कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमित हुए 1250 से अधिक मरीज हुए स्वस्थ्य

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-स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और बेहतर व्यवस्था से स्वस्थ्य हुए मरीज
-जिले में नियमित तौर पर चल रहा कोरोना टीकाकरण और जांच अभियान
बांका, 09 फरवरी-
कोरोना की तीसरे लहर के दौरान संक्रमित हुए 1250 से अधिक मरीज स्वस्थ्य हो चुके हैं, जो जिलेवासियों के लिए बेहद राहत और सुखद खबर है। हालांकि इस घातक महामारी से बचाव के लिए अभी और सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और लोगों की जागरूकता से भले ही संक्रमण में कमी आई हो, लेकिन संक्रमण का दौर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए अभी और टीकाकरण के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर लोगों को सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। वहीं, इस घातक महामारी के प्रभाव को जड़ से मिटाने के लिए स्वास्थ्य विभाग भी प्रयासरत है और जिले नियमित तौर पर कोरोना टीकाकरण व जांच अभियान चल रहा है। इसके माध्यम से लोगों का सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण और जांच की जा रही है।
सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि जिले के 1250 मरीज कोरोना जैसी घातक महामारी को मात देते स्वस्थ्य हो चुके हैं, यह पूरे जिलेवासियों के लिए बेहद सुखद है। यह सकारात्मक परिणाम जिले के सभी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ आमजनों के सकारात्मक सहयोग से संभव हुआ है। किन्तु, अभी और सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। इसलिए, जो लोग  टीका ले भी चुके हैं, वह भी गाइडलाइन का पालन जारी रखें। साथ ही मैं तमाम जिलेवासियों से अपील करता हूं कि जो लोग अबतक टीका नहीं ले पाएं हैं, वह जल्द से जल्द टीकाकरण कराएं और इस घातक महामारी से खुद के साथ पूरे परिवार और समाज को भी सुरक्षित करें।
पांच हजार से अधिक लोगों की प्रतिदिन हो रही जांच: ऐसे ही 1250 मरीज स्वस्थ्य नहीं हो गये। इसके लिए शुरू से ही स्वास्थ्य विभाग काफी सजग और संकल्पित रहा। वहीं, आमजनों का सकारात्मक सहयोग भी रहा। इसके अलावा जिले में प्रतिदिन पांच हजार से अधिक लोगों की कोरोना जांच हो रही है। नियमित तौर पर टीकाकरण शिविर आयोजित कर लोगों को टीकाकृत किया जा रहा है। जांच एवं टीकाकरण के दौरान लोगों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक व्यवस्था की गई है। साथ ही एक-एक व्यक्ति को चिह्नित कर टीका दिया जा रहा है। अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
हर आयु वर्ग के लोगों का किया जा रहा टीकाकरण: जिले में नियमित तौर पर टीकाकरण शिविर आयोजित कर हर आयु वर्ग के लोगों को टीकाकृत किया जा रहा है। साथ ही युवाओं के टीकाकरण पर भी बल दिया जा रहा है, ताकि एक भी व्यक्ति टीका से छूटे नहीं और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके। 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के साथ-साथ किशोरों को भी टीका दिया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्करों को प्रीकॉशन डोज भी कोरोना टीका की दी जा रही है।

