जिले में तेज हुआ किशोर-किशोरियों का वैक्सीनेशन अभियान 

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– डीआईओ ने विभिन्न सेशन साइटों का निरीक्षण कर कर्मियों को दिए आवश्यक निर्देश
– वैक्सीनेशन को लेकर सभी सेशन साइटों पर युवाओं में दिखा उत्साह
खगड़िया, 06 जनवरी
कोविड के नये वैरिएंट के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से जहाँ सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है वहीं, प्रोटोकॉल के पालन के साथ जिले में कोविड वैक्सीनेशन अभियान तेज कर दिया गया है। ताकि बढ़ते प्रभाव पर विराम सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी के प्रभाव से सुरक्षित हो सकें। वहीं, सोमवार से जिले में शुरू हुए 15 से 18 आयु वर्ग युवाओं (किशोर-किशोरियों) के  वैक्सीनेशन अभियान को भी तेज कर दिया गया है। अभियान शुभारंभ के चौथे दिन भी जिले के सभी प्रखंडों में चयनित एवं चिह्नित स्थलों पर वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर इन आयु वर्ग के युवाओं को वैक्सीनेट किया गया। वहीं, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान एवं केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद समेत अन्य पदाधिकारियों ने युवाओं के वैक्सीनेशन  शिविर स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान शिविर में तैनात मेडिकल टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। ताकि युवाओं को वैक्सीनेशन कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी युवा सुरक्षित माहौल में सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें।
– वैक्सीनेशन के साथ-साथ प्रोटोकॉल का पालन भी जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, जिस तरह सभी सेशन साइटों पर वैक्सीनेशन कराने को लेकर युवाओं में उत्साह दिखा, वह वाकई सराहनीय है। किन्तु, इस घातक महामारी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन के साथ-साथ प्रोटोकॉल का पालन भी जरूरी है। क्योंकि, एकबार फिर से संक्रमण का दौर शुरू हो गया है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि वैक्सीनेशन के साथ-साथ प्रोटोकॉल का पालन भी जारी रखें और मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी का पालन एवं नियमित तौर पर हाथों की सफाई समेत अन्य सावधानी को बनाएं रखें। इस घातक महामारी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सबसे कारगर और उपयुक्त उपाय है। इससे खुद के साथ-साथ पूरा समुदाय सुरक्षित रहेगा।
– जिले में युवाओं के साथ-साथ हर आयु के लोगों का भी हो रहा है वैक्सीनेशन :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, एकबार फिर से कोविड के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए जिले में हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए जहाँ युद्ध स्तर पर युवाओं का वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। वहीं, हर आयु वर्ग के लाभार्थियों का भी नियमित तौर पर वैक्सीनेशन हो रहा है। जिसके माध्यम से वैक्सीन से वंचित एक-एक व्यक्ति को चिह्नित कर वैक्सीनेट किया जा रहा है। इस दौरान सेकेंड डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा करने वालों को भी वैक्सीन दी जा रही है। ताकि इस बढ़ते प्रभाव पर हर हाल में विराम लग सके और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित हो सकें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।

