पारा मेडिकल भवन में एएनएम और जीएनएम को दी गई ट्रेनिंग

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-अंतरा और छाया के इस्तेमाल के बारे में दी गई जानकारी
-मास्टर ट्रेनर ने परिवार नियोजन के महत्व के बारे में बताया
बांका, 12 जनवरी
परिवार नियोजन को लेकर बुधवार को पारा मेडिकल भवन में एएनएम और जीएएनएम के दूसरे बैच को ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के दौरान अंतरा सुई और छाया टैबलेट के बारे में बताया गया। लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करने में इसका कैसे इस्तेमाल करना है, क्षेत्र में जाकर ये लोग जाकर बताएंगी। अब ये लोग क्षेत्र में जाकर लोगों की काउंसिलिंग कर अंतरा सुई और छाया टैबलेट के इस्तेमाल के बारे में बताएंगी। एएनएम और जीएनएम को ट्रेनिंग मास्टर ट्रेनर कुमारी रश्मि सीमा ने दी। मौके पर जिले में परिवार नियोजन के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी, केयर इंडिया के डीटीएल तौसीफ कमर, एफपीसी कन्हैया कुमार भी मौजूद थे।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि अंतरा एक इंजेक्शन है, जिसका असर तीन महीने तक होता है। इसी तरह छाया टैबलेट का असर एक सप्ताह तक होता है। शुरुआती तीन महीने तक प्रति सप्ताह छाया टैबलेट की दो-दो गोली खानी पड़ती है। लेकिन जब तीन महीना पूरा हो जाता है तो सिर्फ एक-एक गोली प्रति सप्ताह का सेवन किया जाता है। इसका इस्तेमाल करने से लोग अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाते हैं। साथ ही योजना के मुताबिक बच्चा पैदा कर खुशहाल जीवन जी सकते हैं। ट्रेनिंग में मौजूद एएनएम और जीएनएम इसे अपने क्षेत्र में लागू करेंगी।
परिवार नियोजन को लेकर अस्थायी सामग्री का करें इस्तेमाल: डॉ. चौधरी ने बताया कि अंतरा और छाया के इस्तेमाल से किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। अगर कोई अन्य परेशानी होती भी है तो वह तात्कालिक ही है। वह तुरंत समाप्त हो जाती है। इसलिए अंतरा और छाया के इस्तेमाल करने में किसी भी तरह की हिचक नहीं करनी चाहिए। इन अस्थायी सामग्री का इस्तेमाल कर लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक होना चाहिए और समय पर सीमित बच्चे पैदा कर बेहतर जीवन जीना चाहिए। परिवार नियोजन के साधन अपनाने से न सिर्फ स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद होता है, बल्कि आर्थिक तौर पर भी इसका फायदा पहुंचता है।
दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल जरूरीः दरअसल, दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल जरूरी होता है। साथ ही पहला बच्चा भी 20 साल के बाद ही पैदा करना चाहिए। ऐसा करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जिससे जच्चा और बच्चा, दोनों स्वस्थ रहता है। बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहने से न सिर्फ वह बीमारियों से बचाव रहता है, बल्कि कोई बीमारी होने पर भी उससे आसानी से उबर जाता है। इसलिए अंतरा और छाया का सेवन करने से लोग बेफिक्र होकर इन शर्तों को पूरा कर सकते हैं।

