जिले में तेज हुआ किशोर-किशोरियों का वैक्सीनेशन अभियान
सफलता : लखीसराय के सूर्यगढ़ा में 80 % लोगों को लगाई जा चुकी दोनों डोज की वैक्सीन
सेकेंड डोज़ वैक्सीनेशन में मुंगेर ने हासिल किया ऐतिहासिक मुकाम
सदर अस्पताल में ब्लड बैंक का उद्घाटन
गर्म कपड़े पहनें और गर्म पानी खूब पीएं
-शीतलहर में बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी जरूरी
-धूप सेंकें और जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें
बांका, 6 जनवरी।
जिले में शीतलहर का प्रकोप जारी है। पारा लगातार नीचे बना हुआ है। ऐसे मौसम में लोगों का बीमार पड़ना आम बात है। साथ ही कोरोना की तीसरी लहर की आशंका प्रबल हो गई है। ऐसे में सावधानी ही बचाव का सबसे बेहतर तरीका है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि ठंड से खुद को बचाकर रखें। हमेशा गर्म कपड़े पहनें। इस मौसम में पानी कम पीने की शिकायत की वजह से भी लोग बीमारियों की चपेट में आते हैं। इसलिए पानी खूब पीएं, लेकिन इस बात का जरूर ध्यान रखें कि पीने से पहले उसे गर्म कर लें। साथ ही दिन में धूप भी सेंकें। घर में अगर अलाव की व्यवस्था हो तो उसे भी सेकें।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि बीमारी से बचाव का सबसे बेहतर तरीका सतर्कता ही है। अगर लोग गर्म कपड़े पहनेंगे और बेवजह घरों से बाहर नहीं निकलेंगे तो उनका कई बीमारियों से बचाव होगा। बासी खाना खाने से बचें। ताजा भोजन करें और पानी भी गर्म ही पीएं। इन सावधानियों को अगर लोग बरतेंगे तो बीमारियों की चपेट में आने से बचे रहेंगे। साथ ही अभी कोरोना के नए मरीज फिर से मिलने लगे हैं। इसलिए तीसरी लहर जोर नहीं पकड़ लें इसलिए भी सावधानी बरतना जरूरी है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि घरों से कम निकलें। किसी भी तरह की बीमारी हो तो जांच जरूर करा लें। सर्दी खांसी या अन्य तरह के लक्षण दिखाई तो कोरोना जांच जरूर कराएं।
घर पर करें व्यायामः डॉ. चौधरी कहते हैं कि अभी के मौसम में मॉर्निंक वॉक करना सही नहीं है। अगर जाएं भी धूप खिलने के बाद जाएं। हां, घर पर व्यायाम जरूर करें। प्रतिदिन औसतन कम-से-कम 45 मिनट तक अगर घर पर व्यायाम करेंगे तो आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहेगी। इससे आप बीमार होने से बचे रहेंगे। अगर बीमार पड़ भी गए तो उससे आप आसानी से उबर जाएंगे। इसलिए अभी को मौसम में मॉर्निंग वॉक करने से बचें और घर पर ही शारीरिक कसरत करें। भोजन पर नियंत्रण रखें। ज्यादा तेल-मसाले वाले भोजन करने से परहेज करें। अत्यधिक तेल मसाले का सेवन बीमारियों की वजह बनती है।
बीमार और बुजुर्ग लोग रहें सतर्कः डॉ. चौधरी कहते हैं कि ठंड के मौसम में बीमार और बुजुर्ग लोगों को विशेष तौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है। सांस फूलने की बीमारी, हाईपरटेंशन या फिर शुगर के जो मरीज हैं वह घर पर कसरत करने के अलावा दवा का नियमित रूप से सेवन करें। बीमारियों में जरा सा उतार-चढ़ान खतरनाक हो सकता है। कोई भी परेशानी होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर की बताए बातों का अनुसरण करें। अपने से डॉक्टर बनने की कोशिश नहीं करें। बीमार और बुजुर्ग लोग कोरोना की गाइडलाइन का पालन हर हाल में करें। मास्क पहने रखें और सामाजिक दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ से बचें और दो गज की दूरी बनाए रखें।
गांधी चौक पर किशोरों-किशोरियों का टीकाकरण शुरू
घर में मौजूद खाद्य पदार्थों से एनीमिया पर करें वार
• विटामिन एनीमिया से लड़ने में कारगर
• हरी साग-सब्जी का नियमित सेवन काफ़ी जरुरी
• पोषक तत्वों की कमी के साथ संक्रामक रोग एनीमिया का प्रमुख कारण
मुंगेर, 5 जनवरी 2022 : एनीमिया यानी खून की कमी एक ऐसी स्थिति है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम जाती है । ऑक्सीजन ले जाने के लिए हीमोग्लोबिन की आवश्यकता होती है। यदि शरीर में बहुत कम या असामान्य लाल रक्त कोशिकाएं हैं, या पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं है, तो शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन ले जाने के लिए रक्त की क्षमता कम हो जाती है। इसके परिणाम स्वरूप थकान, कमजोरी, चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। एनीमिया के कारण बच्चों में उम्र के मुतबिक वजन एवं लंबाई भी कम जाती है एवं वे एवं दुबलापन एवं नाटापन के शिकार हो जाते हैं। जिससे बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाती है।
