जरूरतमंदों को आरबीएसके टीम की सहयोग से मिल रही है बेहतर स्वास्थ्य सुविधा 

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– लखीसराय एवं चानन में लोगों को कराई जा रही है समुचित  स्वास्थ्य सुविधा  मुहैया
– कोविड के दौर में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में निभाई अग्रणी भूमिका
लखीसराय, 03 दिसंबर।
जरूरतमंदों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने में लखीसराय एवं चानन में तैनात आरबीएसके टीम भी अग्रणी भूमिका निभा रही है। ताकि लोगों को सुविधाजनक तरीके से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ मिल सके और लोगों में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं के प्रति विश्वास बढ़े तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मिल सके। इसके लिए जिले के लखीसराय पीएचसी में तैनात आरबीएसके की चार सदस्यीय टीम द्वारा इलाके में भ्रमण कर जहाँ अपनी कर्तव्य का निर्वहन किया जा रहा है वहीं, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जा रही  और लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। जिससे अधिकाधिक लोग सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का सुविधाजनक तरीके से लाभ ले सकें और अनावश्यक परेशानियों से दूर रहें।
– कोविड के दौर में भी आरबीएसके टीम का रहा है सराहनीय योगदान :
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, कोविड के दौर में आरबीएसके टीम का सराहनीय योगदान रहा है। कोविड जैसे घातक महामारी के दौर में जहाँ लोग अपनों से भी परहेज कर रहे थे। वहीं, आरबीएसके की टीम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने में अग्रसर थे। कोविड पीड़ित मरीजों की ट्रेसिंग, दवाई मुहैया कराने समेत कोविड से अन्य कार्यों में भी आरबीएसके टीम का अहम योगदान रहा है। इसके अलावा वर्तमान दौर में भी लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा सके, इसके लिए आरबीएसके की टीम लगातार क्षेत्र भ्रमण कर जरूरतमंदों को चिह्नित कर समुचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में अग्रसर है।
– जरूरतमंदों को चिह्नित कर बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सेवा करायी जाती है उपलब्ध :
आरबीएसके टीम में शामिल लखीसराय पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी (आयुष) डाॅ प्रेमचंद कुमार आनंद ने बताया, समाज के अंतिम व्यक्ति को भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके, इसके लिए हमारी टीम इलाके का भ्रमण कर जरूरतमंदों को चिह्नित कर उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करती है। यही नहीं, जरूरतमंदों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने तक हमारी टीम जरूरी सहयोग भी करती है। ताकि लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवा का लाभ लेने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोगों को सुविधाजनक तरीके से सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके। वहीं, उन्होंने बताया, हमारी टीम में दो चिकित्सक, एक-एक एएनएम और फर्मासिस्ट रहते हैं।
– नवजातों के स्वास्थ्य का भी रखा जाता है ख्याल :
आरबीएसके टीम में शामिल लखीसराय पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी (आयुष) डाॅ पूनमलता ने बताया, हमारी टीम द्वारा नवजातों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाता है। इसके लिए हमारी टीम क्षेत्र का भ्रमण कर ऐसे नवजातों को चिह्नित करती है, जो शारीरिक विकृति, शारीरिक विकास से अवरुद्ध समेत अन्य परेशानी से पीड़ित होते हैं। ऐसे नवजातों को चिह्नित कर उसे समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं उपलब्ध कराई जाती हैं।

कोविड के नये वैरिएंट ओमिक्रोन के खतरे से निपटने को जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट, पर लोगों की भी सहयोग की जरूरत : जिलाधिकारी

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– विशेष कोविड वैक्सीनेशन अभियान की सफलता को लेकर जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के अफसरों के साथ की बैठक, दिए निर्देश
– जिले में विशेष वैक्सीनेशन अभियान आज, 50 हजार लोगों को टीकाकृत करने लक्ष्य निर्धारित

खगड़िया, 03 दिसंबर।
शनिवार को पूरे जिले में विशेष कोविड वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। जिसकी सफलता को लेकर गुरुवार की देर शाम जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने अपने कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के साथ-साथ प्रशासनिक अफसरों के साथ एक बैठक की। जिसमें जिलाधिकारी ने मौजूद अफसरों से विशेष वैक्सीनेशन अभियान की सफलता को लेकर विस्तृत चर्चा की। जिसके बाद अभियान को हर हाल में सफल बनाने के जरूरी निर्देश दिए। ताकि विशेष अभियान के अधिकाधिक लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और अभियान सफल हो सके। वहीं, जिलाधिकारी ने बताया, कोविड के नये वैरिएंट के खतरे से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और इसके लिए व्यापक पैमाने पर आवश्यक तैयारियाँ की गई हैं। किन्तु, इसके सामुदायिक स्तर पर लोगों का भी सकारात्मक सहयोग की जरूरत है। इसलिए, मैं संपूर्ण जिलेवासियों से अपील करता हूँ कि जो व्यक्ति अबतक वैक्सीन नहीं ले पाएं, वह जरूर वैक्सीन लें। जो पहला डोज ले चुके हैं और दूसरे डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा कर चुके हैं, वह भी दूसरे डोज का वैक्सीनेशन कराएं। तभी हम इस घातक महामारी और नये वैरिएंट से प्रभावी रूप से सुरक्षित हो सकते हैं। बैठक में डीडीसी अभिलाषा कुमारी शर्मा , सीएस डॉ अमरनाथ झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, एसीएमओ डाॅ आरएन चौधरी, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, डॉ शशि समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