कायाकल्प की टीम ने इस्माइलपुर और गोपालपुर पीएचसी का किया निरीक्षण

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-अस्पताल के अंदर और परिसर की सफाई व्यवस्था को देखा और जानकारी ली
-दोनों ही अस्पतालों की सफाई व्यवस्था से कायाकल्प की टीम संतुष्ट दिखी
भागलपुर, 9 फरवरी।
पटना से आई कायाकल्प की टीम ने बुधवार को इस्माइलपुर और गोपालपुर पीएचसी का निरीक्षण किया। टीम में पटना से आए डॉ. पंकज मिश्रा और डॉ. लहिरी थे। उनके साथ डीएचएस के डॉ. प्रशांत और केयर इंडिया के डीटीओ फैसिलिटी डॉ. राजेश मिश्रा थे। सभी ने दोनों अस्पतालों की सुविधाओं को देखा। खासकर अस्पताल की सफाई व्यवस्था की टीम ने बारीकी से निरीक्षण किया। मालूम हो कि कायाकल्प की जिले की टीम के निरीक्षण में दोनों ही अस्पताल खरा उतरा है। इसके बाद अब राज्य की टीम निरीक्षण कर रही है। इसमें भी खरा उतरने पर अस्पताल को पुरस्कार के तौर पर मोटी राशि मिलेगी।
टीम ने सबसे पहले इस्माइलपुर पीएचसी का निरीक्षण किया। यहां पर प्रभारी डॉ. राकेश रंजन और अस्पताल मैनेजर शैलेंद्र से अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सारी सुविधाओं की जानकारी ली। पटना से आए डॉ. पंकज मिश्रा ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था संतोषजनक थी। प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थियेटर साफ-सुथरा था। हालांकि सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है, लेकिन व्यवस्था फिर भी ठीक-ठाक थी। वहीं प्रभारी डॉ. राकेज रंजन ने बताया कि अस्पताल में सफाई पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को यहां से किसी तरह का संक्रमण नहीं हो, इसका हमलोग ख्याल रखते हैं। उम्मीद है कि कायाकल्प की टीम यहां की व्यवस्था से संतुष्ट हुई होगी और अस्पताल को बेहतर अंक मिलेगा।
इस्माइलपुर में निरीक्षण करने के बाद कायाकल्प की टीम गोपालपुर पीएचसी गई। वहां पर भी सभी लोगों ने अस्पताल के अंदर से लेकर परिसर तक की सफाई व्यवस्था को परखा। पटना से आए डॉ. लहिरी ने बताया कि यहां व्यवस्था अच्छी थी। खासकर सफाई का बेहतर तरीके से ध्यान रखा जाता है। न सिर्फ अस्पताल के अंदर, बल्कि परिसर भी साफ-सुथरा था। प्रसव कक्ष, ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर में गंदगी नहीं दिखी। प्रभारी डॉ. सुधांशु ने बताया कि हमलोगों ने ठीक से तैयारी की थी। अब कायाकल्प की टीम कितनी संतुष्ट हुई, यह अंक मिलने के बाद पता चलेगा। उन्होंने बताया कि सिर्फ कायाकल्प के निरीक्षण के दौरान ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी अस्पताल में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। मरीजों का स्वच्छ माहौल में यहां पर इलाज किया जाता है।
टॉप करने पर 17 लाख की मिलती है राशिः कायाकल्प की टीम के निरीक्षण में राज्य भर में टॉप करने पर अस्पताल को 17 लाख रुपये की राशि मिलेगी । दूसरे और तीसरे स्थान वाले को भी राशि मिलती है। उस राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाने पर खर्च किया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि अस्पताल के कर्मियों में उत्साह बढ़ाने के लिए खर्च किया जाता है। दोनों ही अस्पताल पहले जिला स्तरीय टीम के निरीक्षण में खरा उतर चुका है। अब अगर राज्य स्तरीय कायाकल्प टीम के निरीक्षण में खरा उतरता है तो पुरस्कार का हकदार हो जाएगा।

जिले से कालाजार हो रहा खत्म, पांचवां प्रखंड जगदीशपुर भी हुआ मुक्त

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-नवगछिया, बिहपुर, नाथनगर और गोराडीह प्रखंड था कालाजार से मुक्त
-अभी जिले के सात प्रखंडों में 13 मरीज, सभी का चल रहा है इलाज
भागलपुर, 8 फरवरी
जिला में कालाजार को लेकर लगातार अच्छी खबर आ रही है। हाल ही में जिले का पांचवां प्रखंड जगदीशपुर भी कालाजार से मुक्त हो गया। अभी तक नवगछिया, बिहपुर, नाथनगर और गोराडीह ही कालाजार से मुक्त हो पाया था। अब इस कड़ी में जगदीशपुर का भी नाम जुड़ गया। हालांकि अगस्त-सितंबर में जगदीशपुर में कालाजार का मरीज मिला था, लेकिन वह दूसरे जिले का रहने वाला था। इसके बावजूद जगदीशपुर में सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव कराया गया है। कालाजार को लेकर स्वास्थ्य विभाग कोई रिस्क नहीं लेना चाहता है, इस वजह से जगदीशपुर में भी छिड़काव कराया गया।
जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. कुंदन भाई पटेल कहते हैं कि कालाजार उन्मूलन को लेकर हमलोग लगातार प्रयासरत हैं। लगातार कालाजार प्रभावित प्रखंडों में सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव किया जाता है। जिले के पांच प्रखंड अब कालाजार से मुक्त हो गए हैं। अब 11 प्रखंड कालाजार प्रभावित हैं। वहां भी अभियान चलाकर कालाजार को खत्म किया जाएगा। इसे लेकर लगातार प्रयास हो रहे हैं।  स्वास्थ्य विभाग की टीम छिड़काव कर रही है। स्वास्थ्यकर्मी गांवों में नली, नालों व घरों की दीवार पर सिंथेटिक पाइराथाइराइड का छिड़काव समय-समय पर कर रहे हैं। पहले दीवार की छह फीट की ऊंचाई तक छिड़काव किया जाता था, अब पूरी दीवार में छिड़काव कराया जा रहा है।
  घर के पास जलजमाव नहीं होने दें: डॉ पटेल ने लोगों से अपील की कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें। यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें। सोते समय मच्छरदानी लगाएं। साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनाने व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाने के लिए भी कहा है। कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने के लिए कहा गया है।
कालाजार की ऐसे करें पहचान: कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है। कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है। यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है। कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है। यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार हफ्ते से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही मरीज को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है। यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है। बाल व त्वचा के परत भी सूख का झड़ते हैं। कालाजार के लक्षणों के दिखने पर रोगी को तुरंत किसी नजदीकी अस्पताला या पीएचसी भेजा जाना चाहिए।

