नवजात को स्वास्थ्य की परेशानियाँ से दूर रखने को रोग-प्रतिरोधक क्षमता को लेकर रहें सजग

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– मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता संक्रामक बीमारी से भी रखता है दूर और स्वस्थ शरीर का होता है निर्माण
– जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ कराएं नवजात को माँ का स्तनपान, विकसित होगी रोग-प्रतिरोधक क्षमता

लखीसराय, 07 फरवरी।
नवजात के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए नवजात का उचित देखभाल सबसे महत्वपूर्ण है। इसे सुनिश्चित करने में सबसे बड़ा योगदान नवजात की माँ का ही होता है। किन्तु, इसमें थोड़ी सी लापरवाही से नवजात बार-बार बीमार होने लगता है। जिससे वह शारीरिक रूप से भी बेहद कमजोर होने लगता है। बार-बार बीमार होना कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का बड़ा संकेत है। इसलिए, जन्म के बाद नवजात की रोग-प्रतिरोधक क्षमता समेत अन्य देखभाल को लेकर पूरी तरह सजग रहें। इसके लिए नवजात की उचित देखभाल के साथ-साथ जन्म के बाद छः माह तक नवजात को सिर्फ माँ का ही स्तनपान कराएं। इससे ना सिर्फ बच्चे स्वस्थ्य रहते हैं, बल्कि, उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।

– माँ के दूध से बच्चों की विकसित होती है रोग-प्रतिरोधक क्षमता :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, उचित पोषण से ही बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होगा और बच्चे स्वस्थ्य रहेंगे। इसलिए, शिशु को जन्म के पश्चात छः माह तक सिर्फ और सिर्फ माँ का ही दूध का सेवन कराएं। माँ का दूध बच्चों के लिए अमृत के समान होता है और स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। माँ के दूध में मौजूद पोषक तत्व जैसे पानी, प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट मिनरल्स, वसा, कैलोरी शिशु को न सिर्फ बीमारियों से बचाते हैं, बल्कि उनमें रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। साथ ही बच्चे की पाचन क्रिया भी मजबूत होती है। इसलिए, मां के दूध को शिशु का प्रथम टीका कहा गया है, जो छह माह तक के बच्चे के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, छह माह के बाद बच्चे के सतत विकास के लिए ऊपरी आहार की जरूरत पड़ती है। लेकिन, इस दौरान यह ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है कि उसे कैसा आहार दें।

– मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता संक्रामक बीमारी से भी रखता है दूर :
मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता संक्रामक बीमारी से भी दूर रखता है। इसलिए, बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को लेकर शुरुआती दौर से ही सजग रहें। दरअसल, अगर शुरुआती दौर में ही बच्चे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो नवजात के स्वस्थ शरीर का निर्माण होगा और वह आगे भी शारीरिक रूप से मजबूत होगा।

– जन्म के बाद एक घंटे के अंदर नवजात को पिलाएं माँ का दूध :
नवजात के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए जन्म के बाद एक घंटे के अंदर नवजात को माँ का दूध पिलाएं। इसके सेवन से नवजात की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। किन्तु, जानकारी के अभाव में कुछ लोग इसे गंदा या बेकार दूध समझ नवजात को नहीं पिलाते हैं। जबकि, सच यह है कि माँ का पहला गाढ़ा-पीला दूध नवजात के लिए काफी फायदेमंद होता है।

– छः माह के बाद ही नवजात को दें ऊपरी आहार :
नवजात को छः माह के बाद ही किसी प्रकार का बाहरी या ऊपरी आहार दें। छः माह तक सिर्फ और सिर्फ माँ का ही स्तनपान कराएं। इसके अगले कम से कम से कम दो वर्षों तक ऊपरी आहार के साथ माँ का स्तनपान भी जारी रखें। साथ ही लालन-पालन के दौरान साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखें। बच्चों को गोद लेने के पहले खुद अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लें, बच्चों को हमेशा साफ कपड़ा पहनाएं, गीला व गंदा कपड़ा से बच्चे को हमेशा दूर रखें। इससे वह संक्रामक बीमारी से दूर रहेगा।

– संम्पूर्ण टीकाकरण पर दें बल :
संम्पूर्ण टीकाकरण बच्चे को कई तरह के बीमारियों से दूर रखता और बच्चे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इसलिए, बच्चे का संम्पूर्ण टीकाकरण कराएं। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बिलकुल नहीं करें।