सफलता : लखीसराय के सूर्यगढ़ा में 80 % लोगों को लगाई जा चुकी दोनों डोज की वैक्सीन 

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– पीएचसी के पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ-साथ प्रखंडवासियों के सहयोग ने लाया रंग
– सामुदायिक स्तर पर लोगों को सुरक्षित करने के लिए प्रयास जारी, नियमित तौर पर चल रहा वैक्सीनेशन अभियान
लखीसराय, 06 जनवरी
जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का कोविड वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने और इस घातक महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोगों को सुरक्षित बनाने के लिए जिले में नियमित तौर पर लगातार वैक्सीनेशन अभियान अभियान चल रहा है । साथ ही स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर जरूरी प्रयास जारी है। जिसका सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगा है । पूरे समुदाय पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ा है। जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड के 80 % लोगों को स्थानीय पीएचसी द्वारा अबतक दोनों डोज की वैक्सीन लगाई जा चुकी है। यह आंकड़ा प्रखंड के मतदाता सूची में दर्ज आबादी की संख्या के मुताबिक है। इसके अलावा जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर प्रयास जारी है । इस घातक महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोगों को सुरक्षित करने के लिए अन्य जरूरी पहल भी जारी है।
– पीएचसी की पूरी स्वास्थ्य टीम के साथ-साथ स्थानीय लोगों का भी रहा सहयोग :
सूर्यगढ़ा पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ सत्येंद्र कुमार ने बताया, यह सफलता पीएचसी की पूरी टीम की कड़ी व दृढ़संकल्प मेहनत और स्थानीय लोगों का सकारात्मक सहयोग का परिणाम है। इस सफलता में जहाँ पीएचसी के सभी चिकित्सक, एएनएम, डेटा ऑपरेटर, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी मुश्किल भरे दौर में भी अपनी जिम्मेदारी की डगर पर डिगे रहे हैं। वहीं, प्रखंड वासियों का भी सकारात्मक सहयोग मिलता रहा है।  उन्होंने कहा, इसी मेहनत और सकारात्मक सहयोग की बदौलत जल्द ही शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। वहीं, उन्होंने वैक्सीन से वंचित प्रखंड वासियों से जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराने और प्रोटोकॉल का पालन जारी रखने की अपील की है।
– सभी पदाधिकारी और कर्मी खुद की परवाह किए बगैर अपनी जिम्मेदारी पर डटे रहे :
सूर्यगढ़ा पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया, कोविड वैक्सीनेशन अभियान के शुरुआती दौर से ही सभी पदाधिकारी और कर्मी खुद की सुरक्षा की परवाह किए बगैर सकारात्मक उम्मीद के साथ अपनी जिम्मेदारी पर डटे रहे। जिसका सकारात्मक परिणाम सामने है। इस दौरान पदाधिकारी से लेकर कर्मियों तक को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। किन्तु, किसी पदाधिकारी और कर्मी ने कभी भी चुनौती की चिंता नहीं की। बल्कि, इसे बेहतर अवसर समझकर अपने कार्य पर डटे रहे। इस दौरान स्थानीय लोगों का भी काफी सहयोग मिला, जो सराहनीय है।
– शुरुआती दौर में कुछ परेशानियाँ हुई, पर समय के साथ बदले हालात :
सूर्यगढ़ा पीएचसी अंतर्गत किरणपुर-पहाड़पुर क्षेत्र की आशा दयंती कुमारी ने बताया, जब जिले में वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ हुआ था, तब लोगों को समझाने में निश्चित रूप से कुछ परेशानियाँ हुई। किन्तु, हमलोग पीएचसी प्रबंधन के सपोर्ट की बदौलत क्षेत्र में सकारात्मक उम्मीद के साथ डटे रहे। जिसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि समय के साथ हालात भी बदलते गए और लोग खुद इस घातक महामारी के खिलाफ आगे आकर सुरक्षा के मद्देनजर वैक्सीनेशन कराने के लिए शिविर स्थल तक पहुँचने लगे।