– 50 हजार लोगों को टीकाकृत करने का निर्धारित किया गया है लक्ष्य :
जिलाधिकारी डाॅ आलोक रंजन घोष ने बताया, शनिवार को जिले में होने वाले विशेष वैक्सीनेशन अभियान के दौरान 50 हजार लोगों को टीकाकृत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। जिसे पूरा करने के लिए सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई है और संबंधित विभाग के अफसरों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। वहीं, उन्होंने बताया, हर हाल में लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिस एरिया (गाँव) में अधिक लोग वैक्सीन से वंचित हैं, उस गाँव में शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही अभियान चलाकर लोगों को वैक्सीन के प्रति प्रेरित करने एवं जाँच अभियान को गति देने, राज्य सरकार के माध्यम से विदेशों से आने वाले लोगों की उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर लोगों की आरटीपीसीआर जाँच सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।

– 200 से अधिक सत्र स्थलों पर लगाया जाएगा विशेष शिविर :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, जिलाधिकारी के निर्देशानुसार विशेष अभियान के दौरान 200 से अधिक सत्र स्थलों पर वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर के सफल संचालन के लिए मेडिकल टीम की तैनाती और पर्याप्त वैक्सीन वाइल की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई। मेडिकल टीम में एएनएम, डेटा ऑपरेटर, सुपरवाइजर समेत अन्य कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा सभी सेशन साइटों पर संबंधित क्षेत्र की ऑगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी भी मौजूद रहेंगी। जो लोगों को वैक्सीन लेने के लिए प्रेरित कर शिविर स्थल तक आने में जरूरी सहयोग करेंगी।

आयुष्मान कार्ड के पात्र लाभर्थियों से सम्पर्क कर कार्ड बनवाने को जागरूक करेंगे विकास मित्र : डीडीसी

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– जिला परिषद सभागार में प्रखण्ड विकास मित्र एवं यूटीआई के एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

– जिला भर में अभी कुल 6,18, 237 लाभर्थियों का आयुष्मान कार्ड बनवाना है शेष : सिविल सर्जन

मुंगेर, 3 दिसम्बर । आयुष्मान गोल्डन कार्ड के पात्र लाभर्थियों से सम्पर्क कर उन्हें कार्ड बनवाने के लिए जागरूक करेंगे विकास मित्र । उक्त बातें शुक्रवार को जिला परिषद सभागार में आयोजित प्रखण्ड विकास मित्र और यूटीआई के एक दिवसीय कार्यशाला का उदघाटन करते हुए मुंगेर के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) संजय कुमार ने कही। उन्होंने बताया कि हमारे विकास मित्र ग्रासरूट स्तर के सशक्त सदस्य हैं जिनसे पंचायत स्तर पर कोई भी परिवार अछूता नहीं है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैने इस योजना से विकास मित्रों को जोड़ा है। ये लोग पात्र लाभर्थियों को सीएससी और यूटीआई तक ले जाकर उनका आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाएंगे। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से अमीर आदमी अपने और अपने पूरे परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस करवाते ताकि जरूरत पड़ने पर विभिन्न अस्पतालों में इलाज के दौरान उन्हें और उनके परिवार को इलाज के दौरान आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और पैसे के कारण उनका इलाज प्रभावित न हों । ठीक उसी प्रकार भारत सरकार आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब लाभार्थियों को 5 लाख रुपये प्रति वर्ष प्रति परिवार को भारत के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज का आश्वासन देती है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि जिला में कुल 7,79,934 चिह्नित लाभार्थी हैं । जिनमें से अभी तक 1,61,697 लाभार्थियों का ही आयुष्मान गोल्डन कार्ड बन पाया है। शेष 6, 18,237 लाभार्थियों और 90, 128 परिवारों का आयुष्मान कार्ड बनाया जाना अभी शेष है। उम्मीद है कि बहुत ही जल्द हमलोग इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने बताया कि पूरे भारत में इस योजना के अंतर्गत 28,000 से अधिक सरकारी और निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। इसी कड़ी में मुंगेर जिला में भी कुल 9 सरकारी और 2 निजी अस्पताल को सूचीबद्ध किया गया है।

