राज्य में 10 करोड़ टीकाकरण में बांका की भूमिका अहम

0

-लोगों को ढूंढ-ढूंढकर दिया जा रहा है कोरोना का टीका
-पहली के बाद अब दूसरी डोज पर किया जा रहा फोकस
बांका, 24 दिसंबर-
कोरोना टीकाकरण की रफ्तार लगातार तेज होती हो रही है। टीका की पहली डोज काफी लोगों ने ले ली है। जिनलोगों ने नहीं ली है, उन्हें ढूंढ-ढूंढकर दी जा रही है। पहली डोज के बाद अब दूसरी डोज पर फोकस किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि राज्य में साढ़े नौ करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। जल्द ही बिहार 10 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाला है। इसमें बांका जिले का अहम योगदान है। यहां पर पहली डोज लेने वालों की संख्या 80 प्रतिशत को पार कर गई है तो दूसरी डोज लेने वालों की संख्या भी लगभग 60 प्रतिशत है।
टीका लेने से कोरोना का खतरा कम होगाः दोनों टीका लेने वाले कोरीचक के रहने वाले सुरेंद्र कुमार कहते हैं कि यह सुनकर काफी अच्छा लग रहा है कि राज्य में अब 10 करोड़ टीकाकरण होने जा रहा है। जितना जल्द सभी लोगों का टीकाकऱण हो जाएगा, उतना अच्छा रहेगा। टीका लेने के बाद कोरोना का खतरा कम हो जाएगा। जिन्हें कोरोना होगा भी, वह कम खतरनाक होगा। इसलिए लोगों से मेरी अपील है कि जल्द से जल्द कोरोना का टीका ले लें और अपने साथ दूसरे लोगों को भी इसके खतरे से बचाने में सहयोग करें।
आमलोग अभियान में कर रहे सहयोगः करहरिया के अंकित कुमार ने भी टीका की दोनों डोज ले ली है। उनका कहना है कि जिले के आमलोग टीकाकरण अभियान में सहयोग कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि अब तक इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है। पहले जरूर लोगों के मन में झिझक थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयास से लोगों में झिझक खत्म हो गई। जागरूकता अभियान लगातार चलते रहने से लोग जागरूक हुए और अब बेधड़क टीका लेने के लिए लोग सामने आ रहे हैं।
जागरूकता अभियान अभी भी जारीः शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि टीका लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले पहली डोज लेने के लिए लोग सामने आ रहे थे तो अब दूसरी डोज लेने के लिए भी लोग सामने आ रहे हैं। हालांकि टीका लेने वालों की संख्या अच्छी खासी हो गई है, लेकिन इसके बावजूद लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों से टीका लेने की अपील की जा रही है। राज्य अब 10 करोड़ का आंकड़ा छूने जा रहा है। साथ ही बांका में भी जल्द ही सभी लोगों का टीकाकरण हो जाएगा।
गाइडलाइन का पालन जरूरीः डॉ. चौधरी कहते हैं कि टीका लेने के बावजूद लोगों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। कोरोना एक संक्रामक रोग है, इसलिए इससे बचने का सबसे कारगर उपाय है गाइडलाइन का पालन करना। भीड़भाड़ से बचते हुए दो गज की दूरी का पालन करना और घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाना। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई करते रहना। ऐसा करते रहने से लोग कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे औ उनके जरिये दूसरों को भी कोरोना नहीं होगा।

सुषमा चोरडिया के कार्यों से होता है स्त्रीत्व का दर्शन

0

डॉ. सुमित्रा भोसले की सराहना; ‘ज्ञानज्योति’द्वारा ‘आदर्श समाजभूषण प्रेरणा गौरव पुरस्कार’ प्रदान

पुणे : सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स, पुणे की उपाध्यक्ष सुषमा चोरडिया को ज्ञानज्योति समाजसेवा संगठन, सोलापुर की ओर से पणजी (गोवा) में आयोजित एक समारोह में ‘आदर्श समाजभूषण प्रेरणा गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया. इस अवसर पर समाजभूषण, समाजरत्न, समाज गौरव, कलाभूषण, कलारत्न, कलागौरव, क्रीड़ा भूषण पुरस्कार भी वितरित किए गए। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गोवा के प्रतिभाशाली लोगों को सम्मानित किया गया। पुरस्कार शॉल, फेटा, प्रमाणपत्र, सम्मानचिन्ह और पदक के रूप में थे। यह पुरस्कार उन्हें नेशनल फीनिक्स ग्लोबल अवार्ड 2021 के तहत दिया गया हैं। इस समय ‘सूर्यदत्ता’ के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. संजय चोरडिया, संयोजक डॉ. विक्रम शिंगाडे और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