दो हफ्ते तक लगातार खांसी हो तो टीबी जांच कराएं

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टीबी मरीजों की पहचान को लेकर जीविका दीदियों को दिया गया प्रशिक्षण
टीबी मुक्त समाज के लिए सामुदायिक स्तर जागरूकता की कही गयी बात
भागलपुर, 7 फरवरी
सुल्तानगंज प्रखंड के सीएलएफ ऑफिस में पर्सपेक्टिव बिल्डिंग वर्कशॉप के तहत जीविका एवं स्वयं सहायता समूह की दीदियों को टीबी बीमारी का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रोमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने कोरोना की गाइडलाइन का पालन कराते हुए कराया। इस दौरान दीदियों को टीबी बीमारी की पहचान को लेकर उसके लक्षण के बारे में बताया गया। अगर किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण मिले तो तत्काल क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दिया गया।
केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान दीदियों को बताया गया कि अगर आपके स्वयं सहायता समूह या पड़ोस में किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक जागरूकता से ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। जीविका दीदियां अपने स्वयं सहायता समूह के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी जागरूक करेंगी तो हम समाज से टीबी बीमारी को खत्म कर सकते हैं। मौके पर फैयाज खान, पंकज सिंह, संदीप कुमार, डॉ. अंजनी, संगीता कुमारी, विजेता दीप लक्ष्मी और अभिनंदन कुमार मौजूद थे।
ज्यादातर मामले घनी आबादी वाले इलाके मेः मौके पर जीविका दीदियों को बताया गया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता है और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
पौष्टिक भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते हैं और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
टीबी के लक्षण
1. दो हफ़्ते या अधिक खांसी आना- पहले सूखी खांसी तथा बाद में बलगम के साथ खून का आना।
2. रात में पसीना आना-चाहे मौसम ठंढे का क्यों न हो।
3. लगातार बुखार रहना
4.थकावट होना
5.वजन घटना
6.सांस लेने में परेशानी होना

बचाव के तरीके-
1. जांच के बाद टी.बी.रोग की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें।
2.मास्क पहनें तथा खांसने या छींकने पर मुंह को पेपर नैपकीन से कवर करें।
3.मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें।
4.मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहें। एसी से परहेज करें।
5.पौष्टिक खाना खाएं।योगाभ्यास करें।
6.बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तम्बाकू, शराब आदि से परहेज करें।
7. भीड़भाड़ वाली गंदी जगहों पर जानें से बचें।

बांका में 52 प्रतिशत किशोर ले चुके हैं कोरोना टीका

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-1,50,494 किशोरों को टीका देने का रखा गया है लक्ष्य
-अब तक 77,889 किशोरों ने ले लिया है कोरोना टीका
बांका, 7 फरवरी।
जिले में कोरोना उन्मूलन को लेकर लगातार अभियान चल रहा है। जांच और इलाज के साथ-साथ टीकाकरण को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में किशोरों के लिए भी टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि काफी कम समय में ही अच्छी-खासी संख्या में किशोरों ने अब तक कोरोना का टीका ले लिया है। पूरे जिले में 1,50,494 किशोरों को कोरोना का टीका देने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें 77,889 लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है। यानी कि लगभग 52 प्रतिशत किशोर अब तक कोरोना का टीका ले चुके हैं। उम्मीद है कि जल्द ही किशोरों का शत-प्रतिशत टीकाकरण हो जाएगा।
सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि जिले में टीकाकरण अभियान लगातार चल रहा है। काफी संख्या में लोगों ने टीका ले लिया है, इस कारण आमलोगों में भी जागरूकता बढ़ी है। इस वजह से लगातार लोग टीका लेने के लिए सामने आ रहे हैं। इसके साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। लोगों को टीकाकरण केंद्रों तक लाने के लिए स्वास्थ्यकर्मी लगातार क्षेत्र में मेहनत कर रहे हैं। इसके साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि के साथ सरकारी कर्मचारी भी इसमें योगदान दे रहे हैं। सभी लोगों के प्रयास से हमलोग कोरोना को खत्म कर लेंगे। जब तक जिले के आखिरी व्यक्ति तक टीका नहीं पहुंच जाएगा, तब तक हमलोगों का प्रयास जारी रहेगा।
सबसे अधिक बौंसी में 9746 किशोरों का टीकाकरणः किशोरों के टीकाकरण को लेकर जिले के अमरपुर प्रखंड में लक्ष्य है 16781, जिसमें 7781 किशोरों को कोरोना का टीका लग चुका है। इसी तरह बांका पीएचसी में लक्ष्य 16114 के मुकाबले 7172, बाराहाट में लक्ष्य 11029 के मुकाबले 5137, बेलहर में लक्ष्य 12399 के मुकाबले 7170, बौंसी में लक्ष्य 13676 के मुकाबले 9746, चांदन में 12245 के मुकाबले 5094, धोरैया में 17725 के मुकाबले 9614, फुल्लीडुमर में लक्ष्य 9259 के मुकाबले 6392, कटोरिया में लक्ष्य 13798 के मुकाबले 7093, रजौन में लक्ष्य 14608 के मुकाबले 7307 और शंभूगंज में लक्ष्य 12861 के मुकाबले 5383 किशोरों को कोरोना टीका लग चुका है।
टीका लेने वाले भी करें गाइडलाइन का पालनः शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि टीका लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। तीसरी लहर भी अब शांत होने वाली है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। कोरोना से बचने के लिए सतर्कता सबसे बेहतर तरीका है। इसलिए घरों से बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ से बचते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज दूरी बनाएं रखें। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें। ऐसा करते रहने से कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे। साथ ही आपके संपर्क में आने वाले लोग भी इसकी चपेट में नहीं आएंगे। कोरोना का टीका लेने वाले भी गाइडलाइन का पालन करें।