कार्यशाला का संचालन करते हुए आयुष्मान भारत मुंगेर की जिला कार्यक्रम समन्वयक ज्योति कुमारी ने बताया कि मुंगेर में कुल चिह्नित 1,60,478 परिवारों में से 70,350 परिवारों का आयुष्मान गोल्डन कार्ड बन गया जो लगभग 44 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि असरगंज प्रखण्ड में कुल 43746 पात्र लाभर्थियों में से 7955 को चिह्नित कर लिया गया है। इसी तरह बरियारपुर प्रखण्ड में कुल 73935 पात्र लाभार्थियों में से 19480 लाभार्थी को चिह्नित कर लिया गया है। धरहरा प्रखण्ड में कुल 87402 पात्र लाभार्थियों में से 15130 लाभार्थी को चिह्नित कर लिया गया है। जमालपुर प्रखण्ड में कुल 59323 पात्र लाभार्थियों में से 11058 लाभार्थी को चिह्नित कर लिया गया है। हवेली खड़गपुर प्रखण्ड में कुल 111964 पात्र लाभार्थियों में से 19314 लाभार्थी को चिह्नित कर लिया गया है। मुंगेर सदर प्रखंड में कुल 89661 पात्र लाभार्थियों में से 18750 लाभार्थी को चिह्नित कर लिया गया है। संग्रामपुर प्रखण्ड में कुल 60531 पात्र लाभार्थियों में से 14582 लाभार्थी को चिह्नित कर लिया गया है। तारापुर में कुल 53915 पात्र लाभार्थियों में से 17480 लाभार्थी को चिह्नित कर लिया गया है। इसी तरह टेटिया बम्बर प्रखण्ड में कुल 51619 पात्र लाभार्थियों में से 10439 लाभार्थी को चिह्नित कर लिया गया ।

इस अवसर पर आयुष्मान भारत योजना के प्रमंडल परियोजना पदाधिकारी इंद्रजीत गोस्वामी और जिला किर्यान्वयन इकाई मुंगेर के डिस्ट्रिक्ट आईटी मैनेजर मनोरंजन कुमार ने प्रतिभागियों के बीच आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड निर्गत कराने को लेकर विभिन्न तकनीकी पहलुओं की सूक्ष्मता के साथ चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने उनसे आग्रह किया कि हमें पात्र लाभार्थी के बीच अपनी पहुंच बढ़ानी होगी ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थी इस योजना से जुड़कर सरकार द्वारा दी जा रही सुविधा का लाभ उठा सकें।

कोरोना टीकाकरण को लेकर महाअभियान आज, दूसरी डोज पर फोकस

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-जिलेभर में बनाए गए लगभग 400 टीकाकरण केंद्र
-कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
बांका, 3 दिसंबर।
कोरोना टीकाकरण को लेकर शनिवार को एक बार फिर से महाअभियान चलाया जाएगा। इस बार दूसरी डोज पर फोकस किया जाएगा। जिले की अधिकतर आबादी कोरोना टीका की पहली डोज ले चुकी है। इसलिए इस बार महाअभियान के दौरान अधिक से अधिक लोगों को कोरोना टीका की दूसरी डोज देने की कोशिश की जाएगी। इसके साथ-साथ अभी तक टीका की पहली डोज नहीं लेने वालों को ढूंढ-ढूंढकर कोरोना का टीका दिया जाएगा। इसे लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। जिले भर में लगभग 400 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं, जहां पर अधिक से अधिक लोगों को कोरोना का टीका देने का लक्ष्य रखा गया है। सभी टीकाकरण केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति कर दी गई है। सभी को समय से थोड़ा पहले केंद्र पर पहुंचने के लिए कहा गया है, ताकि टीकाकरण अभियान में किसी तरह की देरी नहीं हो और लाभुकों को कोई परेशानी नहीं हो।
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने बताया कि महाअभियान को लेकर सारी तैयारी कर ली गई है। इस बार भी काफी संख्या में जिले के लोग कोरोना का टीका लें, इसे लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सभी केंद्रों पर पहली और दूसरी दोनों डोज दी जाएगी। इस बार दूसरी डोज पर फोकस किया गया है। जिनलोगों का समय पूरा हो गया है, वे लोग टीके की दूसरी डोज अवश्य लें। साथ ही जिनलोगों ने एक भी डोज नहीं लिया है, वे तत्काल अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर टीका लें।
एक जगह पर अधिक लोग तैयार हुए तो वहां पर टीम भेजी जाएगीः महाअभियान के दौरान अगर एक ही जगह पर अधिक लोग टीका लेने के लिए तैयार हुए तो वहां पर स्वास्थ्य टीम भेजकर लोगों का टीकाकरण किया जाएगा। इसलिए अगर एक जगह पर कहीं अधिक लोग टीका लेने के लिए तैयार हो गए हों तो इसकी सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग को दें। टीम आकर आपका टीकाकरण करेगी। आपको कहीं जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। पास में मोबाइल नंबर और आधार कार्ड रखें। मौके पर ही आपका रजिस्ट्रेशन कर टीकाकरण कर दिया जाएगा।
दूसरी डोज लेने वालों की आशा कार्यकर्ता कर रहीं पहचानः जिनलोगों ने कोरोना टीका की पहली डोज ले ली है और समय पूरा हो गया है उन्हें आशा कार्यकर्ता चिह्नित कर रही हैं। ऐसे लोगों को महाअभियान के दौरान दूसरी डोज दिलाई जाएगी। साथ ही ड्यू डेट से सात दिनों के अंदर दूसरी डोज लेने वालों के लिए पुरस्कार की भी व्यवस्था की गई है। लक्की ड्रॉ के तहत ऐसे लोगों को पुरस्कार दिया जाएगा।
शहरी क्षेत्र में बनाए गए 36 केंद्रः महाअभियान को लेकर बांका शहरी क्षेत्र में 36 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं। सभी केंद्रों के लिए डाटा ऑपरेटर और एएनएम की नियुक्ति कर दी गई है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि अभियान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया गया है। साथ ही स्थानीय लोगों से अधिक से अधिक संख्या में आकर कोरोना का टीका लेने की अपील की गई है। आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सहायिका टीका नहीं लेने वालों को घरों से केंद्र तक लाने का काम करेंगी।

सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल में एफपीएलएमआईएस का दिया गया प्रशिक्षण

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-परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री ऑनलाइन लेने के बताए गए तरीके
-आशा कार्यकर्ता ऑनलाइन सामग्री मंगवाकर क्षेत्र के लोगों में उसे बांटेंगी

भागलपुर, 3 दिसंबर।
सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल में क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं को फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक इनफॉरमेशन सिस्टम (एफपीएलएमआईएस) का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक आलोक कुमार ने दिया। प्रशिक्षण के दौरान सभी लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन कैसे प्राप्त करना है, इसकी जानकारी दी गई। इंडेंट करने से लेकर रिसीव करने के तरीके प्रशिक्षण के दौरान बताए गए। कंडोम, कॉपर टी, अंतरा आदि सामग्री को ऑनलाइन प्राप्त करने की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी गई। सामग्री प्राप्त कर क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार से लेकर वितरण करने तक के बारे में प्रशिक्षण के दौरान बताया गया। मौके पर बीसीएम चंदन कुमार, बीसीएम नलिन कुमार और बीएम शंभू कुमार मौजूद थे। प्रशिक्षण ले रहे लोगों को सभी बारीकी को समझ कर क्षेत्र में बेहतर तरीके से काम करने के लिए कहा।

परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार भी करेंगी आशाः प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के बाद आशा कार्यकर्ता अब परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन मंगवाकर उसे क्षेत्र में वितरण करने का काम करेंगी। साथ ही परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के इंडेंट से लेकर प्राप्त करने के तरीके और इसका क्षेत्र में किस तरह से प्रचार-प्रसार करना है, इसकी जानकारी वे अपने सहयोगी को भी देंगी। साथ ही सामग्री के वितरण के दौरान इसे लेकर लोगों को जागरूक करने का काम भी आशा कार्यकर्ता करेंगी। लोगों को समझाएंगी कि इसके इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
तीन तरीके से प्राप्त कर सकेंगे परिवार नियोजन की सामग्रीः प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि परिवार नियोजन सामग्री को ऑनलाइन तीन तरीके से मंगाया जा सकता है। पहला मोबाइल एप के जरिये, दूसरा मोबाइल से मैसेज कर और तीसरा कंप्यूटर के जरिये ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। आशा कार्यकर्ता इसे मोबाइल एप और मैसेज के जरिये मंगा सकती हैं, जबकि स्टोरकीपर मैसेज और कंप्यूटर से ऑनलाइन इंडेंट कर भी मंगवा सकते हैं। पहले क्षेत्र के लोगों की जरूरतों के मुताबिक इंडेंट करेंगे। सामग्री आ जाने के बाद फिर उसका क्षेत्र के लोगों के बीच वितरण करेंगे।
परिवार नियोजन पर किया जा रहा फोकसः जिले में परिवार नियोजन को लेकर लगातार फोकस किया जा रहा है। इसे लेकर परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के वितरण से लेकर समय-समय पर कैंप और मेला भी लगाया जाता है। जहां पर कि लोगों को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में बताया जाता है। साथ ही किस तरह से बच्चे की प्लानिंग करती है, इसकी जानकारी दी जाती है। दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल और पहला बच्चा 20 साल से पहले नहीं हो, इस बारे में बताया जाता है।

इन्फेंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग पर नई एएनएम, जीएनएम और सीएचओ को दी जा रही ट्रेनिंग

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– एएनएम स्कूल सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

