कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद जांच अभियान हुआ तेज

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-प्रतिदिन पांच हजार से अधिक लोगों की हो रही है कोरोना जांच
-कोरोना की तीसरी लहर से निपटने को लेकर अभियान जारी
बांका, 5 जनवरी।
जिले में कोरोना के मरीज फिर से मिलने लगे हैं। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर नहीं आ सके, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग चौकस हो गया है। जिले में कोरोना जांच अभियान को तेज कर दिया गया है। अभी प्रतिदिन पांच हजार से अधिक लोगों की कोरोना जांच हो रही है। बाहर से आने वालों पर नजर जा रखी जा रही है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, होटल सभी जगहों पर जांच की व्यवस्था की गई है। बाहर से आने वाले कोई भी व्यक्ति जांच से वंचित नहीं रह जाए, इसका ख्याल रखा जा रहा है। दूसरी तरफ जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में भी जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। शहरी क्षेत्र में हर आने वालों पर नजर रखी जा रही है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना की तीसली लहर नहीं आ सके, इसे लेकर हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। लोगों की जांच तो पहले से ही हो रही है। अब तीसरी लहर की बात कही जा रही है तो बाहर से भी लोग आने लगे हैं। उनलोगों पर विशेष तौर पर नजर रखी जा रही है। बाहर से आने वालों लोगों से जिले में कोरोना का प्रसार नहीं हो सके, इसे लेकर हमलोग चौकस हैं। बाहर से आने वाले हर व्यक्ति की जांच सुनिश्चित कर रहे हैं। इसमें आमलोग भी सहयोग करें।
घरवाले रहें चौकसः डॉ. चौधरी ने कहा कि बाहर से जो लोग आ रहे हैं वह अपनी कोरोना जांच जरूर कराएं। साथ ही उनके परिजनों को भी चौकस रहने की जरूरत है। अगर उनके घर में कोई बाहर से आता है और जांच कराए बगैर ही आ गया है तो उसे तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। वहां पर कोरोना की जांच करवाएं। रिपोर्ट अगर निगेटिव आती है तो भी कुछ दिनों तक उससे दूरी बनाकर रहें। ऐसा करने से आपका ही भला होगा। ऐसा करने से आप किसी भी तरह के संक्रमण से मुक्त रहेंगे। घर आने वाले व्यक्ति को भी आप समझाएं। ऐसा करना आपके साथ-साथ उनके हित में भी है।
कोरोना की गाइडलाइन का पालन जरूरीः डॉ. चौधरी ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका प्रबल हो गई है। अभी ठंड का मौसम चल रहा है। इस मौसम में सर्दी-खांसी होना आम बात है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करें। थोड़ी सी भी शिकायत होने पर अपनी कोरोना जांच जरूर करवाएं। साथ ही कोरोना की गाइडलाइन का पालन अवश्य करें। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ से बचते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाकर रहें। साथ ही बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें। ऐसा करते रहने से कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे। जिनलोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है, वह भी गाइडलाइन का पालन करें।

स्वच्छता एवं साफ़-सफ़ाई कोरोना के साथ एनीमिया रोकथाम में भी कारगर

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• गर्भवती महिलाएं साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
• स्वच्छ पानी के सेवन से कई रोगों से मिलेगी मुक्ति
• हुकवर्म पेट में संक्रमण एवं एनीमिया के लिए होता है जिम्मेदार

पटना/ 5, जनवरी: कोरोना संक्रमण काल में स्वच्छता एवं साफ-सफाई की जरूरत को सबने महसूस किया है. कोविड की तीसरी लहर के मद्देनजर भी लोगों से मास्क पहनने एवं हाथों की नियमित सफाई करने की अपील की जा रही है. स्वच्छता एवं साफ़-सफाई कोरोना रोकथाम के साथ एनीमिया बचाव में भी काफ़ी कारगर है. साथ ही ऐसे कई अन्य संक्रामक रोग भी हैं जो दूषित पानी के सेवन या स्वच्छता के आभाव में फैलती है. जिसमें डायरिया एवं टायफाईड प्रमुखता से शामिल होते हैं.

हुकवर्म से शरीर में संक्रमण के साथ होती है खून की कमी:

हुकवर्म एक परजीवी होता है. यह दूसरे जीवित प्राणी के शरीर में जीवित रहते हैं. हुकवर्म इन्फेक्शन छोटी आंत में होता है. हुकवर्म का लार्वा त्वचा के संपर्क में आने के बाद छोटी आंत में पहुँचता है. जिसके बाद शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं. जिसमें पेट में दर्द, उल्टी का होना, भूख न लगना, शरीर में खुजली होना, वजन कम जाना एवं थकान जैसे लक्षण शामिल होते हैं. हुकवर्म के कारण शरीर में हेमोग्लोबिन यानी खून की कमी भी हो जाती है. समान्य तौर पर यह संक्रमण गाँव में अधिक होता है जिससे छोटे बच्चे भी प्रभावित होते हैं. यह संक्रमण ज्यादातर गंदगी के कारण ही होता है. खुले में शौच करना, हाथों की अच्छी से सफाई नहीं करना एवं नंगे पाँव जमीन पर चलने से इस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इस लिहाज से साफ़-सफाई पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आँतों का वर्म विकासशील देशों के 10 फीसदी आबादी को संक्रमित करता है. जिससे एनीमिया, कुपोषण एवं बच्चों में विकास बाधित होता है.