सुरक्षित तरीके से स्कूल संचालन से बच्चों की शिक्षा व मानसिक स्वास्थ्य की होगी भरपाई 

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• घर और विद्यालय में बच्चों से नियमित संवाद करने की है जरुरत- डॉ. एन.के.सिन्हा
• मास्क, हाथों की स्वच्छता, दूरी, टीकाकरण और संवेदनशीलता जरुरी
• 60 प्लस लोगों के लिए प्रिकॉशन डोज जरुरी- डॉ. राजेश वर्मा
• विश्व में कोरोना संक्रमण के प्रभाव से 6 करोड़ से अधिक शिक्षक मानसिक रूप से प्रभावित
पटना/ 8 फ़रवरी-
यूनिसेफ द्वारा आयोजित “आस्क द डॉक्टर” वेबिनार श्रृंखला में आज मंगलवार को शिक्षक/शिक्षिकाओं के कोरोनाकाल में मानसिक स्वास्थ्य के महत्त्व पर वेबिनार में चर्चा की गयी.
वेबिनार में राज्य के बिहार एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल से जुड़े सरकारी एवं निजी स्कूलों के शिक्षकों-शिक्षिकाओं ने वेबिनार में भाग लिया ..
यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान के तत्वावधान में आयोजित वेबिनार में प्रतिभागियों ने कोरोनाकाल में मानसिक समस्याओं का जिक्र किया और चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों से अपने सवाल के जवाब पाये.
घर और विद्यालय में बच्चों पर नजर रखने की है जरुरत- डॉ. एन.के.सिन्हा
वेबिनार को संबोधित करते हुए राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एन.के.सिन्हा ने बताया कि संक्रमण के दौरान घरों में लगातार रहने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है. बच्चे ज्यादा तनावग्रस्त और चिढ़चिढ़े हो गए हैं और शिक्षकों एवं अभिभावकों को बच्चों से संवाद बनाये रखने की जरुरत है. शिक्षकों को अपने छात्रों के सामने खुद एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने की जरुरत है जिससे बच्चे नकारात्मक सोच से बच सकें. एक सवाल के जवाब में डॉ. सिन्हा ने बताया कि अभी 15 से 17 वर्ष के आयुवर्ग के किशोरों को कोवेक्सिन की डोज दी जा रही है और ऐसा इसलिए है क्यूंकि बाकी टीकों पर अभी बच्चों पर प्रभाव को लेकर अभी शोध जारी है. अभी 15 से 17 आयुवर्ग के करीब 40 फीसदी बच्चों का टीकाकरण होना बाकी है.
60 प्लस लोगों के लिए प्रिकॉशन डोज जरुरी- डॉ. राजेश वर्मा
वेबिनार को संबोधित करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए प्रिकॉशन डोज लेना बहुत जरुरी है. खासकर ऐसे लोग जो किसी गंभीर रोग से ग्रसित हैं वे अपने चिकित्सक की सलाह लेकर बूस्टर डोज का टीका जरुर लगवाएं. हर स्कूल के शिक्षक ये सुनिश्चित करें की उनके संस्थान के 15 वर्ष से ऊपर के सभी विद्यार्थी पूरी तरह से टीकाकृत हों. साथ ही स्कूल के सभी शिक्षक और स्टाफ भी टीका ले चुके हों.
स्कूल प्रबंधन को कोविड अनुरूप आचरण अपने संसथान में सुनिश्चित करने की जरुरत है. सुबह प्रार्थना के समय स्कूल प्रबंधन को बच्चों को सही तरीके से मास्क पहनने एवं स्वच्छता के पालन के लिए प्रेरित करें. वंचित समूहों के बच्चों जिनका किसी भी कारण अभी तक टीकाकरण नहीं हुआ उन्हें जल्द से जल्द सबके सहयोग से टीकाकृत करने की जरुरत है. स्कूलों में मास्क, हाथों की स्वच्छता, दूरी, टीकाकरण और संवेदनशीलता पर ध्यान देना जरुरी है.
शिक्षक हैं बच्चे और उनके अभिभावक के बीच के सेतु- डॉ. राजेश कुमार
डॉ. राजेश कुमार, विभागाध्यक्ष, मानसिक स्वास्थ्य विभाग, इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान ने वेबिनार में अपने संबोधन में बताया कि अनजाने डर और घबराहट महसूस करना मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अनुकूल नहीं है. कोरोना महामारी एक अदृश्य शत्रु है जिससे हिम्मत रखकर ही लड़ा जा सकता है. मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से निपटने के लिए हर स्तर पर सामूहिक प्रयास की जरुरत है. पूरे विश्व के 6 करोड़ से अधिक शिक्षक कोरोनाकाल में मानसिक रूप से किसी न किसी तरह प्रभावित हुए हैं.
निपुण गुप्ता, यूनिसेफ़ की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए  बताया कि पूरे विश्व में कोरोना संक्रमण – लाक्डाउन से 1.60 करोड़ बच्चों की पढाई रुक गयी थी और यह उनके शिक्षा में बहुत बड़ा अवरोधक साबित हुआ है. इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं पूरे स्वस्थ जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और सरकार को इसपर तत्काल ध्यान देने की जरुरत है.
इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान की क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट डॉ. प्रिया कुमार, यूनिसेफ के डॉ. सिद्धार्थ रेड्डी एवं एनी ने वेबिनार में अपनी बातें रखी और प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देकर उन्हें संतुष्ट किया. वेबिनार का संचालन निपुण गुप्ता, संचार विशेषग्य, यूनिसेफ एवं डॉ. सरिता वर्मा, हेल्थ ऑफिसर, यूनिसेफ ने किया. यूनिसेफ की शिक्षा विशेषग्य डॉ. पुष्पा जोशी ने प्रतिभागियों एवं चिकित्सकों तथा विशेषज्ञों को धन्यवाद ज्ञापित किया

