संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता, सुरक्षा के हर मानकों का रखा जाता है ख्याल

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– सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जाँच है जरूरी, हर माह नौ तारीख को पीएचसी में की जाती है मुफ्त जाँच
– गर्भावास्था के दौरान योग्य चिकित्सकों से कराएँ जाँच, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलेगा बढ़ावा

खगड़िया, 29 जनवरी।
गर्भधारण के साथ ही गर्भवती महिलाओं के मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगते हैं। खासकर हर महिला के मन में सामान्य और सुरक्षित प्रसव की लालसा निश्चित रूप से होती है। किन्तु, थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत का सबब बन जाती है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने की जरूरत है। दरअसल, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थान यानी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हैं। साथ ही सुरक्षा के हर मानकों का भी ख्याल रखा जाता है। इससे ना सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी कमी आएगी।

– सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में उपलब्ध है पर्याप्त सुविधा :
खगड़िया सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने बताया, सुरक्षित प्रसव के लिए पीएचसी एवं जिले के अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है। प्रसव के लिए आने वाली प्रसूता को बेहतर से बेहतर सुविधा मिले इस बात का विशेष ख्याल भी रखा जाता है। इसके अलावा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एएनएम और आशा अपने-अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं।

– सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच है जरुरी :
शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाली रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जाँच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जाँच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

– हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत की जाती है मुफ्त जाँच :
सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए हर माह की नौ तारीख को सभी पीएचसी एवं सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मुफ्त जाँच की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आदि कार्यक्रम के माध्यम से एनेमिक गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही है। साथ ही सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही अधिक से अधिक गर्भवती माताओं की प्रसव पूर्व जाँच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए सभी एएनएम एवं आशाओं का क्षमता वर्धन भी किया गया है। गर्भवती महिलाओं की चारो प्रसव पूर्व जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती और संभावित जटिलताओं का पता चलता है। लक्षणों के मुताबिक जरुरी चिकित्सीय प्रबंधन किया जाता है। ताकि माता और उसके शिशु दोनों स्वस्थ्य रहें।

रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी ने जरूरतमंदों को किया कंबल का वितरण

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नईदिल्ली-

ठंड के बढ़ते प्रकोप के चलते रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी

ने फतेहुलपुर कुंडा प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश में जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया। जिससे गरीबों को काफी राहत पहुंची है।

रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी ने ठंड के प्रकोप से बचाने के लिए जरूरतमंदों के बीच जाकर कंबल का वितरण किया। जिससे की प्रकृति के इस प्रकोप से वह बच सके। जिस प्रकार से तेजी ठंड बढ़ती जा रही है और ऐसे समय में रोजमर्रा के काम कर पेट भरने वाले लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है ऐसे में उन्हें गरम कपड़ों की आवश्यकता होती है जिसके मदद के लिए रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी लगातार आती रही है। इसी कड़ी में अभी कंबल का वितरण किया गया। और समाज के और लोगों को इस ओर प्रोत्साहित किया।

रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी के सदस्य गगन बत्रा ने कहा कि आज समाज में सबसे निचले तबके के बारे में सोचने का समय है जिस प्रकार से रोजगार की कमी हो जाती है और ऐसे समय में इनकी जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में सीएसआर फंड को बढ़ाने की जरूरत है।

 रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी के सदस्य हरिश अय्यर ने कहा कि संस्था इस दिशा में आगे बढ़ रहा है और प्रत्येक वर्ष ऐसे कार्य करते हैं जिससे निचले तबके के लोगों को लाभ मिले। इस बार भी संस्थान की ओर से जरूरतमंद लोगों को कंबल दिया गया है जिसका सिलसिला अभी चलता रहेगा। कंबल के साथ अगर ऐसे लोगों को और भी जरूरत हुई तो उसे वे पूरा करेंगे।

रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी के सदस्य डॉ उपेंद्र नाथ पांडे ने कहा कि का संस्था सीएसआर फंड से इस दिशा में हम प्रत्येक वर्ष कार्य करते हैं जिसपर और भी संस्था को सीख लेनी चाहिए। हमारी संस्था गरीबों के कल्याण के लिए कई कार्यक्रम का आयोजन प्रत्येक वर्ष करती है। जिसके लिए हम लगातार प्रयासरत रहते हैं। जिसके सभी सदस्यों का भी काफी योगदान रहता है.

रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी के सदस्य रविंद्र शुक्ला ने कहा कि आज संस्था कई सेक्टरों में कार्य कर रहा है जिसमें खास तौर पर गरीबों के कल्याण पर हमारा खास ध्यान रहता है। आज कोविड से सबसे ज्यादा गरीब ही प्रभावित हुए हैं जिन्हें सहायता करना आवश्यक हो गया है। संस्था ऐसे लोगों को चिंह्नित कर उन्हें सहायता पहुंचाने का कार्य कर रही है इसी कड़ी में इस मौसम में गरीबों के बीच कंबल का वितरण किया जा रहा है।

रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी के सदस्य शैलेंद्र मौर्या ने कहा कि आज देश में सीएसआर फंड पर सरकार ने कई निर्देश जारी किए हैं जो काफी उत्साहजनक है इस तरह के प्रावधान से निचले स्तर पर रह रहे लोगों को काफी लाभ पहुंचता है कह सकते हैं विकास का लाभ इन्हें भी मिलता है जिसके वे हकदार हैं।

इस मौके पर कुंडा के ग्राम प्रधान अर्जून मौर्या ने कहा कि इस तरह के सामाजिक कार्यों में हम सदा आगे रहे हैं और जहां तक हो सकेगा जरूरतमंदों को सहायता की जाती रहेगी। इसके लिए रिस्टोर होप रिस्टोर लाइफ फोर ह्यूमिनिटी से हमें लगातार सहायता मिलती रही है।

कुष्ठ रोगियों से दूरी नहीं बनाएं, उसका इलाज करवाएं

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-सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क इलाज की है व्यवस्था
-ठीक होने के बाद कुष्ठ रोगी जी सकते हैं सामान्य जीवन
बांका, 29 जनवरी।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कुष्ठ रोगियों के प्रति स्नेह एवं सेवा भाव ऱखते थे। इसलिए उनकी पुण्य तिथि 30 जनवरी को हर साल कुष्ठ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन समाज से कुष्ठ को खत्म करने के लिए लोग शपथ लेते हैं। दरअसल, कुष्ठ के प्रति समाज में कुछ भ्रांतियां हैं, जिस पर काम करने की जरूरत है। सबसे महत्वपूर्ण है छुआछूत। आमतौर पर लोग कुष्ठ को छुआछूत की बीमारी समझकर इससे भागने लगते हैं। कुष्ठ रोगियों से दूरी बनाने लगते हैं। जबकि कुष्ठ रोगियों को तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है। सभी सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ रोगियों के लिए मुफ्त में इलाज की व्यवस्था है। इलाज नहीं करवाने पर उससे अन्य लोगों में संक्रमण हो सकता है। एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि कुष्ठ दिवस पर आज हमलोग शपथ लेंगे कि कुष्ठ रोगियों से किसी तरह का भेदभाव नहीं करेंगे। अगर कोई कुष्ठरोगी दिखे तो तत्काल उसे अस्पताल ले जाकर उसका इलाज करवाएंगे। आज जिलेभर में शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। आशा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को इसके प्रति जागरूक करेंगी। साथ ही कुष्ठ रोगियों की पहचान कैसे करनी है, इसके भी तरीके बताएंगी।
कुष्ठ का पूर्ण इलाज संभवः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कुष्ठ की बीमारी जीवाणु से होता है, जिसका पूर्ण इलाज संभव है। इसकी पहचान बहुत ही आसान है। चमड़े पर किसी प्रकार का दाग या धब्बा, जिसमें दर्द या खुजली नहीं होती है और वह जन्म से नहीं है तो वह कुष्ठ का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। समय से इलाज होने पर यह पूरी तरह से ठीक हो जाता है और वह पहले वाली जिंदगी जी सकता है। एमडीटी का पूरा खुराक नियमानुसार लेने के बाद कुष्ठ पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ्य हो सकता है। इलाज नहीं कराने पर उस व्यक्ति से कई लोगों में संक्रमण हो सकता है। इसलिए अगर कोई कुष्ठ रोगी दिखे तो उसका तत्काल इलाज करवाएं।
सहायता राशि का भी प्रावधानः अचिकित्सा सहायक मृत्युंजय कुमार सिंह कहते हैं कि कुष्ठ से पीड़ित व्यक्ति अगर विकलांग हो जाता है तो उसे 1500 रुपये प्रति महीने भिक्षाटन निवारण योजना के तहत दिया जाता है। यह राशि तबतक दी जाती है, जब तक वह जीवित रहते हैं। साथ ही अगर कुष्ठ से विकलांग हुए व्यक्ति के आश्रित जिनकी उम्र 18 साल से कम है, उसे भी परवरिश योजना के तहत एक हजार रुपये प्रति महीने दिया जाता है। इसलिए कुष्ठ रोग को छुपाएं नहीं और इसका इलाज करवाएं।
कालाजार और फाइलेरिया को लेकर भी लगातार चल रहा अभियानः आज एनटीडी दिवस है। इसके तहत सूचीबद्ध की गई बीमारियों में कालाजार और फाइलेरिया भी है। वी.डी.सी.आे आरिफ इकबाल ने बताया कि फाइलेरिया को खत्म करने हर साल जिले में एमडीए अभियान चलाया जाता है। इसके अलावा फाइलेरिया के रोगियों की लाइनलिस्ट के आधार पर अभियान चलाकर मोर्बिडिटी मैनेजमेंट के तहत किट दी जानी है। इसी तरह जिले के कालाजार प्रभावित गांवों में लगातार सिंथेटिक पाइरोथाइरायड का छिड़काव होता है। साथ में कालाजर के मरीजों की लगातार खोज भी होती है। हमलोग फाइलेरिया और कालाजार से जिले को मुक्त करने के लिए लगातार अभियान चलाते रहते हैं।