सुषमा चोरडिया ने कहा, ”सूर्यदत्ता एजुकेशन फाउंडेशन की स्थापना 1999 में हुई थी। प्रो. डॉ. संजय चोरडिया के कुशल नेतृत्व में सूर्यदत्त ने केजी से लेकर पीजी तक के हजारों छात्रों को शिक्षा दी है। सूर्यदत्ता में होटल मैनेजमेंट, फैशन डिजाइन, इंटीरियर डिजाइन, वोकेशनल कोर्स के साथ-साथ एमबीए, बीबीए, एमसीए, पीजीडीएम जैसे विभिन्न कोर्स सिखाए जाते हैं। अभिनव पहल के कारण संस्था के स्कूल और कॉलेज हमेशा सुर्खियों में रहते है। अपनी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्कृष्ट शिक्षण स्टाफ, दोस्ताना स्टाफ और लगातार विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने के लिए सूर्यदत्ता संस्था जाने जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मैंने भी खुद को झोक दिया है। आपके जैसे संगठनों की सराहना हमें ओर भी अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है।”

प्रा. डॉ. संजय चोरडिया ने कहा, “कुशल और रोजगार योग्य लोगों की पीढ़ी तयार हो रही है जो देश के विकास में योगदान दे सकती है। ‘सूर्यदत्त’ ने परंपरा और आधुनिकता को मिलाकर विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा प्रदान की है। इसके लिए लगातार विशेषज्ञ मार्गदर्शन, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण और प्रदर्शन गतिविधियां संचालित की जाती हैं। ज्ञान ज्योति समाज सेवा संगठन की मानसिकता बहुत अच्छी है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभाशाली लोगों को ढूंढना और उनकी सराहना करना एक कठिन काम है। ‘सूर्यदत्त’ की ओर से हर साल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाते हैं। इनमें भीमसेन जोशी, अनुपम खेर और विभिन्न राज्यों के राज्यपाल शामिल हैं। इसलिये हमें इस काम का अंदाजा है। हमारा उद्देश्य सूर्यदत्त और उसके गुणवत्ता प्रदर्शन को बढ़ावा देना और उसका प्रसार करना है।आपने जो पुरस्कार दिया है, इस पुरस्कार का हम विनम्रता से स्वीकार करते है.”

डॉ। सुमित्रा भोसले ने कहा, ‘सुषमा चोरडिया घर की देखभाल कर के शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम कर रही हैं। सुषमा चोरडिया के कार्यों से स्त्रीत्व का दर्शन होता है. एक स्त्री न केवल घर, अच्छी शिक्षा बल्कि उसकी सतर्कता और समर्पण की भी सबसे अधिक आवश्यकता है। इसका जीता जागता उदाहरण सुषमा चोरडिया हैं। उन्हें में दिल से बधाई देती हूं। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक डाॅ. विक्रम शिंगाडे ने स्वागत किया। धोंडीबा कुंभार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

डॉ. डेम मुन्नी आयरोनी की किताब “गेट बैलेंस” द्वारा एक बेहतर जीवन जीने की राह

0

लेखिका, मानवाधिकार कार्यकर्ता, कॉर्पोरेट ट्रेनर, हॉलीवुड प्रोड्यूसर, सेलिब्रिटी कोच, ग्लोबल पीस लीडर डॉ. डेम मुन्नी आयरोनी ने अपनी किताब “गेट बैलेंस” के द्वारा लोगों की जिंदगी में मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्तर में संतुलन लाने की एक पहल की है। इनकी आगामी पुस्तक दुनिया भर में उनके ज्ञान और अनुभव को साझा करने का स्त्रोत है। उनकी ये पुस्तक चौंका देने वाले तथ्य और परेशानी मुक्त जीवन जीने के कुछ अद्भुत उपायों का संग्रह है।

उनकी आगामी पुस्तक “गेट बैलेंस” वास्तव में जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन और संतुलन लाने की संभावना के चलते अपने नाम पर सटीक बैठती है। यह पुस्तक जीवन के बारे में धारणाओं में सुधार और एक व्यक्ति के आध्यात्मिक मूल्यों को जागृत करने के बारे में है या यूं कहें कि यह डॉ. डेम मुन्नी आयरन की शिक्षाओं का एक सारांश है।