इस्माइलपुर में कोरोना टीका लेने वालों को को मिला पुरस्कार

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-समय पर कोरोना टीका की दूसरी डोज लेने वालों को पुरस्कार
-दूसरे और तीसरे सप्ताह के विजेताओं को दिया गया पुरस्कार
भागलपुर, 12 जनवरी-
जिले में कोरोना टीका की दूसरी डोज समय से लेने वालों को पुरस्कार देने का सिलसिला जारी है। बुधवार को इस्माइलपुर प्रखंड के लाभुकों को कोरोना टीका की दूसरी डोज समय पर लेने की वजह से लक्की ड्रॉ के तहत पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार प्रखंड विकास पदाधिकारी अनिल कुमार ने दिया। मौके पर पीएचसी प्रभारी डॉ. राकेश रंजन, केयर इंडिया के जितेंद्र कुमार सिंह, हैप्पी सिंह, सुष्मिता और सुमित व सानू मौजूद थे।
दूसरे सप्ताह का बंपर प्राइज अमिना खातून और सांत्वना पुरस्कार जस्मिना खातून और हमिदा खातून को दिया गया। वहीं तीसरे सप्ताह का बंपर प्राइज रेणु देवी और सांत्वना पुरस्कार ज्योतिष यादव, कंचन देवी, प्रकाश यादव और हेलो देवी को दिया गया। सभी लोगों को घर जाकर अन्य लोगों को भी कोरोना का टीका लेने के लिए जागरूक करने के लिए कहा गया।
पुरस्कार में दिए गए यह सामान: तीसरी लहर को लेकर रहें सतर्क: मौके पर मौजूद पीएचसी प्रभारी डॉ. राकेश रंजन के कहा कि कोरोना की तीसरी लहर सामने खड़ी है, इसलिए लोगों को सतर्क रहना चाहिए। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाना चाहिए और सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए। किसी तरह की परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जिनलोगों ने अभी तक कोरोना का टीका नहीं लिया है, उनलोगों को जल्द से जल्द टीका लेना चाहिए।
बंपर प्राइज के तहत तीन हजार रुपये तक का मिक्सर, कूकिंग गैस स्टोव, पानी का फिल्टर, सीलिंग फैन, कंबल और इंडक्शन कूकटॉप में से कोई एक सामान दिया गया। वहीं सांत्वना पुरस्कार के तहत एक हजार रुपये तक का पानी बोतल, कूकर, हेल्मेट, डिनर सेट और दिवाल घड़ी में से कोई एक सामान दिया गया।

मोबाइल वैन से आरटीपीसीआर जांच शुरू

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-मोबाइल वैन से जांच शुरू होने पर आरटीपीसीआर जांच की गति तेज होगी
-लोगों को जल्द मिलेगी रिपोर्ट, जिससे सही समय पर लोगों का होगा इलाज
भागलपुर, 12 जनवरी
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के नौलखा भवन में बुधवार से मोबाइल वैन से कोरोना सैंपल की आरटीपीसीआर जांच शुरू हो गई। केयर इंडिया की यह वैन मेडिकल कॉलेज को आरटीपीसीआर जांच की गति तेज करने के लिए उपलब्ध कराई गई है। इस वैन में लैब टेक्नीशियन से लेकर हर तरह की व्यवस्था केयर इंडिया की ओर से की गई है। इस वैन के जरिये जिले के सभी प्रखंडों से कोरोना जांच को लेकर लिए जा रहे सैंपल की जांच होगी।
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. आसिफ ने बताया कि मोबाइल वैन के आ जाने से जिले में कोरोना सैंपल की आरटीपीआर जांच की गति तेज होगी। कोरोना जांच कराने वाले लोगों को रिपोर्ट भी जल्द मिलेगी। सही वक्त पर रिपोर्ट मिल जाने के बाद लोग जल्द लोग जान पाएंगे कि उनको कोरोना है या नहीं। इससे न सिर्फ उनका सही समय पर इलाज हो सकेगा, बल्कि दूसरे लोगों में भी उनसे संक्रमण नहीं हो सकेगा।
जिले में कोरोना जांच की गति तेज: कोरोना की तीसरी लहर को लेकर जिले में कोरोना जांच की गति को तेज कर दी गई है। स्टेशन से लेकर शहर के तमाम जगहों पर लोगों की लगातार जांच की जा रही है। एंटीजन किट से जांच के बाद उसी वक्त बता दिया जा रहा है कि व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या नहीं। कोरोना संक्रमित व्यक्ति मिलने पर लोगों को तत्काल इलाज के लिए कहा जा रहा है। सामान्य परिस्थिति रहने पर होम आइसोलेशन में भेज दिया जा रहा है। मरीजों की मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
कोरोना गाइडलाइन का करें पालन: जिले में कोरोना मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद लोग लापरवाही कर रहे हैं। घर से बाहर जाते वक्त मास्क नहीं लगा रहे हैं। इस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी नहीं करें। घर से बाहर जाएं तो अनिवार्य तौर पर मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करें। एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाकर रहें। ऐसा करते रहने से एक से दूसरे लोगों में कोरोना का संक्रमण नहीं होगा।