राफ्ट” मोबाइल एप्लीकेशन  नवजात शिशुओं के लिए वरदान 

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– नवजात शिशु के जन्म के एक सप्ताह के अंदर चार बार गृह भ्रमण कर बच्चों के स्वास्थ्य की जाती है देखभाल
 – रियल टाइम एनालिसिस एंड फीडबैक टूल का संक्षिप्त रूप है राफ्ट
मुंगेर, 28 जनवरी।
कोरोना की तीसरी लहर के दौरान कोविड टेस्टिंग, वैक्सीनेशन के साथ -साथ अन्य लोगों को अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं भी लोगों को लगातार मिल रही हैं। इसी क्रम में जिला में नवजात शिशु मृत्यु दर को कम से कमतर करने की दिशा में अत्याधुनिक तकनीक के सहयोग से लगातार कार्य किया जा रहा है। इसके तहत “राफ्ट” नामक मोबाइल एप्लीकेशन की मदद से लगातार शिशु स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मालूम हो राफ्ट का फूल फॉर्म रियल टाइम एनालिसिस एंड फीडबैक टूल है । इस तकनीक के जरिये स्वास्थ्य कर्मी ऑनलाइन जीपीएस के माध्यम से लगातार नवजात शिशु के स्वास्थ्य की देखभाल कर रहे हैं। इस तकनीक की मदद से जिला में शिशु मृत्यु दर को कम से कमतर करने का प्रयास किया जा रहा है। एक आंकड़े के अनुसार मुंगेर जिला में अप्रैल 2021 से अक्टूबर 2021 के दौरान 0 से 5 आयु वर्ग का कुल 102 चाइल्ड डेथ हुई है। पूरे राज्य में अभी मैटरनल और चाइल्ड डेथ का आंकड़ा 149 अर्थात तीन डिजिट में है । इस मोबाइल एप के माध्यम से शिशु के जन्म के बाद कमजोर नवजात शिशु की पहचान कर लगातार छह महीने तक उसकी विशेष देखभाल केयर इंडिया के प्रखण्ड प्रबंधक और स्वास्थ्य कर्मी कर रहे हैं।
“राफ्ट” मोबाइल एप्लीकेशन से कैसे की जाती है नवजात शिशु की देखभाल :
केयर इंडिया मुंगेर के डीटीओ ऑन तबरेज़ आलम ने बताया कि शिशु जन्म के बाद चिह्नित किए गए नवजात शिशु की देखभाल के लिए एक सप्ताह के अंदर चार दिनों तक केयर इंडिया के कर्मी स्वास्थ्य कर्मी के साथ बच्चों के घर जाते हैं। इसके बाद मोबाइल एप्लीकेशन राफ्ट पर शिशु की तस्वीर अपलोड करने के बाद शिशु स्वास्थ्य की उचित देखभाल की सलाह दी जाती है। इसके बाद चौथे दिन और सातवें दिन केयर इंडिया के प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य प्रबंधक मौके पर पहुंचकर इसी प्रक्रिया को दोहराते हैं। उन्होंने बताया कि मुंगेर जिला के सभी प्रखंड में कार्यरत केयर इंडिया के सभी स्वास्थ्य प्रबंधकों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है, जो जिला के सभी 9 प्रखंडों में कार्यरत हैं।
नवजात शिशु की कैसे की जाती है देखभाल :
• सात दिनों तक नवजात को स्नान नहीं कराना ।
• दिन में 10 से 12 बार स्तनपान व  रात्रि में 3 से 4 बार स्तनपान कराना ।
• नवजात शिशु के नाभि में कुछ भी नहीं लगाना ।
• नवजात को केवल स्तनपान कराना ।
• नवजात शिशु को कंगारू मदर केयर की देखभाल देना।
• शिशु को अतिरिक्त गर्माहट देने के लिए ऊनी कपड़े का प्रयोग करना ।
• शिशु को दूध पिलाने के लिए बोतल का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना ।
इस दौरान कैसे की जाती है कुपोषित बच्चों की पहचान :
उन्होंने बताया कि शिशु जन्म के बाद कुपोषित शिशु की पहचान की जाती है। इसके लिए कुछ मापदंड हैं जैसे :
शिशु जन्म के समय शिशु का वजन 2000 ग्राम या 2000 ग्राम से कम होना ।
• शिशु का 37 सप्ताह से पहले लेना ।
• मां का स्तनपान करने में नवजात शिशु का सक्षम नहीं होना ।
उन्होंने बताया कि राफ्ट मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से नवजात शिशु के कुपोषित चिह्नित होने के बाद शिशु को उसकी मां के साथ सदर अस्पताल मुंगेर स्थित पोषण एवं पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में 28 दिनों के लिए भर्ती कराया जाता है। जहां शिशु स्वास्थ्य के सभी मानकों के अनुसार नवजात शिशु के स्वास्थ्य की नियमित देखभाल की जाती है। यहां शिशु स्वास्थ्य के नियमित देखभाल के लिए फीडिंग डिमांस्ट्रेटर के साथ -साथ कई स्वास्थ्य कर्मी कार्यरत हैं।