कई समस्या-समाधान तकनीकों और स्वास्थ्य उपचारों को पुस्तक में शामिल किया गया है। यह पुस्तक बिना किसी लगाव या दर्द के विलासिता में जीने वाले चौंका देने वाले वास्तविक जीवन का बेहतरीन संकलन है। यह किताब बताती है की कैसे पूर्ण स्वतंत्रता वास्तविक जीवन को समझने से मिलती है। डॉ. डेम मुन्नी आयरोनी का दावा है कि एक बार जब आप पढ़ना शुरू करेंगे तो आप काम की जगह और घर में सकारात्मक माहौल बनाने में सफल होंगे।

डॉ. डेम मुन्नी आयरोनी समाज की बेहतरी के लिए कई कार्यक्रम और गैर-लाभकारी संगठन चलाकर पहले ही बहुतों का दिल जीत चुकी हैं। वह आर्ट 4 पीस अवार्ड्स, वाइस ऑफ बेवर्ली हिल्स और वर्ल्ड वाइड यूथ कांग्रेस की संस्थापक भी हैं। उन्होंने खरबों डॉलर प्राप्त करने वाले इस विशाल संगठन के लिए बहुत काम किया है।

डॉ. डेम मुन्नी आयरोनी मानती हैं की यह पुस्तक जीवन की जटिलताओं को कम करने के बारे में है। जिसने भी इस पुस्तक का अध्ययन किया है वह निश्चित रूप से अपने बिंदु एक साथ रखेंगे। यही एकमात्र तरीका है जिससे आप अपना उद्देश्य को हासिल करेंगे और अवसाद चिंता और तनाव से मुक्ति पा सकते हैं।
डॉ. डेम मुन्नी आयरोनी पास 75+ ​​पुरस्कार और 35 पदक हैं। वह नौ किताबें पहले ही लिख चुकी हैं।
डॉ. डेम मुन्नी आयरोनी समाज से वादा करती हैं की उनकी पुस्तक ‘गेट बैलेंस’ महिलाओं के सम्मान और अखंडता प्रतीक होगा। यह पुस्तक फरवरी 2022 के पहले सप्ताह में अमेज़न पर लॉन्च होगी।

ओमिक्रोन वैरिएंट से निपटने को ले डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ को दी जा रही है ट्रेनिंग

0

– सदर अस्पताल में दी जा ही पेडिएट्रिक एंड कोविड मैनजेमेंट की ट्रेनिंग

– 18 वर्ष से कम के बच्चों और किशारों को सुरक्षित करने को ले गाइडलाइन के अनुसार एहतियात

मुंगेर, 23 दिसम्बर। कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट की वजह से राज्य और जिले में सम्भावित कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभी से काफी एहतियात बरत रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुंगेर सदर अस्पताल परिसर स्थित एएनएम स्कूल में सदर अस्पताल मुंगेर, अनुमण्डल अस्पातल तारापुर और जिला के सभी समुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आए शिशु रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा पदाधिकारी, जीएनएम और एएनएम को पेडिएट्रिक कोविड मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है।
मुंगेर के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि देश में कोरोना के ओमिक्रोन वैरियंट से संक्रमित मरीजों के केस सामने आने लगे हैं। इससे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और किशारों के संक्रमित होने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि इस आयु वर्ग के बच्चे और किशोर कोरोना वैक्सीनेटेड नहीं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एएनएम स्कूल सभागार में डॉक्टर और जीएनएम स्टाफ को पेडिएट्रिक कोविड मैनजेमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि मुंगेर सहित पूरे राज्य भर में तेजी से 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। मुंगेर के 14 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीनेटेड किया जा चुका है। वहीं पूरे बिहार में लगभग साढ़े 9 करोड़ लोगों को कोविड वैक्सीनेटेड किया जा चुका है। अगले कुछ दिनों में अपना बिहार 10 करोड़ को वैक्सीनेटेड करने के लक्ष्य को पूरा कर लेगा ।
एसएनसीयू मुंगेर के नोडल अधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर संभावित तीसरी लहर से निपटने को लेकर बिहार सरकार काफी सजग होकर सेंट्रल गाइडलाइन के अनुसार नियोजित तरीके से डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ को पेडिएट्रिक कोविड मैनजेमेंट की ट्रेनिंग दे रही है। इसी के तहत पिछले दिनों पटना के एम्स में विभिन्न जिलों से आए शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को पेडिएट्रिक कोविड मैनजेमेंट की ट्रेनिंग दी गई । इस दौरान यह बताया गया कि आने वाले समय में कोरोना संक्रमण की वजह से यदि किसी बच्चे या किशोर को आईसीयू में भर्ती करने की स्थिति पैदा होती है तो सेंट्रल गाइडलाइन के अनुसार उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिए बताया गया है।
उन्होंने बताया बुधवार और गुरुवार को यहां सदर अस्पताल मुंगेर ,अनुमण्डल अस्पताल तारापुर और सभी सीएचसी और पीएचसी से आए शिशु रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा प्रभारी और नर्सिंग स्टाफ को सेंट्रल गाइड लाइन के अनुसार केयर इंडिया के सहयोग पेडिएट्रिक कोविड मैनजेमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि थर्ड वेव के दौरान यदि बच्चों को पीआईसीयू में भर्ती करने की स्थिति पैदा होती है तो उस दौरान उत्पन्न होने वाली क्रिटिकल कंडीशन को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके।