– प्रतिभागियों के बीच शिशु स्वास्थ्य विषय पर क्विज कांटेस्ट आज

– विजेता टीम को पुरस्कार देकर किया जाएगा सम्मानित

मुंगेर-
शिशु स्वास्थ्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत इंफेंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है । प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला के विभिन्न अस्पातल, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से कुल 20 की संख्या में एएनएम, जीएनएम और सीएचओ शामिल हुए। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत नये बहाल स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष तौर पर बुलाया गया ताकि उन्हें शिशु स्वास्थ्य के विभिन्न तकनीकी पहलुओं के बारे में प्रशिक्षित किया जा सके। इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम समन्वयक विकास कुमार ने ऑडियो- विजुअल माध्यम से सभी लोगों को इंफेंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग के तमाम तकनीकी पहलूओं की विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

क्विज कांटेस्ट का आयोजन आज –
प्रशिक्षण में एएनएम, जीएनएम और सीएचओ को इंफेंट एंड यंग चाइल्ड ब्रेस्ट फीडिंग के बारे में विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। ट्रेनिंग में किसने कितना सीखा इसकी जांच के लिए शुक्रवार को क्विज कांटेस्ट होगा जिसके लिए सभी प्रतिभागियों को दो ग्रुप में बांटा गया है। एक प्रतिभागियों को सिर्फ एक ही बार प्रश्न का उत्तर देने की इजाजत है। अन्य प्रश्न के समय वो सिर्फ अपने ग्रुप को सहयोग कर सकते थे। इसके बाद विजेता ग्रुप के सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।

माताओं को छ्ह महीने तक सिर्फ और सिर्फ अपना स्तनपान कराने के लिए ही करें प्रेरित :
इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने स्वास्थ्य कर्मियों को शिशु को नियमित स्तनपान कराने के दौरान माता के द्वारा बरती जानी वाली सावधानी और इससे होने वाले फायदों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए बताया । उन्होंने बताया कि आप सभी क्षेत्र में स्तनपान कराने वाली माताओं को कम से कम छ्ह महीने तक सिर्फ और सिर्फ अपना स्तनपान कराने के लिए ही प्रेरित करें| इसके बाद नियमित स्तनपान के साथ ऊपरी आहार खिलाने की सलाह दें ताकि शिशु को सही पोषण मिल सके और वो कुपोषण का शिकार न होने पाए।

नियमित स्तनपान से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता –
इस अवसर पर प्रशिक्षक के तौर पर बरियारपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत करहरिया हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की सीएचओ विशाखा कुमारी ने सभी लोगों को ब्रेस्ट की एनाटॉमी के साथ-साथ बेनिफिट ऑफ ब्रेस्टफीडिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिशु को नियमित स्तनपान कराने से उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता जिससे वो कई बीमारियों से लड़ पाता है। इसके साथ ही उन्होंने सभी को वर्बल और नॉन वर्बल कम्युनिकेशन जिसके अंतर्गत पोस्चर, डिस्टेंस, आई कॉन्टेक्ट, बैरियर,टेकिंग टाइम टच, ओपन प्रश्न करना, यूज़ रेस्पॉन्स, रिफ्लेक्ट बैक सिहित कई तकनीकी पहलूओं की बारीकी से जानकारी दी।

सुमन कार्यक्रम के तहत मातृ-शिशु मृत्यु की सूचना देने पर दी जाती है प्रोत्साहन राशि

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– सुमन कार्यक्रम के तहत गर्भवती को दी जाती है बेहतर स्वास्थ्य सेवा
– मातृ मृत्यु-शिशु दर में आएगी कमी, सुदृढ़ होगी स्वास्थ्य सेवा

खगड़िया-

बेहतर स्वास्थ्य सेवा के अभाव में प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को क

– सुमन कार्यक्रम के तहत गर्भवती को दी जाती है बेहतर स्वास्थ्य सेवा
– मातृ मृत्यु-शिशु दर में आएगी कमी, सुदृढ़ होगी स्वास्थ्य सेवा

खगड़िया-

बेहतर स्वास्थ्य सेवा के अभाव में प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को कई प्रकार की परेशानियाँ का सामना करना पड़ जाता है। यहाँ तक कभी-कभी महिलाओं को जान भी गँवानी पड़ जाती है। किन्तु, अब महिलाओं को इन परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि, अब ऐसे महिलाओं को सुमन कार्यक्रम के तहत बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करायी जा रही है। जिससे ना सिर्फ महिला की परेशानियाँ दूर होगी, बल्कि मातृ मृत्यु दर में भी कमी आएगी और लोग संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देंगे। सुमन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ही है महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो और प्रसव के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

– महिलाओं को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा, मातृ-शिशु मृत्यु में आएगी कमी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। किन्तु, जागरूकता के अभाव में कई बार समुदाय के लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। अब गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सुमन कार्यक्रम शुरू किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिला को प्रसव के बाद 6 माह तक एवं बीमार नवजातों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना।