सर्वे अभियान :  आंगनबाड़ी सेविका घर घर जाकर 15 से 18 साल के किशोर-किशोरी को कर रहीं चिह्नित 

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– वैक्सीन से वंचित युवाओं की सूची तैयार कर किया जाएगा वैक्सीनेट
– जिले के सभी प्रखंडों में चल रहा है सर्वे अभियान, वैक्सीन के लिए भी किया जा रहा है प्रेरित
लखीसराय, 28 जनवरी-
जिले के सभी प्रखंडों में आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा गृह भेंट की तर्ज पर घर-घर जाकर 15 से 18 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले शत-प्रतिशत किशोर-किशोरियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर सर्वे किया जा रहा है। जिसके माध्यम से प्रत्येक परिवार के 15 से 18 आयु वर्ग के कितने किशोर-किशोरी हैं, इसमें कितने ने अबतक वैक्सीन ले ली है आदि जानकारियाँ प्राप्त कर विभाग द्वारा दिए गए फॉर्मेट में दर्ज कर रही हैं। इस दौरान किशोर-किशोरियों समेत परिवार के अन्य सदस्यों को भी, जो अबतक वैक्सीन से वंचित हैं,  जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो और एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहे। जिससे सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित हों।
– आईसीडीएस कर्मियों का मिल रहा है सहयोग :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जिले में 15 से 18 आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों का आंगनबाड़ी सेविका घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। जिसके माध्यम से वैक्सीन से वंचित युवाओं को चिह्नित कर वैक्सीनेट किया जा रहा है। वहीं, उन्होंने बताया, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने के लिए आईसीडीएस कर्मियों का भी काफी सहयोग मिल रहा है। आईसीडीएस कर्मी सर्वे के साथ-साथ युवाओं को वैक्सीनेशन कराने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही युवाओं के अलावा हर आयु वर्ग के लोगों को भी इस घातक महामारी से बचाव के लिए यथाशीघ्र वैक्सीनेशन कराने और प्रोटोकॉल का पालन जारी रखने के लिए  जागरूक भी कर रहे हैं।
– जिले के सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं को दिए गए हैं आवश्यक निर्देश :
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) आभा कुमारी ने बताया, हर हाल में निर्धारित समयावधि के अंदर सर्वे का कार्य पूरा करने के लिए जिले की सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इसे सुनिश्चित करने के लिए जिले के सभी सीडीपीओ को भी मॉनिटरिंग करने को कहा गया है। ताकि हर हाल में निर्धारित समयावधि के अंदर सर्वे का कार्य पूरा हो सके और वैक्सीन से वंचित युवाओं को चिह्नित कर यथाशीघ्र वैक्सीनेट किया जा सके।
– आंगनबाड़ी केंद्र पर शिविर आयोजित कर वैक्सीन से वंचित युवाओं को किया जाएगा वैक्सीनेट :
आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा सर्वे के दौरान वैक्सीन से वंचित युवाओं की सूची तैयार कर स्थानीय पीएचसी को उपलब्ध कराई जाएगी। जिसके बाद संबंधित क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र पर शिविर आयोजित कर ऐसे युवाओं को वैक्सीनेट किया जाएगा। साथ ही सेविका द्वारा आयोजित होने वाली शिविर की युवाओं को जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि ऐसे युवा निर्धारित समय पर आंगनबाड़ी केंद्र पर वैक्सीनेशन करा सकें और शत-प्रतिशत युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।