इस अवसर पर डॉ. पंकज सागर, केयर इंडिया की डीटीओ ऑफ डॉ. नीलू, दीपिका और वी चांदना सहित विभिन्न प्रखण्डों से आए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

शिशु को डायरिया ,निमोनिया से बचाव के लिए नियमित स्तनपान जरूरी

0

-जन्म के पहले घंटे के भीतर का स्तनपान, बनेगा जीवन का वरदान

लखीसराय, 23दिसंबर। सर्द के इस मौसम में सभी एहतियात बरत रहे हैं.। ऐसे मौसम में शिशुओं के भी पोषण का खास ख्याल रखा जाना जरूरी है। शिशुओं के आधारभूत पोषण में स्तनपान शामिल है। बच्चे के सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए माँ का दूध जरूरी है। माँ के दूध के अलावा छ्ह माह तक के बच्चे को ऊपर से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है। स्तनपान कराने से बच्चे में भावनात्मक लगाव पैदा होता और उसे यह सुरक्षा का बोध भी कराता है। लैंसेंट के एक रिपोर्ट के मुताबिक छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 फीसद और 15 फीसद कमी लायी जा सकती है।
शुरुआती स्तनपान जरूरी: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक भारती ने बताया डायरिया व निमोनिया से बचाव के लिए स्तनपान बहुत अधिक कारगर है। माँ के दूध की महत्ता को समझते स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी यह सुनिश्चित कराया जा रहा है कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे को माँ की छाती पर रखकर स्तानपान की शुरुआत लेबर रूम के अंदर ही करायी जाए। इसके अलावा माँ को स्तनपान की पोजीशन, बच्चे का स्तन से जुड़ाव और माँ के दूध निकालने की विधि को समझाने में भी ममता द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है ताकि कोई भी बच्चा अमृत समान माँ के दूध से वंचित न रह जाये।
उन्होंने बताया कि यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाये तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। बच्चे को छ्ह माह तक लगातार केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए और उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय अथवा भैंस का दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह बच्चे के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सम्पूर्ण आहार के रूप में काम करता है। बच्चे को हर डेढ़ से दो घंटे में भूख लगती है। इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके माँ का दूध पिलाते रहना चाहिए। माँ का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है लेकिन वह बच्चे के लिए पूर्ण होता है। अधिकतर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनका दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं पड़ रहा और वह बाहरी दूध देना शुरू कर देती जो कि एक भ्रांति के सिवाय और कुछ नहीं है। माँ के दूध में भरपुर पानी और पोषक तत्व होते हैं इसलिए बच्चे को बाहर का कुछ देने की जरूरत नहीं होती।

बांका सदर, अमरपुर, बौंसी, बाराहाट, शंभूगंज और कटोरिया के लाभुकों को मिला पुरस्कार