मरीजों के लिए एम्बुलेंस से अस्पताल आने-जाने का किराया हुआ निर्धारित 

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 – कोरोना से उत्पन्न परिस्थिति को लेकर उठाया गया कदम
– निर्धारित दर से अधिक किराया लेने वालों पर होगी कार्रवाई
मुंगेर, 11 जनवरी 2022 :
कोरोना के तीसरी लहर के मद्देनजर सरकार कई स्तर पर कार्य कर रही है। कोरोना की रोकथाम और संक्रमितों के इलाज के लिए स्वास्थ्य महकमा तत्परता से जुटा है। कई कोरोना मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। इसके लिए सरकारी स्तर पर एम्बुलेंस लगाये गए हैं। साथ ही निजी एम्बुलेंस वाले मनमानी किराया वसूल नहीं कर सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा हर एम्बुलेंस के लिए किराया निर्धारित किया गया है। तय दर से अधिक किराया लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एम्बुलेंस संबंधित किसी तरह की शिकायत दर्ज करने के किए टॉल फ्री नंबर(06202751107) भी जारी की गई है।
50 किलोमीटर तक 1500 से 2500 रुपया किराया तय :
जिला के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान गत वर्ष भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा निजी एम्बुलेंस के लिए किराया तय किया गया था। कोरोना की तीसरी लहर के कारण उत्पन्न स्थिति को देखकर निजी एम्बुलेंस के लिए किराया निर्धारित  किया गया है। 50 किमी तक आने – जाने के लिए छोटी कार ( सामान्य) के लिए 1500 रुपये, छोटी कार ( एसी) के लिए 1700 रुपये, बोलेरो, सुमो व मार्शल ( सामान्य) के लिए 1800 रुपये, बोलेरो, सुमो व मार्शल (एसी) के लिए 2100 रूपये, मैक्सी, विंगर, सिटी राइडर, टेम्पो, ट्रेवलर व समकक्ष वाहन (14 से 22 सीट) सामान्य के लिए 2500 रुपये, जाइलो, क्वालिस, स्कॉर्पियो व टवेरा (एसी ) के लिए 2500 रुपये किराया निर्धारित किया गया है।
50 किलोमीटर से अधिक परिचालन होने पर 18 रूपये से 25 रूपये किलोमीटर का अतिरिक्त किराया :
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि 50 किमी से अधिक परिचालन करने पर निर्धारित दर के किलोमीटर के हिसाब से अतिरिक्त किराया को भी तय किया गया है। छोटी कार ( सामान्य), छोटी कार (एसी), बोलेरो, सुमो व मार्शल ( सामान्य), बोलेरो, सुमो व मार्शल (एसी) के लिए 18 रुपये प्रति किमी, मैक्सी, विंगर, सिटी राइडर, टेम्पो, ट्रेवलर व समकक्ष वाहन (14 से 22 सीट) सामान्य और क्वालिस, स्कॉर्पियो व टवेरा (एसी) के लिए 25 रुपये प्रति किमी के हिसाब से अतिरिक्त किराया निर्धारित किया गया है। तय किराया से अधिक राशि की मांग करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