पोषक तत्वों की कमी के साथ संक्रामक रोग ज़िम्मेदार:
एनीमिया के सबसे आम कारणों में पोषक तत्वों की कमी, विशेष रूप से आयरन की कमी शामिल होती है। इसके साथ ही विटामिन की कमी भी एनीमिया के लिए जिम्मेदार होते हैं। शरीर में विटामिन सी, ए, डी, बी12 एवं ई की भूमिका अधिक होती है। विटामिन सी शरीर में आयरन के चयापचय को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है। विशेष रूप से यह आयरन के अवशोषण एवं इसकी गतिशीलता को भी बढ़ाता है. इसलिए विटामिन सी युक्त आहार जैसे आँवला, नीबूं एवं अमरुद जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन जरुर करना चाहिए । ये खाद्य पदार्थ आसानी से घरों में उपलब्ध हो जाते हैं। एनीमिया के प्रमुख कारणों में पोषक तत्वों की कमी के साथ कई संक्रामक रोग भी शामिल होते हैं । जिसमें मलेरिया, टीबी, एचआईवी और अन्य परजीवी संक्रमण शामिल हैं. इन रोगों से ग्रसित होने के बाद अमूमन शरीर में खून की कमी हो जाती है ।
2 साल से कम उम्र के बच्चों के आहार पर दें ध्यान :
एनीमिया किसी भी आयुवर्ग के लोगों को हो सकता है ।लेकिन 2 साल से कम उम्र के बच्चों में खून की जरूरत अधिक होती है। 2 साल से कम उम्र के बच्चों की वृद्धि दर बहुत अधिक होती है. 6 से 24 महीने की उम्र के बीच, शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम आयरन की आवश्यकता जीवन के अन्य चरणों की तुलना में अधिक होती है। जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं को अधिक जोखिम होता है। 2 साल की उम्र के बाद विकास की दर धीमी हो जाती है एवं हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती है । इस लिहाज से इस दौरान शिशु के आहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है । जन्म से 6 माह तक केवल स्तनपान जरुरी होता है. इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए । वहीं, 6 माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरुरी होता है. जिसमें बच्चे को अर्ध ठोस आहार देना चाहिए. साथ ही यह ध्यान भी देना चाहिए कि उनके आहार में आनाज, विटामिन एवं वसा की मात्रा शामिल हो ।
एनीमिया को दूर करने के लिए सरल खाद्य पदार्थ :
• हरी साग-सब्जी
• चना एवं गुड़
• मौसमी फ़ल
• मीट, मछली एवं चिकन
दवा से अधिक जागरूकता की जरूरत :
सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया एनीमिया से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग कई प्रयास कर रहा है ।पाँच से 59 महीने के बालक और बालिकाओं को आईएफए की सिरप एवं 5 से 9 साल के लड़के और लड़कियाँ, 10 से 19 साल के किशोर औरकिशोरियां, 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएँ (जो गर्भवती या धात्री न हो), गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आईएफए की गोली निशुल्क दी जा रही है ताकि एनीमिया के दंश से उन्हें बचाया जा सके। इसके साथ ही यह जरुरी भी है कि सभी आयुवर्ग के लोग अपने खाद्य पदार्थों पर ध्यान भी दें एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें। दवा से अधिक एनीमिया को लेकर जागरूकता की जरूरत है।
कोरोना से दिवंगत के आश्रितों को उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री
– परबत्ता के मरैया गाँव आश्रितों के बीच वितरित की गई राहत समाग्री
– आश्रितों के घर जाकर उपलब्ध कराई गई राहत समाग्री की पैकेट
खगड़िया, 05 जनवरी।