सेकेंड डोज़ वैक्सीनेशन में मुंगेर ने हासिल किया ऐतिहासिक मुकाम 

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– 6 जनवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार सेकेंड डोज़ वैक्सीनेशन में 98.1% कवरेज के साथ बिहार में टॉप पर मुंगेर
– सेकंड डोज़ के लिए लक्षित 6,89,861 लोगों में से 6,76,801 लोगों को लगाई गई वैक्सीन की सेकेंड डोज़
मुंगेर, 06 जनवरी-
कोरोना के सेकेंड डोज़ वैक्सीनेशन में मुंगेर ने  एक खास मुकाम हासिल की है। गुरुवार 6 जनवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार सेकेंड डोज़ वैक्सीनेशन में 98.1% कवरेज के साथ मुंगेर पूरे बिहार में टॉप स्थान पर आया है।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि मुंगेर के जिलाधिकारी नवीन कुमार, सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक के कुशल नेतृत्व और कोविड टीकाकरण महाअभियान में जुटे स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभाग जैसे आईसीडीएस, जीविका के अधिकारियों और कर्मचारियों के अथक प्रयास साथ-साथ अन्य सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से मुंगेर  गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार सेकेंड डोज़ वैक्सीनेशन में 98.1% कवरेज के साथ बिहार में अव्वल  आया है। आज का दिन हम सभी के लिए गौरव   भरा है ।
उन्होंने बताया कि मुंगेर में सेकेंड डोज़ वैक्सीनेशन के लिए 6,89,861 का लक्ष्य निर्धारित किया था । जिसमें से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 6, 76,801 लोगों को कोविड वैक्सीन की सेकेंड डोज़ लगा दी गई है। इस प्रकार से मुंगेर अपने निर्धारित लक्ष्य के 98.1% लोगों को वैक्सीनेट कर चुका है। पूरे राज्य भर में सेकेंड डोज़ के लिए निर्धारित अपने लक्ष्य का 98.1 % कवरेज करने वाला मुंगेर बिहार का पहला जिला बन गया है। मुंगेरवासियों के लिए यह उपलब्धि ऐतिहासिक है।
उन्होंने बताया कि 98.0% कवरेज के साथ पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिला दूसरे स्थान पर है। इससे पहले वो पहले स्थान पर  था जो अब मुंगेर के टॉप पोजिशन पर पहुंचने के बाद बिहार में सेकेंड पोजिशन पर आ गया है।  उन्होंने बताया कि रैंकिंग में 96.4% कवरेज के साथ औरंगाबाद जिला तीसरे पायदान पर है।
 सभी लोग अनिवार्य रूप से करें कोरोना प्रोटोकॉल का पालन :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि जिला में कोरोना वायरस का संक्रमण एक बार फिर से तेजी से फैल रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए सभी जिलावासी अनिवार्य रूप से कोरोना प्रोटोकॉल के तहत मास्क का नियमित इस्तेमाल करें। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हुए एक निश्चित अंतराल के बाद अपने हाथों को साबुन या हैंड सैनिटाइजर से साफ करते रहें। उन्होंने बताया कि गुरुवार को भी जिला में 14 नए कोरोना पॉजिटिव मिले हैं जिसमें 5 पुरुष और शेष 9 महिलाएं हैं। जिला में अभी कुल 91 एक्टिव केस हैं। वहीं जिला में कुल पॉजिटिव केस की संख्या 14,489 हैं जिसमें से 14,287 लोग पूरी तरह से स्वस्थ्य हो चुके है। इसके साथ ही जिला में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कोरोना जांच की भी रफ्तार बढ़ा दी गई है। जिला भर में अभी तक कोरोना जांच के लिए कुल 12,85,150 लोगों का सैम्पल कलेक्ट किया गया है। इसके साथ ही जिला में वैक्सीनेशन का भी काम लगातार जारी है । इसलिए सभी लोग जिन्होंने ने भी अभी तक वैक्सीन नहीं ली है वो अनिवार्य रूप से अपने नजदीकी वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर वैक्सीन की दोनों डोज़ ले सकते हैं।

सदर अस्पताल में ब्लड बैंक का  उद्घाटन

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-सिविल सर्जन ने फीता काटकर ब्लड बैंक का किया आगाज
-भागलपुर में अब दो सरकारी ब्लड बैंक होने से मरीजों को राहत
भागलपुर, 6 जनवरी-
सदर अस्पताल में गुरुवार को ब्लड बैंक का उद्घाटन हो गया। सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने फीता काटकर इसका उद्घाटन किया। सदर अस्पताल में ब्लड बैंक खुल जाने से यहां आने वाले मरीजों को मायागंज अस्पताल की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। पहले मरीजों को खून की आवश्यकता पड़ने पर मायागंज रेफर कर दिया जाता था, जो अब नहीं होगा। अब यहां पर ही मरीजों को खून उपलब्ध कराकर उसका बेहतर इलाज किया जा सकेगा। सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने उद्घाटन के बाद बताया कि सदर अस्पताल में ब्लड बैंक चालू हो जाने से यहां आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। प्रसूताओं और एनीमिया से पीड़ित महिलाओं का यहां पर बेहतर इलाज हो सकेगा। मौके पर सदर अस्पताल के प्रभारी डॉ. राजू, डीपीएम फैजान आलम अशर्फी और मैनेजर जावेद मंजूर करीमी समेत कई लोग मौजूद थे।
दो चिकित्सकों की तैनातीः सदर अस्पताल में बने ब्लड बैंक में दो चिकित्सकों डॉ. शैलेश कुमार (एमडी पैथोलॉजिस्ट) व बतौर प्रभारी डॉ. राजू की तैनाती की गई है। इसके अलावा यहां पर आधा दर्जन लैब टेक्नीशियन और चार नर्सिंग स्टॉफ व एक काउंसलर की तैनाती की गई है। डॉ. राजू ने बताया कि ब्लड बैंक से मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके, इसका ख्याल रखा जाएगा है। सभी कर्मचारियों को इस बात की ताकीद की गई है कि यहां पर आने वाले लोगों को बेहतर सेवा मिल सके, इसका ध्यान रखें।
24 नवंबर को मिला था लाइसेंसः सदर अस्पताल प्रशासन के प्रयास से ब्लड बैंक के लिए लाइसेंस स्टेट ड्रग कंट्रोलर रविंद्र कुमार सिन्हा ने 24 नवंबर को जारी किया था। लाइसेंस 23 नवंबर 2026 तक मान्य है। इसके साथ ही सदर अस्पताल का ब्लड बैंक, जिले का दूसरा सरकारी ब्लड बैंक बन गया है। ब्लड बैंक में 300 यूनिट तक खून स्टोर (संग्रहण) करने की क्षमता है। यहां पर पीआरबीसी, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा आदि की सुविधा मरीजों को मिल सकेगी।