कालाजार उन्मूलन को लेकर जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों की हुई संयुक्त बैठक 

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– जिले के अलौली पीएचसी में आयोजित बैठक में शामिल हुए सूरजनगर गाँव के जनप्रतिनिधि और गणमान्य
– कालाजार के लक्षण, कारण, बचाव एवं उपचार पर की गई विस्तृत चर्चा
खगड़िया, 08 फरवरी-
मंगलवार को जिले के अलौली प्रखंड में कालाजार उन्मूलन को जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों की एक संयुक्त बैठक हुई। जिसमें कालाजार प्रभावित सूरजनगर गाँव के मुखिया, सरपंच, पंसस, वार्ड, पंच समेत अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति के अलावा पीएचसी के पदाधिकारी, कर्मी, आशा कार्यकर्ता और केयर इंडिया के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ मनीष कुमार एवं संचालन डीभीबीडीसीओ डाॅ विजय कुमार ने किया। जिसमें कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही बैठक में मौजूद सभी लोगों से कालाजार से बचाव के लिए अपने स्तर से भी लोगों को जागरूक करने, संभावित मरीजों को जाँच कराने के लिए प्रेरित करने समेत बचाव से संबंधित अन्य पहल में सहयोग करने की अपील की। जिसपर सभी जनप्रतिनिधियों और गणमान्यों ने सकारात्मक आश्वासन देते हुए यथासंभव सहयोग करने की बात कही। बैठक में डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, डीभीबीडीसी बबलू सहनी, भीडीसीओ शहनवाज आलम, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, डीपीओ कृष्ण कुमार भारती, मुखिया पंकज कुमार, सरपंच नीरज सिंह, पंसस माला देवी, वार्ड सदस्य राजकुमार सादा, पंच चंपा देवी, एएनएम रंजना कुमारी आदि मौजूद थे।
– कालाजार से बचाव के लिए जागरूक और लक्षण वाले व्यक्ति को इलाज के लिए प्रेरित करने की  अपील :
डीभीबीडीसीओ डाॅ विजय कुमार ने बताया, बैठक के दौरान मौजूद सभी गणमान्यों को कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। जिसके बाद सभी गणमान्यों से इस बीमारी से बचाव के लिए अपने स्तर से भी लोगों को जागरूक करने एवं संदिग्ध व्यक्ति को इलाज के लिए प्रेरित करने की अपील की गयी। ताकि लक्षण वाले व्यक्ति की समय पर जाँच के साथ आवश्यक इलाज शुरू हो सके और सामुदायिक स्तर पर भी लोगों को इस बीमारी के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी मिल सके। जिससे शुरुआती दौर में ही लोग सजग हो  आवश्यक कदम उठा सकें। सरकारी अस्पतालों में जाँच एवं इलाज की मुफ्त समुचित व्यवस्था उपलब्ध है।
– 03 वर्ष से लेकर सभी आयु वर्ग के लोगों की होगी जाँच :
पीएचसी प्रभारी डॉ मनीष कुमार ने बताया, सूरजनगर गाँव में कालाजार प्रभावित एरिया है। जिसके कारण उस एरिया में लगातार तमाम गतिविधियों का आयोजन कर कालाजार उन्मूलन को लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए उक्त गाँव में केयर इंडिया एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से अभियान चलाकर 03 वर्ष एवं इससे अधिक आयु वर्ग के सभी व्यक्ति की जाँच की  जाएगी। जिसके बाद आवश्यक चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराई जाएगी।
–  कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुककर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।
– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन समाग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक (एस पी) छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य एवं पोषण पर आधारित जिला गुणवत्ता यकीन समिति की बैठक 