बोर्ड परीक्षा  के पूर्व शत-प्रतिशत परीक्षार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को जिले में तेज हुआ अभियान

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– शिविर आयोजित कर छात्रों को दी जा रही है वैक्सीन, एक भी छात्र  वैक्सीन से नहीं रहें वंचित,  लगातार चल रहा है वैक्सीनेशन अभियान
– स्कूल प्रबंधन का भी लिया जा रहा सहयोग, वैक्सीन से वंचित एक-एक छात्रों को चिह्नित कर किया जा रहा वैक्सीनेट
खगड़िया, 28 जनवरी-
आगामी  01 फरवरी से इंटरमीडिएट और 17 फरवरी से मैट्रिक बोर्ड परीक्षा शुरू होगी। परीक्षा से पूर्व शत-प्रतिशत छात्र-छात्राओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में वैक्सीनेशन अभियान तेज कर दिया गया है।  जिले के विभिन्न प्रखंडों में चयनित एवं चिह्नित जगहों पर लगातार वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर छात्रों को वैक्सीन दी जा रही है। इस दौरान वैक्सीन लेने वाले छात्रों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इस बात का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। ताकि सभी छात्र सुविधाजनक तरीके से वैक्सीनेशन करा सकें और परीक्षा शुरू होने के पूर्व जिले के शत-प्रतिशत छात्रों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित और अभियान सफल हो सके। इसको लेकर जिले में नियमित तौर पर वैक्सीनेशन  अभियान चलाकर छात्रों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी जा रही है।
– जिले में शत-प्रतिशत छात्र-छात्राओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर लगातार चल रहा  अभियान :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया अगले माह इंटर और मैट्रिक बोर्ड परीक्षा शुरू होने वाली है। दोनों बोर्ड परीक्षा शुरू होने के पूर्व ही शत-प्रतिशत छात्रों को वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है।  वैक्सीनेशन अभियान चलाकर 15 से 18 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी किशोर-किशोरियों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। इसे सुनिश्चित करने को लेकर शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन का भी सहयोग लिया जा रहा है।
– एक-एक छात्रों को चिह्नित कर किया जा रहा  वैक्सीनेट :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया परीक्षा शुरू होने के पूर्व शत-प्रतिशत छात्र-छात्राओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने और एक भी छात्र-छात्रा वैक्सीन से वंचित नहीं रहे, को लेकर जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसके माध्यम से एक-एक छात्र-छात्रा को चिह्नित कर वैक्सीनेट किया जा रहा है। इस कार्य में स्कूल प्रबंधन का भी सहयोग लिया जा रहा है। मिशन, सिर्फ एक ही कि परीक्षा शुरू होने के पूर्व शत-प्रतिशत परीक्षार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो और सभी परीक्षार्थी सुरक्षित माहौल में परीक्षा दे सकें। वहीं, उन्होंने कहा, मैं जिले के तमाम परीक्षार्थियों से अपील भी करता हूँ कि जो भी परीक्षार्थी किसी भी कारणवश अबतक वैक्सीन नहीं ले पाएं है, वह यथाशीघ्र वैक्सीनेशन कराएं और खुद को इस घातक महामारी से सुरक्षित करें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

सीईसी के निदेशक प्रो. जेबी नड्डा ने आर्यभट्ट ज्ञान विवि में एसजेएमसी के छात्रों को संबोधित किया