गर्म कपड़े पहनें और गर्म पानी खूब पीएं

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-शीतलहर में बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी जरूरी
-धूप सेंकें और जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें
बांका, 6 जनवरी।
जिले में शीतलहर का प्रकोप जारी है। पारा लगातार नीचे बना हुआ है। ऐसे मौसम में लोगों का बीमार पड़ना आम बात है। साथ ही कोरोना की तीसरी लहर की आशंका प्रबल हो गई है। ऐसे में सावधानी ही बचाव का सबसे बेहतर तरीका है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि ठंड से खुद को बचाकर रखें। हमेशा गर्म कपड़े पहनें। इस मौसम में पानी कम पीने की शिकायत की वजह से भी लोग बीमारियों की चपेट में आते हैं। इसलिए पानी खूब पीएं, लेकिन इस बात का जरूर ध्यान रखें कि पीने से पहले उसे गर्म कर लें। साथ ही दिन में धूप भी सेंकें। घर में अगर अलाव की व्यवस्था हो तो उसे भी सेकें।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि बीमारी से बचाव का सबसे बेहतर तरीका सतर्कता ही है। अगर लोग गर्म कपड़े पहनेंगे और बेवजह घरों से बाहर नहीं निकलेंगे तो उनका कई बीमारियों से बचाव होगा। बासी खाना खाने से बचें। ताजा भोजन करें और पानी भी गर्म ही पीएं। इन सावधानियों को अगर लोग बरतेंगे तो बीमारियों की चपेट में आने से बचे रहेंगे। साथ ही अभी कोरोना के नए मरीज फिर से मिलने लगे हैं। इसलिए तीसरी लहर जोर नहीं पकड़ लें इसलिए भी सावधानी बरतना जरूरी है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि घरों से कम निकलें। किसी भी तरह की बीमारी हो तो जांच जरूर करा लें। सर्दी खांसी या अन्य तरह के लक्षण दिखाई तो कोरोना जांच जरूर कराएं।
घर पर करें व्यायामः डॉ. चौधरी कहते हैं कि अभी के मौसम में मॉर्निंक वॉक करना सही नहीं है। अगर जाएं भी धूप खिलने के बाद जाएं। हां, घर पर व्यायाम जरूर करें। प्रतिदिन औसतन कम-से-कम 45 मिनट तक अगर घर पर व्यायाम करेंगे तो आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहेगी। इससे आप बीमार होने से बचे रहेंगे। अगर बीमार पड़ भी गए तो उससे आप आसानी से उबर जाएंगे। इसलिए अभी को मौसम में मॉर्निंग वॉक करने से बचें और घर पर ही शारीरिक कसरत करें। भोजन पर नियंत्रण रखें। ज्यादा तेल-मसाले वाले भोजन करने से परहेज करें। अत्यधिक तेल मसाले का सेवन बीमारियों की वजह बनती है।
बीमार और बुजुर्ग लोग रहें सतर्कः डॉ. चौधरी कहते हैं कि ठंड के मौसम में बीमार और बुजुर्ग लोगों को विशेष तौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है। सांस फूलने की बीमारी, हाईपरटेंशन या फिर शुगर के जो मरीज हैं वह घर पर कसरत करने के अलावा दवा का नियमित रूप से सेवन करें। बीमारियों में जरा सा उतार-चढ़ान खतरनाक हो सकता है। कोई भी परेशानी होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर की बताए बातों का अनुसरण करें। अपने से डॉक्टर बनने की कोशिश नहीं करें। बीमार और बुजुर्ग लोग कोरोना की गाइडलाइन का पालन हर हाल में करें। मास्क पहने रखें और सामाजिक दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ से बचें और दो गज की दूरी बनाए रखें।