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–  बैठक में जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर दिए दिशा-निर्देश
– बैठक में जिला प्रशासन के अधिकारियों के अलावा हेल्थ और आईसीडीएस के अधिकारी व विकास मित्र हुए शामिल
मुंगेर, 8 फरवरी-
सोमवार की देर रात जिलाधिकारी नवीन कुमार की अध्यक्षता में स्वास्थ्य एवं पोषण पर आधारित जिला गुणवत्ता यकीन समिति की बैठक हुई । बैठक में  डीडीसी, डीपीओ (आईसीडीएस), सिविल सर्जन, डीपीएम जिला स्वास्थ्य समिति, एडीएम, सभी एसडीओ,  आईसीडीएस से जुड़े अधिकारी, प्रखण्ड स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ- साथ जिला और प्रखंड स्तर पर कार्यरत डेवलपमेन्ट पार्टनर के प्रतिनिधि और विकास मित्र शामिल थे।
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि समीक्षा बैठक में   ऑब्जर्वेशन, फील्ड विजिट, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) 4 और 5 के आंकड़ों के साथ-साथ कई अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) द्वारा कवर की जानी वाली टीएचआर वितरण सेवाओं की भी जिलाधिकारी के द्वारा समीक्षा की की गई। इस दौरान उन्होंने आईसीडीएस द्वारा फंड, बैंक इशू सहित अन्य विषय पर उठाए गए सवाल का भी उसी समय समाधान किया और समय पर टीएचआर वितरण को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
डीपीएम रजि ने बताया कि  बैठक में जिलाधिकारी ने आईसीडीएस को चेतावनी देते हुए कहा कि हम सभी पांच साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताओं के सही स्वास्थ्य और पोषण के लिए काम करते हैं इसलिए इसमें किसी तरह कि लापरवाही नहीं हो। इसके अलावा उन्होंने पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं, जैसे कायाकल्प स्कोर, लक्ष्य असेसमेंट, फैमिली प्लानिंग,  आईएमआई, कोविड वैक्सीनेशन , एपीएचसी में डॉक्टर और नर्स की उपस्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ सीएचसी, एपीएचसी और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर कंस्ट्रक्शन से जुड़े मुद्दों पर आवश्यक दिशा -निर्देश दिए।

प्रसव पीड़िता की स्वास्थ्य रिपोर्ट उपलब्ध कराने पर आशा कार्यकर्ता को मिलेगी 500 रुपये प्रोत्साहन राशि 