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 – नये शिक्षा नीति के बारे में छात्रों को बताया
– देश में उच्‍च शिक्षा का स्‍तर 28 प्रतिशत है
– डिजिटल शिक्षा का विस्‍तार जरूरी है
– सबको शिक्षा का अवसर मुहैया कराना चुनौती
पटना –
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में स्थित स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में छात्रों को संबोधित करते हुए प्रो. नड्डा ने नये शिक्षा नीति के बारे में उनको जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि नये शिक्षा नीति का उद्देश्‍य देश की शिक्षा में संरचनात्मक परिवर्तन लाना है। साथ ही यह संगठनात्मक परिवर्तन के लिए भी है। देश में उच्‍च शिक्षा का स्‍तर 28 प्रतिशत है जिसे 2035 तक 50 प्रतिशत तक ले कर जाना है। यह एक कठिन चुनौती है। देश में अभी चालीस हजार के आसपास कॉलेज है। जो की सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों से हैं। वर्तमान में सरकारी तथा निजी विश्‍वविद्यालय सब मिल कर भी इस लक्ष्‍य को नहीं पा सकते है। इस लक्ष्‍य को पाने का मात्र एक ही रास्‍ता है वह है डिजिटल शिक्षा का विस्‍तार। यह डिजिटल यूनिवर्सिटी बना कर ही संभव हो सकता है। जिसे आभासीय विश्वविद्यालय भी कहा जा सकता है।
देश के सामने सबको शिक्षा का अवसर मुहैया कराने की चुनौती है
देश के सामने सबको शिक्षा का अवसर मुहैया कराने की चुनौती है। यह हमारे लिए एक अवसर की तरह भी है। यह सपना डिजिटल यूनिवर्सिटी बना कर ही पूरा किया जा सकता है। आपको हैरानी होगी पाकिस्‍तान  में पहले से ही ड‍िजिटल यूनिवर्सिटी मौजूद है। एक बात जो गौर वाली है वह यह है कि हमारी यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की भी काफी कमी है। डिजिटल यूनिवर्सिटी के पास इस समस्‍या का भी हल है।
नये शिक्षा नीति में अंतर – अनुशासनिक शिक्षा की भी बात की गई है
नये शिक्षा नीति में अंतर – अनुशासनिक शिक्षा की भी  बात की गई है।  हम लोगों को समग्रता में विकास करना होगा। जो विद्यार्थी भूगोल ले कर पढ़ाई कर रहें है उन्‍हें इतिहास भी जानना होगा। इस नई नीति के तहत विद्यार्थियों को पसंद की विषय लेने की छूट होगी। अभी हम सिस्टम की कठोरता के कारण यह  हासिल नहीं कर पा रहे हैं।
डिजिटल माध्‍यम में कम समय में अपनी बात कहना आना चा‍हिए
डिजिटल संचार के बारे में उन्‍होंने बताया की यहां पर कम समय में अपनी बात कहना आना चा‍हिए। डिजिटल दूनिया में व्याकरण की अवधारणा समाप्त हो गई है। सबसे जरूरी है कि आप संपर्क कर पा रहे है कि नहीं। संचार में संदेश का बहुत मायने है। शरीर हमेशा शब्‍दों से ज्‍यादा संचार करता  है।
अपना जीवन चुनें, अपनी ताकत को जानें
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्‍होंने कहां  की  अपना जीवन चुनें, अपनी ताकत को जानें, अपनी रुचि का पीछा करें। प्रो. जगत भूषण नड्डा, सीईसी के निदेशक है। शैक्षिक संचार के लिए कंसोर्टियम, जिसे सीईसी के नाम से जाना जाता है, भारत के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा स्थापित अंतर विश्वविद्यालय केंद्रों में से एक है। यह उभरती सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उचित उपयोग के साथ टेलीविजन के शक्तिशाली माध्यम के माध्यम से उच्च शिक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लक्ष्य के साथ स्थापित किया गया है।  प्रो. जगत भूषण नड्डा एक कुशल शिक्षाविद, प्रशासक और एक विद्वान हैं, जिन्हें सैंतीस की कम उम्र में प्रबंधन में प्रोफेसर नियुक्त होने का गौरव प्राप्त है।  तब से देश भर में आठ अलग-अलग प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और उच्च स्तर के संस्थानों में संकाय के रूप में काम किया है।
इस मौके पर स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के निदेशक, डॉ इफ्तेख़ार अहमद, बिहार के एमएलसी राजेन्द्र गुप्ता कोऑर्डिनेटर डॉ मनीषा प्रकाश और शिक्षक डॉ अजय कुमार सिंह, डॉ अमित कुमार, डॉ अफ़ाक हैदर उपस्थित रहें।

