कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमित हुए 1250 से अधिक मरीज हुए स्वस्थ्य
कायाकल्प की टीम ने इस्माइलपुर और गोपालपुर पीएचसी का किया निरीक्षण
जिले से कालाजार हो रहा खत्म, पांचवां प्रखंड जगदीशपुर भी हुआ मुक्त
सुरक्षित तरीके से स्कूल संचालन से बच्चों की शिक्षा व मानसिक स्वास्थ्य की होगी भरपाई
कालाजार उन्मूलन को लेकर जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों की हुई संयुक्त बैठक
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य एवं पोषण पर आधारित जिला गुणवत्ता यकीन समिति की बैठक
प्रसव पीड़िता की स्वास्थ्य रिपोर्ट उपलब्ध कराने पर आशा कार्यकर्ता को मिलेगी 500 रुपये प्रोत्साहन राशि
कुष्ठ रोगियों के मुफ्त इलाज के साथ पेंशन का भी है प्रवाधान
-जिले के 680 कुष्ठ मरीजों को मिल रही 1500 रुपये प्रति माह पेंशन
-कुष्ठ मरीजों के 52 आश्रितों को भी एक हजार रुपये प्रति माह भुगतान
बांका, 8 फरवरी।
कुष्ठ का न सिर्फ इलाज मुफ्त में किया जाता है, बल्कि इससे विकलांग हुए लोगों को प्रतिमाह पेंशन भी दी जाती है। अभी जिले में अभी 680 ग्रेड -2 के कुष्ठ मरीजों को 1500 रुपये प्रतिमाह की पेंशन दी जा रही है। 52 आश्रितों को 1000 रुपये प्रतिमाह परवरिश योजना के तहत दिया जा रहा है। इस योजना का लाभ और अधिक लाभार्थियों को मिले, इस दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। बाल संरक्षण ईकाई के सहयोग से इस आंकड़े को इस वित्तीय वर्ष में और बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि अभी स्पर्श कुष्ठ जागरूकता पखवाड़ा 13 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान लोगों को कुष्ठ के प्रति जागरूक करने का काम किया जा रहा है। कुष्टरोगियों से भेदभाव करने की जगह उसे अस्पताल ले जाने की शपथ दिलाई जा रही है। उम्मीद करता हूं कि लोग जागरूक हो रहे होंगे और इसका असर भी पड़ेगा। लोग न सिर्फ कुष्ठ रोगियों से भेदभाव बंद करेंगे, बल्कि सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ के प्रति भी उन्हें बताएंगे। समाज में कुष्ठ के प्रति लोगों में जो भ्रांतियां हैं, उसे दूर किया जा रहा है। आमतौर पर लोग कुष्ठ को छुआछूत की बीमारी समझकर इस बीमारी से ग्रसित रोगी से भागने लगते हैं। दूरी बनाने लगते हैं। इसी को लेकर आशा कार्यकर्ता अभी गांवों में जाकर लोगों को बता रही हैं कि कुष्ठ रोगियों से भागे नहीं, उसे सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। सभी सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ रोगियों के लिए मुफ्त में इलाज की व्यवस्था है। इलाज नहीं करवाने पर उससे अन्य लोगों में संक्रमण हो सकता है।
कुष्ठ का पूर्ण इलाज संभवः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कुष्ठ की बीमारी जीवाणु से होती है, जिसका पूर्ण इलाज संभव है। इसकी पहचान बहुत ही आसान है। त्वचा पर किसी प्रकार का दाग या धब्बा, जिसमें दर्द या खुजली नहीं होती है और वह जन्म से नहीं है तो वह कुष्ठ का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। समय से इलाज होने पर यह पूरी तरह से ठीक हो जाता है और वह पहले वाली जिंदगी जी सकता है। एमडीटी का पूरा खुराक नियमानुसार लेने के बाद कुष्ठ पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है। इलाज नहीं कराने पर उस व्यक्ति से कई लोगों में संक्रमण हो सकता है। इसलिए अगर कोई कुष्ठ रोगी दिखे तो उसका तत्काल इलाज करवाएं।
सहायता राशि का भी प्रावधानः अचिकित्सा सहायक मृत्युंजय कुमार सिंह कहते हैं कि कुष्ठ से पीड़ित व्यक्ति अगर विकलांग हो जाता है तो उसे 1500 रुपये प्रति महीने भिक्षाटन निवारण योजना के तहत दिया जाता है। यह राशि तबतक दी जाती है, जब तक वह जीवित रहते हैं। साथ ही अगर कुष्ठ से विकलांग हुए व्यक्ति के आश्रित जिनकी उम्र 18 साल से कम है, उसे भी परवरिश योजना के तहत एक हजार रुपये प्रति महीने दिया जाता है। इसलिए कुष्ठ रोग को छुपाएं नहीं और इसका इलाज करवाएं।