कोविड संक्रमित मरीजों को स्वस्थ्य होने के तीन माह बाद लगायी जाएगी बूस्टर डोज 

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– कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ जिले में जारी है  लोगों का वैक्सीनेशन
– बूस्टर डोज को लेकर नई गाइडलाइन जारी, इसके पालन के साथ लाभार्थियों को लगायी जाएगी बूस्टर डोज
मुंगेर, 05 फरवरी-
जिले के विभिन्न प्रखंडों में नियमित तौर पर चयनित और चिह्नित जगहों पर शिविर आयोजित कर हर आयु के लोगों को कोविड वैक्सीन दी जा रही है। ताकि संपूर्ण जिलेवासी जल्द से जल्द वैक्सीनेटेड हो सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित हो सकें। वहीं, इसके साथ बूस्टर डोज को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा नई गाइडलाइन जारी की गयी है। जिसके पालन के साथ ही बूस्टर डोज लेने वाले योग्य लाभार्थियों को बूस्टर डोज लगायी जाएगी। वहीं, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों के वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिले में स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लगातार अभियान चलाकर योग्य व्यक्तियों को जागरूक कर वैक्सीन लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहें ,जिससे जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।
– कोविड संक्रमित मरीजों को स्वस्थ्य होने के तीन माह बाद लगायी जाएगी बूस्टर डोज :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ राजेश कुमार रौशन ने बताया, बूस्टर डोज को लेकर नई गाइडलाइन जारी की गयी है। जिसके अनुसार जो व्यक्ति दोनों डोज ले चुके और बूस्टर डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरी कर चुके हैं। किन्तु, इसी दौरान वह कोविड संक्रमित हो गए तो उन्हें स्वस्थ्य यानी रिकवर होने के तीन माह बाद बूस्टर डोज लगायी जाएगी। वहीं, उन्होंने कहा, प्रोटोकॉल के पालन के साथ वैक्सीन लेने पर किसी प्रकार परेशानी होने की संभावना नहीं रहती है। इसलिए, मैं ऐसे लाभार्थियों से अपील करता हूँ कि प्रोटोकॉल के पालन के साथ ही बूस्टर डोज लें।
– युवाओं के साथ-साथ हर आयु वर्ग के लोगों का जारी है वैक्सीनेशन :
जिले में सामान्य कोविड वैक्सीनेशन अभियान भी जारी है। जिसके माध्यम से किशोर- किशोरियों के साथ-साथ हर आयु वर्ग के लोगों को लगातार शिविर आयोजित कर वैक्सीन दी जा रही है। इस दौरान लोगों को कोविड से बचाव के लिए एहतियात जारी रखने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही जरूरतमंद लाभार्थियों के घर जाकर वैक्सीन देने की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई है। ताकि लोगों को वैक्सीन लेने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुरक्षित माहौल में सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और प्रोटोकॉल का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