– मातृ-शिशु मृत्यु की सूचना देने पर मिलेगा एक हजार रुपये :
सुमन कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत मातृ मृत्यु दर की रिपोर्टिंग का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले मातृ मृत्यु की सूचना देने वाले व्यक्ति को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाएगा। जबकि, मृत्यु के 24 घंटे के अंदर स्थानीय पीएचसी में सूचना देने पर आशा कार्यकर्ता को दो सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा इस संबंध में किसी प्रकार की परेशानियाँ होने पर 104 टाॅल फ्री नंबर पर फोन कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
– प्रसव के बाद छः माह तक बीमार प्रसूति और शिशु को मिलेगी निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा :
सुमन कार्यक्रम के तहत प्रसव के बाद आवश्यकतानुसार बीमार प्रसूति और शिशु को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाती है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग लगातार ऐसे प्रसूति और शिशु की देखरेख करता है । साथ ही स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता महिला के घर जाकर उनका स्वास्थ्य का अवलोकन करती हैं और वर्तमान स्थिति की स्थानीय पीएचसी को सूचना देती हैं। इन सेवाओं का शत-प्रतिशत लाभ लोगों मिले इस बात का ख्याल रखा जाता है। कार्यक्रम के तहत रेफरल सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए किसी भी महत्वपूर्ण मामले की आपात स्थिति के एक घंटे के भीतर स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने की गुंजाइश के साथ रेफरल सेवाओं का आश्वासन दिया जाएगा। जिसमें लाभार्थी को घर से अस्पताल तक पहुंचने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा शामिल है। जटिलताओं के मामले एवं सिजेरियन प्रसव पर निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।

– इन मानकों का रखें ख्याल और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– कोविड प्रोटोकॉल का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

ई प्रकार की परेशानियाँ का सामना करना पड़ जाता है। यहाँ तक कभी-कभी महिलाओं को जान भी गँवानी पड़ जाती है। किन्तु, अब महिलाओं को इन परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि, अब ऐसे महिलाओं को सुमन कार्यक्रम के तहत बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करायी जा रही है। जिससे ना सिर्फ महिला की परेशानियाँ दूर होगी, बल्कि मातृ मृत्यु दर में भी कमी आएगी और लोग संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देंगे। सुमन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ही है महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो और प्रसव के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

– महिलाओं को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा, मातृ-शिशु मृत्यु में आएगी कमी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। किन्तु, जागरूकता के अभाव में कई बार समुदाय के लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। अब गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सुमन कार्यक्रम शुरू किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिला को प्रसव के बाद 6 माह तक एवं बीमार नवजातों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना।

– मातृ-शिशु मृत्यु की सूचना देने पर मिलेगा एक हजार रुपये :
सुमन कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत मातृ मृत्यु दर की रिपोर्टिंग का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले मातृ मृत्यु की सूचना देने वाले व्यक्ति को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाएगा। जबकि, मृत्यु के 24 घंटे के अंदर स्थानीय पीएचसी में सूचना देने पर आशा कार्यकर्ता को दो सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा इस संबंध में किसी प्रकार की परेशानियाँ होने पर 104 टाॅल फ्री नंबर पर फोन कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
– प्रसव के बाद छः माह तक बीमार प्रसूति और शिशु को मिलेगी निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा :
सुमन कार्यक्रम के तहत प्रसव के बाद आवश्यकतानुसार बीमार प्रसूति और शिशु को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाती है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग लगातार ऐसे प्रसूति और शिशु की देखरेख करता है । साथ ही स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता महिला के घर जाकर उनका स्वास्थ्य का अवलोकन करती हैं और वर्तमान स्थिति की स्थानीय पीएचसी को सूचना देती हैं। इन सेवाओं का शत-प्रतिशत लाभ लोगों मिले इस बात का ख्याल रखा जाता है। कार्यक्रम के तहत रेफरल सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए किसी भी महत्वपूर्ण मामले की आपात स्थिति के एक घंटे के भीतर स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने की गुंजाइश के साथ रेफरल सेवाओं का आश्वासन दिया जाएगा। जिसमें लाभार्थी को घर से अस्पताल तक पहुंचने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा शामिल है। जटिलताओं के मामले एवं सिजेरियन प्रसव पर निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।

– इन मानकों का रखें ख्याल और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– कोविड प्रोटोकॉल का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

जिले में ऑंगनबाड़ी केंद्र संख्या 70 पर बच्चों को सूप पिलाने की नई पहल शुरू

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– डीपीओ के नेतृत्व में ऑंगनबाड़ी सेविका द्वारा खुद से तैयार सूप का बच्चों के बीच किया गया वितरण
– केंद्र परिसर के ही पोषण वाटिका में लगी सब्जियों का सूप बनाकर वितरण
– सेहत और त्वचा के लिए फायदेमंद होता है सूप का सेवन
– समाज कल्याण मंत्री ने पोषाहार में नया चीज शामिल करने के लिए नई पहल शुरू करने की बनाई थी योजना