गांधी चौक पर किशोरों-किशोरियों का टीकाकरण शुरू

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-यहां पर 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को भी दिया जा रहा कोरोना का टीका
-जिले में कोरोना के खिलाफ अभियान जारी, जांच के साथ टीकाकरण भी हुआ तेज
बांका, 6 जनवरी
कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर जिले में जहां जांच अभियान को तेज कर दिया गया है, वहीं टीकाकरण अभियान भी अच्छी गति से चल रहा है। किशोरों-किशोरियों का भी टीकाकरण शुरू हो गया है। इसी सिलसिले में गुरुवार को गांधी चौक स्थित 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र पर किशोरों-किशोरियों का टीकाकरण भी शुरू कर दिया गया। यहां पर 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का भी टीकाकरण किया जा रहा है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. बजरंग ने बताया कि गांधी चौक पर टीका लेने के लिए आने वालों का सिलसिला जारी है। यहां पर कोरोना टीका की पहली और दूसरी, दोनों तरह की डोज दी जा रही है। 18 साल से अधिक उम्र के अधिकतर लोग अब दूसरी डोज लेने के लिए यहां पर आ रहे हैं। किशोरों-किशोरियों का टीकाकरण यहां पर शुरू होने के बाद उन्हें 12 घंटे तक टीका लेने की सुविधा मिलेगी। इससे वह अपनी सुविधानुसार यहां पर आकर टीका ले सकेंगे।
समय पर आकर दूसरी डोज लेंगे: गुरुवार को गांधी चौक पर टीका लेने वाले प्रियांशु राज ने बताया कि किशोरों और किशोरियों को भी टीका देने की व्यवस्था शुरू हो जाने से बड़ी संख्या में छात्रों को राहत मिली है। हालांकि ऑनलाइन क्लास का ट्रेंड बढ़ रहा है, लेकिन फिर भी कक्षा करने के लिए बाहर जाना पड़ता है। टीका ले लेने से हमलोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं शुभम राज ने बताया कि किशोरों-किशोरियों को टीका देने का सरकार का फैसला स्वागतयोग्य है। हमलोग काफी समय से इंतजार कर रहे थे। अब जब टीका ले लिया है तो राहत महसूस कर रहे हैं। समय पर आकर दूसरी डोज भी ले लूंगा।
400 लोगों की हुई जांच: उधर, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार को 400 लोगों की जांच की गई। 200 लोगों की एंटीजन किट से जांच की गई। साथ 200 लोगों के सैंपल आरटीपीसीआर जांच के लिए लिया गए। हालांकि जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला, इसके बावजूद सभी लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए कहा गया।

घर में मौजूद खाद्य पदार्थों से एनीमिया पर करें वार

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• विटामिन एनीमिया से लड़ने में कारगर
• हरी साग-सब्जी का नियमित सेवन काफ़ी जरुरी
• पोषक तत्वों की कमी के साथ संक्रामक रोग एनीमिया का प्रमुख कारण

मुंगेर, 5 जनवरी 2022 : एनीमिया यानी खून की कमी एक ऐसी स्थिति है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम जाती है । ऑक्सीजन ले जाने के लिए हीमोग्लोबिन की आवश्यकता होती है। यदि शरीर में बहुत कम या असामान्य लाल रक्त कोशिकाएं हैं, या पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं है, तो शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन ले जाने के लिए रक्त की क्षमता कम हो जाती है। इसके परिणाम स्वरूप थकान, कमजोरी, चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। एनीमिया के कारण बच्चों में उम्र के मुतबिक वजन एवं लंबाई भी कम जाती है एवं वे एवं दुबलापन एवं नाटापन के शिकार हो जाते हैं। जिससे बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाती है।

पोषक तत्वों की कमी के साथ संक्रामक रोग ज़िम्मेदार:
एनीमिया के सबसे आम कारणों में पोषक तत्वों की कमी, विशेष रूप से आयरन की कमी शामिल होती है। इसके साथ ही विटामिन की कमी भी एनीमिया के लिए जिम्मेदार होते हैं। शरीर में विटामिन सी, ए, डी, बी12 एवं ई की भूमिका अधिक होती है। विटामिन सी शरीर में आयरन के चयापचय को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है। विशेष रूप से यह आयरन के अवशोषण एवं इसकी गतिशीलता को भी बढ़ाता है. इसलिए विटामिन सी युक्त आहार जैसे आँवला, नीबूं एवं अमरुद जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन जरुर करना चाहिए । ये खाद्य पदार्थ आसानी से घरों में उपलब्ध हो जाते हैं। एनीमिया के प्रमुख कारणों में पोषक तत्वों की कमी के साथ कई संक्रामक रोग भी शामिल होते हैं । जिसमें मलेरिया, टीबी, एचआईवी और अन्य परजीवी संक्रमण शामिल हैं. इन रोगों से ग्रसित होने के बाद अमूमन शरीर में खून की कमी हो जाती है ।