कोरोना की तरह टीबी भी है संक्रामक बीमारी, इसलिए रहें सावधान 

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-लगातार खाँसी रहने पर तुरंत कराएं जाँच, अस्पताल में मुफ्त होती है जाँच
-मरीजों को सरकार द्वारा दी जाती है सहायता राशि
लखीसराय, 11जनवरी –
कोरोना को तरह ही टीबी भी एक संक्रामक बीमारी है। दोनों बीमारियों के लक्षण भी करीब-करीब एक जैसे ही मिलते-जुलते होते हैं। जिसके कारण बीमारी का सही पता लगाने में भी परेशानी होती है। ऐसे में पूर्व से टीबी जैसी बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह दौर विशेष सतर्कता बरतने का है । क्योंकि इन मरीजों का इम्युन सिस्टम बहुत कमजोर होता है। जिससे उनमें कोरोना संक्रमण का खतरा अन्य मरीजों से कई गुना अधिक है। सबसे जरूरी है कि मरीज की दवा का क्रम न टूटे। कोरोना में लगातार तेज बुखार और खांसी आती है। टीबी का लक्षण थकावट, आम बुखार, वजन गिरना, भूख न लगना, रात में पसीना आना आदि है।
लक्षण का महसूस होते ही कराएं जाँच-
टीबी के नोडल पदाधिकारी डॉ पी सी वर्मा  ने बताया कि लक्षण  महसूस होते ही ऐसे मरीजों को बिना देर किए अपनी जाँच करवानी चाहिए। पीएचसी से जिले के अन्य अस्पतालों में मुफ्त जाँच एवं दवाई की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही ऐसे मरीजों को उचित पोषण आहार के लिए सहायता राशि भी दी जाती है।
अनावश्यक यात्रा ना करें –
टीबी पीड़ित मरीज अनावश्यक यात्रा से बचें। घर से निकलने पर सैनिटाइजर साथ लेकर चलें। भीड़-भीड़ वाले जगह पर बिलकुल नहीं जाएं। धूलकण से बचाव के लिए हर आवश्यक पहल करें।
बचाव के उपाय:—-
1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें।
-मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
-मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूके और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
-मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहे। साथ ही एसी से परहेज करें।
-पौष्टिक खाना खाएं, एक्सरसाइज व योग करें।
-बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
-भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।
ये हैं टीबी के लक्षण:—-
-भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
-बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट रहना व रात में पसीना आना।
-हलका बुखार रहना, हरारत रहना।
-खांसी आते रहना, खांसी में बलगम आना तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
-गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
-गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
-महिलाओं एवं पुरषों  का टेम्प्रेचर के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
-पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
-टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