जिले में कोविड-19 के दौरान कोरोना से मृत होने वाले सभी दिवंगत के आश्रितों की सहायता कर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया की टीम सराहनीय भूमिका निभा रही है। ऐसे पीड़ित परिवारों को जीवन-यापन में किसी प्रकार की कोई परेशानियाँ का सामना करना पड़े, इसको लेकर जहाँ स्थानीय जिला प्रशासन पूरी तरह सजग है। वहीं, इसे सार्थक रूप देने के लिए कोरोना से जिन व्यक्ति का निधन हो गया था, उनके आश्रितों के बीच राहत वितरण सामग्री वाहन के माध्यम से घर-घर जाकर राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। ऐसी पहल मानवता की बड़ी मिसाल पेश है । यह समाजहित में बेहतर और सराहनीय कदम भी है। वहीं, बुधवार को जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत मरैया गाँव में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया द्वारा राहत सामग्री पैकेट का वितरण किया गया। सामग्री का वितरण परबत्ता सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन के नेतृत्व में प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक दीपक कुमार एवं केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार के सहयोग से लाभार्थियों के घर-घर जाकर किया गया।
– पीड़ित परिवार का डेटाबेस तैयार रखा गया है:
परबत्ता सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन ने कहा, पीड़ित परिवारों के सहयोग के लिए केयर इंडिया की टीम द्वारा उठाया गया यह कदम का सराहनीय और मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। इसके लिए केयर इंडिया की पूरी टीम को धन्यवाद । वहीं, उन्होंने कहा, प्रखंड के सभी पीड़ित परिवारों को लगातार घर-घर जाकर राहत सामग्री
सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, उन्होंने बताया, प्रखंड के सभी पीड़ित परिवारों को सरकारी स्तर से मिलने वाली तमाम सुविधाएं लगातार सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराई जा रही है। इसके आगे भी जो भी सुविधाएं होगी, वह निश्चित रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता का लाभ मिलने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इसके लिए सभी पीड़ित परिवारों की डेटाबेस तैयार कर सुरक्षित रखा गया है। ताकि एक भी पीड़ित परिवार किसी प्रकार की सुविधा से वंचित नहीं रहें और सभी चिह्नित परिवारों को सुविधाजनक तरीके से सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
– पाँच से अधिक संख्या वाले पीड़ित परिवारों को दो पैकेट दी जाती है राहत सामग्री :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, जिले में चिह्नित सभी पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री की पैकेट उपलब्ध कराई जा रही है। जिसमें चावल, आटा, मसूर दाल, चना, चूड़ा, सूजी, सरसो तेल, सब्जी मसाला, नहाने का साबुन, डिटर्जेंट पाउडर, टॉफी और बिस्किट समेत घरेलू उपयोग में आने वाले अन्य सामग्री को पैक किया गया है। वहीं, उन्होंने बताया, पाँच की संख्या तक वाले पीड़ित परिवारों को एक एवं इससे अधिक संख्या वाले पीड़ित परिवारों को दो किट राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। ताकि पीड़ित परिवारों को उचित मात्रा में सामग्री मिल सके और पूरे परिवारों के लिए पर्याप्त हो सके।
– पीड़ित परिवारों का लगातार किया जा रहा सहयोग :
परबत्ता सीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक दीपक कुमार ने बताया, प्रखंड के सभी पीड़ित परिवारों के लिए शासन-प्रशासन द्वारा लगातार जरूरी निर्णय लिए जा रहे और आवश्यक सहयोग किए जा रहे हैं। इस कार्य में केयर इंडिया का भी सहयोग मिल रहा है । वहीं, उन्होंने बताया, इसके अलावा सभी पीड़ित परिवारों का जिला प्रशासन द्वारा हर संभव विशेष ख्याल रखा जा रहा है।
स्वच्छता एवं साफ़-सफ़ाई कोरोना के साथ एनीमिया रोकथाम में भी कारगर
• गर्भवती महिलाएं साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
• स्वच्छ पानी के सेवन से कई रोगों से मिलेगी मुक्ति
• हुकवर्म पेट में संक्रमण एवं एनीमिया के लिए होता है जिम्मेदार
लखीसराय / 5, जनवरी: कोरोना संक्रमण काल में स्वच्छता एवं साफ-सफाई की जरूरत को सबने महसूस किया है. कोविड की तीसरी लहर के मद्देनजर भी लोगों से मास्क पहनने एवं हाथों की नियमित सफाई करने की अपील की जा रही है. स्वच्छता एवं साफ़-सफाई कोरोना रोकथाम के साथ एनीमिया बचाव में भी काफ़ी कारगर है. साथ ही ऐसे कई अन्य संक्रामक रोग भी हैं जो दूषित पानी के सेवन या स्वच्छता के आभाव में फैलती है. जिसमें डायरिया एवं टायफाईड प्रमुखता से शामिल होते हैं.