गर्भवती महिलाएं बरतें सावधानियां:

गर्भवती महिलाओं को साफ़-सफाई पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है. गर्भावस्था में खून की कमी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं. हाथों की उचित साफ़-सफाई के आभाव में हुकवर्म का खतरा गर्भवती महिलाओं को भी हो सकता है एवं इससे संक्रमण के साथ खून की कमी भी हो सकती है. इस लिहाज से गर्भवती महिलाएं हर बार हाथ धोते समय साबुन या राख का उपयोग करें. बहते या बहते पानी के नीचे हाथ धोएं. भोजन को तैयार करने या खाने से पहले हाथ धोएं और किसी को खिलाने या दवाइयाँ देने से पहले भी हाथों की सफाई करें. शौचालय जाने के बाद, शौच करने वाले व्यक्ति की सफाई करने, नाक बहने, खांसने, छींकने या किसी जानवर या जानवर के अपशिष्ट को संभालने के बाद और किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल करने से पहले और बाद में भी हाथ धोएं. साथ ही घर में पीने के पानी को स्वच्छ रखें. पानी को उबालकर या फ़िल्टर युक्त पानी का सेवन करना जरुरी है. इससे दूषित पानी से फैलने वाले रोगों की आसानी से रोकथाम हो सकती है.

स्वच्छता एवं साफ़-सफाई वर्तमान समय की माँग:

सिविल सर्जन ने बताया कि वर्तमान समय में स्वच्छता एवं साफ़-सफाई अनिवार्य है. इससे कोरोना संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहयोग मिलेगा. साथ ही दूसरे संक्रामक रोगों से भी निजात मिलेगी. उन्होंने बताया कि बच्चों में डायरिया दूषित पानी एवं हाथों की साफ़-सफाई की कमी के कारण ही होते हैं. इसको लेकर आशा कार्यकर्ता गृह भ्रमण के दौरान हाथों की सफाई के बारे में जानकारी भी देती है. उन्होंने कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर यह अपील भी की कि लोग घर से निकलने से पहले मास्क का प्रयोग करें एवं जिन्होंने टीका नहीं लिया वह जरुर टीका लें. साथ ही 15 से 18 आयुवर्ग के युवा भी ख़ुद को टीकाकृत कर लें.

चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मियों का अवकाश 28 फरवरी तक रद्द

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–  अवकाश पर गए चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य कर्मियों से अविलंब काम पर लौटने का निर्देश
–  स्वास्थ्य विभाग से जारी किया गया पत्र
मुंगेर, 4 जनवरी-
जिला के सभी चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मियों का सभी प्रकार का अवकाश (अध्ययन और मातृत्व अवकाश को छोड़कर) 28 फरवरी तक रद्द कर दिया गया है। इसको ले स्वास्थ्य विभाग से एक पत्र जारी किया गया है। इसके साथ ही पत्र में वर्तमान में अवकाश पर गए चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य कर्मियों से अविलंब काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है।
जिला के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जारी पत्र के अनुसार जिला में कोरोना के बढ़ते संक्रमण की रोकथाम एवं इसके निरोधात्मक उपाय के लिए विशेष चौकसी एवं अनुश्रवण की आवश्यकता को देखते हुए उक्त आदेश को जारी किया गया है। इसके अनुसार जिला के सभी चिकित्सा पदाधिकारी संविदा/नियोजित सहित से लेकर सभी स्वास्थ्य कर्मी संविदा/नियोजित सहित जैसे स्वास्थ्य प्रशिक्षक, पारा मेडिकल स्टाफ, जीएनएम, एएनएम, शल्य कक्ष सहायक, लैब टेक्नीशियन के साथ ही चतुर्थ वर्गीय कर्मियों के सभी प्रकार के अवकाश को आगामी 28 फरवरी  2022 तक रद्द कर दिया गया है। जारी पत्र के अनुसार अध्ययन अवकाश और मातृत्व अवकाश पर गए चिकित्सा पदाधिकारियों और कर्मियों को इससे मुक्त रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है।
उन्होंने बताया कि एक बार फिर से जिला में कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। मंगलवार को जिला  मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखण्डों में कुल 13 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं जिसमें सात पुरुष और 6 महिलाएं हैं। जिला में अभी एक्टिव केस की कुल संख्या 65 हो गई है। उन्होंने बताया कि जिला भर में अभी तक कुल 14,459 कोरोना के पॉजिटिव केस मिले हैं जिसमें से 14,283 कोरोना पॉजिटिव मरीज स्वस्थ्य भी हुए हैं। वहीं कुल 113 लोगों की मृत्यु कोरोना वायरस के संक्रमण से हुई है।
उन्होंने बताया कि कोरोना के ओमीक्रोन वैरियंट की वजह से संभावित तीसरी लहर को देखते हुए जिला में कोरोना जांच की रफ्तार बढ़ा दी गई । जिला भर में कोरोना जांच के लिए अभी तक कुल 12,78,496 लोगों का सैम्पल लिया जा चुका है। बावजूद इसके अभी भी लोगों को कोरोना गाइड लाइन का अक्षरशः पालन करना अनिवार्य है। क्योंकि अभी थोड़ी सी भी लापरवाही लोगों को भारी पर सकती है। जिलावासियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सभी लोग अभी अच्छी तरह से मास्क पहनें क्योंकि कोरोना संक्रमण मुख्य रूप से मुंह और नाक से निकलने वाले ड्रॉप्लेट्स से फैलता है। इसके साथ ही सभी भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने से परहेज बरतें और जाना बहुत जरूरी हो तो सोशल डिस्टेंसिंग के नियम के तौर पर एक दूसरे से कम से दो गज या छह फीट की दूरी बरतें। इसके साथ ही अनावश्यक किसी भी चीज को छूने से बचें और छूने के बाद अपने हाथों को साबुन या हैंड सैनिटाइजर से एक निश्चित अंतराल के बाद साफ करें ।