2 साल से कम उम्र के बच्चों के आहार पर दें ध्यान :
एनीमिया किसी भी आयुवर्ग के लोगों को हो सकता है ।लेकिन 2 साल से कम उम्र के बच्चों में खून की जरूरत अधिक होती है। 2 साल से कम उम्र के बच्चों की वृद्धि दर बहुत अधिक होती है. 6 से 24 महीने की उम्र के बीच, शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम आयरन की आवश्यकता जीवन के अन्य चरणों की तुलना में अधिक होती है। जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं को अधिक जोखिम होता है। 2 साल की उम्र के बाद विकास की दर धीमी हो जाती है एवं हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती है । इस लिहाज से इस दौरान शिशु के आहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है । जन्म से 6 माह तक केवल स्तनपान जरुरी होता है. इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए । वहीं, 6 माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरुरी होता है. जिसमें बच्चे को अर्ध ठोस आहार देना चाहिए. साथ ही यह ध्यान भी देना चाहिए कि उनके आहार में आनाज, विटामिन एवं वसा की मात्रा शामिल हो ।

एनीमिया को दूर करने के लिए सरल खाद्य पदार्थ :

• हरी साग-सब्जी
• चना एवं गुड़
• मौसमी फ़ल
• मीट, मछली एवं चिकन

दवा से अधिक जागरूकता की जरूरत :
सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया एनीमिया से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग कई प्रयास कर रहा है ।पाँच से 59 महीने के बालक और बालिकाओं को आईएफए की सिरप एवं 5 से 9 साल के लड़के और लड़कियाँ, 10 से 19 साल के किशोर औरकिशोरियां, 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएँ (जो गर्भवती या धात्री न हो), गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आईएफए की गोली निशुल्क दी जा रही है ताकि एनीमिया के दंश से उन्हें बचाया जा सके। इसके साथ ही यह जरुरी भी है कि सभी आयुवर्ग के लोग अपने खाद्य पदार्थों पर ध्यान भी दें एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें। दवा से अधिक एनीमिया को लेकर जागरूकता की जरूरत है।

कोरोना से दिवंगत के आश्रितों को उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री

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– परबत्ता के मरैया गाँव आश्रितों के बीच वितरित की गई राहत समाग्री
– आश्रितों के घर जाकर उपलब्ध कराई गई राहत समाग्री की पैकेट

खगड़िया, 05 जनवरी।
जिले में कोविड-19 के दौरान कोरोना से मृत होने वाले सभी दिवंगत के आश्रितों की सहायता कर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया की टीम सराहनीय भूमिका निभा रही है। ऐसे पीड़ित परिवारों को जीवन-यापन में किसी प्रकार की कोई परेशानियाँ का सामना करना पड़े, इसको लेकर जहाँ स्थानीय जिला प्रशासन पूरी तरह सजग है। वहीं, इसे सार्थक रूप देने के लिए कोरोना से जिन व्यक्ति का निधन हो गया था, उनके आश्रितों के बीच राहत वितरण सामग्री वाहन के माध्यम से घर-घर जाकर राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। ऐसी पहल मानवता की बड़ी मिसाल पेश है । यह समाजहित में बेहतर और सराहनीय कदम भी है। वहीं, बुधवार को जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत मरैया गाँव में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया द्वारा राहत सामग्री पैकेट का वितरण किया गया। सामग्री का वितरण परबत्ता सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन के नेतृत्व में प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक दीपक कुमार एवं केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार के सहयोग से लाभार्थियों के घर-घर जाकर किया गया।

– पीड़ित परिवार का डेटाबेस तैयार रखा गया है:
परबत्ता सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन ने कहा, पीड़ित परिवारों के सहयोग के लिए केयर इंडिया की टीम द्वारा उठाया गया यह कदम का सराहनीय और मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। इसके लिए केयर इंडिया की पूरी टीम को धन्यवाद । वहीं, उन्होंने कहा, प्रखंड के सभी पीड़ित परिवारों को लगातार घर-घर जाकर राहत सामग्री
सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, उन्होंने बताया, प्रखंड के सभी पीड़ित परिवारों को सरकारी स्तर से मिलने वाली तमाम सुविधाएं लगातार सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराई जा रही है। इसके आगे भी जो भी सुविधाएं होगी, वह निश्चित रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता का लाभ मिलने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इसके लिए सभी पीड़ित परिवारों की डेटाबेस तैयार कर सुरक्षित रखा गया है। ताकि एक भी पीड़ित परिवार किसी प्रकार की सुविधा से वंचित नहीं रहें और सभी चिह्नित परिवारों को सुविधाजनक तरीके से सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