जीविका दीदियों को सुरक्षित गर्भपात के बारे में दिया गया प्रशिक्षण

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-बौंसी में सुरक्षित गर्भपात पर जागरूकता लाने के बारे में कहा गया
-समाज के सभी लोगों को इस पर काम करने की बताई गई जरूरत
बांका, 28 जनवरी-
सुरक्षित गर्भपात कानूनी तौर पर वैध है या नहीं, इस बात की जानकारी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को नहीं है। इसी जानकारी देने के उद्देश्य से शुक्रवार को बौंसी पखंड के मडुअवरण में आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के तत्वावधान में जीविका दीदियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान आईपास के रिसर्च एंड ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर रितेश रंजन ने सुरक्षित गर्भसमापन और गर्भपात कानून के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में कई महिलाएं अनचाहे रूप से गर्भवती हो गईं। कोरोना के कारण वह अपना सुरक्षित गर्भपात भी नहीं करा पायीं। सरकारी अस्पतालों में मिल रही सुविधाओं से वह वंचित रह गईं। लिहाजा उन महिलाओं का गर्भ अब पहली तिमाही से दूसरी तिमाही में प्रवेश कर चुका है। इसलिए उनका सुरक्षित तरीके से चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है। इससे वह सुरक्षित तरीके से अपना गर्भपात करा सकेंगी। इसे लेकर समाज में जागरूकता लानी होगी। इस पर सभी लोगों को प्रयास करने की जरूरत है।
सुरक्षित गर्भपात को लेकर परिजनों को ध्यान देने की जरूरतः रितेश रंजन ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट -1971 के तहत 20 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त करने की कानूनी तौर पर इजाजत है। 1971 में बने इस कानून को लेकर हालांकि कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। इसे लेकर परिजनों को खास ध्यान देने की आवश्यकता है। बिचौलिये के संपर्क में नहीं पड़ना चाहिए। समस्या होने पर पास के सरकारी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में कानूनी तौर पर निःशुल्क गर्भपात की सुविधा है। विशेष परिस्थिति पैदा होने पर एंबुलेंस के जरिये महिला मरीज को अच्छी जगह भेजने की व्यवस्था मौजूद है। 12 सप्ताह तक एक प्रशिक्षित डॉक्टर और 13 से 20 सप्ताह के अंदर तक दो प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में सरकारी अस्पताल या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल में गर्भपात होनी चाहिए।
दूसरी तिमाही में गर्भपात कराने के लिए जाएं मायागंजः आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के रितेश रंजन ने कहा कि भारत में होने वाली मातृ मृत्यु में आठ प्रतिशत मृत्यु असुरक्षित गर्भपात के कारण होती है। यदि किसी महिला को माहवारी के दिन चढ़ गए हो या उससे अनचाहे गर्भ ठहरने की आशंका हो तो तत्काल  एएनएम से संपर्क करना चाहिए। या फिर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यदि गर्भधारण की पुष्टि होती है और महिला गर्भ नहीं रखना चाहती है तो तत्काल गर्भपात का निर्णय लेना चाहिए। अगर गर्भ नौ सप्ताह तक का है तो गोलियों से भी गर्भपात हो सकता है। गर्भपात जितना जल्द कराया जाता है, उतना ही सरल और सुरक्षित रहता है। बौंसी रेफरल अस्पताल में सिर्फ पहली तिमाही में गर्भपात सेवा दी जाती है। दूसरी तिमाही में गर्भपात कराने के लिए भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल का रुख करना चाहिए। गर्भपात के साथ तत्काल गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग करना चाहिए। गर्भपात और गर्भधारण के बीच छह महीने का अंतराल होना जरूरी है। मौके पर आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के राजीव भी मौजूद थे।

सबौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एफपीएलएमआईएस का दिया गया प्रशिक्षण