मैंने ली बूस्टर डोज, कोरोना से बचने के लिए आप भी लीजिए

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-कोरोना टीका की तीसरी डोज लेने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने की लोगों से अपील
-स्वास्थ्यकर्मियों, बीमारों-बुजुर्गों व फ्रंटलाइन वर्करों को दी जा रही प्रीकॉशनरी डोज
भागलपुर, 11 जनवरी-
एक तरफ जिले में कोरोना के नए मरीजों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है तो दूसरी तरफ इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। जांच, इलाज से लेकर जिले में कोरोना टीकाकरण अभियान भी काफी तेज गति से चल रहा है। इसी सिलसिले में कोरोना टीका की प्रीकॉशनरी डोज यानी  तीसरी डोज (बूस्टर) देने की भी शुरुआत हो गई है। पहले स्वास्थ्यकर्मियों, बीमारों-बुजुर्गों और फ्रंटलाइन वर्करों को बूस्टर डोज दी जा रही है। इस श्रेणी के ऐसे व्यक्ति जिन्होंने कोरोना टीका की दूसरी डोज नौ महीने पहले ले ली है, उन्हें बूस्टर डोज दी जा रही है। स्वास्थ्यकर्मी तीसरी डोज लेने के बाद अन्य लोगों से भी अपील कर रहे हैं।
नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमार दीपक ने कहा कि कोरोना से बचने के लिए टीका लेना बहुत ही जरूरी है। बड़ी संख्या में लोग टीका लेने के लिए सामने भी आ रहे हैं। कोरोना टीका की पहली और दूसरी डोज लेने वाले भी सामने आ रहे और अब तो तीसरी डोज भी आ गई है। इसलिए जिनलोगों ने नौ माह पहले टीका की दूसरी डोज ले ली है, वह जरूर तीसरी डोज ले लें। अभी तीसरी डोज स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाउन वर्करों और बीमारों-बुजुर्गों को दी जा रही है। बाद में जब आमलोगों को दी जाएगी तो आमलोग भी जल्द बूस्टर डोज ले लें।
वहीं खरीक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लैब टेक्नीशियन राजकिशोर साह कहते हैं कि टीका लेना तो बहुत ही जरूरी है। हमलोगों को पहले इसलिए टीका दिया जाता है, ताकि आमलोगों में यह संदेश जाए कि देखो स्वास्थ्यकर्मियों ने भी लिया है। इन्हें कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ है। आमलोगों को भी कुछ नहीं होगा। हमलोग भी टीकाकरण के दौरान आमलोगों को यह समझाते हैं कि हमने टीका लिया है। हमें इसका फायदा हो रहा है। इसलिए आप भी टीका लीजिए और कोरोना से बचिए।
नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. विनोद कुमार कहते हैं कि सोमवार और मंगलवार, दोनों ही दिन काफी संख्या में लोगों ने आकर बूस्टर डोज ली। इसके अलावा कोरोना टीका की पहली और दूसरी डोज भी लगातार दी जा रही है। क्षेत्र के सभी लोग जल्द से जल्द कोरोना टीका की सभी डोज ले लें। इस प्रयास में हमलोग लगे हुए हैं। आमलोग भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा तीसरी लहर से बचने के लिए लोगों की कोरोना जांच भी लगातार की जा रही है। लोगों से मास्क पहनने, सामाजिक दूरी का पालन करते हुए दो गज की दूरी एक-दूसरे के बीच बनाए रखने के कही जा रही है। लोग भी इसे मान रहे हैं।