– पाँच से अधिक संख्या वाले पीड़ित परिवारों को दो पैकेट दी जाती है राहत सामग्री :
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, जिले में चिह्नित सभी पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री की पैकेट उपलब्ध कराई जा रही है। जिसमें चावल, आटा, मसूर दाल, चना, चूड़ा, सूजी, सरसो तेल, सब्जी मसाला, नहाने का साबुन, डिटर्जेंट पाउडर, टॉफी और बिस्किट समेत घरेलू उपयोग में आने वाले अन्य सामग्री को पैक किया गया है। वहीं, उन्होंने बताया, पाँच की संख्या तक वाले पीड़ित परिवारों को एक एवं इससे अधिक संख्या वाले पीड़ित परिवारों को दो किट राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। ताकि पीड़ित परिवारों को उचित मात्रा में सामग्री मिल सके और पूरे परिवारों के लिए पर्याप्त हो सके।

– पीड़ित परिवारों का लगातार किया जा रहा सहयोग :
परबत्ता सीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक दीपक कुमार ने बताया, प्रखंड के सभी पीड़ित परिवारों के लिए शासन-प्रशासन द्वारा लगातार जरूरी निर्णय लिए जा रहे और आवश्यक सहयोग किए जा रहे हैं। इस कार्य में केयर इंडिया का भी सहयोग मिल रहा है । वहीं, उन्होंने बताया, इसके अलावा सभी पीड़ित परिवारों का जिला प्रशासन द्वारा हर संभव विशेष ख्याल रखा जा रहा है।

स्वच्छता एवं साफ़-सफ़ाई कोरोना के साथ एनीमिया रोकथाम में भी कारगर

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• गर्भवती महिलाएं साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
• स्वच्छ पानी के सेवन से कई रोगों से मिलेगी मुक्ति
• हुकवर्म पेट में संक्रमण एवं एनीमिया के लिए होता है जिम्मेदार

लखीसराय / 5, जनवरी: कोरोना संक्रमण काल में स्वच्छता एवं साफ-सफाई की जरूरत को सबने महसूस किया है. कोविड की तीसरी लहर के मद्देनजर भी लोगों से मास्क पहनने एवं हाथों की नियमित सफाई करने की अपील की जा रही है. स्वच्छता एवं साफ़-सफाई कोरोना रोकथाम के साथ एनीमिया बचाव में भी काफ़ी कारगर है. साथ ही ऐसे कई अन्य संक्रामक रोग भी हैं जो दूषित पानी के सेवन या स्वच्छता के आभाव में फैलती है. जिसमें डायरिया एवं टायफाईड प्रमुखता से शामिल होते हैं.

हुकवर्म से शरीर में संक्रमण के साथ होती है खून की कमी:

हुकवर्म एक परजीवी होता है. यह दूसरे जीवित प्राणी के शरीर में जीवित रहते हैं. हुकवर्म इन्फेक्शन छोटी आंत में होता है. हुकवर्म का लार्वा त्वचा के संपर्क में आने के बाद छोटी आंत में पहुँचता है. जिसके बाद शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं. जिसमें पेट में दर्द, उल्टी का होना, भूख न लगना, शरीर में खुजली होना, वजन कम जाना एवं थकान जैसे लक्षण शामिल होते हैं. हुकवर्म के कारण शरीर में हेमोग्लोबिन यानी खून की कमी भी हो जाती है. समान्य तौर पर यह संक्रमण गाँव में अधिक होता है जिससे छोटे बच्चे भी प्रभावित होते हैं. यह संक्रमण ज्यादातर गंदगी के कारण ही होता है. खुले में शौच करना, हाथों की अच्छी से सफाई नहीं करना एवं नंगे पाँव जमीन पर चलने से इस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इस लिहाज से साफ़-सफाई पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आँतों का वर्म विकासशील देशों के 10 फीसदी आबादी को संक्रमित करता है. जिससे एनीमिया, कुपोषण एवं बच्चों में विकास बाधित होता है.