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-परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री ऑनलाइन लेने के बताए तरीके
-एएनएम ऑनलाइन सामग्री मंगवाकर क्षेत्र के लोगों में  बांटेंगी
भागलपुर, 28 जनवरी-
सबौर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में शुक्रवार को क्षेत्र की एएनएम को फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक इनफॉरमेशन सिस्टम (एफपीएलएमआईएस) का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक आलोक कुमार ने दिया। प्रशिक्षण के दौरान सभी लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन कैसे प्राप्त करना है, इसकी जानकारी दी गई। इंडेंट करने से लेकर रिसीव करने के तरीके प्रशिक्षण के दौरान बताए गए। कंडोम, कॉपर टी, अंतरा आदि सामग्री को ऑनलाइन प्राप्त करने की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी गई। सामग्री प्राप्त कर क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार से लेकर वितरण करने तक के बारे में प्रशिक्षण के दौरान बताया गया। मौके पर बीएम मुकेश, अकाउंटेंट बादल और स्टोरकीपर समेत कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। प्रशिक्षण ले रही एएनएम को सभी बारीकी को समझ कर क्षेत्र में बेहतर तरीके  से काम करने के लिए कहा।
परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार भी करेंगी एएनएमः प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के बाद एएनएम अब परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन मंगवाकर उसे क्षेत्र में वितरण करने का काम करेंगी। साथ ही परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के इंडेंट से लेकर प्राप्त करने के तरीके और इसका क्षेत्र में किस तरह से प्रचार-प्रसार करना है, इसकी जानकारी वे अपने सहयोगी को भी देंगी। साथ ही सामग्री के वितरण के दौरान इसे लेकर लोगों को जागरूक करने का काम भी एएनएम करेंगी। लोगों को समझाएंगी कि इसके इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
तीन तरीके से प्राप्त कर सकेंगे परिवार नियोजन की सामग्रीः प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि परिवार नियोजन सामग्री को ऑनलाइन तीन तरीके से मंगाया जा सकता है। पहला मोबाइल एप के जरिये, दूसरा मोबाइल से मैसेज कर और तीसरा कंप्यूटर के जरिये ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। एएनएम इसे मोबाइल एप और मैसेज के जरिये मंगा सकती हैं, जबकि स्टोरकीपर मैसेज और कंप्यूटर से ऑनलाइन इंडेंट कर भी मंगवा सकते हैं। पहले क्षेत्र के लोगों की जरूरतों के मुताबिक इंडेंट करेंगे। सामग्री आ जाने के बाद फिर उसका क्षेत्र के लोगों के बीच वितरण करेंगी।
परिवार नियोजन पर किया जा रहा फोकसः सीएचसी प्रभारी डॉ. शुभ्रा वर्मा ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन को लेकर लगातार फोकस किया जा रहा है। इसे लेकर परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के वितरण से लेकर समय-समय पर कैंप और मेला भी लगाया जाता है। जहां पर कि लोगों को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में बताया जाता है। साथ ही किस तरह से बच्चे की प्लानिंग करनी है, इसकी जानकारी दी जाती है। दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल और पहला बच्चा 20 साल से पहले नहीं हो, इस बारे में बताया जाता है।

लखीसराय के चानन में नवनिर्मित सीएचसी भवन स्वास्थ्य विभाग को किया गया हस्तांतरित

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– परिवार नियोजन ऑपरेशन की सुविधा शुरू, अस्थाई उपायों को अपनाने वाली लाभार्थियों की भी हुई काउंसिलिंग
– अब सुदूर वर्ती इलाके के लोगों को भी आसानी के साथ मिलेगी समुचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ, इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा गाँव से बाहर

लखीसराय, 27 जनवरी

गुरुवार को लखीसराय पीएचसी अंतर्गत सुदूर वर्ती इलाके के चानन में नव निर्मित सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) भवन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। जो इस इलाके में निवास करने वाले लोगों के लिए सबसे बेहतर और अच्छी खबर है। इससे ना सिर्फ लोगों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी बल्कि, इलाज के लिए गाँव से बाहर भी नहीं जाना पड़ेगा। वहीं, भवन हस्तांतरित होने के साथ ही परिवार नियोजन योजना के तहत सीएचसी में ऑपरेशन (महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी) की भी सुविधा बहाल कर दी गई। अब इस इलाके के लोगों परिवार नियोजन के स्थाई साधन को अपनाने और सीएचसी स्तर पर मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लखीसराय या जिला मुख्यालय जाने की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। बल्कि, अब गाँव में ही यह सुविधा मिलेगी। वहीं, इस उपलब्धि की जानकारी मिलते ही इलाके के लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।

– सुदूर वर्ती इलाके के लोगों के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि : सिविल सर्जन डाॅ देवेंद्र चौधरी ने बताया, चानन क्षेत्र जिले के सुदूर वर्ती इलाके के अंतर्गत आता है। जिसके कारण वहाँ के लोगों को आसानी के साथ समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग लंबे समय से प्रयासरत था। जो गुरुवार को सफल हुआ। यह उस इलाके के लोगों के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है । सरकार की इस पहल से अब उस इलाके के लोगों को इलाज के लिए प्रखंड और जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगा। बल्कि, सीएचसी स्तर पर मिलने वाली सभी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं गाँव में ही मिलेगी और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से लाभ भी ले सकेंगे। एक ही छत के नीचे प्रसव की भी सुविधा मिल रही है। इसलिए अब प्रसव पीड़िता को भी किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं होगी।

– अस्थाई साधन अपनाने वाली लाभार्थियों की भी की गयी काउंसिलिंग :
लखीसराय पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ रौशेक कुमार ने बताया, गुरुवार से चानन सीएचसी में परिवार नियोजन ऑपरेशन की सुविधा बहाल कर दी गई। इसके अलावा अस्थाई साधन को अपनाने वाली लाभार्थियों की भी काउंसिलिंग की गयी। वहीं, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, पहले दिन 10 योग्य महिलाओं की स्थाई साधन बंध्याकरण के लिए काउंसिलिंग की गयी। उन्होंने कहा कि इलाके के लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले, इसके लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है।