कालाजार उन्मूलन की नई पहल : प्रभावित गाँव में घर-घर बाँटा गया नववर्ष का कैलेंडर

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– कैलेंडर में कालाजार के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय हैं दर्ज, -इमरजेन्सी नंबर भी किया गया है दर्ज, जरूरत पड़ने पर पीड़ित परिवार कर सकेंगे संपर्क
– अलौली प्रखंड के कालाजार प्रभावित सूरजनगर गाँव में कैलेंडर का किया गया वितरण
खगड़िया, 04 जनवरी
कालाजार उन्मूलन को लेकर जिले में जहाँ लगातार सघन मरीज खोज अभियान सहित अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। वहीं, अब नववर्ष  पर एक नई और अच्छी पहल की शुरुआत की गई है। मंगलवार को जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत सूरजनगर गाँव में घर-घर नववर्ष  2022 के कैलेंडर का वितरण किया गया। यह वितरण स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के सहयोग से किया गया। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और केयर इंडिया के सहयोग से संभवतः पूरे प्रदेश में सबसे पहले इस नई पहल की शुरूआत की गई है, जो ना सिर्फ नई पहल है बल्कि, कालाजार उन्मूलन को लेकर बेहतर कदम भी है। वहीं, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार के नेतृत्व में कैलेंडर वितरण किया गया। इस वितरण टीम में डीभीबीडीसी बबलू सहनी, भीबीडीएस अरुण कुमार, मो शहनवाज, केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती, बीसी संजय कुमार समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।
– कैलेंडर में कालाजार के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय हैं दर्ज :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया, मंगलवार को सूरजनगर गाँव में घर-घर जाकर एक-एक परिवार के बीच नववर्ष का कैलेंडर वितरण किया गया। जिसमें कालाजार के कारण, लक्षण और बचाव की उपाय लिखा हुआ है। साथ ही स्थानीय पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सहित संबंधित बीमारी के चिकित्सकों समेत अन्य सहयोगी टीम के सदस्यों का नंबर भी दिया गया है। ताकि मरीज  शुरुआती दौर में ही अपनी बीमारी का अनुभव कर सके और जरूरत पड़ने पर आसानी के साथ कैलेंडर में अंकित मोबाइल नंबर पर सीधा संपर्क कर उचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले सके। यहीं नहीं, इस पहल से सामूदायिक स्तर पर सकारात्मक संदेश भी जाएगा और लोगों में   जागरूकता भी आएगी।
– मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर उपलब्ध कराई जाएगी समुचित स्वास्थ्य सुविधा :
डीभीबीडीसी बबलू सहनी ने बताया, कैलेंडर में अंकित मोबाइल नंबर पर सूचना देने के तुरंत बाद संबंधित व्यक्ति को समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि संबंधित व्यक्ति को ससमय जरूरी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा सके और लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सके। वहीं, उन्होंने बताया, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जाँच से लेकर समुचित इलाज तक की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है। यही नहीं, मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने के प्रावधान भी है। साथ ही पाॅजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये संबंधित आशा कार्यकर्ता को भी दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया, 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वैसे व्यक्ति जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं।
– कैलेंडर वितरण के दौरान लोगों को जागरूक भी किया गया :
केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती ने बताया, कैलेंडर वितरण के दौरान लोगों को कालाजार से बचाव के लिए जागरूक भी किया गया। जिसके दौरान कालाजार के कारण, लक्षण और बचाव की जानकारी दी गई। साथ ही कैलेंडर में दर्ज बातों का मौखिक रूप से भी जानकारी दी गई। ताकि सभी लोग कैलेंडर में दर्ज सुविधाओं का आसानी के साथ लाभ ले सकें।
– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।
– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरुनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल की अन्दरुनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन समाग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंड में सघन मरीज खोज अभियान