निमोनिया से बचाव के लिए संपूर्ण टीकाकरण के साथ सतर्कता भी जरूरी 

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– बदलते मौसम में बढ़ जाती है निमोनिया संक्रमण की संभावना, बच्चों का रखें ख्याल
– न्यूमो कॉकल वैक्सीन (पीसीवी) का टीकाकरण निमोनिया से बचाव के लिए है जरूरी
खगड़िया, 05 फरवरी।
बदलते मौसम में निमोनिया से बचाव के लिए बच्चे और बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। दरअसल, बच्चे और बुजुर्गों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है। जिसके कारण इस बीमारी की चपेट में बच्चे व बुजुर्गों के आने की संभावना अधिक रहती है। क्योंकि, निमोनिया सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है। यह बैक्टीरिया, वायरस और फंगल की वजह से फेफड़ों में संक्रमण से होता है। इस वजह से बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। इस बीमारी से बचने का एक मात्र उपाय न्यूमो कॉकल वैक्सीन (पीसीवी) का टीकाकरण ही है।
– जिले के सभी पीएचसी में उपलब्ध है निःशुल्क पीसीवी का टीका :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, निमोनिया के प्रारंभिक लक्षण सर्दी-खांसी जैसे हो सकते हैं। ज्यादातर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इससे जल्दी ग्रसित हो जाते हैं। जिन बच्चों को पीसीवी का टीका नहीं पड़ा है उन बच्चों को इस बीमारी की चपेट में आने की संभावना अधिक रहती है। इस बीमारी में मवाद वाली खांसी, तेज बुखार एवं सीने में दर्द समेत अन्य परेशानी होती है। इस बीमारी को टीकाकरण से रोका जा सकता है। इसलिए, अपने बच्चों को संपूर्ण टीकाकरण के अंतर्गत पीएचसी में उपलब्ध निःशुल्क पीसीवी का टीका निश्चित रूप से लगवाएं। वहीं, उन्होंने बताया, बच्चे को जन्म के पश्चात दो साल के अंदर सभी तरीके के पड़ने वाले टीके जरूर लगवानी चाहिए। इससे बच्चे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत तो होती ही है, इसके अलावा वह 12 से अधिक प्रकार की बीमारियों से भी दूर रहता है।
– जानें क्या है निमोनिया :
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इसकी वजह से फेफड़ों में संक्रमण होता है। आम तौर पर यह बीमारी बुखार या जुकाम होने के बाद ही होता है। सर्दी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से यह बीमारी ज्यादा होती है। निमोनिया का प्रारम्भिक इलाज सीने का एक्स-रे करने के बाद क्लीनिकल तरीके से शुरू होता है। निमोनिया माइक्रो बैक्टीरिया वायरल, फंगल और पारासाइट की वजह से उत्पन्न संक्रमण की वजह से होता है। इसका संक्रमण सामुदायिक स्तर पर भी हो सकता है।
– निमोनिया से बचाव के उपाय :
ऐसे तो निमोनिया से बचाव का एक मात्र उपाय टीकाकरण हीं है। यह एक सांस संबंधी बीमारी है, इसलिए कुछ सावधानी बरतने के बाद काफी हद तक इसके संक्रमण से बचा जा सकता है। इसके लिए नवजात एवं छोटे बच्चों के रखरखाव, खानपान एवं कपड़े पहनाने में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। सर्दी के मौसम में हमेशा बच्चों को गर्म कपड़े पहनाने एवं खाने- पीने में गर्म पदार्थो का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ हीं वैसे लोगों के संपर्क से दूर रखने की आवश्यकता है, जिन्हें पहले से सांस संबंधी बीमारी हो। इसके साथ बुजुर्गों सहित अन्य लोगों को भी काफी सावधानी बरतने की जरूरत है।
– निमोनिया का यह है प्रारंभिक लक्षण :
निमोनिया का प्रारंभिक लक्षण बुखार के साथ पसीना एवं कंपकपी होना, अत्यधिक खांसी में गाढ़ा, पीला, भूरा या खून के अंश वाला बलगम आना, तेज-तेज और कम गहरी सांस लेने के साथ सांस का फूलना ( जैसे कि सांस लेने के दौरान आवाज होना), होंठ या अंगुलियों के नाखून नीले दिखाई देना, बच्चों की परेशानी व उत्तेजना बढ़ जाना है।

सफलता : लखीसराय में 53 % युवाओं का हो चुका कोविड वैक्सीनेशन

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– जिले के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों की मेहनत और युवाओं के सहयोग ने लाया रंग
– सामुदायिक स्तर पर लोगों को सुरक्षित करने के लिए प्रयास जारी, -नियमित तौर पर चल रहा वैक्सीनेशन अभियान

लखीसराय, 05 फरवरी।
जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों के कोविड वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने और इस घातक महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोगों को सुरक्षित करने के लिए जिले में नियमित तौर पर वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। इसके साथ-साथ स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर जरूरी प्रयास भी किए जा रहे हैं। जिसका सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगा है । पूरे समुदाय पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ा है। इसी वर्ष 03 जनवरी से पूरे प्रदेश के साथ जिले में भी शुरू हुए 15 से 18 आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों के वैक्सीनेशन के बाद मात्र दो माह के अंदर जिले के 53 % युवाओं को अबतक वैक्सीनेट किया जा चुका है। जबकि, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर प्रयास जारी है । इस घातक महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोगों को सुरक्षित करने के लिए अन्य जरूरी पहल भी जारी है।