टीका लेने वाले भी कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन

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-अबतक जिनलोगों ने टीका नहीं लिया है, वे लोग जल्द से जल्द टीका लें
-कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए सावधानी बरतना बहुत जरूरी
बांका, 11 जनवरी
कोरोना के नए मरीज फिर से मिलने लगे हैं। ऐसे में इससे बचने के लिए टीका लेना तो जरूरी है ही, साथ में कोरोना की गाइडलाइन का भी पालन करना जरूरी है। जिनलोगों ने अभी तक टीका नहीं लिया है, उन्हें तो सतर्क रहना ही होगा। साथ ही जिनलोगों ने टीका ले लिया है, वे भी सतर्क रहें। टीका लेने का यह फायदा जरूर है कि अगर कोरोना होगा भी तो उसका हल्का असर होगा और उससे आप आसानी से उबर जाएंगे। लेकिन लापरवाही कर कोरोना की गाइडलाइन का पालन नहीं करना और संक्रमित हो जाना किसी भी तरह से ठीक नहीं है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि जब तक कि कोरोना पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाए, तब तक लोगों को सतर्कता बरतनी होगी। टीका नहीं लेने वाले और लेने वाले, दोनों तरह के लोग सतर्क रहें। टीका लेने वाले को कोरोना का ज्यादा असर नहीं होगा, लेकिन लापरवाही कर उसकी चपेट में आना भी कोई बुद्धिमानी का काम नहीं है। इसलिए कोरोना गाइडलाइन का पालन करें। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करें। एक से दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाए रखें और बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई करें।
बेवजह घरों से नहीं निकलेः अब जब कोरोना के नए मामले फिर से आने लगे हैं तो सरकार ने सख्ती की है। बाजार के खुलने का समय निर्धारित की है। ऐसे में काम पड़ने पर बाजार या फिर कहीं और जाएं। वेवजह कहीं भी भीड़ नहीं लगाएं। ऐसा करना न सिर्फ आपके लिए घातक होगा, बल्कि इससे दुसरों को भी नुकसान हो सकता है। इसलिए कोरोना महामारी को लेकर लोगों को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास होनी चाहिए और घरों से बेवजह नहीं निकलना चाहिए। अगर निकलें तो जरूरी तौर पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन करें।
कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर को दिखाएः इस दौरान अगर किसी भी व्यक्ति को कोई परेशानी होती है तो तत्काल डॉक्टर को दिखाना चाहिए। सर्दी, बुखार या फिर खांसी हो तो डॉक्टर को दिखाएं। घबराएं नहीं। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक काम करें। डॉक्टर अगर जांच के लिए कहते हैं तो नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जरूर अपनी कोरोना जांच कराएं। जांच में अगर कोरोना की पुष्टि होती है तो डॉक्टर के कहे के मुताबिक दवा का सेवन करें। अगर कोरोना नहीं भी होता है तो डॉक्टर के अनुसार ही चलें। खुद डॉक्टर बनने की कोशिश नहीं करें।