लखीसराय, 02 दिसंबर| ऑंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वाले बच्चों को उचित पोषण की सुविधा सुनिश्चित करने एवं पूरे प्रदेश में कुपोषण की समस्या को जड़ से मिटाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह संकल्पित है। जिसे सफल बनाने के लिए बीते 25 नवंबर को समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी ने प्रधान सचिव की मौजूदगी में पूरे प्रदेश की डीपीओ (आईसीडीएस) के साथ पटना में एक बैठक की थी। जिसमें ऑंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने वाले बच्चों को दी जाने वाली पोषाहार में कुछ नया चीज (जो अधिक पोषणयुक्त और बच्चों के लिए फायदेमंद हो) शामिल करने के लिए विस्तृत चर्चा की गई थी एवं इस पहल को शुरू करने की योजना बनाई गई थी। जिसे सार्थक रूप देने के लिए लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड स्थित ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 70 पर केंद्र की सेविका प्रतिमा कुमारी द्वारा डीपीओ आभा कुमारी के नेतृत्व में सब्जियों का पोषणयुक्त सूप (जूस) वितरण कर इस नई पहल की शुरुआत की गई | जो संभवतः जिला सहित पूरे प्रदेश में केंद्र संख्या 70 पर सबसे पहले शुरू की गई है। यही नहीं, सेविका ने केंद्र परिसर स्थित ही पोषण वाटिका में लगी सब्जियों का सूप खुद से तैयार कर केंद्र के बच्चों के बीच वितरित की है । साथ ही बच्चों के अभिभावकों को भी बच्चों के उचित पोषण की जानकारी देकर जागरूक किया । इससे ना सिर्फ बच्चों को उचित पोषण मिलना सुनिश्चित होगा बल्कि, कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।

– साग और सब्जी के संयुक्त मिश्रण से तैयार सूप बच्चों के बीच किया वितरित :
आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) आभा कुमारी ने बताया, केंद्र संख्या 70 की सेविका द्वारा शुरू की गई पहल ना सिर्फ सराहनीय है बल्कि, कुपोषण मुक्त समाज निर्माण के लिए बेहतर कदम भी है। उक्त सेविका द्वारा अपने केंद्र परिसर स्थित ही पोषण वाटिका में लगी सब्जियों (कद्दू) एवं विभिन्न प्रकार के साग के संयुक्त मिश्रण से सूप तैयार कर केंद्र में पढ़ने वाले बच्चों के बीच पोषाहार के रूप में वितरण किया गया। वहीं, उन्होंने बताया, अगर यह पहल सफल रही तो जिला सहित पूरे प्रदेश में इसे लागू करते हुए दैनिक पोषाहार में शामिल किया जा सकता है।
– सेहत और त्वचा के लिए फायदेमंद है सूप का सेवन, बच्चों को मिलेगी उचित पोषण :
डीपीओ आभा कुमारी ने बताया, सूप का सेवन सेहत और त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है और यह काफी टेस्टी भी होता है। जिसके कारण इसका लोग चाह के साथ सेवन भी करते हैं। वहीं, उन्होंने बताया, यह बच्चों के लिए भी काफी फायदेमंद होगा और उचित पोषण मिलेगा। सूप के सेवन से काफी मात्रा में शारीरिक ऊर्जा भी मिलती है।
– नई पहल को शुरू करने में डीपीओ का भी रहा महत्वपूर्ण योगदान :
सेविका प्रतिमा कुमारी ने बताया, यह पहल शुरू करने में डीपीओ का भी काफी सहयोग मिला। भले ही मैंने सूप तैयार कर बच्चों के बीच वितरित की। किन्तु, इसमें डीपीओ का भी काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस पहल को सार्थक रूप देने के लिए अन्य सेविकाओं को भी इस पहल की शुरुआत करनी चाहिए। ताकि बच्चों को उचित पोषण मिल सके और कुपोषणमुक्त समाज का निर्माण सुनिश्चित हो सके।