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– घर-घर जाकर की जा रही है मरीजों की खोज, दी जा रही है आवश्यक चिकित्सा परामर्श
– लखीसराय, सूर्यगढ़ा, पिपरिया एवं बड़हिया प्रखंड के विभिन्न गाँवों में सघन कालाजार मरीज खोज अभियान
लखीसराय, 04 जनवरी।
पूरे प्रदेश में कालाजार उन्मूलन को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है और इसे सुनिश्चित करने को लेकर हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। जिसे सार्थक रूप देने के लिए जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंडों के विभिन्न गाँवों में सोमवार से ही सात दिवसीय सघन मरीज खोज अभियान की शुरुआत कर दी गई। जो आगामी 09 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता अपने-अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर मरीजों की खोज करेंगी। वहीं, अभियान के दूसरे दिन संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता अपने-अपने पोषक क्षेत्र में कालाजार मरीजों की खोज की और उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी से अवगत कराया। साथ ही इस बीमारी के शुरुआती लक्षण, कारण, बचाव एवं उपचार की भी जानकारी दी। ताकि ऐसे मरीज समय पर अपना इलाज शुरू करा इस बीमारी को आसानी से मात दे सकें। इस अभियान को सफल बनाने के लिए केयर इंडिया के प्रतिनिधियों द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है। वहीं, अभियान को सफल बनाने के लिए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डाॅ धीरेंद्र कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार नरेंद्र कुमार खुद अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
– घर-घर जाकर की जा रही है मरीजों की खोज :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डाॅ धीरेंद्र कुमार ने बताया, सोमवार से जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंडों में घर-घर कालाजार मरीज खोज अभियान चलाया जा रहा है। जिसके माध्यम से संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता मरीजों की पहचान कर उन्हें इलाज कराने के लिए प्रेरित कर  रही हैं। ताकि संबंधित मरीजों का समय पर इलाज शुरू हो सके जिससे बीमारी को आसानी से मात दी जा सके। वहीं, उन्होंने बताया, इसके अलावा लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया, सूर्यगढ़ा प्रखंड के रामपुर,पिपरिया के रामचंद्रपुर, लखीसराय का रजौनाचौकी एवं बड़हिया के आदर्श लक्ष्मीपुर गाँव मरीजों की सघन खोज की जा रही है।
– सदर अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की सुविधा है उपलब्ध :
जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार नरेंद्र कुमार ने बताया, कालाजार मरीजों की जाँच की सुविधा जिले के सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है।  सदर अस्पताल में भी समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जिसके कारण संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें संबंधित पीएचसी द्वारा सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने के प्रावधान की जानकारी उन्हें दी जायेगी। साथ ही पाॅजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये संबंधित आशा कार्यकर्ता को दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया, 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वैसे व्यक्ति जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं।
– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।
– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरुनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल की अन्दरुनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं । छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक  छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

युवाओं के लिए भी 15 घंटा टीकाकरण की व्यवस्था

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– घंटा घर स्थित टीचर्स ट्रेनिंग काॅलेज में चल रहा है टीकाकरण शिविर
– युवाओं के साथ-साथ सभी आयु वर्ग के लोगों का भी हो रहा है टीकाकरण

भागलपुर, 04 जनवरी।
भागलपुर के घंटा घर स्थित टीचर्स ट्रेनिंग काॅलेज परिसर में 15 से 18 आयु वर्ग के युवाओं (किशोर-किशोरियों) के टीकाकरण अभियान को रफ्तार देने के लिए 15 घंटे का टीकाकरण शिविर चल रहा है। ताकि युवाओं को भी सुविधाजनक तरीके से टीका लगाया जा सके और जल्द से जल्द अधिकाधिक युवाओं का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा उक्त केंद्र में हर आयु वर्ग के लोगों का भी टीकाकरण हो रहा है। इसके लिए को-वैक्सीन और कोविडशील्ड दोनों टीका की व्यवस्था उपलब्ध है। जिसके सफल संचालन के लिए तीन काउंटर बनाया गया है। ताकि सभी लोग सुरक्षित माहौल में टीकाकरण करवा सकें और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित हो सके।

– शिविर के सफल संचालन के लिए शिफ्ट वाइज मेडिकल टीम की ड्यूटी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया, टीचर्स ट्रेनिंग काॅलेज परिसर में तीन जगहों पर शिविर आयोजित की गई है और तीनों जगह रजिस्ट्रेशन एवं टीकाकरण की व्यवस्था उपलब्ध है। जहाँ युवाओं के अलावा हर आयु वर्ग के लाभार्थियों को भी पहले एवं दूसरे डोज का टीका दिया जा रहा है। वहीं, उन्होंने बताया, शिविर के सफल संचालन के लिए शिफ्ट वाइज मेडिकल टीम की तैनाती की गई है। ताकि सभी लोग सुविधाजनक तरीके से सुरक्षित माहौल में टीकाकरण करवा सकें और मेडिकल टीम टीकाकरण कर सके।