जागरूकता की कमी है समुदाय में कुपोषण का मुख्य कारण- डॉ. उषा कुमारी  

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• आहार की प्रत्येक थाली में पांच खाद्य समूहों का समावेश जरुरी
• इंडियन डायटेटिक ऐसोसीएशन द्वारा नेशनल डायटेटिक डे पर वेबिनार का हुआ आयोजन
• सुक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है बच्चों में कुपोषण की वजह
पटना/ 11 जनवरी-
बाल कुपोषण शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य में बाधक होने के साथ उनके जीवन के सर्वांगिन विकास में बड़ा अवरोधक होता है। आज के समय में बिगड़ती जीवनशैली व अनियमित खानपान के कारण हमारा शरीर कई बीमारियों का घर बन गया है। इनसे लड़ने के लिए शरीर को पर्याप्त पोषण की जरुरत होती है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सके. नेशनल डायटेटिक दिवस के उपलक्ष में पोषण के लिए आहार विविधता की भूमिका पर इंडियन डायटेटिक ऐसोसीएशन द्वारा वेबिनार का आयोजन किया गया. इस वर्ष नेशनल डायटेटिक डे की थीम के रूप में “डाइटरी डायवर्सिफिकेशन- नीड ऑफ़ द ऑवर” यानि आहार में विविधता, समय की जरुरत को चुना गया है.
जागरूकता की कमी है समुदाय में कुपोषण का मुख्य कारण- डॉ. उषा कुमारी
वेबिनार में मुख्य वक्ता एवं एक्सपर्ट डॉ. उषा कुमारी, प्रोफेसर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने बताया कि समुदाय में जागरूकता की कमी कुपोषण का प्रमुख कारण है. पोषणयुक्त भोजन की उपलब्धता, आमजनों तक इसकी पहुँच एवं सही तरीके से उपयोग कर हम कुपोषण को मात दे सकते हैं. उन्होंने बताया ताजी फलों और सब्जियों का अपने दैनिक आहार में समावेश कर हम पोषित रह सकते हैं. बच्चों में शुरुआत से ही फल और सब्जी के सेवन की आदत लगाना बाल कुपोषण को रोकने में कारगर सिद्ध होगा.
खाने की थाली में सुक्ष्म पोषक तत्व युक्त आहार को दें प्राथमिकता:
डॉ. उषा ने बताया, भारतीय भोजन की थाली में कार्बोहायड्रेट और वसायुक्त सामग्रियों की मात्रा अधिक होती है और भोजन में प्रोटीन की समावेश पर ध्यान नहीं दिया जाता है. मौसमी फल और सब्जियों का उपयोग कर बहुत आसानी से हम अपने दैनिक आहार में प्रोटीनयुक्त खाद्यपदार्थों का समावेश बढ़ा सकते हैं और इसमें हरी सब्जियों और रंगबिरंगे मौसमी फल को शामिल करना सबसे सरल उपाय है. बच्चों के समग्र विकास के लिए उनके आहार में सुक्ष्म पोषक तत्वों का समावेश आवश्यक है और इससे बच्चों में नाटापन और दुबलापन से निजात संभव है. आहार में विविधता एक स्वस्थ आदत है और लोकल स्तर पर उपलब्ध उत्पादों से इसे आसानी से प्राप्त किया जा सकता है. समुदाय में पोषण वाटिका और किचन गार्डन को हर स्तर पर प्रोत्साहित करने की जरुरत है.
डॉ. उषा ने सीएनएनएस- 2016-18 की रिपोर्ट के अनुसार सुक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के कारण 1 से 4 वर्ष के बच्चों की राज्य में स्थिति की जानकारी दी जो निम्न है-
सुक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के कारण बच्चों में कमी  प्रतिशत में प्रभावित बच्चे
एनीमिया से ग्रसित बच्चे  43.9 %
आयरन फोलेट की कमी से ग्रसित बच्चे  6.1 %
विटामिन B 12 की कमी से ग्रसित बच्चे   13.8 %
विटामिन A की कमी से ग्रसित बच्चे  23.5 %
जिंक की कमी से ग्रसित बच्चे  19.8 %
वेबिनार में डॉ. ममता कुमारी, विभागाध्यक्ष, होम साइंस, तिलकामांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर, इंडियन डायटेटिक ऐसोसीएशन की राष्ट्रीय महासचिव सुमोना मंडल चौधरी, डॉ. अजय कुमार सिंह, शिशु रोग विशेषग्य, भागलपुर सहित वक्ताओं ने अपने विचार रखे. वेबिनार का संचालन इंडियन डायटेटिक ऐसोसीएशन के बिहार चैप्टर के सचिव डॉ. मनोज कुमार ने किया. वेबिनार में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने भी शिरकत की