सन्हौला में यक्ष्मा को लेकर कैंप लगा दो संदिग्ध मरीज मिले

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भागलपुर, 2 दिसंबर

सन्हौला के नगदाहा गांव में गुरुवार स्क्रीनिंग कैंप आरती झा (जिला यक्ष्मा अधिकारी) की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस कैंप में 70 लोगों ने भाग लिया, जिसमें 2 यक्ष्मा संदिग्ध मरीज पाए गए। कैम्प में आये सभी लोगों को यक्ष्मा के लक्षण, बचाव और पोषण के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद महेशपुर के मुखिया से यक्ष्मा पर चर्चा करने के बाद पता चला कि वहां भी दो संदिग्ध मरीज है। इसके लिए दो कंटेनर भी दिया। दरअसल, जिला को 2025 से पहले टीबी से मुक्त कराना है। इसे लेकर जिला स्वास्थ्य समिति ने पूरी ताकत झोंक दी है। स्वास्थ्य विभाग को इस काम में कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) भी सहयोग कर रहा है। टीबी मरीजों की पहचान को लेकर जगह-जगह कैंप लगाने के साथ ही अब घर-घर जाकर भी टीबी मरीजों की पहचान की जा रही है। इसी सिलसिले में स्वास्थ्य विभाग की टीम नगदाहा गांव में स्क्रीनिंग कैंप लगाया। मौके पर सभी लोगों को सही पोषण का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। यहां पर भी सभी लोगों की जांच की गई। जांच में कोई भी बच्चा या फिर शिक्षक टीबी के मरीज नहीं निकले।
संतुलित आहार लेः सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने के लिए हमलोग प्रयासरत हैं। इसे लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को टीबी से बचने के लिए सलाह दी जा रही है। लोग उस पर अमल करें। उन्होंने कहा कि टीबी से बचाव के लिए सही पोषण भी जरूरी है। अगर सही पोषण नहीं मिलेगा तो लोग कुपोषण के शिकार हो जाएंगे और उस पर टीबी की चपेट में आने का खतरा रहता है। इसलिए लोगों को संतुलित आहार लेना चाहिए। आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और मिनरल्स की मात्रा जरूर होनी चाहिए।
ज्यादातर मामले घनी आबादी वाले इलाके मेः डॉ. शर्मा ने कहा कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता है और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

फाइलेरिया से मौत नहीं होती, लेकिन जीवनभर के लिए बना देता है दिव्यांग

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यह एक संक्रमित बीमारी है, इससे बचाव के लिए दवा खाना जरूरी
घर के आसपास गंदे पानी को जमा नहीं होने दें, मच्छरों से करें बचाव
बांका, 2 दिसंबर
आज दिव्यांग दिवस है। इस बार की थीम पूर्ण सहभागिता और समानता है। बहुत सारे लोग जन्मजात दिव्यांग होते हैं, लेकिन कुछ लोग जन्म के बाद भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। ऐसे लोगों में फाइलेरिया पीड़ित बड़ी संख्या में शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक फाइलेरिया दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को दिव्यांग बना रही है।
फाइलेरिया होने से लोग न सिर्फ आर्थिक और शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक तौर पर भी परेशान होते हैं। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितनी खतरनाक बीमारी है। ऐसे में लोगों को खुद को और अपने परिजनों को मच्छरों से बचाना होगा। डीएमओ डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि फाइलेरिया एक खतरनाक बीमारी है और इससे इंसान की मृत्यु नहीं होती है पर जीवन भर के लिए वह दिव्यांग जरूर हो जाता है। यह बीमारी संक्रमित होती है और यह गंदे पानी में बैठने वाले मच्छरों के काटने से होती है और फाइलेरिया के बचाव के लिए फाइलेरिया की दवा खाना जरूरी है।
नदजीकि स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर ले सकते हैं दवाः वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने बताया कि पिछले दिनों 20 सितंबर 20 नवंबर तक जिले में फाइलेरिया को लेकर अभियान चला था। इस दौरान दो से पांच वर्ष के बच्चों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की एक गोली, छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो और अल्बेंडाजोल की एक गोली और 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी की तीन और अल्बेंडाजोल की एक गोली खिलाई गई। अल्बेंडाजोल की गोली लोगों को चबाकर खिलाई गई। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कोई दवा नहीं खिलायी गई। साथ ही गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी दवा नहीं खिलाई गई। जो लोग उस दौरान दवा नहीं खा सके या फिर छूट गए, वह अपने नजदीकि स्वास्थ्य केंद्र जाकर दवा ले सकते हैं। दवा सेवन के बाद किसी तरह के सामान्य साइड इफ़ेक्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। अमूमन जिनके अंदर फाइलेरिया के परजीवी होते हैं, उनमें ही साइड इफ़ेक्ट देखने को मिलते हैं। साइड इफ़ेक्ट सामान्य होते हैं, जो प्राथमिक उपचार से ठीक भी हो जाते हैं।
क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है फाइलेरियाः जिला मलेरिया पदाधिकारी (डीएमओ) ने बताया कि कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। क्यूलेक्स मच्छर घरों के दूषित स्थलों, छतों और आसपास लगे हुए पानी में पाया जाता है। इससे बचाव के लिए लोग घरों के आसपास गंदगी और पानी नहीं जमने देना चाहिए। घर के आसपास साफ-सफाई रखनी चाहिए। बुखार आना, शरीर में लाल धब्बे या दाग होना, शरीर के किसी भी अंग में सूजन होना इसके लक्षण हैं। ज्यादातर इस बीमारी से ग्रसित लोगों के पांव या हाइड्रोसिल में सूजन हो जाती है। लोग इस बीमारी से सुरक्षित रह सकें, इसके लिए सरकार हर साल में एक बार एमडीए अभियान चलाती है। इससे लोगों को जरूरी दवा उपलब्ध होती है, जो इस बीमारी को रोकने में सहायक होती है।