– जिले के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों की मेहनत और युवाओं के सहयोग ने लाया रंग :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, इतने कम समय में इतनी बड़ी सफलता जिले के तमाम पदाधिकारियों और कर्मियों की मेहनत और जिले के युवाओं तथा आमजनों के सकारात्मक सहयोग का परिणाम है। इस सफलता में जहाँ जिले के सभी चिकित्सक, एएनएम, डेटाऑपरेटर, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी मुश्किल भरे दौर में भी अपनी जिम्मेदारी की डगर पर डिगे रहें हैं। वहीं, जिले वासियों का भी सकारात्मक सहयोग मिलता रहा है। वहीं, उन्होंने कहा, इसी मेहनत और सकारात्मक सहयोग की बदौलत जल्द ही शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। वहीं, उन्होंने वैक्सीन से वंचित युवाओं से जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराने और प्रोटोकॉल का पालन जारी रखने की अपील की है।

– बेहतर व्यवस्था से मिले बेहतर परिणाम : यह सफलता बेहतर स्वास्थ्य सिस्टम का भी जीता-जागता उदाहरण है। दरअसल, एक भी युवा को वैक्सीनेशन के दौरान किसी भी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इस बात का हमेशा ख्याल रखा गया। युवाओं के लिए ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। जल्द से जल्द अधिकाधिक युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर स्कूल में वैक्सीनेशन साइट बनाया गया। ऐसी ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई तमाम व्यवस्थाओं का यह बेहतर परिणाम है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

छुआछूत से नहीं, जीवाणु से होता है कुष्ठ

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-जिले में मनाया जा रहा स्पर्श कुष्ठ जागरूकता पखवाड़ा
-आशा कार्यकर्ता गांव-गांव में लोगों को कर रहीं जागरूक
बांका, 5 फरवरी
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि 30 जनवरी से जिले में स्पर्श कुष्ठ जागरूकता पखवाड़ा की शुरुआत हुई है, जो 13 फरवरी तक चलेगा। इसके तहत गांव-गांव में अभियान चल रहा है। आशा कार्यकर्ता कुष्ठ से जागरूकता को लेकर गांवों में लोगों को शपथ दिला रही हैं। गांवों में सभाएं की जा रही हैं। लोगों को समझाया जा रहा है कि अगर शुरुआत में कुष्ठ का इलाज हो जाए विकलांग होने का खतरा कम हो जाता है। यह बीमारी छुआछूत से नहीं, बल्कि जीवाणु से होता है। समाज में कुष्ठ के प्रति जो लोगों में भ्रांतियां हैं, उसे दूर किया जा रहा है। आमतौर पर लोग कुष्ठ को छुआछूत की बीमारी समझकर इस बीमारी से ग्रसित रोगी से भागने लगते हैं। दूरी बनाने लगते हैं। इसी को लेकर आशा कार्यकर्ता अभी गांवों में जाकर लोगों को बता रही हैं कि कुष्ठ रोगियों से भागे नहीं, उसे सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। सभी सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ रोगियों के लिए मुफ्त में इलाज की व्यवस्था है। इलाज नहीं करवाने पर उससे अन्य लोगों में संक्रमण हो सकता है।
सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि कुष्ठ दिवस पर हमलोगों ने शपथ ली थी कि कुष्ठ रोगियों से किसी तरह का भेदभाव नहीं करेंगे। अगर कोई कुष्ठरोगी दिखे तो तत्काल उसे अस्पताल ले जाकर उसका इलाज करवाएंगे। ये सिलसिला अभी जारी है, जो 13 फरवरी तक चलेगा। गांवों में आशा कार्यकर्ता जागरूकता अभियान के जरिये लोगों को इसके बारे में समझा रही हैं। साथ ही कुष्ठ रोगियों की पहचान कैसे करनी है, इसके भी तरीके बताएं जा रहे हैं। लोग अगर कुष्ठ रोगियों से दूरी बनाने की बजाय उसका इलाज करवाएंगे तो यह बीमारी समाज से खत्म हो जाएगा।
कुष्ठ का पूर्ण इलाज संभवः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कुष्ठ की बीमारी जीवाणु से होता है, जिसका पूर्ण इलाज संभव है। इसकी पहचान बहुत ही आसान है। त्वचा पर किसी प्रकार का दाग या धब्बा, जिसमें दर्द या खुजली नहीं होती है और वह जन्म से नहीं है तो वह कुष्ठ का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। समय से इलाज होने पर यह पूरी तरह से ठीक हो जाता है और वह पहले वाली जिंदगी जी सकता है। एमडीटी का पूरा खुराक नियमानुसार लेने के बाद कुष्ठ पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है। इलाज नहीं कराने पर उस व्यक्ति से कई लोगों में संक्रमण हो सकता है। इसलिए अगर कोई कुष्ठ रोगी दिखे तो उसका तत्काल इलाज करवाएं।
सहायता राशि का भी प्रावधानः अचिकित्सा सहायक मृत्युंजय कुमार सिंह कहते हैं कि कुष्ठ से पीड़ित व्यक्ति अगर विकलांग हो जाता है तो उसे 1500 रुपये प्रति महीने भिक्षाटन निवारण योजना के तहत दिया जाता है। यह राशि तबतक दी जाती है, जब तक वह जीवित रहते हैं। साथ ही अगर कुष्ठ से विकलांग हुए व्यक्ति के आश्रित जिनकी उम्र 18 साल से कम है, उसे भी परवरिश योजना के तहत एक हजार रुपये प्रति महीने दिया जाता है। इसलिए कुष्ठ रोग को छुपाएं नहीं और इसका इलाज करवाएं।