– सुरक्षा के मद्देनजर इमरजेन्सी सुविधा भी है उपलब्ध :
टीकाकरण केंद्र पर सुरक्षा के मद्देनजर इमरजेन्सी की भी सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए जहाँ टीकाकरण केंद्र परिसर में ऑब्जर्वेशन रूम बनाया गया है। वहीं, एम्बुलेंस के साथ एक अलग से मेडिकल टीम की भी तैनाती की गई है। ताकि जरूरी पड़ने पर तुरंत समस्या का समाधान किया जा सके और लोगों को किसी प्रकार की परेशानियां का सामना नहीं करना पड़े। इसके अलावा टीकाकरण केंद्र परिसर में अन्य समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

– टीकाकरण के बाद युवाओं में दिखा उत्साह :
युवाओं का टीकाकरण अभियान शुरू होने के दूसरे दिन यानी मंगलवार को टीकाकरण केंद्र पर टीका लेने के बाद युवाओं में काफी उत्साह दिखा। सुबह से ही केंद्र में टीका लेने वाले युवाओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो सामुदायिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव का बड़ा संकेत है। वहीं, टीकाकरण के बाद युवाओं ने कहा कि अब मैं भी इस घातक महामारी से सुरक्षित हो गया।

एनीमियामुक्त भारत कार्यक्रम से एनीमिया के ख़िलाफ़ मुहिम में मिलेगी गति

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– 6 आयु वर्ग के लोगों को एनीमिया से मुक्ति दिलाने का रखा गया है लक्ष्य
मुंगेर, 03 जनवरी-
एनीमिया एक गंभीर लोक स्वास्थ्य समस्या है। इससे एक ओर जहाँ शिशुओं का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध होता है वहीं किशोरियों एवं माताओं में कार्य करने की क्षमता में भी कमी आ जाती है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय पोषण अभियान के अंतर्गत‘ एनीमिया मुक्त भारत’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। बिहार सहित देश के सभी राज्यों में यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम  संचालित किया जा रहा है । इस कार्यक्रम के तहत 6 विभिन्न आयु वर्ग के समूहों को चिह्नित कर उन्हें एनीमिया से मुक्त करने की पहल की गई है।
एनीमिया में प्रतिवर्ष 3% की कमी लाने का लक्ष्य:
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि इस अभियान के तहत 6 विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं को लक्षित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के लोगों को एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाना है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों ही इस अभियान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ  शिक्षा, आईसीडीएस और जीविका के अधिकारियों के साथ मीटिंग हुई थी जिसमें विशेषज्ञ के द्वारा एनीमिया की वजह से होने वाली बीमारियों और उससे बचने के उपाय के बारे में परिचर्चा की गई थी। इस कार्यक्रम के तहत एनीमिया में प्रतिवर्ष 3% की कमी लाने का लक्ष्य भी रखा गया है। इसके लिए सरकार द्वारा 6X6X6 की रणनीति के तहत 6 आयुवर्ग, 6 प्रयास एवं 6 संस्थागत व्यवस्था की गयी है। यह रणनीति आपूर्ति श्रृंखला, मांग पैदा करने और मजबूत निगरानी पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि खून में आयरन की कमी होने से शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। इसके लिए सभी को आयरन एवं विटामिन ‘सी’ युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। आंवला, अमरुद एवं संतरा में प्राकृतिक रूप से विटामिन सी प्रचुर मात्रा में मौजूद रहता है। विटामिन ‘सी’ ही शरीर में आयरन का अवशोषण करता है, इस लिहाज से इसकी मात्रा को शरीर में संतुलित करने की आवश्यकता है ।
इन 6 आयु वर्ग के लोगों को किया गया है लक्षित:
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज ने बताया  एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत छह आयु वर्ग के लोगों को लक्षित किया गया है। जिसमें 6 से 59 महीने के बालक और बालिकाएं, 5 से 9 साल के लड़के और लड़कियाँ, 10 से 19 साल के किशोर और किशोरियां और 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएँ (जो गर्भवती या धात्री न हो) और
गर्भवती महिलाएं एवम शिशु को स्तनपान कराने वाली महिलाएं शामिल हैं।
प्रदान की जाती है निःशुल्क दवा :
उन्होंने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत सभी 6 आयु वर्ग के लोगों में एनीमिया रोकथाम की कोशिश की जा रही है। इसके तहत 6 से 59 महीने के बालक और बालिकाओं को हफ्ते में दो बार आईएफए की 1 मिली लीटर सीरप आशा कार्यकर्ता के द्वारा उनकी माताओं को निःशुल्क दी जाती है। 5 से 9 साल के लड़के और लड़कियों को हर सप्ताह आईएफए की एक गुलाबी गोली दी जाती है। यह दवा प्राथमिक विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को मध्याह्न के बाद शिक्षकों के माध्यम से निःशुल्क दी जाती है। इसके साथ ही 5 से 9 साल तक के वैसे बच्चे जो स्कूल नहीं जाते हैं, उन्हें आशा कार्यकर्ता गृह भ्रमण के दौरान उनके घर पर ही आईएफए की गुलाबी गोली देती हैं। 10 से 19 साल के किशोर और किशोरियों को हर हफ्ते आईएफए की 1 नीली गोली दी जाती है जिसे विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रत्येक बुधवार को भोजन के बाद शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी सेविका के माध्यम से निःशुल्क प्रदान की जाती है। 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं को आईएफए की एक लाल गोली हर हफ्ते आरोग्य स्थल पर आशा कार्यकर्ता के माध्यम से निःशुल्क दी जाती है।  इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के चौथे महीने से प्रतिदिन खाने के लिए आईएफए की 180 गोलियाँ दी जाती है, यह दवा उन्हें ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दिन प्रदान की जाती है। इसके साथ ही धात्री माताओं के लिए भी प्रसव के बाद आईएफए की 180 गोली दी जाती है, जिसे उन्हें प्रतिदिन खाने की सलाह दी जाती है। इस दवा का भी वितरण ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दिन निःशुल्क ही होता है।
सप्ताह में दो ख़ुराक दिलाएगी आपके बच्चे को खून की कमी से निज़ात :
उन्होंने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत 6 माह से 59 माह तक के बच्चों को सप्ताह में दो बार आईएफए (आयरन फोलिक एसिड) सीरप देने का प्रावधान किया गया है। एक ख़ुराक में 1 मिली लीटर यानी 8-10 बूंद होती है। सभी आशा को स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सीरप की 50 मिलीलीटर की बोतलें आवश्यक मात्रा में दी जाती है। प्रथम दो सप्ताह में आशा स्वयं बच्चों को दवा पिलाकर माँ को सिखाने का प्रयास करती हैं एवं अनुपालन कार्ड भरना सिखाती हैं। दो सप्ताह के बाद ख़ुराक, माँ द्वारा स्वयं पिलाने तथा अनुपालन कार्ड में निशान लगाने के विषय में इस कार्यक्रम के दिशा-निर्देश में विशेष बल दिया गया है।