सही समय पर कैंसर की पहचान और उपचार से बच सकती है कैंसर मरीजों की जान
– क्लोज़ द केयर गैप की थीम पर 4 से 10 फरवरी तक चलाया जा रहा कैंसर जागरूकता अभियान
– लक्षणों की पहचान के लिए कैंसर के विभिन्न प्रकारों की जानकारी जरूरी
मुंगेर, 07 फरवरी-
‘कैंसर जैसी बीमारी भी लाइलाज नहीं है। संतुलित खान-पान और समय रहते यदि इसकी जांच एवं उपचार करा लिया जाए तो लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी ठीक हो सकते हैं।’ उक्त बातें जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के. रंजन ने कही। सोमवार को सदर अस्पताल स्थित कैंसर जागरूकता शिविर में उन्होंने बताया कि पहले के दिनों में यह बीमारी लाइलाज हुआ करती थी, लेकिन आज के समय में कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है। मगर इसके लिए समय पर इसकी पहचान होना बेहद जरूरी है। ताकि, सही समय पर मरीज का इलाज शुरू कर उसकी जान बचाई जा सके। उन्होंने बताया कि कैंसर जैसी भयानक बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके साथ ही राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन भी किया जा रहा है।
सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क जांच शिविर का आयोजन :
जिला गैर संचारी रोग (एनसीडीओ) डॉ. के . रंजन ने बताया कि सदर अस्पताल मुंगेर के साथ-साथ अनुमंडल अस्पताल तारापुर व रेफरल अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में निःशुल्क कैंसर जांच के लिए शिविर का आयोजन किया गया है। साथ ही, सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर भी कैंसर जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया है। इस दौरान यहां आने वाले लोगों की कैंसर की निःशुल्क जांच की जा रही है। इसके साथ ही कुछ सामान्य कैंसर जैसे ब्रेस्ट कैंसर एवं मुंह के कैंसर इत्यादि के संभावित कारणों, लक्षणों एवं उससे बचाव के लिए जरूरी परामर्श भी दिए जाएंगे।
कैंसर से बचाव को सावधानी व सतर्कता जरूरी :
उन्होंने बताया कि इस वर्ष कैंसर जागरूकता अभियान की थीम ‘क्लोज़ द केयर गैप’ रखा गया है। कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचने के लिए सावधानी व सतर्कता जरूरी है। इससे बचाव के लिए इसके विभिन्न कारण और लक्षणों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। धूम्रपान व तम्बाकू का सेवन मुंह कैंसर का प्रमुख कारण है।
कैंसर की मुख्य श्रेणियां
– कार्सिनोमा: ऐसा कैंसर जो कि त्वचा में या उन ऊतकों में उत्पन्न होता है, जो आंतरिक अंगों के स्तर या आवरण बनाते हैं।
– सारकोमा: ऐसा कैंसर जो कि हड्डी, उपास्थि, वसा, मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं या अन्य संयोजी ऊतक या सहायक में शुरू होता है।
– ल्यूकेमिया: कैंसर जो कि रक्त बनाने वाले अस्थि मज्जा जैसे ऊतकों में शुरू होता है और असामान्य रक्त कोशिकाओं की भारी मात्रा में उत्पादन और रक्त में प्रवेश का कारण बनता है।
– लिंफोमा और माएलोमा: ऐसा कैंसर जो कि प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं में शुरू होता है।
– केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के कैंसर: कैंसर जो कि मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के ऊतकों में शुरू होता हैं।
संतुलित खान-पान का सेवन करना अनिवार्य :
डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में भारत में कैंसर मरीजों की संख्या लगभग 25 लाख से ज्यादा है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल रिपोर्ट-2019 के अनुसार हर साल करीब 70 हजार लोगों की मौत कैंसर की वजह से होती है। जिनमें से 80 प्रतिशत मौतें लोगों की उदासीन रवैये के कारण होती है। कैंसर से बचाव के लिए लोगों को संतुलित खान-पान का सेवन करना चाहिए। जिसमें ताजे फल व हरी सब्जियां मुख्य रूप से शामिल हैं। इनमें मौजूद विटामिन व मिनिरल्स कैंसर की सम्भावना को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम और शरीर का सन्तुलित वजन भी कैंसर होने से बचाए रखने में सहायक होता है।