अब खांसी की आवाज़ से की जाएगी टीबी की पहचान

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– वर्चुअल माध्यम से टीबी विभाग से जुड़े अधिकारी और कर्मियों को दो दी गई ट्रेनिंग

– 27 जनवरी से 3 फ़रवरी तक जिला के विभिन्न प्रखंड़ों से टीबी रोगियों की पहचान की गई

– ऑनलाइन मीटिंग में संग्रहित डाटा के साथ उपस्थित हुए अधिकारी और कर्मचारी

मुंगेर, 4 फरवरी-

जिला में टीबी के मरीजों की जांच के लिए अब बलगम नहीं, खांसी की आवाज के सैंपल लिए जाएंगे। सरकार ने एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए “फिल्डी एप” नाम से एक मोबाइल एप तैयार कराया है। इसकी मदद से कफ साउंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सॉल्यूशन टू डिटेक्ट टीबी प्रोग्राम के तहत इसका ट्रायल शुरू किया गया है। जिला में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले चरण में प्रत्येक प्रखंड में कम से कम 3 लोगों का सैंपल लिया गया। सैंपल क्लेक्शन विगत 27 जनवरी से 3 फरवरी तक किया गया। जिला के संचारी रोग अधिकारी डॉ. ध्रुव कुमार साह ने बताया कि इस एडवांस टेक्नोलॉजी की मदद से टीबी मरीजों को चिह्नित करने में काफी सहूलियत होगी तथा उनका बेहतर इलाज ससमय हो पाएगा। इस मोबाइल एप के माध्यम से संक्रमित रोगी, दूसरे संक्रमित के संपर्क में आए रोगी तथा तीसरा टीबी के लक्षण पाए गए रोगी से एप के माध्यम से 30 – 30 प्रश्न पूछे गए। इसके बाद उनकी आवाज रिकॉर्ड कर सेंट्रल टीबी डिवीजन भेजी जाएगी। परीक्षण सफल होने पर इस एप के माध्यम से घर- घर जाकर ऐसे रोगियों की पहचान की जा सकेगी। रोगी की पहचान होने के बाद उन्हें प्रोत्साहित कर सफल इलाज कराने वाले ट्रीटमेंट सपोर्टर को 1000 रुपए की प्रोत्साहन राशि जबकि टीबी से संक्रमित मरीजों को पोषण योजना के तहत 500 रुपए प्रति माह कोर्स पूरा करने तक दिया जाएगा।

सैंपल कलेक्ट कर की जाएगी स्टडी :
संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. साह ने बताया कि आवाज के जरिए टीबी की पहचान करने के लिए मुंगेर जिला के सभी प्रखंडों में सैंपल कलेक्ट किए जा रहे हैं । एक्सपर्ट इन सैंपल्स से माइक्रो रिसर्च और स्टडी का काम शुरू करेंगे। इसमें देखा जाएगा कि सामान्य व्यक्ति की आवाज और टीबी के मरीज की आवाज में क्या अंतर आता है। इसके लिए चिह्नित लोगों के नाम व पता गोपनीय रखा जाएगा । उन्होंने बताया कि मरीज के तीन बार खांसते हुए आवाज एप पर रिकॉर्ड की जाती है।10 सेकेंड की रिकॉर्डिंग में 5 स्वर अक्षर के उच्चारण को भी रिकॉर्ड किया जाता है।

