर्भवती महिलाओं की करायी जाएगी तीन अतिरिक्त प्रसव पूर्व जांच
– प्रसव के 45 दिन बाद गृह भ्रमण कर जच्चा-बच्चा के स्वस्थ्य होने की सूचना देने वाली आशा कार्यकर्ता को मिलेगी 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि
मुंगेर, 10 फरवरी-
प्रसव के दौरान होने वाली मातृ मृत्यु को रोकने के लिए और गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) को बढ़ावा देने एवं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी ( एचआरपी) को ट्रैक करने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) का विस्तार 9 फरवरी  से आगे किया गया है। इसके अंतर्गत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी  श्रेणी में आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं की तीन अतिरिक्त प्रसव पूर्व जांच करायी जानी है। इसके लिए आने-जाने वाली गर्भवती महिलाओं और संबंधित आशा कार्यकर्ता को 100प्रति विजिट की दर से 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस दौरान सुरक्षित प्रसव की पूरी जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ता, एएनएम, संबंधित पीएचसी और सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की होगी।
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि इससे संबंधित राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार  के द्वारा एक पत्र प्राप्त हुआ है। जिसके अनुसार 9 फरवरी से आगे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को विस्तारित किया किया गया है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत सुरक्षित संस्थागत प्रसव के 45 वें दिन आशा कार्यकर्ता के द्वारा गृह भ्रमण कर जच्चा-बच्चा के स्वस्थ्य होने की सूचना एएनएम के माध्यम से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को देना है। इसके लिए प्रत्येक आशा कार्यकर्ता को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के परिदृश्य को देखते हुए पहले की भांति ही प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान  का आयोजन किया जाना है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रसव पूर्व जांच के दौरान जटिल प्रसव एचआरपी वाली महिलाओं की ट्रैकिंग की जानी है। ताकि मातृ मृत्यु दर में कमी लायी जा सके।

स्टेट टीम पहुँची रेफरल अस्पताल गोगरी, कालाजार और फाइलेरिया की  स्थिति की ली जानकारी 

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– मुसकीपुर गाँव पहुँच मरीजों से  की मुलाकात, स्वास्थ्य सुविधाओं की ली जानकारी
– कालाजार और फाइलेरिया से संबंधित एक-एक बिंदु की विस्तार से ली जानकारी
खगड़िया, 10 फरवरी-
गुरुवार को पटना से आई स्टेट टीम गोगरी रेफरल अस्पताल पहुँची। जहाँ केयर इंडिया के कालाजार और फाइलेरिया की स्टेट प्रोग्राम मैनेजर प्रीति कुमारी के नेतृत्व में कालाजार और फाइलेरिया से संबंधित विस्तृत जानकारी ली गई। इस दौरान कालाजार और फाइलेरिया उन्मूलन को जिले में चल रही तमाम गतिविधियों, मरीजों की संख्या, मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधा समेत अन्य तमाम जानकारियाँ ली गई। इसके बाद दोनों बीमारियों की रोकथाम के लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित कराने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।  इस दौरान कालाजार और फाइलेरिया से संबंधित संधारित एक-एक पंजी का अवलोकन किया गया और एक-एक बिंदु की जानकारी ली गई। जिसके बाद आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इस दौरान अस्पताल की अन्य सुविधाओं की भी जानकारी ली गयी। इस मौके पर अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ चंद्र प्रकाश, भीडीसीओ शहनवाज आलम, केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती समेत अन्य पदाधिकारी और कर्मी मौजूद थे।
– मरीजों से मुलाकात कर मिल रही स्वास्थ्य सुविधा का ली जानकारी :
अस्पताल निरीक्षण के बाद टीम मुसकीपुर गाँव पहुँची। जहाँ घर-घर जाकर कालाजार और फाइलेरिया से पीड़ित मरीजों से मुलाकात की। इस दौरान मरीजों का स्वास्थ्य अवलोकन किया गया और सरकारी स्तर से मिल रही स्वास्थ्य सुविधा की भी जानकारी ली गई। मरीजों को इस बीमारी से बचाव के लिए नियमित रूप से दवाई का सेवन, चिकित्सा परामर्श का पालन करने समेत अन्य जानकारियाँ दी गई। साथ ही किसी प्रकार की शारीरिक पीड़ा होने पर तुरंत स्थानीय अस्पताल से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।
– कालाजार और फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर चलाई जा रही तमाम योजना :
गोगरी रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ चंद्र प्रकाश एवं केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती ने संयुक्त रूप से बताया, कालाजार और फाइलेरिया उन्मूलन को सरकार द्वारा तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिसके माध्यम से घर-घर कालाजार मरीज खोज अभियान चलाकर मरीजों को चिह्नित किया जाता है। इस दौरान संक्रमित मिलने वालों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, एमडीए अभियान के तहत फाइलेरिया जैसी बीमारी से बचाव के लिए लोगों को लोगों जरूरी दवाई का सेवन कराया जाता है। इसके अलावा अन्य तमाम गतिविधि का आयोजन कर लोगों को दोनों बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक किया जाता है। इस दौरान आवश्यक चिकित्सा परामर्श भी दी जाती है। साथ ही अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी दी जाती है। ताकि जरूरत पड़ने मरीज सुविधाजनक तरीके से सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले सके।