टीकाकरण केंद्र की सुविधाएं किशोर-किशोरियों को कर रहीं आकर्षित

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-महिलाओं के लिए अलग से है पिंक बूथ की व्यवस्था, मनोरंजन के भी साधन
-टीका लेने के बाद कुछ होने पर इमरजेंसी की भी व्यवस्था यहां पर है मौजूद
भागलपुर, 7 जनवरी
कोरोना के नए मामले आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस पर काबू पाने के लिए कवायद तेज कर दी है। जिले में कोरोना जांच अभियान लगातार चल रहा है तो दूसरी ओर किशोरों-किशोरियों को भी टीका देने का काम शुरू हो गया है। कुछ टीकाकरण केंद्रों पर मौजूद सुविधाएं भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। खासकर टीचर्स ट्रेनिंग केंद्र पर उपलब्ध सुविधाएं किशोरों और किशोरियों का खासा आकर्षित कर रही हैं। इस केंद्र पर टीका की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग कर रहा है तो अन्य सुविधाएं केयर इंडिया की तरफ से उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
इस केंद्र पर टीका लेने वाले लाभुकों के लिए मनोरंजन तक की व्यवस्था है। वेटिंग रूम में टीवी भी लगा हुआ है। यहां पर सफाई से लेकर इमरजेंसी तक की व्यवस्था है। हालांकि अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं आया है कि टीका लेने के बाद लाभुक की स्थिति बिगड़ी हो, लेकिन अगर ऐसी परिस्थिति आती भी है तो उससे निपटने के इंतजाम किए गए हैं। यहां पर तीन काउंटर रजिस्ट्रेशन के लिए बनाए गए हैं तो तीन केंद्रों पर लाभुकों के लिए टीकाकरण की व्यवस्था है। महिलाओं के लिए अलग से पिंक बूथ बनाया गया है। साथ ही यहां पर किशोरों-किशोरियों के अलावा 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को भी टीका दिया जा रहा है।
किशोरियों को पिंक बूथ कर रहा आकर्षितः यहां पर टीका लेने आई टीएनबी कॉलेज की छात्रा साक्षी प्रिया ने बताया कि इस केंद्र की सबसे अच्छी बात यह है कि यहां पर पिंक बूथ की व्यवस्था है। इससे महिलाओं को टीका लेने में सुविधा हो रही है। जबसे किशोरों-किशोरियों के टीकाकरण की बात शुरू हुई तो सोच रही थी कि कहां पर टीका लूं, लेकिन जब इस केंद्र के बारे में सुनी तो बेझिझक यहां पर टीका लेने के लिए आ गई। यहां पर सभी कुछ वैसा ही मिला, जैसा कि हमने सुना था। मारवाड़ी कॉलेज की छात्रा निधि कुमारी कहती हैं कि एक तो कोरोना से बचाव के लिए टीका दिया जा रहा है, ऊपर से लोगों की सुविधाओं का भी ख्याल रखा जा रहा है। यह बहुत ही अच्छी बात है। मैं दूसरे लोगों को भी यहां आकर टीका लेने के लिए कहूंगी। कोरोना से बचने के लिए टीका लेना जरूरी है तो दूसरी ओर यहां पर सुविधाएं भी बेहतर हैं।
कोरोना गाइडलाइन का करवाया जा रहा पालनः सेंट टेरेसा स्कूल के छात्र निशांत भारती ने बताया कि यहां पर न सिर्फ महिलाओं के लिए, बल्कि आमलोगों के लिए भी बेहतर व्यवस्था है। ऑनस्पॉट रजिस्ट्रेशन होने से भी लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं। साथ ही अगर टीका लेने के लिए कुछ देर इंतजार करना पड़ेगा तो उसके लिए मनोरंजन की भी व्यवस्था है। साथ ही कुछ होने पर इमरजेंसी की व्यवस्था। सबसे खास बात यह है कि यहां पर कोरोना की गाइडलाइन का भी पालन करवाया जा रहा है। तापमान मापने के बाद ही लोगों को अंदर आने दिया जाता है। साथ ही मास्क और सामाजिक दूरी का पालन भी करवाया जाता है। एक तो कोरोना से बचाव के लिए टीका दिया जा रहा है, दूसरी ओर संक्रमण नहीं फैले इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है।

बौसी में अमरपुर और रजौन के लाभुकों को मिला पुरस्कार

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-समय पर कोरोना टीका की दूसरी डोज लेने वालों को दिया गया पुरस्कार
बांका, 6 जनवरी
जिले में कोरोना टीका की दूसरी डोज समय से लेने वालों को पुरस्कार देने का सिलसिला जारी है। गुरुवार को    बौसी,अमरपुर और रजौन के लाभुकों को कोरोना टीका की दूसरी डोज समय पर लेने की वजह से लक्की ड्रॉ के तहत पुरस्कार दिया गया। सभी प्रखंडों से एक विजेता को बम्पर प्राइज और 10 विजेता को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
बंपर प्राइज के तहत तीन हजार रुपये तक का मिक्सर, कूकिंग गैस स्टोव, पानी का फिल्टर, सीलिंग फैन, कंबल और इंडक्शन कूकटॉप में से कोई एक सामान दिया गया। वहीं सांत्वना पुरस्कार के तहत एक हजार रुपये तक का पानी बोतल, कूकर, हेल्मेट, डिनर सेट और दिवाल घड़ी में से कोई एक सामान दिया गया।
छूटे हुए लोग टीका लेने में देरी नहीं करेः सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने बताया कि जिले में कोरोना टीका की पहली डोज काफी लोगों ने ले ली है। दूसरी डोज लेने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। समय से कोरोना टीका की दूसरी डोज लीजिए। टीका लेने से कोरोना से भी आपका बचाव होगा, इसलिए देरी नहीं करें और जल्द से जल्द जाकर कोरोना टीका की दूसरी डोज लें। जिनलोगों ने कोरोना टीका की पहली डोज नहीं ली है, वे जल्द से जल्द पहली डोज ले लें।