शुक्रवार को आयोजित वर्चुअल मीटिंग में शामिल हुए जिला भर में कार्यरत एसटीएस और एसटीएलएस :
डिस्ट्रिक्ट टीबी /एचआईवी कॉर्डिनेटर शैलेन्दु कुमार ने बताया कि केंद्रीय यक्ष्मा प्रभाग, भारत सरकार के द्वारा ” कफ साउंड फ़ॉर द आर्टिफिशल इंटेलीजेंस बेस्ड सॉल्यूशन टू डिटेक्ट टीबी”विषय पर शुक्रवार को आयोजित ऑनलाइन वर्चुअल मीटिंग में 27 जनवरी से 3 फरवरी के बीच संग्रहित डाटा के साथ डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी के साथ-साथ जिला के सभी प्रखंड़ों में टीबी और एचआईवी मरीजों का डाटा संग्रहित करने वाले एसटीएस और एसटीएल एस शामिल हुए। उन्होंने बताया कि 27 जनवरी से 3 फरवरी तक नए मोबाइल एप के माध्यम से खांसी की आवाज़ के आधार पर टीबी मरीज़ों को चिह्नित करने के इस कार्यक्रम के सफल संचालन को ले अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (यक्ष्मा) डॉ. बाल कृष्ण मिश्र का पत्र प्राप्त हुआ है।

यक्ष्मा मरीजों को चिह्नित करने में इस डिजिटल सुविधा से मिलेगा लाभ :
सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि आवाज के सैंपल लेने के लिए जिला के सभी प्रखण्डों में काम करने वाले सभी एसटीएस, एसटीएलएस,एलटी सहित अन्य लोगों की ऑनलाइन ज़ूम मीटिंग के जरिये विगत 24 जनवरी को ट्रेनिंग कराई गई है। यदि यह टेक्नोलॉजी सफल होती है तो टीबी की पहचान और इलाज काफी आसान हो जाएगा। इसके साथ ही समय की भी काफी बचत होगी ,जिससे टीबी मरीजों को बहुत फायदा मिलेगा।

कोविड संक्रमित मरीजों को स्वस्थ्य होने के तीन माह बाद लगाया जाएगा बूस्टर डोज

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– कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ जिले में जारी है हर आयु वर्ग के लोगों का वैक्सीनेशन
– बूस्टर डोज को लेकर नई गाइडलाइन जारी, इसके पालन के साथ लाभार्थियों को लगायी जाएगी बूस्टर डोज

लखीसराय, 04 फरवरी-
जिले के विभिन्न प्रखंडों में नियमित तौर पर चयनित और चिह्नित जगहों पर शिविर आयोजित कर हर आयु के लोगों को कोविड वैक्सीन दी जा रही है। ताकि संपूर्ण जिलेवासी जल्द से जल्द वैक्सीनेटेड हो सकें और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित हो सके। वहीं, इसके साथ बूस्टर डोज को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा नई गाइडलाइन जारी की गयी है। जिसके पालन के साथ ही बूस्टर डोज लेने वाले योग्य लाभार्थियों को बूस्टर डोज लगायी जाएगी। वहीं, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों के वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिले में स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लगातार अभियान चलाकर योग्य व्यक्तियों को जागरूक कर वैक्सीन लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहें और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।

– कोविड संक्रमित मरीजों को स्वस्थ्य होने के तीन माह बाद लगायी जाएगी बूस्टर डोज :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, बूस्टर डोज को लेकर नयी गाइडलाइन जारी की गयी है। जिसके अनुसार जो व्यक्ति दोनों डोज ले चुके हैं और बूस्टर डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरी कर चुके हैं। किन्तु, इसी दौरान वह कोविड संक्रमित हो गए तो उन्हें स्वस्थ्य यानी रिकवर होने के तीन माह बाद बूस्टर डोज लगायी जाएगी। वहीं, उन्होंने कहा, प्रोटोकॉल के पालन के साथ वैक्सीन लेने पर किसी प्रकार परेशानी होने की संभावना नहीं रहती है। इसलिए, मैं ऐसे लाभार्थियों से अपील करता हूँ कि प्रोटोकॉल के पालन के साथ ही बूस्टर डोज लें।