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– जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की एएनसी जाँच आज
– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर सिविल सर्जन को दिए आवश्यक निर्देश
लखीसराय, 08 फरवरी-
बुधवार को जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी, रेफरल एवं अनुमंडलीय व जिला अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर आयोजित कर प्रसव पूर्व (एएनसी) जाँच की जाएगी। जहाँ कोविड गाइडलाइन के साथ गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जाँच और  आवश्यक चिकित्सा परामर्श भी दी जाएगी। जिसमें रहन-सहन, साफ-सफाई, खान-पान, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ समेत अन्य आवश्यक चिकित्सा परामर्श विस्तार पूर्वक दिया जाएगा। ताकि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिल सके और मातृ-शिशु मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित हो सके। इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर राज्य के सभी सिविल सर्जन समेत अन्य चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
– आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगी 500 रुपये प्रोत्साहन राशि :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, गर्भवती महिलाओं की शुरुआती दौर से ही संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता को स्वास्थ्य अवलोकन करना है। प्रसव के 45 वें दिन गृह भ्रमण कर आशा कार्यकर्ता को स्वास्थ्य अवलोकन कर एएनएम के माध्यम से स्थानीय प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को रिपोर्ट उपलब्ध कराना है। ऐसे आशा कार्यकर्ता को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का निर्देश का प्राप्त हुआ। इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बुधवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर आयोजित कर गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व जाँच कराना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
– गर्भवती महिलाओं की होगी समुचित जाँच :
आयोजित शिविर में सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं की समुचित स्वास्थ्य जाँच की जाएगी। जिसमें मेडिकल टीम द्वारा गर्भवती महिलाओं की ब्लड, यूरिन, एचआईवी, ब्लड ग्रुप, बीपी, हार्ट-बिट आदि की भी जाँच की जाएगी। साथ ही प्रसव अवधि के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने के लिए जागरूक किया जाएगा।
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी :
प्रसव अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत जाँच करानी चाहिए। दरअसल, समय पर जाँच कराने से किसी भी प्रकार की परेशानी का शुरुआती दौर में ही पता चल जाता है और पता लगने पर ही उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक माह की नौ तारीख को पीएचसी स्तर पर मुफ्त एएनसी जाँच की व्यवस्था की गई है। ताकि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार की अनावश्यक शारीरिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिल सके । साथ ही सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– यात्रा के दौरान निश्चित रूप से सैनिटाइजर पास में रखें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– मुँह, नाक और ऑख को अनावश्यक छूने से बचें और छूने के पूर्व अच्छी तरह हाथों की सफाई करें।

कुष्ठ रोगियों के मुफ्त इलाज के साथ पेंशन का भी है प्रवाधान

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-जिले के 680 कुष्ठ मरीजों को मिल रही 1500 रुपये प्रति माह पेंशन
-कुष्ठ मरीजों के 52 आश्रितों को भी एक हजार रुपये प्रति माह भुगतान
बांका, 8 फरवरी।
कुष्ठ का न सिर्फ इलाज मुफ्त में किया जाता है, बल्कि इससे विकलांग हुए लोगों को प्रतिमाह पेंशन भी दी जाती है। अभी जिले में अभी 680 ग्रेड -2 के कुष्ठ मरीजों को 1500 रुपये प्रतिमाह की पेंशन दी जा रही है। 52 आश्रितों को 1000 रुपये प्रतिमाह परवरिश योजना के तहत दिया जा रहा है। इस योजना का लाभ और अधिक लाभार्थियों को मिले, इस दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। बाल संरक्षण ईकाई के सहयोग से इस आंकड़े को इस वित्तीय वर्ष में और बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि अभी स्पर्श कुष्ठ जागरूकता पखवाड़ा 13 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान लोगों को कुष्ठ के प्रति जागरूक करने का काम किया जा रहा है। कुष्टरोगियों से भेदभाव करने की जगह उसे अस्पताल ले जाने की शपथ दिलाई जा रही है। उम्मीद करता हूं कि लोग जागरूक हो रहे होंगे और इसका असर भी पड़ेगा। लोग न सिर्फ कुष्ठ रोगियों से भेदभाव बंद करेंगे, बल्कि सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ के प्रति भी उन्हें बताएंगे। समाज में कुष्ठ के प्रति लोगों में जो भ्रांतियां हैं, उसे दूर किया जा रहा है। आमतौर पर लोग कुष्ठ को छुआछूत की बीमारी समझकर इस बीमारी से ग्रसित रोगी से भागने लगते हैं। दूरी बनाने लगते हैं। इसी को लेकर आशा कार्यकर्ता अभी गांवों में जाकर लोगों को बता रही हैं कि कुष्ठ रोगियों से भागे नहीं, उसे सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। सभी सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ रोगियों के लिए मुफ्त में इलाज की व्यवस्था है। इलाज नहीं करवाने पर उससे अन्य लोगों में संक्रमण हो सकता है।
कुष्ठ का पूर्ण इलाज संभवः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कुष्ठ की बीमारी जीवाणु से होती है, जिसका पूर्ण इलाज संभव है। इसकी पहचान बहुत ही आसान है। त्वचा पर किसी प्रकार का दाग या धब्बा, जिसमें दर्द या खुजली नहीं होती है और वह जन्म से नहीं है तो वह कुष्ठ का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। समय से इलाज होने पर यह पूरी तरह से ठीक हो जाता है और वह पहले वाली जिंदगी जी सकता है। एमडीटी का पूरा खुराक नियमानुसार लेने के बाद कुष्ठ पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है। इलाज नहीं कराने पर उस व्यक्ति से कई लोगों में संक्रमण हो सकता है। इसलिए अगर कोई कुष्ठ रोगी दिखे तो उसका तत्काल इलाज करवाएं।
सहायता राशि का भी प्रावधानः अचिकित्सा सहायक मृत्युंजय कुमार सिंह कहते हैं कि कुष्ठ से पीड़ित व्यक्ति अगर विकलांग हो जाता है तो उसे 1500 रुपये प्रति महीने भिक्षाटन निवारण योजना के तहत दिया जाता है। यह राशि तबतक दी जाती है, जब तक वह जीवित रहते हैं। साथ ही अगर कुष्ठ से विकलांग हुए व्यक्ति के आश्रित जिनकी उम्र 18 साल से कम है, उसे भी परवरिश योजना के तहत एक हजार रुपये प्रति महीने दिया जाता है। इसलिए कुष्ठ रोग को छुपाएं नहीं और इसका इलाज करवाएं।