गर्भवती महिलाएं बरतें सावधानियां:

गर्भवती महिलाओं को साफ़-सफाई पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है. गर्भावस्था में खून की कमी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं. हाथों की उचित साफ़-सफाई के आभाव में हुकवर्म का खतरा गर्भवती महिलाओं को भी हो सकता है एवं इससे संक्रमण के साथ खून की कमी भी हो सकती है. इस लिहाज से गर्भवती महिलाएं हर बार हाथ धोते समय साबुन या राख का उपयोग करें. बहते या बहते पानी के नीचे हाथ धोएं. भोजन को तैयार करने या खाने से पहले हाथ धोएं और किसी को खिलाने या दवाइयाँ देने से पहले भी हाथों की सफाई करें. शौचालय जाने के बाद, शौच करने वाले व्यक्ति की सफाई करने, नाक बहने, खांसने, छींकने या किसी जानवर या जानवर के अपशिष्ट को संभालने के बाद और किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल करने से पहले और बाद में भी हाथ धोएं. साथ ही घर में पीने के पानी को स्वच्छ रखें. पानी को उबालकर या फ़िल्टर युक्त पानी का सेवन करना जरुरी है. इससे दूषित पानी से फैलने वाले रोगों की आसानी से रोकथाम हो सकती है.

स्वच्छता एवं साफ़-सफाई वर्तमान समय की माँग:

सिविल सर्जन डॉ द्वेन्द्र चौधरी ने बताया कि वर्तमान समय में स्वच्छता एवं साफ़-सफाई अनिवार्य है. इससे कोरोना संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहयोग मिलेगा. साथ ही दूसरे संक्रामक रोगों से भी निजात मिलेगी. उन्होंने बताया कि बच्चों में डायरिया दूषित पानी एवं हाथों की साफ़-सफाई की कमी के कारण ही होते हैं. इसको लेकर आशा कार्यकर्ता गृह भ्रमण के दौरान हाथों की सफाई के बारे में जानकारी भी देती है. उन्होंने कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर यह अपील भी की कि लोग घर से निकलने से पहले मास्क का प्रयोग करें एवं जिन्होंने टीका नहीं लिया वह जरुर टीका लें. साथ ही 15 से 18 आयुवर्ग के युवा भी ख़ुद को टीकाकृत कर लें

नवगछिया में 50 बेड का कोविड केयर सेंटर तैयार, लोगों को मिलेगी बेहतर सुविधा 

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– सभी बेड ऑक्सीजन की भी सुविधा से है लैस, अब मरीजों को इलाज के लिए भागलपुर जाने की नहीं उठानी पड़ेगी परेशानी
भागलपुर, 05 जनवरी-
कोरोना के नये वैरिएंट के बढ़ते खतरे को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर जहाँ सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है वहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं को भी मजबूत बनाया जा रहा है। ताकि लोगों को जरुरत पड़ने पर स्वास्थ्य सुविधाओं कि लाभ लेने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित की जा सके। इसी कड़ी में जिले के नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन 50 बेड का कोविड केयर सेंटर अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। इससे अब गंगा पार यानी पूरे नवगछिया अनुमंडल के लोगों को जरूरत पड़ने पर भागलपुर जाने-आने की परेशानियां नहीं उठानी पड़ेगी और आसानी के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलेगा।
– सभी बेड ऑक्सीजन की सुविधा से भी है लैस :
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अरुण कुमार सिन्हा ने बताया, यह नवगछिया इलाके वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब यहाँ के मरीजों को कोविड से संबंधित परेशानी का इलाज के लिए भागलपुर नहीं जाना पड़ेगा। वहीं, उन्होंने बताया, सभी बेड ऑक्सीजन की सुविधा से लैस है। इसके अलावा अन्य समुचित स्वास्थ्य सुविधा की व्यवस्था उपलब्ध है। ताकि लोगों को इलाज के दौरान किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी जरूरतमंदों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
– कोविड केयर सेंटर तैयार होने से नवगछिया के लोगों में हर्ष :
नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल में कोविड केयर सेंटर पूरी तरह तैयार होने की जानकारी मिलते ही नवगछिया के सातों प्रखंडों के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। क्योंकि, अब अपने ही अनुमंडल में जो समुचित स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। वहीं, नवगछिया जिला पार्षद नंनदी सरकार, खरीक उत्तरी के जिला पार्षद गौरव राय, दक्षिणी क्षेत्र की पीयूष कुमारी, खरीक प्रखंड प्रमुख शंकर प्रसाद यादव उर्फ्र दल्लु यादव समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने हर्ष जताते हुए कहा कि यह समय की माँग थी। हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि अब हमारे इलाके के लोगों को इलाज के लिए भागलपुर नहीं जाना पड़ेगा और जाम समेत अन्य समस्याएं का बिना सामना किए आसानी के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।