हुकवर्म से शरीर में संक्रमण के साथ होती है खून की कमी:
हुकवर्म एक परजीवी होता है. यह दूसरे जीवित प्राणी के शरीर में जीवित रहते हैं. हुकवर्म इन्फेक्शन छोटी आंत में होता है. हुकवर्म का लार्वा त्वचा के संपर्क में आने के बाद छोटी आंत में पहुँचता है. जिसके बाद शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं. जिसमें पेट में दर्द, उल्टी का होना, भूख न लगना, शरीर में खुजली होना, वजन कम जाना एवं थकान जैसे लक्षण शामिल होते हैं. हुकवर्म के कारण शरीर में हेमोग्लोबिन यानी खून की कमी भी हो जाती है. समान्य तौर पर यह संक्रमण गाँव में अधिक होता है जिससे छोटे बच्चे भी प्रभावित होते हैं. यह संक्रमण ज्यादातर गंदगी के कारण ही होता है. खुले में शौच करना, हाथों की अच्छी से सफाई नहीं करना एवं नंगे पाँव जमीन पर चलने से इस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इस लिहाज से साफ़-सफाई पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आँतों का वर्म विकासशील देशों के 10 फीसदी आबादी को संक्रमित करता है. जिससे एनीमिया, कुपोषण एवं बच्चों में विकास बाधित होता है.
गर्भवती महिलाएं बरतें सावधानियां:
गर्भवती महिलाओं को साफ़-सफाई पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है. गर्भावस्था में खून की कमी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं. हाथों की उचित साफ़-सफाई के आभाव में हुकवर्म का खतरा गर्भवती महिलाओं को भी हो सकता है एवं इससे संक्रमण के साथ खून की कमी भी हो सकती है. इस लिहाज से गर्भवती महिलाएं हर बार हाथ धोते समय साबुन या राख का उपयोग करें. बहते या बहते पानी के नीचे हाथ धोएं. भोजन को तैयार करने या खाने से पहले हाथ धोएं और किसी को खिलाने या दवाइयाँ देने से पहले भी हाथों की सफाई करें. शौचालय जाने के बाद, शौच करने वाले व्यक्ति की सफाई करने, नाक बहने, खांसने, छींकने या किसी जानवर या जानवर के अपशिष्ट को संभालने के बाद और किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल करने से पहले और बाद में भी हाथ धोएं. साथ ही घर में पीने के पानी को स्वच्छ रखें. पानी को उबालकर या फ़िल्टर युक्त पानी का सेवन करना जरुरी है. इससे दूषित पानी से फैलने वाले रोगों की आसानी से रोकथाम हो सकती है.
स्वच्छता एवं साफ़-सफाई वर्तमान समय की माँग:
सिविल सर्जन डॉ द्वेन्द्र चौधरी ने बताया कि वर्तमान समय में स्वच्छता एवं साफ़-सफाई अनिवार्य है. इससे कोरोना संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहयोग मिलेगा. साथ ही दूसरे संक्रामक रोगों से भी निजात मिलेगी. उन्होंने बताया कि बच्चों में डायरिया दूषित पानी एवं हाथों की साफ़-सफाई की कमी के कारण ही होते हैं. इसको लेकर आशा कार्यकर्ता गृह भ्रमण के दौरान हाथों की सफाई के बारे में जानकारी भी देती है. उन्होंने कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर यह अपील भी की कि लोग घर से निकलने से पहले मास्क का प्रयोग करें एवं जिन्होंने टीका नहीं लिया वह जरुर टीका लें. साथ ही 15 से 18 आयुवर्ग के युवा भी ख़ुद को टीकाकृत कर लें