जिले में 15 से 18 वर्ष के युवाओं का कोविड वैक्सीनेशन शुरू, सभी प्रखंडों में युवाओं को लगाया गया सुरक्षा का टीका

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– डीएभी स्कूल लखीसराय में आयोजित शिविर का जिलाधिकारी और सिविल सर्जन ने उदघाटन कर  युवाओं के वैक्सीनेशन का किया शुभारंभ
– ऑनलाइन के साथ-साथ ऑन द स्पॉट भी रजिस्ट्रेशन की  सुविधा थी उपलब्ध
लखीसराय, 03 जनवरी।
सोमवार से जिले में 15 से 18 आयु वर्ग के सभी युवाओं (किशोर-किशोरियों) का भी वैक्सीनेशन अभियान शुरू हो गया। इस अभियान का जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह, सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने संयुक्त रूप से डीएवी स्कूल लखीसराय में आयोजित शिविर का उदघाटन कर जिले में युवाओं के वैक्सीनेशन का शुभारंभ किया। इसके बाद जिले के सभी प्रखंडों में पूर्व से चयनित और चिह्नित जगहों पर शिविर का संचालन शुरू हुआ और सुविधाजनक तरीके से युवाओं को सुरक्षा का टीका लगाया गया। वहीं, जिले सभी शिविर स्थलों पर युवाओं का अच्छा-खासा उत्साह देखा गया और रजिस्ट्रेशन कराने के बाद युवाओं ने  वैक्सीनेशन कराया। इसके बाद देर से ही सही, पर व्यवस्थित पहल के लिए सरकार की सराहना भी की और स्वास्थ्य टीम को धन्यवाद दिया। इस मौके पर डीपीएम मोहम्मद खालिद हुसैन  , लखीसराय पीएचसी प्रभारी डाॅ रौशेक  कुमार, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज, डब्ल्यूएचओ के एसएमओ  डाॅ बस्वराज  कटारगी, के साथ डीएवी के प्रिंसिपल प्रशांत गिरी आदि मौजूद थे।
– सामुदायिक स्तर पर लोगों को कोविड से सुरक्षित करने के लिए जा रहे हैं हर जरूरी निर्णय :
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने कहा, सामुदायिक स्तर पर लोगों को कोविड जैसे घातक महामारी से सुरक्षित करने के लिए आवश्यक हर जरूरी निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है, जिसका जिला सहित पूरे प्रदेश में शुभारंभ हो चुका है। मैं युवाओं से अपील करता हूँ कि सभी युवा बेचिहक वैक्सीनेशन कराएं। इस घातक महामारी से बचाव के लिए सबसे बेहतर और मजबूत उपाय यही है। इससे ना सिर्फ कोई एक व्यक्ति विशेष सुरक्षित होगा। बल्कि, पूरा समुदाय सुरक्षित होगा और सभी लोग खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे।
– सभी शिविर स्थलों पर भी ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा कराई गई उपलब्ध :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, युवाओं को वैक्सीन लेने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो और अधिकाधिक युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो, इसके लिए जिले के सभी शिविर स्थलों पर ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा सभी जगह पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन वाइल की उपलब्धता और कर्मियों की तैनाती भी की गई है। ताकि युवाओं को वैक्सीनेशन कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी युवा सुरक्षित माहौल में सुविधाजनक तरीके से वैक्सीनेशन करा सकें।
– युवाओं को सिर्फ को-वैक्सीन का लगाया गया टीका :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, निर्देशानुसार 15 से 18 आयु वर्ग सभी युवाओं को फिलहाल सिर्फ को-वैक्सीन का टीका लगाया गया। वहीं, उन्होंने बताया जिन युवाओं ने आज वैक्सीनेशन कराया, उन्हें नियमानुसार 28 दिन बाद पुनः दूसरी डोज की भी वैक्सीन दी जाएगी। ताकि हर हाल में निर्धारित समय पर युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और इस घातक महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।
– वैक्सीनेशन के बाद युवाओं ने कहा – कोविड सुरक्षा के लिए सभी युवा साथी जरूर लें वैक्सीन :
पब्लिक हाई स्कूल में वैक्सीन लेने के बाद सूर्यगढ़ा निवासी सौरभ कुमार एवं नया टोला सलेमपुर निवासी अंकुश कुमार ने कहा, काफी लंबे से वैक्सीनेशन का इंतजार कर रहा था। आज इंतजार की घड़ी खत्म हो गई और वैक्सीन लेने बाद खुद को काफी सुरक्षित महसूस कर रहा हूँ। हमलोग अपने आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी युवाओं से भी अपील करता हूँ कि इस घातक महामारी से खुद के साथ पूरे परिवार और समाज की सुरक्षा के लिए निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।