0

-समय पर कोरोना टीका की दूसरी डोज लेने वालों को दिया गया पुरस्कार
-टीका की दूसरी डोज समय पर लेने पर आप भी जीत सकते हैं पुरस्कार
बांका, 23 दिसंबर
जिले में कोरोना टीका की दूसरी डोज समय से लेने वालों को पुरस्कार देने का सिलसिला जारी है। गुरुवार को जिले के बांका सदर, अमरपुर, बौंसी, बाराहाट, शंभूगंज और कटोरिया के लाभुकों को कोरोना टीका की दूसरी डोज समय पर लेने की वजह से लक्की ड्रॉ के तहत पुरस्कार दिया गया। सभी प्रखंडों से एक विजेता को बम्पर प्राइज और 10 विजेता को सांत्वना पुरस्कार दिया जा रहा है। आप भी बन सकते हैं पुरस्कार के भागीदार, इसलिए देर मत कीजिए। कोरोना टीका की पहली डोज लेने के बाद समय पूरा हो गया है तो जल्द दूसरी डोज लगवा लें। आपको भी मिल सकता है इनाम।
बंपर प्राइज के तहत तीन हजार रुपये तक का मिक्सर, कूकिंग गैस स्टोव, पानी का फिल्टर, सीलिंग फैन, कंबल और इंडक्शन कूकटॉप में से कोई एक सामान दिया गया। वहीं सांत्वना पुरस्कार के तहत एक हजार रुपये तक का पानी बोतल, कूकर, हेल्मेट, डिनर सेट और दीवाल घड़ी में से कोई एक सामान दिया गया। मालूम हो कि 27 नवंबर से 31 दिसंबर तक कोरोना टीका की दूसरी डोज समय पर लेने वालों को हर सप्ताह पुरस्कार देने की योजना है। इसके तहत कुल पांच सप्ताह तक लोगों को पुरस्कार दिया जाएगा। पांचों सप्ताह पूरा होने पर 31 दिसंबर को जिला स्तर पर तीन विजेताओं को ग्रैंड प्राइज दिया जाएगा। ग्रैंड प्राइज के तहत प्रखंड के सभी विजेताओं में से तीन को 25 हजार रुपये तक का 32 इंच की एलईडी टीवी या फिर डबल डोर वाला रेफ्रिजरेटर दिया जाएगा।
छूटे हुए लोग टीका लेने में देरी नहीं करें -सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने बताया कि जिले में कोरोना टीका की पहली डोज काफी लोगों ने ले ली है। दूसरी डोज लेने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। अब तो समय पर दूसरी डोज लेने वालों को पुरस्कार भी दिया जा रहा है। समय से कोरोना टीका की दूसरी डोज लीजिए, हो सकता है आप ही इनाम के भागीदार हों। साथ ही टीका लेने से कोरोना से भी आपका बचाव होगा, इसलिए देरी नहीं करें और जल्द से जल्द जाकर कोरोना टीका की दूसरी डोज लें। जिनलोगों ने कोरोना टीका की पहली डोज नहीं ली है, वे जल्द से जल्द पहली डोज ले लें।
उपलब्ध करायी जा रही सूचीः लकी ड्रॉ के लिए निर्धारित अवधि के दौरान प्रतिदिन कोविन पोर्टल से दूसरी खुराक के ड्यू लाभुकों की सूची को शाम 6 बजे तक अपडेट करने के साथ अगले सात दिनों तक इसका संधारण उपलब्ध करायी जा रही है। संकलित आंकड़ों में से दूसरी खुराक का टीका लक्की ड्रॉ की पात्रता अनुरूप प्राप्त लाभर्थियों की सूची संधारित की जा रही है और लक्की ड्रॉ के लिए सम्मिलित करते हुए पत्र के साथ संलग्न एसओपी में निर्धारित दिशा-निर्देश के अनुसार विजेता को पुरस्कृत किया जा रहा है।

स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत और लोगों के उत्साह से सफल हो रहा टीकाकरण: सिविल सर्जन

0

-जिले में अब तक लगभग 19 लाख लोगों का हो चुका है टीकाकरण
-11 लाख से अधिक लोगों ने कोरोना टीका की पहली डोज तो लगभग 8 लाख लोगों ने दूसरी डोज ली है

बांका, 23 दिसंबर

सूबे में कोरोना टीकाकरण का आंकड़ा 10 करोड़ के पार पहुंचने वाला है। अभी तक 9.5 करोड़ से अधिक लोगों ने टीका ले लिया है। इसमें बांका जिले का अहम योगदान है। जिले में अब तक लगभग 80% लोगों ने कोरोना टीका की पहली डोज ले ली है जबकि लगभग 52% लोग कोरोना टीका की दूसरी डोज ले चुके हैं। इस तरह से देखा जाए तो जल्द ही जिला शत-प्रतिशत लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। आने वाले कुछ महीनों में जिले में शत प्रतिशत टीकाकरण हो जाएगा और यहां के लोग कोरोना से बहुत हद तक सुरक्षित भी हो जाएंगे।

सिविल सर्जन डॉ सुधीर कुमार महतो ने कहा कि राज्य में टीकाकरण का आंकड़ा 10 करोड़ के पास पहुंचने ही वाला है। यह बहुत ही अच्छी बात है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। इसमें स्वास्थ्यकर्मियों के साथ’-साथ आमलोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वास्थ्यकर्मियों ने जहां दिन-रात एक कर लोगों का टीकाकरण किया, वहीं आमलोगों ने भी उत्साह दिखाते हुए टीकाकरण करवाया। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भी टीकाकरण अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। लोगों को जागरूक कर कोरोना टीका के फायदे को बताकर लोगों को प्रेरित किया।