सेकेंड और प्रीकाॅशनरी डोज  को लेकर मोबाइल फोन से लाभार्थियों का हो रहा फॉलोअप 

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– एएनएम, डेटा ऑपरेटर आदि के सहयोग से वैक्सीनेशन की उपलब्ध कराई जा रही जानकारी
– शिविर स्थल की जानकारी के साथ वैक्सीनेशन को किया जा रहा प्रेरित
लखीसराय, 10 फरवरी-
लखीसराय पीएचसी में जल्द से जल्द से शत-प्रतिशत लोगों का कोविड वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने और इस घातक महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोगों को सुरक्षित करने के लिए नियमित तौर पर वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। लगातार शिविर आयोजित कर हर आयु वर्ग के प्रत्येक लाभार्थियों को वैक्सीनेट किया जा रहा है। अभियान को गति देने एवं लाभार्थियों को हर हाल में निर्धारित समय पर दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज सुनिश्चित कराने को लेकर  मोबाइल फोन से भी फॉलोअप किया जा रहा है। जिसके माध्यम से पीएचसी के एएनएम, डेटा ऑपरेटर समेत अन्य कर्मियों द्वारा एक-एक लाभार्थियों को ना सिर्फ दूसरा डोज लेने का ड्यू डेट बताया जा रहा बल्कि, वैक्सीन के लिए शिविर स्थल भी बताया जा रहा है। निर्धारित समय पर दूसरा डोज लेने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
– ट्रेनी एएनएम का भी मिल रहा है सहयोग :
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, इस कार्य में लखीसराय एएनएम स्कूल की ट्रेनी एएनएम का भी सहयोग मिल रहा है। जो खुद लाभार्थियों को फोन कर सेकेंड डोज लेने के लिए निर्धारित समयावधि पूरी होने की जानकारी उपलब्ध करा रहीं और निर्धारित समय पर ही वैक्सीनेशन कराने को लेकर प्रेरित कर रही हैं। साथ ही साथ इस घातक महामारी से बचाव के लिए प्रोटोकॉल के साथ वैक्सीनेशन कराने एवं वैक्सीनेशन के बाद गाइडलाइन का पालन भी जारी रखने के लिए भी प्रेरित कर रही हैं।
– एक-एक लाभार्थी को फोन कर वैक्सीनेशन  को किया जा रहा प्रेरित :
पीएचसी प्रबंधन द्वारा कोविड वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज ले चुके सभी लाभार्थियों के  मोबाइल नंबर और पूरे डिटेल्स के साथ सूची तैयार की गई है। जिसमें लाभार्थी का नाम, मोबाइल नंबर समेत अन्य डिटेल्स अंकित हैं। जिसके माध्यम से स्वास्थ्य कर्मी एक-एक लाभार्थी को फोन कर दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा होने की जानकारी उपलब्ध करा रहे और निर्धारित समय पर ही दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस दौरान 15 से 18 आयु वर्ग के सभी युवाओं (किशोर-किशोरियों) को भी प्रेरित किया जा रहा है।
– लाभार्थियों से अन्य लोगों को भी जागरूक करने की अपील की जा रही:
फोन के माध्यम से सेकेंड डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा करने वाले लाभार्थियों से स्वास्थ्य कर्मी द्वारा अन्य लोगों को भी वैक्सीनेशन को लेकर प्रेरित करने की अपील की जा रही है। जिसके दौरान परिवार और समाज के ऐसे व्यक्ति को वैक्सीनेशन कराने के लिए प्रेरित करने की अपील की जा रही है, जो अबतक किसी भी कारणवश वैक्सीनेशन नहीं करा पाएं हैं। ताकि एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहें और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

चौथम सीएचसी में प्रसूति महिलाओं को मिलने वाली सुविधाएं और होगी सुदृढ़, मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा

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– सीएचसी प्रभारी ने गुणवत्ता यकीन समिति की बैठक में कर्मियों को दिए निर्देश
–  बैठक में स्वास्थ्य विभाग और केयर इंडिया के कर्मी हुए शामिल
खगड़िया, 09 फरवरी
जिले के चौथम सीएचसी में प्रसूति महिलाओं को मिलने वाली सुविधाएं और सुदृढ़ होगी। साथ ही सीएचसी स्तर पर लोगों को मिलने वाली अन्य तमाम सुविधाओं में भी सकारात्मक बदलाव होगा। इसको लेकर मंगलवार की शाम सीएचसी परिसर में गुणवत्ता यकीन समिति की एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें पीएचसी के सभी चिकित्सक, पदाधिकारी, कर्मी के साथ-साथ केयर इंडिया के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ अनिल कुमार एवं संचालन प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक विजय कुमार ने किया। बैठक के दौरान प्रसव कक्ष में उपलब्ध सुविधाओं को विस्तार कर सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया। इसे सुनिश्चित करने को लेकर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने एक-एक कर्मियों से फीडबैक ली। जिसके बाद आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार समेत लेबर इंचार्ज और सीएचसी के सभी पदाधिकारी और कर्मी मौजूद थे।
– प्रसूति महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को  सरकार द्वारा चलाई जा रही है विभिन्न योजना :
सीएचसी प्रभारी डाॅ अनिल कुमार ने बताया सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के लिए आने वाली प्रसूति महिलाओं को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराने को लेकर सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। ताकि सरकारी स्वास्थ्य में प्रसूति को सुविधाजनक तरीके से समुचित स्वास्थ्य सेवा मिल सके और लाभार्थी संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता दें। इससे ना सिर्फ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को भी बढ़ावा मिलेगा। जिससे मातृ-शिशु मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित होगा। क्योंकि, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा के हर मानकों के पालन के साथ प्रशिक्षित एएनएम द्वारा चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रसव करायी जाती है।
– संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं को जागरूक करने पर भी दिया गया बल :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, बैठक के दौरान प्रसव कक्ष की सुविधा को और बेहतर बनाने, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने समेत अन्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया। जिसमें मौजूद कर्मियों को गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करने एवं प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाली प्रसूति महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने समेत अन्य आवश्यक निर्देश दिए गए। साथ ही अन्य सुविधाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जिसके बाद आवश्यक निर्देश दिए गए।

बेगूसराय जिले के 66% युवाओं ने कोविड से बचाव के लिए ली वैक्सीन 

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– शेष बचे युवाओं का जल्द से जल्द वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर नियमित वैक्सीनेशन अभियान जारी
– पदाधिकारियों और कर्मियों की सकारात्मक उम्मीद और युवाओं का सहयोग लाया रंग
बेगूसराय, 09 फरवरी-
कोविड से बचाव के लिए जिले के युवाओं में भी जागरूकता देखी जा रही है। जिसका प्रमाण यह है कि इसी वर्ष बीते 03 जनवरी से पूरे राज्य के साथ इस जिले में भी शुरू हुए युवाओं के वैक्सीनेशन के बाद महज दो माह में जिले के 65.78 % युवाओं ने (15 से 18 वर्ष) इस घातक महामारी से बचाव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर वैक्सीन ली। जो सामुदायिक स्तर पर आई सकारात्मक बदलाव और जिले के तमाम पदाधिकारियों व कर्मियों के साथ-साथ युवाओं सहित आमजनों के सहयोग का  परिणाम है। वहीं, शेष बचे युवाओं का भी जल्द से जल्द वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिले में नियमित तौर पर लगातार वैक्सीनेशन अभियान जारी है। जिसके माध्यम से जगह-जगह शिविर आयोजित कर सभी योग्य लाभार्थियों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी जा रही है। इसके अलावा जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर अन्य जरूरी प्रयास भी  जारी है।
– पूरी टीम की मेहनत और युवाओं के सकारात्मक सहयोग का परिणाम :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ गोपाल मिश्रा ने बताया, यह परिणाम और इतने कम समय में इतनी बड़ी सफलता जिले के तमाम पदाधिकारियों और कर्मियों की मेहनत और जिले के युवाओं तथा आमजनों के सकारात्मक सहयोग से संभव हुआ। इस सफलता में जहाँ जिले के सभी चिकित्सक, एएनएम, डेटा ऑपरेटर, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी मुश्किल भरे दौर में भी अपनी जिम्मेदारी की डगर पर डिगे रहे हैं। वहीं, जिले वासियों का भी सकारात्मक सहयोग मिलता रहा है। वहीं, उन्होंने कहा, इसी मेहनत और सहयोग की बदौलत जल्द ही शत-प्रतिशत  वैक्सीनेशन का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। वहीं, उन्होंने वैक्सीन से वंचित युवाओं से जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराने और प्रोटोकॉल का पालन जारी रखने का अपील की है।
– सुविधाजनक व्यवस्था से मिली सफलता : यह सफलता बेहतर स्वास्थ्य सिस्टम का भी जीता-जागता उदाहरण है। दरअसल, एक भी युवा को वैक्सीनेशन के दौरान किसी भी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इस बात का हमेशा ख्याल रखा गया। युवाओं के लिए ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। जल्द से जल्द अधिकाधिक युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर स्कूल में वैक्सीनेशन साइट बनाया गया, ऐसी ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई सुविधाजनक व्यवस्थाओं का यह बेहतर परिणाम है।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।