नववर्ष की सौगात: 15 से 18 आयु वर्ग के युवाओं का जिले में कोविड वैक्सीनेशन शुरू, लगाया गया सुरक्षा का टीका 

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– जिलाधिकारी एवं सिविल सर्जन ने संयुक्त रूप से आर्य उच्च विद्यालय खगड़िया में आयोजित शिविर का उदघाटन कर युवाओं के वैक्सीनेशन अभियान का किया शुभारंभ
– जिले के सभी प्रखंडों में चयनित और चिह्नित जगहों पर शिविर का हुआ आयोजन
खगड़िया, 03 जनवरी-
सरकार ने कोविड के नये वैरिएंट के बढ़ते खतरे को देखते हुए पूरे प्रदेश के 15 से 18 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी किशोर-किशोरियों को इस घातक महामारी से बचाव के लिए सुरक्षा की सौगात दी है। सोमवार से जिले में इन आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी युवाओं का भी वैक्सीनेशन अभियान शुरू हो गया। जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष, सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा एवं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने संयुक्त रूप से आर्य कन्या उच्च विद्यालय खगड़िया में आयोजित वैक्सीनेशन शिविर का दीप प्रज्ज्वलित कर इस अभियान का शुभारंभ किया। इसके बाद जिले के सभी प्रखंडों में पूर्व से चयनित और चिह्नित जगहों पर शिविर का संचालन शुरू हुआ और सुविधाजनक तरीके से युवाओं को सुरक्षा का टीका लगाया गया। इस दौरान जिले के सभी शिविर स्थलों पर युवाओं का अच्छी-खासी भीड़ देखी गई और नियमानुसार रजिस्ट्रेशन कराने के पश्चात सभी युवाओं ने उत्साह के साथ सुरक्षा का टीका लगवाया। टीका लेने के बाद टीकाकृत युवाओं ने कहा, देर से ही सही, पर व्यवस्थित पहल के लिए सरकार का कदम सराहनीय है और सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन देने के लिए स्वास्थ्य विभाग धन्यवाद का पात्र है। इस मौके पर डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, खगड़िया सदर पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव रंजन, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, प्रखंड प्रबंधक रेणुका कुमारी आदि मौजूद थी।
– कोविड से सुरक्षा के लिए वैक्सीन सबसे बेहतर और कारगर उपाय, इसलिए बेचिहक वैक्सीनेशन कराएं युवा :
जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने कहा, सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस घातक महामारी से सुरक्षित करने के लिए जिले में लगातार आवश्यक प्रयास जारी है और हर हाल में इसे सुनिश्चित करने को लेकर हर जरूरी पहल भी की जा रही है। इसी कड़ी में अब 15 से 18 आयु वर्ग के युवाओं का भी वैक्सीनेशन शुरू कर दिया गया है। मैं जिले के तमाम युवाओं से अपील करता हूँ कि इस घातक महामारी से बचाव के लिए निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और अपने अन्य साथियों को भी प्रेरित करें। वैक्सीन ना सिर्फ पूर्णतः सुरक्षित है बल्कि, इस घातक महामारी से बचाव के लिए काफी प्रभावी है। यही नहीं, कोविड से बचाव के लिए सबसे बेहतर और कारगर उपाय भी है। इससे ना सिर्फ कोई एक व्यक्ति विशेष सुरक्षित होगा बल्कि, पूरा समुदाय सुरक्षित होगा और सभी लोग खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे।
– सभी शिविर स्थलों पर पर्याप्त सुविधा की उपलब्ध कराई गई व्यवस्था :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, जिले के सभी प्रखंडों में चयनित एवं चिह्नित स्थलों पर पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी। ताकि युवाओं को वैक्सीनेशन कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और व्यवस्थित तरीके से शिविर का संचालन सुनिश्चित हो साथ। इसके लिए जहाँ सभी शिविर स्थलों पर पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन वाइल की उपलब्धता और कर्मियों की तैनाती की गई थी। वहीं, ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी सुनिश्चित की गई थी। ताकि सभी लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें और अधिकाधिक युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।
– 28 दिन के अंतराल पर दी जाएगी दूसरी डोज :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, निर्देशानुसार फिलहाल 15 से 18 आयु वर्ग के  सभी युवाओं को सिर्फ को-वैक्सीन का टीका लगाया गया। वहीं, उन्होंने बताया जिन युवाओं ने आज वैक्सीनेशन कराया, उन्हें नियमानुसार 28 दिन की समयावधि पूरी करने के बाद पुनः दूसीरा डोज की भी वैक्सीन दी जाएगी। ताकि हर हाल में निर्धारित समय पर युवाओं का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और इस घातक महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।