सही समय पर कैंसर की पहचान और उपचार से बच सकती है कैंसर मरीजों की जान

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– क्लोज़ द केयर गैप की थीम पर 4 से 10 फरवरी तक चलाया जा रहा कैंसर जागरूकता अभियान

– लक्षणों की पहचान के लिए कैंसर के विभिन्न प्रकारों की जानकारी जरूरी

मुंगेर, 07 फरवरी-
‘कैंसर जैसी बीमारी भी लाइलाज नहीं है। संतुलित खान-पान और समय रहते यदि इसकी जांच एवं उपचार करा लिया जाए तो लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी ठीक हो सकते हैं।’ उक्त बातें जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के. रंजन ने कही। सोमवार को सदर अस्पताल स्थित कैंसर जागरूकता शिविर में उन्होंने बताया कि पहले के दिनों में यह बीमारी लाइलाज हुआ करती थी, लेकिन आज के समय में कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है। मगर इसके लिए समय पर इसकी पहचान होना बेहद जरूरी है। ताकि, सही समय पर मरीज का इलाज शुरू कर उसकी जान बचाई जा सके। उन्होंने बताया कि कैंसर जैसी भयानक बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके साथ ही राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन भी किया जा रहा है।
सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क जांच शिविर का आयोजन :