कैंसर के मुख्य लक्षण :
– शरीर के किसी अंग में असामान्य सूजन का होना
– तिल या मस्सों के आकार या रंग में परिवर्तन
– लगातार बुखार या वजन में कमी
– घाव का लंबे समय से नहीं भरना
– चार हफ्ते से अधिक समय तक अकारण दर्द का रहना
– मूत्र विसर्जन में कठिनाई या दर्द का होना
– शौच से रक्त निकलना
– स्तन में सूजन या कड़ापन का होना
– तीन सप्ताह से अधिक लगातार खांसी या आवाज का कर्कश होना
– असामान्य रक्त प्रवाह या मासिक धर्म के बाद भी रक्त का निकलना
खगड़िया जिले में कोविड के साथ-साथ नियमित टीकाकरण पर भी दिया जा रहा जोर
– गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी
– संस्थागत प्रसव को लेकर भी गर्भवती महिलाओं को किया गया जागरूक
खगड़िया, 07 फरवरी-
जिले में नियमित तौर पर लगातार कोविड वैक्सीनेशन अभियान तो चल ही रहा है। इसके साथ गर्भवती और शिशु के नियमित टीकाकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। ताकि गर्भवती एवं शिशु का ससमय नियमित टीकाकरण भी सुनिश्चित हो सके और बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके। जिसे सार्थक रूप देने के लिए निर्धारित तिथि के अनुसार जिले के विभिन्न ऑगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण अभियान चल रहा है। जिसके माध्यम से कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा सेविका एवं आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से गर्भवती एवं शिशु का नियमित टीकाकरण किया जा रहा है। इस दौरान नियमित टीकाकरण के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को जरूरी सलाह के साथ-साथ गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ के अलावा खान-पान, रहन-सहन समेत सुरक्षित और सामान्य प्रसव को लेकर अन्य आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
– गर्भवती और शिशु के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने एवं शिशु के स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए समय पर नियमित टीकाकरण जरूरी है। इसलिए, कोविड के साथ नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का भी आयोजन कर योग्य लाभार्थी का नियमित टीकाकरण किया जा रहा है। ताकि ससमय पर नियमित टीकाकरण भी सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, नियमित टीकाकरण के दौरान शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के टीके लगाए जाते हैं। गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
– संस्थागत प्रसव को लेकर भी किया जाता है जागरूक :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन ने बताया, इस दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार वालों को संस्थागत प्रसव को लेकर भी जागरूक किया जाता है। जिसके दौरान यह बताया गया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। योग्य एवं प्रशिक्षित एएनएम द्वारा चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रसव कराया जाता है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को अपनाने के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की जरूरत है।
– सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, इस
स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा केंद्र पर मौजूद गर्भवती महिलाओं को यह भी बताया जाता है कि सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है। सरकार द्वारा जाँच के लिए पीएचसी स्तर पर मुफ्त व्यवस्था की गई। ताकि हर गर्भवती महिला आसानी से जाँच करा सकें। हर माह 09 तारीख को पीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती की जाँच की जाती और चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।