कोरोना का टीका लेते ही किशोरियों ने कहा- धन्यवाद

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-किशोरों-किशोरियों में कोरोना टीकाकरण को लेकर उत्साह
-पहले टीका लेने के लिए पूरी तैयारी के साथ केंद्र पर पहुंचे
भागलपुर, 3 जनवरी।
जिले में किशोरों और किशोरियों के कोरोना टीकाकरण की सोमवार को शुरुआत हो गई। किशोरों-किशोरियों को टीका देने के लिए तो सामान्य टीकाकरण केंद्र पर व्यवस्था तो थी ही, साथ में 30 से अधिक स्कूलों में विशेष टीकाकऱण केंद्र भी बनाए गए थे। इनमें से शहरी क्षेत्र में चार टीकाकरण केंद्र थे। टीकाकरण की प्रक्रिया समय से शुरू हो सके, इसे लेकर समय से थोड़ा पहले ही स्वास्थ्यकर्मी पहुंच गए थे। किशोर-किशोरियों में पहले टीका लेने की होड़ मची हुई थी। टीका लेने के बाद अधिकतर किशोर-किशोरियों में सरकार को इसके लिए धन्यवाद कहा।
टीका लेने के बाद तसल्ली हो रही हैः जगदीशपुर के प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल की नौवीं की छात्रा सिमरन कुमारी ने बताया कि किशोर-किशोरियों को भी कोरोना का टीका देने के लिए सरकार का मैं धन्यवाद करती हूं। 18 साल से अधिक उम्र के अधिकतर लोगों ने तो कोरोना का टीका ले लिया था, हमलोग इससे वंचित थे। अब जब हमलोगों ने भी टीका ले लिया है तो तसल्ली हो रही है। जितना अधिक लोग कोरोना का टीका लेंगे, उतना जल्द सभी लोग इससे सुरक्षित रहेंगे। यही सोचकर मैंने पहले ही दिन कोरोना का टीका ले लिया।
समय पर बूस्टर डोज लूंगीः प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल की ही छात्रा बबिता कुमारी ने कहा कि मैंने कोरोना टीका की पहली डोज ले ली है और समय पूरा होने पर बूस्टर डोज भी ले लूंगी। टीका लेने में कोई देरी नहीं करनी चाहिए। सभी लोगों को समय पर कोरोना टीका की दूसरी डोज लेनी चाहिए। मैं लोगों से अपील करना चाहती हूं कि जिनलोगों का समय पूरा हो गया है, वह भी जल्द से जल्द जाकर कोरोना टीका की दूसरी डोज ले लें। कोरोना की तीसरी लहर का प्रसार नहीं, इसके लिए यह बहुत ही जरूरी है।
गाइडलाइन का भी पालन करूंगीः इसी स्कूल की प्रियंका कुमारी ने कहा कि मैंने तो कोरोना का टीका ले लिया, लेकिन इसके बावजूद कोरोना की गइडलाइन का सख्ती से पालन करूंगी। टीवी, अखबार और सोशल मीडिया के जरिये लगातार यह जानकारी शेयर की जा रही है कि कोरोना का टीका लेने के साथ-साथ गइडलाइन का भी पालन अवश्य करें। इसलिए मैंने टीका लेने भी मास्क पहनकर आई। केंद्र पर भी सामाजिक दूरी का पालन करते हुए टीका लिया। अन्य लोगों से भी ऐसा ही करने की मैं अपील करती हूं।
कोरोना से बचाव के लिए टीकाकऱण बेहतर उपायः जगदीशपुर के ही लोकनाथ हाई स्कूल के छात्र मनीष कुमार कहते हैं कि यह बात सही है कि कम उम्र के लोगों की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है, लेकिन कोरोना की चपेट में तो कोई भी आ सकता है। सरकार ने अच्छा किया कि हमलोगों के लिए भी टीका उपलब्ध करवा दिया। कोरोना से बचाव के दो सबसे अच्छे उपाय हैं। एक सतर्कता और दूसरा टीकाकरण। मैंने टीका ले लिया तो अब मैं पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहा हूं।