जिला गैर संचारी रोग (एनसीडीओ) डॉ. के . रंजन ने बताया कि सदर अस्पताल मुंगेर के साथ-साथ अनुमंडल अस्पताल तारापुर व रेफरल अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में निःशुल्क कैंसर जांच के लिए शिविर का आयोजन किया गया है। साथ ही, सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर भी कैंसर जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया है। इस दौरान यहां आने वाले लोगों की कैंसर की निःशुल्क जांच की जा रही है। इसके साथ ही कुछ सामान्य कैंसर जैसे ब्रेस्ट कैंसर एवं मुंह के कैंसर इत्यादि के संभावित कारणों, लक्षणों एवं उससे बचाव के लिए जरूरी परामर्श भी दिए जाएंगे।
कैंसर से बचाव को सावधानी व सतर्कता जरूरी :
उन्होंने बताया कि इस वर्ष कैंसर जागरूकता अभियान की थीम ‘क्लोज़ द केयर गैप’ रखा गया है। कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचने के लिए सावधानी व सतर्कता जरूरी है। इससे बचाव के लिए इसके विभिन्न कारण और लक्षणों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। धूम्रपान व तम्बाकू का सेवन मुंह कैंसर का प्रमुख कारण है।
कैंसर की मुख्य श्रेणियां
– कार्सिनोमा: ऐसा कैंसर जो कि त्वचा में या उन ऊतकों में उत्पन्न होता है, जो आंतरिक अंगों के स्तर या आवरण बनाते हैं।
– सारकोमा: ऐसा कैंसर जो कि हड्डी, उपास्थि, वसा, मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं या अन्य संयोजी ऊतक या सहायक में शुरू होता है।
– ल्यूकेमिया: कैंसर जो कि रक्त बनाने वाले अस्थि मज्जा जैसे ऊतकों में शुरू होता है और असामान्य रक्त कोशिकाओं की भारी मात्रा में उत्पादन और रक्त में प्रवेश का कारण बनता है।
– लिंफोमा और माएलोमा: ऐसा कैंसर जो कि प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं में शुरू होता है।
– केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के कैंसर: कैंसर जो कि मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के ऊतकों में शुरू होता हैं।
संतुलित खान-पान का सेवन करना अनिवार्य :
डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में भारत में कैंसर मरीजों की संख्या लगभग 25 लाख से ज्यादा है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल रिपोर्ट-2019 के अनुसार हर साल करीब 70 हजार लोगों की मौत कैंसर की वजह से होती है। जिनमें से 80 प्रतिशत मौतें लोगों की उदासीन रवैये के कारण होती है। कैंसर से बचाव के लिए लोगों को संतुलित खान-पान का सेवन करना चाहिए। जिसमें ताजे फल व हरी सब्जियां मुख्य रूप से शामिल हैं। इनमें मौजूद विटामिन व मिनिरल्स कैंसर की सम्भावना को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम और शरीर का सन्तुलित वजन भी कैंसर होने से बचाए रखने में सहायक होता है।
कैंसर के मुख्य लक्षण :
– शरीर के किसी अंग में असामान्य सूजन का होना
– तिल या मस्सों के आकार या रंग में परिवर्तन
– लगातार बुखार या वजन में कमी
– घाव का लंबे समय से नहीं भरना
– चार हफ्ते से अधिक समय तक अकारण दर्द का रहना
– मूत्र विसर्जन में कठिनाई या दर्द का होना
– शौच से रक्त निकलना
– स्तन में सूजन या कड़ापन का होना
– तीन सप्ताह से अधिक लगातार खांसी या आवाज का कर्कश होना
– असामान्य रक्त प्रवाह या मासिक धर्म के बाद भी रक्त का निकलना

खगड़िया जिले में कोविड के साथ-साथ नियमित टीकाकरण पर भी दिया जा रहा जोर

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– गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी
– संस्थागत प्रसव को लेकर भी गर्भवती महिलाओं को किया गया जागरूक

खगड़िया, 07 फरवरी-
जिले में नियमित तौर पर लगातार कोविड वैक्सीनेशन अभियान तो चल ही रहा है। इसके साथ गर्भवती और शिशु के नियमित टीकाकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। ताकि गर्भवती एवं शिशु का ससमय नियमित टीकाकरण भी सुनिश्चित हो सके और बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके। जिसे सार्थक रूप देने के लिए निर्धारित तिथि के अनुसार जिले के विभिन्न ऑगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण अभियान चल रहा है। जिसके माध्यम से कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा सेविका एवं आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से गर्भवती एवं शिशु का नियमित टीकाकरण किया जा रहा है। इस दौरान नियमित टीकाकरण के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को जरूरी सलाह के साथ-साथ गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ के अलावा खान-पान, रहन-सहन समेत सुरक्षित और सामान्य प्रसव को लेकर अन्य आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

– गर्भवती और शिशु के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने एवं शिशु के स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए समय पर नियमित टीकाकरण जरूरी है। इसलिए, कोविड के साथ नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का भी आयोजन कर योग्य लाभार्थी का नियमित टीकाकरण किया जा रहा है। ताकि ससमय पर नियमित टीकाकरण भी सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, नियमित टीकाकरण के दौरान शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के टीके लगाए जाते हैं। गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।

– संस्थागत प्रसव को लेकर भी किया जाता है जागरूक :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन ने बताया, इस दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार वालों को संस्थागत प्रसव को लेकर भी जागरूक किया जाता है। जिसके दौरान यह बताया गया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। योग्य एवं प्रशिक्षित एएनएम द्वारा चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रसव कराया जाता है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को अपनाने के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की जरूरत है।

– सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, इस
स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा केंद्र पर मौजूद गर्भवती महिलाओं को यह भी बताया जाता है कि सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है। सरकार द्वारा जाँच के लिए पीएचसी स्तर पर मुफ्त व्यवस्था की गई। ताकि हर गर्भवती महिला आसानी से जाँच करा सकें। हर माह 09 तारीख को पीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती की जाँच की जाती और चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।