– युवाओं के साथ-साथ हर आयु वर्ग के लोगों का जारी है वैक्सीनेशन :
जिले में सामान्य कोविड वैक्सीनेशन अभियान भी जारी है। जिसके माध्यम से किशोर-किशोरियों के साथ-साथ हर आयु वर्ग के लोगों को लगातार शिविर आयोजित कर वैक्सीन दी जा रही है। इस दौरान लोगों को कोविड से बचाव के लिए एहतियात जारी रखने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही जरूरतमंद लाभार्थियों के घर जाकर वैक्सीन देने की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई है। ताकि लोगों को वैक्सीन लेने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुरक्षित माहौल में सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और प्रोटोकॉल का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

विश्व कैंसर दिवस : जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में खुला परामर्श केंद्र, बचाव के लिए लोगों को किया गया जागरूक

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– 10 फरवरी तक चलेगा जागरूकता अभियान, बचाव के लिए दी जाएगी आवश्यक चिकित्सा परामर्श
– जाँच के बाद बाद पीड़ित मरीजों को समुचित इलाज के लिए भेजा जाएगा बेहतर स्वास्थ्य संस्थान

खगड़िया, 04फरवरी
शुक्रवार को विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के विभिन्न पीएचसी, एपीएचसी, हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर समेत अन्य चयनित स्वास्थ्य संस्थानों में नि:शुल्क कैंसर चिकित्सा परामर्श सह जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें संभावित मरीजों का स्क्रीनिंग की गयी। साथ ही आमजनों को कैंसर से बचाव के लिए जागरूक भी किया गया। इस दौरान शिविर में मौजूद लोगों को कैंसर के लक्षण, कारण एवं बचाव के लिए विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई। ताकि लोग शुरुआती दौर में ही कैंसर की पहचान कर समय पर अपना इलाज शुरू करवा सकें। दरअसल, शुरुआती दौर में इलाज शुरू कराने से कैंसर से स्थाई निजात मिल सकती है।

– कैंसर से बचाव के लिए समय पर इलाज शुरू कराने के साथ-साथ जागरूकता भी जरूरी :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, कैंसर से बचाव के लिए जहाँ पीड़ित व्यक्ति को समय पर इलाज शुरू कराना जरूरी है। वहीं, आमजनों को जागरूक होने की भी जरूरत है। इसी उद्देश्य से हर वर्ष 04 से 10 फरवरी तक विश्व कैंसर दिवस के रूप के रूप में मनाया जाता है। जिसके माध्यम से जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क कैंसर चिकित्सा परामर्श सह जागरूकता शिविर का आयोजन कर संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है। आमलोगों को बचाव के लिए जागरूक भी किया जाता है।

– 10 फरवरी तक चलेगा नि:शुल्क कैंसर चिकित्सा परामर्श सह जागरूकता शिविर :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, आगामी 10 फरवरी तक नियमित रूप से जिले में नि:शुल्क कैंसर चिकित्सा परामर्श सह जागरूकता शिविर का संचालन होगा। जिसके माध्यम से संभावित मरीजों की सामान्य स्क्रीनिंग कर जाँच की जाएगी । जाँच के पश्चात आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाएगा। इस दौरान समाज के प्रत्येक व्यक्ति को कैंसर के प्रति जागरूक किया जाएगा। कैंसर का इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी।

– कैंसर पीड़ित मरीजों को समुचित इलाज के लिए भेजा जाएगा बेहतर स्वास्थ्य संस्थान :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, जाँच के दौरान जिस व्यक्ति में कैंसर के लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें समुचित इलाज के लिए बेहतर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसे व्यक्ति को पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान, इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पीएमसीएच, एम्स समेत अन्य बेहतर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का चयन किया गया है। जहाँ ऐसे मरीजों को समुचित इलाज के लिए भेजा जाएगा।

– आर्सेनिकयुक्त पानी का सेवन है कैंसर का मुख्य कारण : कैंसर की बीमारी का मुख्य कारण आर्सेनिक युक्त पानी का सेवन से होता है। दरअसल, ऐसा देखा जा रहा है कि कैंसर से पीड़ित अधिक मरीज उस इलाके में ही मिल रहे जिस इलाके की पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई जाती है। स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 38 जिले में 18 जिले आर्सेनिक प्रदूषण में है। इसलिए, कैंसर से बचाव के लिए शुद्ध पेयजल का सेवन करें।

– ध्रूमपान से रहें दूर, चिकित्सा परामर्श का करें पालन :-
पुरुषों में अधिकांश मुँह कैंसर होता है। जिसका मुख्य कारण है पान, गुटखा, खैनी, सिगरेट समेत अन्य नशीले पदार्थों का अति उपयोग करना। इसलिए, कैंसर से बचाव के लिए ध्रूमपान से परहेज करें और चिकित्सा परामर्श का पालन करें।

– इन मानकों का रखें ख्याल और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।