स्वास्थ्यकर्मियों ने दिन रात एक कर दिया: शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि जब से कोरोना का दौर शुरू हुआ है, स्वास्थ्यकर्मियों ने चैन की सांस नहीं ली है। वह दिन-रात कोरोना कोरोना की जांच से लेकर टीकाकरण में लगे रहते हैं। ऐसा नहीं है कि वह दबाव में ऐसा कर रहे हैं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी को समझकर काम कर रहे हैं। उनके मन में यह बात रहती है कि जल्द से जल्द सभी लोगों का टीकाकरण हो जाए, ताकि लोग कोरोना वायरस से बच सकें।

जिन्होंने नहीं लिया है वह जल्द ले टीका: कोरोना का टीका लेने वाले वासुदेव यादव ने बताया कि शुरुआत में तो टीका को लेकर मन में थोड़ा सा भ्रम था, लेकिन जब स्वास्थ्यकर्मियों और समाज के लोगों ने इसके बारे में बताया तो समझ में आया कि टीका लेना बहुत ही जरूरी है। इसके बाद मैंने टीका लिया और मुझे बहुत खुशी है कि इतनी संख्या में लोग टीका ले चुके हैं। जिनलोगों ने टीका नहीं लिया है, मैं उनसे अपील करता हूं वे लोग जल्द से जल्द टीका लेकर कोरोना वायरस को खत्म करने में अपना योगदान दें।

कोरोना की गाइडलाइन का पालन भी जरूरी: पुष्पांजलि भारती ने भी कोरोना का टीका ले लिया है। वाह कहती हैं टीका लेने के बाद भी मैं कोरोना गाइडलाइन का पालन करती हूँ। लोगों से भी पालन करने के लिए कहती हूं । कोरोना का टीका लेना जरूरी है, लेकिन यह एक संक्रामक बीमारी है इसलिए सामाजिक दूरी का पालन करना और घर से बाहर जाते वक्त या किसी से बात करते वक्त मास्क लगाना बहुत जरूरी है। इससे बचने के लिए और जिन लोगों ने अभी तक टीका नहीं लिया है, वह जल्द से जल्द टीका ले ले।

आशा कार्यकर्ता ऑनलाइन सामग्री मंगवाकर क्षेत्र के लोगों में बांटेंगी

0

-कहलगांव अनुमंडल अस्पताल में एफपीएलएमआईएस का दिया गया प्रशिक्षण
-परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री ऑनलाइन लेने के बताए गए तरीके
भागलपुर, 23 दिसंबर।
कहलगांव अनुमंडल अस्पताल में गुरुवार को क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं को फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक इनफॉरमेशन सिस्टम (एफपीएलएमआईएस) का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक आलोक कुमार ने दिया। प्रशिक्षण के दौरान सभी को परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन कैसे प्राप्त करना है, इसकी जानकारी दी गई। इंडेंट करने से लेकर रिसीव करने के तरीके प्रशिक्षण के दौरान बताए गए। कंडोम, कॉपर टी, अंतरा आदि सामग्री को ऑनलाइन प्राप्त करने की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी गई। सामग्री प्राप्त कर क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार से लेकर वितरण करने तक के बारे में प्रशिक्षण के दौरान बताया गया। मौके पर बीएचएम अजय, बीसीएम मिथिलेश, बीएम श्याम और आईसीटी कोऑर्डिनेटर रामाशीष मौजूद थे। प्रशिक्षण ले रही आशा को सभी बारीकी को समझ कर क्षेत्र में बेहतर तरीके से काम करने के लिए कहा।

परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार भी करेंगी आशा कार्यकर्ता: प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के बाद आशा कार्यकर्ता अब परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन मंगवाकर उसे क्षेत्र में वितरण करने का काम करेंगी। साथ ही परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के इंडेंट से लेकर प्राप्त करने के तरीके और इसका क्षेत्र में किस तरह से प्रचार-प्रसार करना है, इसकी जानकारी वे अपने सहयोगी को भी देंगी। साथ ही सामग्री के वितरण के दौरान इसे लेकर लोगों को जागरूक करने का काम भी आशा कार्यकर्ता करेंगी। लोगों को समझाएंगी कि इसके इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।

तीन तरीके से प्राप्त कर सकेंगे परिवार नियोजन की सामग्रीः प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि परिवार नियोजन सामग्री को ऑनलाइन तीन तरीके से मंगाया जा सकता है। पहला मोबाइल एप के जरिये, दूसरा मोबाइल से मैसेज कर और तीसरा कंप्यूटर के जरिये ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। आशा कार्यकर्ता इसे मोबाइल एप और मैसेज के जरिये मंगा सकती हैं, जबकि स्टोर कीपर मैसेज और कंप्यूटर से ऑनलाइन इंडेंट कर भी मंगवा सकते हैं। पहले क्षेत्र के लोगों की जरूरतों के मुताबिक इंडेंट करेंगे। सामग्री आ जाने के बाद फिर उसका क्षेत्र के लोगों के बीच वितरण करेंगे।

परिवार नियोजन पर किया जा रहा फोकसः जिले में परिवार नियोजन को लेकर लगातार फोकस किया जा रहा है। इसे लेकर परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के वितरण से लेकर समय-समय पर कैंप और मेला भी लगाया जाता है। जहां पर कि लोगों को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में बताया जाता है। साथ ही किस तरह से बच्चे की प्लानिंग करती है, इसकी जानकारी दी जाती है। दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल और पहला बच्चा 20 साल से पहले नहीं हो, इस बारे में बताया जाता है।

फाइलेरिया उन्मूलन: शत-प्रतिशत लोगों को दवाई का सेवन सुनिश्चित कराने को तेज हुआ आईडीए अभियान

0

– आशा कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को खुद के सामने खिलाई जा रही अल्बेंडाजोल, डीईसी, आईवरमेक्टिन की दवा
– कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ दवाई का सेवन करा रही मेडिकल टीम

शेखपुरा, 22 दिसंबर।
फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर बीते मंगलवार से जिले में शुरू हुए आईडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) अभियान की गति दूसरे दिन बुधवार को तेज कर दी गई। ताकि हर हाल में निर्धारित समयावधि के अंदर अधिकाधिक लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए दवाई का सुनिश्चित रूप से सेवन कराया जा सके और अभियान सफल हो सके। जिसे सार्थक रूप देने के लिए मेडिकल टीम की देखरेख में संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गृह भेंट की तर्ज पर घर-घर जाकर लोगों को अल्बेंडाजोल, डीईसी और आईवरमेक्टिन की दवा खिलाई जा रही और इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। वहीं, अभियान को हर हाल में सफल बनाने के लिए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह खुद भी आईडीए अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

– कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ एवं तय मानकों के अनुसार खिलाई जा रही है दवा :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया, फाइलेरिया उन्मूलन को हर हाल में पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए जिले में मंगलवार से आईडीए अभियान का शुभारंभ हो चुका है। जिसके दौरान कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ तय मानकों के अनुसार सुपरवाइजर के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं द्वारा योग्य व्यक्तियों को दवाई खिलाई जा रही है। वहीं, उन्होंने बताया, हर हाल में अभियान की सफलता एवं शत-प्रतिशत लोगों को दवाई का सेवन सुनिश्चित करने के लिए एक-एक व्यक्ति तक स्वास्थ्य टीम पहुँचकर दवाई का सेवन करा रही है। ताकि एक भी व्यक्ति दवाई खाने से वंचित नहीं रहें और हर हाल में अभियान सफल हो सके।

– फाइलेरिया से बचाव के लिए दवाई का सेवन जरूरी :
जिले के वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार ने बताया, इस बीमारी से बचाव के लिए दवाई का सेवन बेहद जरूरी है। क्योंकि, बचाव के लिए सबसे बेहतर और कारगर उपाय दवाई का सेवन ही है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि खुद एवं परिवार और समाज की सुरक्षा के साथ-साथ इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए निश्चित रूप से दवाई का सेवन करें। वहीं, उन्होंने बताया, दवाई के सेवन के साथ-साथ ही एहतियात भी जरूरी है। इसलिए, अभियान के दौरान योग्य व्यक्तियों को दवाई तो खिलाई ही जा रही , इसके अलावा इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है। जैसे कि, घर के आस-पास गंदगी जमा नहीं होने दें एवं घरों में सोने से पहले मच्छरदानी का उपयोग करें। साथ ही अन्य लोगों को दवा सेवन के प्रति जागरूक भी करें, ताकि फाइलेरिया जैसी बीमारी जड़ से समाप्त हो सके। इस बीमारी को पूरी तरह से मिटाने के लिए जागरूकता भी बेहद जरूरी है। वहीं, उन्होंने बताया, दवा सेवन के बाद किसी तरह के सामान्य साइड इफेक्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। अमूमन जिनके अंदर फाइलेरिया के परजीवी होते हैं, उनमें ही साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं। साइड इफेक्ट सामान्य होते हैं, जो प्राथमिक उपचार से ठीक भी हो जाते हैं।

– फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाइड्रोसील (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।

– इन बातों का रखें ख्याल :
– भूखे पेट दवा नहीं खिलानी है।
– किसी के बदले किसी अन्य को दवा ना दें और स्वास्थ्य कर्मी के सामने दवा खाएं।
– गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलानी है।
– 02 वर्ष तक के छोटे बच्चे को दवा नहीं खिलानी है।
– गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को भी दवा नहीं खिलानी है।

– फाइलेरिया से बचाव के उपाय :
– सोने के समय मच्छरदानी का निश्चित रूप से प्रयोग करें।
– घर के आसपास गंदा पानी जमा नहीं होने दें।
– अल्बेंडाजोल व डीईसी दवा का निश्चित रूप से सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

कोविड मेगा ड्राइव: जिले सभी प्रखंडों में चलाया गया विशेष कोविड वैक्सीनेशन अभियान

0

– चयनित स्थानों में वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर छूटे व्यक्तियों को दी गई वैक्सीन
– जरूरतमंदों के घरों तक मेडिकल टीम ने दी दस्तक, लगाया गया सुरक्षा का टीका

खगड़िया, 22 दिसंबर।
कोविड के नये वैरिएंट के खतरे को रोकने और सामुदायिक स्तर पर इस घातक महामारी से लोगों को सुरक्षित करने के लिए जिले में लगातार कोविड मेगा ड्राइव चलाया जा रहा है। जिसके माध्यम से जिले के सभी प्रखंडों में विशेष कोविड वैक्सीनेशन आयोजित कर लोगों को सुरक्षा के टीके लगाए जा रहे हैं। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो और एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहे। दरअसल, इस घातक महामारी से बचाव के लिए सबसे प्रभावी और बेहतर उपाय वैक्सीन ही है। मंगलवार को पुनः जिलेभर में कोविड मेगा ड्राइव चलाया गया। जिसके माध्यम से जिले के सभी प्रखंडों में विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर अबतक किसी भी कारणवश वैक्सीन से वंचित लोगों को वैक्सीनेटेड किया गया। साथ ही सेकेंड डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा करने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी गई। इधर, विशेष अभियान के सफल संचालन के लिए सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, खगड़िया सदर पीएचसी डाॅ राजीव रंजन ने विभिन्न सेशन साइटों का भ्रमण कर आवश्यक निर्देश देते दिखे।

– कोविड से बचाव के लिए वैक्सीन ही सबसे प्रभावी और कारगर उपाय :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, कोविड से बचाव के लिए वैक्सीन ही सबसे प्रभावी और कारगर उपाय है । इसी के बदौलत इस घातक महामारी से सुरक्षा संभव है। यही नहीं, कोविड के नये वैरिएंट के खतरे से भी काफी हद तक बचाव के लिए भी वैक्सीन जरूरी है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि खुद एवं परिवार और समाज को इस महामारी से सुरक्षित करने के लिए सभी लोग निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। वहीं, उन्होंने बताया, सभी सेशन साइटों पर दोनों डोज की वैक्सीन दी गई। किन्तु, इसबार सेकेंड डोज की वैक्सीन लेने की निर्धारित समयावधि पूरी करने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता के तौर पर सुरक्षा का टीका लगाया गया। विशेष अभियान के सफल संचालन के लिए सभी सेशन साइटों पर पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती एवं वैक्सीन वाइल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। ताकि एक भी व्यक्ति को वैक्सीन के अभाव में लौटना नहीं पड़े। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में चल रहे वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति देने के लिए वैक्सीनेशन टीम को आवश्यक निर्देश दिए गए।

– जरूरतमंदों के घरों तक पहुँची वैक्सीनेशन टीम :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, मेगा वैक्सीनेशन ड्राइव के तहत जिले के सभी प्रखंडों में चयनित जगहों पर तो विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर आयोजित की ही गई। किन्तु, जो लोग शिविर स्थल तक आने में असमर्थ थे, उन्हें होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई, यानी उनके घर पर जाकर स्वास्थ्य टीम द्वारा वैक्सीन दी गई। ताकि ऐसे लाभार्थी भी वैक्सीन से वंचित नहीं रहें और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके तथा सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी के खतरे से सुरक्षित हों।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।